<?xml version="1.0" encoding="UTF-8"?><rss version="2.0"
	xmlns:content="http://purl.org/rss/1.0/modules/content/"
	xmlns:wfw="http://wellformedweb.org/CommentAPI/"
	xmlns:dc="http://purl.org/dc/elements/1.1/"
	xmlns:atom="http://www.w3.org/2005/Atom"
	xmlns:sy="http://purl.org/rss/1.0/modules/syndication/"
	xmlns:slash="http://purl.org/rss/1.0/modules/slash/"
	>

<channel>
	<title>चंद्रयान-4 &#8211; Live Halchal</title>
	<atom:link href="https://livehalchal.com/tag/%e0%a4%9a%e0%a4%82%e0%a4%a6%e0%a5%8d%e0%a4%b0%e0%a4%af%e0%a4%be%e0%a4%a8-4/feed" rel="self" type="application/rss+xml" />
	<link>https://livehalchal.com</link>
	<description>Latest News, Updated News, Hindi News Portal</description>
	<lastBuildDate>Thu, 19 Sep 2024 07:00:48 +0000</lastBuildDate>
	<language>en-US</language>
	<sy:updatePeriod>
	hourly	</sy:updatePeriod>
	<sy:updateFrequency>
	1	</sy:updateFrequency>
	<generator>https://wordpress.org/?v=6.9.4</generator>

<image>
	<url>https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2023/10/cropped-Live-Halchal-512-32x32.jpg</url>
	<title>चंद्रयान-4 &#8211; Live Halchal</title>
	<link>https://livehalchal.com</link>
	<width>32</width>
	<height>32</height>
</image> 
	<item>
		<title>चंद्रयान-4: इस बार चांद पर उतरने के बाद पृथ्वी पर लौटेगा भारतीय यान</title>
		<link>https://livehalchal.com/%e0%a4%9a%e0%a4%82%e0%a4%a6%e0%a5%8d%e0%a4%b0%e0%a4%af%e0%a4%be%e0%a4%a8-4-%e0%a4%87%e0%a4%b8-%e0%a4%ac%e0%a4%be%e0%a4%b0-%e0%a4%9a%e0%a4%be%e0%a4%82%e0%a4%a6-%e0%a4%aa%e0%a4%b0-%e0%a4%89%e0%a4%a4/581166</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Live Halchal Web_Wing]]></dc:creator>
		<pubDate>Thu, 19 Sep 2024 07:00:45 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[बड़ीखबर]]></category>
		<category><![CDATA[राष्ट्रीय]]></category>
		<category><![CDATA[चंद्रयान-4]]></category>
		<guid isPermaLink="false">https://livehalchal.com/?p=581166</guid>

					<description><![CDATA[<img width="618" height="411" src="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2024/09/Capture-577-large.jpg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" fetchpriority="high" srcset="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2024/09/Capture-577.jpg 626w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2024/09/Capture-577-medium.jpg 300w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2024/09/Capture-577-310x205.jpg 310w" sizes="(max-width: 618px) 100vw, 618px" />चंद्रयान-4 मिशन भारतीय अंतरिक्ष यात्रियों को (वर्ष 2040 तक) चंद्रमा पर उतारने और सुरक्षित रूप से पृथ्वी पर वापस लाने के लिए आधारभूत प्रौद्योगिकियों को विकसित करेगा। अंतरिक्ष केंद्र से जुड़ने/हटने, यान के उतरने, पृथ्वी पर सुरक्षित वापसी तथा चंद्र नमूना संग्रह और विश्लेषण के लिए आवश्यक प्रमुख प्रौद्योगिकियों का प्रदर्शन किया जाएगा। प्रधानमंत्री नरेंद्र &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<img width="618" height="411" src="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2024/09/Capture-577-large.jpg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" srcset="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2024/09/Capture-577.jpg 626w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2024/09/Capture-577-medium.jpg 300w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2024/09/Capture-577-310x205.jpg 310w" sizes="(max-width: 618px) 100vw, 618px" />
<p>चंद्रयान-4 मिशन भारतीय अंतरिक्ष यात्रियों को (वर्ष 2040 तक) चंद्रमा पर उतारने और सुरक्षित रूप से पृथ्वी पर वापस लाने के लिए आधारभूत प्रौद्योगिकियों को विकसित करेगा। अंतरिक्ष केंद्र से जुड़ने/हटने, यान के उतरने, पृथ्वी पर सुरक्षित वापसी तथा चंद्र नमूना संग्रह और विश्लेषण के लिए आवश्यक प्रमुख प्रौद्योगिकियों का प्रदर्शन किया जाएगा।</p>



<p>प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय कैबिनेट ने नए चंद्र अभियान चंद्रयान-4 को मंजूरी दी। इसका उद्देश्य अंतरिक्ष यात्रियों को चंद्रमा पर सफलतापूर्वक उतारने और उन्हें सुरक्षित पृथ्वी पर वापस लाने वाली प्रौद्योगिकी का विकास करना है। साथ ही चंद्रमा से नमूने लाकर उनका विश्लेषण करना है। साथ ही चांद और मंगल के बाद अब भारत ने शुक्र ग्रह की ओर कदम बढ़ाए हैं और सरकार ने वीनस ऑर्बिटर मिशन (वीओएम) को भी मंजूरी दी है।</p>



<p>चंद्रयान-4 मिशन भारतीय अंतरिक्ष यात्रियों को (वर्ष 2040 तक) चंद्रमा पर उतारने और सुरक्षित रूप से पृथ्वी पर वापस लाने के लिए आधारभूत प्रौद्योगिकियों को विकसित करेगा। अंतरिक्ष केंद्र से जुड़ने/हटने, यान के उतरने, पृथ्वी पर सुरक्षित वापसी तथा चंद्र नमूना संग्रह और विश्लेषण के लिए आवश्यक प्रमुख प्रौद्योगिकियों का प्रदर्शन किया जाएगा। चंद्रयान-4 मिशन के प्रौद्योगिकी प्रदर्शन के लिए कुल 2,104.06 करोड़ रुपये की धनराशि की आवश्यकता है।</p>



<p>लागत में अंतरिक्ष यान का निर्माण, एलवीएम-3 के दो लॉन्च वाहन मिशन, बाह्य गहन अंतरिक्ष नेटवर्क का समर्थन और डिजाइन सत्यापन के लिए विशेष परीक्षण आयोजित करना और अंत में चंद्रमा की सतह पर लैंडिंग के मिशन और चंद्रमा के नमूने एकत्रित कर उनकी पृथ्वी पर सुरक्षित वापसी शामिल हैं। अंतरिक्ष यान के विकास और प्रक्षेपण की जिम्मेदारी भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) की होगी। उद्योग और शिक्षा जगत की भागीदारी से इस अभियान को मंजूरी मिलने के 36 महीने के अंदर पूरा कर लिया जाएगा।</p>



<p>सभी महत्वपूर्ण प्रौद्योगिकियों को स्वदेशी रूप से विकसित किए जाने की कोशिश की जाएगी। मिशन को विभिन्न उद्योगों के माध्यम से कार्यान्वित किया जा रहा है और उम्मीद की जा रही है कि अर्थव्यवस्था के अन्य क्षेत्रों में भी इससे रोजगार की उच्च संभावना पैदा होगी और प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में बड़ा बदलाव आएगा। यह मिशन भारत को मानवयुक्त मिशनों, चंद्रमा के नमूनों की वापसी और चंद्रमा के नमूनों के वैज्ञानिक विश्लेषण के लिए महत्वपूर्ण मूलभूत प्रौद्योगिकियों में आत्मनिर्भर होने में सक्षम बनाएगा।</p>



<p><strong>विकसित होगा अगली पीढ़ी का सैटेलाइट प्रक्षेपण यान</strong><br>कैबिनेट ने अगली पीढ़ी का प्रक्षेपण यान (एनजीएलवी) विकसित करने को मंजूरी दे दी है। यह भारतीय अंतरिक्ष स्टेशन की स्थापना और संचालन तथा 2040 तक चंद्रमा पर भारतीय अंतरिक्ष यात्रियों के उतरने की क्षमता विकसित करने की सरकार की कल्पना की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम होगा। एनजीएलवी की एलवीएम3 की तुलना में 1.5 गुना लागत के साथ वर्तमान पेलोड क्षमता का 3 गुना होगी और इसकी पुन: उपयोगिता भी होगी जिसके परिणामस्वरूप अंतरिक्ष और मॉड्यूलर ग्रीन प्रोपल्शन सिस्टम तक कम लागत में पहुंच होगी।</p>



<p><strong>2035 तक अंतरिक्ष स्टेशन की तैयारी गगनयान कार्यक्रम का दायरा बढ़ा</strong><br>सरकार ने अमृतकाल के दौरान भारतीय अंतरिक्ष कार्यक्रम के लिए एक विस्तारित दृष्टिकोण का खाका तैयार किया है। इसके तहत वर्ष 2035 तक भारतीय अंतरिक्ष स्टेशन और वर्ष 2040 तक चंद्रमा पर लैंडिंग की परिकल्पना की गई है। इसे साकार करने के लिए गगनयान और चंद्रयान फॉलोऑन मिशनों की एक शृंखला की भी रूपरेखा तैयार की गई है।<br>विस्तारित गगनयान कार्यक्रम में भारतीय अंतरिक्ष केंद्र-1 यूनिट समेत 8 मिशन शामिल है। इसे दिसंबर 2028 तक पूरा किया जाना है। गगनयान कार्यक्रम पर खर्च को 11,170 करोड़ रुपये बढ़ाकर 20,193 करोड़ रुपये कर दिया गया है।</p>



<p><strong>शुक्र पर भारत की निगाहें</strong><br>चंद्रमा और मंगल पर फतह के बाद अब भारत की नजर शुक्र ग्रह पर है। पृथ्वी के सबसे निकटतम ग्रह शुक्र के अन्वेषण, वायुमंडल, भूविज्ञान को बेहतर ढंग से समझने और इसके घने वायुमंडल का अध्ययन करने के लिए सरकार ने वीनस ऑर्बिटर मिशन (वीओएम) को मंजूरी दी। माना जाता है कि शुक्र गृह का निर्माण पृथ्वी जैसी ही परिस्थितियों में हुआ है, यह इस बात को समझने का अनूठा अवसर प्रदान करता है कि ग्रहों का वातावरण किस प्रकार बहुत अलग तरीके से विकसित हो सकता है।</p>



<p>अंतरिक्ष विभाग की ओर से पूरा किया जाने वाला वीनस ऑर्बिटर मिशन शुक्र ग्रह की कक्षा में वैज्ञानिक अंतरिक्ष यान की परिक्रमा के लिए परिकल्पना की गई है, ताकि शुक्र की सतह और उपसतह, वायुमंडलीय प्रक्रियाओं और शुक्र के वायुमंडल पर सूर्य के प्रभाव को बेहतर ढंग से समझा जा सके। माना जाता है कि शुक्र कभी रहने योग्य था और काफी हद तक पृथ्वी के समान था। शुक्र के परिवर्तन के अंतर्निहित कारणों का अध्ययन इस ग्रह और पृथ्वी दोनों ग्रहों के विकास को समझने में महत्वपूर्ण रूप से सहायक होगा।</p>



<p>इसरो इस अंतरिक्ष यान के विकास और प्रक्षेपण के लिए उत्तरदायी होगा। इस परियोजना का प्रबंधन और निगरानी इसरो में स्थापित प्रचलित प्रथाओं के माध्यम से प्रभावी ढंग से की जाएगी।<br>मार्च 2028 तक पूरा होने की संभावना : इस मिशन के मार्च 2028 के दौरान उपलब्ध अवसर पर पूरा होने की संभावना है। भारतीय शुक्र मिशन से कुछ अनसुलझे वैज्ञानिक प्रश्नों के उत्तर मिलने की संभावना है, जिनकी परिणति विभिन्न वैज्ञानिक परिणामों में होगी।</p>
]]></content:encoded>
					
		
		
			</item>
		<item>
		<title>चंद्रयान-4 की तैयारी में जुटा इसरो; दो चरणों में होगा लॉन्च</title>
		<link>https://livehalchal.com/%e0%a4%9a%e0%a4%82%e0%a4%a6%e0%a5%8d%e0%a4%b0%e0%a4%af%e0%a4%be%e0%a4%a8-4-%e0%a4%95%e0%a5%80-%e0%a4%a4%e0%a5%88%e0%a4%af%e0%a4%be%e0%a4%b0%e0%a5%80-%e0%a4%ae%e0%a5%87%e0%a4%82-%e0%a4%9c%e0%a5%81/546508</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Live Halchal Web_Wing]]></dc:creator>
		<pubDate>Thu, 07 Mar 2024 06:42:22 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[बड़ीखबर]]></category>
		<category><![CDATA[राष्ट्रीय]]></category>
		<category><![CDATA[इसरो]]></category>
		<category><![CDATA[चंद्रयान-4]]></category>
		<guid isPermaLink="false">https://livehalchal.com/?p=546508</guid>

					<description><![CDATA[<img width="253" height="217" src="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2024/03/national-5-4-large.jpg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" />&#160;चंद्रयान-3 मिशन की ऐतिहासिक सफलता के बाद इसरो अगले चंद्र मिशन की तैयारी में जुट गया है। चंद्रयान-4 को पूर्ववर्ती मिशन की तरह एक ही चरण में लॉन्च नहीं किया जाएगा। इसके बजाय इसे दो अलग-अलग चरणों में लॉन्च किया जाएगा। इसके तहत इसरो का अंतरिक्ष यान न सिर्फ चंद्रमा पर उतरेगा, बल्कि वहां से &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<img width="253" height="217" src="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2024/03/national-5-4-large.jpg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" loading="lazy" />
<p>&nbsp;चंद्रयान-3 मिशन की ऐतिहासिक सफलता के बाद इसरो अगले चंद्र मिशन की तैयारी में जुट गया है। चंद्रयान-4 को पूर्ववर्ती मिशन की तरह एक ही चरण में लॉन्च नहीं किया जाएगा। इसके बजाय इसे दो अलग-अलग चरणों में लॉन्च किया जाएगा। इसके तहत इसरो का अंतरिक्ष यान न सिर्फ चंद्रमा पर उतरेगा, बल्कि वहां से चट्टान और मिट्टी के नमूने लेकर धरती पर वापस भी आएगा। चंद्रमा पर मानव मिशन भेजने के लिहाज से यह अभियान बेहद महत्वपूर्ण होगा।</p>



<h2 class="wp-block-heading">चंद्रयान-3 में तीन मुख्य घटक शामिल थे</h2>



<ul class="wp-block-list">
<li>लैंडर</li>



<li>रोवर</li>



<li>प्रोपल्शन माड्यूल</li>
</ul>



<p>चंद्रयान-4 मिशन में दो और अतिरिक्त घटक होंगे, जिन्हें चंद्रमा से नमूने जुटाने और उन्हें पृथ्वी पर लाने का काम सौंपा जाएगा। चंद्रयान-4 मिशन के पांचों घटकों को एक साथ लॉन्च नहीं किया जाएगा।</p>



<h2 class="wp-block-heading">इसरो प्रमुख सोमनाथ ने क्या कुछ कहा?</h2>



<p>इसरो प्रमुख एस सोमनाथ ने बताया कि भारत का सबसे भारी प्रक्षेपण यान एलवीएम-3 तीन घटकों के साथ लॉन्च होगा, जिसमें प्रोपल्शन माड्यूल, डिसेंडर माड्यूल और एसेंडर माड्यूल शामिल होंगे। इन्हें चंद्रयान-3 मिशन की तरह लांच किया जाएगा। ट्रांसफर माड्यूल और री-एंट्री माड्यूल को ध्रुवीय उपग्रह प्रक्षेपण यान (PSLV) पर लॉन्च किया जाएगा।</p>



<p>इसरो ने अभी तक इस बारे में विस्तृत जानकारी नहीं दी है कि कौन सी लॉन्चिंग सबसे पहले होगी। हालांकि, यह पहला ऐसा अभियान होगा, जिसमें एक ही मिशन को पूरा करने के लिए दो प्रक्षेपण यान का उपयोग किया जाएगा।</p>



<h2 class="wp-block-heading">चंद्रयान-4 के पांच माड्यूल होंगे</h2>



<ul class="wp-block-list">
<li>प्रोपल्शन माड्यूल: चंद्रयान-3 की तरह प्रोपल्शन माड्यूल अलग होने से पहले चंद्रमा की कक्षा में चंद्रयान-4 का मार्गदर्शन करेगा।</li>



<li>डिसेंडर माड्यूल: यह माड्यूल चंद्रयान-3 के विक्रम लैंडर की तरह ही चंद्रमा पर लैंडिंग करेगा।</li>



<li>एसेंडर माड्यूल: एक बार नमूने एकत्र हो जाने के बाद एसेंडर माड्यूल लैंडर से बाहर निकल जाएगा और पृथ्वी पर लौटना शुरू कर देगा।</li>



<li>ट्रांसफर माड्यूल: यह एसेंडर माड्यूल को चंद्रमा की कक्षा से बाहर निकालने के लिए जिम्मेदार होगा। चट्टान और मिट्टी के नमूनों के साथ कैप्सूल के अलग होने से पहले यह पृथ्वी की ओर वापस आएगा।</li>



<li>री-एंट्री माड्यूल: यह कैप्सूल चंद्रमा का चट्टान और मिट्टी के नमूनों के साथ पृथ्वी पर उतरेगा।</li>
</ul>
]]></content:encoded>
					
		
		
			</item>
	</channel>
</rss>
