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	<title>देवउठनी एकादशी &#8211; Live Halchal</title>
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	<title>देवउठनी एकादशी &#8211; Live Halchal</title>
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		<title>देवउठनी एकादशी आज, नोट करें शुभ मुहूर्त</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Live Halchal Web_Wing]]></dc:creator>
		<pubDate>Tue, 12 Nov 2024 07:02:12 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[<img width="618" height="312" src="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2024/11/uiyi-large.jpg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" fetchpriority="high" srcset="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2024/11/uiyi.jpg 698w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2024/11/uiyi-medium.jpg 300w" sizes="(max-width: 618px) 100vw, 618px" />आज देवउठनी एकादशी है। यह पर्व पूर्ण रूप से भगवान विष्णु को समर्पित है। ऐसा माना जाता कि जो भक्त इस दौरान भाव के साथ पूजा-पाठ करते हैं, उन्हें धन, सुख और सौभाग्य की प्राप्ति होती है। साथ ही जीवन में शुभता आती है। आज के दिन ( Dev Uthani Ekadashi 2024) की शुरुआत करने &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<img width="618" height="312" src="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2024/11/uiyi-large.jpg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" srcset="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2024/11/uiyi.jpg 698w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2024/11/uiyi-medium.jpg 300w" sizes="(max-width: 618px) 100vw, 618px" />
<p>आज देवउठनी एकादशी है। यह पर्व पूर्ण रूप से भगवान विष्णु को समर्पित है। ऐसा माना जाता कि जो भक्त इस दौरान भाव के साथ पूजा-पाठ करते हैं, उन्हें धन, सुख और सौभाग्य की प्राप्ति होती है। साथ ही जीवन में शुभता आती है। आज के दिन ( Dev Uthani Ekadashi 2024) की शुरुआत करने से पहले यहां दिए गए शुभ व अशुभ समय को अवश्य जान लें, जो इस प्रकार हैं &#8211;</p>



<h2 class="wp-block-heading">Aaj Ka Panchang 12 November 2024: आज का पंचांग &#8211;</h2>



<p>पंचांग के अनुसार, आज कार्तिक माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि शाम 04 बजकर 10 मिनट तक रहेगी।</p>



<p><em><strong>ऋतु &#8211;</strong></em><strong>&nbsp;</strong>शरद<em><strong>चन्द्र राशि &#8211;</strong></em>&nbsp;मीन</p>



<h2 class="wp-block-heading">सूर्योदय और सूर्यास्त का समय</h2>



<p><strong><em>सूर्योदय &#8211;&nbsp;</em></strong>सुबह 06 बजकर 39 मिनट पर<em><strong>सूर्यास्त &#8211;</strong></em>&nbsp;शाम 05 बजकर 25 मिनट पर<strong><em>चंद्रोदय &#8211;&nbsp;</em></strong>दोपहर 03 बजकर 04 मिनट पर<strong><em>चन्द्रास्त &#8211;</em></strong>&nbsp;भोर 03 बजकर 41 मिनट पर</p>



<h2 class="wp-block-heading">शुभ मुहूर्त</h2>



<p><strong><em>सर्वार्थ सिद्धि योग &#8211;&nbsp;</em></strong>सुबह 07 बजकर 52 मिनट से अगले दिन सुबह 05 बजकर 40 मिनट तक<em><strong>रवि योग &#8211;</strong></em>&nbsp;सुबह 06 बजकर 42 मिनट से अगले दिन सुबह 07 बजकर 52 मिनट तक<strong><em>ब्रह्म मुहूर्त &#8211;</em></strong>&nbsp;सुबह 04 बजकर 56 मिनट से 05 बजकर 49 मिनट तक<strong><em>विजय मुहूर्त &#8211;</em></strong>&nbsp;दोपहर 01 बजकर 53 मिनट से 02 बजकर 36 मिनट तक<strong><em>गोधूलि मुहूर्त &#8211;&nbsp;</em></strong>शाम 05 बजकर 29 मिनट से 05 बजकर 55 मिनट तक<strong><em>निशिता मुहूर्त &#8211;</em></strong>&nbsp;रात्रि 11 बजकर 39 मिनट से 12 बजकर 32 मिनट तक।</p>



<h2 class="wp-block-heading">अशुभ समय</h2>



<p><strong><em>राहु काल &#8211;&nbsp;</em></strong>दोपहर 02 बजकर 51 मिनट से शाम 04 बजकर 13 मिनट तक<strong><em>गुलिक काल &#8211;&nbsp;</em></strong>दोपहर 12 बजकर 11 मिनट से 01 बजकर 32 मिनट तक।<strong><em>दिशा शूल &#8211;</em></strong>&nbsp;उत्तर</p>



<h2 class="wp-block-heading">ताराबल</h2>



<p>भरणी, रोहिणी, आर्द्रा, पुनर्वसु, पुष्य, आश्लेषा, पूर्वा फाल्गुनी, हस्त, स्वाति, विशाखा, अनुराधा, ज्येष्ठा, पूर्वाषाढ़ा, श्रवण, शतभिषा, पूर्वाभाद्रपद, उत्तराभाद्रपद, रेवती।</p>



<h2 class="wp-block-heading">चन्द्रबल</h2>



<p>वृषभ, मिथुन, कन्या, तुला, मकर, मीन।</p>



<h2 class="wp-block-heading">भगवान विष्णु पूजन मंत्र</h2>



<p><em><strong>1.</strong></em><strong>&nbsp;</strong>ॐ नारायणाय विद्महे। वासुदेवाय धीमहि। तन्नो विष्णु प्रचोदयात्।।<em><strong>2.</strong></em>&nbsp;ॐ भूरिदा भूरि देहिनो, मा दभ्रं भूर्या भर। भूरि घेदिन्द्र दित्ससि।ॐ भूरिदा त्यसि श्रुत: पुरूत्रा शूर वृत्रहन्। आ नो भजस्व राधसि।<strong><em>3.</em></strong>&nbsp;ॐ ह्रीं कार्तविर्यार्जुनो नाम राजा बाहु सहस्त्रवान। यस्य स्मरेण मात्रेण ह्रतं नष्&#x200d;टं च लभ्यते।।</p>
]]></content:encoded>
					
		
		
			</item>
		<item>
		<title>देवउठनी एकादशी पर करें इन विशेष चीजों का दान, कभी नहीं होगी धन की कमी</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Live Halchal Web_Wing]]></dc:creator>
		<pubDate>Tue, 12 Nov 2024 06:56:16 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[अध्यात्म]]></category>
		<category><![CDATA[धर्म]]></category>
		<category><![CDATA[देवउठनी एकादशी]]></category>
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					<description><![CDATA[<img width="618" height="296" src="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2024/11/iuyio-3-large.jpg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" srcset="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2024/11/iuyio-3.jpg 686w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2024/11/iuyio-3-medium.jpg 300w" sizes="(max-width: 618px) 100vw, 618px" />सभी एकादशी तिथि में देवउठनी एकादशी का व्रत को अधिक महत्वपूर्ण माना गया है। साधक इस दिन जगत के पालनहार भगवान विष्णु और मां लक्ष्मी की विधिपूर्वक पूजा-अर्चना करते हैं। पंचांग के अनुसार, एकादशी प्रत्येक माह शुक्ल पक्ष और कृष्ण पक्ष के 11वें दिन मनाई जाती है। ऐसा माना जा रहा है कि इस व्रत &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<img width="618" height="296" src="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2024/11/iuyio-3-large.jpg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" loading="lazy" srcset="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2024/11/iuyio-3.jpg 686w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2024/11/iuyio-3-medium.jpg 300w" sizes="auto, (max-width: 618px) 100vw, 618px" />
<p>सभी एकादशी तिथि में देवउठनी एकादशी का व्रत को अधिक महत्वपूर्ण माना गया है। साधक इस दिन जगत के पालनहार भगवान विष्णु और मां लक्ष्मी की विधिपूर्वक पूजा-अर्चना करते हैं। पंचांग के अनुसार, एकादशी प्रत्येक माह शुक्ल पक्ष और कृष्ण पक्ष के 11वें दिन मनाई जाती है। ऐसा माना जा रहा है कि इस व्रत (Dev Uthani Ekadashi 2024) को रखने से सुख और शांति की प्राप्ति होती है। वहीं, इस दिन दान- पुण्य करने का विशेष महत्व है। ऐसा कहा जाता है कि जो लोग इस तिथि पर दान और पुण्य करते हैं, उनके घर में कभी सुख-समृद्धि का अभाव नहीं रहता है, तो आइए जानते हैं कि इस दिन क्या दान करना चाहिए?</p>



<p><strong>देवउठनी एकादशी पर करें इन चीजों का दान<br></strong>देवउठनी एकादशी पर पीले वस्त्र, मुरली, धान, गेहूं, मक्का, बाजरा, उड़द, वस्त्र, सिंघाड़ा, शकरकंदी, गन्ना, मौसमी फल, केसर, केला, हल्दी, मोर पंख और शंख आदि का दान करना शुभ माना जाता है। दान करते समय इस बात का ध्यान रखें कि इसका जिक्र किसी तीसरे व्यक्ति से गलती से न करें, क्योंकि दान को जितना हो सके उतना छिपा कर करना चाहिए। वहीं, अगर आप ये सभी चीजें इस पावन दिन पर दान करते हैं, तो इससे आपका आर्थिक विकास होगा और जीवन में कभी किसी चीज का अभाव नहीं रहेगा।</p>



<p><strong>देवउठनी एकादशी तिथि और समय<br></strong>हिंदू पंचांग के अनुसार, कार्तिक माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि की शुरुआत 11 नवंबर को शाम 06 बजकर 46 मिनट पर होगी। वहीं, इस तिथि का समापन 12 नवंबर को शाम 04 बजकर 04 मिनट पर होगा। ऐसे में 12 नवंबर को देवउठनी एकादशी का व्रत रखा जाएगा। साथ ही इसके अगले दिन तुलसी विवाह का पर्व भी मनाया जाएगा, जो लोग इस व्रत का पालन कर रहे हैं, उन्हें पारण समय के अनुसार ही पारण करना चाहिए, क्योंकि तभी व्रत का पूरा फल प्राप्त होता है।</p>



<p><strong>देवउठनी एकादशी पूजा मंत्र</strong></p>



<ol class="wp-block-list">
<li>शांता कारम भुजङ्ग शयनम पद्म नाभं सुरेशम।<br>विश्वाधारं गगनसद्र्श्यं मेघवर्णम शुभांगम।<br>लक्ष्मी कान्तं कमल नयनम योगिभिर्ध्यान नग्म्य्म ।<br>वन्दे विष्णुम भवभयहरं सर्व लोकैकनाथम।।</li>



<li>ॐ नारायणाय विद्महे। वासुदेवाय धीमहि।<br>तन्नो विष्णु प्रचोदयात्।।</li>
</ol>
]]></content:encoded>
					
		
		
			</item>
		<item>
		<title>देवउठनी एकादशी पर अवश्य करें इन चीजों का दान, धन से भर जाएगा आपका घर</title>
		<link>https://livehalchal.com/%e0%a4%a6%e0%a5%87%e0%a4%b5%e0%a4%89%e0%a4%a0%e0%a4%a8%e0%a5%80-%e0%a4%8f%e0%a4%95%e0%a4%be%e0%a4%a6%e0%a4%b6%e0%a5%80-%e0%a4%aa%e0%a4%b0-%e0%a4%85%e0%a4%b5%e0%a4%b6%e0%a5%8d%e0%a4%af-%e0%a4%95/589378</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Live Halchal Web_Wing]]></dc:creator>
		<pubDate>Mon, 11 Nov 2024 06:37:52 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[अध्यात्म]]></category>
		<category><![CDATA[धर्म]]></category>
		<category><![CDATA[देवउठनी एकादशी]]></category>
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					<description><![CDATA[<img width="570" height="357" src="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2024/11/iojpo-large.jpg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" loading="lazy" srcset="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2024/11/iojpo.jpg 570w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2024/11/iojpo-medium.jpg 300w" sizes="auto, (max-width: 570px) 100vw, 570px" />देवउठनी एकादशी का व्रत बेहद शुभ माना गया है। भक्त इस दिन भगवान विष्णु की पूजा करते हैं। वैदिक पंचांग के अनुसार, एकादशी प्रत्येक माह शुक्ल पक्ष और कृष्ण पक्ष के 11वें दिन मनाई जाती है। इस साल देवउठनी एकादशी 12 नवंबर को मनाई जाएगी। ऐसा माना जा रहा है कि इस व्रत (Dev Uthani &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<img width="570" height="357" src="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2024/11/iojpo-large.jpg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" loading="lazy" srcset="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2024/11/iojpo.jpg 570w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2024/11/iojpo-medium.jpg 300w" sizes="auto, (max-width: 570px) 100vw, 570px" />
<p>देवउठनी एकादशी का व्रत बेहद शुभ माना गया है। भक्त इस दिन भगवान विष्णु की पूजा करते हैं। वैदिक पंचांग के अनुसार, एकादशी प्रत्येक माह शुक्ल पक्ष और कृष्ण पक्ष के 11वें दिन मनाई जाती है। इस साल देवउठनी एकादशी 12 नवंबर को मनाई जाएगी। ऐसा माना जा रहा है कि इस व्रत (Dev Uthani Ekadashi 2024) को रखने से सुख और शांति की प्राप्ति होती है। वहीं, इस दिन दान- पुण्य करने का विशेष महत्व है। ऐसा कहा जाता है कि जो लोग इस तिथि पर दान और पुण्य करते हैं, उनके घर में कभी सुख-समृद्धि का अभाव नहीं रहता है, तो आइए जानते हैं कि इस दिन क्या दान करना चाहिए?</p>



<p><strong>देवउठनी एकादशी पर करें इन चीजों का दान<br></strong>देवउठनी एकादशी पर पीले वस्त्र, मुरली, धान, गेहूं, मक्का, बाजरा, उड़द, वस्त्र, सिंघाड़ा, शकरकंदी, गन्ना, मौसमी फल, केसर, केला, हल्दी, मोर पंख और शंख आदि का दान करना शुभ माना जाता है। दान करते समय इस बात का ध्यान रखें कि इसका जिक्र किसी तीसरे व्यक्ति से गलती से न करें, क्योंकि दान को जितना हो सके उतना छिपा कर करना चाहिए। वहीं, अगर आप ये सभी चीजें इस पावन दिन पर दान करते हैं, तो इससे आपका आर्थिक विकास होगा और जीवन में कभी किसी चीज का अभाव नहीं रहेगा।</p>



<p><strong>देवउठनी एकादशी तिथि और समय<br></strong>हिंदू पंचांग के अनुसार, कार्तिक माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि की शुरुआत 11 नवंबर को शाम 06 बजकर 46 मिनट पर होगी। वहीं, इस तिथि का समापन 12 नवंबर को शाम 04 बजकर 04 मिनट पर होगा। ऐसे में 12 नवंबर को देवउठनी एकादशी का व्रत रखा जाएगा। साथ ही इसके अगले दिन तुलसी विवाह का पर्व भी मनाया जाएगा, जो लोग इस व्रत का पालन कर रहे हैं, उन्हें पारण समय के अनुसार ही पारण करना चाहिए, क्योंकि तभी व्रत का पूरा फल प्राप्त होता है।</p>



<p><strong>देवउठनी एकादशी पूजा मंत्र<br></strong>शांता कारम भुजङ्ग शयनम पद्म नाभं सुरेशम।<br>विश्वाधारं गगनसद्र्श्यं मेघवर्णम शुभांगम।<br>लक्ष्मी कान्तं कमल नयनम योगिभिर्ध्यान नग्म्य्म ।<br>वन्दे विष्णुम भवभयहरं सर्व लोकैकनाथम।।</p>



<p>ॐ नारायणाय विद्महे। वासुदेवाय धीमहि।<br>तन्नो विष्णु प्रचोदयात्।।</p>
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			</item>
		<item>
		<title>देवउठनी एकादशी पर ब्रह्म मुहूर्त में करें ये 5 कार्य, कोसों दूर रहेगी गरीबी</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Live Halchal Web_Wing]]></dc:creator>
		<pubDate>Mon, 11 Nov 2024 06:33:49 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[अध्यात्म]]></category>
		<category><![CDATA[धर्म]]></category>
		<category><![CDATA[देवउठनी एकादशी]]></category>
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					<description><![CDATA[<img width="618" height="283" src="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2024/11/89u089-large.jpg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" loading="lazy" srcset="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2024/11/89u089.jpg 691w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2024/11/89u089-medium.jpg 300w" sizes="auto, (max-width: 618px) 100vw, 618px" />देवउठनी एकादशी हिंदुओं का एक महत्वपूर्ण त्योहार है ,जो भक्तिभाव के साथ प्रतिवर्ष मनाई जाती है। यह दिन भगवान विष्णु की पूजा के लिए समर्पित है। यह पर्व हर साल कार्तिक माह के शुक्ल पक्ष के 11वें दिन मनाया जाता है। 24 एकादशी में से देवउठनी एकादशी का बहुत ज्यादा महत्व है, क्योंकि इस दिन &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<img width="618" height="283" src="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2024/11/89u089-large.jpg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" loading="lazy" srcset="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2024/11/89u089.jpg 691w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2024/11/89u089-medium.jpg 300w" sizes="auto, (max-width: 618px) 100vw, 618px" />
<p>देवउठनी एकादशी हिंदुओं का एक महत्वपूर्ण त्योहार है ,जो भक्तिभाव के साथ प्रतिवर्ष मनाई जाती है। यह दिन भगवान विष्णु की पूजा के लिए समर्पित है। यह पर्व हर साल कार्तिक माह के शुक्ल पक्ष के 11वें दिन मनाया जाता है। 24 एकादशी में से देवउठनी एकादशी का बहुत ज्यादा महत्व है, क्योंकि इस दिन भगवान विष्णु चार महीने बाद जागते हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन भक्त उपवास करते हैं, भगवान विष्णु की पूजा-अर्चना और सुख, समृद्धि, खुशी के लिए प्रार्थना करते हैं। यह एकादशी हिंदू संस्कृति में विवाह के मौसम की शुरुआत का भी प्रतीक है।</p>



<p>पंचांग के अनुसार, इस साल देवउठनी एकादशी 12 नवंबर 2024 को मनाई जाएगी। ऐसा कहा जाता है कि यदि इस दिन ब्रह्म मुहूर्त में उठकर कुछ कार्य किए <em><strong>(Dev Uthani Ekadashi Upay 2024)</strong></em> जाए, तो मानो व्यक्ति की किस्मत बदल सकती है, तो आइए उन विशेष कार्यों के बारे में जानते हैं।</p>



<p><strong>देवउठनी एकादशी पर अवश्य करें ये कार्य</strong></p>



<p>इस शुभ दिन पर ब्रह्म मुहूर्त में उठकर पवित्र स्नान करें।</p>



<p>इस पावन तिथि की सुबह श्री हरि को उनके वैदिक का जाप कर जगाएं।</p>



<p>इस दिन सुबह-सुबह &#8221;ॐ नमो भगवते वासुदेवाय&#8221; का जाप करें।</p>



<p>इस दिन सबसे पहले अपने हेथेलियों का दर्शन करें और श्री हरि को याद कर उन्हें प्रणाम करें।</p>



<p>हथेलियों को देखते हुए इस मंत्र &#8221;कराग्रे वसते लक्ष्मीः करमध्ये सरस्वती । करमूले तु गोविंदः प्रभाते करदर्शनम् ॥ का जाप करें।</p>



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<p><strong>इन कार्यों के लाभ<br></strong>ऐसी मान्यता है कि इन कार्यों को करने से व्यक्ति की किस्मत धीरे-धीरे बदलने लगती हैं और उन्हें जीवन भर किसी समस्या का सामना नहीं करना पड़ता है। इसके साथ ही धन-दौलत में दिन-रात बढ़ोत्तरी होती है। इसलिए इस शुभ अवसर पर इन कार्यों को करने की पूर्ण कोशिश करें, जिसके लाभ आपको जल्द ही दिखना शुरू हो जाएंगे।</p>



<p><strong>देवउठनी एकादशी का शुभ मुहूर्त<br></strong>वैदिक पंचांग के अनुसार, कार्तिक माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि की शुरुआत 11 नवंबर, 2024 को शाम 06 बजकर 46 मिनट पर होगी। वहीं, इसका समापन 12 नवंबर, 2024 को शाम 04 बजकर 04 मिनट पर होगा। उदया तिथि को देखते हुए 12 नवंबर को देवउठनी एकादशी का व्रत रखा जाएगा। इसके साथ ही इसके अगले दिन तुलसी विवाह का पर्व भी मनाया जाएगा।<br>ऐसे में जो भक्त इस उपवास को रखते हैं, उन्हें श्री हरि का आशीर्वाद मिलता है। साथ ही माता लक्ष्मी संग देवी तुलसी का घर में सदैव के लिए वास रहता है।</p>
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		<title> देवउठनी एकादशी पर करें मां तुलसी की विशेष पूजा, जीवन की सारी बाधाएं होंगी समाप्त</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Live Halchal Web_Wing]]></dc:creator>
		<pubDate>Mon, 04 Nov 2024 04:40:09 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[अध्यात्म]]></category>
		<category><![CDATA[धर्म]]></category>
		<category><![CDATA[देवउठनी एकादशी]]></category>
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					<description><![CDATA[<img width="612" height="361" src="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2024/11/iouyio-large.jpg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" loading="lazy" srcset="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2024/11/iouyio.jpg 612w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2024/11/iouyio-medium.jpg 300w" sizes="auto, (max-width: 612px) 100vw, 612px" />देवउठनी एकादशी का दिन अपने आप में बेहद शुभ होता है। यह साल की सबसे महत्वपूर्ण एकादशी होती है, क्योंकि इस दिन पर भगवान विष्णु अपनी योग निद्रा से जागते हैं और अपना कारभार संभालते हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस पावन दिन पर भक्त भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी के साथ देवी तुलसी की &#8230;]]></description>
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<p>देवउठनी एकादशी का दिन अपने आप में बेहद शुभ होता है। यह साल की सबसे महत्वपूर्ण एकादशी होती है, क्योंकि इस दिन पर भगवान विष्णु अपनी योग निद्रा से जागते हैं और अपना कारभार संभालते हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस पावन दिन पर भक्त भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी के साथ देवी तुलसी की भी पूजा करते हैं। साथ ही कठोर व्रत का पालन करते हैं। वैदिक पंचांग के अनुसार, इस साल यह एकादशी 12 नवंबर को मनाई जाएगी।</p>



<p>वहीं, इसके अगले दिन तुलसी विवाह पर्व मनाया जाएगा। ऐसा माना जाता है कि इस तिथि पर मां तुलसी की विधिवत पूजा करने के साथ उनकी चालीसा का पाठ अवश्य करना चाहिए। इससे सुख-सौभाग्य में वृद्धि होती है, तो आइए यहां पढ़ते हैं।</p>



<p><strong>।।तुलसी चालीसा।।</strong></p>



<p><strong>&#8221;दोहा&#8221;<br></strong>जय जय तुलसी भगवती सत्यवती सुखदानी।<br>नमो नमो हरि प्रेयसी श्री वृन्दा गुन खानी॥<br>श्री हरि शीश बिरजिनी, देहु अमर वर अम्ब।<br>जनहित हे वृन्दावनी अब न करहु विलम्ब॥</p>



<p><strong>॥ चौपाई ॥<br></strong>धन्य धन्य श्री तुलसी माता। महिमा अगम सदा श्रुति गाता॥<br>हरि के प्राणहु से तुम प्यारी। हरीहीँ हेतु कीन्हो तप भारी॥<br>जब प्रसन्न है दर्शन दीन्ह्यो। तब कर जोरी विनय उस कीन्ह्यो॥<br>हे भगवन्त कन्त मम होहू। दीन जानी जनि छाडाहू छोहु॥<br>सुनी लक्ष्मी तुलसी की बानी। दीन्हो श्राप कध पर आनी॥<br>उस अयोग्य वर मांगन हारी। होहू विटप तुम जड़ तनु धारी॥<br>सुनी तुलसी हीँ श्रप्यो तेहिं ठामा। करहु वास तुहू नीचन धामा॥<br>दियो वचन हरि तब तत्काला। सुनहु सुमुखी जनि होहू बिहाला॥<br>समय पाई व्हौ रौ पाती तोरा। पुजिहौ आस वचन सत मोरा॥<br>तब गोकुल मह गोप सुदामा। तासु भई तुलसी तू बामा॥<br>कृष्ण रास लीला के माही। राधे शक्यो प्रेम लखी नाही॥<br>दियो श्राप तुलसिह तत्काला। नर लोकही तुम जन्महु बाला॥<br>यो गोप वह दानव राजा। शङ्ख चुड नामक शिर ताजा॥<br>तुलसी भई तासु की नारी। परम सती गुण रूप अगारी॥<br>अस द्वै कल्प बीत जब गयऊ। कल्प तृतीय जन्म तब भयऊ॥<br>वृन्दा नाम भयो तुलसी को। असुर जलन्धर नाम पति को॥<br>करि अति द्वन्द अतुल बलधामा। लीन्हा शंकर से संग्राम॥<br>जब निज सैन्य सहित शिव हारे। मरही न तब हर हरिही पुकारे॥<br>पतिव्रता वृन्दा थी नारी। कोऊ न सके पतिहि संहारी॥<br>तब जलन्धर ही भेष बनाई। वृन्दा ढिग हरि पहुच्यो जाई॥<br>शिव हित लही करि कपट प्रसंगा। कियो सतीत्व धर्म तोही भंगा॥<br>भयो जलन्धर कर संहारा। सुनी उर शोक उपारा॥<br>तिही क्षण दियो कपट हरि टारी। लखी वृन्दा दुःख गिरा उचारी॥<br>जलन्धर जस हत्यो अभीता। सोई रावन तस हरिही सीता॥<br>अस प्रस्तर सम ह्रदय तुम्हारा। धर्म खण्डी मम पतिहि संहारा॥<br>यही कारण लही श्राप हमारा। होवे तनु पाषाण तुम्हारा॥<br>सुनी हरि तुरतहि वचन उचारे। दियो श्राप बिना विचारे॥<br>लख्यो न निज करतूती पति को। छलन चह्यो जब पार्वती को॥<br>जड़मति तुहु अस हो जड़रूपा। जग मह तुलसी विटप अनूपा॥<br>धग्व रूप हम शालिग्रामा। नदी गण्डकी बीच ललामा॥<br>जो तुलसी दल हमही चढ़ इहैं। सब सुख भोगी परम पद पईहै॥<br>बिनु तुलसी हरि जलत शरीरा। अतिशय उठत शीश उर पीरा॥<br>जो तुलसी दल हरि शिर धारत। सो सहस्त्र घट अमृत डारत॥<br>तुलसी हरि मन रञ्जनी हारी। रोग दोष दुःख भंजनी हारी॥<br>प्रेम सहित हरि भजन निरन्तर। तुलसी राधा मंज नाही अन्तर॥<br>व्यन्जन हो छप्पनहु प्रकारा। बिनु तुलसी दल न हरीहि प्यारा॥<br>सकल तीर्थ तुलसी तरु छाही। लहत मुक्ति जन संशय नाही॥<br>कवि सुन्दर इक हरि गुण गावत। तुलसिहि निकट सहसगुण पावत॥<br>बसत निकट दुर्बासा धामा। जो प्रयास ते पूर्व ललामा॥<br>पाठ करहि जो नित नर नारी। होही सुख भाषहि त्रिपुरारी॥</p>



<p><strong>॥ दोहा ॥<br></strong>तुलसी चालीसा पढ़ही तुलसी तरु ग्रह धारी।<br>दीपदान करि पुत्र फल पावही बन्ध्यहु नारी॥<br>सकल दुःख दरिद्र हरि हार ह्वै परम प्रसन्न।<br>आशिय धन जन लड़हि ग्रह बसही पूर्णा अत्र॥<br>लाही अभिमत फल जगत मह लाही पूर्ण सब काम।<br>जेई दल अर्पही तुलसी तंह सहस बसही हरीराम॥<br>तुलसी महिमा नाम लख तुलसी सूत सुखराम।<br>मानस चालीस रच्यो जग महं तुलसीदास॥</p>
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