<?xml version="1.0" encoding="UTF-8"?><rss version="2.0"
	xmlns:content="http://purl.org/rss/1.0/modules/content/"
	xmlns:wfw="http://wellformedweb.org/CommentAPI/"
	xmlns:dc="http://purl.org/dc/elements/1.1/"
	xmlns:atom="http://www.w3.org/2005/Atom"
	xmlns:sy="http://purl.org/rss/1.0/modules/syndication/"
	xmlns:slash="http://purl.org/rss/1.0/modules/slash/"
	>

<channel>
	<title>दिल के मरीजों को ओपन हार्ट सर्जरी से बचा सकता है टीबैग &#8211; Live Halchal</title>
	<atom:link href="https://livehalchal.com/tag/%e0%a4%a6%e0%a4%bf%e0%a4%b2-%e0%a4%95%e0%a5%87-%e0%a4%ae%e0%a4%b0%e0%a5%80%e0%a4%9c%e0%a5%8b%e0%a4%82-%e0%a4%95%e0%a5%8b-%e0%a4%93%e0%a4%aa%e0%a4%a8-%e0%a4%b9%e0%a4%be%e0%a4%b0%e0%a5%8d%e0%a4%9f/feed" rel="self" type="application/rss+xml" />
	<link>https://livehalchal.com</link>
	<description>Latest News, Updated News, Hindi News Portal</description>
	<lastBuildDate>Mon, 04 Jun 2018 08:37:26 +0000</lastBuildDate>
	<language>en-US</language>
	<sy:updatePeriod>
	hourly	</sy:updatePeriod>
	<sy:updateFrequency>
	1	</sy:updateFrequency>
	<generator>https://wordpress.org/?v=6.9.4</generator>

<image>
	<url>https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2023/10/cropped-Live-Halchal-512-32x32.jpg</url>
	<title>दिल के मरीजों को ओपन हार्ट सर्जरी से बचा सकता है टीबैग &#8211; Live Halchal</title>
	<link>https://livehalchal.com</link>
	<width>32</width>
	<height>32</height>
</image> 
	<item>
		<title>दिल के मरीजों को ओपन हार्ट सर्जरी से बचा सकता है टीबैग</title>
		<link>https://livehalchal.com/%e0%a4%a6%e0%a4%bf%e0%a4%b2-%e0%a4%95%e0%a5%87-%e0%a4%ae%e0%a4%b0%e0%a5%80%e0%a4%9c%e0%a5%8b%e0%a4%82-%e0%a4%95%e0%a5%8b-%e0%a4%93%e0%a4%aa%e0%a4%a8-%e0%a4%b9%e0%a4%be%e0%a4%b0%e0%a5%8d%e0%a4%9f/142624</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[ekta singh]]></dc:creator>
		<pubDate>Mon, 04 Jun 2018 08:37:26 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Uncategorized]]></category>
		<category><![CDATA[दिल के मरीजों को ओपन हार्ट सर्जरी से बचा सकता है टीबैग]]></category>
		<guid isPermaLink="false">http://www.livehalchal.com/?p=142624</guid>

					<description><![CDATA[<img width="618" height="348" src="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2018/06/happy_heart_1528022494.jpg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="दिल के कई मामलों में ओपन हार्ट सर्जरी ही विकल्प है। एक शोध में कहा गया है कि छोटा सा टीबैग दिल के मरीजों को जटिल सर्जरी से बचा सकता है।  मिट्रल वॉल्व में आ जाती है समस्या दिल की बीमारियों में से एक है वाल्व लीक करना। इसमें हृदय के बाएं ओर मौजूद मिट्रल वॉल्व में समस्या आ जाती है। यह दिल की मांसपेशियों में कमजोरी के कारण होता है। आमतौर पर हार्ट अटैक की वजह से मांसपेशियां कमजोर पड़ जाती हैं। इससे वॉल्व खिंच जाता है। दो हिस्सों में बंटे वॉल्व को एक-दूसरे से संपर्क करना होता है, जिससे यह बंद हो सके। इससे दिल द्वारा पंप किया जा रहा रक्त पूरे शरीर में सामान्य रूप से पहुंचता है। हालांकि ऐसा नहीं होने पर शरीर में रक्त संचार की प्रक्रिया में रुकावट आ जाती है। शरीर में सही से नहीं हो पाता रक्त संचार विशेषज्ञों का कहना है कि वॉल्व के दोनों के सिरों के बंद नहीं होने से हृदय को सही दिशा में खून पंप करने के लिए अधिक मेहनत करनी पड़ती है। यह मेहनत सिर्फ हृदय ही नहीं, मरीज पर भी काफी भारी पड़ती है। इस समस्या के कारण मरीजे के पूरे शरीर में रक्त का सही से संचार नहीं हो पाता है, जिससे सांस लेने में भयंकर समस्या होने लगती है। इससे जल्दी थकान और शरीर में पानी की कमी हो जाती है। लंदन के बार्ट्स हेल्थ एनएचएस ट्रस्ट कंसल्टेंट इंटरवेंश्नल कार्डियोलॉजिस्ट और प्रमुख शोधकर्ता डॉक्टर माइकल मुलेन ने कहा कि कुछ मरीज चंद कदम चलने में हांफने लगते हैं।  अोपेन हार्ट सर्जरी के लिए उपयुक्त नहीं होते कुछ मरीज आमतौर पर मिट्रल वॉल्व की लीफलेट्स फिर से एक दूसरे से संपर्क कर सकें, इसके लिए ओपेन हार्ट सर्जरी की जाती रही है। डॉ. मुलेन ने कहा कि वॉल्व लीक करने की समस्या के शिकार मरीज, जिनमें से ज्यादातर को हार्ट अटैक हो चुका होता है। यह मरीज ओपेन हार्ट सर्जरी के लिए उपयुक्त नहीं होते हैं।  दिल की अच्छी सेहत के लिए हफ्ते में तीन बार खाएं मुट्ठी भर नट्स जांघ में 1 सेंटीमीटर का सुराख कर डाला जाता है कार्डियोबैंड ब्रिटेन के सेंट बार्थोलोम्यू हॉस्पिटल में पहली बार यह सर्जरी की है, जिससे बड़ी संख्या में लोगों को फायदा मिलने की उम्मीद जताई जा रही है। इसमें मरीज के शरीर में जांघ के पास एक सेंटीमीटर का सुराख किया जाता है, जिसके जरिये ब्रेसलेटनुमा कार्डियोबैंड हृदय की मांसपेशियों तक पहुंचाया जाता है। मरीज की नस के जरिए कैथेटर को हृदय तक पहुंचाया जाता है। कार्डियोबैंड एक 10 सेंटीमीटर लंबा वायर होता है, जिसमें कपड़ा लगा होता है। यह तार टीबैग के तार की तरह होता है। 17 बारीक पेचों की मदद से लगाया जाता है टीबैग वायर अल्ट्रासाउंड और ऐक्सरे की मदद से इस बैंड को हृदय वॉल्व तक पहुंचाया जाता है। इसमें तकरीबन 17 बारीक पेच लगे होते हैं। इस बैंड को वायर के जरिए सी के आकार में इसमें लगे पेच की सहायता से कस दिया जाता है।" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" fetchpriority="high" srcset="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2018/06/happy_heart_1528022494.jpg 640w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2018/06/happy_heart_1528022494-300x169.jpg 300w" sizes="(max-width: 618px) 100vw, 618px" />दिल के कई मामलों में ओपन हार्ट सर्जरी ही विकल्प है। एक शोध में कहा गया है कि छोटा सा टीबैग दिल के मरीजों को जटिल सर्जरी से बचा सकता है।  मिट्रल वॉल्व में आ जाती है समस्या दिल की बीमारियों में से एक है वाल्व लीक करना। इसमें हृदय के बाएं ओर मौजूद मिट्रल &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<img width="618" height="348" src="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2018/06/happy_heart_1528022494.jpg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="दिल के कई मामलों में ओपन हार्ट सर्जरी ही विकल्प है। एक शोध में कहा गया है कि छोटा सा टीबैग दिल के मरीजों को जटिल सर्जरी से बचा सकता है।  मिट्रल वॉल्व में आ जाती है समस्या दिल की बीमारियों में से एक है वाल्व लीक करना। इसमें हृदय के बाएं ओर मौजूद मिट्रल वॉल्व में समस्या आ जाती है। यह दिल की मांसपेशियों में कमजोरी के कारण होता है। आमतौर पर हार्ट अटैक की वजह से मांसपेशियां कमजोर पड़ जाती हैं। इससे वॉल्व खिंच जाता है। दो हिस्सों में बंटे वॉल्व को एक-दूसरे से संपर्क करना होता है, जिससे यह बंद हो सके। इससे दिल द्वारा पंप किया जा रहा रक्त पूरे शरीर में सामान्य रूप से पहुंचता है। हालांकि ऐसा नहीं होने पर शरीर में रक्त संचार की प्रक्रिया में रुकावट आ जाती है। शरीर में सही से नहीं हो पाता रक्त संचार विशेषज्ञों का कहना है कि वॉल्व के दोनों के सिरों के बंद नहीं होने से हृदय को सही दिशा में खून पंप करने के लिए अधिक मेहनत करनी पड़ती है। यह मेहनत सिर्फ हृदय ही नहीं, मरीज पर भी काफी भारी पड़ती है। इस समस्या के कारण मरीजे के पूरे शरीर में रक्त का सही से संचार नहीं हो पाता है, जिससे सांस लेने में भयंकर समस्या होने लगती है। इससे जल्दी थकान और शरीर में पानी की कमी हो जाती है। लंदन के बार्ट्स हेल्थ एनएचएस ट्रस्ट कंसल्टेंट इंटरवेंश्नल कार्डियोलॉजिस्ट और प्रमुख शोधकर्ता डॉक्टर माइकल मुलेन ने कहा कि कुछ मरीज चंद कदम चलने में हांफने लगते हैं।  अोपेन हार्ट सर्जरी के लिए उपयुक्त नहीं होते कुछ मरीज आमतौर पर मिट्रल वॉल्व की लीफलेट्स फिर से एक दूसरे से संपर्क कर सकें, इसके लिए ओपेन हार्ट सर्जरी की जाती रही है। डॉ. मुलेन ने कहा कि वॉल्व लीक करने की समस्या के शिकार मरीज, जिनमें से ज्यादातर को हार्ट अटैक हो चुका होता है। यह मरीज ओपेन हार्ट सर्जरी के लिए उपयुक्त नहीं होते हैं।  दिल की अच्छी सेहत के लिए हफ्ते में तीन बार खाएं मुट्ठी भर नट्स जांघ में 1 सेंटीमीटर का सुराख कर डाला जाता है कार्डियोबैंड ब्रिटेन के सेंट बार्थोलोम्यू हॉस्पिटल में पहली बार यह सर्जरी की है, जिससे बड़ी संख्या में लोगों को फायदा मिलने की उम्मीद जताई जा रही है। इसमें मरीज के शरीर में जांघ के पास एक सेंटीमीटर का सुराख किया जाता है, जिसके जरिये ब्रेसलेटनुमा कार्डियोबैंड हृदय की मांसपेशियों तक पहुंचाया जाता है। मरीज की नस के जरिए कैथेटर को हृदय तक पहुंचाया जाता है। कार्डियोबैंड एक 10 सेंटीमीटर लंबा वायर होता है, जिसमें कपड़ा लगा होता है। यह तार टीबैग के तार की तरह होता है। 17 बारीक पेचों की मदद से लगाया जाता है टीबैग वायर अल्ट्रासाउंड और ऐक्सरे की मदद से इस बैंड को हृदय वॉल्व तक पहुंचाया जाता है। इसमें तकरीबन 17 बारीक पेच लगे होते हैं। इस बैंड को वायर के जरिए सी के आकार में इसमें लगे पेच की सहायता से कस दिया जाता है।" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" srcset="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2018/06/happy_heart_1528022494.jpg 640w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2018/06/happy_heart_1528022494-300x169.jpg 300w" sizes="(max-width: 618px) 100vw, 618px" /><p><strong>दिल के कई मामलों में ओपन हार्ट सर्जरी ही विकल्प है। एक शोध में कहा गया है कि छोटा सा टीबैग दिल के मरीजों को जटिल सर्जरी से बचा सकता है। <img decoding="async" class="aligncenter size-full wp-image-142625" src="http://www.livehalchal.com/wp-content/uploads/2018/06/happy_heart_1528022494.jpg" alt="दिल के कई मामलों में ओपन हार्ट सर्जरी ही विकल्प है। एक शोध में कहा गया है कि छोटा सा टीबैग दिल के मरीजों को जटिल सर्जरी से बचा सकता है।   मिट्रल वॉल्व में आ जाती है समस्या  दिल की बीमारियों में से एक है वाल्व लीक करना। इसमें हृदय के बाएं ओर मौजूद मिट्रल वॉल्व में समस्या आ जाती है। यह दिल की मांसपेशियों में कमजोरी के कारण होता है। आमतौर पर हार्ट अटैक की वजह से मांसपेशियां कमजोर पड़ जाती हैं। इससे वॉल्व खिंच जाता है। दो हिस्सों में बंटे वॉल्व को एक-दूसरे से संपर्क करना होता है, जिससे यह बंद हो सके। इससे दिल द्वारा पंप किया जा रहा रक्त पूरे शरीर में सामान्य रूप से पहुंचता है। हालांकि ऐसा नहीं होने पर शरीर में रक्त संचार की प्रक्रिया में रुकावट आ जाती है।  शरीर में सही से नहीं हो पाता रक्त संचार  विशेषज्ञों का कहना है कि वॉल्व के दोनों के सिरों के बंद नहीं होने से हृदय को सही दिशा में खून पंप करने के लिए अधिक मेहनत करनी पड़ती है। यह मेहनत सिर्फ हृदय ही नहीं, मरीज पर भी काफी भारी पड़ती है। इस समस्या के कारण मरीजे के पूरे शरीर में रक्त का सही से संचार नहीं हो पाता है, जिससे सांस लेने में भयंकर समस्या होने लगती है। इससे जल्दी थकान और शरीर में पानी की कमी हो जाती है। लंदन के बार्ट्स हेल्थ एनएचएस ट्रस्ट कंसल्टेंट इंटरवेंश्नल कार्डियोलॉजिस्ट और प्रमुख शोधकर्ता डॉक्टर माइकल मुलेन ने कहा कि कुछ मरीज चंद कदम चलने में हांफने लगते हैं।   अोपेन हार्ट सर्जरी के लिए उपयुक्त नहीं होते कुछ मरीज  आमतौर पर मिट्रल वॉल्व की लीफलेट्स फिर से एक दूसरे से संपर्क कर सकें, इसके लिए ओपेन हार्ट सर्जरी की जाती रही है। डॉ. मुलेन ने कहा कि वॉल्व लीक करने की समस्या के शिकार मरीज, जिनमें से ज्यादातर को हार्ट अटैक हो चुका होता है। यह मरीज ओपेन हार्ट सर्जरी के लिए उपयुक्त नहीं होते हैं।   दिल की अच्छी सेहत के लिए हफ्ते में तीन बार खाएं मुट्ठी भर नट्स  जांघ में 1 सेंटीमीटर का सुराख कर डाला जाता है कार्डियोबैंड  ब्रिटेन के सेंट बार्थोलोम्यू हॉस्पिटल में पहली बार यह सर्जरी की है, जिससे बड़ी संख्या में लोगों को फायदा मिलने की उम्मीद जताई जा रही है। इसमें मरीज के शरीर में जांघ के पास एक सेंटीमीटर का सुराख किया जाता है, जिसके जरिये ब्रेसलेटनुमा कार्डियोबैंड हृदय की मांसपेशियों तक पहुंचाया जाता है। मरीज की नस के जरिए कैथेटर को हृदय तक पहुंचाया जाता है। कार्डियोबैंड एक 10 सेंटीमीटर लंबा वायर होता है, जिसमें कपड़ा लगा होता है। यह तार टीबैग के तार की तरह होता है।  17 बारीक पेचों की मदद से लगाया जाता है टीबैग वायर  अल्ट्रासाउंड और ऐक्सरे की मदद से इस बैंड को हृदय वॉल्व तक पहुंचाया जाता है। इसमें तकरीबन 17 बारीक पेच लगे होते हैं। इस बैंड को वायर के जरिए सी के आकार में इसमें लगे पेच की सहायता से कस दिया जाता है।" width="640" height="360" srcset="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2018/06/happy_heart_1528022494.jpg 640w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2018/06/happy_heart_1528022494-300x169.jpg 300w" sizes="(max-width: 640px) 100vw, 640px" /></strong></p>
<p><strong>मिट्रल वॉल्व में आ जाती है समस्या</strong></p>
<p><strong>दिल की बीमारियों में से एक है वाल्व लीक करना। इसमें हृदय के बाएं ओर मौजूद मिट्रल वॉल्व में समस्या आ जाती है। यह दिल की मांसपेशियों में कमजोरी के कारण होता है। आमतौर पर हार्ट अटैक की वजह से मांसपेशियां कमजोर पड़ जाती हैं। इससे वॉल्व खिंच जाता है। दो हिस्सों में बंटे वॉल्व को एक-दूसरे से संपर्क करना होता है, जिससे यह बंद हो सके। इससे दिल द्वारा पंप किया जा रहा रक्त पूरे शरीर में सामान्य रूप से पहुंचता है। हालांकि ऐसा नहीं होने पर शरीर में रक्त संचार की प्रक्रिया में रुकावट आ जाती है।</strong></p>
<p><strong>शरीर में सही से नहीं हो पाता रक्त संचार</strong></p>
<p><strong>विशेषज्ञों का कहना है कि वॉल्व के दोनों के सिरों के बंद नहीं होने से हृदय को सही दिशा में खून पंप करने के लिए अधिक मेहनत करनी पड़ती है। यह मेहनत सिर्फ हृदय ही नहीं, मरीज पर भी काफी भारी पड़ती है। इस समस्या के कारण मरीजे के पूरे शरीर में रक्त का सही से संचार नहीं हो पाता है, जिससे सांस लेने में भयंकर समस्या होने लगती है। इससे जल्दी थकान और शरीर में पानी की कमी हो जाती है। लंदन के बार्ट्स हेल्थ एनएचएस ट्रस्ट कंसल्टेंट इंटरवेंश्नल कार्डियोलॉजिस्ट और प्रमुख शोधकर्ता डॉक्टर माइकल मुलेन ने कहा कि कुछ मरीज चंद कदम चलने में हांफने लगते हैं। </strong></p>
<p><strong>अोपेन हार्ट सर्जरी के लिए उपयुक्त नहीं होते कुछ मरीज</strong></p>
<p><strong>आमतौर पर मिट्रल वॉल्व की लीफलेट्स फिर से एक दूसरे से संपर्क कर सकें, इसके लिए ओपेन हार्ट सर्जरी की जाती रही है। डॉ. मुलेन ने कहा कि वॉल्व लीक करने की समस्या के शिकार मरीज, जिनमें से ज्यादातर को हार्ट अटैक हो चुका होता है। यह मरीज ओपेन हार्ट सर्जरी के लिए उपयुक्त नहीं होते हैं। </strong></p>
<p><strong>दिल की अच्छी सेहत के लिए हफ्ते में तीन बार खाएं मुट्ठी भर नट्स</strong></p>
<p><strong>जांघ में 1 सेंटीमीटर का सुराख कर डाला जाता है कार्डियोबैंड</strong></p>
<p><strong>ब्रिटेन के सेंट बार्थोलोम्यू हॉस्पिटल में पहली बार यह सर्जरी की है, जिससे बड़ी संख्या में लोगों को फायदा मिलने की उम्मीद जताई जा रही है। इसमें मरीज के शरीर में जांघ के पास एक सेंटीमीटर का सुराख किया जाता है, जिसके जरिये ब्रेसलेटनुमा कार्डियोबैंड हृदय की मांसपेशियों तक पहुंचाया जाता है। मरीज की नस के जरिए कैथेटर को हृदय तक पहुंचाया जाता है। कार्डियोबैंड एक 10 सेंटीमीटर लंबा वायर होता है, जिसमें कपड़ा लगा होता है। यह तार टीबैग के तार की तरह होता है।</strong></p>
<p><strong>17 बारीक पेचों की मदद से लगाया जाता है टीबैग वायर</strong></p>
<p><strong>अल्ट्रासाउंड और ऐक्सरे की मदद से इस बैंड को हृदय वॉल्व तक पहुंचाया जाता है। इसमें तकरीबन 17 बारीक पेच लगे होते हैं। इस बैंड को वायर के जरिए सी के आकार में इसमें लगे पेच की सहायता से कस दिया जाता है।</strong></p>
]]></content:encoded>
					
		
		
			</item>
	</channel>
</rss>
