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	<title>तुलसी चालीसा &#8211; Live Halchal</title>
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	<title>तुलसी चालीसा &#8211; Live Halchal</title>
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		<title>हनुमान जन्मोत्सव पर करें तुलसी चालीसा का पाठ</title>
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		<pubDate>Sat, 12 Apr 2025 04:52:47 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[<img width="554" height="346" src="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2025/04/Capture-286-large.jpg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" fetchpriority="high" srcset="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2025/04/Capture-286.jpg 554w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2025/04/Capture-286-medium.jpg 300w" sizes="(max-width: 554px) 100vw, 554px" />हनुमान जन्मोत्सव का पर्व बहुत शुभ माना गया है। यह भगवान हनुमान को समर्पित है। ऐसा माना जाता है कि इस दिन (Hanuman Janmotsav 2025) भाव के साथ पूजा करने से सभी मुश्किलों का अंत होता है। इसके साथ ही जीवन में शुभता आती है। वैदिक पंचांग के अनुसार इस बार यह महापर्व 12 अप्रैल &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<img width="554" height="346" src="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2025/04/Capture-286-large.jpg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" srcset="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2025/04/Capture-286.jpg 554w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2025/04/Capture-286-medium.jpg 300w" sizes="(max-width: 554px) 100vw, 554px" />
<p>हनुमान जन्मोत्सव का पर्व बहुत शुभ माना गया है। यह भगवान हनुमान को समर्पित है। ऐसा माना जाता है कि इस दिन (Hanuman Janmotsav 2025) भाव के साथ पूजा करने से सभी मुश्किलों का अंत होता है। इसके साथ ही जीवन में शुभता आती है। वैदिक पंचांग के अनुसार इस बार यह महापर्व 12 अप्रैल यानी आज के दिन मनाया जा रहा है।</p>



<p>इस साल 12 अप्रैल यानी आज हनुमान जन्मोत्सव मनाया जा रहा है। इस दिन भगवान हनुमान की पूजा करने का विधान है। इस शुभ अवसर (Hanuman Janmotsav 2025) पर वीर बजरंगबली की पूजा और व्रत करने से सभी मनोकामनाओं की पूर्ति होती है। हनुमान जी शक्ति, भक्ति और सेवा के प्रतीक हैं। वहीं, इस दिन तुलसी पूजन का भी विशेष महत्व है। कहा जाता है कि इस दिन मां तुलसी के पौधे पर जल जरूर चढ़ाना चाहिए।</p>



<p>इसके साथ ही उनकी चालीसा का पाठ और भव्य आरती करनी चाहिए। ऐसा करने से भक्तों को मानसिक शांति मिलती है और जीवन में सुख-समृद्धि का आगमन होता है।</p>



<p><strong>।।तुलसी चालीसा।। (Tulsi Chalisa)</strong></p>



<p>”श्री तुलसी महारानी, करूं विनय सिरनाय।<br>जो मम हो संकट विकट, दीजै मात नशाय।।”<br>नमो नमो तुलसी महारानी, महिमा अमित न जाय बखानी।<br>दियो विष्णु तुमको सनमाना, जग में छायो सुयश महाना।।<br>विष्णुप्रिया जय जयतिभवानि, तिहूँ लोक की हो सुखखानी।<br>भगवत पूजा कर जो कोई, बिना तुम्हारे सफल न होई।।<br>जिन घर तव नहिं होय निवासा, उस पर करहिं विष्णु नहिं बासा।<br>करे सदा जो तव नित सुमिरन, तेहिके काज होय सब पूरन।।<br>कातिक मास महात्म तुम्हारा, ताको जानत सब संसारा।<br>तव पूजन जो करैं कुंवारी, पावै सुन्दर वर सुकुमारी।।<br>कर जो पूजन नितप्रति नारी, सुख सम्पत्ति से होय सुखारी।<br>वृद्धा नारी करै जो पूजन, मिले भक्ति होवै पुलकित मन।।<br>श्रद्धा से पूजै जो कोई, भवनिधि से तर जावै सोई।<br>कथा भागवत यज्ञ करावै, तुम बिन नहीं सफलता पावै।।<br>छायो तब प्रताप जगभारी, ध्यावत तुमहिं सकल चितधारी।<br>तुम्हीं मात यंत्रन तंत्रन, सकल काज सिधि होवै क्षण में।।<br>औषधि रूप आप हो माता, सब जग में तव यश विख्याता,<br>देव रिषी मुनि औ तपधारी, करत सदा तव जय जयकारी।।<br>वेद पुरानन तव यश गाया, महिमा अगम पार नहिं पाया।<br>नमो नमो जै जै सुखकारनि, नमो नमो जै दुखनिवारनि।।<br>नमो नमो सुखसम्पति देनी, नमो नमो अघ काटन छेनी।<br>नमो नमो भक्तन दुःख हरनी, नमो नमो दुष्टन मद छेनी।।<br>नमो नमो भव पार उतारनि, नमो नमो परलोक सुधारनि।<br>नमो नमो निज भक्त उबारनि, नमो नमो जनकाज संवारनि।।<br>नमो नमो जय कुमति नशावनि, नमो नमो सुख उपजावनि।<br>जयति जयति जय तुलसीमाई, ध्याऊँ तुमको शीश नवाई।।<br>निजजन जानि मोहि अपनाओ, बिगड़े कारज आप बनाओ।<br>करूँ विनय मैं मात तुम्हारी, पूरण आशा करहु हमारी।।<br>शरण चरण कर जोरि मनाऊं, निशदिन तेरे ही गुण गाऊं।<br>क्रहु मात यह अब मोपर दाया, निर्मल होय सकल ममकाया।।<br>मंगू मात यह बर दीजै, सकल मनोरथ पूर्ण कीजै।<br>जनूं नहिं कुछ नेम अचारा, छमहु मात अपराध हमारा।।<br>बरह मास करै जो पूजा, ता सम जग में और न दूजा।<br>प्रथमहि गंगाजल मंगवावे, फिर सुन्दर स्नान करावे।।<br>चन्दन अक्षत पुष्प् चढ़ावे, धूप दीप नैवेद्य लगावे।<br>करे आचमन गंगा जल से, ध्यान करे हृदय निर्मल से।।<br>पाठ करे फिर चालीसा की, अस्तुति करे मात तुलसा की।<br>यह विधि पूजा करे हमेशा, ताके तन नहिं रहै क्लेशा।।<br>करै मास कार्तिक का साधन, सोवे नित पवित्र सिध हुई जाहीं।<br>है यह कथा महा सुखदाई, पढ़े सुने सो भव तर जाई।।<br>तुलसी मैया तुम कल्याणी, तुम्हरी महिमा सब जग जानी।<br>भाव ना तुझे माँ नित नित ध्यावे, गा गाकर मां तुझे रिझावे।।<br>यह श्रीतुलसी चालीसा पाठ करे जो कोय।<br>गोविन्द सो फल पावही जो मन इच्छा होय।।</p>
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		<title>मोक्षदा एकादशी पर करें तुलसी चालीसा का पाठ</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Live Halchal Web_Wing]]></dc:creator>
		<pubDate>Mon, 02 Dec 2024 04:20:19 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[अध्यात्म]]></category>
		<category><![CDATA[धर्म]]></category>
		<category><![CDATA[तुलसी चालीसा]]></category>
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					<description><![CDATA[<img width="618" height="317" src="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2024/12/Capture-58-large.jpg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" srcset="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2024/12/Capture-58.jpg 671w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2024/12/Capture-58-medium.jpg 300w" sizes="(max-width: 618px) 100vw, 618px" />मोक्षदा एकादशी का व्रत बहुत विशेष माना जाता है। इस दिन भगवान विष्णु की पूजा होती है। इस दिन का उपवास रखने से घर में देवी लक्ष्मी का आगमन होता है। वहीं इस दिन तुलसी पूजा को भी बहुत ही शुभ माना गया है तो चलिए इस दिन (Mokshada Ekadashi 2024) विष्णु जी के साथ &#8230;]]></description>
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<p>मोक्षदा एकादशी का व्रत बहुत विशेष माना जाता है। इस दिन भगवान विष्णु की पूजा होती है। इस दिन का उपवास रखने से घर में देवी लक्ष्मी का आगमन होता है। वहीं इस दिन तुलसी पूजा को भी बहुत ही शुभ माना गया है तो चलिए इस दिन (Mokshada Ekadashi 2024) विष्णु जी के साथ मां तुलसी को प्रसन्न करने के लिए क्या करना चाहिए उसके बारे में जानते हैं।</p>



<p>शास्त्रों मोक्षदा एकादशी का व्रत बेहद मंगलकारी माना जाता है। यह दिन भगवान विष्णु की पूजा के लिए समर्पित है और यह सबसे पावन दिनों में से एक माना जाता है। श्री हरि के भक्त इस दिन उनकी विशेष आराधना करते हैं और उनके लिए उपवास रखते हैं। कहते हैं कि इस तुलसी पूजन भी अवश्य करना चाहिए। हालांकि सभी पूजन नियमों का पालन दूर से करना चाहिए, क्योंकि देवी इस दिन नारायण के लिए व्रत रखती हैं। ऐसे में सुबह उठकर तुलसी के पौधे में जल चढ़ाएं और देसी घी का दीपक जलाएं। लाल चुनरी, नारियल, फल, फूल, मिठाई आदि अर्पित करें। फिर तुलसी चालीसा का पाठ करें और आरती से पूजा को समाप्त करें। ऐसा करने से आपका सोया हुआ भाग्य भी जाग जाएगा।</p>



<p>इसके साथ ही घर में कभी धन की कमी नहीं होगी। पंचांग के अनुसार, इस साल मार्गशीर्ष माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि इस साल11 दिसंबर (Kab Hai Mokshada Ekadashi 2024) को मनाई जाएगी।</p>



<p><strong>।।दोहा तुलसी चालीसा।।</strong></p>



<p>श्री तुलसी महारानी, करूं विनय सिरनाय।<br>जो मम हो संकट विकट, दीजै मात नशाय।<br>नमो नमो तुलसी महारानी, महिमा अमित न जाय बखानी।<br>दियो विष्णु तुमको सनमाना, जग में छायो सुयश महाना।।<br>विष्णुप्रिया जय जयतिभवानि, तिहूँ लोक की हो सुखखानी।<br>भगवत पूजा कर जो कोई, बिना तुम्हारे सफल न होई।।<br>जिन घर तव नहिं होय निवासा, उस पर करहिं विष्णु नहिं बासा।<br>करे सदा जो तव नित सुमिरन, तेहिके काज होय सब पूरन।।<br>कातिक मास महात्म तुम्हारा, ताको जानत सब संसारा।<br>तव पूजन जो करैं कुंवारी, पावै सुन्दर वर सुकुमारी।।<br>कर जो पूजन नितप्रति नारी, सुख सम्पत्ति से होय सुखारी।<br>वृद्धा नारी करै जो पूजन, मिले भक्ति होवै पुलकित मन।।<br>श्रद्धा से पूजै जो कोई, भवनिधि से तर जावै सोई।<br>कथा भागवत यज्ञ करावै, तुम बिन नहीं सफलता पावै।।<br>छायो तब प्रताप जगभारी, ध्यावत तुमहिं सकल चितधारी।<br>तुम्हीं मात यंत्रन तंत्रन, सकल काज सिधि होवै क्षण में।।<br>औषधि रूप आप हो माता, सब जग में तव यश विख्याता,<br>देव रिषी मुनि औ तपधारी, करत सदा तव जय जयकारी।।<br>वेद पुरानन तव यश गाया, महिमा अगम पार नहिं पाया।<br>नमो नमो जै जै सुखकारनि, नमो नमो जै दुखनिवारनि।।<br>नमो नमो सुखसम्पति देनी, नमो नमो अघ काटन छेनी।<br>नमो नमो भक्तन दुःख हरनी, नमो नमो दुष्टन मद छेनी।।<br>नमो नमो भव पार उतारनि, नमो नमो परलोक सुधारनि।<br>नमो नमो निज भक्त उबारनि, नमो नमो जनकाज संवारनि।।<br>नमो नमो जय कुमति नशावनि, नमो नमो सुख उपजावनि।<br>जयति जयति जय तुलसीमाई, ध्याऊँ तुमको शीश नवाई।।<br>निजजन जानि मोहि अपनाओ, बिगड़े कारज आप बनाओ।<br>करूँ विनय मैं मात तुम्हारी, पूरण आशा करहु हमारी।।<br>शरण चरण कर जोरि मनाऊं, निशदिन तेरे ही गुण गाऊं।<br>क्रहु मात यह अब मोपर दाया, निर्मल होय सकल ममकाया।।<br>मंगू मात यह बर दीजै, सकल मनोरथ पूर्ण कीजै।<br>जनूं नहिं कुछ नेम अचारा, छमहु मात अपराध हमारा।।<br>बरह मास करै जो पूजा, ता सम जग में और न दूजा।<br>प्रथमहि गंगाजल मंगवावे, फिर सुन्दर स्नान करावे।।<br>चन्दन अक्षत पुष्प् चढ़ावे, धूप दीप नैवेद्य लगावे।<br>करे आचमन गंगा जल से, ध्यान करे हृदय निर्मल से।।<br>पाठ करे फिर चालीसा की, अस्तुति करे मात तुलसा की।<br>यह विधि पूजा करे हमेशा, ताके तन नहिं रहै क्लेशा।।<br>करै मास कार्तिक का साधन, सोवे नित पवित्र सिध हुई जाहीं।<br>है यह कथा महा सुखदाई, पढ़े सुने सो भव तर जाई।।<br>तुलसी मैया तुम कल्याणी, तुम्हरी महिमा सब जग जानी।<br>भाव ना तुझे माँ नित नित ध्यावे, गा गाकर मां तुझे रिझावे।।<br>यह श्रीतुलसी चालीसा पाठ करे जो कोय।<br>गोविन्द सो फल पावही जो मन इच्छा होय।।</p>
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