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	<title>दिल्ली हाईकोर्ट &#8211; Live Halchal</title>
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	<title>दिल्ली हाईकोर्ट &#8211; Live Halchal</title>
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		<title>आबकारी नीति मामला: सीबीआई के बाद अब ईडी भी पहुंची दिल्ली हाईकोर्ट</title>
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		<pubDate>Tue, 10 Mar 2026 05:50:31 +0000</pubDate>
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		<category><![CDATA[दिल्ली हाईकोर्ट]]></category>
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					<description><![CDATA[ईडी ने अपनी अर्जी में कहा है कि ट्रायल कोर्ट द्वारा की गई टिप्पणियां बहुत ज्यादा और बेवजह की गई हैं। यह भी तर्क दिया है कि अदालत ने अंदाजे के आधार पर बिना उसका पक्ष सुने पीठ पीछे से तल्ख टिप्पणियां की हैं। आबकारी घोटाला मामले में सीबीआई के बाद अब प्रवर्तन निदेशालय भी &#8230;]]></description>
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<p>ईडी ने अपनी अर्जी में कहा है कि ट्रायल कोर्ट द्वारा की गई टिप्पणियां बहुत ज्यादा और बेवजह की गई हैं। यह भी तर्क दिया है कि अदालत ने अंदाजे के आधार पर बिना उसका पक्ष सुने पीठ पीछे से तल्ख टिप्पणियां की हैं।</p>



<p>आबकारी घोटाला मामले में सीबीआई के बाद अब प्रवर्तन निदेशालय भी ट्रायल कोर्ट द्वारा निर्णय में की गई कुछ टिप्पणियों को हटाने की मांग को लेकर लेकर दिल्ली हाई कोर्ट का रुख किया है। ईडी ने मांग की है कि 27 फरवरी के आदेश में उसके खिलाफ की गई टिप्पणियों को हटाने का निर्देश दिया जाए।</p>



<p>ईडी ने अपनी अर्जी में कहा है कि ट्रायल कोर्ट द्वारा की गई टिप्पणियां बहुत ज्यादा और बेवजह की गई हैं। यह भी तर्क दिया है कि अदालत ने अंदाजे के आधार पर बिना उसका पक्ष सुने पीठ पीछे से तल्ख टिप्पणियां की हैं। ईडी की अर्जी पर मंगलवार को न्यायमूर्ति स्वर्ण कांता शर्मा की पीठ सुनवाई करेगी।</p>



<p>बता दें कि प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने दिल्ली हाईकोर्ट से अपील की है कि वह उसकी मनी लॉन्ड्रिंग जांच के बारे में ट्रायल कोर्ट की ओर से की गई टिप्पणियों को हटा दे। ट्रायल कोर्ट ने ये टिप्पणियां हाल ही में सीबीआई के आबकारी नीति मामले में पूर्व सीएम अरविंद केजरीवाल समेत 23 अन्य को आरोपमुक्त करते हुए की थीं।</p>



<p>ईडी ने अपनी याचिका में कहा कि 27 फरवरी का ट्रायल कोर्ट का आदेश साफ तौर पर न्यायिक दखलंदाजी का मामला है, क्योंकि कोर्ट ने उसके खिलाफ सख्त टिप्पणी करने से पहले न तो एजेंसी के सबूतों की जांच की और न ही उसके पक्ष को सुना। केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) का आरोपपत्र आम आदमी पार्टी की सरकार की 2021 की दिल्ली आबकारी नीति में कथित गड़बड़ियों से जुड़ी है। सीबीआई और इंडी ने इस मामले की अलग-अलग जांच की। विशेष जज जितेंद्र सिंह की कोर्ट ने पीएमएलए और ईडी की जांच के बारे में कई सख्त बातें कही थीं।</p>
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		<title>मेवाड़ राजपरिवार का संपत्ति विवाद पहुंचा दिल्ली हाईकोर्ट</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Live Halchal Web_Wing]]></dc:creator>
		<pubDate>Tue, 13 Jan 2026 07:25:09 +0000</pubDate>
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		<category><![CDATA[राज्य]]></category>
		<category><![CDATA[दिल्ली हाईकोर्ट]]></category>
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					<description><![CDATA[सुप्रीम कोर्ट ने दिसंबर 2025 में राजस्थान हाईकोर्ट और बॉम्बे हाईकोर्ट में लंबित सभी संबंधित मामलों को दिल्ली हाईकोर्ट में ट्रांसफर करने का आदेश दिया था, ताकि एक ही जगह पर सुनवाई हो सके। उदयपुर के पूर्व मेवाड़ राजपरिवार का संपत्ति विवाद अब दिल्ली हाईकोर्ट पहुंच गया है। दिवंगत अरविंद सिंह मेवाड़ की स्व-अर्जित संपत्तियों &#8230;]]></description>
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<p>सुप्रीम कोर्ट ने दिसंबर 2025 में राजस्थान हाईकोर्ट और बॉम्बे हाईकोर्ट में लंबित सभी संबंधित मामलों को दिल्ली हाईकोर्ट में ट्रांसफर करने का आदेश दिया था, ताकि एक ही जगह पर सुनवाई हो सके।</p>



<p>उदयपुर के पूर्व मेवाड़ राजपरिवार का संपत्ति विवाद अब दिल्ली हाईकोर्ट पहुंच गया है। दिवंगत अरविंद सिंह मेवाड़ की स्व-अर्जित संपत्तियों के बंटवारे को लेकर उनके बेटे लक्ष्यराज सिंह मेवाड़ और बेटी पद्मजा कुमारी परमार के बीच कानूनी जंग तेज हो गई है। सुप्रीम कोर्ट ने दिसंबर 2025 में राजस्थान हाईकोर्ट और बॉम्बे हाईकोर्ट में लंबित सभी संबंधित मामलों को दिल्ली हाईकोर्ट में ट्रांसफर करने का आदेश दिया था, ताकि एक ही जगह पर सुनवाई हो सके। इस विवाद में मुख्य रूप से अरविंद सिंह मेवाड़ की फरवरी 2025 में बनाई गई वसीयत शामिल है, जिसमें उन्होंने अपनी सभी स्व-अर्जित संपत्तियां बेटे लक्ष्यराज सिंह मेवाड़ को सौंपी थी।</p>



<p>अरविंद सिंह मेवाड़ का निधन 16 मार्च 2025 को हुआ था। वसीयत के अनुसार लक्ष्यराज सिंह ने राजस्थान हाईकोर्ट में प्रशासन पत्र की मांग की, जबकि उनकी बहन पद्मजा कुमारी परमार ने बॉम्बे हाईकोर्ट में वसीयत की वैधता को चुनौती दी। कुछ रिपोर्टों में बहनों ने पिता की मानसिक स्थिति और स्वास्थ्य पर सवाल उठाए हैं, जिसे लक्ष्यराज सिंह ने खारिज करते हुए अपमानजनक बताया है।</p>



<p>दिल्ली हाईकोर्ट में न्यायमूर्ति सुब्रह्मण्यम प्रसाद की पीठ ने सोमवार को मामले की सुनवाई की। कोर्ट ने लक्ष्यराज सिंह मेवाड़ के वकील को दिल्ली हाईकोर्ट के नियमों के अनुसार नया पार्टीज का मेमो दाखिल करने का निर्देश दिया। मामले की अगली सुनवाई 20 जनवरी को निर्धारित की गई है।</p>
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		<title>दिल्ली हाईकोर्ट: 21 साल जेल काटने वाले कैदी की रिहाई पर हाईकोर्ट का बड़ा फैसला</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Live Halchal Web_Wing]]></dc:creator>
		<pubDate>Tue, 26 Aug 2025 07:43:16 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[दिल्ली]]></category>
		<category><![CDATA[राज्य]]></category>
		<category><![CDATA[दिल्ली हाईकोर्ट]]></category>
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					<description><![CDATA[हाईकोर्ट ने 21 साल की सजा पूरी कर चुके कैदी की समयपूर्व रिहाई की याचिका पर सेंटेस रिव्यू बोर्ड (एसआरबी) के फैसले को रद्द कर दिया। अदालत ने कहा कि एसआरबी का फैसला अपर्याप्त तर्कों पर आधारित है और इसमें अपराध की गंभीरता पर अत्यधिक जोर दिया गया है, जबकि कैदी के सुधार और पुनर्वास &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[
<p>हाईकोर्ट ने 21 साल की सजा पूरी कर चुके कैदी की समयपूर्व रिहाई की याचिका पर सेंटेस रिव्यू बोर्ड (एसआरबी) के फैसले को रद्द कर दिया। अदालत ने कहा कि एसआरबी का फैसला अपर्याप्त तर्कों पर आधारित है और इसमें अपराध की गंभीरता पर अत्यधिक जोर दिया गया है, जबकि कैदी के सुधार और पुनर्वास के पहलुओं को नजरअंदाज किया गया है। मामले को दोबारा विचार के लिए एसआरबी को भेज दिया गया है।</p>



<p>न्यायमूर्ति संजीव नारुला की एकल पीठ ने 22 अगस्त 2025 को दिए गए फैसले में कहा कि एसआरबी ने नवीन अहुजा की रिहाई को अस्वीकार करते हुए अपराध की क्रूरता, समाज पर प्रभाव और पुलिस की आपत्ति को मुख्य आधार बनाया। कैदी के जेल में व्यवहार, सामाजिक जांच रिपोर्ट और प्रोबेशन अधिकारी की राय को उचित महत्व नहीं दिया।</p>



<p>अदालत ने पूर्व के कई मामलों का हवाला देते हुए स्पष्ट किया कि अपराध की प्रकृति एक महत्वपूर्ण कारक है, लेकिन यह रिहाई अस्वीकार करने का एकमात्र आधार नहीं हो सकता। नवीन अहुजा को 2005 में कापसहेड़ा थाने में दर्ज एफआईआर के तहत अपनी पत्नी और दो नाबालिग बच्चों की हत्या के लिए दोषी ठहराया गया था। ट्रायल कोर्ट ने उन्हें मौत की सजा सुनाई थी, जिसे दिल्ली हाईकोर्ट ने 2012 में आजीवन कारावास में बदल दिया। सुप्रीम कोर्ट ने 2015 में अपील खारिज कर दी और 2020 में रिव्यू याचिका भी अस्वीकार कर दी।</p>



<p>अदालत के अनुसार, अहुजा ने 24 मार्च 2025 तक 17 साल 11 महीने 21 दिन की वास्तविक सजा और छूट सहित 21 साल 4 महीने 8 दिन की सजा काट ली है। सामाजिक जांच रिपोर्ट में कहा गया कि अहुजा अब अपराध करने की क्षमता खो चुके हैं और समाज में उपयोगी सदस्य बन सकते हैं। हाईकोर्ट ने निर्देश दिया कि एसआरबी आठ सप्ताह के भीतर नई बैठक बुलाकर मामले पर पुनर्विचार करे और कानूनी सिद्धांतों के अनुरूप तर्कपूर्ण आदेश जारी करे।</p>
]]></content:encoded>
					
		
		
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		<title>दिल्ली हाईकोर्ट ने इंजीनियर राशिद की याचिका पर एनआईए को जारी किया नोटिस</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Live Halchal Web_Wing]]></dc:creator>
		<pubDate>Fri, 25 Jul 2025 09:49:31 +0000</pubDate>
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		<category><![CDATA[राज्य]]></category>
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					<description><![CDATA[हाईकोर्ट ने जेल में बंद लोकसभा सांसद इंजीनियर राशिद की अंतरिम जमानत याचिका पर राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) को नोटिस जारी किया है। दिल्ली उच्च न्यायालय ने बारामूला के सांसद इंजीनियर राशिद की अंतरिम जमानत याचिका पर राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) को नोटिस जारी किया है। उच्च न्यायालय ने मामले में सुनवाई के लिए 29 &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[
<p>हाईकोर्ट ने जेल में बंद लोकसभा सांसद इंजीनियर राशिद की अंतरिम जमानत याचिका पर राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) को नोटिस जारी किया है।</p>



<p>दिल्ली उच्च न्यायालय ने बारामूला के सांसद इंजीनियर राशिद की अंतरिम जमानत याचिका पर राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) को नोटिस जारी किया है। उच्च न्यायालय ने मामले में सुनवाई के लिए 29 जुलाई की तारीख तय की है। दरअसल, सांसद इंजीनियर राशिद ने संसद सत्र में भाग लेने के लिए अंतरिम जमानत मांगी है। विशेष एनआईए अदालत ने उनकी अंतरिम जमानत याचिका खारिज कर दी थी।</p>



<p>इससे पहले पटियाला हाउस कोर्ट ने मंगलवार को जेल में बंद लोकसभा सांसद इंजीनियर राशिद को संसद के मानसून सत्र में शामिल होने के लिए 24 जुलाई से 4 अगस्त तक हिरासत में पैरोल दे दी।</p>



<p>राशिद 2017 के आतंकी फंडिंग मामले में गैरकानूनी गतिविधि (रोकथाम) अधिनियम के तहत राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) की तरफ से गिरफ्तार किए जाने के बाद से 2019 से तिहाड़ जेल में बंद हैं। अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश चंदर जीत सिंह ने हिरासत में पैरोल मंजूर की थी।</p>
]]></content:encoded>
					
		
		
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		<item>
		<title>दिल्ली हाईकोर्ट में आज छह नए जजों ने ली शपथ, मुख्य न्यायाधीश रहे मौजूद</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Live Halchal Web_Wing]]></dc:creator>
		<pubDate>Mon, 21 Jul 2025 08:15:24 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[दिल्ली]]></category>
		<category><![CDATA[राज्य]]></category>
		<category><![CDATA[दिल्ली हाईकोर्ट]]></category>
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					<description><![CDATA[दिल्ली हाईकोर्ट में सोमवार को छह नए न्यायाधीशों ने शपथ ली है। इस दौरान मुख्य न्यायाधीश देवेंद्र कुमार उपाध्याय मौजूद रहे। राजधानी दिल्ली में छह नए जजों ने शपथ ली है। जिसके बाद कुल संख्या 40 हो गई है। इस मौके पर मुख्य न्यायाधीश देवेंद्र कुमार उपाध्याय मौजूद रहे। हाईकोर्ट में छह न्यायाधीशों न्यायमूर्ति वी. &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[
<p>दिल्ली हाईकोर्ट में सोमवार को छह नए न्यायाधीशों ने शपथ ली है। इस दौरान मुख्य न्यायाधीश देवेंद्र कुमार उपाध्याय मौजूद रहे।</p>



<p>राजधानी दिल्ली में छह नए जजों ने शपथ ली है। जिसके बाद कुल संख्या 40 हो गई है। इस मौके पर मुख्य न्यायाधीश देवेंद्र कुमार उपाध्याय मौजूद रहे। हाईकोर्ट में छह न्यायाधीशों न्यायमूर्ति वी. कामेश्वर राव, न्यायमूर्ति नितिन वासुदेव साम्ब्रे, न्यायमूर्ति विवेक चौधरी, न्यायमूर्ति अनिल क्षेत्रपाल, न्यायमूर्ति अरुण कुमार मोंगा और न्यायमूर्ति ओम प्रकाश शुक्ला ने शपथ ली। इसके साथ ही न्यायालय की क्षमता बढ़कर 40 हो गई।</p>



<p>न्यायमूर्ति संभ्रे पहले बॉम्बे उच्च न्यायालय में थे, जबकि न्यायमूर्ति चौधरी और शुक्ला इलाहाबाद उच्च न्यायालय से हैं। न्यायमूर्ति क्षत्रपाल पंजाब और हरियाणा उच्च न्यायालय में कार्यरत थे और न्यायमूर्ति मोंगा राजस्थान उच्च न्यायालय से आए हैं। न्यायमूर्ति राव को कर्नाटक उच्च न्यायालय से दिल्ली वापस स्थानांतरित किया गया है।</p>



<p>इसके अलावा 16 जुलाई को दिल्ली उच्च न्यायालय के वरिष्ठतम न्यायाधीश, न्यायमूर्ति विभु बाखरू को कर्नाटक उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश के रूप में पदोन्नति पर विदाई दी गई थी। इस पुनर्गठन के परिणामस्वरूप उच्च न्यायालय की तीन सदस्यीय कॉलेजियम का भी पुनर्गठन होगा।</p>



<p>अब तक कॉलेजियम में मुख्य न्यायाधीश उपाध्याय, न्यायमूर्ति बाखरू और न्यायमूर्ति प्रतिभा एम. सिंह शामिल थे। केंद्र सरकार ने 14 जुलाई को सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम की सिफारिश के आधार पर इन छह न्यायाधीशों के दिल्ली उच्च न्यायालय में स्थानांतरण को अधिसूचित किया था।</p>
]]></content:encoded>
					
		
		
			</item>
		<item>
		<title>हाईकोर्ट की वकील को नौ दिनों तक बनाए रखा डिजिटल अरेस्ट, ठग लिए 3.29 करोड़</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Live Halchal Web_Wing]]></dc:creator>
		<pubDate>Thu, 03 Jul 2025 10:27:25 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[दिल्ली]]></category>
		<category><![CDATA[राज्य]]></category>
		<category><![CDATA[दिल्ली हाईकोर्ट]]></category>
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					<description><![CDATA[दिल्ली हाईकोर्ट की वकील सेक्टर-47 निवासी महिला (72) के लैंडलाइन की घंटी 10 जून को बजी। उन्होंने जैसे फोन उठाया, आवाज आई कि आपका नाम अवैध हथियारों की तस्करी, ब्लैकमेलिंग और जुआ में आया है। इसमें आपका आधार नंबर और बैंक खाते इस्तेमाल हो रहे हैं। इससे वह डर गईं। कॉलर ने उन्हें नौ दिनों &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[
<p>दिल्ली हाईकोर्ट की वकील सेक्टर-47 निवासी महिला (72) के लैंडलाइन की घंटी 10 जून को बजी। उन्होंने जैसे फोन उठाया, आवाज आई कि आपका नाम अवैध हथियारों की तस्करी, ब्लैकमेलिंग और जुआ में आया है। इसमें आपका आधार नंबर और बैंक खाते इस्तेमाल हो रहे हैं। इससे वह डर गईं। कॉलर ने उन्हें नौ दिनों तक डिजिटल अरेस्ट रखा। जब तक उन्हें पता चला कि यह जालसाजों की चाल है, तब तक उनके हाथ से 3.29 करोड़ रुपये निकल चुके थे।</p>



<p>जालसाजों ने उन्हें व्हाट्सएप कॉल पर डिजिटल अरेस्ट रखा और इस दौरान पांच अलग-अलग खातों में रकम मंगवाई। उनकी शिकायत पर साइबर थाने में मुकदमा दर्ज हुआ है। कॉल करने वाले ने पीड़िता से कहा कि वह भारत सरकार की एजेंसी से बात कर रहा है। मामले में जेल भी जाना पड़ सकता है। इस मामले में 25 अप्रैल को केस दर्ज हो चुका है।</p>



<p>इसके बाद ठगों ने शख्स को लाइन पर लिया और कहा कि इस मामले में एनओसी वही देंगे। इसके बाद जालसाजों ने व्हाट्सएप पर वीडियो कॉल कर बात की। इसमें बैकग्राउंड में कुछ लोग पुलिस वर्दी में थे और पीछे का हिस्सा थाने जैसा लग रहा था। पूछताछ के क्रम में महिला के बैंक खातों और उसमें जमा राशि के बारे में जानकारी ली।</p>



<p><strong>एफडी तोड़वाकर मंगाई रकम</strong><br>ठगों ने महिला से कहा कि अपनी एफडी तुड़वा लें और सारी रकम बताए गए खाते में ट्रांसफर कर दें। जालसाजों ने क्लीन चिट मिलने पर पूरी रकम वापस करने का वादा किया। इसके बाद महिला परेशान हो गईं।</p>



<p>इसके बाद नौ दिन तक जालसाजों ने उन्हें डिजिटल अरेस्ट रखा और किसी को जानकारी न देने की हिदायत दी। महिला ने जालसाजों के बताए गए खाते में 3.29 करोड़ रुपये ट्रांसफर कर दिए। आरोपियों ने अपना नाम शिव प्रसाद, प्रदीप सावंत और प्रवीण सूद बताया था।</p>
]]></content:encoded>
					
		
		
			</item>
		<item>
		<title>संसद की सुरक्षा में सेंध के आरोपी नीलम-महेश को राहत, दिल्ली हाईकोर्ट ने दी जमानत</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Live Halchal Web_Wing]]></dc:creator>
		<pubDate>Wed, 02 Jul 2025 08:29:09 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[दिल्ली]]></category>
		<category><![CDATA[राजनीति]]></category>
		<category><![CDATA[राज्य]]></category>
		<category><![CDATA[दिल्ली हाईकोर्ट]]></category>
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					<description><![CDATA[संसद की सुरक्षा में चूक के मामले में दिल्ली हाई कोर्ट ने दो आरोपियों नीलम आजाद और महेश कुमावत को जमानत दे दी है। हाईकोर्ट ने आरोपियों को 50-50 हजार रुपये के निजी मुचलके और इतनी ही राशि की दो जमानतों पर राहत प्रदान की। बता दें कि 13 दिसंबर 2023 को संसद की सुरक्षा &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[
<p>संसद की सुरक्षा में चूक के मामले में दिल्ली हाई कोर्ट ने दो आरोपियों नीलम आजाद और महेश कुमावत को जमानत दे दी है। हाईकोर्ट ने आरोपियों को 50-50 हजार रुपये के निजी मुचलके और इतनी ही राशि की दो जमानतों पर राहत प्रदान की। बता दें कि 13 दिसंबर 2023 को संसद की सुरक्षा में सेंध लगाने के मामले में अन्य आरोपियों के साथ गिरफ्तार किया गया था।</p>



<p>इससे पहले निचली अदालत ने आरोपियों की जमानत याचिका को खारिज कर दिया था। जिसके बाद आरोपियों ने निचली अदालत के आदेश को चुनौती दी थी। जस्टिस सुब्रमण्यम प्रसाद और हरीश वैद्यनाथन शंकर की बेंच ने नीलम आजाद और महेश कुमावत को जमानत दी है। कोर्ट ने जमानत देने से पहले कुछ शर्तें भी रखी हैं। न्यायाधीश ने उन्हें मीडिया को साक्षात्कार न देने और घटना से संबंधित सोशल मीडिया पोस्ट न करने का भी निर्देश दिया।</p>



<p><strong>क्या था पूरा मामला<br></strong>मामला 2023 का है, जिस दिन संसद पर हुए आतंकवादी हमले की बरसी भी थी। लोकसभा में शून्यकाल के दौरान सागर शर्मा और मनोरंजन डी दर्शक दीर्घा से नीचे सदन में कूद गए थे। उन्होंने जूते से स्मोक कैन निकालकर पीली गैस छोड़ी और नारेबाजी की। लगभग उसी समय, दो अन्य आरोपियों अमोल शिंदे और नीलम आजाद ने संसद परिसर के बाहर रंगनी गैस छोड़ी और नारेबाजी की। आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया गया था।</p>
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		<title>दिल्ली हाईकोर्ट की अहम टिप्पणी- डीएनए रिपोर्ट पितृत्व का साक्ष्य</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Live Halchal Web_Wing]]></dc:creator>
		<pubDate>Fri, 04 Apr 2025 06:21:47 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[दिल्ली]]></category>
		<category><![CDATA[राज्य]]></category>
		<category><![CDATA[दिल्ली हाईकोर्ट]]></category>
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					<description><![CDATA[अदालत ने स्पष्ट किया कि डीएनए रिपोर्ट केवल पितृत्व को साबित करती है, सहमति की अनुपस्थिति को नहीं। दिल्ली हाईकोर्ट ने दुष्कर्म के एक मामले में डीएनए रिपोर्ट पर महत्वपूर्ण टिप्पणी की है। अदालत ने स्पष्ट किया कि डीएनए रिपोर्ट केवल पितृत्व को साबित करती है, सहमति की अनुपस्थिति को नहीं। अदालत ने ट्रायल कोर्ट &#8230;]]></description>
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<p>अदालत ने स्पष्ट किया कि डीएनए रिपोर्ट केवल पितृत्व को साबित करती है, सहमति की अनुपस्थिति को नहीं।</p>



<p>दिल्ली हाईकोर्ट ने दुष्कर्म के एक मामले में डीएनए रिपोर्ट पर महत्वपूर्ण टिप्पणी की है। अदालत ने स्पष्ट किया कि डीएनए रिपोर्ट केवल पितृत्व को साबित करती है, सहमति की अनुपस्थिति को नहीं। अदालत ने ट्रायल कोर्ट से 10 साल की जेल की सजा पाए दुष्कर्म के दोषी को बरी कर दिया।</p>



<p>न्यायमूर्ति अमित महाजन ने कहा कि हालांकि डीएनए रिपोर्ट ने यह साबित कर दिया है कि महिला से पैदा हुए बच्चे का जैविक पिता आरोपी ही है, लेकिन दुष्कर्म के अपराध को साबित करने के लिए गर्भावस्था अपर्याप्त थी, जब तक कि यह भी साबित न हो जाए कि कृत्य सहमति के बिना किया गया था।</p>



<p>एकल जज की पीठ ने पाया कि डीएनए रिपोर्ट केवल पितृत्व को साबित करती है, यह अपने आप में सहमति की अनुपस्थिति को साबित नहीं करती। यह एक सामान्य कानून है कि आईपीसी की धारा 376 (दुष्कर्म) के तहत अपराध सहमति की अनुपस्थिति पर टिका है। संदेह का लाभ अपीलकर्ता को मिलना चाहिए। कानून केवल चुप्पी से सहमति नहीं मानता है, लेकिन यह सबूत के अभाव में भी दोषी नहीं ठहराता है।</p>



<p>महिला की गवाही असंगत पाई गई, अदालत ने पाया कि दुष्कर्म को साबित करने के लिए चिकित्सा और फॉरेंसिक सबूत भी नहीं थे। अदालत ने कहा कि एक वयस्क, शिक्षित और अपने परिवार के साथ रहने के बावजूद महिला ने इस बात का कोई स्पष्टीकरण नहीं दिया कि उसने पहले अधिकारियों से संपर्क क्यों नहीं किया।</p>



<p>महिला ने आरोप लगाया था कि उसके पड़ोस में रहने वाले व्यक्ति ने लूडो खेलने के बहाने उसे अपने घर पर बुलाकर कई बार उसके साथ दुष्कर्म किया। उसने कहा कि आखिरी घटना 2017 में अक्तूबर या नवंबर में हुई थी और बाद में उसे पता चला कि वह गर्भवती है।</p>



<p><strong>ट्रायल कोर्ट के आदेश को दी गई थी चुनौती</strong><br>जनवरी 2018 में उस व्यक्ति के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की गई थी और दिसंबर 2022 में एक ट्रायल कोर्ट ने उसे दोषी ठहराया था। उसने इस आधार पर अपनी सजा को चुनौती दी कि महिला के साथ उसका रिश्ता सहमति से था।</p>
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		<title>दिल्ली: हाईकोर्ट में याचिका लगाकर रंगदारी मांगने वाला गिरफ्तार</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Live Halchal Web_Wing]]></dc:creator>
		<pubDate>Sat, 29 Mar 2025 05:34:01 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[दिल्ली]]></category>
		<category><![CDATA[राज्य]]></category>
		<category><![CDATA[दिल्ली हाईकोर्ट]]></category>
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					<description><![CDATA[दिल्ली हाईकोर्ट में याचिका लगाकर रंगदारी मांगने वाला आरोपी गिरफ्तार हो गया है। कोर्ट ने कहा कि हर शिकायत की अलग प्राथमिकी और जांच की जानी चाहिए। पुलिस को पेशेवर तरीके से काम करना चाहिए। हाईकोर्ट में याचिका लगाकर रंगदारी मांगने वाले एक आरोपी को तिगड़ी थाना पुलिस ने गिरफ्तार किया है। अदालत में सुनवाई &#8230;]]></description>
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<p>दिल्ली हाईकोर्ट में याचिका लगाकर रंगदारी मांगने वाला आरोपी गिरफ्तार हो गया है। कोर्ट ने कहा कि हर शिकायत की अलग प्राथमिकी और जांच की जानी चाहिए। पुलिस को पेशेवर तरीके से काम करना चाहिए।</p>



<p>हाईकोर्ट में याचिका लगाकर रंगदारी मांगने वाले एक आरोपी को तिगड़ी थाना पुलिस ने गिरफ्तार किया है। अदालत में सुनवाई के दौरान आरोपी के खिलाफ पूर्व में भी ऐसी कई शिकायतों का खुलासा हुआ।मामला अदालत के संज्ञान में आने पर एडिशनल सेशन जज रविंद्र कुमार पांडेय ने जिला पुलिस उपायुक्त से आरोपी के खिलाफ दाखिल अन्य शिकायतों पर विस्तृत रिपोर्ट तलब की है।</p>



<p>शिकायतकर्ता प्राॅपर्टी डीलर ने ओम प्रकाश नाम के एक व्यक्ति के खिलाफ एक करोड़ रुपये की रंगदारी और फ्लैट मांगने का आरोप लगाया है। शिकायतकर्ता का दावा है कि आरोपी ने मांग न माने जाने पर दिल्ली हाईकोर्ट में एक रिट पिटीशन भी दाखिल की और न्यायिक प्रक्रिया को आधार बनाकर रंगदारी की रकम बढ़ा दी।</p>



<p>प्राॅपर्टी डीलर संजय ने पुलिस को दी शिकायत में कहा कि उसकी एक साइट पर निर्माण कार्य चल रहा है। इस दौरान आरोपी ओम प्रकाश ने उससे 1 करोड़ रुपये, एक फ्लैट और निर्माणाधीन प्रॉपर्टी में हिस्सेदारी की मांग की। धमकी दी कि यदि मांग पूरी नहीं की गई, तो वह उसकी इमारत के खिलाफ नागरिक निकायों में शिकायत करेगा और दिल्ली हाईकोर्ट में रिट याचिका दायर कर इमारत तुड़वा देगा।</p>



<p>अदालत ने मामले की गंभीरता को देखते हुए एसीपी और थाना प्रभारी को अगली सुनवाई में उपस्थित रहने का निर्देश दिया है। साथ ही आरोपी के खिलाफ अन्य शिकायतों की स्थिति रिपोर्ट दाखिल करने के निर्देश दिए हैं। पुलिस अधिकारियों ने आरोपी की आवाज के नमूने इत्यादि की जांच के लिए आवेदन किया है।</p>



<p>प्रॉपर्टी के खिलाफ एमसीडी, थाने और अन्य एजेंसियों में दी शिकायत: संजय के अनुसार, ओम प्रकाश ने उसकी प्रॉपर्टी के खिलाफ एमसीडी, स्थानीय थाने और अन्य एजेंसियों में शिकायतें दीं। आरोपी ने 9 सितंबर 2024 को दिल्ली हाईकोर्ट में रिट याचिका दायर की, जिसकी सुनवाई न्यायमूर्ति पुरुषेंद्र कुमार कौरव की बेंच में हुई।</p>



<p>इसके बाद ओम प्रकाश ने कुछ स्थानीय लोगों के साथ मिलकर संजय से संपर्क किया और 20 लाख मांगे। 16 अक्तूबर 2024 को ओम प्रकाश ने अपने वकील रिंकू यादव के माध्यम से याचिका वापस ले ली। बाद में उसने उसी याचिका को बहाल करने के लिए आवेदन दायर किया और अधिक पैसों की मांग की। अदालत ने पुलिस से सभी शिकायतों पर विस्तृत रिपोर्ट मांगी है।</p>



<p><strong>आज होगी सुनवाई</strong><br>अदालत ने पुलिस द्वारा अलग-अलग शिकायतों के पीड़ितों को भी इस केस में शामिल करने पर सवाल उठाया। अदालत ने कहा कि हर शिकायत की अलग प्राथमिकी और जांच की जानी चाहिए। पुलिस को पेशेवर तरीके से काम करना चाहिए। अदालत ने जिला पुलिस उपायुक्त को अगली तारीख पर विस्तृत रिपोर्ट दाखिल करने के निर्देश दिए हैं। अदालत ने मामले की सुनवाई 29 मार्च के लिए तय की है।</p>
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		<title>दिल्ली: सेवा बुक में नाम न होने पर भी पारिवारिक पेंशन के हकदार होंगे परिजन</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Live Halchal Web_Wing]]></dc:creator>
		<pubDate>Tue, 07 Jan 2025 06:14:09 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[दिल्ली]]></category>
		<category><![CDATA[राज्य]]></category>
		<category><![CDATA[दिल्ली हाईकोर्ट]]></category>
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					<description><![CDATA[पीठ ने स्पष्ट किया कि भले ही सरकारी कर्मचारियों के परिवार के सदस्यों के नाम सेवा पुस्तिका में दर्ज न हों, फिर भी वे योग्य होने पर पारिवारिक पेंशन के लिए आवेदन कर सकते हैं। दिल्ली हाईकोर्ट ने पारिवारिक पेंशन के लिए आवेदन करने वाले परिवारों को राहत दी है। अदालत ने कहा कि पारिवारिक &#8230;]]></description>
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<p>पीठ ने स्पष्ट किया कि भले ही सरकारी कर्मचारियों के परिवार के सदस्यों के नाम सेवा पुस्तिका में दर्ज न हों, फिर भी वे योग्य होने पर पारिवारिक पेंशन के लिए आवेदन कर सकते हैं।</p>



<p>दिल्ली हाईकोर्ट ने पारिवारिक पेंशन के लिए आवेदन करने वाले परिवारों को राहत दी है। अदालत ने कहा कि पारिवारिक पेंशन पाने के लिए सरकारी कर्मचारी को सेवा पुस्तिका में परिवार के सभी सदस्यों के नाम बताने की ज़रूरत नहीं है। न्यायालय ने सिविल न्यायालय के उस आदेश को रद्द कर दिया, जिसमें याचिकाकर्ता द्वारा सीपीसी के आदेश (सात) नियम (11) के तहत एक आवेदन को खारिज कर दिया गया था।</p>



<p>न्यायमूर्ति नीना बंसल कृष्णा की एकल पीठ ने कहा, सीसीएस पेंशन नियमों के अनुसार, पारिवारिक पेंशन मृतक पेंशनभोगी के परिवार के सदस्यों यानी विधवा या विधुर, बच्चों, आश्रित माता-पिता और आश्रित भाई-बहनों को देय होगी।</p>



<p>दिल्ली सरकार के शिक्षा विभाग में संगीत शिक्षिका के रूप में कार्यरत थीं और सेवानिवृत्त हो गईं। वह अपनी शादी से पहले सरकारी सेवा में शामिल हुई थीं। उनके पति, जो एक सेवानिवृत्त सरकारी कर्मचारी भी थे, ने मुकदमा दायर कर आरोप लगाया कि उन्होंने अपने सेवा रिकॉर्ड में अपनी वैवाहिक स्थिति को छिपाया है, जिससे वह पारिवारिक पेंशन के अपने अधिकारों से वंचित हो गए हैं।</p>



<p><strong>पांच आरोपियों की क्षमा याचिका पर 13 जनवरी को होगी सुनवाई<br></strong>दीवान हाउसिंग फाइनेंस लिमिटेड के पूर्व प्रमोटर कपिल वधावन से जुड़े करोड़ों रुपये के बैंक ऋण घोटाला मामले में पांच आरोपियों की ओर से दायर आवेदनों पर राउज एवेन्यू कोर्ट 13 जनवरी को सुनवाई करेगी। याचिका में आरोपियों ने मामले में माफी मांगने और सरकारी गवाह बनने की मांग की है।</p>



<p>विशेष न्यायाधीश अश्विनी कुमार सरपाल ने आरोपियों विवेक जयेश थार, मालव मेहता, गोपाल दलवी, राजेन वसंत कुमार ध्रुव और अरविंद कायन की तरफ से दायर क्षमादान और अभियोजन पक्ष का गवाह बनने की मांग वाली याचिकाओं को अगली तारीख के लिए स्थगित कर दिया। साथ ही, उन्हें अपने दावों को पुष्ट करने के लिए अतिरिक्त दस्तावेज उपलब्ध कराने का निर्देश दिया। न्यायाधीश ने चार जनवरी को पारित आदेश में कहा कि इस आवेदन को आगे के विचार के लिए 13 जनवरी, 2025 को रखा जाए।</p>



<p>न्यायाधीश ने कहा कि केवल यह तथ्य कि अभियोजन पक्ष ने कोई आपत्ति नहीं जताई है, आवेदनों को अनुमति देने के लिए पर्याप्त नहीं है। न्यायाधीश ने आगे स्पष्ट किया कि आरोपियों की ओर से अपने आवेदनों के समर्थन में दिए गए बयान का इस्तेमाल फिलहाल इस याचिका के निपटारे के अलावा किसी अन्य उद्देश्य के लिए नहीं किया जाएगा। मामले में एफआईआर यूनियन बैंक ऑफ इंडिया की शिकायत पर आधारित थी।</p>



<p>एचएमपीवी का पता सिर्फ लक्षणों के आधार पर लगाना मुश्किल होता है, क्योंकि इसके लक्षण आरएसवी और फ्लू जैसी बीमारियों की तरह दिखते हैं। इसका पता लगाने के लिए रिवर्स ट्रांसक्रिप्शन पॉलीमरेज चेन रिएक्शन (आरटी-पीसीआर) टेस्ट कराया जाता है। इसके अलावा, तेजी से नतीजे देने वाले एंटीजन डिटेक्शन टेस्ट भी मौजूद हैं। भारत में, आईसीएमआर और इंटीग्रेटेड डिजीज सर्विलांस प्रोग्राम (आईडीएसपी) जैसे संस्थान एचएमपीवी और अन्य श्वसन वायरसों की निगरानी करते हैं।</p>
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