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	<title>जानें महत्व &#8211; Live Halchal</title>
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	<title>जानें महत्व &#8211; Live Halchal</title>
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		<title>24 जनवरी को पुतराड़ा एकादशी, जानें महत्व, शुभ मुहूर्त एवं व्रत-पूज</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Alpana Vaish]]></dc:creator>
		<pubDate>Sun, 24 Jan 2021 03:30:00 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[अध्यात्म]]></category>
		<category><![CDATA[धर्म]]></category>
		<category><![CDATA[24 जनवरी को पुतराड़ा एकादशी]]></category>
		<category><![CDATA[जानें महत्व]]></category>
		<category><![CDATA[शुभ मुहूर्त एवं व्रत-पूज]]></category>
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					<description><![CDATA[पुत्रदा एकादशी व्रत&#160;इस साल 24 जनवरी 2021, रविवार को मनाया जा रहा है। हिन्दू पंचांग के अनुसार प्रतिवर्ष पौष मास के शुक्ल पक्ष में आने वाली एकादशी को पुत्रदा एकादशी के नाम से जाना जाता है। माना जाता है कि इस चर और अचर संसार में पुत्रदा एकादशी के व्रत के समान दूसरा कोई व्रत &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[
<p><strong>पुत्रदा एकादशी व्रत&nbsp;इस साल</strong></p>



<p>24 जनवरी 2021, रविवार को मनाया जा रहा है। हिन्दू पंचांग के अनुसार प्रतिवर्ष पौष मास के शुक्ल पक्ष में आने वाली एकादशी को पुत्रदा एकादशी के नाम से जाना जाता है। माना जाता है कि इस चर और अचर संसार में पुत्रदा एकादशी के व्रत के समान दूसरा कोई व्रत नहीं है। इस व्रत के नाम के अनुसार ही इसका फल है।&nbsp;जिन व्यक्तियों को संतान होने में बाधाएं आती हैं या जिन्हें पुत्र प्राप्ति की कामना हो उन्हें पुत्रदा एकादशी व्रत अवश्&#x200d;य करना चाहिए। यह व्रत बहुत ही शुभ फलदायक होता है इसलिए संतान प्राप्ति के इच्छुक व्यक्ति को यह व्रत रखना चाहिए जिससे कि उसे मनोवांछित फल की प्राप्ति हो सके।&nbsp;</p>



<figure class="wp-block-image size-large"><img fetchpriority="high" decoding="async" width="720" height="540" src="http://www.livehalchal.com/wp-content/uploads/2021/01/frgtrfgtr.jpg" alt="" class="wp-image-414177"/></figure>



<p><strong>आइए जानें<br>कैसे करें<br>पुत्रदा एकादशी व्रत-</strong>&nbsp;</p>



<p>* पुत्रदा एकादशी का व्रत करने वाले व्यक्ति को एक दिन पहले ही अर्थात् दशमी तिथि की रात्रि से ही व्रत के नियमों का पूर्ण रूप से पालन करना चाहिए। दशमी के दिन शाम में सूर्यास्त के बाद भोजन ग्रहण नहीं करना चाहिए और रात्रि में भगवान विष्णु का ध्यान करते हुए सोना चाहिए।</p>



<p>&nbsp;* सुबह सूर्योदय से पहले उठकर नित्य क्रिया से निवृत्त होकर स्नान करके शुद्ध व स्वच्छ धुले हुए वस्त्र धारण करके श्रीहरि विष्&#x200d;णु का ध्यान करना चाहिए।&nbsp;</p>



<p>* अगर आपके पास गंगाजल है तो पानी में गंगा जल डालकर नहाना चाहिए।&nbsp;</p>



<p>* इस पूजा के लिए श्रीहरि विष्णु की फोटो के सामने दीपक जलाकर व्रत का संकल्प लेने के बाद कलश की स्थापना करनी चाहिए।</p>



<p>&nbsp;* फिर कलश को लाल वस्त्र से बांधकर उसकी पूजा करें।&nbsp;</p>



<p>* भगवान श्रीहरि विष्णु की प्रतिमा रखकर उसे स्नानादि से शुद्ध करके नया वस्त्र पहनाएं।</p>



<p>&nbsp;* तत्पश्चात धूप-दीप आदि से विधिवत भगवान श्रीहरि विष्णु की पूजा-अर्चना तथा आरती करें तथा नैवेद्य और फलों का भोग लगाकर प्रसाद वितरण करें।</p>



<p>&nbsp;* श्रीहरि विष्णु को अपने सामर्थ्य के अनुसार फल-फूल, नारियल, पान, सुपारी, लौंग, बेर, आंवला आदि अर्पित किए जाते हैं।</p>



<p>&nbsp;* एकादशी की रात में भगवान का भजन-कीर्तन करना चाहिए।&nbsp;</p>



<p>* पूरे दिन निराहार रहकर संध्या समय में कथा आदि सुनने के पश्चात फलाहार किया जाता है।</p>



<p>&nbsp;* दूसरे दिन ब्राह्मणों को भोजन तथा दान-दक्षिणा अवश्य देनी चाहिए, उसके बाद पारणा करना चाहिए।&nbsp;</p>



<p>* इस दिन दीपदान करने का बहुत महत्व है।&nbsp;</p>



<p>* इस व्रत के पुण्य से मनुष्य तपस्वी, विद्वान होता है, तथा पुत्र प्राप्ति होकर अपार धन-लक्ष्मी को प्राप्त करता है।</p>



<p><strong>पुत्रदा एकादशी व्रत-पूजन का शुभ मुहूर्त<br>एकादशी व्रत का प्रारंभ- शनिवार, 23 जनवरी को रात्रि 8.56 मिनट से होकर व्रत की समाप्ति रविवार, 24 जनवरी को रात्रि 10.57 मिनट पर होगी।<br>एकादशी व्रत पारण का समय- सोमवार, 25 जनवरी को सुबह 7.13 मिनट से 9.21 मिनट तक रहेगा।</strong></p>
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		<title>मासिक कालाष्टमी आज, जानें महत्व, पूजन का समय एवं विधि</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Alpana Vaish]]></dc:creator>
		<pubDate>Wed, 06 Jan 2021 06:16:18 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[अध्यात्म]]></category>
		<category><![CDATA[धर्म]]></category>
		<category><![CDATA[जानें महत्व]]></category>
		<category><![CDATA[पूजन का समय एवं विधि]]></category>
		<category><![CDATA[मासिक कालाष्टमी आज]]></category>
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					<description><![CDATA[<img width="618" height="494" src="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2021/01/SDDDDDDDDDD.jpg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" srcset="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2021/01/SDDDDDDDDDD.jpg 740w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2021/01/SDDDDDDDDDD-300x240.jpg 300w" sizes="(max-width: 618px) 100vw, 618px" />वर्ष 2021 में मासिक कालाष्टमी पर्व 6 जनवरी, बुधवार को मनाया जाएगा। वैसे तो प्रमुख कालाष्टमी का व्रत &#8216;कालभैरव जयंती&#8217; के दिन किया जाता है, लेकिन कालभैरव के भक्त हर महीने ही कृष्ण पक्ष की अष्टमी पर भैरव जी की पूजा और अर्चना करते हैं और व्रत रखते हैं। महत्व-तंत्र साधना में भैरव के आठ &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<img width="618" height="494" src="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2021/01/SDDDDDDDDDD.jpg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" loading="lazy" srcset="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2021/01/SDDDDDDDDDD.jpg 740w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2021/01/SDDDDDDDDDD-300x240.jpg 300w" sizes="auto, (max-width: 618px) 100vw, 618px" />
<p>वर्ष 2021 में मासिक कालाष्टमी पर्व 6 जनवरी, बुधवार को मनाया जाएगा। वैसे तो प्रमुख कालाष्टमी का व्रत &#8216;कालभैरव जयंती&#8217; के दिन किया जाता है, लेकिन कालभैरव के भक्त हर महीने ही कृष्ण पक्ष की अष्टमी पर भैरव जी की पूजा और अर्चना करते हैं और व्रत रखते हैं।</p>



<figure class="wp-block-image size-large"><img decoding="async" width="740" height="592" src="http://www.livehalchal.com/wp-content/uploads/2021/01/SDDDDDDDDDD.jpg" alt="" class="wp-image-409102" srcset="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2021/01/SDDDDDDDDDD.jpg 740w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2021/01/SDDDDDDDDDD-300x240.jpg 300w" sizes="(max-width: 740px) 100vw, 740px" /></figure>



<p><strong>महत्व-<br></strong><br>तंत्र साधना में भैरव के आठ स्वरूप की उपासना की बात कही गई है। ये रूप असितांग भैरव, रुद्र भैरव, चंद्र भैरव, क्रोध भैरव, उन्मत्त भैरव, कपाली भैरव, भीषण भैरव संहार भैरव।</p>



<p>कालिका पुराण में भी भैरव को शिवजी का गण बताया गया है जिसका वाहन कुत्ता है। इस दिन व्रत रखने वाले साधक को पूरा दिन <strong>&#8216;ॐ कालभैरवाय नम:&#8217;</strong> का जाप करना चाहिए। कालभैरव का व्रत रखने से उपासक की सभी मनोकामनाएं पूरी हो जाती हैं। भैरव साधना करने वाले व्यक्ति को समस्त दुखों से छुटकारा मिल जाता है।</p>



<p>यह पर्व कालाष्टमी, शीतलाष्टमी, दुर्गाष्टमी या भैरवाष्टमी नाम से जनमानस में प्रचलित है। दरअसल, यह व्रत हर महीने कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को मनाया जाता है, जो कि भगवान शिव के अन्य रूप को समर्पित है।</p>



<p><strong>आइए जानें कैसे करें इस दिन पूजन-</strong></p>



<p><strong>कालाष्टमी व्रत पूजा विधि :-</strong></p>



<p>* नारद पुराण के अनुसार कालाष्टमी के दिन कालभैरव और मां दुर्गा की पूजा करनी चाहिए।</p>



<p>* इस रात देवी काली की उपासना करने वालों को अर्द्धरात्रि के बाद मां की उसी प्रकार से पूजा करनी चाहिए, जिस प्रकार दुर्गा पूजा में सप्तमी तिथि को देवी कालरात्रि की पूजा का विधान है।</p>



<p>* इस दिन शक्ति अनुसार रात को माता पार्वती और भगवान शिव की कथा सुन कर जागरण का आयोजन करना चाहिए।</p>



<p>* व्रती को फलाहार ही करना चाहिए।</p>



<p>* कालभैरव की सवारी कुत्ता है अतः इस दिन कुत्ते को भोजन करवाना शुभ माना जाता है।</p>



<p>* इस दिन भैरव चालीसा, दुर्गा चालीसा, शिव चालीसा का पाठ करना चाहिए</p>



<p><strong>फल-</strong><br>* कालाष्टमी व्रत बहुत ही फलदायी माना जाता है।</p>



<p>* इस दिन व्रत रखकर पूरे विधि-विधान से काल भैरव की पूजा करने से व्यक्ति के सारे कष्ट मिट जाते हैं।</p>



<p>* काल उससे दूर हो जाता है।</p>



<p>* कालाष्टमी व्रत करने वाला व्यक्ति रोगों से दूर रहता है और उसे हर कार्य में सफलता प्राप्त होती है।</p>



<p><strong>पूजन का समय-</strong>पौष कृष्ण अष्टमी तिथि- 06 जनवरी को अलसुबह 04:03 मिनट से प्रारंभ होकर 07 जनवरी को अलसुबह 02:06 मिनट पर समाप्त होगी।</p>
]]></content:encoded>
					
		
		
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		<title>साल का पहली संकष्टी चतुर्थी आज, जानें महत्व, विधि एवं पूजन के शुभ मुहूर्त</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Alpana Vaish]]></dc:creator>
		<pubDate>Sat, 02 Jan 2021 04:44:19 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[अध्यात्म]]></category>
		<category><![CDATA[धर्म]]></category>
		<category><![CDATA[जानें महत्व]]></category>
		<category><![CDATA[विधि एवं पूजन के शुभ मुहूर्त]]></category>
		<category><![CDATA[साल का पहली संकष्टी चतुर्थी आज]]></category>
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					<description><![CDATA[<img width="618" height="464" src="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2021/01/ikhk.jpeg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" loading="lazy" srcset="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2021/01/ikhk.jpeg 720w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2021/01/ikhk-300x225.jpeg 300w" sizes="auto, (max-width: 618px) 100vw, 618px" />नए वर्ष 2021 का आगाज हो गया है। साल का पहला संकष्टी चतुर्थी व्रत शनिवार, 02 जनवरी 2021 को रखा जाएगा। संकष्टी चतुर्थी एक बेहद खास तिथि है। इस दिन श्री गणेश की उपासना करने का विधान है। इस समय हर कोई कोरोना वायरस की महामारी से परेशान है, ऐसे में अगर आप भी जीवन में कष्&#x200d;टों &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<img width="618" height="464" src="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2021/01/ikhk.jpeg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" loading="lazy" srcset="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2021/01/ikhk.jpeg 720w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2021/01/ikhk-300x225.jpeg 300w" sizes="auto, (max-width: 618px) 100vw, 618px" /><p>नए वर्ष 2021 का आगाज हो गया है। साल का पहला संकष्टी चतुर्थी व्रत शनिवार, 02 जनवरी 2021 को रखा जाएगा। संकष्टी चतुर्थी एक बेहद खास तिथि है। इस दिन श्री गणेश की उपासना करने का विधान है। इस समय हर कोई कोरोना वायरस की महामारी से परेशान है, ऐसे में अगर आप भी जीवन में कष्&#x200d;टों का अनुभव कर रहे हैं, तो उनके लिए यह दिन बेहद मायने रखता है। इस दिन चतुर्थी व्रत करके दान-दक्षिणा देने से श्री गणेश समस्त कामनाओं की पूर्ति कर जन्म-मृत्यु के कष्टों का नाश करके दिव्य लोक में स्थान दे देते हैं।</p>
<p><img loading="lazy" decoding="async" class="size-full wp-image-407698 aligncenter" src="http://www.livehalchal.com/wp-content/uploads/2021/01/ikhk.jpeg" alt="" width="720" height="540" srcset="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2021/01/ikhk.jpeg 720w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2021/01/ikhk-300x225.jpeg 300w" sizes="auto, (max-width: 720px) 100vw, 720px" /></p>
<p>संकष्टी चतुर्थी के दिन सूर्योदय से चंद्रोदय होने तक उपवास रखने का नियम है। कृष्ण पक्ष में आने वाली चतुर्थी को संकष्टी चतुर्थी कहा जाता है। इस दिन भगवान गणेश की आराधना सुख-सौभाग्य की दृष्टि से श्रेष्ठ है। इस दिन श्री गणेश का व्रत और पूजन करके आप जीवन की हर तरह की समस्याओं से निजात पा सकते हैं। आइए जानें कैसे करें पूजन-</p>
<div>संकष्टी चतुर्थी व्रत कैसे करें-</div>
<div></div>
<div>* चतुर्थी के दिन सुबह स्नानादि से निवृत्त होकर स्वच्छ वस्त्र धारण करें।</div>
<div></div>
<div>* इस दिन व्रतधारी लाल रंग के वस्त्र धारण करें।</div>
<div></div>
<div>* श्री गणेश की पूजा करते समय अपना मुंह पूर्व अथवा उत्तर दिशा की ओर रखें।</div>
<div></div>
<div>* तत्पश्चात स्वच्छ आसन पर बैठकर भगवान गणेश का पूजन करें।</div>
<div></div>
<div>* फल, फूल, रौली, मौली, अक्षत, पंचामृत आदि से श्री गणेश को स्नान कराके विधिवत तरीके से पूजा करें।</div>
<div></div>
<div>* गणेश पूजन के दौरान धूप-दीप आदि से श्री गणेश की आराधना करें।</div>
<div></div>
<div>* श्री गणेश को फल, तिल से बनी वस्तुओं, लड्&#x200d;डू तथा मोदक का भोग लगाएं औा प्रार्थना करें कि &#8216;ॐ सिद्ध बुद्धि सहित महागणपति आपको नमस्कार है। नैवेद्य के रूप में मोदक व ऋतु फल आदि अर्पित है।&#8217;</div>
<div></div>
<div>* सायंकाल में व्रतधारी संकष्टी गणेश चतुर्थी की कथा पढ़े अथवा सुनें और सुनाएं।</div>
<div></div>
<div>* चतुर्थी के दिन व्रत-उपवास रख कर चंद्र दर्शन करके गणेश पूजन करें।</div>
<div></div>
<div>* तत्पश्चात श्री गणेश की आरती करें।</div>
<div></div>
<div>* विधिवत तरीके से गणेश पूजा करने के बाद गणेश मंत्र &#8216;ॐ गणेशाय नम:&#8217; अथवा &#8216;ॐ गं गणपतये नम: का 108 बार अथवा एक माला करें।</div>
<div></div>
<div>* इस दिन अपने सामर्थ्य के अनुसार गरीबों को दान करें।</div>
<div></div>
<div>* इस दिन भगवान गणेश को दूर्वा चढ़ाई जाती है, क्योंकि दुर्वा में अमृत का वास माना गया है। इस दिन श्री गणेश को दूर्वा अर्पित करने से स्वास्थ लाभ मिलता है और सभी पापों का अंत होता है। संतान प्राप्ति और संतान की लंबी उम्र के लिए भी यह व्रत बहुत महत्वपूर्ण है।</div>
<div></div>
<div><strong>संकष्टी चतुर्थी तिथि और शुभ मुहूर्त-<br />
</strong></div>
<div></div>
<div>संकष्टी चतुर्थी व्रत में सुबह और शाम के समय पूजा की जाती है। वर्ष 2021 में पौष मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि को संकष्टी चतुर्थी व्रत का पूजन का आरंभ शनिवार सुबह सुबह 05.24 मिनट से होकर सुबह 06.21 मिनट पर समाप्ति होगी। संकष्टी गणेश चतुर्थी के दिन शाम की पूजा का समय 05.35 मिनट से शुरू होकर 06.57 मिनट तक रहेगा।</p>
<div></div>
<div><strong>चंद्रोदय का समय-<br />
</strong></div>
<div></div>
<div>संकष्टी चतुर्थी के दिन चंद्रोदय का समय रात्रि 8.34 मिनट पर रहेगा। शाम को चंद्रमा को अर्घ्य देकर व्रत को पूर्ण करें।</p>
</div>
</div>
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