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	<title>जानिए पूरी कहानी &#8211; Live Halchal</title>
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	<title>जानिए पूरी कहानी &#8211; Live Halchal</title>
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		<title>दोस्तों ने अधमरा कर रेलवे ट्रैक पर फेंका, 1 महीने बाद कोमा से बाहर निकला, जानिए पूरी कहानी</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Alpana Vaish]]></dc:creator>
		<pubDate>Tue, 15 Sep 2020 05:31:56 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[राष्ट्रीय]]></category>
		<category><![CDATA[1 महीने बाद कोमा से बाहर निकला]]></category>
		<category><![CDATA[जानिए पूरी कहानी]]></category>
		<category><![CDATA[दोस्तों ने अधमरा कर रेलवे ट्रैक पर फेंका]]></category>
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					<description><![CDATA[<img width="618" height="513" src="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2020/09/swfsef.jpg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" fetchpriority="high" srcset="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2020/09/swfsef.jpg 650w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2020/09/swfsef-300x249.jpg 300w" sizes="(max-width: 618px) 100vw, 618px" />मध्य प्रदेश स्थित भोपाल-बीना रेलवे ट्रैक पर 56 दिन पहले मरणासन्न हालत में मिले युवक को पूरी तरह से होश आ गया है। वह एक माह बाद कोमा से बाहर निकला था। आठ दिन पहले अस्पताल से छुट्टी मिलने के बाद उसने आपबीती घर वालों को बताई और मामला नए सिरे से पुलिस तक पहुंचा। &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<img width="618" height="513" src="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2020/09/swfsef.jpg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" srcset="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2020/09/swfsef.jpg 650w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2020/09/swfsef-300x249.jpg 300w" sizes="(max-width: 618px) 100vw, 618px" /><p>मध्य प्रदेश स्थित भोपाल-बीना रेलवे ट्रैक पर 56 दिन पहले मरणासन्न हालत में मिले युवक को पूरी तरह से होश आ गया है। वह एक माह बाद कोमा से बाहर निकला था। आठ दिन पहले अस्पताल से छुट्टी मिलने के बाद उसने आपबीती घर वालों को बताई और मामला नए सिरे से पुलिस तक पहुंचा। उसका कहना है कि दोस्तों ने उसे अधमरा कर रेलवे ट्रैक पर फेंक दिया था। हालांकि पुलिस को उसकी कहानी पर संदेह है। जांच जारी है।</p>
<p><img decoding="async" class="size-full wp-image-373159 aligncenter" src="http://www.livehalchal.com/wp-content/uploads/2020/09/swfsef.jpg" alt="" width="650" height="540" srcset="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2020/09/swfsef.jpg 650w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2020/09/swfsef-300x249.jpg 300w" sizes="(max-width: 650px) 100vw, 650px" /></p>
<p><strong>भोपाल-बीना रेलवे ट्रैक पर 19 जुलाई को मरणासन्न हालत में मिला था युवक </strong></p>
<p>19 जुलाई को विदिशा जिले के मंडीबामोरा पुलिस चौकी प्रभारी मीनेष भदौरिया को सूचना मिली थी कि पठारी रेलवे गेट के आगे रेलवे ट्रैक पर युवक का शव पड़ा है। वह जवानों के साथ मौके पर पहुंचे तो देखा कि ट्रैक पर शव नहीं बल्कि मरणासन्न अवस्था में युवक पड़ा हुआ है। उन्होंने उसे सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र मंडीबामोरा पहुंचाया। इलाज के दौरान युवक की पहचान संजय कॉलोनी मंडीबामोरा निवासी सुरेश पिता गजराज कुशवाहा के रूप में हुई। इसके बाद उसे भोपाल के एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां वह करीब 30 दिन कोमा में रहा। इसके बाद युवक को होश आ गया था। स्वास्थ्य में पूरी तरह सुधार होने के बाद करीब आठ दिन पहले अस्पताल से युवक की छुट्टी कर दी गई। इस दौरान सुरेश को याद आ गया कि वह ट्रेन से नहीं टकराया था, बल्कि उसे दोस्तों ने मारपीट कर रेलवे ट्रैक पर फेंका था।</p>
<p><strong>दोस्त घर से लेकर गया था</strong></p>
<p>सुरेश ने बताया कि घटना के दिन अंशुल यादव नाम का उसका दोस्त उसे घर लेने आया था। मंडीबामोरा से वह उसे विदिशा जिले की कुरवाई तहसील में आने वाले गुदावल गांव में नवल सिंह कुशवाहा के घर ले गया था। नवल के अलावा पन्ना कुशवाहा भी वहां मौजूद था। शराब के नशे में तीनों ने उसके साथ मारपीट की थी और मरणासन्न हालत में रेलवे ट्रैक पर फेंक दिया था।</p>
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<p><strong>अफसर की प्रतिक्रिया  </strong></p>
<p>मध्&#x200d;य प्रदेश के जिला विदिशा के थाना कुरवाई के टीआई वीरेंद्र मर्सकोले ने बताया कि  घटना के दिन फरियादी सुरेश समेत चारों दोस्तों ने पार्टी की थी। अब सुरेश बता रहा है कि उसे मारपीट कर रेलवे ट्रैक पर फेंका गया था। यदि मारकर फेंकना हो होता तो जिंदा क्यों छोड़ते। इसके बाद भी शिकायत पर घायल के बयान लिए गए हैं। पूरे मामले की जांच चल रही है। मारपीट कर फेंकने की घटना सही पाई जाएगी तो आरोपितों के खिलाफ कार्रवाई होगी।</p>
</div>
</div>
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		<title>कुलदीप सिंह सेंगर ग्राम पंचायत से विधायक बने, जानिए पूरी कहानी</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Hema Bisht]]></dc:creator>
		<pubDate>Fri, 02 Aug 2019 04:55:35 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Main Slide]]></category>
		<category><![CDATA[राष्ट्रीय]]></category>
		<category><![CDATA[कुलदीप सिंह सेंगर ग्राम पंचायत से विधायक बने]]></category>
		<category><![CDATA[जानिए पूरी कहानी]]></category>
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					<description><![CDATA[<img width="618" height="463" src="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2019/08/unnao-rape-case-1_20180420171.jpg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" loading="lazy" srcset="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2019/08/unnao-rape-case-1_20180420171.jpg 686w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2019/08/unnao-rape-case-1_20180420171-300x225.jpg 300w" sizes="auto, (max-width: 618px) 100vw, 618px" />उन्नाव दुष्कर्म केस के आरोपी भाजपा के विधायक कुलदीप सिंह सेंगर उन्नाव की सियासत में एक बड़ा नाम है। राजधानी लखनऊ से लगभग 63 किलोमीटर दूर स्थित उन्नाव ब्राह्मण बहुल इलाका है। यहां पर सेंगर सबसे कद्दावर राजपूत हैं। जानकारों का कहना है कि उन्नाव के सेंगर जिले के ठाकुरों को एकजुट करने वाले नेताओं &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<img width="618" height="463" src="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2019/08/unnao-rape-case-1_20180420171.jpg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" loading="lazy" srcset="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2019/08/unnao-rape-case-1_20180420171.jpg 686w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2019/08/unnao-rape-case-1_20180420171-300x225.jpg 300w" sizes="auto, (max-width: 618px) 100vw, 618px" /><p><strong>उन्नाव दुष्कर्म केस के आरोपी भाजपा के विधायक कुलदीप सिंह सेंगर उन्नाव की सियासत में एक बड़ा नाम है। राजधानी लखनऊ से लगभग 63 किलोमीटर दूर स्थित उन्नाव ब्राह्मण बहुल इलाका है। यहां पर सेंगर सबसे कद्दावर राजपूत हैं। जानकारों का कहना है कि उन्नाव के सेंगर जिले के ठाकुरों को एकजुट करने वाले नेताओं और बहुबलियों में शुमार है। कांग्रेस पार्टी से अपने राजनीतिक सफर की शुरुआत करने वाले कुलदीप ने खुद को उन्नाव में एक नहीं चार बार बाहुबली विधायक के रूप में स्थापित किया। रूतबा ऐसा बनाया कि जिस पार्टी से भी चुनाव लड़े उसी से उनकी जीत पक्की रही। </strong></p>
<p><img loading="lazy" decoding="async" class=" wp-image-261288 aligncenter" src="http://www.livehalchal.com/wp-content/uploads/2019/08/unnao-rape-case-1_20180420171-300x225.jpg" alt="" width="513" height="385" srcset="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2019/08/unnao-rape-case-1_20180420171-300x225.jpg 300w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2019/08/unnao-rape-case-1_20180420171.jpg 686w" sizes="auto, (max-width: 513px) 100vw, 513px" /></p>
<p>&nbsp;</p>
<p><strong>ग्राम पंचायत से विधायक बनने तक का सफर</strong></p>
<p><strong>कुलदीप सिंह सेंगर का राजनीतिक सफर ग्राम पंचायत की सियासत से शुरू हुआ था। कुलदीप ने सबसे पहले अपनी जन्मस्थली माखी गांव की ग्राम पंचायत से सियासत शुरु की। माखी गांव उन्नाव जिले की सबसे बड़ी ग्राम पंचायतों में शामिल है। एक बार गांव के प्रधान चुन लिए जाने के बाद उन्होंने युवा कांग्रेस से सक्रिय राजनीति में कदम रखा। सक्रिय राजनीति में कदम रखने के बाद कुलदीप ने पीछे मुड़कर नहीं देखा।</strong></p>
<p><strong>एक बार राजनीति का चस्का लग जाने के बाद उन्होंने सभी राजनीतिक दलों में अपनी पैठ बनाई, सभी से अच्छे रिश्ते कायम किए, उसके बाद दलों में अपनी अच्छी पैठ और संबंधों के बूते वो लगातार चार बार विधायक का चुनाव जीते। वर्तमान में भी कुलदीप उन्नाव के बांगरमऊ विधानसभा से विधायक हैं। कुलदीप के छोटे भाई मनोज सिंह 2005 से 2010 तक मियागंज ब्लॉक के प्रमुख रहे। उनको ब्लाक प्रमुख बनवाने में भी उनकी भूमिका रही।</strong></p>
<p><strong>सपा से लड़े फिर की बगावत</strong></p>
<p><strong>कुलदीप ने साल 2012 के विधानसभा चुनाव में सपा के टिकट पर भगवंतनगर से चुनाव लड़ा, वहां से वो विधायक निर्वाचित हुए। 2016 में सपा में रहते हुए पार्टी से बगावत करके जिला पंचायत चुनाव में अपनी पत्नी संगीता सेंगर को मैदान में उतार दिया। सपा में रहते हुए उन्होंने पार्टी के घोषित प्रत्याशी के खिलाफ पत्नी को न सिर्फ चुनाव लड़ाया बल्कि जीत भी हासिल की। विधानसभा चुनाव से पहले जनवरी 2017 में कुलदीप सिंह ने भाजपा का दामन थाम लिया।</strong></p>
<p><strong>आचार संहिता के उल्लंघन के मुकदमे के बाद सीधे दुष्कर्म का मुकदमा दर्ज</strong></p>
<p><strong>कुलदीप की गिनती उन्नाव इलाके में एक बाहुबली नेता के रुप में होती है। उनके ऊपर चुनाव के समय आचार संहिता उल्लंघन के मुकदमे को छोड़ दिया जाए तो उनके ऊपर दूसरा मुकदमा दुष्कर्म का दर्ज हुआ। उन पर ये मुकदमा रायबरेली में दर्ज हुआ था। इतने बड़े राजनीतिक सफर में पहली बार अप्रैल 2018 में उन पर किशोरी से दुष्कर्म का मुकदमा दर्ज हुआ था। तब पहली बार उनका नाम पुलिस की केस डायरी में चढ़ा था। हालांकि शहर व जिले की कई आपराधिक घटनाओं में उनकी शह या उनके गुर्गों के शामिल होने की बात सामने आई, लेकिन किसी ने रिपोर्ट नहीं दर्ज कराई। कुलदीप सिंह को राजनीतिक प्रतिद्वंदियों और विरोधियों को शिकस्त देने में माहिर माना जाता हैं। </strong></p>
<p><strong><img loading="lazy" decoding="async" class=" wp-image-261286 aligncenter" src="http://www.livehalchal.com/wp-content/uploads/2019/08/kuldip-1-1-300x249.jpg" alt="" width="492" height="408" srcset="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2019/08/kuldip-1-1-300x249.jpg 300w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2019/08/kuldip-1-1.jpg 650w" sizes="auto, (max-width: 492px) 100vw, 492px" /></strong></p>
<p><strong>25 साल में खड़ा किया सियासी साम्राज्य</strong></p>
<p><strong>ये कुलदीप का राजनीतिक रसूख ही कहा जाएगा कि दुष्कर्म की रिपोर्ट दर्ज होने, जेल जाने और सीबीआई की जांच जारी होने के बाद भी उनका क्षेत्र में दबदबा कायम रहा। यही नहीं इस मुद्दे पर गैर भाजपाई दलों के घेरने पर अब कुलदीप के भाजपा से निलंबन की कार्रवाई हुई है। विधायक का उनका दर्जा बरकरार है। कुलदीप सेंगर के पिता मुलायम सिंह मूल रूप से फतेहपुर जिले के निवासी थे।</strong></p>
<p><strong>पारिवारिक पृष्ठभूमि</strong></p>
<p><strong>कुलदीप के नाना वीरेंद्र सिंह का कोई बेटा नहीं था। केवल दो बेटियां चुन्नी देवी और सरोजनी देवी ही हैं। चुन्नी देवी शादी के बाद से अपने परिवार समेत पिता के साथ रहने लगीं। उन्हीं के चार बेटों में कुलदीप सबसे बड़े, मनोज दूसरे नंबर के और अतुल तीसरे नंबर के हैं। कुलदीप के सबसे छोटे भाई विपुल सिंह की करीब दस साल पहले बीमारी से मौत हो गई थी। कुलदीप समेत सभी भाइयों का जन्म ननिहाल के गांव में हुआ। </strong></p>
<p><strong><img loading="lazy" decoding="async" class=" wp-image-261287 aligncenter" src="http://www.livehalchal.com/wp-content/uploads/2019/08/01_08_2019-unnao_sc_sengar3_19451765_132038756-300x249.jpg" alt="" width="552" height="458" srcset="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2019/08/01_08_2019-unnao_sc_sengar3_19451765_132038756-300x249.jpg 300w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2019/08/01_08_2019-unnao_sc_sengar3_19451765_132038756.jpg 650w" sizes="auto, (max-width: 552px) 100vw, 552px" /></strong></p>
<p>&nbsp;</p>
<p><strong>जेल जाने के बाद भी कायम रहा रसूख और क्षेत्र में दबदबा</strong></p>
<p><strong>कुलदीप सिंह 1996 में पहली बार ग्राम प्रधान चुने गए। इसके बाद पांच साल के दो कार्यकाल में माता चुन्नी देवी प्रधान रहीं। मौजूदा समय में छोटे भाई अतुल सिंह की पत्नी अर्चना सिंह ग्राम प्रधान हैं। वर्ष 2002 में कुलदीप ने बसपा से उन्नाव सदर सीट से पहली बार सक्रिय राजनीति में कदम रखा और विधायक चुने गए। 2007 में उन्होंने सपा का दामन थामा और बांगरमऊ से विधायक बने। </strong></p>
<p>&nbsp;</p>
]]></content:encoded>
					
		
		
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		<title>क्यों हुई थी मां वैष्णों और भैरो बाबा की लड़ाई, जानिए पूरी कहानी</title>
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		<dc:creator><![CDATA[somali sharma]]></dc:creator>
		<pubDate>Fri, 12 Oct 2018 10:09:26 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[धर्म]]></category>
		<category><![CDATA[क्यों हुई थी मां वैष्णों और भैरो बाबा की लड़ाई]]></category>
		<category><![CDATA[जानिए पूरी कहानी]]></category>
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					<description><![CDATA[<img width="249" height="203" src="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2018/10/images-78.jpg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" loading="lazy" />आप सभी जानते ही होंगे कि नवरात्री का पर्व शुरु हो चुका है ऐसे में मां भगवती के 9 रुपों की इन 9 दिनों में पूजा की जाती है और नवमी के दिन कन्याओं को घर बुलाकर भोजन खिलाया जाता है. कहते हैं कि मां शक्ति के एक नहीं बल्कि अनेक रुप है ऐसे में &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<img width="249" height="203" src="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2018/10/images-78.jpg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" loading="lazy" /><p><strong>आप सभी जानते ही होंगे कि नवरात्री का पर्व शुरु हो चुका है ऐसे में मां भगवती के 9 रुपों की इन 9 दिनों में पूजा की जाती है और नवमी के दिन कन्याओं को घर बुलाकर भोजन खिलाया जाता है. कहते हैं कि मां शक्ति के एक नहीं बल्कि अनेक रुप है ऐसे में मां वैष्णों देवीं कि बात करें तो वह वहीं माँ है जिनके दर्शन के लिए लोग जम्मू जाते हैं. ऐसे में कहा जाता है कि मां ने नवरात्र के वक्त ही राक्षस का संहार कर अपने भक्तों के कष्ट खत्म किए थें और वैष्णों मंदिर की यह मान्यता भी है कि जब तक मां की इच्छा नहीं होती है तब तक भक्त वहां नहीं पहुंच पाते है और मां जिनको बुलाती हैं वो हर दुख के होते हुए भी वहां आसानी से जाते हैं. अब आज हम आपको बताते हैं कैसे बना वैष्णों मंदिर और क्यों होती है कन्या पूजन.<img loading="lazy" decoding="async" class="aligncenter  wp-image-170444" src="http://www.livehalchal.com/wp-content/uploads/2018/10/images-78.jpg" alt="" width="403" height="330" />कहानी &#8211; कहते हैं हंसाली नाम का एक गांव था जो कटरा के पास था. वहां मां वैष्णवी के परम भक्त श्रीधर रहते थे. उनकी कोई संतान ना होंने के कारण वो बेहद दूखी रहते थे. उन्होंने नवरात्रि पूजन के लिए कुंवारी कन्याओं को बुलवाया. मां श्रीधर की भक्ति को जानती थीं इसलिए कन्याओं के बीच कन्या बनकर ही बैठ गईं. इसी के बाद से ऐसा माना जाता है कि जो भी अपने घर में कन्या पूजन करवाता है मां आशीर्वाद देने उन्हीं कन्याओं में आकर बैठती हैं. इसके बाद जब सभी चले गए तो मां वैष्णों ने जो कन्या रुप में थीं उन्होंन श्रीधर से कहा कि वो पूरे गांव को भंडारे के लिए निमंत्रित करें.श्रीधर ने गुरुगोरखनाथ और उनके शिष्य बाबा भैरवनाथ जी के साथ उनके दूसरे शिष्यों को निंमत्रण दे दिया. श्रीधर ने निमंत्रण तो दे दिया, लेकिन उन्हें चिंता होने लगी की वो पूरे गांव को भोज कैसे कराएंगे क्योंकि ना तो उनके पास धन है ना ही इतना भोजन.</strong></p>
<p><strong>भैरव का संहार- जब लोग खाने बठे तो कन्या का रुप धरकर आई मां ने सबको भोजन परोसनाशुरु किया. उस पात्र से भोजन खत्म होने का नवाम ही नहीं ले रहा था. जब कन्या भैरवनाथ के पास गई तो उसने हठ किया कि मुझे खीर-पूड़ी नहीं चाहिए मुझे तो मांस मदिरा चाहिए. मां ने उसे समझाया कि ये ब्राह्मण का घर है और यहां ये सब नहीं मिलेगा. वो मां से क्रोधित होने लगा और जिद करने लगा. मां समझ गई कि भैरव उनसे कपट कर रहा है. मां आगे जाने लगी तो भैरव उनका पीछा करने लगा. भैरव चाहता था कि मां के हाथों उसे मोक्ष मिले. वो मां का पीछा करनवे लगा. मां ने त्रिकुट पर्वत पर एकत गुफा में प्रवेश कर नौ माह तपस्या की. जब भैरव वहां पहुंचा तो वो दूसरे मार्ग से बाहर निकल गई. इसी जगह को गर्भगृह कहते हैं. गुफा से बाहर निकलकर कन्या से उन्होंने देवी का रुप धारण कर लिया और भैरव को गुफा से जाने की चेतावनी दी. माता की रक्षा के लिए हनुमान जी वहीं स्थित थी और उन्होंने भैरव से युद्ध किया, लेकिन भैरव तो सिर्फ मां के हाथों से मोक्ष पाना चाहता था इसलिए हनुमान जी उसे हरा नहीं पाए तब मां ने महाकाली का रुप धारण करके भैरव का संहार किया.</strong></p>
<p><strong>बाणगंगा- हनुमान जी को प्यास लगने पर मां ने पने बाण से पर्वत पर बाणगंगा नदी बनाई और इसमें अपने केश धुले थे. इसमें नहाने से या इसका जल पीने से श्रद्धालुओं की सारी परेशानियांदूर हो जाती हैं. कहते हैं कि जिस जिस रास्ते से मां भैरव बाबा को पीछा करवा रहीं थी वहीं वैष्णों देवी का रास्ता बन गया. मरते वक्त भैरो ने मां स क्षमा मांगी, मां ने उसे माफ कर दिया और वरदान देते हुए कहा कि जो व्यक्ति मेरे दर्शन के लिए आएगा और तेरे दर्शन नहीं करेगा उसकी यात्रा अधूरी मानी जाएगी. जहां मां ने भैरों का वध किया था उसका सिर कट कर 8 किमी दूर पर्वत पर गिरा. आज भी भक्त जब मां के दर्शन के लिए जाते हैं तो भैरोबाबा के दर्शन जरुर करते हैं. ये रास्ता एक दम खड़ी चढ़ाई है, लेकिन मां और भैरोबाबा की कृपा से भक्तों को चलने में कठिनाई नहीं होती है.</strong></p>
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		<title>ये है सोने का बड़ा लुटेरा, ऐसे सोने के गहने चोरी कर हो जाता था गायब, जानिए पूरी कहानी</title>
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		<dc:creator><![CDATA[ekta singh]]></dc:creator>
		<pubDate>Mon, 22 Jan 2018 11:57:28 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[बिहार]]></category>
		<category><![CDATA[राज्य]]></category>
		<category><![CDATA[ऐसे सोने के गहने चोरी कर हो जाता था गायब]]></category>
		<category><![CDATA[जानिए पूरी कहानी]]></category>
		<category><![CDATA[ये है सोने का बड़ा लुटेरा]]></category>
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					<description><![CDATA[<img width="618" height="464" src="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2018/01/ये-है-सोने-का-बड़ा-लुटेरा-ऐसे-सोने-के-गहने-चोरी-कर-हो-जाता-था-गायब-जानिए-पूरी-कहानी.jpg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="ये है सोने का बड़ा लुटेरा, ऐसे सोने के गहने चोरी कर हो जाता था गायब, जानिए पूरी कहानी" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" loading="lazy" srcset="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2018/01/ये-है-सोने-का-बड़ा-लुटेरा-ऐसे-सोने-के-गहने-चोरी-कर-हो-जाता-था-गायब-जानिए-पूरी-कहानी.jpg 650w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2018/01/ये-है-सोने-का-बड़ा-लुटेरा-ऐसे-सोने-के-गहने-चोरी-कर-हो-जाता-था-गायब-जानिए-पूरी-कहानी-300x225.jpg 300w" sizes="auto, (max-width: 618px) 100vw, 618px" />पटना। देश के विभिन्न राज्यों में घूम- घूमकर करीब सवा सौ किलोग्राम के सोने के गहने लूटने वाले गिरोह के सरगना सुबोध सिंह की ठाठ देखकर न केवल बिहार पुलिस बल्कि बंगाल, राजस्थान और महाराष्ट्र पुलिस भी हतप्रभ है।  पूछताछ के दौरान सुबोध सिंह ने बताया कि वह सोने के गहने लूटने के लिए एक शहर &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<img width="618" height="464" src="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2018/01/ये-है-सोने-का-बड़ा-लुटेरा-ऐसे-सोने-के-गहने-चोरी-कर-हो-जाता-था-गायब-जानिए-पूरी-कहानी.jpg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="ये है सोने का बड़ा लुटेरा, ऐसे सोने के गहने चोरी कर हो जाता था गायब, जानिए पूरी कहानी" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" loading="lazy" srcset="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2018/01/ये-है-सोने-का-बड़ा-लुटेरा-ऐसे-सोने-के-गहने-चोरी-कर-हो-जाता-था-गायब-जानिए-पूरी-कहानी.jpg 650w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2018/01/ये-है-सोने-का-बड़ा-लुटेरा-ऐसे-सोने-के-गहने-चोरी-कर-हो-जाता-था-गायब-जानिए-पूरी-कहानी-300x225.jpg 300w" sizes="auto, (max-width: 618px) 100vw, 618px" /><p><strong>पटना। देश के विभिन्न राज्यों में घूम- घूमकर करीब सवा सौ किलोग्राम के सोने के गहने लूटने वाले गिरोह के सरगना सुबोध सिंह की ठाठ देखकर न केवल बिहार पुलिस बल्कि बंगाल, राजस्थान और महाराष्ट्र पुलिस भी हतप्रभ है।  पूछताछ के दौरान सुबोध सिंह ने बताया कि वह सोने के गहने लूटने के लिए एक शहर से दूसरे शहर के लिए हवाई जहाज से उड़ान भरता था तथा  पांच सितारा होटलों में ठहरता था। काम पूरा होते ही वह रफूचक्कर हो जाता था। <img loading="lazy" decoding="async" class="aligncenter size-full wp-image-109993" src="http://www.livehalchal.com/wp-content/uploads/2018/01/ये-है-सोने-का-बड़ा-लुटेरा-ऐसे-सोने-के-गहने-चोरी-कर-हो-जाता-था-गायब-जानिए-पूरी-कहानी.jpg" alt="ये है सोने का बड़ा लुटेरा, ऐसे सोने के गहने चोरी कर हो जाता था गायब, जानिए पूरी कहानी" width="650" height="488" srcset="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2018/01/ये-है-सोने-का-बड़ा-लुटेरा-ऐसे-सोने-के-गहने-चोरी-कर-हो-जाता-था-गायब-जानिए-पूरी-कहानी.jpg 650w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2018/01/ये-है-सोने-का-बड़ा-लुटेरा-ऐसे-सोने-के-गहने-चोरी-कर-हो-जाता-था-गायब-जानिए-पूरी-कहानी-300x225.jpg 300w" sizes="auto, (max-width: 650px) 100vw, 650px" /></strong></p>
<p><strong>इधर बेउर जेल में बंद सुबोध सिंह से पूछताछ करने रविवार को महाराष्ट्र पुलिस की एक टीम नागपुर के पुलिस उपायुक्त के नेतृत्व में पटना पहुंची। टीम ने सुबोध से घंंटों पूछताछ की। बता दें कि सुबोध सिंह के गिरोह ने वर्ष 2016 के सितंबर माह में नागपुर में मण्णापुरम गोल्ड के दफ्तर से 32 किलोग्राम के स्वर्ण आभूषण की लूट की थी।  सुबोध सिंह ने उसके बाद जयपुर से 28 किलो, कोलकाता के बैरकपुर से 26 किलो के स्वर्ण आभूषण लूटे थे।</strong></p>
<p><strong>एसटीएफ के सूत्रों ने बताया कि पूछताछ में सुबोध सिंह ने अपने कुछ ऐसे साथियों का भी खुलासा किया है जो इस तरह के लूटकांड को अंजाम देने के लिए रेकी का काम करते थे। इस कुख्यात सरगना से राजस्थान और बंगाल पुलिस की टीम शनिवार को पूछताछ कर चुकी है। बताया जाता है कि विगत शुक्रवार को एसटीएफ की टीम ने जब रुपसपुस के समीप सुबोध सिंह के हुंडई कार को रोकने का प्रयास किया था तो उसने अपनी जिस रेगुलर पिस्टल से एसटीएफ पर गोलियां चलाई थी, वह पिस्टल उसने वहीं पानी से भरे एक गड्ढे में फेंक दिया था। एसटीएफ की टीम अब उस पिस्टल की तलाश कर रही है। </strong></p>
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