<?xml version="1.0" encoding="UTF-8"?><rss version="2.0"
	xmlns:content="http://purl.org/rss/1.0/modules/content/"
	xmlns:wfw="http://wellformedweb.org/CommentAPI/"
	xmlns:dc="http://purl.org/dc/elements/1.1/"
	xmlns:atom="http://www.w3.org/2005/Atom"
	xmlns:sy="http://purl.org/rss/1.0/modules/syndication/"
	xmlns:slash="http://purl.org/rss/1.0/modules/slash/"
	>

<channel>
	<title>जानिए पूजा विधि &#8211; Live Halchal</title>
	<atom:link href="https://livehalchal.com/tag/%E0%A4%9C%E0%A4%BE%E0%A4%A8%E0%A4%BF%E0%A4%8F-%E0%A4%AA%E0%A5%82%E0%A4%9C%E0%A4%BE-%E0%A4%B5%E0%A4%BF%E0%A4%A7%E0%A4%BF/feed" rel="self" type="application/rss+xml" />
	<link>https://livehalchal.com</link>
	<description>Latest News, Updated News, Hindi News Portal</description>
	<lastBuildDate>Wed, 10 Mar 2021 11:48:59 +0000</lastBuildDate>
	<language>en-US</language>
	<sy:updatePeriod>
	hourly	</sy:updatePeriod>
	<sy:updateFrequency>
	1	</sy:updateFrequency>
	<generator>https://wordpress.org/?v=6.9.4</generator>

<image>
	<url>https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2023/10/cropped-Live-Halchal-512-32x32.jpg</url>
	<title>जानिए पूजा विधि &#8211; Live Halchal</title>
	<link>https://livehalchal.com</link>
	<width>32</width>
	<height>32</height>
</image> 
	<item>
		<title>इस महाशिवरात्रि घर पर कीजिए रुद्राभिषेक पूजा, होंगे ये फायदे, जानिए पूजा विधि</title>
		<link>https://livehalchal.com/%e0%a4%87%e0%a4%b8-%e0%a4%ae%e0%a4%b9%e0%a4%be%e0%a4%b6%e0%a4%bf%e0%a4%b5%e0%a4%b0%e0%a4%be%e0%a4%a4%e0%a5%8d%e0%a4%b0%e0%a4%bf-%e0%a4%98%e0%a4%b0-%e0%a4%aa%e0%a4%b0-%e0%a4%95%e0%a5%80%e0%a4%9c/427062</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Alpana Vaish]]></dc:creator>
		<pubDate>Wed, 10 Mar 2021 23:44:03 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[अध्यात्म]]></category>
		<category><![CDATA[धर्म]]></category>
		<category><![CDATA[इस महाशिवरात्रि घर पर कीजिए रुद्राभिषेक पूजा]]></category>
		<category><![CDATA[जानिए पूजा विधि]]></category>
		<category><![CDATA[होंगे ये फायदे]]></category>
		<guid isPermaLink="false">http://www.livehalchal.com/?p=427062</guid>

					<description><![CDATA[<img width="600" height="400" src="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2021/03/dfdg-2.jpg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" fetchpriority="high" srcset="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2021/03/dfdg-2.jpg 600w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2021/03/dfdg-2-300x200.jpg 300w" sizes="(max-width: 600px) 100vw, 600px" />भगवान शिव को प्रसन्न करने और मनोवांछित फल प्राप्त करने के लिए भक्त महादेव का रुद्राभिषेक करते हैं। रुद्राभिषेक यूं तो कभी कर सकते हैं लेकिन महाशिवरात्रि और सावन सोमवार पर इसका फल कई गुना अधिक मिलता है। सनातन धर्म में सबसे प्रभावशील पूजा में रुद्राभिषेक  शामिल है। इससे भोले भंडारी जल्द प्रसन्न होते हैं। &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<img width="600" height="400" src="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2021/03/dfdg-2.jpg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" srcset="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2021/03/dfdg-2.jpg 600w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2021/03/dfdg-2-300x200.jpg 300w" sizes="(max-width: 600px) 100vw, 600px" /><p>भगवान शिव को प्रसन्न करने और मनोवांछित फल प्राप्त करने के लिए भक्त महादेव का रुद्राभिषेक करते हैं। रुद्राभिषेक यूं तो कभी कर सकते हैं लेकिन महाशिवरात्रि और सावन सोमवार पर इसका फल कई गुना अधिक मिलता है। सनातन धर्म में सबसे प्रभावशील पूजा में रुद्राभिषेक  शामिल है। इससे भोले भंडारी जल्द प्रसन्न होते हैं। महाशिवरात्रि पर रुद्राभिषेक मंदिरों में किया जाता हैl साथ ही जानकारों के मुताबिक इसे भक्त चाहे तो घर पर भी कर सकते हैं। इसकी जानकारी यर्जुेवेद में दी गई है।<img decoding="async" class="size-full wp-image-427063 aligncenter" src="http://www.livehalchal.com/wp-content/uploads/2021/03/dfdg-2.jpg" alt="" width="600" height="400" srcset="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2021/03/dfdg-2.jpg 600w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2021/03/dfdg-2-300x200.jpg 300w" sizes="(max-width: 600px) 100vw, 600px" /></p>
<p><strong>दूर होती ग्रह नक्षत्रों की बाधाएं: </strong>रुद्राभिषेक के फायदे बताते हुए ज्योर्तिविद् ओम वशिष्ठ कहते हैं कि सभी देवता रुद्र से संबंधित हैं। इसके मंत्र सर्वदेवात्मको रुद्र: सर्वे देवा शिवात्मका: से साफ है कि सभी देवताओं की आत्मा में रुद्र स्थापित हैं। विधि-विधान से रुद्राभिषेक  करने से ग्रह-नक्षत्रों की बाधाए दूर होती हैं। इसके बाद वे शुभ फल देने लगते हैं। इससे रोगों और जीवन में आ रही समस्याओं से मुक्ति मिलती है। इसे करने के लिए महाशिवरात्रि सबसे उपयुक्त दिन है क्योंकि इस दिन शिव और शक्ति का मिलन हुआ था। जल से अभिषेक करने से वर्षा, भवन-वाहन के लिए दही, लक्षमी प्राप्ती के लिए गन्ने, धनवृद्धि के लिए शहद एवं घी, मोक्ष के लिए तीर्थ के जल, बीमारी से मुक्ति के लिए इत्र मिले जल से अभिषेक करना चाहिए।</p>
<p><strong>ऐसे करें अभिषेक की तैयारी: </strong>कोरोना संक्रमण को देखते हुए वर्तमान में घर रुद्राभिषेक करना हितकर होगा। इसके लिए शिवलिंग के अभिषेक से पहले इन वस्तुओं को अपने पास रख ले। इसमें गाय का घी, चंदन, पान, धूप, फल, गंध, बिल्वपत्र, कपूर, मिठाई, फल, शहद, दही, ताजा दूध, मेवा, गुलाबजल, पंचामृत, गन्ने का रस, नारियल, सुपारी आदि पूजा के स्थान पर रख ले। इसके साथ जो अन्य सामग्री आप महादेव को अर्पित करना चाहते है वह भी रख ले। इसके बाद मिट्टी का शिवलिंग बना ले। इसके बाद सभी देवी-देवताओं को आमंत्रित करे। शुरुआत भगवान गणेश से करते हुए माता पार्वती, नौ ग्रह, माता लक्षमी, धरती माता, ब्रह्मदेव, अग्निदेव, सूर्यदेव, गंगा माता को पूजा में आमंत्रित करे। सभी देवताओं को रोली, अक्षत, फूल चढ़ाकर शिवलिंग की पूजा करें।</p>
<p>&nbsp;</p>
]]></content:encoded>
					
		
		
			</item>
		<item>
		<title>गुरुवार व्रत कैसे करें, जानिए पूजा विधि, कथा-आरती एवं फल</title>
		<link>https://livehalchal.com/%e0%a4%97%e0%a5%81%e0%a4%b0%e0%a5%81%e0%a4%b5%e0%a4%be%e0%a4%b0-%e0%a4%b5%e0%a5%8d%e0%a4%b0%e0%a4%a4-%e0%a4%95%e0%a5%88%e0%a4%b8%e0%a5%87-%e0%a4%95%e0%a4%b0%e0%a5%87%e0%a4%82-%e0%a4%9c%e0%a4%be/380491</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Alpana Vaish]]></dc:creator>
		<pubDate>Thu, 08 Oct 2020 07:23:46 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[अध्यात्म]]></category>
		<category><![CDATA[धर्म]]></category>
		<category><![CDATA[कथा-आरती एवं फल]]></category>
		<category><![CDATA[गुरुवार व्रत कैसे करें]]></category>
		<category><![CDATA[जानिए पूजा विधि]]></category>
		<guid isPermaLink="false">http://www.livehalchal.com/?p=380491</guid>

					<description><![CDATA[<img width="605" height="456" src="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2020/10/guruvar.png" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" loading="lazy" srcset="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2020/10/guruvar.png 605w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2020/10/guruvar-300x226.png 300w" sizes="auto, (max-width: 605px) 100vw, 605px" />गुरुवार व्रत का महत्व : गुरुवार (बृहस्पतिवार)का व्रत बड़ा ही फलदायी माना जाता है। गुरुवार के दिन श्री हरि विष्णुजी की पूजा का विधान है। कई लोग बृहस्पतिदेव और केले के पेड़ की भी पूजा करते हैं। बृहस्पतिदेव को बुद्धि का कारक माना जाता है। केले के पेड़ को हिन्दू धर्मानुसार बेहद पवित्र माना जाता है। बृहस्पतिवार &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<img width="605" height="456" src="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2020/10/guruvar.png" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" loading="lazy" srcset="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2020/10/guruvar.png 605w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2020/10/guruvar-300x226.png 300w" sizes="auto, (max-width: 605px) 100vw, 605px" /><p><strong>गुरुवार व्रत का महत्व :</strong></p>
<p>गुरुवार (बृहस्पतिवार)का व्रत बड़ा ही फलदायी माना जाता है। गुरुवार के दिन श्री हरि विष्णुजी की पूजा का विधान है। कई लोग बृहस्पतिदेव और केले के पेड़ की भी पूजा करते हैं। बृहस्पतिदेव को बुद्धि का कारक माना जाता है। केले के पेड़ को हिन्दू धर्मानुसार बेहद पवित्र माना जाता है। बृहस्पतिवार के दिन भगवान विष्णु की पूजा होती है।</p>
<p><img loading="lazy" decoding="async" class="size-full wp-image-380492 aligncenter" src="http://www.livehalchal.com/wp-content/uploads/2020/10/guruvar.png" alt="" width="605" height="456" srcset="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2020/10/guruvar.png 605w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2020/10/guruvar-300x226.png 300w" sizes="auto, (max-width: 605px) 100vw, 605px" /></p>
<div><strong>कैसे करें बृहस्पतिवार व्रत<br />
पूजन :<br />
</strong></div>
<div></div>
<div>अग्नि पुराण के अनुसार गुरुवार का व्रत अनुराधा नक्षत्र युक्त गुरुवार से आरंभ करके लगातार 7 गुरुवार करना चाहिए।</div>
<div></div>
<div>इस दिन प्रात: उठकर भगवान विष्णु का ध्यान कर व्रत का संकल्प लेना चाहिए।</div>
<div></div>
<div>बृहस्पतिदेव का ध्यान करना चाहिए।</div>
<div></div>
<div>इस दिन पीले वस्त्रों, पीले फलों का प्रयोग करना चाहिए।</div>
<div></div>
<div>इसके बाद फल, फूल, पीले वस्त्रों से भगवान बृहस्पति देव और विष्णुजी की पूजा करनी चाहिए।</div>
<div></div>
<div>पूजा के बाद कथा सुननी चाहिए।</div>
<div></div>
<div>प्रसाद के रूप में केले चढ़ाना शुभ माना जाता है लेकिन इन केलों को दान में ही दे देना चाहिए।</div>
<div></div>
<div>शाम के समय बृहस्पतिवार की कथा सुननी चाहिए और मान्यतानुसार इस दिन एक बार बिना नमक का पीला भोजन करना चाहिए।</div>
<div></div>
<div>भोजन में चने की दाल का भी प्रयोग किया जा सकता है।</div>
<div></div>
<div><strong>बृहस्पतिवार व्रत की पौराणिक व्रत कथा</strong></div>
<div></div>
<div>प्राचीन समय की बात है। एक नगर में एक बड़ा व्यापारी रहता था। वह जहाजों में माल लदवाकर दूसरे देशों में भेजा करता था। वह जिस प्रकार अधिक धन कमाता था उसी प्रकार जी खोलकर दान भी करता था, परंतु उसकी पत्नी अत्यंत कंजूस थी। वह किसी को एक दमड़ी भी नहीं देने देती थी।</div>
<div></div>
<div>एक बार सेठ जब दूसरे देश व्यापार करने गया तो पीछे से बृहस्पतिदेव ने साधु-वेश में उसकी पत्नी से भिक्षा मांगी। व्यापारी की पत्नी बृहस्पतिदेव से बोली हे साधु महाराज, मैं इस दान और पुण्य से तंग आ गई हूं। आप कोई ऐसा उपाय बताएं, जिससे मेरा सारा धन नष्ट हो जाए और मैं आराम से रह सकूं। मैं यह धन लुटता हुआ नहीं देख सकती।</div>
<div></div>
<div>बृहस्पतिदेव ने कहा, हे देवी, तुम बड़ी विचित्र हो, संतान और धन से कोई दुखी होता है। अगर अधिक धन है तो इसे शुभ कार्यों में लगाओ, कुंवारी कन्याओं का विवाह कराओ, विद्यालय और बाग-बगीचों का निर्माण कराओ। ऐसे पुण्य कार्य करने से तुम्हारा लोक-परलोक सार्थक हो सकता है, परन्तु साधु की इन बातों से व्यापारी की पत्नी को ख़ुशी नहीं हुई। उसने कहा- मुझे ऐसे धन की आवश्यकता नहीं है, जिसे मैं दान दूं।</div>
<div></div>
<div>तब बृहस्पतिदेव बोले &#8216;यदि तुम्हारी ऐसी इच्छा है तो तुम एक उपाय करना। सात बृहस्पतिवार घर को गोबर से लीपना, अपने केशों को पीली मिटटी से धोना, केशों को धोते समय स्नान करना, व्यापारी से हजामत बनाने को कहना, भोजन में मांस-मदिरा खाना, कपड़े अपने घर धोना। ऐसा करने से तुम्हारा सारा धन नष्ट हो जाएगा। इतना कहकर बृहस्पतिदेव अंतर्ध्यान हो गए।</div>
<div></div>
<div>व्यापारी की पत्नी ने बृहस्पति देव के कहे अनुसार सात बृहस्पतिवार वैसा ही करने का निश्चय किया। केवल तीन बृहस्पतिवार बीते थे कि उसी समस्त धन-संपत्ति नष्ट हो गई और वह परलोक सिधार गई। जब व्यापारी वापस आया तो उसने देखा कि उसका सब कुछ नष्ट हो चुका है। उस व्यापारी ने अपनी पुत्री को सांत्वना दी और दूसरे नगर में जाकर बस गया। वहां वह जंगल से लकड़ी काटकर लाता और शहर में बेचता। इस तरह वह अपना जीवन व्यतीत करने लगा।</div>
<div></div>
<div>एक दिन उसकी पुत्री ने दही खाने की इच्छा प्रकट की लेकिन व्यापारी के पास दही खरीदने के पैसे नहीं थे। वह अपनी पुत्री को आश्वासन देकर जंगल में लकड़ी काटने चला गया। वहां एक वृक्ष के नीचे बैठ अपनी पूर्व दशा पर विचार कर रोने लगा। उस दिन बृहस्पतिवार था। तभी वहां बृहस्पति देव साधु के रूप में सेठ के पास आए और बोले &#8216;हे मनुष्य, तू इस जंगल में किस चिंता में बैठा है?&#8217;</div>
<div></div>
<div>तब व्यापारी बोला &#8216;हे महाराज, आप सब कुछ जानते हैं।&#8217; इतना कहकर व्यापारी अपनी कहानी सुनाकर रो पड़ा। बृहस्पति देव बोले &#8216;देखो बेटा, तुम्हारी पत्नी ने बृहस्पति देव का अपमान किया था इसी कारण तुम्हारा यह हाल हुआ है लेकिन अब तुम किसी प्रकार की चिंता मत करो। तुम गुरुवार के दिन बृहस्पति देव का पाठ करो। दो पैसे के चने और गुड़ को लेकर जल के लोटे में शक्कर डालकर वह अमृत और प्रसाद अपने परिवार के सदस्यों और कथा सुनने वालों में बांट दो। स्वयं भी प्रसाद और चरणामृत लो। भगवान तुम्हारा अवश्य कल्याण करेंगे।&#8217;</div>
<div></div>
<div>साधु की बात सुनकर व्यापारी बोला &#8216;महाराज। मुझे तो इतना भी नहीं बचता कि मैं अपनी पुत्री को दही लाकर दे सकूं।&#8217; इस पर साधु जी बोले &#8216;तुम लकड़ियां शहर में बेचने जाना, तुम्हें लकड़ियों के दाम पहले से चौगुने मिलेंगे, जिससे तुम्हारे सारे कार्य सिद्ध हो जाएंगे।&#8217;</div>
<div></div>
<div>उसने लकड़ियां काटीं और शहर में बेचने के लिए चल पड़ा। उसकी लकड़ियां अच्छे दाम में बिक गई जिससे उसने अपनी पुत्री के लिए दही लिया और गुरुवार की कथा हेतु चना, गुड़ लेकर कथा की और प्रसाद बांटकर स्वयं भी खाया। उसी दिन से उसकी सभी कठिनाइयां दूर होने लगीं, परंतु अगले बृहस्पतिवार को वह कथा करना भूल गया।</div>
<div></div>
<div>अगले दिन वहां के राजा ने एक बड़े यज्ञ का आयोजन कर पूरे नगर के लोगों के लिए भोज का आयोजन किया। राजा की आज्ञा अनुसार पूरा नगर राजा के महल में भोज करने गया। लेकिन व्यापारी व उसकी पुत्री तनिक विलंब से पहुंचे, अत: उन दोनों को राजा ने महल में ले जाकर भोजन कराया। जब वे दोनों लौटकर आए तब रानी ने देखा कि उसका खूंटी पर टंगा हार गायब है।</div>
<div></div>
<div>रानी को व्यापारी और उसकी पुत्री पर संदेह हुआ कि उसका हार उन दोनों ने ही चुराया है। राजा की आज्ञा से उन दोनों को कारावास की कोठरी में कैद कर दिया गया। कैद में पड़कर दोनों अत्यंत दुखी हुए। वहां उन्होंने बृहस्पति देवता का स्मरण किया। बृहस्पति देव ने प्रकट होकर व्यापारी को उसकी भूल का आभास कराया और उन्हें सलाह दी कि गुरुवार के दिन कैदखाने के दरवाजे पर तुम्हें दो पैसे मिलेंगे उनसे तुम चने और मुनक्का मंगवाकर विधिपूर्वक बृहस्पति देवता का पूजन करना। तुम्हारे सब दुख दूर हो जाएंगे।</div>
<div></div>
<div>बृहस्पतिवार को कैद खाने के द्वार पर उन्हें दो पैसे मिले। बाहर सड़क पर एक स्त्री जा रही थी। व्यापारी ने उसे बुलाकार गुड़ और चने लाने को कहा। इस पर वह स्त्री बोली &#8216;मैं अपनी बहू के लिए गहने लेने जा रही हूं, मेरे पास समय नहीं है।&#8217; इतना कहकर वह चली गई। थोड़ी देर बाद वहां से एक और स्त्री निकली, व्यापारी ने उसे बुलाकर कहा कि हे बहन मुझे बृहस्पतिवार की कथा करनी है। तुम मुझे दो पैसे का गुड़-चना ला दो।</div>
<div></div>
<div>बृहस्पति देव का नाम सुनकर वह स्त्री बोली &#8216;भाई, मैं तुम्हें अभी गुड़-चना लाकर देती हूं। मेरा इकलौता पुत्र मर गया है, मैं उसके लिए कफन लेने जा रही थी लेकिन मैं पहले तुम्हारा काम करूंगी, उसके बाद अपने पुत्र के लिए कफन लाऊंगी।&#8217;</div>
<div></div>
<div>वह स्त्री बाजार से व्यापारी के लिए गुड़-चना ले आई और स्वयं भी बृहस्पति देव की कथा सुनी। कथा के समाप्त होने पर वह स्त्री कफन लेकर अपने घर गई। घर पर लोग उसके पुत्र की लाश को &#8216;राम नाम सत्य है&#8217; कहते हुए श्मशान ले जाने की तैयारी कर रहे थे। स्त्री बोली &#8216;मुझे अपने लड़के का मुख देख लेने दो।&#8217; अपने पुत्र का मुख देखकर उस स्त्री ने उसके मुंह में प्रसाद और चरणामृत डाला। प्रसाद और चरणामृत के प्रभाव से वह पुन: जीवित हो गया।</div>
<div></div>
<div>पहली स्त्री जिसने बृहस्पति देव का निरादर किया था, वह जब अपने पुत्र के विवाह हेतु पुत्र वधू के लिए गहने लेकर लौटी और जैसे ही उसका पुत्र घोड़ी पर बैठकर निकला वैसे ही घोड़ी ने ऐसी उछाल मारी कि वह घोड़ी से गिरकर मर गया। यह देख स्त्री रो-रोकर बृहस्पति देव से क्षमा याचना करने लगी।</div>
<div></div>
<div>उस स्त्री की याचना से बृहस्पति देव साधु वेश में वहां पहुंचकर कहने लगे &#8216;देवी। तुम्हें अधिक विलाप करने की आवश्यकता नहीं है। यह बृहस्पति देव का अनादार करने के कारण हुआ है। तुम वापस जाकर मेरे भक्त से क्षमा मांगकर कथा सुनो, तब ही तुम्हारी मनोकामना पूर्ण होगी।&#8217;</div>
<div></div>
<div>जेल में जाकर उस स्त्री ने व्यापारी से माफी मांगी और कथा सुनी। कथा के उपरांत वह प्रसाद और चरणामृत लेकर अपने घर वापस गई। घर आकर उसने चरणामृत अपने मृत पुत्र के मुख में डाला। चरणामृत के प्रभाव से उसका पुत्र भी जीवित हो उठा। उसी रात बृहस्पति देव राजा के सपने में आए और बोले &#8216;हे राजन। तूने जिस व्यापारी और उसके पुत्री को जेल में कैद कर रखा है वह बिलकुल निर्दोष हैं। तुम्हारी रानी का हार वहीं खूंटी पर टंगा है।&#8217;</div>
<div></div>
<div>दिन निकला तो राजा रानी ने हार खूंटी पर लटका हुआ देखा। राजा ने उस व्यापारी और उसकी पुत्री को रिहा कर दिया और उन्हें आधा राज्य देकर उसकी पुत्री का विवाह उच्च कुल में करवाकर दहेज़ में हीरे-जवाहरात दिए।</div>
<div></div>
<div><strong>गुरुवार व्रत आरती<br />
</strong></div>
<div></div>
<div>ॐ जय बृहस्पति देवा</div>
<div></div>
<div>ॐ जय बृहस्पति देवा, जय बृहस्पति देवा।</div>
<div>छिन-छिन भोग लगाऊं, कदली फल मेवा।।</div>
<div>ॐ जय बृहस्पति देवा।।</div>
<div></div>
<div></div>
<div>तुम पूर्ण परमात्मा, तुम अंतर्यामी।</div>
<div>जगतपिता जगदीश्वर, तुम सबके स्वामी।।</div>
<div>ॐ जय बृहस्पति देवा।।</div>
<div></div>
<div>चरणामृत निज निर्मल, सब पातक हर्ता।</div>
<div>सकल मनोरथ दायक, कृपा करो भर्ता।।</div>
<div>ॐ जय बृहस्पति देवा।।</div>
<div></div>
<div>तन, मन, धन अर्पण कर, जो जन शरण पड़े।</div>
<div>प्रभु प्रकट तब होकर, आकर द्वार खड़े।।</div>
<div>ॐ जय बृहस्पति देवा।।</div>
<div></div>
<div>दीनदयाल दयानिधि, भक्तन हितकारी।</div>
<div>पाप दोष सब हर्ता, भव बंधन हारी।।</div>
<div>ॐ जय बृहस्पति देवा।।</div>
<div></div>
<div>सकल मनोरथ दायक, सब संशय तारो।</div>
<div>विषय विकार मिटाओ, संतन सुखकारी।।</div>
<div>ॐ जय बृहस्पति देवा।।</div>
<div></div>
<div>जो कोई आरती तेरी प्रेम सहित गावे।</div>
<div>जेष्टानंद बंद सो-सो निश्चय पावे।।</div>
<div>ॐ जय बृहस्पति देवा।।</div>
<div></div>
<div><strong>व्रत का फल :<br />
</strong></div>
<div></div>
<div>यह व्रत अत्यंत फलदायी है। गुरुवार को व्रत-उपवास करके यह कथा पढ़ने से बृहस्पति देवता प्रसन्न होते हैं। अनुराधा नक्षत्र युक्त गुरुवार से व्रत आरंभ करके 7 गुरुवार उपवास करने से बृहस्पति ग्रह की हर पीड़ा से मुक्ति मिलती है। गुरुवार का व्रत पूरे श्रद्धाभाव से करने पर व्यक्ति को गुरु ग्रह का दोष खत्म हो जाता है तथा गुरु कृपा प्राप्त होती है। इन दिन व्रत करने से व्यक्ति को सारे सुखों की प्राप्ति होती है।</div>
<div id="M598980ScriptRootC934507_1513b">
<div id="MarketGidComposite934507_1513b">
<div class="mgbox">
<div class="mgheader"></div>
</div>
</div>
</div>
<div class="ad_horizontal wbx">
<div id="div-gpt-ad-1593067077351-0" data-google-query-id="COGEhuq5pOwCFdZ_fQodRy4KGw"></div>
</div>
]]></content:encoded>
					
		
		
			</item>
		<item>
		<title>आज है विश्वकर्मा जयंती, जानिए पूजा विधि</title>
		<link>https://livehalchal.com/%e0%a4%86%e0%a4%9c-%e0%a4%b9%e0%a5%88-%e0%a4%b5%e0%a4%bf%e0%a4%b6%e0%a5%8d%e0%a4%b5%e0%a4%95%e0%a4%b0%e0%a5%8d%e0%a4%ae%e0%a4%be-%e0%a4%9c%e0%a4%af%e0%a4%82%e0%a4%a4%e0%a5%80-%e0%a4%9c%e0%a4%be/373714</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Alpana Vaish]]></dc:creator>
		<pubDate>Thu, 17 Sep 2020 04:37:38 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[अध्यात्म]]></category>
		<category><![CDATA[धर्म]]></category>
		<category><![CDATA[आज है विश्वकर्मा जयंती]]></category>
		<category><![CDATA[जानिए पूजा विधि]]></category>
		<guid isPermaLink="false">http://www.livehalchal.com/?p=373714</guid>

					<description><![CDATA[<img width="618" height="380" src="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2020/09/wwrwre.jpg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" loading="lazy" srcset="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2020/09/wwrwre.jpg 650w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2020/09/wwrwre-300x185.jpg 300w" sizes="auto, (max-width: 618px) 100vw, 618px" />आज भगवान विश्वकर्मा जयंती है। आप सभी को बता दें कि भगवान विश्वकर्मा ने ही हमारे देवी-देवताओं के लिए दिव्य अस्त्र-शस्त्र, भवन, और मंदिरों आदि का निर्माण किया था। ऐसा कहते हैं कि भगवान ब्रह्मा जब सृष्टि की रचना कर रहे थे, तो विश्वकर्मा जी ने उनकी सहायता की थी। अब ऐसे में आज हम &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<img width="618" height="380" src="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2020/09/wwrwre.jpg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" loading="lazy" srcset="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2020/09/wwrwre.jpg 650w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2020/09/wwrwre-300x185.jpg 300w" sizes="auto, (max-width: 618px) 100vw, 618px" /><p>आज भगवान विश्वकर्मा जयंती है। आप सभी को बता दें कि भगवान विश्वकर्मा ने ही हमारे देवी-देवताओं के लिए दिव्य अस्त्र-शस्त्र, भवन, और मंदिरों आदि का निर्माण किया था। ऐसा कहते हैं कि भगवान ब्रह्मा जब सृष्टि की रचना कर रहे थे, तो विश्वकर्मा जी ने उनकी सहायता की थी। अब ऐसे में आज हम आपको बताने जा रहे हैं आज कैसे करें पूजन। विष्णु पुराण के मुताबिक धर्म की वस्तु नामक स्त्री के गर्भ से वास्तुदेव पैदा हुए थे। जी दरअसल वास्तुदेव की शादी अंगिरसी से हुई और उनकी पत्नी की कोख से भगवान विश्वकर्मा का जन्म हुआ। भगवान विश्वकर्मा हिंदू धर्म में शिल्पशास्त्र के प्रवर्तक है।</p>
<p><img loading="lazy" decoding="async" class="size-full wp-image-373719 aligncenter" src="http://www.livehalchal.com/wp-content/uploads/2020/09/wwrwre.jpg" alt="" width="650" height="400" srcset="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2020/09/wwrwre.jpg 650w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2020/09/wwrwre-300x185.jpg 300w" sizes="auto, (max-width: 650px) 100vw, 650px" /></p>
<p>वास्तुकला के महान आचार्य बन गए। आज प्रातःकाल स्नान-दान करने के बाद स्वच्छ अथवा नये कपड़े पहनकर भगवान विश्वकर्मा का ध्यान करना चाहिए। आज के दिन भगवान विश्वकर्मा की पूजा और यज्ञ पूरे विधि-विधान से करते हैं। जी दरअसल कहा जाता है यह पूजा और यज्ञ विवाहित दम्पति को ही करना चाहिए। जी दरअसल जिस स्थान पर पूजा एवं यज्ञाहुति होनी है, उसके ठीक सामने जातक को पत्नी के साथ बैठना चाहिए। उसके बाद श्रीहरि का ध्यान करें और विष्णु जी एवं विश्वकर्मा जी की प्रतिमा पर रोली का तिलक लगाने के बाद अक्षत एवं पुष्प अर्पित करें। इसके बाद इस मंत्र का जाप करते हुए भगवान को जल र्पित करें।</p>
<p><strong>ओम आधार शक्तपे नम: और ओम् कूमयि नम:; ओम् अनन्तम नम:, पृथिव्यै नम:</strong></p>
<p>अब पूजा स्थल के चारों ओर जल का छिड़काव करें और फिर चारों दिशाओं में पीली सरसों छिड़कें। इसके बाद स्वयं को एवं पत्नी को रक्षासूत्र बांधें और भगवान विश्वकर्मा का ध्यान करें। अब यज्ञाहुति करने के बाद विश्वकर्मा जी की आरती उतारें। आरती करने के बाद अगर घर में कोई मशीनरी की वस्तु हो तो उस पर रोली एवं अक्षत का टीका करें, पुष्प चढ़ाकर रक्षासूत्र बांधें। अब आपकी पूजा सम्पन्न हो गई आप सभी को प्रसाद बाँट दे।</p>
]]></content:encoded>
					
		
		
			</item>
		<item>
		<title>आज है सावन का पहला सोमवार, जानिए पूजा विधि</title>
		<link>https://livehalchal.com/%e0%a4%86%e0%a4%9c-%e0%a4%b9%e0%a5%88-%e0%a4%b8%e0%a4%be%e0%a4%b5%e0%a4%a8-%e0%a4%95%e0%a4%be-%e0%a4%aa%e0%a4%b9%e0%a4%b2%e0%a4%be-%e0%a4%b8%e0%a5%8b%e0%a4%ae%e0%a4%b5%e0%a4%be%e0%a4%b0-%e0%a4%9c/348502</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Alpana Vaish]]></dc:creator>
		<pubDate>Mon, 06 Jul 2020 07:54:46 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[अध्यात्म]]></category>
		<category><![CDATA[धर्म]]></category>
		<category><![CDATA[आज है सावन का पहला सोमवार]]></category>
		<category><![CDATA[जानिए पूजा विधि]]></category>
		<guid isPermaLink="false">http://www.livehalchal.com/?p=348502</guid>

					<description><![CDATA[<img width="618" height="325" src="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2020/07/dxfdf.jpg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" loading="lazy" srcset="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2020/07/dxfdf.jpg 952w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2020/07/dxfdf-300x158.jpg 300w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2020/07/dxfdf-768x403.jpg 768w" sizes="auto, (max-width: 618px) 100vw, 618px" />आप सभी जानते ही होंगे कि हिंदू धर्म के लोगों के लिए सावन का महीना विशेष माना जाता है. वहीं इस पूरे महीने भगवान शिव की विशेष पूजा अर्चना की जाती है. उन्हें खुश करने के लिए लाखो जतन किये जाते हैं. आप जानते ही होंगे सावन का महीना भगवान शिव का पसंदीदा माना गया &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<img width="618" height="325" src="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2020/07/dxfdf.jpg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" loading="lazy" srcset="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2020/07/dxfdf.jpg 952w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2020/07/dxfdf-300x158.jpg 300w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2020/07/dxfdf-768x403.jpg 768w" sizes="auto, (max-width: 618px) 100vw, 618px" /><p>आप सभी जानते ही होंगे कि हिंदू धर्म के लोगों के लिए सावन का महीना विशेष माना जाता है. वहीं इस पूरे महीने भगवान शिव की विशेष पूजा अर्चना की जाती है. उन्हें खुश करने के लिए लाखो जतन किये जाते हैं. आप जानते ही होंगे सावन का महीना भगवान शिव का पसंदीदा माना गया है इसी कारण इसे महत्वपूर्ण माना गया है. वैसे सावन के सभी सोमवार भगवान भोलेनाथ को समर्पित है. अब आज हम आपको बताते हैं सावन सोमवार व्रत की तारीख.</p>
<p><img loading="lazy" decoding="async" class="size-full wp-image-348503 aligncenter" src="http://www.livehalchal.com/wp-content/uploads/2020/07/dxfdf.jpg" alt="" width="952" height="500" srcset="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2020/07/dxfdf.jpg 952w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2020/07/dxfdf-300x158.jpg 300w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2020/07/dxfdf-768x403.jpg 768w" sizes="auto, (max-width: 952px) 100vw, 952px" /></p>
<p><strong>सावन सोमवार व्रत की तारीख &#8211;</strong><br />
-पहला सावन सोमवार व्रत 06 जुलाई 2020<br />
-दूसरा सावन सोमवार व्रत 13 जुलाई 2020<br />
-तीसरा सावन सोमवार व्रत 20 जुलाई 2020<br />
-चौथा सावन सोमवार व्रत 27 जुलाई 2020<br />
-पांचवां और अंतिम सावन सोमवार व्रत 03 अगस्त 2020</p>
<p><strong>सावन सोमवार व्रत विधि: </strong>आप सभी को बता दें कि इस दिन ब्रह्म मुहूर्त में उठेकर पूरे घर की सफाई कर स्नान आदि कार्यों से निवृत्त हो जाना चाहिए. उसके बाद पवित्र गंगाजल पूरे घर में छिड़कें और अब घर के पूजा स्थल को साफ कर या किसी पवित्र स्थान पर भगवान शिव की मूर्ति स्थापित करें. अब यह सब करने के बाद इस मंत्र से संकल्प लें- &#8221;मम क्षेमस्थैर्यविजयारोग्यैश्वर्याभिवृद्धयर्थं सोमव्रतं करिष्ये&#8221;</p>
<p><strong>इसके पश्चात ध्यान करें- </strong>‘ध्यायेन्नित्यंमहेशं रजतगिरिनिभं चारुचंद्रावतंसं रत्नाकल्पोज्ज्वलांग परशुमृगवराभीतिहस्तं प्रसन्नम्‌.<br />
पद्मासीनं समंतात्स्तुतममरगणैर्व्याघ्रकृत्तिं वसानं विश्वाद्यं विश्ववंद्यं निखिलभयहरं पंचवक्त्रं त्रिनेत्रम्‌॥ शिव और माता पार्वती का षोडशोपचार पूजन करें. अब इसके बाद व्रत कथा सुनें और शिव जी की आरती उतारें. अब अंत में प्रसाद वितरण करें. अब आप फलाहार करें.</p>
]]></content:encoded>
					
		
		
			</item>
	</channel>
</rss>
