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	<title>चंबल सेंक्चुअरी &#8211; Live Halchal</title>
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	<title>चंबल सेंक्चुअरी &#8211; Live Halchal</title>
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		<title>यूपी: सांप को जिंदा निगल लेता है ये पक्षी, चंबल सेंक्चुअरी में दिखा झुंड…</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Live Halchal Web_Wing]]></dc:creator>
		<pubDate>Fri, 31 Jan 2025 05:09:43 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[उत्तरप्रदेश]]></category>
		<category><![CDATA[राज्य]]></category>
		<category><![CDATA[चंबल सेंक्चुअरी]]></category>
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					<description><![CDATA[ब्लैक हेडेड आइबिस (सफेद बुज्जा) जल में पाए जाने वाले सांपों को निगल लेता है। मछली, मेंढक, जलीय कीड़े-मकोडे़ इनका भोजन होते हैं। ये विदेशी मेहमान हैं, जो चीन, म्यांमार, मलेशिया और मंगोलिया से आते हैं। चंबल सेंक्चुअरी की बाह रेंज में 28 जनवरी को जलीय जीवों के साथ प्रवासी-अप्रवासी पक्षियों का भी सर्वे हुआ। &#8230;]]></description>
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<p>ब्लैक हेडेड आइबिस (सफेद बुज्जा) जल में पाए जाने वाले सांपों को निगल लेता है। मछली, मेंढक, जलीय कीड़े-मकोडे़ इनका भोजन होते हैं। ये विदेशी मेहमान हैं, जो चीन, म्यांमार, मलेशिया और मंगोलिया से आते हैं।</p>



<p>चंबल सेंक्चुअरी की बाह रेंज में 28 जनवरी को जलीय जीवों के साथ प्रवासी-अप्रवासी पक्षियों का भी सर्वे हुआ। इस दौरान चीन, म्यांमार, मलेशिया, मंगोलिया से आने वाले 48 ब्लैक हेडेड आइबिस पक्षी दिखे।</p>



<p>रेंजर उदय प्रताप सिंह ने बताया कि ब्लैक हेडेड आइबिस नदी क्षेत्र में सांपों को निगल रहे हैं। आम तौर पर मछली, मेढक, जलीय कीड़े इनका भोजन होते हैं। लेकिन बाह रेंज में जलीय सांपों को पकड़ कर निगलते हुए और उड़ान भरते हुए दिखना आम बात है। ब्लैक हेडेड आइबिस का वैज्ञानिक नाम थ्रेसकोर्निस मेलानोसेफालस है। स्थानीय नाम सफेद बुज्जा है। अंतरराष्ट्रीय प्राकृतिक संघ (आईयूसीएन) की रेड लिस्ट में खतरे के करीब दर्ज ब्लैक हेडेड आइबिस की चंबल क्षेत्र में मौजूदगी सुखद है।</p>



<p><strong>ऐसे दिखते हैं ब्लैक हेडेड आइबिस</strong><br>ब्लैक हेडेड आइबिस का सिर, गर्दन और पैर काले होते हैं। पंख सफेद होते हैं। चोंच नीचे की ओर मुड़ी हुई होती है। इनकी लंबाई करीब 65-70 सेमी होती है। वजन 1-1.20 किग्रा, पंख फैलाव 90-110 सेमी होता है। नर मादा एक जैसे होते हैं।</p>



<p><strong>1,417 से 1,529 हुई प्रवासी-अप्रवासी पक्षियों की संख्या</strong><br>गणना के दौरान 1,529 प्रवासी-अप्रवासी पक्षी मिले हैं। रेंजर उदय प्रताप सिंह ने बताया कि सबसे अधिक 243 बार हेडेड गूज तथा सबसे कम 10 परपल हेरॉन मिले हैं।</p>



<p>ग्रे हेरॉन 32, लार्ज ईग्रेट 42, कैटल ईग्रेट 68, ब्लैक हेडेड आइबिस 48, वुली नेक्ड स्टॉर्क 12, किंग फिशर 70, पाइड किंग फिशर 91, इंडियन स्कीमर 65, ब्लैक विंग्ड स्टिल्ट 181, रेड वैटल्ड लैपविंग 118, थिकनी 52, सफेद गिद्ध 26, रिवर टर्न 48, सेंड पाइपर 86, पेंटेड स्टॉर्क 25, कार्मोरेंट 25, व्हाइट नेक्ड स्टाॅर्क 18, रुडी शैलडक 185, व्हिसलिंग टील 25, रिवर लैपविंग 24, व्हाइट वेगटेल 35 शामिल हैं।</p>
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		<title>चंबल सेंक्चुअरी : टफ्टेड डक और कूट बर्ड की दस्तक</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Live Halchal Web_Wing]]></dc:creator>
		<pubDate>Sun, 07 Jan 2024 07:51:39 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[जीवनशैली]]></category>
		<category><![CDATA[पर्यटन]]></category>
		<category><![CDATA[कूट बर्ड]]></category>
		<category><![CDATA[चंबल सेंक्चुअरी]]></category>
		<category><![CDATA[टफ्टेड डक]]></category>
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					<description><![CDATA[आगरा की चंबल सेंक्चुअरी में टफ्टेड डक और कूट बर्ड ने दस्तक दी है। यहां चुटिया वाली चिड़िया पर सैलानी रीझ रहे हैं। ताजनगरी आगरा में शीत लहर के बीच चंबल सेंक्चुअरी की बाह रेंज में यूरोप, एशिया, अफ्रीका से टफ्टेड डक और कूट बर्ड ने दस्तक दी है। इनकी जल क्रीड़ा यहां आने वाले &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[
<p>आगरा की चंबल सेंक्चुअरी में टफ्टेड डक और कूट बर्ड ने दस्तक दी है। यहां चुटिया वाली चिड़िया पर सैलानी रीझ रहे हैं।</p>



<p>ताजनगरी आगरा में शीत लहर के बीच चंबल सेंक्चुअरी की बाह रेंज में यूरोप, एशिया, अफ्रीका से टफ्टेड डक और कूट बर्ड ने दस्तक दी है। इनकी जल क्रीड़ा यहां आने वाले पर्यटकों को रोमांचित कर रही है।</p>



<p>टफ्टेड डक का स्थानीय नाम गुच्छेदार बतख है। लोग इन्हें चुटिया वाली चिड़िया के नाम से भी पुकारते हैं। वैज्ञानिक नाम अयथ्या फूलीगुला है। बाह के रेंजर उदय प्रताप सिंह ने बताया कि गहरे पानी में गोता लगाने में माहिर टफ्टेड डक की चंबल के पानी संग अठखेलियों पर पर्यटक रीझ रहे हैं। नदी में डुबकी के बाद पानी की बूंदों संग उड़ने वाली बतख देखने वालों को रोमांचित कर देती है।</p>



<p>कूट बर्ड का स्थानीय नाम तिलक धारी चिरैया है। वैज्ञानिक नाम फुलिका अत्रा है। ये चिड़िया जमीन और पानी पर तेज चाल चलने में माहिर हैं। पानी में शिकार पकड़ने के लिए चोंच डुबोकर तेज चलती है तो पर्यटकों को रोमांचित कर देती हैं। खास बात ये है कि दोनों का भोजन जलीय पौधे और कीड़े होते हैं।</p>



<h2 class="wp-block-heading"><strong>टफ्टेड डक</strong></h2>



<p>नर टफ्टेड डक के पंख सफेद, सुनहरी पीली आंखें, नीली-भूरे रंग की चोंच होती है। सिर के पीछे एक पतली शिखा होती है। मादा भूरे रंग की होती हैं। नर, मादा से थोड़ी बड़ी होती है। इनकी लंबाई 40 से 50 सेमी, पंख फैलाव 65 से 70 सेमी और वजन 600 से 900 ग्राम होता है।</p>



<h2 class="wp-block-heading"><strong>कूट बर्ड</strong></h2>



<p>कूट बर्ड के ललाट पर सफेद ढाल होती है। चोंच सफेद या हल्की गुलाबी रंग की होती है। आंखें गहरी लाल होती हैं। पैर छोटे और मजबूत हरे-भूरे रंग के होते हैं। बदन काले रंग का होता है। इनकी लंबाई 35 से 40 सेमी, पंख फैलाव 70 से 80 सेमी, वजन 600 से 1200 ग्राम होता है।</p>
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