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	<title>जैसे सुबह की लोकल: रजा मुराद &#8211; Live Halchal</title>
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		<title>Special: फिल्म इंडस्ट्री में बतौर एक्टर घुसना ऐसा है, जैसे सुबह की लोकल: रजा मुराद</title>
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		<pubDate>Sun, 31 Dec 2017 09:24:20 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[बॉलीवुड]]></category>
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					<description><![CDATA[<img width="618" height="416" src="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2017/12/01_09_2016-jharmurad31.jpg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="Special: फिल्म इंडस्ट्री में बतौर एक्टर घुसना ऐसा है, जैसे सुबह की लोकल: रजा मुरादSpecial: फिल्म इंडस्ट्री में बतौर एक्टर घुसना ऐसा है, जैसे सुबह की लोकल: रजा मुराद" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" fetchpriority="high" srcset="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2017/12/01_09_2016-jharmurad31.jpg 650w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2017/12/01_09_2016-jharmurad31-300x202.jpg 300w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2017/12/01_09_2016-jharmurad31-110x75.jpg 110w" sizes="(max-width: 618px) 100vw, 618px" />फिल्म इंडस्ट्री में बतौर एक्टर घुसना बिल्कुल ऐसा ही होता है, जैसे सवा पांच बजे की लोकल ट्रेन, चर्च गेट स्टेशन से छूटती है, उसमें जगह नहीं होती। आपको जगह बनानी पड़ती है। आपको घुसना पड़ता है। फौरन कोई नहीं कहता कि आइए साहब, खुशामदीद!  जब मैंने होश संभाला और अपने पिता को देखता था, &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<img width="618" height="416" src="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2017/12/01_09_2016-jharmurad31.jpg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="Special: फिल्म इंडस्ट्री में बतौर एक्टर घुसना ऐसा है, जैसे सुबह की लोकल: रजा मुरादSpecial: फिल्म इंडस्ट्री में बतौर एक्टर घुसना ऐसा है, जैसे सुबह की लोकल: रजा मुराद" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" srcset="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2017/12/01_09_2016-jharmurad31.jpg 650w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2017/12/01_09_2016-jharmurad31-300x202.jpg 300w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2017/12/01_09_2016-jharmurad31-110x75.jpg 110w" sizes="(max-width: 618px) 100vw, 618px" /><div class="desc">
<div><strong>फिल्म इंडस्ट्री में बतौर एक्टर घुसना बिल्कुल ऐसा ही होता है, जैसे सवा पांच बजे की लोकल ट्रेन, चर्च गेट स्टेशन से छूटती है, उसमें जगह नहीं होती। आपको जगह बनानी पड़ती है। आपको घुसना पड़ता है। फौरन कोई नहीं कहता कि आइए साहब, खुशामदीद!</strong><strong> <img decoding="async" class="aligncenter size-full wp-image-103211" src="http://www.livehalchal.com/wp-content/uploads/2017/12/01_09_2016-jharmurad31.jpg" alt="Special: फिल्म इंडस्ट्री में बतौर एक्टर घुसना ऐसा है, जैसे सुबह की लोकल: रजा मुरादSpecial: फिल्म इंडस्ट्री में बतौर एक्टर घुसना ऐसा है, जैसे सुबह की लोकल: रजा मुराद" width="650" height="438" srcset="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2017/12/01_09_2016-jharmurad31.jpg 650w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2017/12/01_09_2016-jharmurad31-300x202.jpg 300w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2017/12/01_09_2016-jharmurad31-110x75.jpg 110w" sizes="(max-width: 650px) 100vw, 650px" /></strong></div>
</div>
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<h3 class="smry"></h3>
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<div class="desc"><strong>जब मैंने होश संभाला और अपने पिता को देखता था, तो मुझे यह नहीं मालूम था कि वह क्या करते हैं। इतना जरूर मालूम था कि उनके साथ मैं जब भी बाहर जाता था, तो उनकी बड़ी आव-भगत होती थी। लोग उन्हें देखने के लिए जमा होते थे, जिससे मुझे यह लगता था कि यह बहुत ही खास शख्सियत हैं।</strong></p>
<p><strong>एक कहावत है, &#8216;बाप पर पूत पिता, पर घोड़ा बहुत नहीं तो थोड़ा-थोड़ा&#8217;। तो असर तो होगा ही। फिर हर बच्चा अपने माता-पिता से प्रेरित होता है। मैं उन्हीं से प्रेरित हुआ। बहरहाल, मेरे पिता ने मुझसे एक बात कही थी कि हमारे जमाने में तो एक्टिंग का कोई ऐसा इंस्टीट्यूट होता नहीं था, लेकिन अगर तुम्हें यह सुविधा मिल रही है, तो उसका इस्तेमाल करो।</strong></p>
<p><strong>फिर उन्होंने वर्ष 1969 में मेरा दाखिला पुणे फिल्म इंस्टीट्यूट में करवा दिया। वहां, मैंने एक्टिंग की बारीकियां सीखीं। स्कूल या कॉलेजों में बच्चे बंक करके फिल्म देखने चले जाते हैं, लेकिन वहां हमे क्लासरूम में फिल्में दिखाई जाती थीं।</strong><strong> </strong></div>
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<h3 class="smry"></h3>
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<div class="desc"><strong>एक माहौल था। हम फिल्म ओढ़ते थे। फिल्म पहनते थे। फिल्म खाते थे। फिल्म पीते थे। फिर जब पढ़कर बाहर निकले, तो संघर्ष शुरू हो गया। मैंने कभी अपने पिता की मदद नहीं ली। अपनी तस्वीरें खिंचवाईं और उन्हें ऑफिस टू ऑफिस पहुंचाता था। फिल्म &#8216;एक नजर&#8217; से डेब्यू किया था। इस फिल्म के लिए मुझे बेस्ट डेब्यू का अवॉर्ड भी मिला था। अवॉर्ड फंक्शन में इंडस्ट्री के बड़े-बड़े लोग आए थे।</strong></p>
<p><strong>मैं खुशनसीब रहा कि पहली फिल्म में मुझे अवॉर्ड भी मिला, लेकिन संघर्ष जारी रहा। फिर वर्ष 1973 में ऋषिकेश मुखर्जी एक फिल्म बना रहे थे &#8216;नमक हराम&#8217; और गुलजार साहब ने मेरी फिल्म देखी थी, तो उन्होंने ही ऋषि दा से मेरे लिए बात की। मुझे उन्होंने बुलाया। वह एडिटिंग कर रहे थे। मुझे बाहर लेकर आए और सीढ़ियों पर बैठने को कह दिया। ऋषि दा ज्यादा बोलते नहीं थे।</strong></p>
<p><strong>उन्होंने मुझे कहा, &#8216;मैं ज्यादा बात नहीं करूंगा, लेकिन इस फिल्म में जो रोल है, वह लकी एक्टर्स को बीस साल में एक बार मिलता है। अनलकी एक्टर्स को पूरी जिंदगी में ऐसा रोल नहीं मिलता।&#8217; ऋषि दा बांग्ला जबान के होने की वजह से मुझे राजा बोलते थे। उन्होंने प्रोडक्शन मैनेजर को बुलाकर कहा, &#8216;राजा को खादी भवन में लेकर जाओ। एक पायजामा और कुर्ता दिलाओ।&#8217;</strong><strong> </strong></div>
</div>
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<div class="desc"><strong>फिर उन्होंने मुझसे कहा, &#8216;राजा तुम यही कपड़े पहनेगा, इसी को पहनकर सारे काम करेगा और जब शूटिंग पर आएगा, तो इसी को पहनकर आएगा और उस दिन नहाएगा भी नहीं।&#8217; मैंने कहा, &#8216;ठीक है दादा&#8217;। फिल्म की शूटिंग में मेरा पहला दिन था और राजेश खन्ना के साथ सीन था। नितिन मुकेश जो फिल्म को असिस्ट कर रहे थे, वह मेरे घर के पास रहते थे, तो उन्होंने मुझे पिक किया और हम स्टूडियो की तरफ रवाना हुए।</strong></p>
<p><strong>इस बीच उन्होंने मुझे चेतावनी दी कि राजेश खन्ना चाहते थे कि फिल्म में शायर का रोल उनके गुरु वी.के. शर्मा करें और ऋषि दा माने नहीं, तो हो सकता है, वह तुमसे थोड़ा रूखा व्यवहार करें। हम स्टूडियो पहुंचे। शूट तैयार हुआ। मुझे एक शेर उसमें पढ़ना था। मैंने शॉट दिया और जब राजेश खन्ना ने वह शॉट देखा, तो मुझे बुलाकर कहा कि &#8216;तेरा शेर पढ़ने का अंदाज तो बिल्कुल कैफी आजमी साहब जैसा है&#8217;। यह मेरे लिए बहुत बड़ा कॉम्प्लिमेंट था। इस फिल्म के बाद भी मेरी जद्दोजहद कम नहीं हुई, क्योंकि इस तरह के रोल कम मिलते हैं।</strong></p>
<p><strong>मेरी झोली में तारीफें बहुत आईं, लेकिन काम नहीं मिला। मैंने कुछ पंजाबी फिल्में भी कीं। छोटे-छोटे रोल किए। मेरा मानना है कि जब आप संघर्ष करते हैं, तो आप किसी पर एहसान नहीं करते। फिल्म इंडस्ट्री में बतौर एक्टर घुसना बिल्कुल ऐसा ही होता है, जैसे सवा पांच बजे की लोकल ट्रेन, चर्च गेट स्टेशन से छूटती है, उसमें जगह नहीं होती। आपको जगह बनानी पड़ती है। आपको घुसना पड़ता है। कोई नहीं कहता कि आइए साहब, खुशामदीद। मेरी कोई बिसाद नहीं थी, जिस तरह से मुझे फिल्म &#8216;नमक-हराम&#8217; मिली। </strong></div>
<div></div>
<div class="desc"><strong>उसी तरह मुझे राज कपूर साहब ने बुलाया और यह मेरी जिंदगी का टर्निंग प्वॉइंट था। मैं उनसे मिलने गया। उन्होंने मुझसे एक बहुत अच्छी बात कही, &#8216;प्रेम रोग फिल्म में जो रोल है, ठाकुर विरेंद्र प्रताप सिंह का, उसके लिए हमारे जहन में सिर्फ आप हैं। अगर आप मना करेंगे, तो फिर हम किसी और के बारे में सोचेंगे।&#8217;</strong></div>
</div>
<div id="slide-4" class="clr">
<div class="desc">
<strong>मैंने सोचा राज कपूर साहब को मुझसे इतनी उम्मीद भी है, तो मुझे खुशी की बजाय डर लगना शुरू हुआ। बहरहाल, मैनें सोचा यह तो जिंदगी का सुनहरा मौका है, जिसे मैं नहीं छोड़ूंगा। फिर उन्होंने फिल्म &#8216;राम तेरी गंगा मैली&#8217; में मुझे कास्ट किया, लेकिन कास्ट करने से पहले, उन्होंने मुझसे कहा कि मैं आपका स्क्रीन टेस्ट लूंगा। वह बोले, &#8216;वैसे तो मुझे आपकी एक्टिंग में कोई शक नहीं है, लेकिन इससे पहले कभी मैंने आपको एक उम्र दराज के रोल में देखा नहीं, इसलिए एक बार आपका स्क्रीन टेस्ट लेना चाहता हूं।&#8217;</strong></p>
<p><strong>मैं तैयार हो गया और जब कॉस्ट्यूम पहनकर आया, तो राज कपूर साहब ने मुझे ऊपर से नीचे तक देखा और बोले, &#8216;रजा साहब आप लग रहे हैं। स्क्रीन टेस्ट की कोई जरूरत नहीं है। आप कल से शूटिंग पर आ रहे हैं।&#8217; फिल्म बड़ी हिट हुई थी। बस, उसके बाद रास्ते खुलते गए। मैं बहुत ज्यादा मशरूफ रहने लगा अपने काम में। तब मेरी मां कहती थीं कि तुम इतने-इतने घंटे क्यों काम करते हो? मैं उनसे यही कहता था, &#8216;देखिए  मैंने 14 साल इंतजार किया है। करवटें ली हैं। मुझे वह 14 साल कवर करने हैं।&#8217;</strong></div>
</div>
<div class="sambandhit-news oh"><strong> </strong></div>
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