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	<title>जानकी जयंती &#8211; Live Halchal</title>
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	<lastBuildDate>Mon, 09 Feb 2026 09:20:38 +0000</lastBuildDate>
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	<title>जानकी जयंती &#8211; Live Halchal</title>
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		<title>जानकी जयंती आज, इस विधि से करें पूजा, मिलेगा शुभ फल</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Live Halchal Web_Wing]]></dc:creator>
		<pubDate>Mon, 09 Feb 2026 09:20:37 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[अध्यात्म]]></category>
		<category><![CDATA[धर्म]]></category>
		<category><![CDATA[जानकी जयंती]]></category>
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					<description><![CDATA[हिंदू पंचांग के अनुसार, फाल्गुन महीने के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को जानकी जयंती मनाई जाती है। इस साल यह 9 फरवरी यानी आज के दिन मनाई जा रही है। मान्यता है कि इसी दिन माता सीता का प्राकट्य हुआ था। सुहागिन महिलाओं के लिए यह दिन अखंड सौभाग्य की प्राप्ति का प्रतीक है, &#8230;]]></description>
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<p>हिंदू पंचांग के अनुसार, फाल्गुन महीने के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को जानकी जयंती मनाई जाती है। इस साल यह 9 फरवरी यानी आज के दिन मनाई जा रही है। मान्यता है कि इसी दिन माता सीता का प्राकट्य हुआ था। सुहागिन महिलाओं के लिए यह दिन अखंड सौभाग्य की प्राप्ति का प्रतीक है, वहीं कन्याओं के लिए मनचाहा वर पाने का पावन अवसर। आइए जानते हैं इस शुभ दिन की सरल पूजा विधि, भोग और मंत्र, जो इस प्रकार हैं –</p>



<p><strong>पूजन विधि (Janaki Jayanti 2026 Pujan Vidhi)<br></strong>सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और हाथ में जल लेकर भगवान राम व माता सीता का ध्यान करते हुए व्रत का संकल्प लें।<br>पूजा घर या किसी साफ स्थान पर गंगाजल छिड़कें।<br>वहां एक वेदी पर लाल या पीला कपड़ा बिछाकर भगवान राम, माता सीता की प्रतिमा स्थापित करें।<br>गाय के घी का दीपक और धूप जलाएं।<br>भगवान राम को पीले फूल और माता सीता को लाल फूल अर्पित करें।<br>गोपी चंदन और सिंदूर का तिलक लगाएं।<br>पूजा के दौरान रामायण के ‘राम-सीता विवाह प्रसंग’ का पाठ करें या सुनें।<br>अंत में आरती करें।<br>पूजा में हुई सभी गलती के लिए माफी मांगे।</p>



<p><strong>लगाएं ये भोग (Janaki Jayanti 2026 Bhog List)<br></strong>साधक मां सीता को कंद-मूल, मौसमी फल और घर में बनी मिठाई व केसरिया खीर का भी भोग लगा सकते हैं।</p>



<p><strong>करें इन मंत्रों का जप (Janaki Jayanti 2026 Puja Mantra)<br></strong>ॐ सीता रामाय नमः॥<br>श्री राम जय राम जय जय राम॥<br>राम रामायेति रामेति रमे रामे मनोरमे।<br>सहस्रनाम तत्तुल्यं रामनाम वरानने॥</p>



<p><strong>।।भगवान राम की आरती।। (Shri Ramchandra Ji Aarti)<br></strong>श्री राम चंद्र कृपालु भजमन हरण भव भय दारुणम्।</p>



<p>नवकंज लोचन कंज मुखकर, कंज पद कन्जारुणम्।।</p>



<p>कंदर्प अगणित अमित छवी नव नील नीरज सुन्दरम्।</p>



<p>पट्पीत मानहु तडित रूचि शुचि नौमी जनक सुतावरम्।।</p>



<p>भजु दीन बंधु दिनेश दानव दैत्य वंश निकंदनम्।</p>



<p>रघुनंद आनंद कंद कौशल चंद दशरथ नन्दनम्।।</p>



<p>सिर मुकुट कुण्डल तिलक चारु उदारू अंग विभूषणं।</p>



<p>आजानु भुज शर चाप धर संग्राम जित खर-धूषणं।।</p>



<p>इति वदति तुलसीदास शंकर शेष मुनि मन रंजनम्।</p>



<p>मम ह्रदय कुंज निवास कुरु कामादी खल दल गंजनम्।।</p>



<p>मनु जाहिं राचेऊ मिलिहि सो बरु सहज सुंदर सावरों।</p>



<p>करुना निधान सुजान सिलू सनेहू जानत रावरो।।</p>



<p>एही भांती गौरी असीस सुनी सिय सहित हिय हरषी अली।</p>



<p>तुलसी भवानी पूजि पूनी पूनी मुदित मन मंदिर चली।।</p>



<p>दोहा- जानि गौरी अनुकूल सिय हिय हरषु न जाइ कहि।</p>



<p>मंजुल मंगल मूल वाम अंग फरकन लगे।।</p>



<p><strong>।।मां सीता आरती।। (Sita Mata Aarti)<br></strong>आरती श्री जनक दुलारी की ।</p>



<p>सीता जी रघुवर प्यारी की ॥</p>



<p>जगत जननी जग की विस्तारिणी,</p>



<p>नित्य सत्य साकेत विहारिणी,</p>



<p>परम दयामयी दिनोधारिणी,</p>



<p>सीता मैया भक्तन हितकारी की ॥</p>



<p>आरती श्री जनक दुलारी की ।</p>



<p>सीता जी रघुवर प्यारी की ॥</p>



<p>सती श्रोमणि पति हित कारिणी,</p>



<p>पति सेवा वित्त वन वन चारिणी,</p>



<p>पति हित पति वियोग स्वीकारिणी,</p>



<p>त्याग धर्म मूर्ति धरी की ॥</p>



<p>आरती श्री जनक दुलारी की ।</p>



<p>सीता जी रघुवर प्यारी की ॥</p>



<p>विमल कीर्ति सब लोकन छाई,</p>



<p>नाम लेत पवन मति आई,</p>



<p>सुमीरात काटत कष्ट दुख दाई,</p>



<p>शरणागत जन भय हरी की ॥</p>



<p>आरती श्री जनक दुलारी की ।</p>



<p>सीता जी रघुवर प्यारी की ॥</p>
]]></content:encoded>
					
		
		
			</item>
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		<title>जानकी जयंती पर करें राम चालीसा का पाठ, वैवाहिक जीवन होगा सुखी</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Live Halchal Web_Wing]]></dc:creator>
		<pubDate>Mon, 09 Feb 2026 09:15:21 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[अध्यात्म]]></category>
		<category><![CDATA[धर्म]]></category>
		<category><![CDATA[जानकी जयंती]]></category>
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					<description><![CDATA[हिंदू धर्म में जानकी जयंती यानी सीता अष्टमी का विशेष महत्व है। फाल्गुन महीने के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को माता सीता के प्राकट्य दिवस के रूप में मनाया जाता है। इस साल यह पावन तिथि 9 फरवरी यानी आज के दिन मनाई जा रही है। माता सीता को त्याग, समर्पण और अटूट प्रेम &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[
<p>हिंदू धर्म में जानकी जयंती यानी सीता अष्टमी का विशेष महत्व है। फाल्गुन महीने के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को माता सीता के प्राकट्य दिवस के रूप में मनाया जाता है। इस साल यह पावन तिथि 9 फरवरी यानी आज के दिन मनाई जा रही है। माता सीता को त्याग, समर्पण और अटूट प्रेम का प्रतीक माना जाता है। अक्सर लोग सोचते हैं कि जानकी जयंती पर केवल माता सीता की स्तुति काफी है, लेकिन शास्त्रों के अनुसार, जहां राम का नाम होता है, वहीं मां सीता का वास होता है।</p>



<p>इसलिए इस दिन श्रीराम चालीसा का पाठ करना आपके वैवाहिक जीवन में सुख, शांति और मधुरता लाने का एक अचूक उपाय माना गया है, तो आइए श्रीराम चालीसा का पाठ करते हैं, जो इस प्रकार हैं –</p>



<p><strong>।।श्री राम चालीसा।। (Shri Ram Chalisa lyrics)<br></strong>श्री रघुबीर भक्त हितकारी। सुनि लीजै प्रभु अरज हमारी।</p>



<p>निशि दिन ध्यान धरै जो कोई। ता सम भक्त और नहीं होई।।</p>



<p>ध्यान धरें शिवजी मन मांही। ब्रह्मा, इन्द्र पार नहीं पाहीं।।</p>



<p>दूत तुम्हार वीर हनुमाना। जासु प्रभाव तिहुं पुर जाना।।</p>



<p>जय, जय, जय रघुनाथ कृपाला। सदा करो संतन प्रतिपाला।।</p>



<p>तुव भुजदण्ड प्रचण्ड कृपाला। रावण मारि सुरन प्रतिपाला।।</p>



<p>तुम अनाथ के नाथ गोसाईं। दीनन के हो सदा सहाई।।</p>



<p>ब्रह्मादिक तव पार न पावैं। सदा ईश तुम्हरो यश गावैं।।</p>



<p>चारिउ भेद भरत हैं साखी। तुम भक्तन की लज्जा राखी।।</p>



<p>गुण गावत शारद मन माहीं। सुरपति ताको पार न पाहिं।।</p>



<p>नाम तुम्हार लेत जो कोई। ता सम धन्य और नहीं होई।।</p>



<p>राम नाम है अपरम्पारा। चारिहु वेदन जाहि पुकारा।।</p>



<p>गणपति नाम तुम्हारो लीन्हो। तिनको प्रथम पूज्य तुम कीन्हो।।</p>



<p>शेष रटत नित नाम तुम्हारा। महि को भार शीश पर धारा।।</p>



<p>फूल समान रहत सो भारा। पावत कोऊ न तुम्हरो पारा।।</p>



<p>भरत नाम तुम्हरो उर धारो। तासों कबहूं न रण में हारो।।</p>



<p>नाम शत्रुहन हृदय प्रकाशा। सुमिरत होत शत्रु कर नाशा।।</p>



<p>लखन तुम्हारे आज्ञाकारी। सदा करत सन्तन रखवारी।।</p>



<p>ताते रण जीते नहिं कोई। युद्ध जुरे यमहूं किन होई।।</p>



<p>महालक्ष्मी धर अवतारा। सब विधि करत पाप को छारा।।</p>



<p>सीता राम पुनीता गायो। भुवनेश्वरी प्रभाव दिखायो।।</p>



<p>घट सों प्रकट भई सो आई। जाको देखत चन्द्र लजाई।।</p>



<p>जो तुम्हरे नित पांव पलोटत। नवो निद्धि चरणन में लोटत।।</p>



<p>सिद्धि अठारह मंगलकारी। सो तुम पर जावै बलिहारी।।</p>



<p>औरहु जो अनेक प्रभुताई। सो सीतापति तुमहिं बनाई।।</p>



<p>इच्छा ते कोटिन संसारा। रचत न लागत पल की बारा।।</p>



<p>जो तुम्हरे चरणन चित लावै। ताकी मुक्ति अवसि हो जावै।।</p>



<p>सुनहु राम तुम तात हमारे। तुमहिं भरत कुल पूज्य प्रचारे।।</p>



<p>तुमहिं देव कुल देव हमारे। तुम गुरु देव प्राण के प्यारे।।</p>



<p>जो कुछ हो सो तुमहिं राजा। जय जय जय प्रभु राखो लाजा।।</p>



<p>राम आत्मा पोषण हारे। जय जय जय दशरथ के प्यारे।।</p>



<p>जय जय जय प्रभु ज्योति स्वरुपा। नर्गुण ब्रहृ अखण्ड अनूपा।।</p>



<p>सत्य सत्य जय सत्यव्रत स्वामी। सत्य सनातन अन्तर्यामी।।</p>



<p>सत्य भजन तुम्हरो जो गावै। सो निश्चय चारों फल पावै।।</p>



<p>सत्य शपथ गौरीपति कीन्हीं। तुमने भक्तिहिं सब सिधि दीन्हीं।।</p>



<p>ज्ञान हृदय दो ज्ञान स्वरुपा। नमो नमो जय जगपति भूपा।।</p>



<p>धन्य धन्य तुम धन्य प्रतापा। नाम तुम्हार हरत संतापा।।</p>



<p>सत्य शुद्ध देवन मुख गाया। बजी दुन्दुभी शंख बजाया।।</p>



<p>सत्य सत्य तुम सत्य सनातन। तुम ही हो हमरे तन-मन धन।।</p>



<p>याको पाठ करे जो कोई। ज्ञान प्रकट ताके उर होई।।</p>



<p>आवागमन मिटै तिहि केरा। सत्य वचन माने शिव मेरा।।</p>



<p>और आस मन में जो होई। मनवांछित फल पावे सोई।।</p>



<p>तीनहुं काल ध्यान जो ल्यावै। तुलसी दल अरु फूल चढ़ावै।।</p>



<p>साग पत्र सो भोग लगावै। सो नर सकल सिद्धता पावै।।</p>



<p>अन्त समय रघुबर पुर जाई। जहां जन्म हरि भक्त कहाई।।</p>



<p>श्री हरिदास कहै अरु गावै। सो बैकुण्ठ धाम को पावै।।</p>



<p><strong>॥दोहा॥</strong></p>



<p>सात दिवस जो नेम कर, पाठ करे चित लाय।</p>



<p>हरिदास हरि कृपा से, अवसि भक्ति को पाया।।</p>



<p>राम चालीसा जो पढ़े, राम चरण चित लाय।</p>



<p>जो इच्छा मन में करै, सकल सिद्ध हो जाय।।</p>
]]></content:encoded>
					
		
		
			</item>
		<item>
		<title>आज है जानकी जयंती, बन रहे कई मंगलकारी योग</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Live Halchal Web_Wing]]></dc:creator>
		<pubDate>Mon, 09 Feb 2026 04:41:41 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[अध्यात्म]]></category>
		<category><![CDATA[धर्म]]></category>
		<category><![CDATA[जानकी जयंती]]></category>
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					<description><![CDATA[Aaj ka Panchang 9 फरवरी 2026 के अनुसार, आज जानकी जयंती मनाई जा रही है। इस अवसर पर माता सीता की पूजा-अर्चना करने का विधान है ऐसे में आइए एस्ट्रोलॉजर आनंद सागर पाठक से जानते हैं आज की तिथि, शुभ-अशुभ योग, सूर्योदय, सूर्यास्त और राहुकाल का समय समेत आदि जानकारी। पंचांग के अनुसार, आज यानी &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[
<p>Aaj ka Panchang 9 फरवरी 2026 के अनुसार, आज जानकी जयंती मनाई जा रही है। इस अवसर पर माता सीता की पूजा-अर्चना करने का विधान है ऐसे में आइए एस्ट्रोलॉजर आनंद सागर पाठक से जानते हैं आज की तिथि, शुभ-अशुभ योग, सूर्योदय, सूर्यास्त और राहुकाल का समय समेत आदि जानकारी।</p>



<p>पंचांग के अनुसार, आज यानी 9 फरवरी को फाल्गुन माह के कृष्ण पक्ष अष्टमी तिथि है। इस तिथि पर जानकी जयन्ती, कालाष्टमी और मासिक कृष्ण जन्माष्टमी मनाई जाती है। इस दिन पूजा-अर्चना और दान करने का विशेष महत्व है। अष्टमी तिथि पर कई योग भी बन रहे हैं। ऐसे में आइए जानते हैं आज का पंचांग (Aaj ka Panchang 9 February 2026) के बारे में।</p>



<p>तिथि: कृष्ण अष्टमी<br>मास: फाल्गुन<br>दिन: सोमवार<br>संवत्: 2082</p>



<p>तिथि: कृष्ण अष्टमी – पूर्ण रात्रि तक<br>योग: वृद्धि – 10 फरवरी को रात्रि 12 बजकर 52 मिनट तक<br>करण: बालव – सायं 06 बजकर 12 मिनट तक<br>करण: कौलव – पूर्ण रात्रि तक</p>



<p><strong>सूर्योदय और सूर्यास्त का समय<br></strong>सूर्योदय का समय: प्रातः 07 बजकर 04 मिनट पर<br>सूर्यास्त का समय: सायं 06 बजकर 07 मिनट पर<br>चंद्रोदय का समय: 10 फरवरी को रात्रि 01 बजकर 19 मिनट पर<br>चंद्रास्त का समय: प्रातः 11 बजकर 07 मिनट पर<br>सूर्य और चंद्रमा की राशियां<br>सूर्य देव: मकर राशि में स्थित हैं।<br>चन्द्र देव: तुला राशि में रात्रि 01 बजकर 11 मिनट तक।</p>



<p><strong>आज के शुभ मुहूर्त<br></strong>अभिजीत मुहूर्त: दोपहर 12 बजकर 13 मिनट से दोपहर 12 बजकर 58 मिनट तक<br>अमृत काल: रात्रि 10 बजकर 04 मिनट से रात्रि 11 बजकर 51 मिनट तक</p>



<p><strong>आज के अशुभ समय<br></strong>राहुकाल: प्रातः 08 बजकर 27 मिनट से प्रातः 09 बजकर 50 मिनट तक<br>गुलिकाल: दोपहर 01 बजकर 58 मिनट से दोपहर 03 बजकर 21 मिनट तक<br>यमगण्ड: प्रातः 11 बजकर 13 मिनट से दोपहर 12 बजकर 35 मिनट तक</p>



<p><strong>आज का नक्षत्र</strong><br>आज चंद्रदेव विशाखा नक्षत्र में विराजमान रहेंगे।<br>विशाखा नक्षत्र: पूर्ण रात्रि तक<br>सामान्य विशेषताएं: ईर्ष्यालु, क्रोधी, ईश्वर-भक्त, ईमानदार, महत्वाकांक्षी, योद्धा स्वभाव, धैर्यवान, हास्यप्रिय और मिलनसार<br>नक्षत्र स्वामी: बृहस्पति देव<br>राशि स्वामी: शुक्र देव, मंगल देव<br>देवता: इंद्राग्नि &#8211; यज्ञ के देवता<br>प्रतीक: विजय का मेहराब या कुम्हार का चाक</p>
]]></content:encoded>
					
		
		
			</item>
		<item>
		<title>9 या 10 फरवरी, कब है जानकी जयंती?</title>
		<link>https://livehalchal.com/9-%e0%a4%af%e0%a4%be-10-%e0%a4%ab%e0%a4%b0%e0%a4%b5%e0%a4%b0%e0%a5%80-%e0%a4%95%e0%a4%ac-%e0%a4%b9%e0%a5%88-%e0%a4%9c%e0%a4%be%e0%a4%a8%e0%a4%95%e0%a5%80-%e0%a4%9c%e0%a4%af%e0%a4%82%e0%a4%a4%e0%a5%80/659048</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Live Halchal Web_Wing]]></dc:creator>
		<pubDate>Fri, 06 Feb 2026 05:03:26 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[अध्यात्म]]></category>
		<category><![CDATA[धर्म]]></category>
		<category><![CDATA[जानकी जयंती]]></category>
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					<description><![CDATA[माता सीता के प्राकट्य उत्सव को जानकी जयंती या सीता अष्टमी के रूप में मनाया जाता है। फाल्गुन महीने के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को सीता जी का अवतरण हुआ था। इस साल इस तिथि को लेकर लोगों में थोड़ी कन्फ्यूजन है कि यह 9 या 10 फरवरी कब मनाई जाएगी? तो आइए वैदिक &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[
<p>माता सीता के प्राकट्य उत्सव को जानकी जयंती या सीता अष्टमी के रूप में मनाया जाता है। फाल्गुन महीने के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को सीता जी का अवतरण हुआ था। इस साल इस तिथि को लेकर लोगों में थोड़ी कन्फ्यूजन है कि यह 9 या 10 फरवरी कब मनाई जाएगी? तो आइए वैदिक पंचांग के अनुसार, इसकी सही तारीख जानते हैं, जो इस प्रकार हैं –</p>



<p><strong>जानकी जयंती 2026 कब है?<br></strong>वैदिक पंचांग के अनुसार, फाल्गुन महीने के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि 9 फरवरी 2026, को सुबह 05 बजकर 01 मिनट पर शुरू होगी। वहीं, अष्टमी तिथि का समापन 10 फरवरी 2026, को सुबह 07 बजकर 27 मिनट पर होगा। ऐसे में 9 फरवरी को जानकी जयंती मनाई जाएगी।</p>



<p><strong>पूजा विधि<br></strong>सुबह स्नानादि के बाद पीले या लाल वस्त्र पहनें और व्रत का संकल्प लें।<br>एक लकड़ी की चौकी पर लाल कपड़ा बिछाएं।<br>उस पर भगवान राम और माता सीता की प्रतिमा स्थापित करें।<br>गंगाजल और फिर पंचामृत से स्नान कराएं।<br>माता सीता को सुहाग की सामग्री अर्पित करें।<br>सिंदूर चढ़ाना इस दिन बहुत फलदायी माना जाता है।<br>माता को पीले फल, फूल और घर में बने हलवे या केसरिया भात का भोग लगाएं।<br>घी का दीपक जलाएं और ‘राम-सिया’ के भजनों का पाठ करें।<br>अंत में जानकी माता की आरती करें।<br>पूजा में हुई सभी गलती के लिए माफी मांगे।</p>



<p><strong>जानकी जयंती का महत्व<br></strong>यह पर्व केवल एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि नारी शक्ति, त्याग और पवित्रता के सम्मान का दिन है। ऐसी मान्यता है कि जो महिलाएं इस दिन व्रत रखती हैं, उनके वैवाहिक जीवन में सुख-शांति बनी रहती है। वहीं, कुंवारी कन्याओं को मनचाहा वर प्राप्त होता है।</p>



<p><strong>करें यह उपाय<br></strong>अगर आप आर्थिक तंगी या वैवाहिक जीवन के कष्टों से लगातार परेशान हैं, तो इस दिन जानकी स्तोत्र का पाठ करें और पूजा के बाद सुहाग सामग्री किसी जरूरतमंद विवाहित महिला को दान करें। ऐसा करने से आपकी सभी मुश्किलों का अंत होगा। साथ ही मां जानकी की कृपा मिलेगी।</p>
]]></content:encoded>
					
		
		
			</item>
		<item>
		<title>जानकी जयंती पर जरूर करें सीता चालीसा का पाठ</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Live Halchal Web_Wing]]></dc:creator>
		<pubDate>Fri, 21 Feb 2025 05:03:08 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[अध्यात्म]]></category>
		<category><![CDATA[धर्म]]></category>
		<category><![CDATA[जानकी जयंती]]></category>
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					<description><![CDATA[जानकी जयंती (Janaki Jayanti 2025) पर न केवल माता सीता की अराधना की जाती है बल्कि इस तिथि पर भगवान श्रीराम की पूजा का भी विशेष महत्व माना गया है। ऐसे में जानकी जयंती के अवसर पर आपको श्रीराम और माता सीता की साथ में उपासना करनी चाहिए। इसी के साथ इस दिन पर आप &#8230;]]></description>
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<p>जानकी जयंती (Janaki Jayanti 2025) पर न केवल माता सीता की अराधना की जाती है बल्कि इस तिथि पर भगवान श्रीराम की पूजा का भी विशेष महत्व माना गया है। ऐसे में जानकी जयंती के अवसर पर आपको श्रीराम और माता सीता की साथ में उपासना करनी चाहिए। इसी के साथ इस दिन पर आप श्री सीता चालीसा का पाठ भी कर सकते हैं।</p>



<p>फाल्गुन कृष्ण अष्टमी पर मनाई जाने वाली जानकी जयंती माता सीता की पूजा-अर्चना के लिए समर्पित मानी जाती है। माना जाता है कि, इसी तिथि पर राजा जनक ने सीता जी को अपनी पुत्री के रूप में स्वीकार किया था, जो उन्हें भूमि से प्राप्त हुई थीं। इस साल जानकी जयंती का पर्व शुक्रवार 21 फरवरी को मनाया जा रहा है।</p>



<p><strong>श्री सीता चालीसा</strong></p>



<p><strong>॥ दोहा ॥</strong><br>बन्दौ चरण सरोज निज जनक लली सुख धाम, राम प्रिय किरपा करें सुमिरौं आठों धाम ॥<br>कीरति गाथा जो पढ़ें सुधरैं सगरे काम, मन मन्दिर बासा करें दुःख भंजन सिया राम ॥</p>



<p><strong>॥ चौपाई ॥</strong><br>राम प्रिया रघुपति रघुराई बैदेही की कीरत गाई ॥<br>चरण कमल बन्दों सिर नाई, सिय सुरसरि सब पाप नसाई ॥<br>जनक दुलारी राघव प्यारी, भरत लखन शत्रुहन वारी ॥<br>दिव्या धरा सों उपजी सीता, मिथिलेश्वर भयो नेह अतीता ॥<br>सिया रूप भायो मनवा अति, रच्यो स्वयंवर जनक महीपति ॥<br>भारी शिव धनु खींचै जोई, सिय जयमाल साजिहैं सोई ॥<br>भूपति नरपति रावण संगा, नाहिं करि सके शिव धनु भंगा ॥<br>जनक निराश भए लखि कारन , जनम्यो नाहिं अवनिमोहि तारन ॥<br>यह सुन विश्वामित्र मुस्काए, राम लखन मुनि सीस नवाए ॥<br>आज्ञा पाई उठे रघुराई, इष्ट देव गुरु हियहिं मनाई ॥<br>जनक सुता गौरी सिर नावा, राम रूप उनके हिय भावा ॥<br>मारत पलक राम कर धनु लै, खंड खंड करि पटकिन भू पै ॥<br>जय जयकार हुई अति भारी, आनन्दित भए सबैं नर नारी ॥<br>सिय चली जयमाल सम्हाले, मुदित होय ग्रीवा में डाले ॥<br>मंगल बाज बजे चहुँ ओरा, परे राम संग सिया के फेरा ॥<br>लौटी बारात अवधपुर आई, तीनों मातु करैं नोराई ॥<br>कैकेई कनक भवन सिय दीन्हा, मातु सुमित्रा गोदहि लीन्हा ॥<br>कौशल्या सूत भेंट दियो सिय, हरख अपार हुए सीता हिय ॥<br>सब विधि बांटी बधाई, राजतिलक कई युक्ति सुनाई ॥<br>मंद मती मंथरा अडाइन, राम न भरत राजपद पाइन ॥</p>



<p>धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, जानकी जयंती के शुभ अवसर पर माता सीता के साथ प्रभु श्रीराम की विधिवत रूप से पूजा-अर्चना और व्रत करने से साधक को सौभाग्य की प्राप्ति हो सकती है।</p>



<p>कैकेई कोप भवन मा गइली, वचन पति सों अपनेई गहिली ॥<br>चौदह बरस कोप बनवासा, भरत राजपद देहि दिलासा ॥<br>आज्ञा मानि चले रघुराई, संग जानकी लक्षमन भाई ॥<br>सिय श्री राम पथ पथ भटकैं , मृग मारीचि देखि मन अटकै ॥<br>राम गए माया मृग मारन, रावण साधु बन्यो सिय कारन ॥<br>भिक्षा कै मिस लै सिय भाग्यो, लंका जाई डरावन लाग्यो ॥<br>राम वियोग सों सिय अकुलानी, रावण सों कही कर्कश बानी ॥<br>हनुमान प्रभु लाए अंगूठी, सिय चूड़ामणि दिहिन अनूठी ॥<br>अष्ठसिद्धि नवनिधि वर पावा, महावीर सिय शीश नवावा ॥<br>सेतु बाँधी प्रभु लंका जीती, भक्त विभीषण सों करि प्रीती ॥<br>चढ़ि विमान सिय रघुपति आए, भरत भ्रात प्रभु चरण सुहाए ॥<br>अवध नरेश पाई राघव से, सिय महारानी देखि हिय हुलसे ॥<br>रजक बोल सुनी सिय बन भेजी, लखनलाल प्रभु बात सहेजी ॥<br>बाल्मीक मुनि आश्रय दीन्यो, लवकुश जन्म वहाँ पै लीन्हो ॥<br>विविध भाँती गुण शिक्षा दीन्हीं, दोनुह रामचरित रट लीन्ही ॥<br>लरिकल कै सुनि सुमधुर बानी,रामसिया सुत दुई पहिचानी ॥<br>भूलमानि सिय वापस लाए, राम जानकी सबहि सुहाए ॥<br>सती प्रमाणिकता केहि कारन, बसुंधरा सिय के हिय धारन ॥<br>अवनि सुता अवनी मां सोई, राम जानकी यही विधि खोई ॥<br>पतिव्रता मर्यादित माता, सीता सती नवावों माथा ॥</p>



<p>जानकी जयंती के दिन मुख्य रूप से विवाहित महिलाओं द्वारा व्रत किया जाता है। इससे साधक के शादीशुदा जीवन में आ रहे कष्ट भी दूर होने लगते हैं, साथ अखंड सौभाग्य का भी आशीर्वाद मिलता है।</p>



<p><strong>॥ दोहा ॥</strong><br>जनकसुत अवनिधिया राम प्रिया लवमात,<br>चरणकमल जेहि उन बसै सीता सुमिरै प्रात ॥</p>
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