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	<title>टीबी &#8211; Live Halchal</title>
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	<title>टीबी &#8211; Live Halchal</title>
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		<title>दिल्ली में टीबी को लेकर बढ़ी चिंता, 42 दिनों में सामने आए 12,078 नए केस</title>
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		<pubDate>Fri, 21 Aug 2026 05:59:09 +0000</pubDate>
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		<category><![CDATA[टीबी]]></category>
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					<description><![CDATA[<img width="618" height="324" src="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2026/08/6-11-1024x537.jpg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" fetchpriority="high" srcset="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2026/08/6-11-1024x537.jpg 1024w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2026/08/6-11-300x157.jpg 300w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2026/08/6-11-768x402.jpg 768w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2026/08/6-11.jpg 1080w" sizes="(max-width: 618px) 100vw, 618px" />क्या आप जानते हैं कि खांसने, छींकने या बात करने से भी एक गंभीर बीमारी आपको अपनी चपेट में ले सकती है? जी हां, हम बात कर रहे हैं टीबी की। हाल ही में दिल्ली से जो आंकड़े सामने आए हैं, वे बेहद डराने वाले हैं। राष्ट्रीय राजधानी में टीबी एक गंभीर चुनौती बनती जा &#8230;]]></description>
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<p>क्या आप जानते हैं कि खांसने, छींकने या बात करने से भी एक गंभीर बीमारी आपको अपनी चपेट में ले सकती है? जी हां, हम बात कर रहे हैं टीबी की।</p>



<p>हाल ही में दिल्ली से जो आंकड़े सामने आए हैं, वे बेहद डराने वाले हैं। राष्ट्रीय राजधानी में टीबी एक गंभीर चुनौती बनती जा रही है। आइए, जानते हैं दिल्ली में टीबी की मौजूदा स्थिति क्या है (Delhi TB cases) और इस गंभीर बीमारी के लक्षण पहचानकर आप खुद को कैसे बचा सकते हैं।</p>



<p><strong>दिल्ली में टीबी के चौंकाने वाले आंकड़े<br></strong>राजधानी दिल्ली में चलाए गए एक हालिया स्क्रीनिंग अभियान के नतीजे बेहद डराने वाले हैं। 24 मार्च से 5 मई के बीच, यानी केवल 42 दिनों के भीतर 12,078 नए मरीज सामने आए हैं। यह कोई अचानक हुई बढ़ोतरी नहीं है, बल्कि पिछले तीन सालों का रिकॉर्ड बताता है कि हर साल टीबी के एक लाख से ज्यादा मामले दर्ज किए जा रहे हैं।</p>



<p><strong>टीबी से होने वाली मौतों के आंकड़े<br></strong>दिल्ली सरकार के जन्म-मृत्यु आंकड़ों के अनुसार, साल 2005 से 2024 के बीच दिल्ली में टीबी से 65,985 मौतें दर्ज की गईं। इनमें सबसे ज्यादा 5,093 मौतें अकेले साल 2024 में हुईं। इसी खतरे को देखते हुए दिल्ली के 11 जिलों के 38 उच्च जोखिम वाले वार्डों को विशेष निगरानी के लिए चुना गया है, जहां जांच और मॉलिक्यूलर टेस्ट तेजी से बढ़ाए जा रहे हैं।</p>



<p><strong>टीबी आखिर क्या है और यह कैसे फैलता है?<br></strong>मेयो क्लीनिक के अनुसार, टीबी एक गंभीर बीमारी है जो मुख्य रूप से फेफड़ों पर असर डालती है। यह ‘माइकोबैक्टीरियम ट्यूबरकुलोसिस’ नामक बैक्टीरिया के कारण होती है।</p>



<p>यह बीमारी हवा के जरिए बहुत आसानी से फैलती है। जब टीबी से संक्रमित व्यक्ति खांसता, छींकता या यहां तक कि गाता है, तो बैक्टीरिया वाली छोटी-छोटी बूंदें हवा में फैल जाती हैं। कोई भी स्वस्थ व्यक्ति जब इसी हवा में सांस लेता है, तो वह संक्रमित हो सकता है। भीड़भाड़ वाले इलाकों में और जहां लोग बंद या छोटी जगहों में लंबे समय तक एक साथ रहते हैं, वहां टीबी तेजी से फैलता है।</p>



<p><strong>कैसे पहचानें टीबी के लक्षण?<br></strong>टीबी का बैक्टीरिया शरीर में जाकर किस स्टेज में है, इसके आधार पर इसके लक्षण (Tuberculosis symptoms) अलग-अलग होते हैं:</p>



<p>लेटेंट टीबी: इसमें बैक्टीरिया शरीर में रहता तो है, लेकिन आपका इम्यून सिस्टम उसे एक दीवार में घेर कर रखता है। इस स्थिति में मरीज को कोई लक्षण महसूस नहीं होते और न ही यह दूसरों में फैलता है।</p>



<p>एक्टिव टीबी: जब इम्यून सिस्टम बैक्टीरिया को कंट्रोल नहीं कर पाता, तो यह बीमारी का रूप ले लेता है। इसके मुख्य लक्षण हैं:</p>



<p>लगातार खांसी आना।<br>खांसी के साथ खून या बलगम आना।<br>सीने में दर्द या सांस लेने और खांसने पर दर्द होना।<br>बुखार और ठंड लगना।<br>रात में सोते समय पसीना आना।<br>वजन कम होना और भूख न लगना।<br>बहुत ज्यादा थकान और कमजोरी महसूस होना।</p>



<p>जब टीबी फेफड़ों से निकलकर शरीर के अन्य हिस्सों, जैसे किडनी, लिवर, दिमाग और रीढ़ की हड्डी के फ्लूइड, दिल, हड्डियों या लिम्फ नोड्स में फैल जाता है। इसके लक्षण इस बात पर निर्भर करते हैं कि शरीर का कौन-सा हिस्सा संक्रमित हुआ है।</p>



<p><strong>किसे है सबसे ज्यादा खतरा?<br></strong>वैसे तो टीबी किसी को भी हो सकता है, लेकिन जिन लोगों का इम्यून सिस्टम कमजोर होता है, उन्हें इसका खतरा सबसे ज्यादा होता है। एचआईवी/एड्स, डायबिटीज, गंभीर किडनी रोग, कुपोषण और कैंसर के मरीजों को ज्यादा सावधान रहने की जरूरत है।</p>



<p>इसके अलावा उम्र का भी इस पर असर पड़ता है। 5 साल से कम उम्र के बच्चों और 65 साल से अधिक उम्र के बुजुर्गों में टीबी के एक्टिव होने और गंभीर रूप लेने का खतरा कहीं ज्यादा रहता है।</p>



<p><strong>इलाज और बचाव के सही तरीके<br></strong>टीबी एक जानलेवा बीमारी हो सकती है, लेकिन एंटीबायोटिक्स दवाओं से इसका पूरा इलाज संभव है। मरीज को 4, 6 या 9 महीने तक लगातार दवा खानी पड़ती है।</p>



<p>सबसे जरूरी बात है कि डॉक्टर द्वारा दी गई दवा का कोर्स बीच में कभी न छोड़ें और सही तरीके से लें। अगर दवाएं पूरी नहीं खाई जाती हैं, तो बैक्टीरिया दवाओं के प्रति रेजिस्टेंट हो जाता है। इसका मतलब है कि पुरानी दवाएं काम करना बंद कर देती हैं और बीमारी बहुत ज्यादा खतरनाक हो जाती है।</p>



<p>अगर किसी को एक्टिव टीबी है, तो शुरुआती कुछ हफ्तों तक उसे घर पर रहना चाहिए, कमरे की खिड़कियां खुली रखनी चाहिए और हमेशा मास्क पहनना चाहिए।</p>
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		<title>बच्चों और बड़ों के लिए पूरी तरह सुरक्षित है टीबी की नई वैक्सीन</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Live Halchal Web_Wing]]></dc:creator>
		<pubDate>Sat, 11 Apr 2026 05:46:38 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[जीवनशैली]]></category>
		<category><![CDATA[टीबी]]></category>
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					<description><![CDATA[<img width="618" height="344" src="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2026/04/67-14.jpg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" srcset="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2026/04/67-14.jpg 939w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2026/04/67-14-300x167.jpg 300w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2026/04/67-14-768x427.jpg 768w" sizes="(max-width: 618px) 100vw, 618px" />भारत में टीबी जैसी गंभीर बीमारी को हराने के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। इसी कड़ी में दो नई टीबी वैक्सीन- वीपीएम 1002 (VPM1002) और इम्यूवैक (IMMUVAC) का एक बड़ा परीक्षण किया गया है। ‘द ब्रिटिश मेडिकल जर्नल’ में प्रकाशित इस फेज-3 क्लिनिकल ट्रायल के नतीजे बताते हैं कि ये दोनों वैक्सीन बच्चों &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<img width="618" height="344" src="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2026/04/67-14.jpg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" loading="lazy" srcset="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2026/04/67-14.jpg 939w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2026/04/67-14-300x167.jpg 300w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2026/04/67-14-768x427.jpg 768w" sizes="auto, (max-width: 618px) 100vw, 618px" />
<p>भारत में टीबी जैसी गंभीर बीमारी को हराने के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। इसी कड़ी में दो नई टीबी वैक्सीन- वीपीएम 1002 (VPM1002) और इम्यूवैक (IMMUVAC) का एक बड़ा परीक्षण किया गया है।</p>



<p>‘द ब्रिटिश मेडिकल जर्नल’ में प्रकाशित इस फेज-3 क्लिनिकल ट्रायल के नतीजे बताते हैं कि ये दोनों वैक्सीन बच्चों और वयस्कों के लिए सुरक्षित तो हैं, लेकिन ये टीबी के हर रूप से पूरी तरह सुरक्षा प्रदान नहीं कर सकतीं।</p>



<p><strong>क्या है ‘प्रीवेनटीबी’ परीक्षण?<br></strong>यह परीक्षण दिल्ली स्थित भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद (ICMR) के शोधकर्ताओं द्वारा टीबी के मामलों को कम करने के उद्देश्य से किया गया है।</p>



<p>जुलाई 2019 से दिसंबर 2020 के बीच दिल्ली, महाराष्ट्र और तमिलनाडु सहित 6 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के 18 अलग-अलग स्थानों पर यह ट्रायल हुआ।<br>इस ट्रायल में टीबी रोगियों के घरों में रहने वाले 12,700 से अधिक ऐसे लोगों को शामिल किया गया जिनकी उम्र 6 वर्ष या उससे अधिक थी।<br>लोगों को रैंडम तरीके से वीपीएम 1002, इम्यूवैक या एक प्लेसबो (हर समूह में 4,239 लोग) की खुराक दी गई। एक महीने बाद 11,829 लोगों को दूसरी खुराक दी गई और लगभग 38 महीनों तक इनकी निगरानी की गई। कुल 96.7 प्रतिशत (12,295) लोगों ने परीक्षण पूरा किया।</p>



<p><strong>नई वैक्सीन की जरूरत क्यों पड़ी?<br></strong>वर्तमान में भारत में नवजात शिशुओं को जन्म के समय टीबी से बचाने के लिए बीसीजी (BCG) का टीका लगाया जाता है। शोधकर्ताओं के अनुसार, यह टीका छोटे बच्चों को गंभीर प्रकार की टीबी से तो बचाता है, लेकिन यह किशोरों और वयस्कों के लिए ज्यादा प्रभावी नहीं है। इसी कमी को दूर करने के लिए नई वैक्सीन जांची जा रही हैं।</p>



<p><strong>नई वैक्सीन के बारे में खास बातें<br></strong>वीपीएम 1002 (VPM1002): यह आनुवंशिक इंजीनियरिंग (जेनेटिक इंजीनियरिंग) का उपयोग करके बनाई गई एक पुनःसंयोजित वैक्सीन है। इसे जर्मनी की फार्मास्यूटिकल कंपनी ‘सेरम लाइफ साइंस यूरोप जीएमबीएच’ द्वारा विकसित किया गया है।<br>इम्यूवैक (IMMUVAC): यह एक निष्क्रिय वैक्सीन है जिसे बीमारी फैलाने वाले रोगजनक के गैर-संक्रामक रूप से बनाया गया है। इसे ICMR और अहमदाबाद की ‘कैडिला फार्मास्यूटिकल्स’ ने मिलकर तैयार किया है।</p>



<p><strong>क्या रहे ट्रायल के अंतिम नतीजे?<br></strong>यह फेज-3 ट्रायल किसी भी नए इलाज की सुरक्षा और प्रभावशीलता को मापने का अंतिम चरण होता है। इसके नतीजे मिले-जुले रहे हैं:</p>



<p>सुरक्षा और प्रतिरक्षा: दोनों ही वैक्सीन वयस्कों और बच्चों के लिए पूरी तरह सुरक्षित पाई गईं और इन्होंने शरीर में एक अच्छी इम्यून प्रतिक्रिया भी पैदा की।<br>कहां मिली निराशा: परीक्षण में पाया गया कि ये दोनों वैक्सीन फेफड़ों की टीबी या टीबी के सूक्ष्मजीवों द्वारा होने वाले सभी प्रकार के संक्रमण को पूरी तरह रोकने में सफल नहीं हो पाईं।</p>



<p><strong>कहां मिली बड़ी सफलता?<br></strong>फेफड़ों के बाहर शरीर के अन्य अंगों में होने वाली टीबी को ‘एक्स्ट्रापल्मोनरी टीबी’ कहते हैं, जिसमें मृत्यु का खतरा फेफड़ों की टीबी से भी ज्यादा होता है।</p>



<p>इस वैक्सीन ने 36 से 60 वर्ष तक के वयस्कों सहित सभी आयु वर्गों में एक्स्ट्रापल्मोनरी टीबी के खिलाफ 50.4 प्रतिशत असर दिखाया। इसके अलावा, 6 से 14 साल के बच्चों में इसने हर तरह की टीबी (फेफड़ों की और एक्स्ट्रापल्मोनरी) से बचाव किया।<br>इस वैक्सीन ने केवल 6 से 10 साल के बच्चों में एक्स्ट्रापल्मोनरी टीबी के खिलाफ सुरक्षा प्रदान की।</p>



<p>भले ही ये नई वैक्सीन टीबी के हर रूप को रोकने में 100% कारगर न हों, लेकिन ‘वीपीएम 1002’ द्वारा एक्स्ट्रापल्मोनरी टीबी (उच्च मृत्यु दर वाली टीबी) के खिलाफ दिखाया गया 50.4% का बचाव सार्वजनिक स्वास्थ्य के क्षेत्र में एक बहुत ही महत्वपूर्ण और संभावित लाभकारी कदम माना जा रहा है।</p>
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		<title>10 लाख बच्‍चों पर खतरा बनी इस बीमारी को हरा पाएगा भारत ?</title>
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		<pubDate>Fri, 24 Mar 2017 09:28:27 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[<img width="618" height="412" src="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2017/03/tb.jpg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" loading="lazy" srcset="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2017/03/tb.jpg 875w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2017/03/tb-300x200.jpg 300w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2017/03/tb-768x512.jpg 768w" sizes="auto, (max-width: 618px) 100vw, 618px" />पूरी दुनिया में टीबी खतरनाक बीमारी बनी हुई है. अब यह बच्चों को भी शिकार बना रही है. इस वक्त पूरी दुनिया में 10 लाख से ज्यादा बच्चों को अपना निशाना बना चुकी है. इसके साथ ही भारत दुनिया के ऐसे छह बड़े देशों में भी शामिल हो गया है, जहां टीबी के सबसे ज्यादा &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<img width="618" height="412" src="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2017/03/tb.jpg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" loading="lazy" srcset="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2017/03/tb.jpg 875w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2017/03/tb-300x200.jpg 300w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2017/03/tb-768x512.jpg 768w" sizes="auto, (max-width: 618px) 100vw, 618px" /><p><strong>पूरी दुनिया में टीबी खतरनाक बीमारी बनी हुई है. अब यह बच्चों को भी शिकार बना रही है. इस वक्त पूरी दुनिया में 10 लाख से ज्यादा बच्चों को अपना निशाना बना चुकी है. इसके साथ ही भारत दुनिया के ऐसे छह बड़े देशों में भी शामिल हो गया है, जहां टीबी के सबसे ज्यादा मरीज हैं.<img loading="lazy" decoding="async" class="aligncenter size-full wp-image-44825" src="http://www.livehalchal.com/wp-content/uploads/2017/03/tb.jpg" alt="" width="875" height="583" srcset="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2017/03/tb.jpg 875w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2017/03/tb-300x200.jpg 300w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2017/03/tb-768x512.jpg 768w" sizes="auto, (max-width: 875px) 100vw, 875px" /></strong></p>
<p><strong>वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गनाइजेशन (डब्ल्यूएचओ) की 2016 की रिपोर्ट में कहा गया है कि साल 2015 में पूरी दुनिया में 1.04 करोड़ टीबी के नए मरीज पाए गए. इनमें से 59 लाख पुरुष, 35 लाख महिलाएं और 10 लाख बच्चे थे.</strong></p>
<div class="articleimg"><strong><strong>इसके साथ ही इस दौरान 14 लाख लोगों की मौत हुईं. इनमें से चार लाख में एचआइवी संक्रमण भी पाया गया. भारत में दुनिया में पाए जाने वाले मामलों में सबसे अधिक 27 फीसदी मामले पाए गए.</strong></strong></p>
<h3 class="post-box-title"><span style="color: #0000ff;"><a style="color: #0000ff;" title="Permalink to सीएम बनने के बाद योगी ने 100 घंटे में लिए 8 बड़े फैसले" href="http://www.livehalchal.com/%e0%a4%b8%e0%a5%80%e0%a4%8f%e0%a4%ae-%e0%a4%ac%e0%a4%a8%e0%a4%a8%e0%a5%87-%e0%a4%95%e0%a5%87-%e0%a4%ac%e0%a4%be%e0%a4%a6-%e0%a4%af%e0%a5%8b%e0%a4%97%e0%a5%80-%e0%a4%a8%e0%a5%87-100-%e0%a4%98%e0%a4%82/44756" target="_blank" rel="bookmark">सीएम बनने के बाद योगी ने 100 घंटे में लिए 8 बड़े फैसले</a></span></h3>
</div>
<p>&nbsp;</p>
<p><strong>दुनिया के 60 फीसदी मामले 6 देशों में हैं. इनमें भारत के अलावा चीन, इंडोनेशिया, नाइजीरिया, पाकिस्तान और साउथ अफ्रीका भी शामिल हैं. खतरनाक होती जा रही टीबी की बीमारी को नियंत्रित करने के लिए भारत सरकार ने 2025 तक की घोषणा की है.</strong></p>
<p>&nbsp;</p>
<p><strong><span style="color: #ff0000;">रॉर्बट कॉच ने की खाेेेज </span></strong></p>
<p><strong>जर्मन फिजीशियन और पायोनरिंग माइक्रोबायोलॉजिस्ट रॉर्बट कॉच ने 24 मार्च 1882 को टीबी के जीवाणु की खोज की और यह खोज टीबी को समझने और इस बीमारी के इलाज में मील का पत्थर साबित हुई. इसलिए टीबी को कॉच की बीमारी भी कहते हैं. इस खोज की याद में हर साल 24 मार्च को हम विश्व टीबी दिवस के रूप में मनाते हैं.</strong></p>
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