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	<title>जानें- इजरायल-यूएई करार का भारत-पाकिस्‍तान पर क्‍या होगा असर &#8211; Live Halchal</title>
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		<title>जानें- इजरायल-यूएई करार का भारत-पाकिस्&#x200d;तान पर क्&#x200d;या होगा असर, एक्&#x200d;सपर्ट नहीं मानते शांति समझौता</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Alpana Vaish]]></dc:creator>
		<pubDate>Sat, 15 Aug 2020 06:39:14 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[अन्तर्राष्ट्रीय]]></category>
		<category><![CDATA[एक्‍सपर्ट नहीं मानते शांति समझौता]]></category>
		<category><![CDATA[जानें- इजरायल-यूएई करार का भारत-पाकिस्‍तान पर क्‍या होगा असर]]></category>
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					<description><![CDATA[<img width="618" height="513" src="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2020/08/fvgbfbgvf.jpg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" fetchpriority="high" srcset="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2020/08/fvgbfbgvf.jpg 650w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2020/08/fvgbfbgvf-300x249.jpg 300w" sizes="(max-width: 618px) 100vw, 618px" />इजरायल और संयुक्&#x200d;त अरब अमीरात (Israel-UAE Peace Agreement) में जो शांति समझौता हुआ है उसमें अमेरिका की अहम भूमिका रही है। इस समझौते को वैश्विक मंच पर ऐतिहासिक बताया जा रहा है। कहा ये भी जा रहा है कि इससे भविष्&#x200d;य में एक नई राह निकलेगी, जो इस समूचे इलाके के साथ-साथ अरब जगत के &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<img width="618" height="513" src="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2020/08/fvgbfbgvf.jpg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" srcset="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2020/08/fvgbfbgvf.jpg 650w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2020/08/fvgbfbgvf-300x249.jpg 300w" sizes="(max-width: 618px) 100vw, 618px" /><p>इजरायल और संयुक्&#x200d;त अरब अमीरात (Israel-UAE Peace Agreement) में जो शांति समझौता हुआ है उसमें अमेरिका की अहम भूमिका रही है। इस समझौते को वैश्विक मंच पर ऐतिहासिक बताया जा रहा है। कहा ये भी जा रहा है कि इससे भविष्&#x200d;य में एक नई राह निकलेगी, जो इस समूचे इलाके के साथ-साथ अरब जगत के लिए भी नया सवेरा लेकर आएगी। भारत और पाकिस्&#x200d;तान के लिए इस समझौते के क्&#x200d;या मतलब है और इसका क्&#x200d;या असर भविष्&#x200d;य की राजनीति पर पड़ेगा, इन सब सवालों के जवाब जानने के लिए दैनिक जागरण ने पश्चिम एशिया की राजनीति पर करीब से निगाह रखने वाले जवाहरलाल नेहरू यूनिवर्सिटी स्थित सेंटर फॉर वेस्&#x200d;ट एशियन स्&#x200d;टडीज के प्रोफेसर एके पाशा से बात की।</p>
<p><img decoding="async" class="size-full wp-image-362527 aligncenter" src="http://www.livehalchal.com/wp-content/uploads/2020/08/fvgbfbgvf.jpg" alt="" width="650" height="540" srcset="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2020/08/fvgbfbgvf.jpg 650w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2020/08/fvgbfbgvf-300x249.jpg 300w" sizes="(max-width: 650px) 100vw, 650px" /></p>
<p>प्रोफेसर पाशा इस समझौते को खास तो मानते हैं, लेकिन ऐतिहासिक नहीं मानते हैं। ऐसा इसलिए है, क्&#x200d;योंकि उनकी राय में इससे पहले इजरायल ने जो चार (1979, 1983 1994, 1993) समझौते किए थे उनको भी एतिहासिक बताया गया था, लेकिन उन समझौतों के बाद भी इस पूरे क्षेत्र में शांति जैसी कोई चीज दिखाई नहीं दी। ये सभी समझौते इस क्षेत्र के अलग-अलग देशों के साथ हुए थे। उनकी राय में इस समझौते को ईरान की बढ़ती ताकत के मद्देनजर किया गया है। यूएई और इजरायल दोनों ही ईरान के परमाणु कार्यक्रम के विरोध में हैं। दोनों ही देश नहीं चाहते हैं कि वो अपनी सैन्&#x200d;य क्षमता में इजाफा करे, जिससे इस पूरे क्षेत्र में अस्थिरता का खतरा बढ़ जाए। ऐसे में ईरान के बढ़ते कदमों को रोकने के लिए इजरायल का साथ जरूरी है।</p>
<p>इजरायल वर्तमान में अमेरिका का ही प्रतिनिधित्&#x200d;व भी करता है। इस समझौते में अमेरिकी राष्&#x200d;ट्रपति डोनाल्&#x200d;ड ट्रंप के दामाद जेयर्ड कुशनर की अहम भूमिका रही है। प्रोफेसर पाशा मानते हैं कि वर्तमान में यूएई और सऊदी अरब दोनों ही पाकिस्&#x200d;तान से नाराज है, लेकिन इस समझौते के बाद भविष्&#x200d;य में पाकिस्&#x200d;तान भी इजरायल से समझौता कर सकता है। भारत की जहां तक बात है तो इजरायल और संयुक्&#x200d;त अरब अमीरात दोनों ही भारत के बेहद करीबी देश हैं। ऐसे में भविष्&#x200d;य में इस्&#x200d;लामिक देशों के संगठन ओआईसी में कश्&#x200d;मीर का मुद्दा हमेशा के लिए खत्&#x200d;म हो सकता है।</p>
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<p>इस समझौते के एक बिंदु वेस्&#x200d;ट बैंक पर इजरायल के दावे के सवाल पर प्रोफेसर पाशा ने कहा कि इजरायल की तरफ से फिलहाल इसको सस्&#x200d;पेंड करने की बात कही गई है। वेस्&#x200d;ट बैंक पर दावा छोड़ने की बात नहीं कही गई है। उनकी निगाह में इस समझौते एक सकारात्&#x200d;मक पहलू ये है कि अरब जगत में ये बात धीरे-धीरे जगह कर रही है कि इजरायल को हराना मुश्किल है, लिहाजा उसके साथ मिलकर चलने में ही फायदा है। उनके मुताबिक, ये दोनों ही देश बीते करीब पांच वर्षों से काफी करीब आए हैं। कई क्षेत्रों में ये दोनों साथ मिलकर चल रहे हैं। हालांकि, इसके केंद्र में ईरान से उत्&#x200d;पन्&#x200d;न खतरा ही है। उन्&#x200d;होंने बताया कि बीते कई दश्&#x200d;कों में इजरायल के खिलाफ यूएई ने अपनी सेना का इस्&#x200d;तेमाल नहीं किया है। पाशा का ये भी कहना है कि इन दोनों देशों के बीच कभी लड़ाई नहीं हुई है इसलिए इसको शांति समझौता कहना भी गलत होगा।</p>
<div class="relativeNews">
<p>प्रोफेसर पाशा ने कहा कि इस समझौते का एक व्&#x200d;यापक असर जल्&#x200d;द ही दिखाई देगा। इसका जिक्र गुरुवार को दोनों देशों के बीच हुए समझौते के दौरान कुशनर ने भी किया था। इसमें बहरीन, सऊदी अरब, मोरक्&#x200d;को और ओमान से भी इसी तरह का समझौता किया जा सकता है। पाशा की राय में अब ये सभी देश इस बात को जान चुके हैं कि अब अमेरिका न तो उनकी सुरक्षा, न उनकी वित्&#x200d;तीय परेशानियों को बर्दाश्&#x200d;त करने के मूंड में नहीं है। ऐसे में इजरायल को अमेरिका के जूनियर पार्टनर की तरह से शामिल किया जा रहा है। ये सभी कुछ ईरान से होने वाले खतरे के मद्देनजर किया जा रहा है। ये देश इस बात से भी वाकिफ हैं कि अमेरिका की गैर मौजूदगी में इजरायल से ईरान के खिलाफ उन्&#x200d;हें ये मदद मिल सकती है।</p>
<div class="relativeNews">
<p>उनका ये भी कहना है कि मौजूदा समय में ईरान से पूरा अरब जगत डरा हुआ है। ऐसे में उन्&#x200d;हें अमेरिका पर भी कम विश्&#x200d;वास है। इस समझौते के बाद ईरान को इजरायल की फौज के उसके घर के बाहर तक आने का डर रहेगा। ये कहीं न कहीं अरब जगत के दूसरे देशों के लिए सुरक्षा की गारंटी भी होगा। उनके मुताबिक, खाड़ी के देश अमेरिका को लेकर पहले बंटे हुए थे, लेकिन अब ये भी इजरायल के पक्ष में हो जाएंगे। उनकी निगाह में इसके दो तरह से प्रभाव देखने को मिल सकते हैं। पहला, या तो इस क्षेत्र में अमेरिकी राष्&#x200d;ट्रपति चुनाव के बाद एक युद्ध छिड़ सकता है या फिर ईरान हथियार डालकर अमेरिका के साथ समझौता करने पर राजी हो सकता है। दूसरे प्रभाव की संभावना अधिक इसलिए भी, क्&#x200d;योंकि अमेरिका की तरफ से भी ये बात कही जा चुकी है।</p>
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