जानें शुभ मुहूर्त – Live Halchal https://livehalchal.com Latest News, Updated News, Hindi News Portal Sun, 13 Dec 2020 10:44:21 +0000 en-US hourly 1 https://wordpress.org/?v=6.9.9 https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2023/10/cropped-Live-Halchal-512-32x32.jpg जानें शुभ मुहूर्त – Live Halchal https://livehalchal.com 32 32 इस तारीख को है साल की आखिरी एकादशी, जानें शुभ मुहूर्त, पूजा विधि और महत्व https://livehalchal.com/on-this-date-the-last-ekadashi-of-the-year-know-the-auspicious-time-worship-method-and-importance/402095 Sun, 13 Dec 2020 10:40:36 +0000 http://www.livehalchal.com/?p=402095 एकादशी: हर महीने में 2 एकादशी आती हैं. ये मार्गशीर्ष का महीना है और इसकी पहली एकादशी 11 दिसंबर को थी जिसे उत्पन्ना एकादशी के नाम से जाना जाता है. वहीं बात करें साल 2020 की आखिरी एकादशी की तो वो इस बार 25 दिसंबर को है और इसे मोक्षदा एकादशी के नाम से जाना …]]>

एकादशी: हर महीने में 2 एकादशी आती हैं. ये मार्गशीर्ष का महीना है और इसकी पहली एकादशी 11 दिसंबर को थी जिसे उत्पन्ना एकादशी के नाम से जाना जाता है. वहीं बात करें साल 2020 की आखिरी एकादशी की तो वो इस बार 25 दिसंबर को है और इसे मोक्षदा एकादशी के नाम से जाना जाता है. इसके बाद आने वाली एकादशी नए साल में मनाई जाएगी. आइए बताते हैं मोक्षदा एकादशी का शुभ मुहूर्त, पूजा विधि, व्रत कथा लेकिन सबसे पहले जानते हैं इसका महत्व. 

मोक्षदा एकादशी का महत्व- 

जैसा कि इसके नाम से ही ज्ञात हो जाता है कि मोक्षदा एकादशी मोक्ष दिलाने वाली एकादशी है. कहते हैं इस एकादशी के व्रत से न केवल मोक्ष मिलता है बल्कि जन्मों जन्मों के पाप भी धुल जाते हैं. इसीलिए बाकी सभी एकादशियों में इसे श्रेष्ठ माना गया है. इसकी महत्ता का अंदाज़ा इसी बात से लगाया जा सकता है कि खुद भगवान कृष्ण ने इस व्रत के बारे में युधिष्ठिर को बताया था. 

इसी दिन है गीता जयंती- 

कहते हैं जिस दिन कुरुक्षेत्र के युद्ध में भगवान कृष्ण ने अर्जुन को गीता का ज्ञान दिया उस दिन मोक्षदा एकादशी ही थी. इसीलिए इस दिन गीता जयंती मनाई जाती है. गीता को हिंदू धर्म में धार्मिक पुस्तक माना जाता है. जो गंगाजल जितनी ही पवित्र है. जिसके 18 अध्याय हैं. इन अध्यायों में 700 श्लोक के जरिए भगवान कृष्ण ने अपना ज्ञान पृथ्वी लोक के वासियों को दिया है. 

एकादशी तिथि का मुहूर्त–

इस बार एकादशी तिथि 24 दिसंबर की रात 11 बजकर 17 मिनट से शुरु हो जाएगी और अगले दिन 25 दिसंबर की देर रात 1 बजकर 54 मिनट तक रहेगी. यानि 25 दिसंबर का पूरा दिन एकादशी का व्रत किया जाएगा. जिसका कई गुना फल प्राप्त किया जा सकता है. 

मोक्षदा एकादशी की पूजा विधि–

बाकी दूसरे एकादशी के व्रत की तरह ही इस एकादशी की भी पूजा होती है. 

  • सुबह स्नान के बाद आसन बिछाकर व्रत का संकल्प लें 
  • घर के मंदिर में गंगाजल छिड़ककर उसे पवित्र करें. 
  • भगवान विष्णु को स्नान करवाने के बाद उनके समक्ष घी का दीपक जलाएं
  • फिर कथा श्रवण करें और दिन भर व्रत रखें. इस व्रत में अन्न ग्रहण नहीं किया जाता है. 
  • अगले दिन नहा धोकर, पूजा के बाद ही व्रत का पारण करें.
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आज है कार्तिक पूर्णिमा, जानें शुभ मुहूर्त, पूजा विधि और महत्व https://livehalchal.com/today-is-kartik-purnima-know-auspicious-time-worship-method-and-importance/398250 Mon, 30 Nov 2020 05:44:19 +0000 http://www.livehalchal.com/?p=398250 आज कार्तिक पूर्णिमा है। कार्तिक मास की पूर्णिमा को कार्तिक पूर्णिमा कहा जाता है। इस पूर्णिमा का शैव और वैष्णव, दोनों ही सम्प्रदायों में बराबर महत्व है। इस दिन शिव जी ने त्रिपुरासुर नामक राक्षस का वध किया था और विष्णु जी ने मत्स्य अवतार भी लिया था। इसी दिन गुरुनानक देव का जन्म भी …]]>

आज कार्तिक पूर्णिमा है। कार्तिक मास की पूर्णिमा को कार्तिक पूर्णिमा कहा जाता है। इस पूर्णिमा का शैव और वैष्णव, दोनों ही सम्प्रदायों में बराबर महत्व है। इस दिन शिव जी ने त्रिपुरासुर नामक राक्षस का वध किया था और विष्णु जी ने मत्स्य अवतार भी लिया था। इसी दिन गुरुनानक देव का जन्म भी हुआ था। इसे प्रकाश और गुरु पर्व के रूप में भी मनाया जाता है।

ऐसा माना जाता है कि यदि इस दिन श्रद्धालु गंगा में डुबकी लगाते हैं (स्नान करते हैं), तो उनके कई जन्मों के पापों का नाश हो जाता है। इस दिन जरूरतमंदों को दान करने से लोगों पर समस्त देवी-देवताओं का आशीर्वाद बना रहता है। शास्त्रों के अनुसार कार्तिक पूर्णिमा के दिन भगवान श्रीहरि ने मत्स्यावतार के रूप में प्रकट हुए थे। भगवान विष्णु के इस अवतार की तिथि होने की वजह से आज किए गए दान, जप का पुण्य दस यज्ञों से प्राप्त होने वाले पुण्य के बराबर माना जाता है।

पूजा का शुभ मुहूर्त-

पूर्णिमा तिथि शुरू– 29 नवंबर, रविवार को दोपहर 12 बजकर 48 मिनट से

पूर्णिमा तिथि समाप्‍त– 30 नवंबर, सोमवार को दोपहर 03 बजे तक।

कार्तिक पूर्णिमा संध्या पूजा का मुहूर्त– 30 नवंबर, सोमवार – शाम 5 बजकर 13 मिनट से शाम 5 बजकर 37 मिनट तक।

कार्तिक पूर्णिमा पूजा की विधि-

कार्तिक पूर्णिमा के दिन सूर्योदय से पहले उठकर पवित्र नदियों और कुण्डों आदि में स्नान करना चाहिए। अगर संभव ना हो तो घर पर नहाने के पानी में गंगा जल मिलाकर स्नान किया जा सकता है। फिर भगवान लक्ष्मी नारायण की आराधना करें और उनके समक्ष घी या सरसों के तेल का दीपक जलाकर विधिपूर्वक पूजा करें।

ऐसा माना जाता है कि यदि इस दिन विशेष विधि से पूजा-अर्चना की जाए तो समस्त देवी-देवताओं को आसानी से प्रसन्न किया जाता है। इस दिन पूरी विधि और मन से भगवान की आराधना करने से घर में धन और वैभव बना रहता है। साथ ही मनुष्य को सभी प्रकार की परेशानियों से मुक्ति मिलती है। इस पवित्र दिन विधि विधान से पूजा-अर्चना करने पर जन्मपत्री के सभी ग्रहदोष दूर हो जाते हैं।

कार्तिक पूर्णिमा को त्रिपुरी पूर्णिमा भी कहा जाता है। दरअसल इसके पीछे यह मान्यता है कि त्रिपुरासुर नामक एक राक्षस ने प्रयाग में एक लाख साल तक घोर तप किया जिससे ब्रह्मा जी ने प्रसन्न होकर उसे दीर्घायु का वरदान दिया। इससे त्रिपुरासुर में अहंकार आ गया और वह स्वर्ग के कामकाज में बाधा डालने लगा व देवताओं को आए दिन तंग करने लगा। इस पर सभी देवी देवताओं ने शिव जी से प्रार्थना की कि उन्हें त्रिपुरासुर से मुक्ति दिलाएं। इस पर भगवान शिव ने कार्तिक पूर्णिमा के दिन ही त्रिपुरासुर नामक राक्षस को मार डाला था। तभी से कार्तिक पूर्णिमा को त्रिपुरी पूर्णिमा कहा जाने लगा। इसे गंगा दशहरा भी कहा जाता है।

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बेहद खास है इस बार करवाचौथ का व्रत, जानें शुभ मुहूर्त, पूजा विधि एवं व्रत कथा https://livehalchal.com/%e0%a4%ac%e0%a5%87%e0%a4%b9%e0%a4%a6-%e0%a4%96%e0%a4%be%e0%a4%b8-%e0%a4%b9%e0%a5%88-%e0%a4%87%e0%a4%b8-%e0%a4%ac%e0%a4%be%e0%a4%b0-%e0%a4%95%e0%a4%b0%e0%a4%b5%e0%a4%be%e0%a4%9a%e0%a5%8c%e0%a4%a5/280504 Thu, 17 Oct 2019 04:26:04 +0000 http://www.livehalchal.com/?p=280504 पति तथा पत्नी के प्रेम का अमर पर्व करवाचौथ कार्तिक मास में पड़ता है। सुहागिन महिलाएं अपने पति की लंबी आयु के लिए यह व्रत रखती हैं। इस व्रत को रखने से पति पत्नी के रिश्तों में माधुर्यता आती है। दाम्पत्य जीवन अच्छा होता है। ज्योतिषाचार्य सुजीत जी महाराज के अनुसार पति की लंबी उम्र …]]>

पति तथा पत्नी के प्रेम का अमर पर्व करवाचौथ कार्तिक मास में पड़ता है। सुहागिन महिलाएं अपने पति की लंबी आयु के लिए यह व्रत रखती हैं। इस व्रत को रखने से पति पत्नी के रिश्तों में माधुर्यता आती है। दाम्पत्य जीवन अच्छा होता है। ज्योतिषाचार्य सुजीत जी महाराज के अनुसार पति की लंबी उम्र के लिए यह व्रत बहुत महत्वपूर्ण होता है। इस बार यह व्रत दिनांक 17 अक्टूबर को है।

करवा चौथ की तिथि और शुभ मुहूर्त 

करवा चौथ की तिथि: 17 अक्‍टूबर 2019
करवा चौथ पूजा का सबसे शुभ मुहूर्त: 17 अक्टूबर को सायंकाल 05 बजकर 44 मिनट से 07 बजकर 04 मिनट तक 

इस वर्ष का करवा चौथ क्‍यों है विशेष
चंद्रमा की 27 पत्नियों में सबसे प्रिय पत्नी रोहिणी है। चंद्रमा का रोहिणी में रहने के कारण यह व्रत पति पत्नी के प्रेम में और माधुर्यता लाएगा। इस रात्रि चंद्रमा तथा रोहिणी के प्रेम की रस वर्षा में पति पत्नी के बेच अमर प्रेम स्थापित होगा।

करवा चौथ व्रत की विधि-
एक बात स्पष्ट बता दें कि इस व्रत का उल्लेख बहुत स्पष्ट तौर पर सनातन धर्म के  किसी प्रामाणिक पुस्तक में नहीं है। यह व्रत कई वर्षों से परंपरा में आता चला गया। इसको मनाने की स्पष्ट विधि भी कहीं वर्णित नहीं है। फिर भी चंद्रमा तथा चंद्रोदय से इस व्रत को जोड़ा जाता है। पूरे दिन सुहागिन स्त्रियां निराजल व्रत रखकर अपनी श्रद्धा अनुसार भजन कीर्तन अपनी अपनी विधि से करती हैं। सायंकाल मंदिर जाती हैं। चंद्रमा को देखकर उसको अर्ध्य देकर चलनी से पति तथा चांद को निहारकर पूजा करके पति का चरण स्पर्श करके यह व्रत पूर्ण किया जाता है।

दाम्पत्य जीवन की माधुर्यता को बढ़ाने के लिये पति भी रखें व्रत 
दाम्पत्य जीवन की माधुर्यता को बढ़ाने में पत्नी का एकनिष्ठ समर्पण पति के लिए होना चाहिए तो पति का भी प्रेम तथा समर्पण केवल उसी के लिए ही होना चाहिए। यदि इस व्रत को दोनों रहें तो आनंद भी रहेगा तथा दोनों के बीच प्यार बढ़ेगा। दाम्पत्य जीवन की धुरी पति तथा पत्नी दोनों पर टिकी होती है। यह परंपरा अब कई जगहों पर प्रारम्भ भी हो चुकी है। कई नव विवाहित जोड़े इस व्रत को निराजल रखते हैं तथा साथ साथ वैवाहिक जीवन के सुख दुख में एक दूसरे का साथ देने का संकल्प करते हैं।

 

 

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