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	<title>ज्ञानवापी &#8211; Live Halchal</title>
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	<title>ज्ञानवापी &#8211; Live Halchal</title>
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		<title>ज्ञानवापी की रक्षा के लिए महानिर्वाणी अखाड़े के नागाओं ने औरंगजेब की सेना को किया था परास्त</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Live Halchal Web_Wing]]></dc:creator>
		<pubDate>Mon, 02 Dec 2024 04:58:54 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[उत्तरप्रदेश]]></category>
		<category><![CDATA[राज्य]]></category>
		<category><![CDATA[ज्ञानवापी]]></category>
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					<description><![CDATA[सनातन धर्म के प्रतीक मठ-मंदिरों, तीर्थों को मुगल आक्रांताओं के हमले से बचाने के लिए महानिर्वाणी अखाड़े के नागाओं का शौर्य हमेशा याद रखा जाएगा। काशी में ज्ञानवापी की रक्षा के लिए वर्ष 1774 में महानिर्वाणी अखाड़े के नागाओं ने औरंगजेब की सेना और मनसबदारों के साथ युद्ध कर परास्त किया था। यही वजह है &#8230;]]></description>
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<p>सनातन धर्म के प्रतीक मठ-मंदिरों, तीर्थों को मुगल आक्रांताओं के हमले से बचाने के लिए महानिर्वाणी अखाड़े के नागाओं का शौर्य हमेशा याद रखा जाएगा। काशी में ज्ञानवापी की रक्षा के लिए वर्ष 1774 में महानिर्वाणी अखाड़े के नागाओं ने औरंगजेब की सेना और मनसबदारों के साथ युद्ध कर परास्त किया था। यही वजह है कि दशनामी संन्यासियों की परंपरा में महानिर्वाणी अखाड़े के नागाओं को वीर की उपाधि दी गई है।</p>



<p>इस अखाड़े के नागा साहस और पराक्रम के लिए जाने जाते हैं। अटल और आवाहन अखाड़े के संतों ने मिलकर धर्म की रक्षा के लिए महानिर्वाणी अखाड़े के रूप में अस्त्र- शस्त्र संचालन में निपुण नागाओं की सेना 16वीं शताब्दी के अंत में तैयार की। बीएसएम स्नातकोत्तर महाविद्यालय रुड़की के प्राचार्य रहे डॉ. रामचंद्र पुरी ने दशनाम नागा संन्यासियों पर किए अपने शोध में इसका उल्लेख किया है।</p>



<p>लिखते हैं कि महानिर्वाणी अखाड़े की स्थापना 16वीं शताब्दी के अंत में बिहार के हजारीबाग स्थित गढ़कुंडा के मैदान में हुई थी। तब सिद्धेश्वर महादेव मंदिर के परिसर में काल भैरव और गणेश जी के छत्रों के ऊपर अखाड़े के गुरु कपिल महामुनि का छत्र रखते हए सनातन धर्म का ध्वज ऊंचा करने के लिए पंचायती अखाड़ा महानिर्वाणी की स्थापना की गई। उस समय महानिर्वाणी अखाड़े के आठ संस्थापक सदस्य अटल अखाड़े से जुड़े थे। इनके अलावा कुछ संतों का संबंध आवाहन अखाड़े से था।</p>



<p><strong>महानिर्वाणी में हैं दस हजार से अधिक संन्यासी</strong></p>



<p>यानी अटल और आवाहन अखाड़े के तपस्वियों ने मिलकर सनातन संस्कृति के प्रतीकों को नष्ट करने वाली मुगलों की सेना से लड़ने के लिए आवाहन अखाड़ा बनाया। अखाड़े के सचिव श्रीमहंत यमुनापुरी बताते हैं कि मौजूदा समय महानिर्वाणी परंपरा के 10 हजार संन्यासी हैं। औरंगजेब के निर्देश पर उसकी सेना ने 1771 में गढ़कुंडा पर आक्रमण कर उसे अपने अधीन कर लिया। उसी समय औरंगजेब की सेना काशी में मठों-मंदिरों को तोड़कर वहां मस्जिदों का निर्माण करा रही थी।</p>



<p>औरंगजेब के काशी में हमले की जानकारी मिलने के बाद महानिर्वाणी अखाड़े के नागाओं ने 1774 में उसकी सेना से भीषण युद्ध किया। दशनाम नागा संन्यासी एवं श्री पंचायती महानिर्वाणी अखाड़ा नाम पुस्तक में महानिर्वाणी अखाड़े के नागाओं की ओर से लड़े गए ज्ञानवापी समेत तीन युद्धों का जिक्र है। इस पुस्तक में कहा गया है कि औरंगजेब ने 1974 में अपने सेनापति मिर्जा अली तुरंग खां और अब्दुल अली को विशाल सेना के साथ काशी के ज्ञानवापी और विश्वनाथ मंदिर पर आक्रमण के लिए भेजा। तब उनके साथ हिंदू मनसबदार राजा हरिदास केसरी और नरेंद्र दास भी थे।</p>



<p><strong>औरंगजेब की सेना को परास्त कर भगाया</strong></p>



<p>औरंगजेब की सेना के हमले के भय से काशी में हाहाकार मच गया। जिन हिंदू राजाओं से सनातन धर्म की रक्षा की आशा थी, वह भी आक्रमणकारियों से घिर कर भयभीत हो गए थे। ऐसे में महानिर्वाणी अखाड़े के हजारों सशस्त्र नागा संन्यासी रमण गिरि, लक्ष्मण गिरि मौनी, देश गिरि नक्खी महाराज के नेतृत्व में विश्वनाथ मंदिर पहुंचे। तब नागा संन्यासियों की सेना ने औरंगजेब की ओर से भेजी गई राजा हरि दास केसरी और नरेंद्र दास की सेना को घेर लिया और अपने युद्ध कौशल से उनको परास्त कर वहां से भगा दिया था।</p>



<p>इस युद्ध में काशी में नागाओं की सेना का नेतृत्व करने वाले हरिवंश पुरी और शंकर पुरी वीरगति को प्राप्त हो गए। महानिर्वाणी अखाड़े के सचिव श्रीमहंत यमुना पुरी बताते हैं कि काशी में हरवंश पुरी और शंकर पुरी की समाधियों पर औरंगजेब के क्रूर सैनिकों से धर्म की रक्षा करते हुए 1774 में प्राणोत्सर्ग करने का उल्लेख है। इसी तरह औरंगजेब के ही साथ 1777 में हरिद्वार तीर्थ की रक्षा के लिए युद्ध और पुष्कर राज तीर्थ की रक्षा के लिए मुसलमान गूजरों के साथ महानिर्वाणी अखाड़े के नागाओं के युद्ध का उल्लेख किया गया है।</p>



<p><strong>युद्ध के बाद महानिर्वाणी के नागाओं नेकिया था नगर प्रवेश</strong></p>



<p>महाकुंभ में पेशवाई ( अब छावनी प्रवेश) और धर्म ध्वजा की स्थापना की पंरपरा की शुरुआत प्रयागराज में युद्ध कौशल में निपुण दशनामी नागा संन्यासियों की ही देन मानी जाती है। कहा जाता है कि औरंगजेब की सेना से युद्ध के बाद जब प्रयागराज के महाकुंभ में महानिर्वाणी अखाड़े के नागाओं ने प्रवेश किया था, तब उनके स्वागत में अस्त्र-शस्त्र, बाजे गाजे के साथ पेशवाई( छावनी प्रवेश) निकाली गई थी।</p>



<p><strong>कमान और सब एरिया की तरह मढ़ी और दावे</strong></p>



<p>महानिर्वाणी अखाड़े के सचिव श्रीमहंत रवींद्र पुरी बताते हैं कि जिस तरह किसी विशाल सैन्य संगठन के संचालन के लिए उसे विभिन्न चरणों में छोटी-बड़ी इकाई के रूप में बांटा जाता है, उसी तरह आवाहन अखाड़े की भी प्रशासनिक संरचना की गई है। कमान, एरिया, सब एरिया की तरह ही आम्नाय, पद, मढ़ी, दावा और धूनी का गठन किया गया है। दशनामी परंपरा के नागा संन्यासियों का आंतरिक प्रशासनिक ढांचा इसी रूप में काम करता है।</p>
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		<title>हिंदू पक्ष बोला- धार्मिक चरित्र के निर्धारण के लिए ज्ञानवापी के वजूखाने का सर्वे जरूरी</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Live Halchal Web_Wing]]></dc:creator>
		<pubDate>Wed, 23 Oct 2024 04:59:09 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[उत्तरप्रदेश]]></category>
		<category><![CDATA[राज्य]]></category>
		<category><![CDATA[ज्ञानवापी]]></category>
		<category><![CDATA[हिंदू पक्ष]]></category>
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					<description><![CDATA[हिंदू पक्ष ने दलील दी कि विवादित स्थल के धार्मिक चरित्र के निर्धारण के लिए वजूखाने का एएसआई (भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण) सर्वे आवश्यक है। वहीं, मुस्लिम पक्ष ने कहा कि वजूखाना क्षेत्र सुप्रीम कोर्ट के आदेश से सील किया गया है। इसका सर्वे नहीं किया जा सकता। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने मंगलवार को वाराणसी के ज्ञानवापी &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[
<p>हिंदू पक्ष ने दलील दी कि विवादित स्थल के धार्मिक चरित्र के निर्धारण के लिए वजूखाने का एएसआई (भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण) सर्वे आवश्यक है। वहीं, मुस्लिम पक्ष ने कहा कि वजूखाना क्षेत्र सुप्रीम कोर्ट के आदेश से सील किया गया है। इसका सर्वे नहीं किया जा सकता।</p>



<p>इलाहाबाद हाईकोर्ट ने मंगलवार को वाराणसी के ज्ञानवापी स्थित वजूखाने की एएसआई सर्वे की मांग वाली याचिका पर सुनवाई की। हिंदू पक्ष ने दलील दी कि विवादित स्थल के धार्मिक चरित्र के निर्धारण के लिए वजूखाने का एएसआई (भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण) सर्वे आवश्यक है। वहीं, मुस्लिम पक्ष ने कहा कि वजूखाना क्षेत्र सुप्रीम कोर्ट के आदेश से सील किया गया है। इसका सर्वे नहीं किया जा सकता।</p>



<p>न्यायमूर्ति रोहित रंजन अग्रवाल की अदालत राखी सिंह की ओर से दाखिल पुनरीक्षण याचिका पर सुनवाई कर रही है। मामले की अगली सुनवाई आठ नवंबर को होगी। याची राखी सिंह की ओर से जिला अदालत में वजूखाने की सर्वे के लिए अर्जी दाखिल की गई थी। सुनवाई के दौरान जिला अदालत ने सुप्रीम कोर्ट के यथास्थिति बनाए रखने के आदेश के कारण अर्जी में हस्तक्षेप करने से इन्कार कर दिया था। इस आदेश को याची ने हाईकोर्ट में चुनौती दी है।</p>



<p><strong>सुप्रीम कोर्ट ने शिवलिंग सुरक्षित रखने के लिए कहा</strong><br>याची के वकील सौरभ तिवारी ने मंगलवार को सुनवाई के दौरान दलील दी कि ज्ञानवापी परिसर की तरह वजूखाने का भी एएसआई सर्वे किया जाना चाहिए। यह भी दलील दी कि लक्ष्मी देवी की याचिका से यह भिन्न है। लक्ष्मी देवी मामले में सुप्रीम कोर्ट का आदेश इसमें लागू नहीं होगा। हमने वजूखाने की एएसआई सर्वे की मांग की है, शिवलिंग की नहीं। सुप्रीम कोर्ट ने शिवलिंग को सुरक्षित व संरक्षित करने का आदेश दिया है, न कि सील किया है। ऐसे में वजूखाने का सर्वे किया जा सका है।</p>



<p>मुस्लिम पक्ष के अधिवक्ता एसएफ नकवी ने एएसआई सर्वे की मांग का विरोध किया। दलील दी कि सुप्रीम कोर्ट ने पूरे क्षेत्र को सील किया है। ऐसे में यह याचिका पोषणीय नहीं है।</p>
]]></content:encoded>
					
		
		
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		<title>भाजपा ज्ञानवापी मुद्दे पर विधिसम्मत व्यवस्था के आधार पर आगे बढ़ेगी: भूपेंद्र चौधरी</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Live Halchal Web_Wing]]></dc:creator>
		<pubDate>Mon, 16 Sep 2024 05:26:21 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[उत्तरप्रदेश]]></category>
		<category><![CDATA[राज्य]]></category>
		<category><![CDATA[ज्ञानवापी]]></category>
		<category><![CDATA[भूपेंद्र चौधरी]]></category>
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					<description><![CDATA[भारतीय जनता पार्टी (BJP) की उत्तर प्रदेश इकाई के अध्यक्ष भूपेंद्र सिंह चौधरी ने कहा कि पार्टी ज्ञानवापी मुद्दे पर विधिसम्मत व्यवस्था के आधार पर आगे बढ़ेगी। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शनिवार को गोरखपुर में एक कार्यक्रम में कहा था, ‘‘यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि कुछ लोग ज्ञानवापी को मस्जिद कहते हैं, जबकि &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[
<p>भारतीय जनता पार्टी (BJP) की उत्तर प्रदेश इकाई के अध्यक्ष भूपेंद्र सिंह चौधरी ने कहा कि पार्टी ज्ञानवापी मुद्दे पर विधिसम्मत व्यवस्था के आधार पर आगे बढ़ेगी। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शनिवार को गोरखपुर में एक कार्यक्रम में कहा था, ‘‘यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि कुछ लोग ज्ञानवापी को मस्जिद कहते हैं, जबकि यह स्वयं भगवान विश्वनाथ का स्वरूप है।&#8221; इस बारे पूछने पर चौधरी ने कहा कि ‘‘भाजपा इस मुद्दे पर विधिसम्मत व्यवस्था के आधार पर आगे बढ़ेगी।&#8221;</p>



<p><strong>जानिए सीएम योगी के बयान पर क्यों बोले चौधरी<br></strong>भूपेंद्र चौधरी ने कहा, ‘‘मुझे मालूम नहीं है कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने किस परिप्रेक्ष्य में यह बयान दिया है, लेकिन पूरा देश और सब लोग जानते हैं कि हमारे देव स्थानों को लेकर उनका (योगी) किस प्रकार दृष्टिकोण रहा है।”</p>



<p>हाल में हुए लोकसभा चुनाव में राज्य में पार्टी के उम्मीद के मुताबिक प्रदर्शन नहीं किये जाने के बावजूद उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि उत्तर प्रदेश में आने वाले समय में भाजपा को जनता का आशीर्वाद प्राप्त होगा। उन्होंने कहा कि &#8221;भाजपा ने राजनीतिक दल के नाते जनता का निर्णय स्वीकार किया है और लोकतंत्र में हार-जीत होती रहती है। हमारे लिए गर्व की बात है कि देश की जनता ने लगातार तीसरी बार प्रधानमंत्री के रूप में नरेन्द्र मोदी जी को मौका दिया है।&#8221;</p>



<p><strong>&#8216;हमारी सरकार समाज के सब वर्गो के लिए काम कर रही&#8217;<br></strong>पिछले लोकसभा चुनाव में उत्तर प्रदेश की 80 सीट में से भाजपा और इसके सहयोगी दलों को 36 सीट पर जीत मिली थी जबकि शेष सीट पर विपक्ष ने जीत हासिल की थी। सरकार के सहयोगी दलों सुभासपा के प्रमुख ओम प्रकाश राजभर और निषाद पार्टी के प्रमुख संजय निषाद द्वारा जातिगत गणना का समर्थन करने के मामले में पूछे जाने पर चौधरी ने कहा, “हमारी सरकार समाज के सब वर्गो के लिए काम कर रही है।</p>



<p>संविधान में प्रदत्त आरक्षण की व्यवस्था के अनुसार आगे बढ़ेंगे।” चौधरी ने इससे पहले भाजपा के एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा, ‘‘हमारी पार्टी लोकतांत्रिक तरीके से काम करती है। विपक्ष संविधान और आरक्षण को लेकर भ्रम फैला रहा है जबकि भाजपा अकेली ऐसी पार्टी है, जिसमें आरक्षण की व्यवस्था है।”</p>
]]></content:encoded>
					
		
		
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		<item>
		<title>ज्ञानवापी स्थित वजूखाने के सर्वे पर अब जुलाई में होगी सुनवाई</title>
		<link>https://livehalchal.com/up-293/560360</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Live Halchal Web_Wing]]></dc:creator>
		<pubDate>Fri, 24 May 2024 04:50:44 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[उत्तरप्रदेश]]></category>
		<category><![CDATA[राज्य]]></category>
		<category><![CDATA[ज्ञानवापी]]></category>
		<category><![CDATA[वजूखाने के सर्वे]]></category>
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					<description><![CDATA[आदि विश्वेश्वर अर्जेंट पूजा-अर्चना याचिका पर भी 23 मई को जबरदस्त बहस हुई। दोनों पक्षों ने अपना-अपना पक्ष रखा। इंतजामिया मसाजिद कमेटी के अधिवक्ता ने कोई एक कागज फाइल में सम्मिट कर रखा था, जिसकी जानकारी जज साहब को नहीं थी तो जज साहब ने कहा यह क्या है? इलाहाबाद हाईकोर्ट में वाराणसी के विवादित &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[
<p>आदि विश्वेश्वर अर्जेंट पूजा-अर्चना याचिका पर भी 23 मई को जबरदस्त बहस हुई। दोनों पक्षों ने अपना-अपना पक्ष रखा। इंतजामिया मसाजिद कमेटी के अधिवक्ता ने कोई एक कागज फाइल में सम्मिट कर रखा था, जिसकी जानकारी जज साहब को नहीं थी तो जज साहब ने कहा यह क्या है?</p>



<p>इलाहाबाद हाईकोर्ट में वाराणसी के विवादित ज्ञानवापी परिसर स्थित वजूखाने का भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआइ) से सर्वे कराने की मांग को लेकर दाखिल याचिका पर सुनवाई जुलाई के प्रथम सप्ताह में होगी। याची राखी सिंह की ओर से दायर पुनरीक्षण याचिका (सिविल रिवीजन) पर उपयुक्त बेंच नामित करने के लिए फाइल मुख्य न्यायाधीश के समक्ष भेजी गई है।</p>



<p>न्यायमूर्ति अजीत कुमार की कोर्ट के समक्ष मामले की सुनवाई के दौरान अधिवक्ता सौरभ तिवारी ने कोर्ट को बताया कि न्यायमूर्ति रोहित रंजन अग्रवाल की बेंच को सुनवाई के लिए नामित किया गया था। इस पर न्यायमूर्ति अजीत कुमार ने कहा कि फिर यह मामला मेरी कोर्ट में कैसे आ गया? उन्होंने मुकदमे के रिकार्ड का अवलोकन करने के बाद इसे मुख्य न्यायाधीश के समक्ष भेज दिया।</p>
]]></content:encoded>
					
		
		
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		<item>
		<title>ज्ञानवापी से संबंधित 3 मामलों की सुनवाई आज</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Live Halchal Web_Wing]]></dc:creator>
		<pubDate>Wed, 28 Feb 2024 05:05:51 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[उत्तरप्रदेश]]></category>
		<category><![CDATA[राज्य]]></category>
		<category><![CDATA[ज्ञानवापी]]></category>
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					<description><![CDATA[ज्ञानवापी से संबंधित तीन मामलों की सुनवाई आज होनी है। इस दौरान लॉर्ड विश्वेश्वरनाथ के वाद में वादी हरिहर पांडेय के स्थान पर उनके पुत्रों को पक्षकार बनाए जाने के मुद्दे पर भी आदेश जारी होगी।&#160; ज्ञानवापी से संबंधित तीन मामलों की सुनवाई बुधवार को सिविल कोर्ट में होनी है। वर्ष 1991 के प्राचीन मूर्ति &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[
<p>ज्ञानवापी से संबंधित तीन मामलों की सुनवाई आज होनी है। इस दौरान लॉर्ड विश्वेश्वरनाथ के वाद में वादी हरिहर पांडेय के स्थान पर उनके पुत्रों को पक्षकार बनाए जाने के मुद्दे पर भी आदेश जारी होगी।&nbsp;</p>



<p>ज्ञानवापी से संबंधित तीन मामलों की सुनवाई बुधवार को सिविल कोर्ट में होनी है। वर्ष 1991 के प्राचीन मूर्ति स्वयंभू ज्योतिर्लिंग लॉर्ड विश्वेश्वरनाथ के वाद में वादी हरिहर पांडेय के स्थान पर उनके पुत्रों को पक्षकार बनाए जाने के मुद्दे पर सिविल जज सीनियर डिवीजन/फास्ट ट्रैक कोर्ट की अदालत आदेश करेगी। साथ ही, ज्ञानवापी स्थित शिवलिंग जैसी आकृति और बंद तहखानों का एएसआई से जीपीआर तकनीक से सर्वे कराने के मुद्दे पर भी सुनवाई होनी है।&nbsp;</p>



<p>इसके अलावा प्रभारी जिला जज की अदालत में मां शृंगार गौरी मामले में सर्वे रिपोर्ट पर आपत्ति के मुद्दे पर सुनवाई होनी है। शैलेंद्र कुमार पाठक व्यास की तरफ से व्यासजी के तहखाने के मामले में दाखिल वाद सुनवाई योग्य है या नहीं है, इस मुद्दे पर भी सुनवाई होनी है।</p>
]]></content:encoded>
					
		
		
			</item>
		<item>
		<title>हाईकोर्ट का बड़ा फैसला, व्यास तहखाने में पूजा रहेगी जारी</title>
		<link>https://livehalchal.com/%e0%a4%b9%e0%a4%be%e0%a4%88%e0%a4%95%e0%a5%8b%e0%a4%b0%e0%a5%8d%e0%a4%9f-%e0%a4%95%e0%a4%be-%e0%a4%ac%e0%a4%a1%e0%a4%bc%e0%a4%be-%e0%a4%ab%e0%a5%88%e0%a4%b8%e0%a4%b2%e0%a4%be-%e0%a4%b5%e0%a5%8d/544806</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Live Halchal Web_Wing]]></dc:creator>
		<pubDate>Mon, 26 Feb 2024 10:16:38 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[उत्तरप्रदेश]]></category>
		<category><![CDATA[राज्य]]></category>
		<category><![CDATA[ज्ञानवापी]]></category>
		<category><![CDATA[हाईकोर्ट]]></category>
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					<description><![CDATA[ज्ञानवापी परिसर स्थित व्यासजी तहखाना में हिंदू पक्ष को पूजा के अधिकार देने के वाराणसी जिला जज के फैसले के खिलाफ हाईकोर्ट में दाखिल याचिका पर फैसला सुनाया गया। कोर्स ने मुस्लिम पक्ष की याचिका को खारिज कर दिया है। ज्ञानवापी, वाराणसी तहखाने में काशी विश्वनाथ मंदिर न्यास को पूजा का अधिकार सौंपने के जिला &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[
<p>ज्ञानवापी परिसर स्थित व्यासजी तहखाना में हिंदू पक्ष को पूजा के अधिकार देने के वाराणसी जिला जज के फैसले के खिलाफ हाईकोर्ट में दाखिल याचिका पर फैसला सुनाया गया। कोर्स ने मुस्लिम पक्ष की याचिका को खारिज कर दिया है।</p>



<p>ज्ञानवापी, वाराणसी तहखाने में काशी विश्वनाथ मंदिर न्यास को पूजा का अधिकार सौंपने के जिला जज वाराणसी के आदेश के खिलाफ दाखिल अपील को इलाहाबाद हाईकोर्ट ने खारिज कर दी है।</p>



<p>यह फैसला इलाहाबाद हाईकोर्ट के न्यायमूर्ति रोहित रंजन अग्रवाल अंजुमन इंतजामिया मसाजिद कमेटी की तरफ से दाखिल अपील पर सुनाया है। इससे पहले कोर्ट ने दोनों पक्षों की लंबी बहस के बाद फैसला सुरक्षित कर लिया था।</p>



<p>मामले में जिला जज वाराणसी ने 17 जनवरी को डीएम को रिसीवर नियुक्त कर 31 जनवरी को तहखाने में पूजा करने का आदेश पारित किया था। इंतेजामिया कमेटी ने उसे हाई कोर्ट के समक्ष चुनौती दी थी।</p>



<p>इलाहाबाद हाईकोर्ट ने ज्ञानवापी परिसर के व्यास तहखाने में पूजा करने के कोर्ट के फैसले को चुनौती देने वाली याचिका को रद्द कर दिया है। हिंदू पक्ष के वकील विष्णु शंकर जैन ने फैसले के बाद बताया कि इलाहाबाद होईकोर्ट ने अंजुमन इंतजामिया के आदेशों की पहली अपील को खारिज कर दिया है। जिसमें वाराणसी जिला कोर्ट से पारित 17 और 31 जनवरी के आदेश को इलाहाबाद हाईकोर्ट में चुनौती दी थी। कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि ज्ञानवापी परिसर के व्यास तहखाना में चल रही पूजा जारी रहेगी।</p>
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		<title>ज्ञानवापी से संबंधित 4 मामलों की सुनवाई होंगी आज</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Live Halchal Web_Wing]]></dc:creator>
		<pubDate>Thu, 15 Feb 2024 05:48:10 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[उत्तरप्रदेश]]></category>
		<category><![CDATA[राज्य]]></category>
		<category><![CDATA[4 मामलों की सुनवाई]]></category>
		<category><![CDATA[ज्ञानवापी]]></category>
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					<description><![CDATA[ज्ञानवापी से संबंधित मां शृंगार गौरी व एएसआई सर्वे रिपोर्ट पर मुस्लिम पक्ष की ओर से मांगी गई आपत्ति समेत चार मामलों में आज जिला अदालत में सुनवाई होनी है। इसमें आदि विश्वेश्वर के पूजा-पाठ को लेकर दाखिल वाद पर सुनवाई भी शामिल है। ज्ञानवापी से संबंधित चार मामलों की सुनवाई गुरुवार यानी आज जनपद &#8230;]]></description>
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<p>ज्ञानवापी से संबंधित मां शृंगार गौरी व एएसआई सर्वे रिपोर्ट पर मुस्लिम पक्ष की ओर से मांगी गई आपत्ति समेत चार मामलों में आज जिला अदालत में सुनवाई होनी है। इसमें आदि विश्वेश्वर के पूजा-पाठ को लेकर दाखिल वाद पर सुनवाई भी शामिल है।</p>



<p>ज्ञानवापी से संबंधित चार मामलों की सुनवाई गुरुवार यानी आज जनपद अदालत में होगी। प्रभारी जिला जज की अदालत में मां शृंगार गौरी मूल वाद की सुनवाई होनी है। इसमें एएसआई सर्वे रिपोर्ट पर अंजुमन इंतेजामिया मसाजिद कमेटी की तरफ से आपत्ति मांगी गई है। साथ ही अन्य तहखानों व खंडहरों के एएसआई से सर्वे कराए जाने के आवेदन पर भी सुनवाई होनी है।</p>



<p>शैलेंद्र कुमार पाठक व्यास की ओर से व्यासजी के तहखाने को लेकर दाखिल वाद की पोषणीयता को लेकर मसाजिद कमेटी की ओर से दिए गए आवेदन और जिला जज द्वारा पूजा-पाठ को लेकर दिए गए आदेश पर रोक लगाने संबंधी आवेदन पर सुनवाई होनी है। साध्वी पूर्णांबा और शारदांबा की ओर से आदि विश्वेश्वर के पूजा-पाठ को लेकर दाखिल वाद पर सुनवाई होनी है।</p>



<p>इसके अलावा सिविल जज सीनियर डिवीजन फास्ट ट्रैक कोर्ट प्रशांत कुमार की अदालत में वर्ष 1991 में दाखिल प्राचीन मूर्ति स्वयंभू ज्योतिर्लिंग लॉर्ड विश्वेश्वरनाथ बनाम अंजुमन इंतेजामिया मसाजिद कमेटी व अन्य के वाद में भी सुनवाई होनी है।</p>



<p>इसमें लॉर्ड विश्वेश्वर के वादमित्र विजय शंकर रस्तोगी के उस आवेदन पर सुनवाई होनी है जिसमें सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर सील वजूखाने में मिली शिवलिंग जैसी आकृति की एएसआई से जीपीआर पद्धति से सर्वे कराने की मांग की गई है। साथ ही, इस वाद के वादी हरिहर पांडेय की मृत्यु होने पर उनके दो पुत्रों को पक्षकार बनाए जाने के मुद्दे पर भी सुनवाई होनी है।</p>
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		<title>ज्ञानवापी : दबाव में व्यास तहखाने में दी गई पूजा की अनुमति</title>
		<link>https://livehalchal.com/up-54/542211</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Live Halchal Web_Wing]]></dc:creator>
		<pubDate>Tue, 13 Feb 2024 07:02:00 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[उत्तरप्रदेश]]></category>
		<category><![CDATA[राज्य]]></category>
		<category><![CDATA[ज्ञानवापी]]></category>
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					<description><![CDATA[वाराणसी स्थित ज्ञानवापी तहखाने में काशी विश्वनाथ मंदिर ट्रस्ट को पूजा की अनुमति देने की जिला जज के आदेश की वैधता की चुनौती अपीलों पर सुनवाई जारी है। सोमवार को तकरीबन डेढ़ घंटे चली सुनवाई में मस्जिद पक्ष ने आरोप लगाया कि हिंदू पक्ष के प्रभाव में आकर जिला जज ने यह आदेश पारित किया। &#8230;]]></description>
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<p>वाराणसी स्थित ज्ञानवापी तहखाने में काशी विश्वनाथ मंदिर ट्रस्ट को पूजा की अनुमति देने की जिला जज के आदेश की वैधता की चुनौती अपीलों पर सुनवाई जारी है। सोमवार को तकरीबन डेढ़ घंटे चली सुनवाई में मस्जिद पक्ष ने आरोप लगाया कि हिंदू पक्ष के प्रभाव में आकर जिला जज ने यह आदेश पारित किया। जबकि, मंदिर पक्ष के अधिवक्ता द्वारा इसका विरोध किया गया।</p>



<p>कोर्ट ने अपीलार्थी अधिवक्ता के अनुरोध पर अगली सुनवाई की तिथि 15 फरवरी तय की गई है। यह आदेश न्यायमूर्ति रोहित रंजन अग्रवाल ने मसाजिद कमेटी की तरफ से जिला जज के दो आदेशों की चुनौती अपीलों की सुनवाई करते हुए दिया है। इसके पहले सुनवाई शुरू होते ही अपीलार्थी की तरफ से पूरक हलफनामा दाखिल किया गया।&nbsp;</p>



<p>आदेश की प्रमाणित प्रति दाखिल की गई। अपील दाखिले का दोष समाप्त कर कोर्ट ने नियमित नंबर देने का आदेश दिया। वादी विपक्षी अधिवक्ता ने धारा 107 की अर्जी दाखिल की, जिसे पत्रावली पर रखा गया।</p>



<p>मस्जिद पक्ष के अधिवक्ता पुनीत गुप्ता ने सुप्रीम कोर्ट की नजीरों के हवाले से तर्क दिया कि अदालत अंतरिम आदेश से फाइनल रिलीफ नहीं दे सकती। प्रश्नगत मामले में तहखाने में पूजा की अनुमति देकर वस्तुत: सिविल वाद स्वीकार कर लिया है।&nbsp;</p>



<p>यह भी कहना था कि सिविल प्रक्रिया संहिता की धारा 152 के अंतर्निहित अधिकार का प्रयोग करते हुए अदालत मूल आदेश की प्रकृति में बदलाव का आदेश नहीं दे सकती। यह भी कहा जिला अदालत ने 17 जनवरी को अर्जी स्वीकार कर केवल एक राहत दी है। दूसरी मांग पर आदेश नहीं देना ही अनुतोष से इंकार माना जाएगा।</p>



<p>वरिष्ठ अधिवक्ता एसएफए नकवी ने कहा कि 17 जनवरी 2024 के मूल आदेश से जिला जज ने जिलाधिकारी वाराणसी को ज्ञानवापी का रिसीवर नियुक्त किया है, जिसमें विवादित भवन की सुरक्षा व देखरेख करने व किसी प्रकार का बदलाव न होने देने का निर्देश दिया है।&nbsp;</p>



<p>31 जनवरी 24 के आदेश से बैरिकेडिंग काट कर तहखाने में पूजा के लिए दरवाजा बनाने तथा ट्रस्ट को पुजारी के जरिए तहखाने में स्थित देवी देवताओं की पूजा करने की अनुमति देकर अपने ही आदेश का विरोधाभासी आदेश दिया है। यह कानून के खिलाफ है।</p>



<p>यह भी कहा कि तहखाने पर किसका अधिकार है यह साक्ष्यों के बाद सिविल वाद के निर्णय से तय होगा। जिला जज ने अंतरिम आदेश से अंतिम राहत देकर गलती की है। उन्होंने कुछ दस्तावेज़ दाखिल करने के लिए समय मांगा, जिसे स्वीकार करते हुए कोर्ट ने सुनवाई स्थगित कर दी।</p>



<p>उधर, मंदिर पक्ष की ओर से कहा गया कि जिला जज ने उनकी अर्जी पर रिसीवर नियुक्त किया। कुछ चूक की वजह से 17 जनवरी को पूजा की अनुमति नहीं दी। 31 जनवरी को यह आदेश पारित किया। आदेश पारित करने से पूर्व जिला जज ने दोनों पक्षों को सुना था।</p>
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		<title>ज्ञानवापी : व्यासजी के तहखाने में पूजा के आदेश पर आज फिर सुनवाई</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Live Halchal Web_Wing]]></dc:creator>
		<pubDate>Wed, 07 Feb 2024 05:57:23 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[उत्तरप्रदेश]]></category>
		<category><![CDATA[राज्य]]></category>
		<category><![CDATA[ज्ञानवापी]]></category>
		<category><![CDATA[तहखाने]]></category>
		<category><![CDATA[व्यासजी]]></category>
		<category><![CDATA[सुनवाई]]></category>
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					<description><![CDATA[न्यायमूर्ति रोहित रंजन अग्रवाल की एकल पीठ में कल दोपहर बाद संशोधित अर्जी पर सुनवाई हुई। आज फिर इस मसले पर सुनवाई होगी।&#160; ज्ञानवापी मामले को लेकर मंगलवार को हाईकोर्ट में सुनवाई हुई। इसमें इंतजामिया मसाजिद के वकील सैयद फरमान नकवी ने 2 फरवरी को हुई अपनी बहस को आगे बढ़ाते हुए मुस्लिम पक्ष की &#8230;]]></description>
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<p>न्यायमूर्ति रोहित रंजन अग्रवाल की एकल पीठ में कल दोपहर बाद संशोधित अर्जी पर सुनवाई हुई। आज फिर इस मसले पर सुनवाई होगी।&nbsp;</p>



<p>ज्ञानवापी मामले को लेकर मंगलवार को हाईकोर्ट में सुनवाई हुई। इसमें इंतजामिया मसाजिद के वकील सैयद फरमान नकवी ने 2 फरवरी को हुई अपनी बहस को आगे बढ़ाते हुए मुस्लिम पक्ष की तरफ से व्यास जी के तहखाने में पूजा-अर्चना शुरू किए जाने के आदेश को चुनौती दी गई है। इसके अलावा जिला जज के वाराणसी के डीएम को व्यास जी के तहखाना का रिसीवर नियुक्त किए जाने के आदेश को भी चुनौती दी गई है। न्यायमूर्ति रोहित रंजन अग्रवाल की एकल पीठ में कल दोपहर बाद संशोधित अर्जी पर सुनवाई हुई। आज फिर इस मसले पर सुनवाई होगी।&nbsp;</p>



<p><strong>ज्ञानवापी के बंद तहखानों के सर्वे की मांग पर सुनवाई 15 फरवरी को</strong><br>ज्ञानवापी के बंद तहखानों एस-1 और एन-1 के एएसआई से सर्वे की मांग पर मंगलवार को एडीजे प्रथम अनिल कुमार पंचम की अदालत में सुनवाई हुई। मां शृंगार गौरी केस की वादिनी राखी सिंह के आवेदन पर अंजुमन इंतेजामिया मसाजिद कमेटी की ओर से आपत्ति दाखिल की गई। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अदालत ने मामले में सुनवाई की अगली तिथि 15 फरवरी नियत कर दी।</p>



<p>राखी सिंह की ओर से अधिवक्ता सौरभ तिवारी और अनुपम द्विवेदी अदालत में पेश हुए। कहा कि ज्ञानवापी परिसर के बंद तहखानों का एएसआई से सर्वे करना जरूरी है। ताकि, 15 अगस्त 1947 को परिसर का धार्मिक चरित्र क्या था, इसका पता चल सके। ज्ञानवापी में दक्षिण की तरफ एस-1 और उत्तर की तरफ एन-1 तहखाने का सर्वे नहीं हो सका है। दोनों के अंदर जाने का रास्ता ईंट-पत्थर से बंद किया गया है। बंद दरवाजों के ईंट-पत्थर पर पूरी इमारत का बोझ नहीं है। ऐसे में ईंट-पत्थरों को हटाकर और वर्तमान इमारत को नुकसान पहुंचाए बगैर सभी बंद तहखानों का वैज्ञानिक सर्वे हो सकता है।</p>



<p>वहीं, अंजुमन इंतेजामिया मसाजिद कमेटी की तरफ से अधिवक्ता मुमताज अहमद और एखलाक अहमद ने एएसआई सर्वे के आवेदन का विरोध किया। कहा कि मूल वाद में एएसआई और केंद्र सरकार को पक्षकार बनाया ही नहीं गया है। फिर, सर्वे का आदेश कैसे दिया जा सकता है। इस पर हिंदू पक्ष की तरफ से कहा गया कि इलाहाबाद हाईकोर्ट पूर्व में निर्धारित कर चुका है। सिविल प्रक्रिया संहिता के प्रावधानों के अनुसार एएसआई को पक्षकार बनाना जरूरी नहीं है।</p>
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		<title>ज्ञानवापी : एक लाख श्रद्धालुओं ने किया व्यासजी के तहखाने का झांकी दर्शन</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Live Halchal Web_Wing]]></dc:creator>
		<pubDate>Sun, 04 Feb 2024 07:10:42 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[उत्तरप्रदेश]]></category>
		<category><![CDATA[राज्य]]></category>
		<category><![CDATA[ज्ञानवापी]]></category>
		<category><![CDATA[झांकी दर्शन]]></category>
		<category><![CDATA[व्यासजी]]></category>
		<category><![CDATA[श्रद्धालुओं]]></category>
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					<description><![CDATA[ज्ञानवापी परिसर में स्थित व्यासजी के तहखाने में पूजा शुरू होने के साथ ही भक्तों दर्शन के लिए भक्तों में काफी उत्साह देखने को मिल रहा है। शनिवार को एक लाख श्रद्धालुओं ने व्यासजी के तहखाने के दर्शन किए।  श्री काशी विश्वनाथ मंदिर में शनिवार को भी श्रद्धालुओं की भीड़ रही। शयन आरती तक एक लाख &#8230;]]></description>
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<p>ज्ञानवापी परिसर में स्थित व्यासजी के तहखाने में पूजा शुरू होने के साथ ही भक्तों दर्शन के लिए भक्तों में काफी उत्साह देखने को मिल रहा है। शनिवार को एक लाख श्रद्धालुओं ने व्यासजी के तहखाने के दर्शन किए। </p>



<p>श्री काशी विश्वनाथ मंदिर में शनिवार को भी श्रद्धालुओं की भीड़ रही। शयन आरती तक एक लाख से अधिक श्रद्धालुओं ने व्यासजी के तहखाने का झांकी दर्शन किया। मंगला आरती से शुरू हुआ झांकी दर्शन का सिलसिला शयन आरती तक चलता रहा। व्यासजी के तहखाने में भी मंगला आरती से शयन आरती के सभी विधान पूर्ण किए गए।</p>



<p>शनिवार को मंगला आरती के साथ श्री काशी विश्वनाथ मंदिर में दर्शन पूजन आरंभ हुआ। मंगला आरती में पहुंचे नेमी दर्शनार्थियों ने भी तहखाने का झांकी दर्शन किया। मंगला आरती के बाद आम श्रद्धालुओं के लिए मंदिर के कपाट खोल दिए गए।</p>



<p>बाबा विश्वनाथ का दर्शन पूजन के लिए पहुंच रहे श्रद्धालुओं में व्यासजी के तहखाने में रखे विग्रहों के दर्शन करने की उत्सुकता सबसे अधिक रही। हर कोई पहले बाबा का दर्शन करने के बाद सीधे मंदिर परिसर में विराजमान नंदी के पास से ही तहखाने के दर्शन के लिए पहुंच रहा था।</p>
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