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	<title>चातुर्मास &#8211; Live Halchal</title>
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	<title>चातुर्मास &#8211; Live Halchal</title>
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		<title>क्या करियर में आ रही है रुकावट? चातुर्मास में घर के मुख्य द्वार पर करें ये काम</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Live Halchal Web_Wing]]></dc:creator>
		<pubDate>Fri, 10 Jul 2026 06:03:42 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[अध्यात्म]]></category>
		<category><![CDATA[धर्म]]></category>
		<category><![CDATA[चातुर्मास]]></category>
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					<description><![CDATA[<img width="618" height="393" src="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2026/07/34-5.jpg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" fetchpriority="high" srcset="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2026/07/34-5.jpg 842w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2026/07/34-5-300x191.jpg 300w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2026/07/34-5-768x488.jpg 768w" sizes="(max-width: 618px) 100vw, 618px" />धार्मिक मान्यता के अनुसार, चातुर्मास की अवधि के दौरान 4 महीने के लिए भगवान विष्णु योग निद्रा में चले जाते हैं। इस दौरान शुभ और मांगलिक काम नहीं किए जाते। चातुर्मास (Chaturmas 2026) में सावन, भाद्रपद, आश्विन और कार्तिक माह पड़ते हैं। वास्तु शास्त्र के अनुसार, चातुर्मास के दौरान घर के मुख्य द्वार पर वास्तु &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<img width="618" height="393" src="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2026/07/34-5.jpg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" srcset="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2026/07/34-5.jpg 842w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2026/07/34-5-300x191.jpg 300w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2026/07/34-5-768x488.jpg 768w" sizes="(max-width: 618px) 100vw, 618px" />
<p>धार्मिक मान्यता के अनुसार, चातुर्मास की अवधि के दौरान 4 महीने के लिए भगवान विष्णु योग निद्रा में चले जाते हैं। इस दौरान शुभ और मांगलिक काम नहीं किए जाते। चातुर्मास (Chaturmas 2026) में सावन, भाद्रपद, आश्विन और कार्तिक माह पड़ते हैं।</p>



<p>वास्तु शास्त्र के अनुसार, चातुर्मास के दौरान घर के मुख्य द्वार पर वास्तु से जुड़े विशेष काम करने से घर में सुख-शांति का आगमन होता है और नकारात्मक ऊर्जा का नाश होता है। अगर आप भी जीवन में सुख-शांति चाहते हैं, तो चातुर्मास में इस आर्टिकल में बताए गए विशेष कामों को जरूर करें। ऐसा माना जाता है कि वास्तु की इन नीतियों का पालन करने से घर में बुरी शक्तियों का प्रवेश नहीं होता।</p>



<ol class="wp-block-list">
<li>आम या अशोक के पत्तों का तोरण- हिंदू धर्म में घर के मुख्य द्वार पर तोरण लगाने का अधिक महत्व है। वास्तु शास्त्र के अनुसार, घर के मुख्य द्वार पर आम या अशोक के पत्तों का तोरण लगाने से घर में सकारात्मक ऊर्जा का आगमन होता है और बुरी शक्तियों की समस्या से छुटकारा मिलता है। इसलिए चातुर्मास में अपने घर के मुख्य द्वार पर तोरण जरूर लगाएं। ऐसा माना जाता है कि इस उपाय को करने से जीवन में शुभ परिणाम देखने को मिलते हैं।</li>



<li>रोली या हल्दी का स्वास्तिक- इसके अलावा घर के मुख्य द्वार पर स्वास्तिक बनाना अधिक लाभकारी माना जाता है। स्वास्तिक को रोली या हल्दी से बनाना चाहिए। अगर आप भी घर में सुख-शांति का आगमन चाहते हैं, तो चातुर्मास के दौरान घर के मुख्य द्वार पर स्वास्तिक जरूर बनाएं। ऐसा माना जाता है कि इस उपाय को करने से घर में सुख-शांति और सौभाग्य का आगमन होता है और गुरु ग्रह मजबूत होता है, जिससे करियर में सफलता प्राप्त होती है। साथ ही धन में वृद्धि होती है।</li>



<li>घोड़े की नाल- अगर आपको या फिर घर में किसी सदस्य को बार-बार नजर लगती है, तो चातुर्मास के दौरान घर के मुख्य द्वार पर &#8216;U&#8217; आकार में काले घोड़े की नाल जरूर लगाएं। वास्तु शास्त्र के अनुसार, इस काम को करने से घर में नकारात्मक ऊर्जा का प्रवेश नहीं होता है और घर लोगों को बुरी नजर नहीं लगती।</li>



<li>शाम को दीपक जलाएं- हिंदू धर्म में शाम समय मुख्य द्वार पर दीपक जलाने का अधिक महत्व है। ऐसा माना जाता है कि रोजाना शाम के समय घर के मुख्य द्वार पर दीपक जलाने से घर में मां लक्ष्मी का आगमन होता है और दरिद्रता नहीं आती। साथ ही परिवार के सदस्यों के बीच सुख-शांति बनी रहती है।</li>
</ol>
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		<title>चातुर्मास में कब कौन-सी एकादशी है?</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Live Halchal Web_Wing]]></dc:creator>
		<pubDate>Sat, 20 Jun 2026 06:00:01 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[अध्यात्म]]></category>
		<category><![CDATA[धर्म]]></category>
		<category><![CDATA[चातुर्मास]]></category>
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					<description><![CDATA[<img width="618" height="357" src="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2026/06/3-39.jpg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" srcset="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2026/06/3-39.jpg 885w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2026/06/3-39-300x173.jpg 300w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2026/06/3-39-768x443.jpg 768w" sizes="(max-width: 618px) 100vw, 618px" />सनातन धर्म में चातुर्मास का अधिक महत्व है। वैदिक पंचांग के अनुसार, चातुर्मास की शुरुआत आषाढ़ माह के शुक्ल पक्ष की देवशयनी एकादशी से होती है और कार्तिक माह के शुक्ल पक्ष की देवउठनी एकादशी के दिन समापन होता है। इस अवधि के दौरान भगवान विष्णु क्षीरसागर में शेषनाग की शय्या पर चार महीने के &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<img width="618" height="357" src="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2026/06/3-39.jpg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" loading="lazy" srcset="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2026/06/3-39.jpg 885w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2026/06/3-39-300x173.jpg 300w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2026/06/3-39-768x443.jpg 768w" sizes="auto, (max-width: 618px) 100vw, 618px" />
<p>सनातन धर्म में चातुर्मास का अधिक महत्व है। वैदिक पंचांग के अनुसार, चातुर्मास की शुरुआत आषाढ़ माह के शुक्ल पक्ष की देवशयनी एकादशी से होती है और कार्तिक माह के शुक्ल पक्ष की देवउठनी एकादशी के दिन समापन होता है। इस अवधि के दौरान भगवान विष्णु क्षीरसागर में शेषनाग की शय्या पर चार महीने के लिए योग निद्रा में चले जाते हैं। इस बार 25 जुलाई से चातुर्मास की शुरुआत होगी।</p>



<p>इस दौरान सृष्टि संचालन का भगवान शिव संभालते हैं। चातुर्मास की एकादशी तिथि को बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। एकादशी व्रत करने से साधक को सभी पापों से छुटकारा मिलता है। ऐसे में आइए इस आर्टिकल में आपको बताते हैं चातुर्मास में कब कौन-सी एकादशी मनाई जाएगी।</p>



<p><strong>चातुर्मास में कब-कब है एकादशी?<br></strong>आषाढ़ माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी से चातुर्मास की शुरुआत होती है। इस दिन देवशयनी एकादशी मनाई जाती है। यह एकादशी 25 जुलाई को मनाई जाएगी।<br>सावन माह के कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि पर कामिका एकादशी मनाई जाती है। यह व्रत 9 अगस्त को किया जाएगा।<br>सावन माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी को श्रावण पुत्रदा एकादशी के रूप में मनाई जाती है। श्रावण पुत्रदा एकादशी 23 अगस्त को है।<br>भाद्रपद माह के कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि पर अजा एकादशी व्रत किया जाता है। यह एकादशी 07 सितंबर को मनाई जाएगी।<br>भाद्रपद माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि पर परिवर्तिनी एकादशी व्रत किया जाता है। इस बार यह एकादशी 22 सितंबर को है।<br>अश्विन माह कृष्ण पक्ष में इन्दिरा एकादशी पड़ती है। इस बार इन्दिरा एकादशी व्रत 6 अक्टूबर को किया जाएगा।<br>अश्विन माह शुक्ल पक्ष में पापांकुशा एकादशी मनाई जाती है। वैदिक पंचांग के अनुसार, पापांकुशा एकादशी व्रत 22 अक्टूबर को किया जाएगा।<br>कार्तिक माह माह में रमा एकादशी मनाई जाती है। इस बार रमा एकादशी व्रत 5 नवंबर को है।<br>कार्तिक माह माह के शुक्ल पक्ष में देवउठनी एकादशी व्रत किया जाता है। इस दिन चातुर्मास का समापन हो जाता है और तुलसी विवाह मनाया जाता है। इस बार देवउठनी एकादशी 20 नवंबर को है।</p>
]]></content:encoded>
					
		
		
			</item>
		<item>
		<title>चातुर्मास के दौरान रोजाना करें तुलसी पूजन, खुश होंगे भगवान विष्णु</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Live Halchal Web_Wing]]></dc:creator>
		<pubDate>Mon, 07 Jul 2025 04:54:25 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[अध्यात्म]]></category>
		<category><![CDATA[धर्म]]></category>
		<category><![CDATA[चातुर्मास]]></category>
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					<description><![CDATA[<img width="424" height="406" src="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2025/07/gfd-large.jpg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" loading="lazy" srcset="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2025/07/gfd.jpg 424w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2025/07/gfd-medium.jpg 300w" sizes="auto, (max-width: 424px) 100vw, 424px" />चातुर्मास (Chaturmas 2025) का समय बहुत महत्वपूर्ण होता है जिसमें भगवान विष्णु योग निद्रा में होते हैं। इस दौरान तुलसी पूजा का भी बहुत ज्यादा महत्व है। कहा जाता है कि इस अवधि में रोजाना तुलसी पूजा करने से भगवान विष्णु का आशीर्वाद मिलता है और घर में मां लक्ष्मी का वास होता है। चातुर्मास &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<img width="424" height="406" src="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2025/07/gfd-large.jpg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" loading="lazy" srcset="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2025/07/gfd.jpg 424w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2025/07/gfd-medium.jpg 300w" sizes="auto, (max-width: 424px) 100vw, 424px" />
<p>चातुर्मास (Chaturmas 2025) का समय बहुत महत्वपूर्ण होता है जिसमें भगवान विष्णु योग निद्रा में होते हैं। इस दौरान तुलसी पूजा का भी बहुत ज्यादा महत्व है। कहा जाता है कि इस अवधि में रोजाना तुलसी पूजा करने से भगवान विष्णु का आशीर्वाद मिलता है और घर में मां लक्ष्मी का वास होता है।</p>



<p>चातुर्मास का समय बहुत खास माना जाता है। इस दौरान भगवान विष्णु योग निद्रा में लीन रहते हैं और सृष्टि का संचालन भगवान शिव करते हैं। माना जाता है कि चातुर्मास के समय पूजा-पाठ, दान-पुण्य करने से शुभ फलों की प्राप्ति होती है। साथ ही जीवन में खुशहाली आती है। वहीं, इस पवित्र माह (Chaturmas 2025) के दौरान देवी तुलसी की पूजा परम कल्याणकारी मानी गई है। ऐसे में रोजाना देवी तुलसी को जल चढ़ाएं। उनके समक्ष घी का दीपक जलाएं।</p>



<p>इसके बाद तुलसी चालीसा का पाठ करें। अंत में आरती करें। ऐसा करने से भगवान विष्णु का आशीर्वाद मिलता है। साथ ही घर में मां लक्ष्मी का वास होता है।</p>



<p><strong>।।तुलसी चालीसा।। (Tulsi Chalisa)</strong></p>



<p>”श्री तुलसी महारानी, करूं विनय सिरनाय।</p>



<p>जो मम हो संकट विकट, दीजै मात नशाय।।”</p>



<p>नमो नमो तुलसी महारानी, महिमा अमित न जाय बखानी।</p>



<p>दियो विष्णु तुमको सनमाना, जग में छायो सुयश महाना।।</p>



<p>विष्णुप्रिया जय जयतिभवानि, तिहूँ लोक की हो सुखखानी।</p>



<p>भगवत पूजा कर जो कोई, बिना तुम्हारे सफल न होई।।</p>



<p>जिन घर तव नहिं होय निवासा, उस पर करहिं विष्णु नहिं बासा।</p>



<p>करे सदा जो तव नित सुमिरन, तेहिके काज होय सब पूरन।।</p>



<p>कातिक मास महात्म तुम्हारा, ताको जानत सब संसारा।</p>



<p>तव पूजन जो करैं कुंवारी, पावै सुन्दर वर सुकुमारी।।</p>



<p>कर जो पूजन नितप्रति नारी, सुख सम्पत्ति से होय सुखारी।</p>



<p>वृद्धा नारी करै जो पूजन, मिले भक्ति होवै पुलकित मन।।</p>



<p>श्रद्धा से पूजै जो कोई, भवनिधि से तर जावै सोई।</p>



<p>कथा भागवत यज्ञ करावै, तुम बिन नहीं सफलता पावै।।</p>



<p>छायो तब प्रताप जगभारी, ध्यावत तुमहिं सकल चितधारी।</p>



<p>तुम्हीं मात यंत्रन तंत्रन, सकल काज सिधि होवै क्षण में।।</p>



<p>औषधि रूप आप हो माता, सब जग में तव यश विख्याता,</p>



<p>देव रिषी मुनि औ तपधारी, करत सदा तव जय जयकारी।।</p>



<p>वेद पुरानन तव यश गाया, महिमा अगम पार नहिं पाया।</p>



<p>नमो नमो जै जै सुखकारनि, नमो नमो जै दुखनिवारनि।।</p>



<p>नमो नमो सुखसम्पति देनी, नमो नमो अघ काटन छेनी।</p>



<p>नमो नमो भक्तन दुःख हरनी, नमो नमो दुष्टन मद छेनी।।</p>



<p>नमो नमो भव पार उतारनि, नमो नमो परलोक सुधारनि।</p>



<p>नमो नमो निज भक्त उबारनि, नमो नमो जनकाज संवारनि।।</p>



<p>नमो नमो जय कुमति नशावनि, नमो नमो सुख उपजावनि।</p>



<p>जयति जयति जय तुलसीमाई, ध्याऊँ तुमको शीश नवाई।।</p>



<p>निजजन जानि मोहि अपनाओ, बिगड़े कारज आप बनाओ।</p>



<p>करूँ विनय मैं मात तुम्हारी, पूरण आशा करहु हमारी।।</p>



<p>शरण चरण कर जोरि मनाऊं, निशदिन तेरे ही गुण गाऊं।</p>



<p>क्रहु मात यह अब मोपर दाया, निर्मल होय सकल ममकाया।।</p>



<p>मंगू मात यह बर दीजै, सकल मनोरथ पूर्ण कीजै।</p>



<p>जनूं नहिं कुछ नेम अचारा, छमहु मात अपराध हमारा।।</p>



<p>बरह मास करै जो पूजा, ता सम जग में और न दूजा।</p>



<p>प्रथमहि गंगाजल मंगवावे, फिर सुन्दर स्नान करावे।।</p>



<p>चन्दन अक्षत पुष्प् चढ़ावे, धूप दीप नैवेद्य लगावे।</p>



<p>करे आचमन गंगा जल से, ध्यान करे हृदय निर्मल से।।</p>



<p>पाठ करे फिर चालीसा की, अस्तुति करे मात तुलसा की।</p>



<p>यह विधि पूजा करे हमेशा, ताके तन नहिं रहै क्लेशा।।</p>



<p>करै मास कार्तिक का साधन, सोवे नित पवित्र सिध हुई जाहीं।</p>



<p>है यह कथा महा सुखदाई, पढ़े सुने सो भव तर जाई।।</p>



<p>तुलसी मैया तुम कल्याणी, तुम्हरी महिमा सब जग जानी।</p>



<p>भाव ना तुझे माँ नित नित ध्यावे, गा गाकर मां तुझे रिझावे।।</p>



<p>यह श्रीतुलसी चालीसा पाठ करे जो कोय।</p>



<p>गोविन्द सो फल पावही जो मन इच्छा होय।।</p>
]]></content:encoded>
					
		
		
			</item>
		<item>
		<title>चातुर्मास के दौरान करें भगवान विष्णु के नामों का मंत्र जप</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Live Halchal Web_Wing]]></dc:creator>
		<pubDate>Wed, 03 Jul 2024 08:36:29 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[अध्यात्म]]></category>
		<category><![CDATA[धर्म]]></category>
		<category><![CDATA[चातुर्मास]]></category>
		<category><![CDATA[भगवान विष्णु]]></category>
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					<description><![CDATA[<img width="618" height="323" src="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2024/07/Capture-158.png" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" loading="lazy" srcset="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2024/07/Capture-158.png 740w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2024/07/Capture-158-300x157.png 300w" sizes="auto, (max-width: 618px) 100vw, 618px" />धार्मिक मत है कि चातुर्मास के दौरान भगवान विष्णु संग मां लक्ष्मी की पूजा करने से व्यक्ति के सकल मनोरथ सिद्ध या पूर्ण होते हैं। साथ ही सुख और सौभाग्य में भी वृद्धि होती है। जगत के नाथ की कृपा से सभी बिगड़े काम भी बन जाते हैं। इसके लिए चातुर्मास के दौरान विधि-विधान से &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<img width="618" height="323" src="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2024/07/Capture-158.png" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" loading="lazy" srcset="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2024/07/Capture-158.png 740w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2024/07/Capture-158-300x157.png 300w" sizes="auto, (max-width: 618px) 100vw, 618px" />
<p>धार्मिक मत है कि चातुर्मास के दौरान भगवान विष्णु संग मां लक्ष्मी की पूजा करने से व्यक्ति के सकल मनोरथ सिद्ध या पूर्ण होते हैं। साथ ही सुख और सौभाग्य में भी वृद्धि होती है। जगत के नाथ की कृपा से सभी बिगड़े काम भी बन जाते हैं। इसके लिए चातुर्मास के दौरान विधि-विधान से भगवान विष्णु की पूजा की जाती है।</p>



<p>सनातन धर्म में चातुर्मास का विशेष महत्व है। इसकी शुरुआत आषाढ़ माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि से होती है। इस दिन देवशयनी एकादशी मनाई जाती है। सनातन शास्त्रों में निहित है कि देवशयनी एकादशी तिथि से भगवान विष्णु क्षीर सागर में विश्राम करने चले जाते हैं। वहीं, कार्तिक माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि को जागृत होते हैं। इस तिथि पर देवउठनी एकादशी मनाई जाती है।</p>



<p>भगवान विष्णु के योग निद्रा में जाने की तिथि से लेकर जागृत होने की तिथि तक कोई भी शुभ कार्य नहीं किया जाता है। इस अवधि को चातुर्मास कहा जाता है। चातुर्मास के दौरान भगवान विष्णु की विशेष पूजा की जाती है। अगर आप भी भगवान विष्णु की कृपा के भागी बनना चाहते हैं, तो चातुर्मास के दौरान जग के नाथ की पूजा करें। साथ ही पूजा के समय रोजाना भगवान विष्णु के 108 नामों का मंत्र जप करें।</p>



<p><strong>भगवान विष्णु के 108 नाम</strong></p>



<ol class="wp-block-list">
<li>ऊँ श्री प्रकटाय नम:</li>



<li>ऊँ श्री वयासाय नम:</li>



<li>ऊँ श्री हंसाय नम:</li>



<li>ऊँ श्री वामनाय नम:</li>



<li>ऊँ श्री गगनसदृश्यमाय नम:</li>



<li>ऊँ श्री लक्ष्मीकान्ताजाय नम:</li>



<li>ऊँ श्री प्रभवे नम:</li>



<li>ऊँ श्री गरुडध्वजाय नम:</li>



<li>ऊँ श्री परमधार्मिकाय नम:</li>



<li>ऊँ श्री यशोदानन्दनयाय नम:</li>



<li>ऊँ श्री विराटपुरुषाय नम:</li>



<li>ऊँ श्री अक्रूराय नम:</li>



<li>ऊँ श्री सुलोचनाय नम:</li>



<li>ऊँ श्री भक्तवत्सलाय नम:</li>



<li>ऊँ श्री विशुद्धात्मने नम :</li>



<li>ऊँ श्री श्रीपतये नम:</li>



<li>ऊँ श्री आनन्दाय नम:</li>



<li>ऊँ श्री कमलापतये नम:</li>



<li>ऊँ श्री सिद्ध संकल्पयाय नम:</li>



<li>ऊँ श्री महाबलाय नम:</li>



<li>ऊँ श्री लोकाध्यक्षाय नम:</li>



<li>ऊँ श्री सुरेशाय नम:</li>



<li>ऊँ श्री ईश्वराय नम:</li>



<li>ऊँ श्री विराट पुरुषाय नम:</li>



<li>ऊँ श्री क्षेत्र क्षेत्राज्ञाय नम:</li>



<li>ऊँ श्री चक्रगदाधराय नम:</li>



<li>ऊँ श्री योगिनेय नम:</li>



<li>ऊँ श्री दयानिधि नम:</li>



<li>ऊँ श्री लोकाध्यक्षाय नम:</li>



<li>ऊँ श्री जरा-मरण-वर्जिताय नम:</li>



<li>ऊँ श्री कमलनयनाय नम:</li>



<li>ऊँ श्री शंख भृते नम:</li>



<li>ऊँ श्री दु:स्वपननाशनाय नम:</li>



<li>ऊँ श्री प्रीतिवर्धनाय नम:</li>



<li>ऊँ श्री हयग्रीवाय नम:</li>



<li>ऊँ श्री कपिलेश्वराय नम:</li>



<li>ऊँ श्री महीधराय नम:</li>



<li>ऊँ श्री द्वारकानाथाय नम:</li>



<li>ऊँ श्री सर्वयज्ञफलप्रदाय नम:</li>



<li>ऊँ श्री सप्तवाहनाय नम:</li>



<li>ऊँ श्री श्री यदुश्रेष्ठाय नम:</li>



<li>ऊँ श्री चतुर्मूर्तये नम:</li>



<li>ऊँ श्री सर्वतोमुखाय नम:</li>



<li>ऊँ श्री लोकनाथाय नम:</li>



<li>ऊँ श्री वंशवर्धनाय नम:</li>



<li>ऊँ श्री एकपदे नम:</li>



<li>ऊँ श्री धनुर्धराय नम:</li>



<li>ऊँ श्री प्रीतिवर्धनाय नम:</li>



<li>ऊँ श्री केश्वाय नम:</li>



<li>ऊँ श्री धनंजाय नम:</li>



<li>ऊँ श्री ब्राह्मणप्रियाय नम:</li>



<li>ऊँ श्री शान्तिदाय नम:</li>



<li>ऊँ श्री श्रीरघुनाथाय नम:</li>



<li>ऊँ श्री वाराहय नम:</li>



<li>ऊँ श्री नरसिंहाय नम:</li>



<li>ऊँ श्री रामाय नम:</li>



<li>ऊँ श्री शोकनाशनाय नम:</li>



<li>ऊँ श्री श्रीहरये नम:</li>



<li>ऊँ श्री गोपतये नम:</li>



<li>ऊँ श्री विश्वकर्मणे नम:</li>



<li>ऊँ श्री हृषीकेशाय नम:</li>



<li>ऊँ श्री पद्मनाभाय नम:</li>



<li>ऊँ श्री कृष्णाय नम:</li>



<li>ऊँ श्री विश्वातमने नम:</li>



<li>ऊँ श्री गोविन्दाय नम:</li>



<li>ऊँ श्री लक्ष्मीपतये नम:</li>



<li>ऊँ श्री दामोदराय नम:</li>



<li>ऊँ श्री अच्युताय नम:</li>



<li>ऊँ श्री सर्वदर्शनाय नम:</li>



<li>ऊँ श्री वासुदेवाय नम:</li>



<li>ऊँ श्री पुण्डरीक्षाय नम:</li>



<li>ऊँ श्री नर-नारायणा नम:</li>



<li>ऊँ श्री जनार्दनाय नम:</li>



<li>ऊँ श्री चतुर्भुजाय नम:</li>



<li>ऊँ श्री विष्णवे नम:</li>



<li>ऊँ श्री केशवाय नम:</li>



<li>ऊँ श्री मुकुन्दाय नम:</li>



<li>ऊँ श्री सत्यधर्माय नम:</li>



<li>ऊँ श्री परमात्मने नम:</li>



<li>ऊँ श्री पुरुषोत्तमाय नम:</li>



<li>ऊँ श्री हिरण्यगर्भाय नम:</li>



<li>ऊँ श्री उपेन्द्राय नम:</li>



<li>ऊँ श्री माधवाय नम:</li>



<li>ऊँ श्री अनन्तजिते नम:</li>



<li>ऊँ श्री महेन्द्राय नम:</li>



<li>ऊँ श्री नारायणाय नम:</li>



<li>ऊँ श्री सहस्त्राक्षाय नम:</li>



<li>ऊँ श्री प्रजापतये नम:</li>



<li>ऊँ श्री भूभवे नम:</li>



<li>ऊँ श्री प्राणदाय नम:</li>



<li>ऊँ श्री देवकी नन्दनाय नम:</li>



<li>ऊँ श्री सुरेशाय नम:</li>



<li>ऊँ श्री जगतगुरूवे नम:</li>



<li>ऊँ श्री सनातन नम:</li>



<li>ऊँ श्री सच्चिदानन्दाय नम:</li>



<li>ऊँ श्री दानवेन्द्र विनाशकाय नम:</li>



<li>ऊँ श्री एकातम्ने नम:</li>



<li>ऊँ श्री शत्रुजिते नम:</li>



<li>ऊँ श्री घनश्यामाय नम:</li>



<li>ऊँ श्री वामनाय नम:</li>



<li>ऊँ श्री गरुडध्वजाय नम:</li>



<li>ऊँ श्री धनेश्वराय नम:</li>



<li>103.ऊँ श्री भगवते नम:</li>



<li>ऊँ श्री उपेन्द्राय नम:</li>



<li>ऊँ श्री परमेश्वराय नम:</li>



<li>ऊँ श्री सर्वेश्वराय नम:</li>



<li>ऊँ श्री धर्माध्यक्षाय नम:</li>



<li>ऊँ श्री प्रजापतये नम:</li>
</ol>
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	</channel>
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