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	<title>दातासिंह वाला बॉर्डर &#8211; Live Halchal</title>
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		<title>किसान आन्दोलन: दातासिंह वाला बॉर्डर से हटने के मूड में नहीं किसान</title>
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		<pubDate>Sat, 09 Mar 2024 05:27:51 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[बड़ीखबर]]></category>
		<category><![CDATA[राज्य]]></category>
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					<description><![CDATA[<img width="618" height="336" src="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2024/03/Capture-14-large.png" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" fetchpriority="high" srcset="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2024/03/Capture-14.png 1024w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2024/03/Capture-14-medium.png 300w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2024/03/Capture-14-768x417.png 768w" sizes="(max-width: 618px) 100vw, 618px" />दातासिंह वाला बॉर्डर पर 13 फरवरी से बैठे किसानों का मूड पीछे हटने का नहीं लग रहा है। एक-दो दिन में लोकसभा चुनाव की घोषणा होने वाली है। इसके बाद केंद्र में नई सरकार बनेगी। इस प्रक्रिया में कम से कम डेढ़ महीने का समय लगेगा। किसानों की मंशा केंद्र में नई सरकार बनने तक &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<img width="618" height="336" src="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2024/03/Capture-14-large.png" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" srcset="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2024/03/Capture-14.png 1024w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2024/03/Capture-14-medium.png 300w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2024/03/Capture-14-768x417.png 768w" sizes="(max-width: 618px) 100vw, 618px" />
<p>दातासिंह वाला बॉर्डर पर 13 फरवरी से बैठे किसानों का मूड पीछे हटने का नहीं लग रहा है। एक-दो दिन में लोकसभा चुनाव की घोषणा होने वाली है। इसके बाद केंद्र में नई सरकार बनेगी। इस प्रक्रिया में कम से कम डेढ़ महीने का समय लगेगा। किसानों की मंशा केंद्र में नई सरकार बनने तक बॉर्डर पर डटे रहने की है। किसान अब यहां पक्के टेंट लगाकर धरना जारी रखेंगे।</p>



<p>जिस प्रकार पहले किसान आंदोलन के दौरान दिल्ली बॉर्डर पर सभी जिलों की तरफ से अपने-अपने टेंट लगाए गए थे, उसी प्रकार का दृश्य अब दातासिंह वाला बॉर्डर पर देखने के लिए मिल रहा है। यहां पर हिसार, जींद के टेंट लग चुके हैं। इसके अलावा पंजाब के भी हर जिले से टेंट लगाए जा रहे हैं। इससे साफ है कि किसानों का यह आंदोलन काफी लंबा चल सकता है।</p>



<p>नवंबर 2020 में भी किसानों ने तीन कृषि कानूनों के विरोध में दिल्ली कूच किया था। सरकार ने जब मांग नहीं मानी तो उन्होंने दिल्ली में बॉर्डर पर डेरा डाल दिया था। यह आंदोलन डेढ़ साल तक चला। इसमें हरियाणा के हर जिले के अपने-अपने टेंट लगाए गए थे। इसके बाद यहां पर खापों की तरफ से भी टेंट लगाए गए। बाकायदा खाप अपने-अपने गांवों से लोगों को यहां रहने के लिए 15-15 दिन की ड्यूटी लगा रही थी।</p>



<p>15 दिन बाद इस टेंटों में दूसरे लोगों को भेज दिया जाता था। इसी प्रकार का नजारा अब यहां दातासिंह वाला बॉर्डर पर देखने के लिए मिलेगा। यहां पर फिलहाल हिसार की तरफ से टेंट लग चुका है। जींद की तरफ से भी टेंट लगाया गया है। आसपास के गांवों के लोग यहां पर प्रतिदिन चाय का बंदोबस्त कर रहे हैं। इसके अलावा यहां अब दूसरे जिलों से भी लोग आने लगे हैं ।</p>



<p><strong>जींद, हिसार, कैथल, सोनीपत और पानीपत के लगे टेंट</strong><br>दातासिंह वाला बॉर्डर पर पानीपत से रणबीर, सोनीपत से हंसवीर, नरवाना से इंद्र सिंह बेलरखां, हिसार से दशरथ, कैथल से होशियार सिंह गिल, हर्षदीप गिल, सुरेश जुल्हेड़ा, दलशेर ढाकल, अशोक पहलवान ने अपने-अपने जिलों के टेंट लगा लिए हैं। इन सभी का कहना है कि एक-एक गांव की तरफ से पांच-पांच किसानों की ड्यूटी यहां पर 10-10 दिन के लिए लगा दी गई है। दस दिन बाद यह किसान वापस अपने गांव चले जाएंगे। इनके स्थान पर दूसरे किसान यहां धरने में शामिल होंगे।</p>



<p>किसान नेता अभिमन्यु कोहाड़, सुनील बदोवाल, होशियार सिंह खरल ने कहा कि 10 मार्च को प्रदेश में रेल रोकने का काम किया जाएगा। जब तक उनकी मांग पूरी नहीं हो जाती, तब तक वह वापस नहीं जाएंगे।<br>दिल्ली में डेढ़ साल तक किसानों का आंदोलन चला था। अब दातासिंह वाला बॉर्डर पर चाहे दो साल आंदोलन चले, कोई परेशानी नहीं है। यदि उनके नेताओं ने दिल्ली कूच का निर्णय लिया तो वह बीच में दिल्ली कूच को भी तैयार हैं। यदि लोकसभा चुनाव के बाद नई सरकार से बातचीत के लिए भी उन्हें रुकना पड़े तो इसके लिए भी वह तैयार हैं।</p>
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		<title>दातासिंह वाला बॉर्डर के बजाय पटियाला में हुई किसान संगठनों की बैठक</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Live Halchal Web_Wing]]></dc:creator>
		<pubDate>Thu, 29 Feb 2024 05:50:36 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[राज्य]]></category>
		<category><![CDATA[हरियाणा]]></category>
		<category><![CDATA[दातासिंह वाला बॉर्डर]]></category>
		<category><![CDATA[पटियाला]]></category>
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					<description><![CDATA[<img width="618" height="355" src="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2024/02/haryana-3-23-large.jpg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" srcset="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2024/02/haryana-3-23.jpg 834w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2024/02/haryana-3-23-medium.jpg 300w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2024/02/haryana-3-23-768x441.jpg 768w" sizes="(max-width: 618px) 100vw, 618px" />किसानों की सभी मांगों पर विस्तार से चर्चा की गई है। गुरुवार को पत्रकार वार्ता में पूरी जानकारी दी जाएगी। करनैल सिंह के शव को बॉर्डर पर लाकर श्रद्धांजलि दी गई। किसान नेता कुहाड़ ने कहा कि मांगें पूरी करवाए बिना नहीं लौटेंगे। दातासिंह वाला बॉर्डर पर बुधवार को पूरा दिन शांति रही। यहां पर &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<img width="618" height="355" src="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2024/02/haryana-3-23-large.jpg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" loading="lazy" srcset="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2024/02/haryana-3-23.jpg 834w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2024/02/haryana-3-23-medium.jpg 300w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2024/02/haryana-3-23-768x441.jpg 768w" sizes="auto, (max-width: 618px) 100vw, 618px" />
<p>किसानों की सभी मांगों पर विस्तार से चर्चा की गई है। गुरुवार को पत्रकार वार्ता में पूरी जानकारी दी जाएगी। करनैल सिंह के शव को बॉर्डर पर लाकर श्रद्धांजलि दी गई। किसान नेता कुहाड़ ने कहा कि मांगें पूरी करवाए बिना नहीं लौटेंगे।</p>



<p>दातासिंह वाला बॉर्डर पर बुधवार को पूरा दिन शांति रही। यहां पर बुधवार को पंजाब के सभी किसान संगठनों की संयुक्त बैठक होनी थी, लेकिन वह बॉर्डर की बजाय पटियाला में हुई। बैठक में किसानों की सभी मांगों पर मंथन किया गया और कहा गया कि जब तक मांग पूरी नहीं हो जाती, तब तक आंदोलन जारी रहेगा। किसान दिल्ली कूच का अपना अभियान जारी रखेंगे।</p>



<p>गुरुवार&nbsp;को बॉर्डर पर पत्रकारवार्ता की जाएगी, जिसमें किसान अपने भविष्य की रणनीति का खुलासा करेंगे। इसके अलावा मृतक किसान करनैल सिंह के शव को बॉर्डर पर लाया गया और श्रद्धांजलि दी गई। जनसभा को संबोधित करते हुए किसान नेता अभिमन्यु कोहाड़ ने कहा कि जब तक उनकी मांग पूरी नहीं होती, तब तक वह पीछे नहीं हटेंगे।</p>



<p>किसान नेता जगजीत सिंह डल्लेवाल ने बताया कि पहले दातासिंह वाला बॉर्डर पर किसान संगठनों की संयुक्त बैठक करने का निर्णय था, लेकिन अन्य किसान संगठनों के लिए दूरी अधिक होने के कारण यह बैठक पटियाला में की गई। इसमें किसानों की सभी मांगों पर मंथन किया गया और उन्हें पूर करवाने के लिए सरकार पर कैसे दबाव बनाया जाए, इसपर विचार किया गया।</p>



<p>दिल्ली कूच अभी जारी रहेगा। बैठक के बाद सभी किसान संगठन फैसला लेंगे जो वीरवार को बॉर्डर पर पत्रकारों को बताया जाएगा। फिलहाल किसान अपनी मांगों पर पहले की तरह ही अडिग हैं। दोपहर बाद लगभग ढाई बजे मृतक किसान करनैल सिंह का शव बॉर्डर पर लाया गया और उन्हें श्रद्धांजलि दी गई। करनैल सिंह की मंगलवार को मौत हो गई थी।</p>



<p><strong>आंदोलन पूरी शांति के साथ जारी रहेगा</strong><br>किसान नेता अभिमन्यु कोहाड़ ने कहा कि किसान आंदोलन पूरी तरह शांति के साथ जारी रहेगा। जब तक किसानों की मांग पूरी नहीं हो जाती, तब तक वह पीछे हटने वाले नहीं हैं। किसानों की तरफ से पहले भी शांति भंग नहीं की गई थी और भविष्य में भी नहीं की जाएगी। सरकार उन्हें शांति से दिल्ली जाने दे। वह दिल्ली में धरना देना चाहते हैं और सरकार से अपनी मांग मनवाना चाहते हैं।</p>



<p><strong>आज के निर्णय पर सबकी निगाहें</strong><br>गुरुवार को बॉर्डर पर सुनाए जाने वाले निर्णय पर सभी की निगाहें हैं। हालांकि किसानों ने अपना फैसला लगभग आज की बैठक में तय कर लिया है, लेकिन उन्होंने दिल्ली कूच या अन्य कोई भी अंतिम निर्णय नहीं लिया है। वीरवार को इसका फैसला सभी को सुनाया जाएगा। इसके बाद ही आंदोलन की दिशा तय होगी।</p>
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		<title>दातासिंह वाला बॉर्डर पर किसानों और जवानों के बीच चला संघर्ष</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Live Halchal Web_Wing]]></dc:creator>
		<pubDate>Wed, 14 Feb 2024 06:54:23 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[पंजाब]]></category>
		<category><![CDATA[राज्य]]></category>
		<category><![CDATA[दातासिंह वाला बॉर्डर]]></category>
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					<description><![CDATA[<img width="618" height="325" src="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2024/02/punjab-1-12-large.jpg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" loading="lazy" srcset="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2024/02/punjab-1-12.jpg 838w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2024/02/punjab-1-12-medium.jpg 300w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2024/02/punjab-1-12-768x404.jpg 768w" sizes="auto, (max-width: 618px) 100vw, 618px" />किसान आंदोलन को लेकर जींद एक बार फिर धधक उठा। कभी किसान तो कभी पुलिस पीछे हटती रही। दाता सिंह वाला बॉर्डर पर किसानों और जवानों के बीच संघर्ष चलता रहा। दो वर्ष पहले भी यही स्थिति हुई थी।&#160; जींद जिला हमेशा राजनीतिक गढ़ रहा है। अब यह किसान आंदोलन का गढ़ बनता जा रहा &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<img width="618" height="325" src="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2024/02/punjab-1-12-large.jpg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" loading="lazy" srcset="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2024/02/punjab-1-12.jpg 838w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2024/02/punjab-1-12-medium.jpg 300w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2024/02/punjab-1-12-768x404.jpg 768w" sizes="auto, (max-width: 618px) 100vw, 618px" />
<p>किसान आंदोलन को लेकर जींद एक बार फिर धधक उठा। कभी किसान तो कभी पुलिस पीछे हटती रही। दाता सिंह वाला बॉर्डर पर किसानों और जवानों के बीच संघर्ष चलता रहा। दो वर्ष पहले भी यही स्थिति हुई थी।&nbsp;</p>



<p>जींद जिला हमेशा राजनीतिक गढ़ रहा है। अब यह किसान आंदोलन का गढ़ बनता जा रहा है। दो वर्ष पहले भी किसान आंदोलन के दौरान पंजाब के किसान जींद से होते हुए दिल्ली पहुंचे थे। जींद जिले की सीमा पंजाब के साथ लगती थी। दिल्ली जाने के लिए यही रास्ता सबसे उपयुक्त है। दातासिंह वाला गांव के पास पंजाब का बॉर्डर है।&nbsp;</p>



<p>पंजाब के किसान पहले भी दातासिंह वाला बॉर्डर से होते हुए जींद पहुंचे थे। उसके बाद दिल्ली के लिए रवाना हुए थे। इस बार पुलिस ने सुरक्षा के काफी इंतजाम किए हैं, इसलिए किसान बॉर्डर पर ही संघर्ष कर रहे हैं। अभी तक पंजाब के किसान हरियाणा में प्रवेश नहीं कर पाए हैं।&nbsp;</p>



<p>रात को उनके हरियाणा में प्रवेश करने की उम्मीद है। पुलिस ने इसको भांपते हुए नरवाना शहर से हिसार-चंडीगढ़ की तरफ जाने वाले फ्लाईओवर को भी पुलिस ने ब्लॉक कर दिया है। इसके बाद उचाना में भी पुलिस ने नाका लगा दिया है। संवाद</p>



<p><strong>सुबह दस बजे</strong><br>सुबह 10 बजे तक दातासिंह वाला बॉर्डर पर स्थिति पूरी तरह से नियंत्रण में थी। इसके बाद बाइकों से काफी किसान पंजाब की तरफ से दातासिंह वाला बॉर्डर पर पहुंच गए। लगभग 11 बजे इन्होंने दातासिंह वाला बॉर्डर पर लगाई गई कीलों को उखाड़ने का प्रयास किया। इस पर पुलिस ने इनको खदेड़ दिया। यह किसान इसके बाद पीछे हट गए।&nbsp;</p>



<p>दो बजे के आसपास काफी संख्या में और किसान यहां जमा हो गए और हरियाणा के किसान भी इनकी मदद के लिए पहुंच गए। 2 बजे किसानों ने फिर से कीलों को उखाड़ना शुरू कर दिया। इस पर पुलिस ने आंसू गैस के गोले दागे और पानी की बौछार शुरू कर दी। लगभग एक घंटे तक कभी किसान पीछे हट गए तो कभी पुलिस पीछे हट गई। यह सिलसिला जारी रहा।</p>



<p><strong>दोपहर तीन बजे</strong><br>दोपहर तीन बजे किसानों की संख्या बढ़ गई और फिर से वह बॉर्डर की तरफ बढ़ने लगे। इस बार पुलिस ने फिर से आंसू गैस के गोले छोड़े और वाटर कैनन से पानी की बौछार शुरू कर दी। काफी किसान खेतों के रास्ते आगे बढ़ने लगे तो पुलिस ने लाठीचार्ज कर दिया।&nbsp;</p>



<p>दूसरी तरफ से किसानों ने भी पत्थरबाजी शुरू कर दी। इसमें 15 पुलिस कर्मचारी और दर्जनभर किसान घायल हो गए। पुलिस कर्मचारियों को नागरिक अस्पताल नरवाना में दाखिल करवाया गया। सात बजे तक यही सिलसिला रहा। इसके बाद किसान शांत हो गए।</p>



<p><strong>शाम साढ़े सात बजे</strong><br>शाम साढ़े सात बजे पांच हजार किसानों का एक और जत्थ दातासिंह वाला बॉर्डर पर पहुंचा और यहां पर बैठकर रणनीति बनानी शुरू कर दी। किसानों का कहना है कि वह रात में बॉर्डर पार करेंगे। दूसरी तरफ पुलिस कर्मचारियों ने भी अपनी रणनीति बनानी शुरू कर दी है। सात बजे हिसार मंडल के एडीजीपी डॉ. एम रवि किरण पहुंचे और पुलिस अधिकारियों के साथ बैठक की।</p>
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