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	<title>देवर्षि नारद &#8211; Live Halchal</title>
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	<title>देवर्षि नारद &#8211; Live Halchal</title>
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		<title>कैसे हुआ देवर्षि नारद का जन्म? यहां पढ़ें ब्रह्मा के मानस पुत्र कहलाने की कथा</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Live Halchal Web_Wing]]></dc:creator>
		<pubDate>Mon, 12 Jan 2026 08:29:44 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[अध्यात्म]]></category>
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		<category><![CDATA[देवर्षि नारद]]></category>
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					<description><![CDATA[वैदिक पंचांग के अनुसार, ज्येष्ठ माह के कृष्ण पक्ष की प्रतिपदा तिथि पर देवर्षि नारद जी का जन्म हुआ था। इसलिए इस दिन नारद जयंती मनाई जाती है। क्या आप जानते हैं कि देवर्षि नारद (Devarshi Narada Birth Story) के जन्म का रहस्य जानते हैं? अगर नहीं पता, तो चलिए आपको बताते हैं देवर्षि नारद &#8230;]]></description>
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<p>वैदिक पंचांग के अनुसार, ज्येष्ठ माह के कृष्ण पक्ष की प्रतिपदा तिथि पर देवर्षि नारद जी का जन्म हुआ था। इसलिए इस दिन नारद जयंती मनाई जाती है। क्या आप जानते हैं कि देवर्षि नारद (Devarshi Narada Birth Story) के जन्म का रहस्य जानते हैं? अगर नहीं पता, तो चलिए आपको बताते हैं देवर्षि नारद के जन्म से जुड़ी कथा के बारे में।</p>



<p>धार्मिक मान्यता के अनुसार, नारद जी देवी-देवताओं और राजाओं को सूचनाओं का आदान प्रदान करते थे। इसी वजह से उन्हें ब्रह्मांड का सबसे पहला पत्रकार माना जाता है। नारद पुराण में नारद जी के जीवन के बारे में विस्तार से वर्णन किया गया है।</p>



<p>सनातन धर्म में देवर्षि नारद (Devarshi Narada Katha) को विशेष स्थान प्राप्त है। देवर्षि नारद ब्रह्मा जी के मानस पुत्रों में से एक हैं, लेकिन क्या जानते हैं कि ब्रह्मा के मानस पुत्र कहलाने की क्या वजह है। अगर नहीं पता है, तो ऐसे में आपको इस आर्टिकल में बताते हैं देवर्षि नारद के जन्म का रहस्य।</p>



<p><strong>क्यों कहा जाता है नारद मुनि को ब्रह्मा का मानस पुत्र?</strong></p>



<p>देवर्षि नारद के जन्म का वर्णन नारद पुराण,भागवत पुराण और विष्णु पुराण में देखने को मिलता है। पौराणिक कथा के अनुसार, नारद मुनि को ब्रह्मा का मानस पुत्र इस वजह से कहा जाता है, क्योंकि उनका जन्म मन, संकल्प और तप से माना जाता है। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि मानस का अर्थ मन से उत्पन्न हुआ होता है। पुराणों में बताया गया है कि जब सृष्टि की रचना की शुरुआत में ब्रह्मा जी ने ध्यान किया। इस दौरान उन्होंने में भक्ति और धर्म का प्रचार करने का संकल्प लिया। ऐसा माना जाता है कि उसी संकल्प से नारद मुनि का अवतरण हुआ।</p>



<p>पौराणिक कथा के अनुसार, पिछले जन्म में नारद &#8216;उपबर्हण&#8217; नाम के गंधर्व थे। एक समय ऐसा आया जब अप्सराएँ और गंधर्व गीत से ब्रह्मा जी की उपासना कर रहे थे। उस दौरान उपबर्हण रासलीला में लीन हो गए। इस दृश्य को देख ब्रह्मा जी को क्रोध आया। उन्होंने उपबर्हण को श्राप दे दिया कि तुम्हारा अगला जन्म शूद्र योनि में होगा।</p>



<p>इसके बाद उपबर्हण ने भक्ति की, जिससे उन्हें एक बार प्रभु के दर्शन हुए। ऐसे में प्रभु के प्रति उनकी आस्था और गहरी हो गई। इस दौरान आकाशवाणी हुई कि &#8216;हे बालक इस जन्म में तुमको मेरे दर्शन नहीं मिल पाएंगे।&#8217; अगले जन्म में तुम मेरे पार्षद होंगे। इसके बाद नारद मुनि में जगत के पालनहार विष्णु की कठिन तपस्या करने के फैसला लिया, जिसके बाद ब्रह्मा जी मानस पुत्र के रूप में अवतरित हुए।</p>
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		<title>जब राजकुमारी पर फ़िदा हो गए थे देवर्षि नारद, क्या हुआ था तब&#8230;</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Hema Bisht]]></dc:creator>
		<pubDate>Wed, 12 Jun 2019 08:42:26 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[अध्यात्म]]></category>
		<category><![CDATA[धर्म]]></category>
		<category><![CDATA[देवर्षि नारद]]></category>
		<category><![CDATA[राजकुमारी]]></category>
		<category><![CDATA[फ़िदा]]></category>
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					<description><![CDATA[देवर्षि नारद के बारे में कहा जाता है वह जीवनभर कुंवारें रहे और उन्होंने शादी नहीं की लेकिन वह एक राजकुमारी पर मोहित हो गए थे.  कथा &#8211; देवर्षि नारद को अपने तप पर अहंकार हो गया और भगवान विष्णु के पास जाकर घमंड से बात करने लगे. तब भगवान ने नारद का घमंड भंग करने &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p><strong>देवर्षि नारद के बारे में कहा जाता है वह जीवनभर कुंवारें रहे और उन्होंने शादी नहीं की लेकिन वह एक राजकुमारी पर मोहित हो गए थे. </strong></p>
<p><img fetchpriority="high" decoding="async" class=" wp-image-244507 aligncenter" src="http://www.livehalchal.com/wp-content/uploads/2019/06/2017_5image_08_14_006439135narada-jayanti-ll-300x200.jpg" alt="" width="806" height="537" srcset="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2019/06/2017_5image_08_14_006439135narada-jayanti-ll-300x200.jpg 300w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2019/06/2017_5image_08_14_006439135narada-jayanti-ll.jpg 600w" sizes="(max-width: 806px) 100vw, 806px" /></p>
<p><strong>कथा &#8211; देवर्षि नारद को अपने तप पर अहंकार हो गया और भगवान विष्णु के पास जाकर घमंड से बात करने लगे. तब भगवान ने नारद का घमंड भंग करने की सोची. एक बार नारद को रास्ते में एक सुंदर नगर दिखाई दिया! वहां की राजकुमारी जिसका स्वयंवर होने वाला था उसको देखकर नारदजी मोहित हो गए! जबकि यह सब भगवान श्रीहरि की माया थी. राजकुमारी के सौंदर्य से नारद का तप भंग हो चुका था. नारदजी स्वयंवर से पहले भगवान विष्णु के पास जाकर बोले कि आप मुझे अपने जैसा सुंदर बना दीजिए, जिससे राजकुमारी मुझे पति रूप में चुन सके. भगवान ने कहा ठीक है! फिर नारद मुनि सीधे स्वयंवर चले गए! नारद का मुख वानर जैसा हो गया. जब राजकुमारी स्वयंवर में आई तो बंदर के मुख वाले नारदजी को देखकर बहुत डर गई. तभी भगवान विष्णु भी एक राजा के रूप में वहां आए.</strong></p>
<p><strong>सुंदर रूप देखकर राजकुमारी ने भगवान विष्णु को अपना पति चुन लिया. नारद के वानर मुख को देखकर सभी हंसी उड़ाने लगे और कहा कि पहले अपना मुख दर्पण में देखो. जब नारदजी ने अपना चेहरा पानी में देखा तो वानर के समान था, उन्हें बहुत गुस्सा आ गया. क्रोध से भरे नारदजी ने भगवान विष्णु के पास जाकर उनको शाप दिया कि जिस तरह आज मैं स्त्री के लिए व्याकुल हो रहा हूं, उसी प्रकार मनुष्य जन्म लेकर आपको भी स्त्री वियोग सहना पड़ेगा. उस समय वानर ही तुम्हारी सहायता करेंगे. भगवान विष्णु ने कहा- ऐसा ही हो और नारद मुनि को माया से मुक्त कर दिया. तब नारद मुनि को अपने आप पर ग्लानि हुई और श्रीहरि से क्षमा मांगी.</strong></p>
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