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	<title>देवशयनी एकादशी &#8211; Live Halchal</title>
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	<title>देवशयनी एकादशी &#8211; Live Halchal</title>
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		<title>देवशयनी एकादशी के दिन शिवलिंग पर अर्पित करें ये चीजें</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Live Halchal Web_Wing]]></dc:creator>
		<pubDate>Sun, 06 Jul 2025 05:16:27 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[अध्यात्म]]></category>
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		<category><![CDATA[देवशयनी एकादशी]]></category>
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					<description><![CDATA[<img width="424" height="414" src="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2025/07/2-4-large.jpg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" fetchpriority="high" srcset="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2025/07/2-4.jpg 424w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2025/07/2-4-medium.jpg 300w" sizes="(max-width: 424px) 100vw, 424px" />देवशयनी एकादशी (Devshayani Ekadashi 2025) तिथि पर भगवान विष्णु योग निद्रा में चले जाते हैं और चातुर्मास शुरू हो जाता है। इस दिन भगवान विष्णु के साथ शिव जी की आराधना का भी महत्व है। मान्यता है कि इस अवसर पर शिवलिंग पर कुछ विशेष चीजें अर्पित करने से घर में मां लक्ष्मी का वास &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<img width="424" height="414" src="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2025/07/2-4-large.jpg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" srcset="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2025/07/2-4.jpg 424w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2025/07/2-4-medium.jpg 300w" sizes="(max-width: 424px) 100vw, 424px" />
<p>देवशयनी एकादशी (Devshayani Ekadashi 2025) तिथि पर भगवान विष्णु योग निद्रा में चले जाते हैं और चातुर्मास शुरू हो जाता है। इस दिन भगवान विष्णु के साथ शिव जी की आराधना का भी महत्व है। मान्यता है कि इस अवसर पर शिवलिंग पर कुछ विशेष चीजें अर्पित करने से घर में मां लक्ष्मी का वास होता है तो आइए उन खास चीजों के बारे में जानते हैं।</p>



<p>देवशयनी एकादशी का पर्व बहुत ही शुभ माना जाता है। यह वह दिन है जब भगवान विष्णु चार महीने के लिए योग निद्रा में चले जाते हैं और इसी के साथ चातुर्मास का आरंभ होता है। पंचांग के अनुसार, इस साल यह एकादशी आज यानी 06 जुलाई, 2025 दिन रविवार को मनाई जा रही है। इस दिन (Devshayani Ekadashi 2025) भगवान विष्णु की पूजा के साथ-साथ भगवान शिव की आराधना का भी विशेष महत्व है, क्योंकि भगवान विष्णु के विश्राम के शिव जी पूरी सृष्टि का संचालन करते हैं।</p>



<p>ऐसी मान्यता है कि इस पावन अवसर पर शिवलिंग पर कुछ विशेष चीजें अर्पित करने से घर में स्थायी रूप से मां लक्ष्मी का वास होता है और धन-धान्य की कभी कमी नहीं होती, तो आइए उन वस्तुओं के बारे में जानते हैं।</p>



<p><strong>भगवान शिव को अर्पित करें ये चीजें (Offer These Things To Lord Shiva)</strong></p>



<p>दूध &#8211; सबसे पहले शिवलिंग पर शुद्ध जल और कच्चा दूध अर्पित करें। यह भगवान शिव को बेहद प्रिय है और इससे मन शांत होता है। साथ ही नकारात्मक ऊर्जा दूर होती है।<br>बिल्व पत्र &#8211; बिल्व पत्र भगवान शिव को बहुत प्रिय है। कहते हैं कि बिल्व पत्र अर्पित करने से शिवजी प्रसन्न होते हैं और धन संबंधी बाधाएं दूर होती हैं।<br>धतूरा और आंकड़े के फूल &#8211; ये दोनों चीजें भगवान शिव को बहुत पसंद हैं। इन्हें अर्पित करने से घर में सुख-समृद्धि आती है और आर्थिक स्थिति मजबूत होती है।<br>शमी पत्र &#8211; शमी पत्र भगवान शिव और शनिदेव दोनों को बहुत प्रिय है। इसे शिवलिंग पर चढ़ाने से दुर्भाग्य दूर होता है और धन लाभ के योग बनते हैं।<br>चावल &#8211; अखंडित चावल शिवलिंग पर अर्पित करना बहुत शुभ माना जाता है। यह अन्न और धन की वृद्धि का प्रतीक है। इसे अर्पित करने से शिव जी के साथ मां लक्ष्मी की कृपा मिलती है।<br>कपूर &#8211; पूजा के अंत में कपूर से आरती करें। कपूर जलाने से सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है और घर में सुख-शांति बनी रहती है।</p>
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		<title>देवशयनी एकादशी पर ऐसे करें देवी लक्ष्मी की पूजा</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Live Halchal Web_Wing]]></dc:creator>
		<pubDate>Sun, 29 Jun 2025 04:33:26 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[अध्यात्म]]></category>
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		<category><![CDATA[देवशयनी एकादशी]]></category>
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					<description><![CDATA[<img width="618" height="327" src="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2025/06/Capture-506-large.jpg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" srcset="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2025/06/Capture-506.jpg 784w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2025/06/Capture-506-medium.jpg 300w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2025/06/Capture-506-768x407.jpg 768w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2025/06/Capture-506-310x165.jpg 310w" sizes="(max-width: 618px) 100vw, 618px" />देवशयनी एकादशी (Devshayani Ekadashi 2025) का शास्त्रों में विशेष महत्व है जो भगवान विष्णु को समर्पित है। इस दिन श्री हरि क्षीरसागर में योग निद्रा में चले जाते हैं जिसे चातुर्मास कहते हैं। इस साल यह व्रत 6 जुलाई को रखा जाएगा। कहा जाता है कि इस दिन उपवास रखने से मनोकामनाएं पूरी होती हैं &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<img width="618" height="327" src="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2025/06/Capture-506-large.jpg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" loading="lazy" srcset="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2025/06/Capture-506.jpg 784w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2025/06/Capture-506-medium.jpg 300w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2025/06/Capture-506-768x407.jpg 768w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2025/06/Capture-506-310x165.jpg 310w" sizes="auto, (max-width: 618px) 100vw, 618px" />
<p><a href="https://hi.wikipedia.org/wiki/%E0%A4%A6%E0%A5%87%E0%A4%B5%E0%A4%B6%E0%A4%AF%E0%A4%A8%E0%A5%80_%E0%A4%8F%E0%A4%95%E0%A4%BE%E0%A4%A6%E0%A4%B6%E0%A5%80">देवशयनी एकादशी</a> (Devshayani Ekadashi 2025) का शास्त्रों में विशेष महत्व है जो भगवान विष्णु को समर्पित है। इस दिन श्री हरि क्षीरसागर में योग निद्रा में चले जाते हैं जिसे चातुर्मास कहते हैं। इस साल यह व्रत 6 जुलाई को रखा जाएगा। कहा जाता है कि इस दिन उपवास रखने से मनोकामनाएं पूरी होती हैं और जीवन में खुशहाली आती है।</p>



<p>शास्त्रों में देवशयनी एकादशी का विशेष महत्व है। यह तिथि भगवान विष्णु को समर्पित है। वहीं, यह वही पावन दिन है जब श्री हरि क्षीरसागर में योग निद्रा में चले जाते हैं और इस अवधि को चातुर्मास के नाम से जाना जाता है। इस साल देवशयनी एकादशी (Devshayani Ekadashi 2025) का व्रत 06 जुलाई को रखा जाएगा।</p>



<p>कहते हैं कि इस दिन उपवास रखने से सभी मनोकामनाओं की पूर्ति होती है। साथ ही जीवन में खुशहाली आती है। वहीं, इस मौके पर &#8221;श्री लक्ष्मी का पाठ&#8221; परम कल्याणकारी माना गया है, आइए पढ़ते हैं।</p>



<p><strong>॥लक्ष्मी चालीसा॥</strong></p>



<p><strong>॥ दोहा ॥</strong><br>मातु लक्ष्मी करि कृपा,करो हृदय में वास।<br>मनोकामना सिद्ध करि,परुवहु मेरी आस॥</p>



<p><strong>॥ सोरठा ॥</strong><br>यही मोर अरदास,हाथ जोड़ विनती करुं।<br>सब विधि करौ सुवास,जय जननि जगदम्बिका।</p>



<p><strong>॥ चौपाई॥</strong><br>सिन्धु सुता मैं सुमिरौ तोही। ज्ञान, बुद्धि, विद्या दो मोही॥<br>तुम समान नहिं कोई उपकारी। सब विधि पुरवहु आस हमारी॥<br>जय जय जगत जननि जगदम्बा। सबकी तुम ही हो अवलम्बा॥<br>तुम ही हो सब घट घट वासी। विनती यही हमारी खासी॥<br>जगजननी जय सिन्धु कुमारी। दीनन की तुम हो हितकारी॥<br>विनवौं नित्य तुमहिं महारानी। कृपा करौ जग जननि भवानी॥<br>केहि विधि स्तुति करौं तिहारी। सुधि लीजै अपराध बिसारी॥<br>कृपा दृष्टि चितववो मम ओरी। जगजननी विनती सुन मोरी॥<br>ज्ञान बुद्धि जय सुख की दाता। संकट हरो हमारी माता॥<br>क्षीरसिन्धु जब विष्णु मथायो। चौदह रत्न सिन्धु में पायो॥<br>चौदह रत्न में तुम सुखरासी। सेवा कियो प्रभु बनि दासी॥<br>जब जब जन्म जहां प्रभु लीन्हा। रुप बदल तहं सेवा कीन्हा॥<br>स्वयं विष्णु जब नर तनु धारा। लीन्हेउ अवधपुरी अवतारा॥<br>तब तुम प्रगट जनकपुर माहीं। सेवा कियो हृदय पुलकाहीं॥<br>अपनाया तोहि अन्तर्यामी। विश्व विदित त्रिभुवन की स्वामी॥<br>तुम सम प्रबल शक्ति नहीं आनी। कहं लौ महिमा कहौं बखानी॥<br>मन क्रम वचन करै सेवकाई। मन इच्छित वाञ्छित फल पाई॥<br>तजि छल कपट और चतुराई। पूजहिं विविध भाँति मनलाई॥<br>और हाल मैं कहौं बुझाई। जो यह पाठ करै मन लाई॥<br>ताको कोई कष्ट नोई। मन इच्छित पावै फल सोई॥<br>त्राहि त्राहि जय दुःख निवारिणि। त्रिविध ताप भव बन्धन हारिणी॥<br>जो चालीसा पढ़ै पढ़ावै। ध्यान लगाकर सुनै सुनावै॥<br>ताकौ कोई न रोग सतावै। पुत्र आदि धन सम्पत्ति पावै॥<br>पुत्रहीन अरु सम्पति हीना। अन्ध बधिर कोढ़ी अति दीना॥<br>विप्र बोलाय कै पाठ करावै। शंका दिल में कभी न लावै॥<br>पाठ करावै दिन चालीसा। ता पर कृपा करैं गौरीसा॥<br>सुख सम्पत्ति बहुत सी पावै। कमी नहीं काहू की आवै॥<br>बारह मास करै जो पूजा। तेहि सम धन्य और नहिं दूजा॥<br>प्रतिदिन पाठ करै मन माही। उन सम कोइ जग में कहुं नाहीं॥<br>बहुविधि क्या मैं करौं बड़ाई। लेय परीक्षा ध्यान लगाई॥<br>करि विश्वास करै व्रत नेमा। होय सिद्ध उपजै उर प्रेमा॥<br>जय जय जय लक्ष्मी भवानी। सब में व्यापित हो गुण खानी॥<br>तुम्हरो तेज प्रबल जग माहीं। तुम सम कोउ दयालु कहुं नाहिं॥<br>मोहि अनाथ की सुधि अब लीजै। संकट काटि भक्ति मोहि दीजै॥<br>भूल चूक करि क्षमा हमारी। दर्शन दजै दशा निहारी॥<br>बिन दर्शन व्याकुल अधिकारी।तुमहि अछत दुःख सहते भारी॥<br>नहिं मोहिं ज्ञान बुद्धि है तन में। सब जानत हो अपने मन में॥<br>रुप चतुर्भुज करके धारण। कष्ट मोर अब करहु निवारण॥<br>केहि प्रकार मैं करौं बड़ाई। ज्ञान बुद्धि मोहि नहिं अधिकाई॥</p>



<p><strong>॥ दोहा ॥</strong><br>त्राहि त्राहि दुःख हारिणी,हरो वेगि सब त्रास।<br>जयति जयति जय लक्ष्मी,करो शत्रु को नाश॥<br>रामदास धरि ध्यान नित,विनय करत कर जोर।<br>मातु लक्ष्मी दास पर,करहु दया की कोर॥</p>
]]></content:encoded>
					
		
		
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		<title>देवशयनी एकादशी पर करें इन मंत्रों का जप</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Live Halchal Web_Wing]]></dc:creator>
		<pubDate>Sat, 28 Jun 2025 09:40:28 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[अध्यात्म]]></category>
		<category><![CDATA[धर्म]]></category>
		<category><![CDATA[देवशयनी एकादशी]]></category>
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					<description><![CDATA[<img width="590" height="370" src="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2025/06/Capture-504-large.jpg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" loading="lazy" srcset="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2025/06/Capture-504.jpg 590w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2025/06/Capture-504-medium.jpg 300w" sizes="auto, (max-width: 590px) 100vw, 590px" />देवशयनी एकादशी (Devshayani Ekadashi 2025) हिंदू धर्म में एक महत्वपूर्ण तिथि मानी गई है जिस दिन भगवान विष्णु योग निद्रा में चले जाते हैं। इस साल यह व्रत 6 जुलाई को रखा जाएगा। इस दिन सच्चे मन से पूजा करने और मां लक्ष्मी के 108 नामों का जाप करने से भक्तों की सभी मनोकामनाएं पूरी &#8230;]]></description>
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<p>देवशयनी एकादशी (Devshayani Ekadashi 2025) हिंदू धर्म में एक महत्वपूर्ण तिथि मानी गई है जिस दिन भगवान विष्णु योग निद्रा में चले जाते हैं। इस साल यह व्रत 6 जुलाई को रखा जाएगा। इस दिन सच्चे मन से पूजा करने और मां लक्ष्मी के 108 नामों का जाप करने से भक्तों की सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं और जीवन में सुख-समृद्धि आती है।</p>



<p>हिंदू धर्म में देवशयनी एकादशी को बहुत शुभ माना जाता है। इसी तिथि पर भगवान विष्णु क्षीरसागर में योग निद्रा में चले जाते हैं, जिसे चातुर्मास के नाम से जाना जाता है। इस साल देवशयनी एकादशी (Devshayani Ekadashi 2025) का व्रत 06 जुलाई को रखा जाएगा। माना जाता है कि इस मौके पर सच्चे भाव से पूजा-पाठ करने से सभी इच्छाएं पूरी होती हैं। साथ ही जीवन में खुशहाली आती है। वहीं, इस दिन मां लक्ष्मी के 108 नामों का जप परम कल्याणकारी माना गया है, जो इस प्रकार है।</p>



<p><strong>।।मां लक्ष्मी के 108 नाम।।</strong><br>ऊँ प्रकृत्यै नम:<br>ऊँ विकृत्यै नम:<br>ऊँ विद्यायै नम:<br>ऊँ सर्वभूत-हितप्रदायै नम:<br>ऊँ श्रद्धायै नम:<br>ऊँ विभूत्यै नम:<br>ऊँ वसुन्धरायै नमः<br>ऊँ उदारांगायै नमः<br>ऊँ हरिण्यै नमः<br>ऊँ हेममालिन्यै नमः<br>ऊँ धनधान्य-कर्ये नमः<br>ऊँ सिद्धयै नमः<br>ऊँ स्त्रैणसौम्यायै नमः<br>ऊँ शुभप्रदायै नमः<br>ऊँ नृपवेश्मगतानन्दायै नमः<br>ऊँ सुरभ्यै नम:<br>ऊँ परमात्मिकायै नम:<br>ऊँ वाचे नम:<br>ऊँ पद्मालयायै नम:<br>ऊँ पद्मायै नमः<br>ऊँ शुचय़ै नमः<br>ऊँ स्वाहायै नमः<br>ऊँ स्वधायै नमः<br>ऊँ सुधायै नमः<br>ऊँ धन्यायै नमः<br>ऊँ हिरण्मयै नमः<br>ऊँ लक्ष्म्यै नमः<br>ऊँ नित्यपुष्टायै नमः<br>ऊँ विभावर्यै नमः<br>ऊँ अदित्यै नमः<br>ऊँ दित्यै नमः<br>ऊँ दीप्तायै नमः<br>ऊँ वसुधायै नमः<br>ऊँ वसुधारिण्यै नमः<br>ऊँ कमलायै नमः<br>ऊँ कान्तायै नमः<br>ऊँ कामाक्ष्यै नमः<br>ऊँ क्रोधसंभवायै नमः<br>ऊँ अनुग्रहप्रदायै नमः<br>ऊँ बुद्धयै नमः<br>ऊँ अनघायै नमः<br>ऊँ हरिवल्लभायै नमः<br>ऊँ अशोकायै नमः<br>ऊँ अमृतायै नमः<br>ऊँ दीप्तायै नमः<br>ऊँ लोकशोकविनाशिन्यै नमः<br>ऊँ धर्म-निलयायै नमः<br>ऊँ करुणायै नमः<br>ऊँ लोकमात्रे नमः<br>ऊँ पद्मप्रियायै नमः<br>ऊँ पद्महस्तायै नमः<br>ऊँ पद्माक्ष्यै नमः<br>ऊँ पद्मसुन्दर्यै नमः<br>ऊँ पद्मोद्भवायै नमः<br>ऊँ भास्कर्यै नमः<br>ऊँ बिल्वनिलयायै नमः<br>ऊँ वरारोहायै नमः<br>ऊँ यशस्विन्यै नमः<br>ऊँ वरलक्ष्म्यै नमः<br>ऊँ वसुप्रदायै नमः<br>ऊँ शुभायै नमः<br>ऊँ हिरण्यप्राकारायै नमः<br>ऊँ समुद्रतनयायै नमः<br>ऊँ पद्ममुख्यै नमः<br>ऊँ पद्मनाभप्रियायै नमः<br>ऊँ रमायै नमः<br>ऊँ पद्ममालाधरायै नमः<br>ऊँ देव्यै नमः<br>ऊँ पद्मिन्यै नमः<br>ऊँ पद्मगन्धिन्यै नमः<br>ऊँ पुण्यगन्धायै नमः<br>ऊँ सुप्रसन्नायै नमः<br>ऊँ प्रसादाभिमुख्यै नमः<br>ऊँ प्रभायै नमः<br>ऊँ चन्द्रवदनायै नमः<br>ऊँ चन्द्रायै नमः<br>ऊँ चन्द्रसहोदर्यै नमः<br>ऊँ चतुर्भुजायै नमः<br>ऊँ विष्णुपत्न्यै नमः<br>ऊँ प्रसन्नाक्ष्यै नमः<br>ऊँ नारायणसमाश्रितायै नमः<br>ऊँ दारिद्र्यध्वंसिन्यै नमः<br>ऊँ देव्यै नमः<br>ऊँ सर्वोपद्रव-वारिण्यै नमः<br>ऊँ नवदुर्गायै नमः<br>ऊँ महाकाल्यै नमः<br>ऊँ ब्रह्माविष्णु-शिवात्मिकायै नमः<br>ऊँ त्रिकालज्ञान-संपन्नायै नमः<br>ऊँ भुवनेश्वर्यै नमः<br>ऊँ चन्द्ररूपायै नमः<br>ऊँ इन्दिरायै नमः<br>ऊँ इन्दुशीतलायै नमः<br>ऊँ अह्लादजनन्यै नमः<br>ऊँ पुष्टयै नमः<br>ऊँ शिवायै नमः<br>ऊँ शिवकर्यै नमः<br>ऊँ सत्यै नमः<br>ऊँ विमलायै नमः<br>ऊँ विश्वजनन्यै नमः<br>ऊँ तुष्टयै नमः<br>ऊँ दारिद्र्यनाशिन्यै नमः<br>ऊँ प्रीतिपुष्करिण्यै नमः<br>ऊँ शान्तायै नमः<br>ऊँ शुक्लमाल्यांबरायै नमः<br>ऊँ श्रियै नमः<br>ऊँ जयायै नमः<br>ऊँ मंगलादेव्यै नमः<br>ऊँ विष्णुवक्षस्थलस्थितायै नमः।।</p>
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		<title>देवशयनी एकादशी पर जरूर करें इस चालीसा का पाठ</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Live Halchal Web_Wing]]></dc:creator>
		<pubDate>Sat, 13 Jul 2024 08:41:39 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[अध्यात्म]]></category>
		<category><![CDATA[धर्म]]></category>
		<category><![CDATA[चालीसा का पाठ]]></category>
		<category><![CDATA[देवशयनी एकादशी]]></category>
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					<description><![CDATA[<img width="618" height="379" src="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2024/07/Capture-596.png" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" loading="lazy" srcset="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2024/07/Capture-596.png 628w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2024/07/Capture-596-300x184.png 300w" sizes="auto, (max-width: 618px) 100vw, 618px" />आषाढ़ माह के शुक्ल पक्ष में देवशयनी एकादशी व्रत किया जाता है। पंचांग के अनुसार इस वर्ष देवशयनी एकादशी 17 जुलाई को है। धार्मिक मत है कि इस एकादशी से श्री हरि क्षीर सागर में विश्राम करने चले जाते हैं और कार्तिक माह में पड़ने वाली देवउठनी एकादशी पर जागृत होते हैं। इस दौरान कोई &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<img width="618" height="379" src="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2024/07/Capture-596.png" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" loading="lazy" srcset="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2024/07/Capture-596.png 628w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2024/07/Capture-596-300x184.png 300w" sizes="auto, (max-width: 618px) 100vw, 618px" />
<p>आषाढ़ माह के शुक्ल पक्ष में देवशयनी एकादशी व्रत किया जाता है। पंचांग के अनुसार इस वर्ष देवशयनी एकादशी 17 जुलाई को है। धार्मिक मत है कि इस एकादशी से श्री हरि क्षीर सागर में विश्राम करने चले जाते हैं और कार्तिक माह में पड़ने वाली देवउठनी एकादशी पर जागृत होते हैं। इस दौरान कोई भी मांगलिक कार्य नहीं किए जाते हैं।</p>



<p>हर महीने के कृष्ण और शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि पर भगवान विष्णु और मां लक्ष्मी की पूजा-अर्चना की जाती है। साथ ही सभी पापों से मुक्ति पाने के लिए व्रत भी किया जाता है। आषाढ़ माह में पड़ने वाली देवशयनी एकादशी (Devshayani Ekadashi 2024) से शादी-लगन और मांगलिक कार्य करना वर्जित हैं। धार्मिक मत है कि एकादशी पूजा के दौरान सच्चे मन से विष्णु चालीसा का पाठ करने से जातक की सभी मुरादें पूरी होती हैं और जीवन में खुशियों का आगमन होता है। साथ ही समाज में ऊंचा मान-सम्मान प्राप्त होता है। आइए पढ़ते हैं पढ़ते हैं विष्णु चालीसा।</p>



<p><strong>।।विष्णु चालीसा का पाठ।।</strong></p>



<p><strong>&#8221;दोहा&#8221;</strong></p>



<p>विष्णु सुनिए विनय सेवक की चितलाय ।</p>



<p>कीरत कुछ वर्णन करूं दीजै ज्ञान बताय ॥</p>



<p>नमो विष्णु भगवान खरारी, कष्ट नशावन अखिल बिहारी ।</p>



<p>प्रबल जगत में शक्ति तुम्हारी, त्रिभुवन फैल रही उजियारी ॥</p>



<p>सुन्दर रूप मनोहर सूरत, सरल स्वभाव मोहनी मूरत ।</p>



<p>तन पर पीताम्बर अति सोहत, बैजन्ती माला मन मोहत ॥</p>



<p>शंख चक्र कर गदा विराजे, देखत दैत्य असुर दल भाजे ।</p>



<p>सत्य धर्म मद लोभ न गाजे, काम क्रोध मद लोभ न छाजे ॥</p>



<p>सन्तभक्त सज्जन मनरंजन, दनुज असुर दुष्टन दल गंजन ।</p>



<p>सुख उपजाय कष्ट सब भंजन, दोष मिटाय करत जन सज्जन ॥</p>



<p>पाप काट भव सिन्धु उतारण, कष्ट नाशकर भक्त उबारण ।</p>



<p>करत अनेक रूप प्रभु धारण, केवल आप भक्ति के कारण ॥</p>



<p>धरणि धेनु बन तुमहिं पुकारा, तब तुम रूप राम का धारा ।</p>



<p>भार उतार असुर दल मारा, रावण आदिक को संहारा ॥</p>



<p>आप वाराह रूप बनाया, हिरण्याक्ष को मार गिराया ।</p>



<p>धर मत्स्य तन सिन्धु बनाया, चौदह रतनन को निकलाया ॥</p>



<p>अमिलख असुरन द्वन्द मचाया, रूप मोहनी आप दिखाया ।</p>



<p>देवन को अमृत पान कराया, असुरन को छवि से बहलाया ॥</p>



<p>कूर्म रूप धर सिन्धु मझाया, मन्द्राचल गिरि तुरत उठाया ।</p>



<p>शंकर का तुम फन्द छुड़ाया, भस्मासुर को रूप दिखाया ॥</p>



<p>वेदन को जब असुर डुबाया, कर प्रबन्ध उन्हें ढुढवाया ।</p>



<p>मोहित बनकर खलहि नचाया, उसही कर से भस्म कराया ॥</p>



<p>असुर जलन्धर अति बलदाई, शंकर से उन कीन्ह लड़ाई ।</p>



<p>हार पार शिव सकल बनाई, कीन सती से छल खल जाई ॥</p>



<p>सुमिरन कीन तुम्हें शिवरानी, बतलाई सब विपत कहानी ।</p>



<p>तब तुम बने मुनीश्वर ज्ञानी, वृन्दा की सब सुरति भुलानी ॥</p>



<p>देखत तीन दनुज शैतानी, वृन्दा आय तुम्हें लपटानी ।</p>



<p>हो स्पर्श धर्म क्षति मानी, हना असुर उर शिव शैतानी ॥</p>



<p>तुमने ध्रुव प्रहलाद उबारे, हिरणाकुश आदिक खल मारे ।</p>



<p>गणिका और अजामिल तारे, बहुत भक्त भव सिन्धु उतारे ॥</p>



<p>हरहु सकल संताप हमारे, कृपा करहु हरि सिरजन हारे ।</p>



<p>देखहुं मैं निज दरश तुम्हारे, दीन बन्धु भक्तन हितकारे ॥</p>



<p>चाहता आपका सेवक दर्शन, करहु दया अपनी मधुसूदन ।</p>



<p>जानूं नहीं योग्य जब पूजन, होय यज्ञ स्तुति अनुमोदन ॥</p>



<p>शीलदया सन्तोष सुलक्षण, विदित नहीं व्रतबोध विलक्षण ।</p>



<p>करहुं आपका किस विधि पूजन, कुमति विलोक होत दुख भीषण ॥</p>



<p>करहुं प्रणाम कौन विधिसुमिरण, कौन भांति मैं करहु समर्पण ।</p>



<p>सुर मुनि करत सदा सेवकाई, हर्षित रहत परम गति पाई ॥</p>



<p>दीन दुखिन पर सदा सहाई, निज जन जान लेव अपनाई ।</p>



<p>पाप दोष संताप नशाओ, भव बन्धन से मुक्त कराओ ॥</p>



<p>सुत सम्पति दे सुख उपजाओ, निज चरनन का दास बनाओ ।</p>



<p>निगम सदा ये विनय सुनावै, पढ़ै सुनै सो जन सुख पावै ॥</p>



<p><strong>॥ इति श्री विष्णु चालीसा ॥</strong></p>
]]></content:encoded>
					
		
		
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		<title>देवशयनी एकादशी के दिन इस विधि से करें श्री हरि का अभिषेक</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Live Halchal Web_Wing]]></dc:creator>
		<pubDate>Fri, 12 Jul 2024 05:04:10 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[अध्यात्म]]></category>
		<category><![CDATA[धर्म]]></category>
		<category><![CDATA[देवशयनी एकादशी]]></category>
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					<description><![CDATA[<img width="618" height="290" src="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2024/07/जिहुई.jpg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" loading="lazy" srcset="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2024/07/जिहुई.jpg 688w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2024/07/जिहुई-300x141.jpg 300w" sizes="auto, (max-width: 618px) 100vw, 618px" />सनातन धर्म के सबसे पवित्र व्रतों में से एक देवशयनी एकादशी का व्रत माना गया है। यह एकादशी अत्यधिक महत्वपूर्ण होती है। इस तिथि पर लोग श्री हरि विष्णु और मां लक्ष्मी की पूजा करते हैं। ऐसी मान्यता है कि जो भक्त इस कठिन व्रत का पालन करते हैं, उन्हें श्री हरि का पूर्ण आशीर्वाद &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<img width="618" height="290" src="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2024/07/जिहुई.jpg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" loading="lazy" srcset="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2024/07/जिहुई.jpg 688w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2024/07/जिहुई-300x141.jpg 300w" sizes="auto, (max-width: 618px) 100vw, 618px" />
<p>सनातन धर्म के सबसे पवित्र व्रतों में से एक देवशयनी एकादशी का व्रत माना गया है। यह एकादशी अत्यधिक महत्वपूर्ण होती है। इस तिथि पर लोग श्री हरि विष्णु और मां लक्ष्मी की पूजा करते हैं। ऐसी मान्यता है कि जो भक्त इस कठिन व्रत का पालन करते हैं, उन्हें श्री हरि का पूर्ण आशीर्वाद प्राप्त होता है। इसके साथ ही उनके जीवन में खुशहाली आती है।</p>



<p>हिंदू पंचांग के अनुसार, इस बार देवशयनी एकादशी का व्रत 17 जुलाई, 2024 दिन बुधवार को रखा जाएगा, तो चलिए इस पावन अवसर पर भगवान विष्णु का अभिषेक कैसे करना है, उसकी विधि जानते हैं &#8211;</p>



<p><strong>भगवान विष्णु का अभिषेक ऐसे करें<br></strong>सबसे पहले प्रात: उठकर पवित्र स्नान करें।<br>इसके बाद अपने घर व मंदिर को अच्छी तरह साफ करें।<br>एक पीतल के थाल पर भगवान विष्णु की प्रतिमा स्थापित करें।<br>फिर शंखनाद के साथ पूजा शुरू करें।<br>पंचामृत से अभिषेक करें।<br>फिर शुद्ध व गंगाजल से अभिषेक करें।<br>बेल पत्र, पुष्प, और नैवेद्य आदि चीजें अर्पित करें।<br>इसके बाद धूप और दीप से भाव के साथ आरती करें।<br>श्री हरि का ध्यान करें और उनके वैदिक मंत्रों का जाप करें।<br>पूजा में हुई गलतियों के लिए क्षमायाचना करें।<br>तामसिक चीजों से दूर रहें।<br>व्रती अगले दिन अपने व्रत का पारण करें।</p>



<p><strong>भगवान विष्णु स्तुति<br></strong>शान्ताकारं भुजंगशयनं पद्मनाभं सुरेशं</p>



<p>विश्वाधारं गगन सदृशं मेघवर्ण शुभांगम्।</p>



<p>लक्ष्मीकांत कमलनयनं योगिभिर्ध्यानगम्यं</p>



<p>वन्दे विष्णु भवभयहरं सर्व लौकेक नाथम्।।</p>



<p>यं ब्रह्मा वरुणैन्द्रु रुद्रमरुत: स्तुन्वानि दिव्यै स्तवैवेदे:।</p>



<p>सांग पदक्रमोपनिषदै गार्यन्ति यं सामगा:।</p>



<p>ध्यानावस्थित तद्गतेन मनसा पश्यति यं योगिनो</p>



<p>यस्यातं न विदु: सुरासुरगणा दैवाय तस्मै नम:।।</p>
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