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	<title>ग्लेशियर झील &#8211; Live Halchal</title>
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	<title>ग्लेशियर झील &#8211; Live Halchal</title>
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		<title>राज्य की ग्लेशियर झीलों में सेंसर लगाने की तैयारी, 30 करोड़ का प्रस्ताव प्राधिकरण को भेजा गया</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Live Halchal Web_Wing]]></dc:creator>
		<pubDate>Fri, 04 Apr 2025 06:08:47 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[उत्तराखंड]]></category>
		<category><![CDATA[राज्य]]></category>
		<category><![CDATA[ग्लेशियर झील]]></category>
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					<description><![CDATA[राज्य की ग्लेशियर झीलों में सेंसर लगाने की तैयारी चल रही है। इस संबंध में 30 करोड़ का प्रस्ताव राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण को भेजा गया है। इस वर्ष पांच झीलों का अध्ययन कराने की भी योजना है। राज्य में 13 ग्लेशियर झीलें चिन्हित की गई हैं, जिनमें से पांच अधिक संवेदनशील हैं। राज्य आपदा &#8230;]]></description>
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<p>राज्य की ग्लेशियर झीलों में सेंसर लगाने की तैयारी चल रही है। इस संबंध में 30 करोड़ का प्रस्ताव राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण को भेजा गया है। इस वर्ष पांच झीलों का अध्ययन कराने की भी योजना है।</p>



<p>राज्य में 13 ग्लेशियर झीलें चिन्हित की गई हैं, जिनमें से पांच अधिक संवेदनशील हैं। राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण ने ऐसी झीलों का अध्ययन कराने का फैसला किया है। इसके तहत पिछले साल चमोली जिले स्थित वसुंधरा ताल का अध्ययन किया है।</p>



<p>इस वर्ष पिथौरागढ़ जिले की संवेदनशील पांच और गंगोत्री से आगे केदारताल का भी अध्ययन कराने का फैसला किया है, जिससे संबंधित तालों की स्थिति का पता किया जा सके। इसके अलावा राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण की ग्लेशियर झीलों पर सेंसर लगाने की योजना बनाई है, जिससे अगर झीलों में कोई बदलाव हो तो उसका पता चल सके और जरूरत होने पर सुरक्षात्मक कदम उठाए जा सकें। ग्लेशियर झीलों में सेंसर लगाने के लिए आपदा प्रबंधन विभाग ने राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण को 30 करोड़ का प्रस्ताव भेजा गया है।</p>



<p>इस साल पांच झीलों का अध्ययन कराने की योजना है। इसमें पिथौरागढ़ की चार ग्लेशियर झील हैं। इसके अलावा सेंसर लगाने की भी योजना है। एनडीएमए को सेंसर लगाने के लिए तीस करोड़ का प्रस्ताव भेजा गया है। <strong>– विनाेद कुमार सुमन, सचिव आपदा प्रबंधन एवं पुनर्वास</strong></p>
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		<title>उत्तराखंड: ग्लेशियर झील फटने से जल विद्युत परियोजनाओं को नहीं होगा नुकसान</title>
		<link>https://livehalchal.com/uk-626/582265</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Live Halchal Web_Wing]]></dc:creator>
		<pubDate>Thu, 26 Sep 2024 05:17:54 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[उत्तराखंड]]></category>
		<category><![CDATA[राज्य]]></category>
		<category><![CDATA[ग्लेशियर झील]]></category>
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					<description><![CDATA[नए हाइड्रो पावर प्रोजेक्ट के लिए सरकार ने नियम बदल दिए हैं। अब किसी भी नए हाइड्रो प्रोजेक्ट को लगाने से पहले उस पूरे क्षेत्र में ग्लेशियर प्रभाव देखा जाएगा। उत्तराखंड में किसी भी ग्लेशियर की झील फटने से जल विद्युत परियोजनाओं को नुकसान नहीं होगा। नई परियोजनाएं स्थापित करने से पहले उस पूरे क्षेत्र &#8230;]]></description>
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<p>नए हाइड्रो पावर प्रोजेक्ट के लिए सरकार ने नियम बदल दिए हैं। अब किसी भी नए हाइड्रो प्रोजेक्ट को लगाने से पहले उस पूरे क्षेत्र में ग्लेशियर प्रभाव देखा जाएगा।</p>



<p>उत्तराखंड में किसी भी ग्लेशियर की झील फटने से जल विद्युत परियोजनाओं को नुकसान नहीं होगा। नई परियोजनाएं स्थापित करने से पहले उस पूरे क्षेत्र में ग्लेशियरों का प्रभाव देखा जाएगा। इसी हिसाब से हाइड्रो प्रोजेक्ट में सुरक्षा इंतजाम किए जाएंगे।</p>



<p>फरवरी 2021 में चमोली की ऋषिगंगा वैली में ग्लेशियर फटने से आई रैणी आपदा में तपोवन स्थित पावर प्रोजेक्ट पूरी तरह से ध्वस्त हो गया था। इसी प्रकार एनटीपीसी की परियोजना को भी इससे काफी नुकसान हुआ था। 72 मजदूरों की मौत हो गई थी। इससे पहले 2013 में केदारनाथ में भी ग्लेशियर की झील फटने की वजह से भीषण आपदा आई थीं।</p>



<p>इन आपदाओं को देखते हुए सरकार ने हाइड्रो पावर प्रोजेक्ट की सुरक्षा को लेकर नए प्रावधान किए हैं। यूजेवीएनएल के एमडी डॉ. संदीप सिंघल ने बताया कि अब किसी भी नए हाइड्रो प्रोजेक्ट को लगाने से पहले उस पूरे क्षेत्र में ग्लेशियर प्रभाव देखा जाएगा।</p>



<p><strong>पहले देखा जाएगा…प्रोजेक्ट के इर्द-गिर्द कितने ग्लेशियर की झीलें</strong><br>ये देखा जाएगा कि उस प्रोजेक्ट के इर्द-गिर्द कितने ग्लेशियर की झीलें हैं। अगर वह फटती हैं तो उनसे निकलने वाला पानी किस तरह से उस पावर प्रोजेक्ट के माध्यम से आगे बढ़ाया जा सकता है। ताकि उस प्रोजेक्ट को नुकसान न हो और प्रवाह भी बना रहे।</p>



<p><strong>हर प्रोजेक्ट का सीसमिक डिजाइन बनेगा</strong><br>पावर प्रोजेक्ट का सीसमिक डिजाइन भी बनाया जा रहा है। आईआईटी रुड़की की मदद से ये काम किया जा रहा है। इसी प्रकार जियोलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया की मदद से लैंडस्लाइड जोनेशन मैप भी बनाया जा रहा है। ताकि यह स्पष्ट रहे कि उस जल विद्युत परियोजना के आसपास कितनी जगह भू-स्खलन का खतरा हो सकता है। हर प्रोजेक्ट का डिजास्टर मैनेजमेंट प्लान, अर्ली वार्निंग सिस्टम, सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट भी अनिवार्य किया गया है।</p>
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