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	<title>जिला विद्यालय निरीक्षक डॉ. मुकेश कुमार सिंह &#8211; Live Halchal</title>
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	<title>जिला विद्यालय निरीक्षक डॉ. मुकेश कुमार सिंह &#8211; Live Halchal</title>
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		<title>स्कूल कैंपस में बच्चों के स्वास्थ्य की सुरक्षा जिम्मेदारी स्कूल प्रशासन की होगी : जिला विद्यालय निरीक्षक डॉ. मुकेश कुमार सिंह</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Bhavna Vajpai]]></dc:creator>
		<pubDate>Fri, 09 Oct 2020 11:24:37 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[उत्तरप्रदेश]]></category>
		<category><![CDATA[जिला विद्यालय निरीक्षक डॉ. मुकेश कुमार सिंह]]></category>
		<category><![CDATA[स्कूल कैंपस में बच्चों के स्वास्थ्य की सुरक्षा]]></category>
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					<description><![CDATA[<img width="618" height="382" src="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2020/10/nyoooz_hindi1663_1505729421.jpg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" fetchpriority="high" srcset="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2020/10/nyoooz_hindi1663_1505729421.jpg 647w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2020/10/nyoooz_hindi1663_1505729421-300x185.jpg 300w" sizes="(max-width: 618px) 100vw, 618px" />राजधानी लखनऊ में 15 अक्तूबर से स्कूल खोले जाने को लेकर बच्चों में संक्रमण मिलने पर जिम्मेदारी तय होने का पेंच फंस गया है। जहां निजी स्कूल सहमति पत्र पर अभिभावकों से इस शर्त के साथ हस्ताक्षर करा रहे हैं कि यदि छात्र संक्रमित पाया जाता है तो स्कूल प्रशासन की जिम्मेदारी नहीं होगी। वहीं, &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<img width="618" height="382" src="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2020/10/nyoooz_hindi1663_1505729421.jpg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" srcset="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2020/10/nyoooz_hindi1663_1505729421.jpg 647w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2020/10/nyoooz_hindi1663_1505729421-300x185.jpg 300w" sizes="(max-width: 618px) 100vw, 618px" /><p>राजधानी लखनऊ में 15 अक्तूबर से स्कूल खोले जाने को लेकर बच्चों में संक्रमण मिलने पर जिम्मेदारी तय होने का पेंच फंस गया है। जहां निजी स्कूल सहमति पत्र पर अभिभावकों से इस शर्त के साथ हस्ताक्षर करा रहे हैं कि यदि छात्र संक्रमित पाया जाता है तो स्कूल प्रशासन की जिम्मेदारी नहीं होगी। वहीं, जिला विद्यालय निरीक्षक ने साफ किया है कि ऐसी स्थिति में स्कूल से जवाब-तलब जरूर किया जाएगा। वे जिम्मेदारी से बच नहीं सकते। उधर, बजट की कमी सरकारी स्कूलों को खोले जाने में बाधा बन रही है।</p>
<p><img decoding="async" class=" wp-image-380993 aligncenter" src="http://www.livehalchal.com/wp-content/uploads/2020/10/nyoooz_hindi1663_1505729421.jpg" alt="" width="1082" height="669" srcset="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2020/10/nyoooz_hindi1663_1505729421.jpg 647w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2020/10/nyoooz_hindi1663_1505729421-300x185.jpg 300w" sizes="(max-width: 1082px) 100vw, 1082px" /></p>
<p>जारी शासनादेश के अनुसार, स्कूल खोलने के लिए अभिभावकों की सहमति जरूरी है। उनकी सहमति पर ही छात्रों को बुलाया जाएगा। अनएडेड प्राइवेट स्कूल्स एसोसिएशन ने एक कॉमन सहमति पत्र तैयार किया है। इस पर यह शर्त लिखी है कि यदि बच्चा संक्रमित पाया जाता है तो स्कूल प्रशासन की जिम्मेदारी नहीं होगी।</p>
<p>स्कूलों ने अपने सहमति पत्र पर यही शर्त रखी है और अभिभावकों को हस्ताक्षर करने के लिए भेज रहे हैं। इस पर शिक्षा विभाग ने ऐतराज जताया है। जिला विद्यालय निरीक्षक डॉ. मुकेश कुमार सिंह ने बताया कि कैंपस में बच्चों के स्वास्थ्य व सुरक्षा की जिम्मेदारी स्कूल प्रशासन की है। पढ़ाई के दौरान यदि कोई छात्र संक्रमित पाया जाता है तो स्कूल से जवाब-तलब किया जाएगा। वे जिम्मेदारी से भाग नहीं सकते।</p>
<p>यह पता लगाया जाएगा कि कहीं स्कूल में तो संक्रमण नहीं फैला है। साथ ही स्कूल में वायरस की रोकथाम के लिए की गई व्यवस्था जांची जाएगी। स्कूलों की जिम्मेदारी होगी कि वे छात्रों को कोविड प्रोटोकॉल का पालन करते हुए सुरक्षित रखें। इसमें कोताही पर स्कूल के खिलाफ कार्रवाई भी की जा सकती है।</p>
<p>शिक्षा विभाग के द्वारा रुख साफ किए जाने के बावजूद निजी स्कूल संगठन शर्त पर अड़ा है। अनएडेड प्राइवेट स्कूल्स एसोसिएशन के अध्यक्ष अनिल अग्रवाल ने बताया कि जिलाधिकारी की बैठक में सारे नियम साफ कर दिए गए हैं। क्या करना है क्या नहीं करना है, इसके दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं।</p>
<p>यदि कोई स्कूल कोविड प्रोटोकॉल का पालन करने में लापरवाही बरतता है तो उसके खिलाफ कार्रवाई की जा सकती है। लेकिन पालन के बावजूद कार्रवाई की जाएगी तो गलत होगा। बताया कि स्कूलों ने एसओपी में साफ निर्देश दिया है कि अभिभावक अपने बच्चों के स्वास्थ्य का ध्यान रखें। उनकी जरा सी भी तबीयत खराब हो तो दवाई देकर स्कूल न भेजें। जब पूरी तरह से स्वस्थ और संतुष्ट हो जाएं तभी स्कूल भेजें।</p>
<p>छात्र यदि पॉजिटिव होता है तो किस आधार पर शिक्षा विभाग यह आरोप लगा सकता है कि संक्रमण स्कूल ने ही फैलाया होगा। इस तरह का आरोप निराधार होगा। अध्यक्ष अनिल अग्रवाल ने बताया कि उन्होंने संगठन द्वारा बनाई गई एसओपी और सहमति पत्र शासन और जिलाधिकारी के सामने रखा है। इस पर कोई विवाद नहीं है।</p>
<p>स्कूल खोले जाने को लेकर सरकारी स्कूलों में अलग समस्या हो गई है। वे कोविड प्रोटोकॉल का पालन में आ रहे खर्चे को लेकर परेशान हैं। स्कूल यह खर्चा उठाने को तैयार नहीं है। वे सरकार से इसके लिए ग्रांट की मांग कर रहे हैं। जिले में 51 राजकीय और 101 सहायता प्राप्त विद्यालय हैं।</p>
<p>समय-समय पर कक्षाओं व परिसर का सैनिटाइजेशन, छात्रों व स्टाफ के लिए हर वक्त सैनिटाइजर उपलब्ध रखना, अतिरिक्त थर्मल स्कैनर व ऑक्सीमीटर खरीदना और मास्क उपलब्ध कराना आदि का खर्च स्कूल प्रशासन वहन करने को तैयार नहीं। जबकि जिला विद्यालय निरीक्षक डॉ. मुकेश कुमार सिंह ने बताया कि स्कूल में व्यवस्थाएं उपलब्ध कराने का जिम्मा स्कूल प्रबंधन का होगा। इसे आधार बनाकर जिम्मेदारी से बच नहीं सकते।</p>
<p>उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षक संघ के प्रदेशीय मंत्री डॉ. आरपी मिश्रा ने बताया कि अभी परिस्थितियां अच्छी नहीं है। स्कूल नहीं खोला जाना चाहिए। छात्रों के स्वास्थ्य को लेकर खतरा है। कोविड प्रोटोकॉल का पालन करने के लिए प्रत्येक स्कूल में रोजाना 800 से 1000 रुपये का होने वाला खर्चा कहां से आएगा। उन्होंने बताया कि संगठन सरकार से इसके लिए अतिरिक्त ग्रांट की मांग करती है।</p>
<p>कई निजी स्कूल अभिभावकों से सहमति गूगल फॉर्म पर मांग रही हैं। गूगल फॉर्म पर अभिभावकों को हां और न में जवाब देना है। यहां तक कि जिला विद्यालय निरीक्षक कार्यालय से जो सर्वे कराया जा रहा है वह भी गूगल फॉर्म पर ही है। विद्यालय खुलने पर अभिभावकों को लिखित में सहमति पत्र छात्र के हाथ भिजवाना पड़ेगा।</p>
<p>इसमें कई स्कूलों में गड़बड़ी की शिकायत मिली है। कई स्कूल प्रशासन ने बताया कि छात्र खुद ही गूगल फॉर्म पर स्कूल आने के लिए न का विकल्प भर कर भेज दे रहे हैं। अभिभावकों से बातचीत पर गड़बड़ी की पोल खुलने लगी है। स्कूल प्रशासन अब अभिभावकों के साथ मीटिंग कर सहमति लेंगे।</p>
<p>&nbsp;</p>
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