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	<title>जानिए शुभ मुहूर्त &#8211; Live Halchal</title>
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	<title>जानिए शुभ मुहूर्त &#8211; Live Halchal</title>
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		<title>आज है सफला एकादशी, जानिए शुभ मुहूर्त, पूजा विधि और कथा</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Babita Kashyap]]></dc:creator>
		<pubDate>Thu, 30 Dec 2021 01:04:00 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[धर्म]]></category>
		<category><![CDATA[आज है सफला एकादशी]]></category>
		<category><![CDATA[जानिए शुभ मुहूर्त]]></category>
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					<description><![CDATA[<img width="618" height="357" src="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2021/12/ekadashi.jpg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" fetchpriority="high" srcset="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2021/12/ekadashi.jpg 715w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2021/12/ekadashi-300x173.jpg 300w" sizes="(max-width: 618px) 100vw, 618px" />पौष मास की कृष्ण पक्ष की सफला एकादशी इस साल 30 दिसंबर को है। आप सभी को बता दें कि यह एकादशी अपने नाम की तरह ही हर कार्य को सफल बनाने वाली मानी गई है। जी हाँ और आज हम आपको बताने जा रहे हैं सफला एकादशी (Saphala Ekadashi Date) की कथा, शुभ मुहूर्त &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<img width="618" height="357" src="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2021/12/ekadashi.jpg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" srcset="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2021/12/ekadashi.jpg 715w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2021/12/ekadashi-300x173.jpg 300w" sizes="(max-width: 618px) 100vw, 618px" />
<p>पौष मास की कृष्ण पक्ष की सफला एकादशी इस साल 30 दिसंबर को है। आप सभी को बता दें कि यह एकादशी अपने नाम की तरह ही हर कार्य को सफल बनाने वाली मानी गई है। जी हाँ और आज हम आपको बताने जा रहे हैं सफला एकादशी (Saphala Ekadashi Date) की कथा, शुभ मुहूर्त और पूजा विधि।</p>



<div class="wp-block-image"><figure class="aligncenter size-full is-resized"><img decoding="async" src="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2021/12/ekadashi.jpg" alt="" class="wp-image-469395" width="465" height="269" srcset="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2021/12/ekadashi.jpg 715w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2021/12/ekadashi-300x173.jpg 300w" sizes="(max-width: 465px) 100vw, 465px" /></figure></div>



<p><strong>सफला एकादशी तिथि-&nbsp;</strong>यह तिथि 29 दिसंबर, 2021 को शाम के 4 बजकर 12 मिनट पर शुरू होगी, जो अगले दिन 30 दिसंबर के 01 बजकर 40 मिनट पर समाप्त हो जाएगी।</p>



<p><strong>मुहूर्त-</strong></p>



<p>पौष, कृष्ण एकादशी प्रारंभ &#8211; शाम 04:12, 29 दिसंबर, 2021</p>



<p>पौष, कृष्ण एकादशी समाप्त &#8211; 01 बजकर 40 मिनट 30 दिसंबर</p>



<p><strong>सफला एकादशी पारण समय-</strong></p>



<p>31 दिसंबर को प्रात: 07:14 से 09:18 के बीच व्रत को खोलें</p>



<p>पारण तिथि के दिन द्वादशी समाप्त होने का समय दिन में 10:39 का है।</p>



<p><br><strong>पूजा विधि-&nbsp;</strong>सफला एकादशी के दिन सुबह जल्दी उठें और स्नान आदि करने के बाद स्वच्छ कपड़े पहन लें। उसके बाद भगवान विष्णु के समक्ष घी की दीपक जलाएं। अब उनको तुलसी दल भी अर्पित करने के बाद आरती करें। इसके बाद अगर आप व्रत रख रहे हैं तो पूजा के दौरान इसे लेकर संकल्प ले लें। ध्यान रहे भगवान विष्णु को चरणामृत का भोग लगाएं, इसमें तुलसी का एक पत्ता जरूर डालें। इसी के साथ विष्णु जी के साथ मां लक्ष्मी की भी पूजा जरूर करें। आप सभी को बता दें कि एकादशी के दिन चावल खाना माना होता है, इस वजह से इस दिन अपने घर में न खुद चावल खाएं ना ही घर के किसी सदस्य को खाने दें।</p>



<p><br><strong>कथा-</strong>&nbsp;महाराज युधिष्ठिर ने पूछा- हे जनार्दन! पौष कृष्ण एकादशी का क्या नाम है? उस दिन कौन से देवता का पूजन किया जाता है और उसकी क्या विधि है? कृपया मुझे बताएं। भक्तवत्सल भगवान श्रीकृष्ण कहने लगे कि धर्मराज, मैं तुम्हारे स्नेह के कारण तुमसे कहता हूं कि एकादशी व्रत के अतिरिक्त मैं अधिक से अधिक दक्षिणा पाने वाले यज्ञ से भी प्रसन्न नहीं होता हूं। अत: इसे अत्यंत भक्ति और श्रद्धा से युक्त होकर करें। हे राजन! द्वादशीयुक्त पौष कृष्ण एकादशी का माहात्म्य तुम एकाग्रचित्त होकर सुनो। इस एकादशी का नाम सफला एकादशी है। इस एकादशी के देवता श्री नारायण हैं। विधिपूर्वक इस व्रत को करना चाहिए। जिस प्रकार नागों में शेषनाग, पक्षियों में गरूड़, सब ग्रहों में चंद्रमा, यज्ञों में अश्वमेध और देवताओं में भगवान विष्णु श्रेष्ठ हैं, उसी तरह सब व्रतों में एकादशी का व्रत श्रेष्ठ है। जो मनुष्य सदैव एकादशी का व्रत करते हैं, वे मुझे परम प्रिय हैं। अब इस व्रत की विधि कहता हूं।</p>



<p>मेरी पूजा के लिए ऋतु के अनुकूल फल, नारियल, नींबू, नैवेद्य आदि 16 वस्तुओं का संग्रह करें। इस सामग्री से मेरी पूजा करने के बाद रात्रि जागरण करें। इस एकादशी के व्रत के समान यज्ञ, तीर्थ, दान, तप तथा और कोई दूसरा व्रत नहीं है। 5,000 वर्ष तप करने से जो फल मिलता है, उससे भी अधिक सफला एकादशी का व्रत करने से मिलता है। हे राजन! अब आप इस एकादशी की कथा सुनिए। चम्पावती नगरी में एक महिष्मान नाम का राजा राज्य करता था। उसके 4 पुत्र थे। उन सबमें लुम्पक नाम वाला बड़ा राजपुत्र महापापी था। वह पापी सदा परस्त्री और वेश्यागमन तथा दूसरे बुरे कामों में अपने पिता का धन नष्ट किया करता था। सदैव ही देवता, ब्राह्मण व वैष्णवों की निंदा किया करता था। जब राजा को अपने बड़े पुत्र के ऐसे कुकर्मों का पता चला तो उन्होंने उसे अपने राज्य से निकाल दिया। तब वह विचारने लगा कि कहां जाऊं? क्या करूं? अंत में उसने चोरी करने का निश्चय किया। दिन में वह वन में रहता और रात्रि को अपने पिता की नगरी में चोरी करता तथा प्रजा को तंग करने और उन्हें मारने का कुकर्म करता। कुछ समय पश्चात सारी नगरी भयभीत हो गई। वह वन में रहकर पशु आदि को मारकर खाने लगा। नागरिक और राज्य के कर्मचारी उसे पकड़ लेते किंतु राजा के भय से छोड़ देते।</p>



<p>वन में एक अतिप्राचीन विशाल पीपल का वृक्ष था। लोग उसकी भगवान के समान पूजा करते थे। उसी वृक्ष के नीचे वह महापापी लुम्पक रहा करता था। इस वन को लोग देवताओं की क्रीड़ास्थली मानते थे। कुछ समय पश्चात पौष कृष्ण पक्ष की दशमी के दिन वह वस्त्रहीन होने के कारण शीत के चलते सारी रात्रि सो नहीं सका। उसके हाथ-पैर अकड़ गए। सूर्योदय होते-होते वह मूर्छित हो गया। दूसरे दिन एकादशी को मध्याह्न के समय सूर्य की गर्मी पाकर उसकी मूर्छा दूर हुई। गिरता-पड़ता वह भोजन की तलाश में निकला। पशुओं को मारने में वह समर्थ नहीं था अत: पेड़ों के नीचे गिरे हुए फल उठाकर वापस उसी पीपल वृक्ष के नीचे आ गया। उस समय तक भगवान सूर्य अस्त हो चुके थे। वृक्ष के नीचे फल रखकर कहने लगा- हे भगवन्! अब आपके ही अर्पण हैं ये फल। आप ही तृप्त हो जाइए। उस रात्रि को दु:ख के कारण रात्रि को भी नींद नहीं आई।</p>



<p>उसके इस उपवास और जागरण से भगवान अत्यंत प्रसन्न हो गए और उसके सारे पाप नष्ट हो गए। दूसरे दिन प्रात: एक अतिसुंदर घोड़ा अनेक सुंदर वस्तुओं से सजा हुआ उसके सामने आकर खड़ा हो गया। उसी समय आकाशवाणी हुई कि हे राजपुत्र! श्री नारायण की कृपा से तेरे सब पाप नष्ट हो गए हैं। अब तू अपने पिता के पास जाकर राज्य प्राप्त कर। ऐसी वाणी सुनकर वह अत्यंत प्रसन्न हुआ और दिव्य वस्त्र धारण करके &#8216;भगवान आपकी जय हो&#8217; कहकर अपने पिता के पास गया। उसके पिता ने प्रसन्न होकर उसे समस्त राज्य का भार सौंप दिया और वन का रास्ता लिया। अब लुम्पक शास्त्रानुसार राज्य करने लगा। उसके स्त्री, पुत्र आदि सारा कुटुंब भगवान श्री नारायण का परम भक्त हो गया। वृद्ध होने पर वह भी अपने पुत्र को राज्य का भार सौंपकर वन में तपस्या करने चला गया और अंत समय में वैकुंठ को प्राप्त हुआ। अत: जो मनुष्य इस परम पवित्र सफला एकादशी का व्रत करता है उसे अंत में मुक्ति मिलती है। जो नहीं करते वे पूंछ और सींगों से रहित पशुओं के समान हैं। इस सफला एकादशी के माहात्म्य को पढ़ने से अथवा श्रवण करने से मनुष्य को अश्वमेध यज्ञ का फल मिलता है।</p>
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		<title>कल है रक्षाबंधन, इस दिन बहनें गलती से भी न करें ये काम, जानिए शुभ मुहूर्त</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Babita Kashyap]]></dc:creator>
		<pubDate>Sat, 21 Aug 2021 04:58:02 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[धर्म]]></category>
		<category><![CDATA[इस दिन बहनें गलती से भी न करें ये काम]]></category>
		<category><![CDATA[कल है रक्षाबंधन]]></category>
		<category><![CDATA[जानिए शुभ मुहूर्त]]></category>
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					<description><![CDATA[<img width="618" height="347" src="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2021/08/GGF.jpg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" loading="lazy" srcset="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2021/08/GGF.jpg 795w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2021/08/GGF-300x169.jpg 300w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2021/08/GGF-768x432.jpg 768w" sizes="auto, (max-width: 618px) 100vw, 618px" />रक्षा बंधन का पर्व अति पवित्र माना गया है. रक्षा बंधन का पर्व पूरे भारत वर्ष में बहुत ही श्राद्धा और आस्था के साथ मनाया जाता है. पंचांग के अनुसार 22 अगस्त 2021, रविवार को श्रावण मास की शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा तिथि को मनाया जाएगा. पूर्णिमा की तिथि का विशेष धार्मिक महत्व बताया गया &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<img width="618" height="347" src="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2021/08/GGF.jpg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" loading="lazy" srcset="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2021/08/GGF.jpg 795w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2021/08/GGF-300x169.jpg 300w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2021/08/GGF-768x432.jpg 768w" sizes="auto, (max-width: 618px) 100vw, 618px" /><p>रक्षा बंधन का पर्व अति पवित्र माना गया है. रक्षा बंधन का पर्व पूरे भारत वर्ष में बहुत ही श्राद्धा और आस्था के साथ मनाया जाता है. पंचांग के अनुसार 22 अगस्त 2021, रविवार को श्रावण मास की शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा तिथि को मनाया जाएगा. <img loading="lazy" decoding="async" class=" wp-image-454813 aligncenter" src="http://www.livehalchal.com/wp-content/uploads/2021/08/GGF.jpg" alt="" width="509" height="286" srcset="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2021/08/GGF.jpg 795w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2021/08/GGF-300x169.jpg 300w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2021/08/GGF-768x432.jpg 768w" sizes="auto, (max-width: 509px) 100vw, 509px" /></p>
<p>पूर्णिमा की तिथि का विशेष धार्मिक महत्व बताया गया है. यह तिथि शुभ कार्यों के लिए उत्तम मानी गई है. इस तिथि को श्रावण पूर्णिमा भी कहते हैं. इस दिन को दान, पितरों का तर्पण और चंद्रमा को जल देने के लिए अच्छा माना गया है. विशेष बात ये है कि इस दिन सावन का महीना समाप्त हो रहा है. सावन का महीना बहुत ही पवित्र महीना माना गया है. सावन में भगवान शिव की विशेष पूजा का विधान है. सावन का आखिरी दिन भी महत्वपूर्ण है इसलिए इस दिन का धार्मिक महत्व बढ़ जाता है.</p>
<p><strong>रक्षा बंधन का शुभ मुहूर्त</strong><br />
पंचांग के अनुसार 22 अगस्त, रविवार को प्रात: 06 बजकर 15 मिनट से प्रात: 10 बजकर 34 मिनट तके तक शोभन योग रहेगा, धनिष्ठा नक्षत्र शाम को करीब 07 बजकर 39 मिनट तक रहेगा. 22 अगस्त 2021 को दोपहर 01 बजकर 42 मिनट दोपहर से शाम 04 बजकर 18 मिनट तक, राखी बांधना सबसे शुभ रहेगा.</p>
<p><strong>भूल कर भी न करें ये काम</strong><br />
रक्षा बंधन पर कुछ बातों का ध्यान रखना चाहिए. इस दिन स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करने चाहिए. रक्षा बंधन पर स्वच्छता के नियमों का सख्ती से पालन करना चाहिए. इसके साथ ही शुभ मुहूर्त में विधि पूर्वक पूजा करनी चाहिए. विधिवत राखी की थाली को सजाना चाहिए. इस दिन क्रोध और अहंकार से बचना चाहिए. हर प्रकार की बुराई और गलत आदतों का त्याग करते हुए इस पर्व को श्रद्धाभाव से मनाना चाहिए. रक्षा बंधन पर बड़ों का आशीर्वाद प्राप्त करना चाहिए.</p>
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		<title>इस दिन है महेश नवमी, जानिए शुभ मुहूर्त, महत्व और पूजा विधि</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Babita Kashyap]]></dc:creator>
		<pubDate>Thu, 17 Jun 2021 04:40:55 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[धर्म]]></category>
		<category><![CDATA[इस दिन है महेश नवमी]]></category>
		<category><![CDATA[जानिए शुभ मुहूर्त]]></category>
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					<description><![CDATA[<img width="618" height="405" src="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2021/06/lord_shiva_-1.jpg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" loading="lazy" />हिंदू पंचांग के मुताबिक, प्रत्येक वर्ष ज्येष्ठ माह में शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि को महेश नवमी मनाई जाती है। इस बार महेश नवमी 19 जून 2021 को मनाया जाएगा। हिंदू धर्म ग्रंथों के अनुसार, महादेव के वरदान के स्वरूप महेश्वरी समाज की उत्पत्ति हुई है। इसलिए ज्येष्ठ मास की शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<img width="618" height="405" src="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2021/06/lord_shiva_-1.jpg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" loading="lazy" />
<p>हिंदू पंचांग के मुताबिक, प्रत्येक वर्ष ज्येष्ठ माह में शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि को महेश नवमी मनाई जाती है। इस बार महेश नवमी 19 जून 2021 को मनाया जाएगा। हिंदू धर्म ग्रंथों के अनुसार, महादेव के वरदान के स्वरूप महेश्वरी समाज की उत्पत्ति हुई है। इसलिए ज्येष्ठ मास की शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि को महेश नवमी मनाई जाती है। इस दिन को महेश्वरी समाज के भक्त धूम-धाम से मनाते हैं। इस दिन महादेव तथा माता पार्वती की आराधना की जाती है। आइए जानते हैं महेश नवमी से सबंधित अहम बातों के बारे में&#8230;</p>



<div class="wp-block-image"><figure class="aligncenter size-large"><img loading="lazy" decoding="async" width="835" height="547" src="http://www.livehalchal.com/wp-content/uploads/2021/06/lord_shiva_-1.jpg" alt="" class="wp-image-444716" /></figure></div>



<p><strong>महेश नवमी पूजा मुहूर्त:-</strong><br>नवमी तिथि का शुभारंभ- 18 जून 2021 रात 08 बजकर 35 मिनट पर<br>नवमी तिथि का समापन– 19 जून 2021 शाम 06 बजकर 45 मिनट तक रहेगा</p>



<p><strong>महेश नवमी पूजा विधि:-</strong><br>महेश नवमी के दिन महादेव तथा माता पार्वती की आराधना की जाती है। इस दिन महादेव का अभिषेक किया जाता है। उन्हें गंगाजल, पुष्प, बेलपत्र, भांग, धतूरा आदि चीजें चढ़ाई जाती है। इस दिन खास तौर पर शिवलिंग की आराधना की जाती है। महेश नवमी के दिन महादेव का डमरू बजाया जाता है। इस दिन माता पार्वती की भी आराधना होती है। सुहागिन महिलाएं श्रृंगार का सामान चढ़ाती हैं।</p>



<p><strong>महत्व:-</strong><br>महेश्वरी समाज के व्यक्तियों के लिए महेश नवमी का दिन काफी अहम होता है। इस दिन महेश्वरी समाज के लोग शिवालयों तथा मंदिरों में महादेव की खास आराधना की जाती है। इस दिन धार्मिक तथा सांस्कृतिक कार्यों का आयोजन किया जाता है।</p>
]]></content:encoded>
					
		
		
			</item>
		<item>
		<title>आज है कालाष्टमी व्रत, जानिए शुभ मुहूर्त, पूजा- विधि और महत्व</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Babita Kashyap]]></dc:creator>
		<pubDate>Wed, 02 Jun 2021 04:40:22 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[धर्म]]></category>
		<category><![CDATA[आज है कालाष्टमी व्रत]]></category>
		<category><![CDATA[जानिए शुभ मुहूर्त]]></category>
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					<description><![CDATA[पंचांग के अनुसार कालाष्टमी का व्रत ज्येष्ठ मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी को रखा जाता है. जोकि आज यानी 2 जून को है. इस दिन काल भैरव की विधि पूर्वक उपासना करने से उपासक के सभी दुःख और परेशानियां दूर हो जाती है. इनकी पूजा करने से कुंडली में राहु-केतु और नकारात्मक शक्तियों से &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[
<p>पंचांग के अनुसार कालाष्टमी का व्रत ज्येष्ठ मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी को रखा जाता है. जोकि आज यानी 2 जून को है. इस दिन काल भैरव की विधि पूर्वक उपासना करने से उपासक के सभी दुःख और परेशानियां दूर हो जाती है. इनकी पूजा करने से कुंडली में राहु-केतु और नकारात्मक शक्तियों से छुटकारा मिलता है. कालाष्टमी के दिन भगवान भैरव के सौम्य रूप बटुक की पूजा होती है.</p>



<div class="wp-block-image"><figure class="aligncenter size-large is-resized"><img loading="lazy" decoding="async" src="http://www.livehalchal.com/wp-content/uploads/2021/06/lli.jpg" alt="" class="wp-image-441617" width="520" height="295" /></figure></div>



<p>शास्त्र में काल भैरव को भगवान शिव का गण और माता पार्वती का अनुचर माना गया है. हिंदू धर्म शास्त्रों में काल भैरव का बहुत महत्व बताया गया है. शास्त्रों के अनुसार भैरव शब्द का अर्थ है भय को हैराने वाला. अर्थात जो उपासक काल भैरव की उपासना करता है. उसके सभी प्रकार के भय हर उठते हैं. ऐसी मान्याता है काल भैरव में ब्रह्मा, विष्णु और महेश की शक्तियां समाहित रहती है. आइये जानें कालाष्टमी व्रत की पूजा विधि, शुभ मुहूर्त और महत्त्व.</p>



<p><strong>शुभ मुहूर्त</strong></p>



<ul class="wp-block-list"><li><strong>कालाष्टमी</strong>&nbsp;<strong>तिथि</strong>&nbsp;<strong>प्रारंभ</strong><strong>:&nbsp;</strong>02 जून को रात्रि 12 बजकर 46 मिनट से</li><li><strong>कालाष्टमी</strong>&nbsp;<strong>तिथि</strong>&nbsp;<strong>समाप्त</strong><strong>:&nbsp;</strong>03 जून को रात्रि 01 बजकर 12 मिनट पर</li></ul>



<p><strong>पूजा</strong>&nbsp;<strong>विधि</strong><strong>:</strong></p>



<p>कालाष्टमी के पावन दिन को सुबह जल्दी उठें. उसके बाद नित्यकर्म, स्नान आदि से निवृत्त होकर घर के पूजा स्थल पर बैठें और व्रत का संकल्प लें. &nbsp;अब भगवान शिव या काल भैरव की मूर्ति स्थापित कर उनके सामने &nbsp;दीपक प्रज्वलित करें. अब विधि विधान से पूजा करें. भोग लगाएं. इसके बाद आरती करें. काल भैरव के साथ भगवान शिव की भी पूजा करें.</p>



<p><strong>कालाष्टमी</strong>&nbsp;<strong>व्रत</strong>&nbsp;<strong>का</strong>&nbsp;<strong>महत्त्व</strong></p>



<p>कालाष्टमी के दिन श्रद्धापूर्वक व्रत रखने से भगवान शिव और काल भैरव की विशेष कृपा होती है. इनकी कृपा से भक्त के सभी प्रकार की मनोकामनाएं पूर्ण होती है. शनि के बुरे प्रभाव से बचा जा सकता है. काल भैरव की कृपा से हर प्रकार के शत्रुओं से छुटकारा मिलती है. इस दिन व्रत रखने से शुभ फल की प्राप्ति होती है.</p>
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		<title>27 अप्रैल को मनाई जाएगी हनुमान जयंती, जानिए शुभ मुहूर्त</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Alpana Vaish]]></dc:creator>
		<pubDate>Sun, 25 Apr 2021 04:59:00 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[अध्यात्म]]></category>
		<category><![CDATA[धर्म]]></category>
		<category><![CDATA[27 अप्रैल को मनाई जाएगी हनुमान जयंती]]></category>
		<category><![CDATA[जानिए शुभ मुहूर्त]]></category>
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					<description><![CDATA[<img width="618" height="399" src="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2021/04/sfcdfv.jpeg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" loading="lazy" srcset="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2021/04/sfcdfv.jpeg 620w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2021/04/sfcdfv-300x194.jpeg 300w" sizes="auto, (max-width: 618px) 100vw, 618px" />भगवान हनुमान को महादेव का 11वां अवतार भी माना जाता है। हनुमान जी की पूजा करने और व्रत रखने से हनुमान जी का आशीष प्राप्त होता है और जीवन में किसी प्रकार का संकट नहीं आता है, इसलिए हनुमान जी को संकटमोचक भी कहा गया है। संपूर्ण भारत में हनुमान जयंती बहुत ही भक्तिभाव के &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<img width="618" height="399" src="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2021/04/sfcdfv.jpeg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" loading="lazy" srcset="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2021/04/sfcdfv.jpeg 620w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2021/04/sfcdfv-300x194.jpeg 300w" sizes="auto, (max-width: 618px) 100vw, 618px" /><div>भगवान हनुमान को महादेव का 11वां अवतार भी माना जाता है। हनुमान जी की पूजा करने और व्रत रखने से हनुमान जी का आशीष प्राप्त होता है और जीवन में किसी प्रकार का संकट नहीं आता है, इसलिए हनुमान जी को संकटमोचक भी कहा गया है।<img loading="lazy" decoding="async" class="size-full wp-image-183160 aligncenter" src="https://tosnews.com/wp-content/uploads/2021/04/sfcdfv.jpeg" alt="" width="620" height="400" /></div>
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<div><strong>संपूर्ण भारत में हनुमान जयंती बहुत ही भक्तिभाव के साथ मनाई जाती है।</strong></div>
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<div><strong>27 अप्रैल को मनाई जाएगी हनुमान जयंती</strong></div>
<div></div>
<div>साल 2021 में वर्ष हनुमान जयंती 27 अप्रैल 2021 को मनाई जाएगी। हनुमान जयंती हर वर्ष चैत्र मास की शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा तिथि को मनाई जाती है और देश में कुछ स्थानों पर हनुमान जयंती कार्तिक मास में भी मनाई जाती है।</div>
<div></div>
<div>ज्योतिष विज्ञान के मुताबिक जिन लोगों की कुंडली में शनि अशुभ स्थिति में हैं या फिर शनि की साढ़ेसाती चल रही है, उन लोगों को हनुमान जी की पूजा विधि पूर्वक करना चाहिए। हनुमान जी को मंगलकारी कहा गया है, इसलिए इनकी पूजा जीवन में मंगल लेकर आती हैं।<br />
इस बार हनुमान जयंती का त्योहार 27 अप्रैल मंगलवार को मनाया जा रहा है। मंगलवार का दिन हनुमान जी का ही दिन होता है और ऊपर से हनुमान जयंती का त्योहार यानी भक्तों के पास बजरंगबली को खुश करने का दोहरा मौका है। इसके अलावा इस दिन रात में 8 बजे तक सिद्धि योग रहने वाला है और बेहद शुभ स्वाति नक्षत्र भी। किसी भी तरह की सिद्धि प्राप्त करने और ईश्वर का नाम जपने के लिए सिद्धि योग बेहद उत्तम माना जाता है।</p>
<div></div>
<div><strong>जानिए पूजा के शुभ मुहूर्त</strong></div>
<div></div>
<div><strong>26 अप्रैल 2021: दोपहर 12।44 मिनट पर पूर्णिमा तिथि आरंभ</strong></div>
<div></div>
<div><strong>27 अप्रैल 2021: रात्रि 9।01 मिनट पर पूर्णिमा तिथि का समापन</strong></div>
<div></div>
<div></div>
<div><strong>हनुमान जयंती पूजा शुभ मुहूर्त-</strong></div>
<div></div>
<div><strong>ब्रह्म मुहूर्त- प्रात: 04:06 से 04:50 तक।</strong></div>
<div><strong>अभिजीत मुहूर्त- 11:40 से 12:33 तक।</strong></div>
<div><strong>अमृत काल- 12:26 से 01:50 तक।<br />
</strong></div>
<div><strong>विजय मुहूर्त- 02:17 से 03:09 तक।</strong></div>
<div><strong>गोधूलि मुहूर्त- 06:26 से 06:49 तक।</strong></div>
<div><strong>त्रिपुष्कर योग- 05:14<br />
से 05:33 तक।</strong></div>
<div><strong>निशिता मुहूर्त- रात्रि 11:44 से 12:28 तक।</strong></div>
<div></div>
<div>हनुमान जी का जन्म सूर्योदय के समय हुआ था, इसलिए हनुमान जयंती के दिन ब्रह्म मुहूर्त में पूजा करना अच्छा माना गया है</div>
<div></div>
<div>&#8211; हनुमान जी की प्रिय चीजों का भोग लगाना चाहिए</div>
<div></div>
<div>&#8211; हनुमान जयंती पर हनुमान चालीसा, सुंदरकांड और हनुमान आरती का पाठ करना शुभ माना जाता है।</div>
</div>
</div>
</div>
</div>
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