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	<title>जयप्रकाश नारायण &#8211; Live Halchal</title>
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	<title>जयप्रकाश नारायण &#8211; Live Halchal</title>
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		<title>बिहार की धरती धन्य है, जहां जयप्रकाश नारायण जैसे राष्ट्रनायक का जन्म हुआ : रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Bhavna Vajpai]]></dc:creator>
		<pubDate>Sun, 11 Oct 2020 04:48:17 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Main Slide]]></category>
		<category><![CDATA[राष्ट्रीय]]></category>
		<category><![CDATA[जयप्रकाश नारायण]]></category>
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					<description><![CDATA[रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने जयप्रकाश नारायण को याद करते हुए लोकतंत्र को सुरक्षित रखने में उनकी प्रभावी भूमिका को रेखांकित किया। उन्होंने ट्वीट कर कहा, &#8216;लोकनायक जयप्रकाश नारायण की जयंती के अवसर पर मैं उनके महान व्यक्तित्व एवं कृतित्व को स्मरण एवं नमन करता हूं। लोकतंत्र को सुरक्षित रखने में उनकी जो प्रभावी भूमिका &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p>रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने जयप्रकाश नारायण को याद करते हुए लोकतंत्र को सुरक्षित रखने में उनकी प्रभावी भूमिका को रेखांकित किया। उन्होंने ट्वीट कर कहा, &#8216;लोकनायक जयप्रकाश नारायण की जयंती के अवसर पर मैं उनके महान व्यक्तित्व एवं कृतित्व को स्मरण एवं नमन करता हूं।</p>
<p><img fetchpriority="high" decoding="async" class="size-full wp-image-381351 aligncenter" src="http://www.livehalchal.com/wp-content/uploads/2020/10/113085-ikbhduuluq-1550200058.jpg" alt="" width="1200" height="630" srcset="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2020/10/113085-ikbhduuluq-1550200058.jpg 1200w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2020/10/113085-ikbhduuluq-1550200058-300x158.jpg 300w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2020/10/113085-ikbhduuluq-1550200058-1024x538.jpg 1024w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2020/10/113085-ikbhduuluq-1550200058-768x403.jpg 768w" sizes="(max-width: 1200px) 100vw, 1200px" /></p>
<p>लोकतंत्र को सुरक्षित रखने में उनकी जो प्रभावी भूमिका रही है, वह हम सभी भारतवासियों को आज भी प्रेरणा देती है। बिहार की धरती धन्य है, जहां जेपी जैसे राष्ट्रनायक का जन्म हुआ।&#8217;</p>
<p>वहीं, गृह मंत्री अमित शाह ने जेपी की जयंती पर उन्हें याद करते हुए कहा, &#8216;लोकनायक जयप्रकाश नारायण देशभक्ति, निर्भिकता और स्वाभिमान के प्रतीक है।</p>
<p>उन्हें न सत्ता का मोह था न किसी पद की लालसा, उन्होंने सदैव एक जनसेवक के रूप में निस्वार्थ भाव से देशहित में काम किया। आपातकाल के विरुद्ध देश को एक कर अराजकता और अन्याय से डट कर लड़ने वाले ऐसे महान नेता को नमन।&#8217;</p>
<p>भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा ने जयप्रकाश नारायण को याद करते हुए ट्वीट कर कहा, &#8216;भारत रत्न से सम्मानित जयप्रकाश नारायण जी ने अपने उत्कृष्ट विचारों तथा दर्शन से देश को नई दिशा देने का कार्य किया।</p>
<p>ऐसे सर्वोदयी विचारक व मानवतावादी चिंतक की जयंती पर उन्हें कोटि-कोटि नमन। यह मेरा सौभाग्य है कि छात्र जीवन में ऐसे विराट व्यक्तित्व का सानिध्य मुझे प्राप्त हुआ।&#8217;</p>
<p>उन्होंने कहा, &#8216;जेपी आंदोलन से निकले हुए अनेक राजनेताओं ने भारतीय राजनीति का नेतृत्व कर देश को एक नई दिशा दी। जेपी के बताए मूल्यों और दिशा-निर्देशों पर आगे बढ़कर बेहतर समाज की रचना करना हमारा संकल्प है। मैं भाग्यशाली हूं कि आज उनकी जयंती पर मुझे पटना में उनके घर जाने का सौभाग्य हासिल हो रहा है।&#8217;</p>
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		<title>जयप्रकाश नारायण, जिसने हिला दी थी इंदिरा गांधी की सत्ता</title>
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		<dc:creator><![CDATA[somali sharma]]></dc:creator>
		<pubDate>Mon, 08 Oct 2018 12:18:41 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Main Slide]]></category>
		<category><![CDATA[बिहार]]></category>
		<category><![CDATA[जयप्रकाश नारायण]]></category>
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					<description><![CDATA[जेपी यानि जयप्रकाश नारायण जिन्होंने आजादी के बाद पहली बार जनआंदोलन का नेतृत्व किया। उनकी आज पुण्यतिथि पर उनके गांव सिताबदियारा सहित पूरा बिहार उन्हें नमन कर रहा है। आपातकाल की चर्चा तब तक पूरी नहीं होती जब तक स्वाधीनता संग्राम सेनानी और प्रसिद्ध समाजवादी नेता जयप्रकाश नारायण की चर्चा न की जाए।  जयप्रकाश कौन &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p><strong>जेपी यानि जयप्रकाश नारायण जिन्होंने आजादी के बाद पहली बार जनआंदोलन का नेतृत्व किया। उनकी आज पुण्यतिथि पर उनके गांव सिताबदियारा सहित पूरा बिहार उन्हें नमन कर रहा है। आपातकाल की चर्चा तब तक पूरी नहीं होती जब तक स्वाधीनता संग्राम सेनानी और प्रसिद्ध समाजवादी नेता जयप्रकाश नारायण की चर्चा न की जाए। <img decoding="async" class="aligncenter  wp-image-167700" src="http://www.livehalchal.com/wp-content/uploads/2018/10/08_10_2018-jayprakash1_18512200.jpg" alt="जेपी यानि जयप्रकाश नारायण जिन्होंने आजादी के बाद पहली बार जनआंदोलन का नेतृत्व किया। उनकी आज पुण्यतिथि पर उनके गांव सिताबदियारा सहित पूरा बिहार उन्हें नमन कर रहा है। आपातकाल की चर्चा तब तक पूरी नहीं होती जब तक स्वाधीनता संग्राम सेनानी और प्रसिद्ध समाजवादी नेता जयप्रकाश नारायण की चर्चा न की जाए।  जयप्रकाश कौन थे, इसका एक ओजपूर्ण परिचय रामधारी सिंह दिनकर की उन पंक्तियों से मिलता है, जो उन्होंने 1946 में जयप्रकाश नारायण के जेल से रिहा होने के बाद लिखी थी और पटना के गांधी मैदान में जेपी के स्वागत में उमड़ी लाखों लोगों के सामने पढ़ी थी...  कहते हैं उसको जयप्रकाश जो नहीं मरण से डरता है  ज्वाला को बुझते देख, कुंड में स्वयं कूद जो पड़ता है  है जयप्रकाश वह जो न कभी सीमित रह सकता घेरे में  अपनी मशाल जो जला बांटता फिरता ज्योति अंधेरे में  हां जयप्रकाश है नाम समय की करवट का, अंगड़ाई का  भूचाल, बवंडर, के दावों से, भरी हुई तरुणाई का   खुलासा: ऐसे की जाती IRCTC की वेबसाइट हैक, एक माह के लिए 20 हजार की वसूली यह भी पढ़ें है जयप्रकाश वह नाम जिसे इतिहास समादार देता है  बढ़कर जिनके पदचिह्नों को उर पर अंकित कर लेता है।  सन 1946 की यह कविता रची जाने से पहले जयप्रकाश नारायण की युवा अवस्था बेहद तूफानी रही है। जेपी जब 20 वर्ष के थे तो उच्च शिक्षा हासिल करने के लिए 1922 में वे अमेरिका चले गए। जहां उन्होंने 1922-1929 के बीच समाज-शास्त्र का अध्ययन किया। यहां की महंगी पढ़ाई का खर्च पूरा करने के लिए जेपी ने खेतों, कंपनियों के साथ ही रेस्टोरेंट तक में काम किया।  अमेरिका में मजदूरी करके वहां के कई विश्वविद्यालयों में बी.ए. और उसके बाद समाजशास्त्र में एम.ए. करने के बाद वे पीएचडी की तैयारी कर रहे थे तभी मां की बीमारी के कारण स्वदेश वापस लौटना पड़ा था।  1929 में जब वे अमेरिका से लौटे, भारतीय स्वतंत्रता संग्राम तेजी पर था। उनका संपर्क गांधी जी के साथ काम कर रहे जवाहर लाल नेहरू से हुआ। वे आंदोलन का हिस्सा बने। 1932 में गांधी, नेहरू  और अन्य महत्वपूर्ण कांग्रेसी नेताओं के जेल जाने के बाद, उन्होंने भारत में अलग-अलग हिस्सों में संग्राम का नेतृत्व किया।   पुत्री समान इंदिरा को हराया, फिर साथ बैठकर रोए 1977 में जेपी के आंदोलन के फलस्वरूप इंदिरा को हराकर जब जनता पार्टी सत्ता में पहुंची तो 24 मार्च को दिल्ली के रामलीला मैदान में विजय रैली का आयोजन किया गया, लेकिन खुद जेपी ही उस रैली में नहीं पहुंचे।  अपनी राजनीतिक विजय के सबसे बड़े दिन जेपी गांधी शांति प्रतिष्ठान से निकलकर रामलीला मैदान जाने की जगह सफदरजंग रोड की एक नंबर कोठी में गए, जहां पहली बार हारी हुई इंदिरा बैठी थीं। जेपी से मिलकर इंदिरा के आंसू आ गए, लेकिन उससे भी ज्यादा हैरत की बात थी कि अपनी पराजित पुत्री के सामने जीते हुए जेपी भी रो रहे थे।  छात्र आंदोलन की अगुवाई की वह इंदिरा गांधी की प्रशासनिक नीतियों के विरुद्ध थे। 1974 में ही पटना में छात्रों ने आंदोलन की शुरुआत की। यह शांतिपूर्ण और लोकतांत्रिक रहेगा, इस शर्त पर जेपी ने उसकी अगुवाई करना मंजूर किया। गिरते स्वास्थ्य के बावजूद जेपी इस आंदोलन से जुड़े और यह आंदोलन बाद में बिहार में सरकारी भ्रष्टाचार के खिलाफ बड़ा आंदोलन बनकर उभरा और आखिर में जेपी के कारण ही यह आंदोलन 'संपूर्ण क्रांति' आंदोलन बना।   1975 में इंदिरा गांधी ने आपातकाल की घोषणा की, जेपी हुए गिरफ्तार इसके बाद देश में जो सरकार विरोधी माहौल बना और इंदिरा गांधी का सत्ता में रहना मुश्किल होने लगा तो 1975 में इंदिरा गांधी ने आपातकाल की घोषणा की, जिसके अंतर्गत जेपी सहित 600 से भी अधिक विरोधी नेताओं को बंदी बनाया गया और प्रेस पर सेंसरशिप लगा दी गई। जेल मे जेपी की तबीयत और भी खराब हुई। 7 महीने बाद उनको मुक्त कर दिया गया।  जेपी छात्र आंदोलन से ही निकले बिहार की राजनीति के दिग्गज राष्ट्रीय जनता दल के लालू प्रसाद यादव, जनता दल यूनाइटेड के नीतीश कुमार और भारतीय जनता पार्टी के सुशील मोदी, ये तीनों जेपी आंदोलन में विद्यार्थी नेता के रूप में उभरे और बुलंद मुक़ाम हासिल किया।  सुशील मोदी अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद से आए थे। आपातकाल के बाद वहीं लौट गए। लालू और नीतीश ने बिहार से होते हुए केंद्र की सियासत में भी अपना सिक्का जमाया। राम विलास पासवान जेपी आंदोलन में शामिल नहीं हुए लेकिन आपातकाल के विरोध में जेल जाने वालों में उनका भी नाम आता है।  आज ही के दिन जेपी ने ली थी अंतिम सांस 8 अक्टूबर 1979 को दिल की बीमारी और डायबीटीज के कारण पटना में जेपी की मृत्यु हो गई। तत्कालीन प्रधानमंत्री चौधरी चरण सिंह ने लोकनायक की मृत्यु पर 7 दिन के राष्ट्रीय शोक की घोषणा की थी।" width="690" height="573" srcset="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2018/10/08_10_2018-jayprakash1_18512200.jpg 650w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2018/10/08_10_2018-jayprakash1_18512200-300x249.jpg 300w" sizes="(max-width: 690px) 100vw, 690px" /></strong></p>
<p><strong>जयप्रकाश कौन थे, इसका एक ओजपूर्ण परिचय रामधारी सिंह दिनकर की उन पंक्तियों से मिलता है, जो उन्होंने 1946 में जयप्रकाश नारायण के जेल से रिहा होने के बाद लिखी थी और पटना के गांधी मैदान में जेपी के स्वागत में उमड़ी लाखों लोगों के सामने पढ़ी थी&#8230;</strong></p>
<p><strong>कहते हैं उसको जयप्रकाश जो नहीं मरण से डरता है</strong></p>
<p><strong>ज्वाला को बुझते देख, कुंड में स्वयं कूद जो पड़ता है</strong></p>
<p><strong>है जयप्रकाश वह जो न कभी सीमित रह सकता घेरे में</strong></p>
<p><strong>अपनी मशाल जो जला बांटता फिरता ज्योति अंधेरे में</strong></p>
<p><strong>हां जयप्रकाश है नाम समय की करवट का, अंगड़ाई का</strong></p>
<p><strong>भूचाल, बवंडर, के दावों से, भरी हुई तरुणाई का</strong></p>
<p><strong>है जयप्रकाश वह नाम जिसे इतिहास समादार देता है</strong></p>
<p><strong>बढ़कर जिनके पदचिह्नों को उर पर अंकित कर लेता है।</strong></p>
<p><strong>सन 1946 की यह कविता रची जाने से पहले जयप्रकाश नारायण की युवा अवस्था बेहद तूफानी रही है। जेपी जब 20 वर्ष के थे तो उच्च शिक्षा हासिल करने के लिए 1922 में वे अमेरिका चले गए। जहां उन्होंने 1922-1929 के बीच समाज-शास्त्र का अध्ययन किया। यहां की महंगी पढ़ाई का खर्च पूरा करने के लिए जेपी ने खेतों, कंपनियों के साथ ही रेस्टोरेंट तक में काम किया।</strong></p>
<p><strong>अमेरिका में मजदूरी करके वहां के कई विश्वविद्यालयों में बी.ए. और उसके बाद समाजशास्त्र में एम.ए. करने के बाद वे पीएचडी की तैयारी कर रहे थे तभी मां की बीमारी के कारण स्वदेश वापस लौटना पड़ा था।</strong></p>
<p><strong>1929 में जब वे अमेरिका से लौटे, भारतीय स्वतंत्रता संग्राम तेजी पर था। उनका संपर्क गांधी जी के साथ काम कर रहे जवाहर लाल नेहरू से हुआ। वे आंदोलन का हिस्सा बने। 1932 में गांधी, नेहरू  और अन्य महत्वपूर्ण कांग्रेसी नेताओं के जेल जाने के बाद, उन्होंने भारत में अलग-अलग हिस्सों में संग्राम का नेतृत्व किया। </strong></p>
<p><strong>पुत्री समान इंदिरा को हराया, फिर साथ बैठकर रोए</strong><br />
<strong>1977 में जेपी के आंदोलन के फलस्वरूप इंदिरा को हराकर जब जनता पार्टी सत्ता में पहुंची तो 24 मार्च को दिल्ली के रामलीला मैदान में विजय रैली का आयोजन किया गया, लेकिन खुद जेपी ही उस रैली में नहीं पहुंचे।</strong></p>
<p><strong>अपनी राजनीतिक विजय के सबसे बड़े दिन जेपी गांधी शांति प्रतिष्ठान से निकलकर रामलीला मैदान जाने की जगह सफदरजंग रोड की एक नंबर कोठी में गए, जहां पहली बार हारी हुई इंदिरा बैठी थीं। जेपी से मिलकर इंदिरा के आंसू आ गए, लेकिन उससे भी ज्यादा हैरत की बात थी कि अपनी पराजित पुत्री के सामने जीते हुए जेपी भी रो रहे थे।</strong></p>
<p><strong>छात्र आंदोलन की अगुवाई की</strong><br />
<strong>वह इंदिरा गांधी की प्रशासनिक नीतियों के विरुद्ध थे। 1974 में ही पटना में छात्रों ने आंदोलन की शुरुआत की। यह शांतिपूर्ण और लोकतांत्रिक रहेगा, इस शर्त पर जेपी ने उसकी अगुवाई करना मंजूर किया। गिरते स्वास्थ्य के बावजूद जेपी इस आंदोलन से जुड़े और यह आंदोलन बाद में बिहार में सरकारी भ्रष्टाचार के खिलाफ बड़ा आंदोलन बनकर उभरा और आखिर में जेपी के कारण ही यह आंदोलन &#8216;संपूर्ण क्रांति&#8217; आंदोलन बना। </strong></p>
<p><strong>1975 में इंदिरा गांधी ने आपातकाल की घोषणा की, जेपी हुए गिरफ्तार</strong><br />
<strong>इसके बाद देश में जो सरकार विरोधी माहौल बना और इंदिरा गांधी का सत्ता में रहना मुश्किल होने लगा तो 1975 में इंदिरा गांधी ने आपातकाल की घोषणा की, जिसके अंतर्गत जेपी सहित 600 से भी अधिक विरोधी नेताओं को बंदी बनाया गया और प्रेस पर सेंसरशिप लगा दी गई। जेल मे जेपी की तबीयत और भी खराब हुई। 7 महीने बाद उनको मुक्त कर दिया गया।</strong></p>
<p><strong>जेपी छात्र आंदोलन से ही निकले बिहार की राजनीति के दिग्गज</strong><br />
<strong>राष्ट्रीय जनता दल के लालू प्रसाद यादव, जनता दल यूनाइटेड के नीतीश कुमार और भारतीय जनता पार्टी के सुशील मोदी, ये तीनों जेपी आंदोलन में विद्यार्थी नेता के रूप में उभरे और बुलंद मुक़ाम हासिल किया।</strong></p>
<p><strong>सुशील मोदी अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद से आए थे। आपातकाल के बाद वहीं लौट गए। लालू और नीतीश ने बिहार से होते हुए केंद्र की सियासत में भी अपना सिक्का जमाया। राम विलास पासवान जेपी आंदोलन में शामिल नहीं हुए लेकिन आपातकाल के विरोध में जेल जाने वालों में उनका भी नाम आता है।</strong></p>
<p><strong>आज ही के दिन जेपी ने ली थी अंतिम सांस</strong><br />
<strong>8 अक्टूबर 1979 को दिल की बीमारी और डायबीटीज के कारण पटना में जेपी की मृत्यु हो गई। तत्कालीन प्रधानमंत्री चौधरी चरण सिंह ने लोकनायक की मृत्यु पर 7 दिन के राष्ट्रीय शोक की घोषणा की थी।</strong></p>
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