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	<title>जगन्नाथ मंदिर &#8211; Live Halchal</title>
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	<title>जगन्नाथ मंदिर &#8211; Live Halchal</title>
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		<title>जगन्नाथ मंदिर में आज बंद रहेगा श्रद्धालुओं को प्रवेश…</title>
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		<pubDate>Thu, 18 Jul 2024 05:22:10 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[दिल्ली]]></category>
		<category><![CDATA[राज्य]]></category>
		<category><![CDATA[जगन्नाथ मंदिर]]></category>
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					<description><![CDATA[<img width="618" height="350" src="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2024/07/Capture-837.png" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" fetchpriority="high" srcset="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2024/07/Capture-837.png 700w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2024/07/Capture-837-300x170.png 300w" sizes="(max-width: 618px) 100vw, 618px" />पुरी के जगन्नाथ मंदिर के अधिकारियों ने बृहस्पतिवार को 12वीं सदी के मंदिर में भक्तों के प्रवेश पर प्रतिबंध लगा दिया है, क्योंकि रत्न भंडार (कोषागार) के आंतरिक कक्ष से कीमती सामान को अस्थायी &#8216;स्ट्रांग रूम&#8217; में स्थानांतरित किया जाएगा। एक अधिकारी ने यह जानकारी दी। मंदिर के तहखाने में स्थित रत्न भंडार में एक &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<img width="618" height="350" src="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2024/07/Capture-837.png" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" srcset="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2024/07/Capture-837.png 700w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2024/07/Capture-837-300x170.png 300w" sizes="(max-width: 618px) 100vw, 618px" />
<p>पुरी के जगन्नाथ मंदिर के अधिकारियों ने बृहस्पतिवार को 12वीं सदी के मंदिर में भक्तों के प्रवेश पर प्रतिबंध लगा दिया है, क्योंकि रत्न भंडार (कोषागार) के आंतरिक कक्ष से कीमती सामान को अस्थायी &#8216;स्ट्रांग रूम&#8217; में स्थानांतरित किया जाएगा। एक अधिकारी ने यह जानकारी दी। मंदिर के तहखाने में स्थित रत्न भंडार में एक बाहरी और एक आंतरिक कक्ष है।</p>



<p>श्री जगन्नाथ मंदिर प्रशासन (एसजेटीए) के प्रमुख अरबिंद पाधी ने बुधवार को कहा, &#8220;बृहस्पतिवार को रत्न भंडार के आंतरिक कक्ष को फिर से खोलने की व्यवस्था की जा रही है, इसलिए हमने मंदिर में भक्तों के प्रवेश पर प्रतिबंध लगा दिया है। बृहस्पतिवार सुबह आठ बजे के बाद किसी को भी प्रवेश की अनुमति नहीं दी जाएगी।&#8221;</p>



<p>उन्होंने कहा कि केवल अधिकृत व्यक्तियों और सेवकों को ही सुबह आठ बजे के बाद मंदिर में प्रवेश की अनुमति होगी और बृहस्पतिवार को मंदिर का केवल सिंह द्वार खुला रहेगा। पाधी ने कहा कि वर्षों से भक्तों द्वारा भगवान को दान की गई बहुमूल्य वस्तुओं को मंदिर परिसर के अंदर अस्थायी &#8216;स्ट्रांग रूम&#8217; में स्थानांतरित कर दिया जाएगा।</p>
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		<title>जगन्नाथ मंदिर का &#8216;रत्न भंडार&#8217; 46 साल बाद आज खुलेगा</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Live Halchal Web_Wing]]></dc:creator>
		<pubDate>Sun, 14 Jul 2024 08:58:22 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[राष्ट्रीय]]></category>
		<category><![CDATA[जगन्नाथ मंदिर]]></category>
		<category><![CDATA[रत्न भंडार]]></category>
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					<description><![CDATA[<img width="618" height="351" src="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2024/07/Capture-645.png" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" srcset="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2024/07/Capture-645.png 732w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2024/07/Capture-645-300x170.png 300w" sizes="(max-width: 618px) 100vw, 618px" />भगवान जगन्नाथ मंदिर का प्रतिष्ठित खजाना &#8216;रत्न भंडार&#8217; 46 साल बाद आज खोला जाएगा। इसके पहले यह 1978 में खोला गया था। भाजपा ने चुनाव से पहले वादा किया था कि जब वो सत्ता में आएंगे तो खजाना खोला जाएगा। ओडिशा के पुरी में भगवान जगन्नाथ मंदिर का प्रतिष्ठित खजाना &#8216;रत्न भंडार&#8217; रविवार को खुलेगा। &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<img width="618" height="351" src="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2024/07/Capture-645.png" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" loading="lazy" srcset="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2024/07/Capture-645.png 732w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2024/07/Capture-645-300x170.png 300w" sizes="auto, (max-width: 618px) 100vw, 618px" />
<p>भगवान जगन्नाथ मंदिर का प्रतिष्ठित खजाना &#8216;रत्न भंडार&#8217; 46 साल बाद आज खोला जाएगा। इसके पहले यह 1978 में खोला गया था। भाजपा ने चुनाव से पहले वादा किया था कि जब वो सत्ता में आएंगे तो खजाना खोला जाएगा।</p>



<p>ओडिशा के पुरी में भगवान जगन्नाथ मंदिर का प्रतिष्ठित खजाना &#8216;रत्न भंडार&#8217; रविवार को खुलेगा। राज्य सरकार आभूषणों और अन्य कीमती सामानों की सूची बनाने के लिए इस खजाने को 46 साल बाद खोल रही है। इससे पहले यह 1978 में खोला गया था।</p>



<p>पुरी के जिला कलेक्टर सिद्धार्थ शंकर स्वैन ने बताया कि भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) इस मौके का इस्तेमाल मंदिर की मरम्मत के लिए करेगा। राज्य सरकार की गठित 16 सदस्यीय उच्च स्तरीय समिति ने रत्न भंडार को 14 जुलाई को खोलने की सिफारिश की थी। राज्य विधानसभा में 2018 में बताया गया था कि रत्न भंडार में 12,831 तोले के स्वर्ण आभूषण हैं। इनमें कीमती रत्न जड़े हुए हैं और साथ ही 22,153 तोले चांदी के बर्तन और अन्य सामान हैं।</p>



<p>सिद्धार्थ शंकर ने बताया कि मंदिर प्रबंध समिति ने मानक संचालन प्रक्रियाओं (एसओपी) में कुछ बदलावों के साथ उड़ीसा उच्च न्यायालय के पूर्व न्यायाधीश न्यायमूर्ति बिश्वनाथ रथ की अध्यक्षता वाली उच्च स्तरीय समिति के प्रस्तावों की पुष्टि की है।</p>



<p>उन्होंने कहा कि इसके साथ ही भगवान जगन्नाथ के आभूषणों की सूची की प्रक्रिया आज से शुरू होगी।</p>



<p><strong>मंदिर समिति एसओपी के साथ ही सभी काम करेगी</strong><br>मंत्री ने जानकारी देते हुए बताया कि राज्य सरकार ने मंदिर प्रबंध समिति के लिए एसओपी जारी की है और उसी के आधार पर सभी काम किए जाएंगे। खजाने को फिर से खोलने और इन्वेंट्री के लिए प्रत्येक कार्य को पूरा करने के लिए अपनाई जाने वाली प्रक्रियाएं भी तय की गई हैं। श्री जगन्नाथ मंदिर प्रशासन (एसजेटीए) के मुख्य प्रशासक को पूरे काम की निगरानी की जिम्मेदारी सौंपी गई है।</p>



<p><strong>भाजपा ने खजाना खोलने का वादा किया था</strong><br>भाजपा ने ओडिशा में सत्ता में आने पर 12वीं सदी के मंदिर के खजाने को फिर से खोलने का वादा किया था। मंदिर का खजाना आखिरी बार 46 साल पहले 1978 में खोला गया था। इसे दोबारा खोलना राज्य में लोकसभा और विधानसभा चुनावों के दौरान एक प्रमुख राजनीतिक मुद्दा था।</p>
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		<title>हडकंप: जगन्नाथ मंदिर के 404 कर्मचारी हुए कोरोना पॉजिटिव</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Bhavna Vajpai]]></dc:creator>
		<pubDate>Wed, 30 Sep 2020 06:08:09 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Uncategorized]]></category>
		<category><![CDATA[404 कर्मचारी हुए कोरोना पॉजिटिव]]></category>
		<category><![CDATA[जगन्नाथ मंदिर]]></category>
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					<description><![CDATA[<img width="600" height="400" src="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2020/09/30005.jpg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" loading="lazy" srcset="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2020/09/30005.jpg 600w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2020/09/30005-300x200.jpg 300w" sizes="auto, (max-width: 600px) 100vw, 600px" />विश्व प्रसिद्ध श्री जगन्नाथ मंदिर में कार्यरत 404 कर्मी कोविड -19 की चपेट में आ गए हैं। संक्रमित होने वालों मेें 351 सेवादार और 53 कर्मचारी हैं। राज्य सरकार ने हाईकोर्ट में हलफनामा देकर बताया कि मौजूदा हालात को देखते हुए श्री जगन्नाथ मंदिर समेत अन्य धार्मिक स्थलों को अभी नहीं खोले जा सकते। कोरोना महामारी &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<img width="600" height="400" src="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2020/09/30005.jpg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" loading="lazy" srcset="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2020/09/30005.jpg 600w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2020/09/30005-300x200.jpg 300w" sizes="auto, (max-width: 600px) 100vw, 600px" /><p>विश्व प्रसिद्ध श्री जगन्नाथ मंदिर में कार्यरत 404 कर्मी कोविड -19 की चपेट में आ गए हैं। संक्रमित होने वालों मेें 351 सेवादार और 53 कर्मचारी हैं।</p>
<p><img loading="lazy" decoding="async" class=" wp-image-378118 aligncenter" src="http://www.livehalchal.com/wp-content/uploads/2020/09/30005.jpg" alt="" width="1061" height="707" srcset="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2020/09/30005.jpg 600w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2020/09/30005-300x200.jpg 300w" sizes="auto, (max-width: 1061px) 100vw, 1061px" /></p>
<p>राज्य सरकार ने हाईकोर्ट में हलफनामा देकर बताया कि मौजूदा हालात को देखते हुए श्री जगन्नाथ मंदिर समेत अन्य धार्मिक स्थलों को अभी नहीं खोले जा सकते। कोरोना महामारी के चलते ये धार्मिक स्थल मार्च महीने से ही श्रद्धालुओं के लिए बंद हैं।</p>
<p>12वीं शताब्दी में निर्मित श्री जगन्नाथ मंदिर प्रशासन (एसजीटीए) के प्रशासक अजय जेना ने मंगलवार को बताया कि बड़ी संख्या में सेवादारों की गैर मौजूदगी के बावजूद सभी परंपराओं का पालन किया जा रहा है। पॉजिटिव होने की पुष्टि के बाद ज्यादातर सेवादार होम आइसोलेशन पर हैं।</p>
<p>भगवान बालभद्र , देवी सुभद्रा और भगवान जगन्नाथ की पूजा के लिए कम से कम 13-13 पुजारियों के समूह की जरूरत होती है। इसलिए 39 पुजारियों के साथ ही अन्य सेवादारों की जरूरत होती है।</p>
<p>बड़ी संख्या में सेवादारों के संक्रमित होने के कारण मंदिर प्रशासन दैनिक पूजा के लिए कनिष्ठ सेवादारों की सेवा लेने के प्रस्ताव पर विचार कर रहा है।</p>
<p>&nbsp;</p>
]]></content:encoded>
					
		
		
			</item>
		<item>
		<title>जगन्नाथ मंदिर का संघर्ष भी भारत के इतिहास की कहानी गांधी परिवार की इस मंदिर में नोंएंट्री</title>
		<link>https://livehalchal.com/%e0%a4%9c%e0%a4%97%e0%a4%a8%e0%a5%8d%e0%a4%a8%e0%a4%be%e0%a4%a5-%e0%a4%ae%e0%a4%82%e0%a4%a6%e0%a4%bf%e0%a4%b0-%e0%a4%95%e0%a4%be-%e0%a4%b8%e0%a4%82%e0%a4%98%e0%a4%b0%e0%a5%8d%e0%a4%b7-%e0%a4%ad/220238</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Namita]]></dc:creator>
		<pubDate>Wed, 10 Apr 2019 07:32:47 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Main Slide]]></category>
		<category><![CDATA[राष्ट्रीय]]></category>
		<category><![CDATA[जगन्नाथ मंदिर]]></category>
		<category><![CDATA[संघर्ष भी भारत के इतिहास की कहानी गांधी परिवार]]></category>
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					<description><![CDATA[<img width="550" height="413" src="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2019/04/जगन्नाथ-मंदिर.jpg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" loading="lazy" srcset="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2019/04/जगन्नाथ-मंदिर.jpg 550w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2019/04/जगन्नाथ-मंदिर-300x225.jpg 300w" sizes="auto, (max-width: 550px) 100vw, 550px" />पिछले कई दिनों से हम ओडिशा के दौरे पर हैं. इस तरह की यात्राओं में किसी राज्य की राजनीति को समझने का मौका तो मिलता ही है. इसके साथ-साथ वहां की धर्म, संस्कृति, समाज और परिवेश को भी समझने में काफी मदद मिलती है. भारत के चार धामों में से एक है- ओडिशा के पुरी &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<img width="550" height="413" src="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2019/04/जगन्नाथ-मंदिर.jpg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" loading="lazy" srcset="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2019/04/जगन्नाथ-मंदिर.jpg 550w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2019/04/जगन्नाथ-मंदिर-300x225.jpg 300w" sizes="auto, (max-width: 550px) 100vw, 550px" /><p><b>पिछले कई दिनों से हम ओडिशा के दौरे पर हैं. इस तरह की यात्राओं में किसी राज्य की राजनीति को समझने का मौका तो मिलता ही है. इसके साथ-साथ वहां की धर्म, संस्कृति, समाज और परिवेश को भी समझने में काफी मदद मिलती है. भारत के चार धामों में से एक है- ओडिशा के पुरी का जगन्नाथ मंदिर. हर हिंदू जीवन में एक बार जगन्नाथ मंदिर के दर्शन ज़रूर करना चाहता है. इस मंदिर के दर्शन करने के लिए लोग पूरी दुनिया से आते हैं. ये मंदिर समुद्र के तट पर मौजूद है. कहते हैं कि समुद्र की लहरों की आवाज़ें इस मंदिर के अंदर शांत हो जाती हैं.</b></p>
<p><b>इस मंदिर की वास्तुकला और इंजीनियरिंग की प्रशंसा दुनिया भर में की जाती है. ये मंदिर भारत की धरोहर है लेकिन इस मंदिर में प्रवेश के लिए किसी व्यक्ति का हिंदू होना अनिवार्य माना जाता है. वर्ष 1984 में भारत की तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी को भी इस मंदिर में प्रवेश नहीं मिल सका था.<img decoding="async" src="https://cdn.dnaindia.com/sites/default/files/styles/full/public/2019/01/08/775449-feroze-gandhi-with-indira-gandhi-010819.jpg" /></b></p>
<p><b>जगन्नाथ मंदिर के सेवायत और इतिहासकारों का मानना है कि इस मंदिर में सिर्फ सनातनी हिंदू ही प्रवेश कर सकते है. गैर हिंदुओं के लिए यहां प्रवेश निषेध है.</b></p>
<p><b>मंदिर में गैर हिंदुओं के प्रवेश पर कब लगी रोक</b></p>
<p><b>इतिहासकार पंडित सूर्यनारायण रथशर्मा ने कहा कि इंदिरा गांधी को 1984 में जगन्नाथ मंदिर में दर्शन इसलिए नहीं करने दिया गया था क्योंकि इंदिरा ने फ़िरोज़ जहांगीर गांधी से शादी की थी, जो कि एक पारसी थे. रथशर्मा ने बताया कि शादी के बाद लड़की का गोत्र पति के गोत्र में बदल जाता है. पारसी लोगों का कोई गोत्र नहीं होता है. इसलिए इंदिरा गांधी हिंदू नहीं रहीं थी. यही नहीं पंडित सूर्यनारायण ने यह भी बताया कि हज़ारों वर्ष पहले जगन्नाथ मंदिर पर कई बार आक्रामण हुआ और ये सभी हमले एक धर्म विशेष के शासकों ने किए, जिस वजह से अपने धर्म को सुरक्षित रखने के लिए जगन्नाथ मंदिर में गैर हिंदुओं के प्रवेश पर रोक लगाई गई.</b></p>
<p><b>राहुल और प्रियंका गांधी को भी नहीं देंगे प्रवेश</b></p>
<p><b>जगन्नाथ मंदिर के वरिष्ठ सेवायत रजत प्रतिहारी का कहना है कि वो राहुल गांधी और प्रियंका गांधी को भी मंदिर में प्रवेश नहीं देंगे क्योंकि वो उन्हें हिंदू नहीं मानते हैं. जगन्नाथ मंदिर के सेवायतों और जगन्नाथ चैतन्य संसद से जुड़े लोगों ने बताया कि राहुल गांधी का गोत्र फ़िरोज़ गांधी से माना जाएगा ना कि नेहरू से. रजत प्रतिहारी ने कहा कि राहुल गांधी भले अपने आप को जनेऊधारी दत्तात्रेय गोत्र का कौल ब्राह्मण बताएं लेकिन सच्चाई ये है कि वो फ़िरोज़ जहांगीर गांधी के पौत्र हैं और फ़िरोज़ जहांगीर गांधी हिंदू नहीं थे.</b></p>
<p><b>एक अन्य वरिष्ठ सेवायत मुक्तिनाथ प्रतिहारी ने कहा कि अगर राहुल प्रियंका को दर्शन करने ही हैं तो वो साल में एक बार निकलने वाले जगन्नाथ यात्रा में मंदिर के बाहर शामिल हो सकते हैं लेकिन मेन मंदिर में प्रवेश नहीं करने दिया जाएगा.<br />
</b></p>
<p><b>केवल इन धर्मों के लोगों को है प्रवेश की अनुमति</b></p>
<p><b>ओडिशा, जगन्नाथ पुरी के लिए पूरी दुनिया में प्रसिद्ध है. विशेष तौर पर भारत का हर हिंदू ये चाहता है कि जीवन में कम से कम एक बार उसे भगवान जगन्नाथ के दर्शन का सौभाग्य जरूर मिले. लेकिन इस मंदिर में प्रवेश की इजाज़त सिर्फ और सिर्फ सनातन हिंदुओं को हैं. मंदिर प्रशासन, सिर्फ हिंदू, सिख, बौद्ध और जैन धर्म के लोगों को ही भगवान जगन्नाथ के मंदिर में प्रवेश की इजाज़त देता है. इसके अलावा दूसरे धर्म के लोगों के मंदिर में प्रवेश पर सदियों पुराना प्रतिबंध लगा हुआ है.</b></p>
<p><b>भारत का सबसे शक्तिशाली व्यक्ति, भारत का प्रधानमंत्री भी अगर हिंदू नहीं है तो वो इस मंदिर में प्रवेश नहीं कर सकता है. वर्ष 1984 में प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी जगन्नाथ मंदिर में प्रवेश करना चाहती थी लेकिन उनको इजाज़त नहीं मिली. जगन्नाथ मंदिर के पुजारियों और सेवायतों के मुताबिक इंदिरा गांधी हिंदू नहीं बल्कि पारसी हैं इसलिए उन्हें मंदिर में प्रवेश की इजाज़त नहीं दी गई.</b></p>
<p><b>इंदिरा को गांधी सरनेम कैसे मिला</b></p>
<p><b>आपको याद होगा कि इसी वर्ष जनवरी के महीने में उत्तर प्रदेश के प्रयागराज से एक ऐतिहासिक Ground Report की थी. पहली बार पूरे देश को प्रयागराज के एक पारसी कब्रिस्तान में मौजूद फिरोज जहांगीर गांधी के कब्र की तस्वीरें दिखाई थीं. हमने ये रिपोर्ट इसलिए की थी क्योंकि इंदिरा गांधी, राजीव गांधी, राहुल गांधी और प्रियंका गांधी, को गांधी Surname पंडित जवाहर लाल नेहरू से नहीं बल्कि फिरोज़ गांधी से मिला. लेकिन इसके बाद भी फिरोज़ गांधी को कांग्रेस पार्टी की तरफ से वो सम्मान नहीं दिया गया जो इंदिरा गांधी और राजीव गांधी को मिला था और आज राहुल और प्रियंका गांधी को मिल रहा है.<img loading="lazy" decoding="async" class="aligncenter" src="https://cdn.dnaindia.com/sites/default/files/styles/full/public/2016/12/03/525281-feroze-gandhi.jpg" width="686" height="386" /></b></p>
<p><b>प्रयागराज में गांधी परिवार के पारसी कनेक्शन की दूसरी कड़ी प्रयागराज से एक हजार किलोमीटर दूर जगन्नाथ पुरी से जुड़ी है. अब गांधी परिवार का कोई भी सदस्य, जगन्नाथ मंदिर में प्रवेश की हिम्मत नहीं जुटा पाता है. कांग्रेस पार्टी के अध्यक्ष राहुल गांधी ने अपनी नरम हिंदुत्व की राजनीति को ऊर्जा देने के लिए केदारनाथ के दर्शन किए और कैलाश मानसरोवर की यात्रा की. हर चुनाव में वो मंदिरों के दौरे करते हैं लेकिन उन्होंने कभी जगन्नाथ मंदिर में दर्शन की योजना नहीं बनाई. जगन्नाथ मंदिर के सेवायतों का कहना है कि वो इंदिरा गांधी और राजीव गांधी की तरह राहुल गांधी और प्रियंका गांधी को पारसी मानते हैं. इसलिए उनको मंदिर में प्रवेश नहीं दिया जा सकता है.</b></p>
<p><b>मंदिर के सेवायतों का ये मानना है कि जगन्नाथ मंदिर को लूटने और मूर्तियों को अ-पवित्र करने के लिए हुए हमलों की वजह से मंदिर में गैर हिंदुओं को प्रवेश दिए जाने की इजाजत नहीं है. मंदिर से जुड़े इतिहास का अध्ययन करने वालों का दावा है कि हमलों की वजह से 144 वर्षों तक भगवान जगन्नाथ को मंदिर से दूर रहना पड़ा. इस मंदिर के संघर्ष की कहानी भारत के महान पूर्वजों की त्याग तपस्या और बलिदान की भी कहानी है.</b></p>
<p><b>जगन्नाथ मंदिर को 20 बार विदेशी हमलावरों ने लूटा</b></p>
<p><b>जगन्नाथ मंदिर के गेट पर ही एक शिलापट्ट में 5 भाषाओं में लिखा हुआ है कि यहां सिर्फ हिंदुओं को ही प्रवेश की इजाज़त है. इसकी वजह समझने के लिए हमने मंदिर प्रशासन से जुड़े लोगों से बात की. मंदिर के सेवायतों की तरफ से हमें ये बताया गया कि जगन्नाथ मंदिर को 20 बार विदेशी हमलावरों के द्वारा लूटा गया. खास तौर पर मुस्लिम सुल्तानों और बादशाहों ने जगन्नाथ मंदिर की मूर्तियों को नष्ट करने के लिए ओडिशा पर बार-बार हमले किया. लेकिन ये हमलावर जगन्नाथ मंदिर की तीन प्रमुख मूर्तियों, भगवान जगन्नाथ, सुभद्रा और बलभद्र की मूर्तियों को नष्ट नहीं कर सके, क्योंकि मंदिर के पुजारियों ने बार-बार मूर्तियों को छुपा दिया. एक बार मूर्तियों को गुप्त रूप से ओडिशा राज्य के बाहर हैदराबाद में भी छुपाया गया था.</b></p>
<p><b>जगन्नाथ मंदिर को भी हमला कर 17 से ज्यादा बाद नष्ट करने की कोशिश की गई</b></p>
<p><b>हमलावरों की वजह से भगवान को अपना मंदिर छोड़ना पड़े, इस बात पर आज के भारत में कोई विश्वास नहीं करेगा. आज भारत में एक संविधान है और सभी को अपनी-अपनी पूजा और उपासना का अधिकार प्राप्त है. लेकिन पिछले एक हजार वर्षों में मुस्लिम बादशाहों और सुल्तानों के राज में हिंदुओं के हजारों मंदिरों को तोड़ा गया. अयोध्या में राम जन्म भूमि, काशी विश्वनाथ और मथुरा में कृष्ण जन्म भूमि का विवाद भी इसी इतिहास से जुड़ा है. इन हमलावरों ने भारत के पश्चिमी समुद्र तट पर मौजूद सोमनाथ के मंदिर को 17 बार तोड़ा था. सोमनाथ के संघर्ष का इतिहास ज्यादातर लोगों को पता है लेकिन जगन्नाथ मंदिर को भी हमला कर 17 से ज्यादा बाद नष्ट करने की कोशिश की गई, इस इतिहास की जानकारी बहुत ही कम लोगों को हैं.  </b></p>
<p><b>हमने इस विषय पर काफी रिसर्च की. ओडिशा सरकार की आधिकारिक वेबसाइट पर मंदिर पर हुए हमलों और मूर्तियों को नष्ट करने की कोशिश का पूरा इतिहास दिया गया है. वेबसाइट में मौजूद एक लेख में बताया गया है कि मंदिर और मूर्तियों को नष्ट करने के लिए 17 बार हमला किया गया.</b></p>
<p><b>पहला हमला वर्ष 1340 में बंगाल के सुल्तान इलियास शाह ने किया</b></p>
<p><b>जगन्नाथ मंदिर को नष्ट करने के लिए पहला हमला वर्ष 1340 में बंगाल के सुल्तान इलियास शाह ने किया था, उस वक्त ओडिशा, उत्कल प्रदेश के नाम से प्रसिद्ध था. उत्कल साम्राज्य के नरेश नरसिंह देव तृतीय ने सुल्तान इलियास शाह से युद्ध किया. बंगाल के सुल्तान इलियास शाह के सैनिकों ने मंदिर परिसर में बहुत खून बहाया और निर्दोष लोगों को मारा. लेकिन राजा नरसिंह देव, जगन्नाथ की मूर्तियों को बचाने में सफल रहे, क्योंकि उनके आदेश पर मूर्तियों को छुपा दिया गया था.</b></p>
<p><b>दूसरा हमला</b></p>
<p><b>वर्ष 1360 में दिल्ली के सुल्तान फिरोज शाह तुगलक ने जगन्नाथ मंदिर पर दूसरा हमला किया.</b></p>
<p><b>तीसरा हमला</b></p>
<p><b>मंदिर पर तीसरा हमला वर्ष 1509 में बंगाल के सुल्तान अलाउद्दीन हुसैन शाह के कमांडर इस्माइल गाजी ने किया. उस वक्त ओडिशा पर सूर्यवंशी प्रताप रुद्रदेव का राज था. हमले की खबर मिलते ही पुजारियों ने मूर्तियों को मंदिर से दूर, बंगाल की खाड़ी में मौजूद चिल्का लेक नामक द्वीप में छुपा दिया था. प्रताप रुद्रदेव ने बंगाल के सुल्तान की सेनाओं को हुगली में हरा दिया और भागने पर मजबूर कर दिया.</b></p>
<p><b>चौथा हमला</b></p>
<p><b>वर्ष 1568 में जगन्नाथ मंदिर पर सबसे बड़ा हमला किया गया. ये हमला काला पहाड़ नाम के एक अफगान हमलावर ने किया था. हमले से पहली ही एक बार फिर मूर्तियों को चिल्का लेक नामक द्वीप में छुपा दिया गया था. लेकिन फिर भी हमलावरों ने मंदिर की कुछ मूर्तियों को जलाकर नष्ट कर दिया था. इस हमले में जगन्नाथ मंदिर की वास्तुकला को काफी नुकसान पहुंचा. ये साल ओडिशा के इतिहास में निर्णायक रहा. इस साल के युद्ध के बाद ओडिशा सीधे इस्लामिक शासन के तहत आ गया.</b></p>
<p><b>पांचवा हमला</b></p>
<p><b>इसके बाद वर्ष 1592 में जगन्नाथ मंदिर पर पांचवा हमला हुआ. ये हमला ओडिशा के सुल्तान ईशा के बेटे उस्मान और कुथू खान के बेटे सुलेमान ने किया. लोगों को बेरहमी से मारा गया, मूर्तियों को अपवित्र किया गया और मंदिर की संपदा को लूट लिया गया.</b></p>
<p><b>छठा हमला</b></p>
<p><b>वर्ष 1601 में बंगाल के नवाब इस्लाम खान के कमांडर मिर्जा खुर्रम ने जगन्नाथ पर छठवां हमला किया. मंदिर के पुजारियों ने मूर्तियों को भार्गवी नदी के रास्ते नाव के द्वारा पुरी के पास एक गांव कपिलेश्वर में छुपा दिया. मूर्तियों को बचाने के लिए उसे दूसरी जगहों पर भी शिफ्ट किया गया.</b></p>
<p><b>सातवां हमला</b></p>
<p><b>जगन्नाथ मंदिर पर सातवां हमला ओडिशा के सूबेदार हाशिम खान ने किया लेकिन हमले से पहले मूर्तियों को खुर्दा के गोपाल मंदिर में छुपा दिया गया. ये जगह मंदिर से करीब 50 किलोमीटर दूर है. इस हमले में भी मंदिर को काफी नुकसान पहुंचा. वर्ष 1608 में जगन्नाथ मंदिर में दोबारा मूर्तियों को वापस लाया गया.</b></p>
<p><b>आठवां हमला</b></p>
<p><b>मंदिर पर आठवां हमला हाशिम खान की सेना में काम करने वाले एक हिंदू जागिरदार ने किया. उस वक्त मंदिर में मूर्तियां मौजूद नहीं थी. मंदिर का धन लूट लिया गया और उसे एक किले में बदल दिया गया.</b></p>
<p><b>नौंवा हमला</b></p>
<p><b>मंदिर पर नौवां हमला वर्ष 1611 में मुगल बादशाह अकबर के नवरत्नों में शामिल राजा टोडरमल के बेटे राजा कल्याण मल ने किया था. इस बार भी पुजारियों ने मूर्तियों को बंगाल की खाड़ी में मौजूद एक द्वीप में छुपा दिया था. मंदिर पर</b></p>
<p><b>दसवां हमला</b></p>
<p><b>10वां हमला भी कल्याण मल ने किया था, इस हमले में मंदिर को बुरी तरह लूटा गया था.</b></p>
<p><b>11वां हमला</b></p>
<p><b>मंदिर पर 11वां हमला वर्ष 1617 में दिल्ली के बादशाह जहांगीर के सेनापति मुकर्रम खान ने किया. उस वक्त मंदिर की मूर्तियों को गोबापदार नामक जगह पर छुपा दिया गया था</b></p>
<p><b>12वां हमला</b></p>
<p><b>मंदिर पर 12वां हमला वर्ष 1621 में ओडिशा के मुगल गवर्नर मिर्जा अहमद बेग ने किया. मुगल बादशाह शाहजहां ने एक बार ओडिशा का दौरा किया था तब भी पुजारियों ने मूर्तियों को छुपा दिया था.</b></p>
<p><b>13वां हमला</b></p>
<p><b>वर्ष 1641 में मंदिर पर 13वां हमला किया गया. ये हमला ओडिशा के मुगल गवर्नर मिर्जा मक्की ने किया.</b></p>
<p><b>14वां हमला</b></p>
<p><b>मंदिर पर 14वां हमला भी मिर्जा मक्की ने ही किया था.</b></p>
<p><b>15वां हमला</b></p>
<p><b>मंदिर पर 15वां हमला अमीर फतेह खान ने किया. उसने मंदिर के रत्नभंडार में मौजूद हीरे, मोती और सोने को लूट लिया.</b></p>
<p><b>16वां हमला</b></p>
<p><b>मंदिर पर 16वां हमला मुगलत बादशाह औरंगजेब के आदेश पर वर्ष 1692 में हुआ. औरंगजेब ने मंदिर को पूरी तरह ध्वस्त करने का आदेश दिया था, तब ओडिशा का नवाब इकराम खान था, जो मुगलों के अधीन था. इकराम खान ने जगन्नाथ मंदिर पर हमला कर भगवान का सोने के मुकुट लूट लिया. उस वक्त जगन्नाथ मंदिर की मुर्तियों को श्रीमंदिर नामक एक जगह के बिमला मंदिर में छुपाया गया था.</b></p>
<p><b>17वां हमला</b></p>
<p><b>मंदिर पर 17वां और आखिरी हमला, वर्ष 1699 में मुहम्मद तकी खान ने किया था. तकी खान, वर्ष 1727 से 1734 के बीच ओडिशा का नायब सूबेदार था. इस बार भी मूर्तियों को छुपाया गया और लगातार दूसरी जगहों पर शिफ्ट किया गया. कुछ समय के लिए मूर्तियों को हैदराबाद में भी रखा गया.</b></p>
<p><b>दिल्ली में मुगल साम्राज्य के कमजोर होने और मराठों की ताकत बढ़ने के बाद जगन्नाथ मंदिर पर आया संकट टला और धीरे धीरे जगन्नाथ मंदिर का वैभव वापस लौटा. जगन्नाथ मंदिर के मूर्तियों के बार बार बच जाने की वजह से हमलावर कभी अपने मंसूबों में कामयाब नहीं हो पाए. पुरी के स्थानीय लोग लगातार इस मंदिर को बचाने के लिए संघर्ष करते रहे. ओडिशा के लोग मंदिर के सुरक्षित रहने को भगवान जगन्नाथ का एक चमत्कार मानते हैं.</b></p>
<p><b>इस मंदिर की वास्तुकला और इंजीनियरिंग की प्रशंसा दुनिया भर में की जाती है. ये मंदिर भारत की धरोहर है लेकिन इस मंदिर में प्रवेश के लिए किसी व्यक्ति का हिंदू होना अनिवार्य माना जाता है. वर्ष 1984 में भारत की तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी को भी इस मंदिर में प्रवेश नहीं मिल सका था.</b></p>
<p><b>जगन्नाथ मंदिर के सेवायत और इतिहासकारों का मानना है कि इस मंदिर में सिर्फ सनातनी हिंदू ही प्रवेश कर सकते है. गैर हिंदुओं के लिए यहां प्रवेश निषेध है.</b></p>
<p><b>मंदिर में गैर हिंदुओं के प्रवेश पर कब लगी रोक</b></p>
<p><b>इतिहासकार पंडित सूर्यनारायण रथशर्मा ने कहा कि इंदिरा गांधी को 1984 में जगन्नाथ मंदिर में दर्शन इसलिए नहीं करने दिया गया था क्योंकि इंदिरा ने फ़िरोज़ जहांगीर गांधी से शादी की थी, जो कि एक पारसी थे. रथशर्मा ने बताया कि शादी के बाद लड़की का गोत्र पति के गोत्र में बदल जाता है. पारसी लोगों का कोई गोत्र नहीं होता है. इसलिए इंदिरा गांधी हिंदू नहीं रहीं थी. यही नहीं पंडित सूर्यनारायण ने यह भी बताया कि हज़ारों वर्ष पहले जगन्नाथ मंदिर पर कई बार आक्रामण हुआ और ये सभी हमले एक धर्म विशेष के शासकों ने किए, जिस वजह से अपने धर्म को सुरक्षित रखने के लिए जगन्नाथ मंदिर में गैर हिंदुओं के प्रवेश पर रोक लगाई गई.</b></p>
<p><b>राहुल और प्रियंका गांधी को भी नहीं देंगे प्रवेश</b></p>
<p><b>जगन्नाथ मंदिर के वरिष्ठ सेवायत रजत प्रतिहारी का कहना है कि वो राहुल गांधी और प्रियंका गांधी को भी मंदिर में प्रवेश नहीं देंगे क्योंकि वो उन्हें हिंदू नहीं मानते हैं. जगन्नाथ मंदिर के सेवायतों और जगन्नाथ चैतन्य संसद से जुड़े लोगों ने बताया कि राहुल गांधी का गोत्र फ़िरोज़ गांधी से माना जाएगा ना कि नेहरू से. रजत प्रतिहारी ने कहा कि राहुल गांधी भले अपने आप को जनेऊधारी दत्तात्रेय गोत्र का कौल ब्राह्मण बताएं लेकिन सच्चाई ये है कि वो फ़िरोज़ जहांगीर गांधी के पौत्र हैं और फ़िरोज़ जहांगीर गांधी हिंदू नहीं थे.</b></p>
<p><b>एक अन्य वरिष्ठ सेवायत मुक्तिनाथ प्रतिहारी ने कहा कि अगर राहुल प्रियंका को दर्शन करने ही हैं तो वो साल में एक बार निकलने वाले जगन्नाथ यात्रा में मंदिर के बाहर शामिल हो सकते हैं लेकिन मेन मंदिर में प्रवेश नहीं करने दिया जाएगा.<br />
</b></p>
<p><b>केवल इन धर्मों के लोगों को है प्रवेश की अनुमति</b></p>
<p><b>ओडिशा, जगन्नाथ पुरी के लिए पूरी दुनिया में प्रसिद्ध है. विशेष तौर पर भारत का हर हिंदू ये चाहता है कि जीवन में कम से कम एक बार उसे भगवान जगन्नाथ के दर्शन का सौभाग्य जरूर मिले. लेकिन इस मंदिर में प्रवेश की इजाज़त सिर्फ और सिर्फ सनातन हिंदुओं को हैं. मंदिर प्रशासन, सिर्फ हिंदू, सिख, बौद्ध और जैन धर्म के लोगों को ही भगवान जगन्नाथ के मंदिर में प्रवेश की इजाज़त देता है. इसके अलावा दूसरे धर्म के लोगों के मंदिर में प्रवेश पर सदियों पुराना प्रतिबंध लगा हुआ है.</b></p>
<p><b>भारत का सबसे शक्तिशाली व्यक्ति, भारत का प्रधानमंत्री भी अगर हिंदू नहीं है तो वो इस मंदिर में प्रवेश नहीं कर सकता है. वर्ष 1984 में प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी जगन्नाथ मंदिर में प्रवेश करना चाहती थी लेकिन उनको इजाज़त नहीं मिली. जगन्नाथ मंदिर के पुजारियों और सेवायतों के मुताबिक इंदिरा गांधी हिंदू नहीं बल्कि पारसी हैं इसलिए उन्हें मंदिर में प्रवेश की इजाज़त नहीं दी गई.</b></p>
<p><b>इंदिरा को गांधी सरनेम कैसे मिला</b></p>
<p><b>आपको याद होगा कि इसी वर्ष जनवरी के महीने में उत्तर प्रदेश के प्रयागराज से एक ऐतिहासिक Ground Report की थी. पहली बार पूरे देश को प्रयागराज के एक पारसी कब्रिस्तान में मौजूद फिरोज जहांगीर गांधी के कब्र की तस्वीरें दिखाई थीं. हमने ये रिपोर्ट इसलिए की थी क्योंकि इंदिरा गांधी, राजीव गांधी, राहुल गांधी और प्रियंका गांधी, को गांधी Surname पंडित जवाहर लाल नेहरू से नहीं बल्कि फिरोज़ गांधी से मिला. लेकिन इसके बाद भी फिरोज़ गांधी को कांग्रेस पार्टी की तरफ से वो सम्मान नहीं दिया गया जो इंदिरा गांधी और राजीव गांधी को मिला था और आज राहुल और प्रियंका गांधी को मिल रहा है.</b></p>
<p><b>प्रयागराज में गांधी परिवार के पारसी कनेक्शन की दूसरी कड़ी प्रयागराज से एक हजार किलोमीटर दूर जगन्नाथ पुरी से जुड़ी है. अब गांधी परिवार का कोई भी सदस्य, जगन्नाथ मंदिर में प्रवेश की हिम्मत नहीं जुटा पाता है. कांग्रेस पार्टी के अध्यक्ष राहुल गांधी ने अपनी नरम हिंदुत्व की राजनीति को ऊर्जा देने के लिए केदारनाथ के दर्शन किए और कैलाश मानसरोवर की यात्रा की. हर चुनाव में वो मंदिरों के दौरे करते हैं लेकिन उन्होंने कभी जगन्नाथ मंदिर में दर्शन की योजना नहीं बनाई. जगन्नाथ मंदिर के सेवायतों का कहना है कि वो इंदिरा गांधी और राजीव गांधी की तरह राहुल गांधी और प्रियंका गांधी को पारसी मानते हैं. इसलिए उनको मंदिर में प्रवेश नहीं दिया जा सकता है.</b></p>
<p><b>मंदिर के सेवायतों का ये मानना है कि जगन्नाथ मंदिर को लूटने और मूर्तियों को अ-पवित्र करने के लिए हुए हमलों की वजह से मंदिर में गैर हिंदुओं को प्रवेश दिए जाने की इजाजत नहीं है. मंदिर से जुड़े इतिहास का अध्ययन करने वालों का दावा है कि हमलों की वजह से 144 वर्षों तक भगवान जगन्नाथ को मंदिर से दूर रहना पड़ा. इस मंदिर के संघर्ष की कहानी भारत के महान पूर्वजों की त्याग तपस्या और बलिदान की भी कहानी है.</b></p>
<p><b>जगन्नाथ मंदिर को 20 बार विदेशी हमलावरों ने लूटा</b></p>
<p><b>जगन्नाथ मंदिर के गेट पर ही एक शिलापट्ट में 5 भाषाओं में लिखा हुआ है कि यहां सिर्फ हिंदुओं को ही प्रवेश की इजाज़त है. इसकी वजह समझने के लिए हमने मंदिर प्रशासन से जुड़े लोगों से बात की. मंदिर के सेवायतों की तरफ से हमें ये बताया गया कि जगन्नाथ मंदिर को 20 बार विदेशी हमलावरों के द्वारा लूटा गया. खास तौर पर मुस्लिम सुल्तानों और बादशाहों ने जगन्नाथ मंदिर की मूर्तियों को नष्ट करने के लिए ओडिशा पर बार-बार हमले किया. लेकिन ये हमलावर जगन्नाथ मंदिर की तीन प्रमुख मूर्तियों, भगवान जगन्नाथ, सुभद्रा और बलभद्र की मूर्तियों को नष्ट नहीं कर सके, क्योंकि मंदिर के पुजारियों ने बार-बार मूर्तियों को छुपा दिया. एक बार मूर्तियों को गुप्त रूप से ओडिशा राज्य के बाहर हैदराबाद में भी छुपाया गया था.</b></p>
<p><b>जगन्नाथ मंदिर को भी हमला कर 17 से ज्यादा बाद नष्ट करने की कोशिश की गई</b></p>
<p><b>हमलावरों की वजह से भगवान को अपना मंदिर छोड़ना पड़े, इस बात पर आज के भारत में कोई विश्वास नहीं करेगा. आज भारत में एक संविधान है और सभी को अपनी-अपनी पूजा और उपासना का अधिकार प्राप्त है. लेकिन पिछले एक हजार वर्षों में मुस्लिम बादशाहों और सुल्तानों के राज में हिंदुओं के हजारों मंदिरों को तोड़ा गया. अयोध्या में राम जन्म भूमि, काशी विश्वनाथ और मथुरा में कृष्ण जन्म भूमि का विवाद भी इसी इतिहास से जुड़ा है. इन हमलावरों ने भारत के पश्चिमी समुद्र तट पर मौजूद सोमनाथ के मंदिर को 17 बार तोड़ा था. सोमनाथ के संघर्ष का इतिहास ज्यादातर लोगों को पता है लेकिन जगन्नाथ मंदिर को भी हमला कर 17 से ज्यादा बाद नष्ट करने की कोशिश की गई, इस इतिहास की जानकारी बहुत ही कम लोगों को हैं.  </b></p>
<p><b>हमने इस विषय पर काफी रिसर्च की. ओडिशा सरकार की आधिकारिक वेबसाइट पर मंदिर पर हुए हमलों और मूर्तियों को नष्ट करने की कोशिश का पूरा इतिहास दिया गया है. वेबसाइट में मौजूद एक लेख में बताया गया है कि मंदिर और मूर्तियों को नष्ट करने के लिए 17 बार हमला किया गया.</b></p>
<p><b>पहला हमला वर्ष 1340 में बंगाल के सुल्तान इलियास शाह ने किया</b></p>
<p><b>जगन्नाथ मंदिर को नष्ट करने के लिए पहला हमला वर्ष 1340 में बंगाल के सुल्तान इलियास शाह ने किया था, उस वक्त ओडिशा, उत्कल प्रदेश के नाम से प्रसिद्ध था. उत्कल साम्राज्य के नरेश नरसिंह देव तृतीय ने सुल्तान इलियास शाह से युद्ध किया. बंगाल के सुल्तान इलियास शाह के सैनिकों ने मंदिर परिसर में बहुत खून बहाया और निर्दोष लोगों को मारा. लेकिन राजा नरसिंह देव, जगन्नाथ की मूर्तियों को बचाने में सफल रहे, क्योंकि उनके आदेश पर मूर्तियों को छुपा दिया गया था.</b></p>
<p><b>दूसरा हमला</b></p>
<p><b>वर्ष 1360 में दिल्ली के सुल्तान फिरोज शाह तुगलक ने जगन्नाथ मंदिर पर दूसरा हमला किया.</b></p>
<p><b>तीसरा हमला</b></p>
<p><b>मंदिर पर तीसरा हमला वर्ष 1509 में बंगाल के सुल्तान अलाउद्दीन हुसैन शाह के कमांडर इस्माइल गाजी ने किया. उस वक्त ओडिशा पर सूर्यवंशी प्रताप रुद्रदेव का राज था. हमले की खबर मिलते ही पुजारियों ने मूर्तियों को मंदिर से दूर, बंगाल की खाड़ी में मौजूद चिल्का लेक नामक द्वीप में छुपा दिया था. प्रताप रुद्रदेव ने बंगाल के सुल्तान की सेनाओं को हुगली में हरा दिया और भागने पर मजबूर कर दिया.</b></p>
<p><b>चौथा हमला</b></p>
<p><b>वर्ष 1568 में जगन्नाथ मंदिर पर सबसे बड़ा हमला किया गया. ये हमला काला पहाड़ नाम के एक अफगान हमलावर ने किया था. हमले से पहली ही एक बार फिर मूर्तियों को चिल्का लेक नामक द्वीप में छुपा दिया गया था. लेकिन फिर भी हमलावरों ने मंदिर की कुछ मूर्तियों को जलाकर नष्ट कर दिया था. इस हमले में जगन्नाथ मंदिर की वास्तुकला को काफी नुकसान पहुंचा. ये साल ओडिशा के इतिहास में निर्णायक रहा. इस साल के युद्ध के बाद ओडिशा सीधे इस्लामिक शासन के तहत आ गया.</b></p>
<p><b>पांचवा हमला</b></p>
<p><b>इसके बाद वर्ष 1592 में जगन्नाथ मंदिर पर पांचवा हमला हुआ. ये हमला ओडिशा के सुल्तान ईशा के बेटे उस्मान और कुथू खान के बेटे सुलेमान ने किया. लोगों को बेरहमी से मारा गया, मूर्तियों को अपवित्र किया गया और मंदिर की संपदा को लूट लिया गया.</b></p>
<p><b>छठा हमला</b></p>
<p><b>वर्ष 1601 में बंगाल के नवाब इस्लाम खान के कमांडर मिर्जा खुर्रम ने जगन्नाथ पर छठवां हमला किया. मंदिर के पुजारियों ने मूर्तियों को भार्गवी नदी के रास्ते नाव के द्वारा पुरी के पास एक गांव कपिलेश्वर में छुपा दिया. मूर्तियों को बचाने के लिए उसे दूसरी जगहों पर भी शिफ्ट किया गया.</b></p>
<p><b>सातवां हमला</b></p>
<p><b>जगन्नाथ मंदिर पर सातवां हमला ओडिशा के सूबेदार हाशिम खान ने किया लेकिन हमले से पहले मूर्तियों को खुर्दा के गोपाल मंदिर में छुपा दिया गया. ये जगह मंदिर से करीब 50 किलोमीटर दूर है. इस हमले में भी मंदिर को काफी नुकसान पहुंचा. वर्ष 1608 में जगन्नाथ मंदिर में दोबारा मूर्तियों को वापस लाया गया.</b></p>
<p><b>आठवां हमला</b></p>
<p><b>मंदिर पर आठवां हमला हाशिम खान की सेना में काम करने वाले एक हिंदू जागिरदार ने किया. उस वक्त मंदिर में मूर्तियां मौजूद नहीं थी. मंदिर का धन लूट लिया गया और उसे एक किले में बदल दिया गया.</b></p>
<p><b>नौंवा हमला</b></p>
<p><b>मंदिर पर नौवां हमला वर्ष 1611 में मुगल बादशाह अकबर के नवरत्नों में शामिल राजा टोडरमल के बेटे राजा कल्याण मल ने किया था. इस बार भी पुजारियों ने मूर्तियों को बंगाल की खाड़ी में मौजूद एक द्वीप में छुपा दिया था. मंदिर पर</b></p>
<p><b>दसवां हमला</b></p>
<p><b>10वां हमला भी कल्याण मल ने किया था, इस हमले में मंदिर को बुरी तरह लूटा गया था.</b></p>
<p><b>11वां हमला</b></p>
<p><b>मंदिर पर 11वां हमला वर्ष 1617 में दिल्ली के बादशाह जहांगीर के सेनापति मुकर्रम खान ने किया. उस वक्त मंदिर की मूर्तियों को गोबापदार नामक जगह पर छुपा दिया गया था</b></p>
<p><b>12वां हमला</b></p>
<p><b>मंदिर पर 12वां हमला वर्ष 1621 में ओडिशा के मुगल गवर्नर मिर्जा अहमद बेग ने किया. मुगल बादशाह शाहजहां ने एक बार ओडिशा का दौरा किया था तब भी पुजारियों ने मूर्तियों को छुपा दिया था.</b></p>
<p><b>13वां हमला</b></p>
<p><b>वर्ष 1641 में मंदिर पर 13वां हमला किया गया. ये हमला ओडिशा के मुगल गवर्नर मिर्जा मक्की ने किया.</b></p>
<p><b>14वां हमला</b></p>
<p><b>मंदिर पर 14वां हमला भी मिर्जा मक्की ने ही किया था.</b></p>
<p><b>15वां हमला</b></p>
<p><b>मंदिर पर 15वां हमला अमीर फतेह खान ने किया. उसने मंदिर के रत्नभंडार में मौजूद हीरे, मोती और सोने को लूट लिया.</b></p>
<p><b>16वां हमला</b></p>
<p><b>मंदिर पर 16वां हमला मुगलत बादशाह औरंगजेब के आदेश पर वर्ष 1692 में हुआ. औरंगजेब ने मंदिर को पूरी तरह ध्वस्त करने का आदेश दिया था, तब ओडिशा का नवाब इकराम खान था, जो मुगलों के अधीन था. इकराम खान ने जगन्नाथ मंदिर पर हमला कर भगवान का सोने के मुकुट लूट लिया. उस वक्त जगन्नाथ मंदिर की मुर्तियों को श्रीमंदिर नामक एक जगह के बिमला मंदिर में छुपाया गया था.</b></p>
<p><b>17वां हमला</b></p>
<p><b>मंदिर पर 17वां और आखिरी हमला, वर्ष 1699 में मुहम्मद तकी खान ने किया था. तकी खान, वर्ष 1727 से 1734 के बीच ओडिशा का नायब सूबेदार था. इस बार भी मूर्तियों को छुपाया गया और लगातार दूसरी जगहों पर शिफ्ट किया गया. कुछ समय के लिए मूर्तियों को हैदराबाद में भी रखा गया.</b></p>
<p><b>दिल्ली में मुगल साम्राज्य के कमजोर होने और मराठों की ताकत बढ़ने के बाद जगन्नाथ मंदिर पर आया संकट टला और धीरे धीरे जगन्नाथ मंदिर का वैभव वापस लौटा. जगन्नाथ मंदिर के मूर्तियों के बार बार बच जाने की वजह से हमलावर कभी अपने मंसूबों में कामयाब नहीं हो पाए. पुरी के स्थानीय लोग लगातार इस मंदिर को बचाने के लिए संघर्ष करते रहे. ओडिशा के लोग मंदिर के सुरक्षित रहने को भगवान जगन्नाथ का एक चमत्कार मानते हैं.</b></p>
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		<title>जगन्नाथ मंदिर के इतने चमत्कार, विज्ञान भी करता है जिसको नमस्कार&#8230;</title>
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		<dc:creator><![CDATA[admin]]></dc:creator>
		<pubDate>Sun, 16 Jul 2017 05:31:57 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[अध्यात्म]]></category>
		<category><![CDATA[धर्म]]></category>
		<category><![CDATA[जगन्नाथ मंदिर]]></category>
		<category><![CDATA[नहीं बनती गुंबद की परछाई]]></category>
		<category><![CDATA[सुदर्शन चक्र]]></category>
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					<description><![CDATA[<img width="618" height="278" src="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2017/07/img_20170715220835.jpg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="जगन्नाथ मंदिर के इतने चमत्कार, विज्ञान भी करता है जिसको नमस्कार..." style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" loading="lazy" srcset="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2017/07/img_20170715220835.jpg 1000w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2017/07/img_20170715220835-300x135.jpg 300w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2017/07/img_20170715220835-768x346.jpg 768w" sizes="auto, (max-width: 618px) 100vw, 618px" />New Delhi: जगन्नाथ धाम चारधाम में से एक है। यहां भगवान अपने बड़े भाई बलराम और बहन सुभद्रा के साथ विराजते हैं। कहा जाता है कि द्वापर युग के बाद भगवान कृष्ण जगन्नाथ के रूप में पुरी में निवास करने लगे।इस मंदिर की बहुत सी विशेषताएं हैं। यहां के कुछ चमत्कारों को जानकर कोई भी &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<img width="618" height="278" src="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2017/07/img_20170715220835.jpg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="जगन्नाथ मंदिर के इतने चमत्कार, विज्ञान भी करता है जिसको नमस्कार..." style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" loading="lazy" srcset="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2017/07/img_20170715220835.jpg 1000w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2017/07/img_20170715220835-300x135.jpg 300w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2017/07/img_20170715220835-768x346.jpg 768w" sizes="auto, (max-width: 618px) 100vw, 618px" /><p><strong>New Delhi: जगन्नाथ धाम चारधाम में से एक है। यहां भगवान अपने बड़े भाई बलराम और बहन सुभद्रा के साथ विराजते हैं। कहा जाता है कि द्वापर युग के बाद भगवान कृष्ण जगन्नाथ के रूप में पुरी में निवास करने लगे।<img loading="lazy" decoding="async" class="aligncenter wp-image-64564 " src="http://www.livehalchal.com/wp-content/uploads/2017/07/img_20170715220835.jpg" alt="जगन्नाथ मंदिर के इतने चमत्कार, विज्ञान भी करता है जिसको नमस्कार..." width="696" height="313" srcset="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2017/07/img_20170715220835.jpg 1000w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2017/07/img_20170715220835-300x135.jpg 300w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2017/07/img_20170715220835-768x346.jpg 768w" sizes="auto, (max-width: 696px) 100vw, 696px" /></strong><strong>इस मंदिर की बहुत सी विशेषताएं हैं। यहां के कुछ चमत्कारों को जानकर कोई भी हैरान हुए बगैर नहीं रह सकता है। यहां हम बता रहे हैं भगवान जगन्नाथ के इस पावन धाम के कुछ रोमांचक रहस्य।</strong></p>
<p><span style="color: #ff6600;"><strong>हवा के विपरीत लहराता है ध्वज</strong></span></p>
<p><strong>जगन्नाथ मंदिर के ऊपर स्थापित लाल ध्वज सदैव हवा के विपरीत दिशा में लहराता है। ऐसा किस कारण होता है यह कोई नहीं जानता, लेकिन यह अपने आप में आश्चर्यचकित कर देने वाली बात है।</strong><strong><img loading="lazy" decoding="async" class="img-thumbnail aligncenter" src="http://liveindia.live/hindi/userfiles//lp-1(6).jpg" alt="" width="700" height="315" /></strong><strong>इसके अलावा यह भी आश्&#x200d;चर्य है कि प्रतिदिन सायंकाल मंदिर के ऊपर स्थापित ध्वज को मानव द्वारा उल्टा चढ़कर बदला जाता है। ध्वज भी इतना भव्य है कि जब यह लहराता है तो इसे लोग देखते ही रह जाते हैं। ध्वज पर शिव का चंद्र बना हुआ है।</strong></p>
<p><span style="color: #ff6600;"><strong>नहीं बनती गुंबद की परछाई</strong></span></p>
<p><strong>यह दुनिया का सबसे भव्य और ऊंचा मंदिर है। यह मंदिर 4 लाख वर्गफुट क्षेत्र में फैला है और इसकी ऊंचाई लगभग 214 फुट है। मंदिर के पास खड़े रहकर इसका गुंबद देख पाना असंभव है। आश्चर्य की बात यह है कि मुख्य गुंबद की परछाई दिन के किसी भी समय दिखाई नहीं देती।</strong><strong><img loading="lazy" decoding="async" class="img-thumbnail aligncenter" src="http://liveindia.live/hindi/userfiles//bg-1(5).jpg" alt="" width="700" height="350" /></strong><span style="color: #ff6600;"><strong> सुदर्शन चक्र </strong></span></p>
<p><strong>पुरी में किसी भी स्थान से आप मंदिर के शीर्ष पर लगे सुदर्शन चक्र को देखेंगे तो वह आपको सदैव अपने सामने ही लगा दिखेगा। इसे नीलचक्र भी कहते हैं। यह अष्टधातु से निर्मित है और अति पावन और पवित्र माना जाता है।</strong></p>
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