जया एकादशी 2020: ये… व्रत भौतिक तथा सांसारिक सुख करवाता प्राप्त जानें इसकी कथा – Live Halchal https://livehalchal.com Latest News, Updated News, Hindi News Portal Tue, 04 Feb 2020 10:03:06 +0000 en-US hourly 1 https://wordpress.org/?v=6.9.10 https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2023/10/cropped-Live-Halchal-512-32x32.jpg जया एकादशी 2020: ये… व्रत भौतिक तथा सांसारिक सुख करवाता प्राप्त जानें इसकी कथा – Live Halchal https://livehalchal.com 32 32 जया एकादशी 2020: ये… व्रत भौतिक तथा सांसारिक सुख करवाता प्राप्त जानें इसकी कथा https://livehalchal.com/%e0%a4%9c%e0%a4%af%e0%a4%be-%e0%a4%8f%e0%a4%95%e0%a4%be%e0%a4%a6%e0%a4%b6%e0%a5%80-2020-%e0%a4%af%e0%a5%87-%e0%a4%b5%e0%a5%8d%e0%a4%b0%e0%a4%a4-%e0%a4%ad%e0%a5%8c%e0%a4%a4%e0%a4%bf%e0%a4%95/316469 Tue, 04 Feb 2020 10:03:06 +0000 http://www.livehalchal.com/?p=316469 माघ मास में पवित्र जलाशयों और नदियों में स्नान का बहुत महत्व माना जाता हैं और माघ मास की शुक्लपक्ष एकादशी को जया एकादशी के रूप में जाना जाता हैं। पुराणों में व्याप्त कथा के अनुसार यह व्रत समस्त भौतिक तथा सांसारिक सुख प्राप्त करवाता हैं और सभी कामनाओं की पूर्ति के लिए यह व्रत …]]>

माघ मास में पवित्र जलाशयों और नदियों में स्नान का बहुत महत्व माना जाता हैं और माघ मास की शुक्लपक्ष एकादशी को जया एकादशी के रूप में जाना जाता हैं। पुराणों में व्याप्त कथा के अनुसार यह व्रत समस्त भौतिक तथा सांसारिक सुख प्राप्त करवाता हैं और सभी कामनाओं की पूर्ति के लिए यह व्रत श्रेष्ठ हैं। इस व्रत से मनुष्य सभी पापों से मुक्त होकर जीवन में प्रत्येक काम में सफलता प्राप्त करता हैं। आज हम आपके लिए जया एकादशी व्रत की पौराणिक कथा लेकर आए हैं। तो आइये जानते हैं इसके बारे में।


एक समय में देवराज इंद्र नंदन वन में अप्सराओं के साथ गंधर्व गान कर रहे थे, जिसमें प्रसिद्ध गंधर्व पुष्पदंत, उनकी कन्या पुष्पवती तथा चित्रसेन और उनकी पत्नी मालिनी भी उपस्थित थे। इस विहार में मालिनी का पुत्र पुष्पवान और उसका पुत्र माल्यवान भी उपस्थित हो गंधर्व गान में साथ दे रहे थे। उसी क्रम में गंधर्व कन्या पुष्पवती, माल्यवान को देख कर उस पर मोहित हो गई और अपने रूप से माल्यवान को वश में कर लिया। इस कारण दोनों का चित्त चंचल हो गया।

वे स्वर और ताल के विपरीत गान करने लगे। इसे इंद्र ने अपना अपमान समझा और दोनों को श्राप देते हुए कहा- तुम दोनों ने न सिर्फ यहां की मर्यादा को भंग किया है, बल्कि मेरी आज्ञा का भी उल्लंघन किया है। इस कारण तुम दोनों स्त्री-पुरुष के रूप में मृत्युलोक जाकर वहीं अपने कर्म का फल भोगते रहो। इंद्र के श्राप से दोनों भूलोक में हिमालय पर्वतादि क्षेत्र में अपना जीवन दुखपूर्वक बिताने लगे। दोनों की निद्रा तक गायब हो गई। दिन गुजरते रहे और संकट बढ़ता ही जा रहा था। अब दोनों ने निर्णय लिया कि देव आराधना करें और संयम से जीवन गुजारें। इसी तरह एक दिन माघ मास में शुक्लपक्ष एकादशी तिथि आ गयी।

दोनों ने निराहार रहकर दिन गुजारा और संध्या काल पीपल वृक्ष के नीचे अपने पाप से मुक्ति हेतु ऋषिकेश भगवान विष्णु को स्मरण करते रहे। रात्रि हो गयी, पर सोए नहीं। दूसरे दिन प्रात: उन दोनों को इसी पुण्य प्रभाव से पिशाच योनि से मुक्ति मिल गई और दोनों को पुन: अप्सरा का नवरूप प्राप्त हुआ और वे स्वर्गलोक प्रस्थान कर गए। उस समय देवताओं ने उन दोनों पर पुष्पवर्षा की और देवराज इंद्र ने भी उन्हें क्षमा कर दिया। इस व्रत के बारे में श्रीकृष्ण युधिष्ठिर से कहते हैं, ‘जिस मनुष्य ने यह एकादशी व्रत किया, उसने मानो सब यज्ञ, जप, दान आदि कर लिए। यही कारण है कि सभी एकादशियों में जया एकादशी का विशिष्ट महत्व है।’

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