<?xml version="1.0" encoding="UTF-8"?><rss version="2.0"
	xmlns:content="http://purl.org/rss/1.0/modules/content/"
	xmlns:wfw="http://wellformedweb.org/CommentAPI/"
	xmlns:dc="http://purl.org/dc/elements/1.1/"
	xmlns:atom="http://www.w3.org/2005/Atom"
	xmlns:sy="http://purl.org/rss/1.0/modules/syndication/"
	xmlns:slash="http://purl.org/rss/1.0/modules/slash/"
	>

<channel>
	<title>जाने कैसे टिका हुआ है इस पर मंदिर &#8211; Live Halchal</title>
	<atom:link href="https://livehalchal.com/tag/%e0%a4%9c%e0%a4%be%e0%a4%a8%e0%a5%87-%e0%a4%95%e0%a5%88%e0%a4%b8%e0%a5%87-%e0%a4%9f%e0%a4%bf%e0%a4%95%e0%a4%be-%e0%a4%b9%e0%a5%81%e0%a4%86-%e0%a4%b9%e0%a5%88-%e0%a4%87%e0%a4%b8-%e0%a4%aa%e0%a4%b0/feed" rel="self" type="application/rss+xml" />
	<link>https://livehalchal.com</link>
	<description>Latest News, Updated News, Hindi News Portal</description>
	<lastBuildDate>Tue, 18 Dec 2018 06:41:39 +0000</lastBuildDate>
	<language>en-US</language>
	<sy:updatePeriod>
	hourly	</sy:updatePeriod>
	<sy:updateFrequency>
	1	</sy:updateFrequency>
	<generator>https://wordpress.org/?v=6.9.4</generator>

<image>
	<url>https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2023/10/cropped-Live-Halchal-512-32x32.jpg</url>
	<title>जाने कैसे टिका हुआ है इस पर मंदिर &#8211; Live Halchal</title>
	<link>https://livehalchal.com</link>
	<width>32</width>
	<height>32</height>
</image> 
	<item>
		<title>हवा में झूलता है इस मंदिर का खंभा,जाने कैसे टिका हुआ है इस पर मंदिर</title>
		<link>https://livehalchal.com/%e0%a4%b9%e0%a4%b5%e0%a4%be-%e0%a4%ae%e0%a5%87%e0%a4%82-%e0%a4%9d%e0%a5%82%e0%a4%b2%e0%a4%a4%e0%a4%be-%e0%a4%b9%e0%a5%88-%e0%a4%87%e0%a4%b8-%e0%a4%ae%e0%a4%82%e0%a4%a6%e0%a4%bf%e0%a4%b0-%e0%a4%95/196141</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Jaya Kashyap]]></dc:creator>
		<pubDate>Tue, 18 Dec 2018 06:41:39 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[अध्यात्म]]></category>
		<category><![CDATA[धर्म]]></category>
		<category><![CDATA[जाने कैसे टिका हुआ है इस पर मंदिर]]></category>
		<category><![CDATA[हवा में झूलता है इस मंदिर का खंभा]]></category>
		<guid isPermaLink="false">http://www.livehalchal.com/?p=196141</guid>

					<description><![CDATA[<img width="618" height="348" src="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2018/12/lepakshi-temple.jpg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" fetchpriority="high" srcset="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2018/12/lepakshi-temple.jpg 800w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2018/12/lepakshi-temple-300x169.jpg 300w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2018/12/lepakshi-temple-768x432.jpg 768w" sizes="(max-width: 618px) 100vw, 618px" />यह छोटा सा गांव बहुत से प्राचीन अवशेषों और वास्तु शिल्प के आश्चर्यों का घर है। इनमें से एक है लेपाक्षी मंदिर का झूलता हुआ खम्बा। मंदिर के सत्तर खम्बों में से एक बिना किसी सहारे के लटकता है। आगंतुक इस खम्बे के नीचे से बहुत सारी वस्तुओं को डालकर तय करते हैं कि इस खम्बे को &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<img width="618" height="348" src="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2018/12/lepakshi-temple.jpg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" srcset="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2018/12/lepakshi-temple.jpg 800w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2018/12/lepakshi-temple-300x169.jpg 300w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2018/12/lepakshi-temple-768x432.jpg 768w" sizes="(max-width: 618px) 100vw, 618px" /><p><strong>यह छोटा सा गांव बहुत से प्राचीन अवशेषों और वास्तु शिल्प के आश्चर्यों का घर है। इनमें से एक है लेपाक्षी मंदिर का झूलता हुआ खम्बा। मंदिर के सत्तर खम्बों में से एक बिना किसी सहारे के लटकता है। आगंतुक इस खम्बे के नीचे से बहुत सारी वस्तुओं को डालकर तय करते हैं कि इस खम्बे को लेकर किए जा रहे दावे सच हैं या नहीं। जबकि स्थानीय नागरिकों का कहना है कि खम्बे के नीचे से विभिन्न वस्तुओं को निकालने से लोगों के जीवन में सम्पन्नता आती है।<img decoding="async" class=" wp-image-196142 aligncenter" src="http://www.livehalchal.com/wp-content/uploads/2018/12/lepakshi-temple-300x169.jpg" alt="" width="538" height="303" srcset="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2018/12/lepakshi-temple-300x169.jpg 300w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2018/12/lepakshi-temple-768x432.jpg 768w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2018/12/lepakshi-temple.jpg 800w" sizes="(max-width: 538px) 100vw, 538px" /></strong></p>
<p><strong>यह छोटा सा गांव बहुत से प्राचीन अवशेषों और वास्तु शिल्प के आश्चर्यों का घर है। इनमें से एक है लेपाक्षी मंदिर का झूलता हुआ खम्बा। मंदिर के सत्तर खम्बों में से एक बिना किसी सहारे के लटकता है। आगंतुक इस खम्बे के नीचे से बहुत सारी वस्तुओं को डालकर तय करते हैं कि इस खम्बे को लेकर किए जा रहे दावे सच हैं या नहीं। जबकि स्थानीय नागरिकों का कहना है कि खम्बे के नीचे से विभिन्न वस्तुओं को निकालने से लोगों के जीवन में सम्पन्नता आती है।</strong></p>
<div><strong>आंध्र प्रदेश के अनंतपुर जिले का लेपाक्षी मंदिर हैंगिंग पिलर्स (हवा में झूलते पिलर्स) के लिए पूरी दुनिया में मशहूर है। इस मंदिर के 70 से ज्यादा पिलर बिना किसी सहारे के खड़े हैं और मंदिर को संभाले हुए हैं। मंदिर के ये अनोखे पिलर हर साल यहां आने वाले लाखों टूरिस्टों के लिए बड़ी मिस्ट्री हैं। मंदिर में आने वाले भक्तों का मानना है कि इन पिलर्स के नीचे से अपना कपड़ा निकालने से सुख-समृद्धि मिलती है। अंग्रेजों ने इस रहस्य को जानने के लिए काफी कोशिश की, लेकिन वे कामयाब नहीं हो सके।</strong></div>
<div></div>
<div><strong>हालांकि कुछ लोगों का कहना है कि मंदिर के बीचोबीच एक नृत्य मंडप है। इस मंडप पर कुल 70 पिलर यानी खंभे मौजूद हैं जिसमें से 69 खंभे वैसे ही हैं, जैसे होने चाहिए। मगर 1 खंभा दूसरों से एकदम अलग है, वो इसलिए क्योंकि ये खंभा हवा में है यानी इमारत की छत से जुड़ा है, लेकिन जमीन के कुछ सेंटीमीटर पहले ही खत्म हो गया। बदलते वक्त के साथ ये अजूबा एक मान्यता बन चुका है। ऐसा कहा जाता है कि अगर कोई इंसान खंभे के इस पार से उस पार तक कोई कपड़ा ले जाए, तो उसकी मुराद पूरी हो जाती है।</strong></div>
<div></div>
<div><strong>मंदिर कथा :<br />
</strong></div>
<div><strong>वनवास के दौरान भगवान श्रीराम, लक्ष्मण और माता सीता यहां आए थे। सीता का अपहरण कर रावण अपने साथ लंका लेकर जा रहा था, तभी पक्षीराज जटायु ने रावण से युद्ध किया और घायल हो कर इसी स्थान पर गिरे थे। बाद में जब श्रीराम सीता की तलाश में यहां पहुंचे तो उन्होंने &#8216;ले पाक्षी&#8217; कहते हुए जटायु को अपने गले लगा लिया। ले पाक्षी एक तेलुगु शब्द है जिसका मतलब है &#8216;उठो पक्षी&#8217;।</strong></div>
<div></div>
<div><strong>पौराणिक मान्यताओं के मुताबिक इस मंदिर को ऋषि अगस्त ने बनाया था। लेकिन इतिहासकारों अनुसार मंदिर को सन् 1583 में विजयनगर के राजा के लिए काम करने वाले दो भाईयों (विरुपन्ना और वीरन्ना) ने बनाया था। जोभी हो लेकिन मंदिर के रहस्य को जानने के लिए अंग्रेजों में इसे शिफ्ट करने की कोशिश की, लेकिन वे नाकाम रहे थे। एक इंजीनियर ने इसके रहस्य को जानने के लिए मंदिर को तोड़ने का प्रयास किया तो पाया कि मंदिर के सभी पिलर हवा में झूलते हैं।</strong></div>
<div></div>
<div><strong>यह मंदिर भगवान शिव, विष्णु और वीरभद्र के लिए बनाया गया है। यहां तीनों भगवानों के अलग-अलग मंदिर भी मौजूद हैं। यहां बड़ी नागलिंग प्रतिमा मंदिर परिसर में लगी है, जो कि एक ही पत्थर से बनी है। यह भारत की सबसे बड़ी नागलिंग प्रतिमा मानी जाती है। काले ग्रेनाइट पत्थर से बनी इस मूर्ति में एक शिवलिंग के ऊपर सात फन वाला नाग बैठा है।</strong></p>
</div>
<div></div>
<div><strong>लेपाक्षी में हनुमान पद : कहते हैं कि मंदिर में रामपदम (मान्यता के मुताबिक श्रीराम के पांव के निशान) स्थित हैं, जबकि कई लोगों का मानना है की यह माता सीता के पैरों के निशान हैं। दूसरी ओर, इन पैरों के निशान के बारे में कहा जाता है कि ये हनुमानजी के पैरों के निशान हैं।</strong></div>
<div></div>
<div><strong>पैरों के इस निशान को लेकर कई मान्यताएं हैं। कोई कहता है कि ये देवी दुर्गा का पैर है, कोई इसे श्रीराम के निशान मानता है, लेकिन इस मंदिर का इतिहास जानने वाले इसे सीता का पैर मानते हैं। ऐसा माना जाता है कि जटायु के घायल होने के बाद सीता ने जमीन पर आकर खुद अपने पैरों का यह निशान छोड़ा था और जटायु को भरोसा दिलाया था कि जब तक भगवान राम यहां नहीं आते, यहां मौजूद पानी जटायु को जिंदगी देता रहेगा। ऐसा माना जाता है कि ये वही स्थान है, जहां जटायु ने श्रीराम को रावण का पता बताया था।</strong></div>
<div></div>
<div><strong>यहां मौजूद एक अद्भुत शिवलिंग है रामलिंगेश्वर जिसे जटायु के अंतिम संस्कार के बाद भगवान राम ने खुद स्थापित किया था। पास में ही एक और शिवलिंग है हनुमानलिंगेश्वर। बताया जाता है कि श्रीराम के बाद महाबली हनुमान ने भी यहां भगवान शिव की स्थापना की थी।</strong></div>
<div class="ad_horizontal wbx">
<div id="div-gpt-ad-1508249012268-118121400069">
<div id="andbeyond3001"></div>
</div>
</div>
]]></content:encoded>
					
		
		
			</item>
	</channel>
</rss>
