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		<title>त्रिपुराः कांग्रेस का किला भेदने सबसे पहले कैलाशहर पहुंचे मोदी, तगड़ा हुआ मुकाबला</title>
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		<pubDate>Thu, 15 Feb 2018 09:59:31 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[<img width="618" height="366" src="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2018/02/त्रिपुराः-कांग्रेस-का-किला-भेदने-सबसे-पहले-कैलाशहर-पहुंचे-मोदी-तगड़ा-हुआ-मुकाबला.jpg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="त्रिपुराः कांग्रेस का किला भेदने सबसे पहले कैलाशहर पहुंचे मोदी, तगड़ा हुआ मुकाबला" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" fetchpriority="high" srcset="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2018/02/त्रिपुराः-कांग्रेस-का-किला-भेदने-सबसे-पहले-कैलाशहर-पहुंचे-मोदी-तगड़ा-हुआ-मुकाबला.jpg 700w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2018/02/त्रिपुराः-कांग्रेस-का-किला-भेदने-सबसे-पहले-कैलाशहर-पहुंचे-मोदी-तगड़ा-हुआ-मुकाबला-300x178.jpg 300w" sizes="(max-width: 618px) 100vw, 618px" />नई दिल्ली: त्रिपुरा में पिछले सभी विधानमसभा चुनाव कांग्रेस बनाम मार्क्&#x200d;सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (सीपीएम) के बीच रहे हैं, लेकिन विधानसभा चुनाव 2018 में मुकाबला भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) और सीपीएम के बीच दिखाई दे रहा है. कैलाशहर में पीएम मोदी ने चुनाव प्रचार के पहले ही दिन रैली किया. जिसके वजह से अब त्रिपुरा में कांग्रेस &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<img width="618" height="366" src="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2018/02/त्रिपुराः-कांग्रेस-का-किला-भेदने-सबसे-पहले-कैलाशहर-पहुंचे-मोदी-तगड़ा-हुआ-मुकाबला.jpg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="त्रिपुराः कांग्रेस का किला भेदने सबसे पहले कैलाशहर पहुंचे मोदी, तगड़ा हुआ मुकाबला" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" srcset="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2018/02/त्रिपुराः-कांग्रेस-का-किला-भेदने-सबसे-पहले-कैलाशहर-पहुंचे-मोदी-तगड़ा-हुआ-मुकाबला.jpg 700w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2018/02/त्रिपुराः-कांग्रेस-का-किला-भेदने-सबसे-पहले-कैलाशहर-पहुंचे-मोदी-तगड़ा-हुआ-मुकाबला-300x178.jpg 300w" sizes="(max-width: 618px) 100vw, 618px" /><div class="articleBody">
<p><strong>नई दिल्ली: त्रिपुरा में पिछले सभी विधानमसभा चुनाव कांग्रेस बनाम मार्क्&#x200d;सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (सीपीएम) के बीच रहे हैं, लेकिन विधानसभा चुनाव 2018 में मुकाबला भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) और सीपीएम के बीच दिखाई दे रहा है.<img decoding="async" class="aligncenter size-full wp-image-117474" src="http://www.livehalchal.com/wp-content/uploads/2018/02/त्रिपुराः-कांग्रेस-का-किला-भेदने-सबसे-पहले-कैलाशहर-पहुंचे-मोदी-तगड़ा-हुआ-मुकाबला.jpg" alt="" width="700" height="415" srcset="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2018/02/त्रिपुराः-कांग्रेस-का-किला-भेदने-सबसे-पहले-कैलाशहर-पहुंचे-मोदी-तगड़ा-हुआ-मुकाबला.jpg 700w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2018/02/त्रिपुराः-कांग्रेस-का-किला-भेदने-सबसे-पहले-कैलाशहर-पहुंचे-मोदी-तगड़ा-हुआ-मुकाबला-300x178.jpg 300w" sizes="(max-width: 700px) 100vw, 700px" /></strong></p>
<p><strong>कैलाशहर में पीएम मोदी ने चुनाव प्रचार के पहले ही दिन रैली किया. जिसके वजह से अब त्रिपुरा में कांग्रेस की सरकार बनाने का मुकाबला काफी कठीन हो चुका है. हालांकि कांग्रेस की स्थिति भी अच्छी नहीं है इसके पीछे की वजह कांग्रेस में लगातार टूट है. वर्तमान में 60 सदस्यीय सभा में कांग्रेस के केवल 2 विधायक है, जिसमें से एक पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष बिराजीत सिन्हा हैं जो कैलाशहर विधानसभा क्षेत्र से लगातार सातवीं बार चुनाव मैदान में हैं.</strong></p>
<p><strong>त्रिपुरा विधानसभा क्षेत्र संख्या-53 कैलाशहर निवार्चन क्षेत्र में कुल मतदाताओं की संख्या 46,054 है. इस बार चुनाव में कुल 23,290 पुरुष मतदाता और 22,764 महिला मतदाता अपने मतों का प्रयोग कर राजनीतिक दलों के उम्मीदवारों की किस्मत तय करेंगे.</strong></p>
<p><strong>सन् 1972 से अब तक हुए 9 विधानसभा चुनावों में से केवल 2 बार ही सीपीआई यहां जीत हासिल करने में कामयाब हुई है, जबकि कांग्रेस ने यहां सातवीं बार जीत हासिल की है. अकेले 5 बार कांग्रेस की राज्य इकाई के अध्यक्ष बिराजीत सिन्हा का दबदबा यहां रहा है.</strong></p>
<p><strong>कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष बिराजीत सिन्हा ने इस विधानसभा चुनाव में भी कैलाशहर निवार्चन क्षेत्र से लगातार 7 बार नामांकन दाखिल किया है और चुनाव मैदान में ताल ठोक रहे हैं. 2 मार्च 1952 को उत्तरी त्रिपुरा के कैलाशहर में जन्में बिराजीत सिन्हा ने 17 वर्ष की उम्र में छात्र राजनीति में कदम रखा था, तब से वह कांग्रेस के सक्रिय सदस्यों में शुमार हैं. 1972 में युवा ब्लॉक कांग्रेस के सदस्य बनने के बाद वह 1975 में जिला कांग्रेस अध्यक्ष बने.</strong></p>
<p><strong>साल 1975 में बिराजीत सिन्हा ने नई दिल्ली में भारतीय युवा कांग्रेस द्वारा कराए गए विश्व युवा केंद्र के पहले कैडर प्रशिक्षण शिविर में भाग लिया, उस वक्त दिवंगत देवकांत बरुआ भारतीय कांग्रेस के अध्यक्ष थे. 1978 से लेकर 1990 तक सिन्हा त्रिपुरा प्रदेश यूथ कांग्रेस के अध्यक्ष रहे. इसके साथ ही उन्हें 1979 में त्रिपुरा राज्य इकाई का सचिव बना दिया गया, 1988 से 1993 तक वह त्रिपुरा सरकार में कैबिनेट मंत्री रहे.</strong></p>
<p><strong>राज्य की राजनीति में बढ़ते उनके कद को देखते हुए 2005 में त्रिपुरा राज्य इकाई का अध्यक्ष नियुक्त किया गया. कैलाशहर निवार्चन क्षेत्र से लगातार 7वीं बार नामांकन दाखिल करने वाले सिन्हा ने लगातार 4 बार 1998, 2003, 2008 और 2013 में चुनाव जीता है. उन्होंने पिछले 25 साल से लगातार शासन कर रही माकपा को इस सीट पर जीतने से महरूम रखा है. सिन्हा पर कई आपराधिक मामले भी दर्ज हैं.</strong></p>
<p><strong>वहीं सीपीएम ने चुनाव 2018 में कैलाशहर से मोबोशार अली को टिकट दिया है. मोबोशार लगातार दूसरी बार बिराजीत के सामने हैं. 1996 में त्रिपुरा विश्वविद्यालय से राजनीति विज्ञान में स्नातक की परीक्षा पास करने वाले अली को 2013 विधानसभा चुनाव में बिराजीत सिन्हा ने करीब मात्र 500 से कम वोटों से हराया था, जिसको देखते हुए सीपीएम ने उन पर दोबारा भरोसा जताते हुए टिकट दिया है.</strong></p>
<p><strong>2018 विधानसभा चुनाव में मुख्य विपक्षी दल बनकर उभरी बीजेपी ने कैलाशहर से युवा नेता नीतीश डे को अपना उम्मीदवार घोषित किया है. नीतीश निगम पार्षद और बीजेपी प्रदेश इकाई के सचिव है और इस चुनाव में कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष बिराजीत सिन्हा के खिलाफ चुनाव लड़ रहे हैं. इसके अलावा तृणमूल कांग्रेस ने नरसिंह दास को कैलाशहर विधानसभा से टिकट दिया है.</strong></p>
<p><strong>कैलाशहर विधानसभा सीट का घमासान काफी रोचक सा दिखाई दे रहा है पिछले चुनाव में महज 500 वोटों से जीत करने वाली कांग्रेस एक तरफ जहां अपने अस्तित्व की लड़ाई लड़ रही है और इस सीट को बचाना की जद्दोजहद में जुटी है.</strong></p>
<p><strong>वहीं सीपीएम की दोबारा दमदार चुनौती इस सीट को जीतने के लिए कोई कसर नहीं छोड़ना चाहती है. इसके साथ ही बीजेपी ने चुनाव मैदान में कूदकर मुकाबले को त्रिकोणीय बना दिया है. 60 सदस्यीय त्रिपुरा विधानसभा के लिए मतदान 18 फरवरी को होगा और वोटों की गिनती 3 मार्च को मेघालय और नगालैंड के साथ ही होगी.</strong></p>
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