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	<title>गुरु पूर्णिमा &#8211; Live Halchal</title>
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	<title>गुरु पूर्णिमा &#8211; Live Halchal</title>
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		<title>यूपी: गुरु पूर्णिमा आज, अयोध्या में सरयू स्नान के लिए उमड़ी भक्तों की भीड़</title>
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		<pubDate>Wed, 29 Jul 2026 06:24:42 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[उत्तरप्रदेश]]></category>
		<category><![CDATA[राज्य]]></category>
		<category><![CDATA[गुरु पूर्णिमा]]></category>
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					<description><![CDATA[<img width="618" height="341" src="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2026/07/678uygjh.jpg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" fetchpriority="high" srcset="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2026/07/678uygjh.jpg 641w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2026/07/678uygjh-300x166.jpg 300w" sizes="(max-width: 618px) 100vw, 618px" />गुरु पूर्णिमा के अवसर पर बुधवार को रामनगरी आस्था और श्रद्धा से सराबोर रही। भोर से ही बड़ी संख्या में श्रद्धालु सरयू घाटों पर पहुंचे और विधि-विधान से पुण्य स्नान किया। स्नान के बाद श्रद्धालुओं ने श्रीरामजन्मभूमि सहित हनुमानगढ़ी, कनक भवन और अन्य प्रमुख मंदिरों में दर्शन-पूजन कर सुख-समृद्धि की कामना की। कई स्थानों पर &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<img width="618" height="341" src="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2026/07/678uygjh.jpg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" srcset="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2026/07/678uygjh.jpg 641w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2026/07/678uygjh-300x166.jpg 300w" sizes="(max-width: 618px) 100vw, 618px" />
<p>गुरु पूर्णिमा के अवसर पर बुधवार को रामनगरी आस्था और श्रद्धा से सराबोर रही। भोर से ही बड़ी संख्या में श्रद्धालु सरयू घाटों पर पहुंचे और विधि-विधान से पुण्य स्नान किया। स्नान के बाद श्रद्धालुओं ने श्रीरामजन्मभूमि सहित हनुमानगढ़ी, कनक भवन और अन्य प्रमुख मंदिरों में दर्शन-पूजन कर सुख-समृद्धि की कामना की। कई स्थानों पर गुरु पूजन, भजन-कीर्तन और धार्मिक अनुष्ठानों का आयोजन हुआ, जहां शिष्यों ने अपने गुरुजनों का सम्मान कर आशीर्वाद प्राप्त किया।</p>



<p>गुरु पूर्णिमा के चलते मंदिरों और घाटों पर दिनभर श्रद्धालुओं की भीड़ रही। सुरक्षा व्यवस्था बनाए रखने के लिए पुलिस और प्रशासन के जवान प्रमुख स्थलों पर तैनात रहे व श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए आवश्यक व्यवस्थाएं की गईं। आज यह स्नान पूरे दिन चलता रहेगा।&nbsp;</p>



<p><strong>प्रदेश में गुरु परंपरा स्थलों का तेजी से हो रहा पर्यटन विकास</strong></p>



<p>&nbsp;प्रदेश सरकार गुरु परंपरा से जुड़े स्थलों के संरक्षण और विकास पर जोर दे रही है। आध्यात्मिक पर्यटन विकास के माध्यम से मंदिरों, आश्रमों और गुरुद्वारों को संवारा जा रहा है। इसका उद्देश्य सांस्कृतिक विरासत को सशक्त करना और नई पीढ़ी को अपनी ज्ञान परंपरा से जोड़ना है।</p>



<p>प्रदेश में महर्षि वेदव्यास, संत रविदास और गुरु गोरक्षनाथ जैसी विभूतियों ने भारतीय संस्कृति को दिशा दी। महोबा में गोरखगिरि पर्वत पर 11.25 करोड़ की लागत से 51 फीट ऊंची गुरु गोरखनाथ की कांस्य प्रतिमा स्थापित की गई है। अमेठी के जायस में 5.95 करोड़ से 25 फीट ऊंची गुरु गोरखनाथ की योग मुद्रा वाली कांस्य प्रतिमा का निर्माण हो रहा है।</p>



<p>इसी तरह वाराणसी में संत रविदास की जन्मस्थली सीर गोवर्धन धाम के पुनर्विकास पर 51.54 करोड़ खर्च किए गए हैं। देवरिया में ब्रह्मऋषि देवरहा बाबा आश्रम के पर्यटन विकास पर 2.50 करोड़ की परियोजना चल रही है। हापुड़ के गढ़मुक्तेश्वर स्थित गुरु तेग बहादुर गुरुद्वारा के पर्यटन विकास के लिए 3.63 करोड़ स्वीकृत किए हैं। मुजफ्फरनगर के शुकतीर्थ स्थित रविदास मंदिर के लिए 229.57 लाख की धनराशि स्वीकृत हुई है।</p>



<p>पर्यटन व संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह ने बताया कि गुरु पूर्णिमा गुरु परंपरा और भारतीय सांस्कृतिक मूल्यों के प्रति कृतज्ञता का अवसर है। प्रदेश सरकार संतों, ऋषियों और गुरुओं से जुड़े स्थलों के संरक्षण के साथ आधुनिक पर्यटन सुविधाओं का विस्तार कर रही है।<strong><br></strong><br></p>
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		<title>महादेव से हुई थी गुरु-शिष्य परंपरा की शुरुआत: पढ़ें गुरु पूर्णिमा</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Live Halchal Web_Wing]]></dc:creator>
		<pubDate>Sun, 26 Jul 2026 05:39:05 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[अध्यात्म]]></category>
		<category><![CDATA[धर्म]]></category>
		<category><![CDATA[गुरु पूर्णिमा]]></category>
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					<description><![CDATA[<img width="618" height="373" src="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2026/07/32-5.jpg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" srcset="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2026/07/32-5.jpg 868w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2026/07/32-5-300x181.jpg 300w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2026/07/32-5-768x464.jpg 768w" sizes="(max-width: 618px) 100vw, 618px" />आषाढ़ और सावन का संधिकाल लोकसंस्कृति और आध्यात्मिकता के सुहावने संगम का प्रतीक है। इस समय मनाई जाने वाली गुरु पूर्णिमा हमारी संस्कृति में कृतज्ञता, श्रद्धा और जड़ों से जुड़ने का एक महान पर्व है… आषाढ़ की विदाई और सावन की अगवानी का वह सुहावना संधिकाल, जब तपती धरती पर पहली फुहार पड़ती है, तो &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<img width="618" height="373" src="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2026/07/32-5.jpg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" loading="lazy" srcset="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2026/07/32-5.jpg 868w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2026/07/32-5-300x181.jpg 300w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2026/07/32-5-768x464.jpg 768w" sizes="auto, (max-width: 618px) 100vw, 618px" />
<p>आषाढ़ और सावन का संधिकाल लोकसंस्कृति और आध्यात्मिकता के सुहावने संगम का प्रतीक है। इस समय मनाई जाने वाली गुरु पूर्णिमा हमारी संस्कृति में कृतज्ञता, श्रद्धा और जड़ों से जुड़ने का एक महान पर्व है…</p>



<p>आषाढ़ की विदाई और सावन की अगवानी का वह सुहावना संधिकाल, जब तपती धरती पर पहली फुहार पड़ती है, तो माटी से उठने वाली सोंधी गमक सीधे आत्मा में उतर जाती है। पूरब से उठती काली घटाएँ जब आसमान में छा जाती हैं, तो लगता है जैसे प्रकृति अपना श्रृंगार कर रही हो। इसी ऋतु-संधि पर आता है पावन गुरु पूर्णिमा का पर्व। गाँवों में इस दिन का उल्लास निराला होता है।</p>



<p>बारिश की रिमझिम फुहारों के बीच आँगन में मिट्टी के चूल्हे पर गुड़ की लप्सी पकती है, जिसकी सोंधी-मीठी महक पूरे घर-आँगन को सुवासित कर देती है। साथ में गरमा- गरम बिड़ई (उड़द दाल की पूरी) और मसालेदार घुइयाँ (अरबी) की सब्ज़ी। यह केवल भोजन नहीं, बल्कि हमारी संस्कृति, लोकजीवन और कृतज्ञता का प्रसाद है। यह उत्सव हमारे अन्नदाता किसान की कृतज्ञता का भी पर्व है। किसान अपनी फसल का अंतिम अंश श्रद्धापूर्वक अपने इष्ट, अपने गुरु और इस प्रकृति को अर्पित करता है। गुड़ की लप्सी और बिड़ई-घुइयाँ का यह भोग मानो प्रकृति से कहता है, हे मेघ, हे प्रकृति, हे विधाता! यह तुम्हारी कृपा का प्रसाद है। इसे स्वीकार करो और अगली बार फिर आना। यही फिर आओ की मनुहार भारतीय लोकजीवन का दर्शन है, जहाँ जो प्राप्त होता है, उसे कृतज्ञता के साथ लौटा भी दिया जाता है।</p>



<p>प्रकृति के प्रति यही कृतज्ञता जब आध्यात्मिक जीवन में उतरती है, तो गुरु-पूजन बन जाती है। जैसे सावन की वर्षा धरती की प्यास बुझाती है, वैसे ही गुरु का ज्ञान जन्म-जन्मांतर के अज्ञान की तपन शांत करता है। गोस्वामी तुलसीदास रामचरितमानस के मंगलाचरण में लिखते हैं<br>श्री गुरु चरण सरोज रज, निज मन मुकुर सुधारि।<br>अर्थात गुरुचरणों की धूल से मन रूपी दर्पण को निर्मल किए बिना ईश्वर का साक्षात्कार संभव नहीं। आगे वे हनुमान जी की स्तुति करते हुए प्रार्थना करते हैं कृपा करहु गुरुदेव की नाईं।<br>अर्थात, हे प्रभु! मुझ पर वैसी ही कृपा कीजिए जैसी गुरु अपने शिष्य पर करता है। क्योंकि ईश्वर कर्मों का हिसाब माँग सकता है, लेकिन गुरु करुणा का सागर होता है। वह शिष्य के दोष नहीं देखता, बल्कि उसे अपनी शरण में लेकर पार लगा देता है। हनुमान जी स्वयं श्रीराम के अनन्य भक्त हैं, किंतु उनके जीवन में मर्यादा, ज्ञान और सेवा का प्रकाश श्रीराम से ही प्रस्फुटित हुआ। भक्ति परंपरा में श्रीराम उनके आराध्य, मार्गदर्शक और जीवन के परम प्रेरणास्रोत हैं। महाभारत में अर्जुन जैसे महावीर भी कुरुक्षेत्र में मोहग्रस्त हो गए थे। तब श्रीकृष्ण ने गुरु बनकर उन्हें गीता का अमृत दिया।<br>श्रीभगवद्गीता (2.7) में अर्जुन कहते हैं – शिष्यस्तेऽहं शाधि मां त्वां प्रपन्नम्।</p>



<p>अर्थात, मैं आपका शिष्य हूँ, मुझे उपदेश दीजिए। उस क्षण कृष्ण केवल सखा नहीं, बल्कि जगद्गुरु थे। उन्होंने अर्जुन के संशयों को दूर कर धर्म का मार्ग दिखाया। एक सच्चा गुरु वही है जो रणभूमि में आपके साथ खड़ा रहे, आपके रथ की रास थामे और आपको धर्म के मार्ग पर चलाए। इसलिए भारतीय परंपरा में गुरु केवल शिक्षा देने वाला नहीं, बल्कि संकट में दिशा देने वाला होता है। गुरु और शिष्य का संबंध शाश्वत है। यह शिक्षक और छात्र के संबंध से आगे बढ़कर श्रद्धा, विश्वास और आत्मसमर्पण की दीक्षा है। भारत की संपूर्ण ज्ञान परंपरा इसी गुरु-शिष्य परंपरा की आधारशिला पर टिकी है।</p>



<p>सनातन परंपरा में भगवान शिव को आदिगुरु माना गया है। मान्यता है कि आषाढ़ पूर्णिमा के दिन हिमालय के कांतिसरोवर तट पर उन्होंने सप्तर्षियों को योग, ध्यान, प्राणायाम और आत्मज्ञान का उपदेश दिया। वर्षों की तपस्या और समर्पण के बाद वशिष्ठ, कश्यप, अत्रि, भारद्वाज, विश्वामित्र, गौतम और जमदग्नि ऋषि उनके शिष्य बने। शिव ने उन्हें ब्रह्मज्ञान प्रदान कर निर्देश दिया कि इस योग, धर्म और विज्ञान को संपूर्ण मानवता तक पहुँचाएँ। इसी परंपरा से गुरु-शिष्य संबंध का शुभारंभ हुआ और भारतीय ज्ञानधारा विश्व तक पहुँची।</p>



<p>गुरु पूर्णिमा का संबंध महर्षि वेदव्यास से भी है। वेदों का संकलन, महाभारत की रचना और अठारह पुराणों की परंपरा भारतीय ज्ञान की अमूल्य धरोहर है। इसलिए इस दिन को व्यास पूर्णिमा भी कहा जाता है। इसी कारण आज भी गुरु की पीठिका को व्यास गद्दी या व्यासपीठ कहा जाता है। गुरु ही ज्ञान की दिशा देता है और साधना का मार्ग प्रशस्त करता है। संगीत, नृत्य, अभिनय, साहित्य या किसी भी कला की सिद्धि समर्थ गुरु के बिना संभव नहीं मानी गई है। बचपन में हम फल, मिठाई और फूलों की माला लेकर गुरु के पास जाते थे, उनका पूजन करते, चरण स्पर्श करते और श्रद्धापूर्वक दक्षिणा अर्पित करते थे। आज गुरु प्रत्यक्ष नहीं हैं, तो उनके चित्र का पूजन होता है। अब हमारे शिष्य गुरु पूर्णिमा पर आते हैं और हम सब मिलकर अपने गुरु का स्मरण एवं पूजन करते हैं।</p>



<p>यही परंपरा पीढ़ी-दर-पीढ़ी श्रद्धा, समर्पण और संस्कार का प्रवाह बनाए रखती है।हमारी लोकसंस्कृति में गुरु पूर्णिमा का स्वरूप अत्यंत आत्मीय रहा है। गाँवों में लोग अपने गुरुओं, पुरोहितों, कथा-वाचकों, संगीत और कला के आचार्यों के यहाँ जाकर अन्न, फल, गुड़, वस्त्र और दक्षिणा अर्पित करते थे। यह केवल एक परंपरा नहीं, बल्कि कृतज्ञता का संस्कार था। समय और जीवनशैली भले बदल गई हो, किंतु लोकजीवन में यह भावना आज भी यथावत जीवित है।</p>



<p>आज ज्ञान के साधन असंख्य हो गए हैं, पर विवेक देने वाला गुरु दुर्लभ होता जा रहा है। इंटरनेट जानकारी दे सकता है, लेकिन जीवन का अर्थ, धैर्य, मर्यादा और करुणा केवल गुरु ही सिखा सकता है। इसीलिए गुरु पूर्णिमा की तुलना किसी अन्य दिवस से नहीं की जा सकती।</p>



<p>आधुनिक समाज में शिक्षक सम्मान के अनेक अवसर हैं, किंतु भारतीय गुरु परंपरा का भाव कहीं अधिक व्यापक और आध्यात्मिक है। गुरु केवल अक्षरज्ञान नहीं, बल्कि ब्रह्मज्ञान देता है। गुरु फीस नहीं माँगता, वह शिष्य का अहंकार माँगता है। शिक्षक हमें पुस्तकें पढ़ना सिखाता है, जबकि गुरु जीवन पढ़ना सिखाता है। शिक्षक संसार में सफलता का मार्ग दिखाता है, पर गुरु जीवन की सार्थकता और अंततः मुक्ति का पथ प्रशस्त करता है। इसीलिए हमारे शास्त्रों में कहा गया है—</p>



<p>गुरुर्ब्रह्मा गुरुर्विष्णुः गुरुर्देवो महेश्वरः।<br>गुरुः साक्षात् परब्रह्म तस्मै श्री गुरवे नमः।।</p>



<p>गुरु को साक्षात् त्रिदेव और परब्रह्म के समान माना गया है। यह कोई अतिशयोक्ति नहीं, बल्कि भारतीय अनुभव और साधना की परंपरा है। क्या विश्व की किसी अन्य संस्कृति में गुरु को परब्रह्म का ऐसा स्थान प्राप्त है? शायद नहीं। इस गुरु पूर्णिमा पर, जब बाहर सावन की फुहारें बरसें और पुरबिया बयार बह रही हो, तब अपनी जड़ों की ओर अवश्य लौटिए।</p>



<p>माटी के चूल्हे पर बनी गुड़ की लप्सी की मिठास को केवल स्वाद तक सीमित मत रहने दीजिए, उसे अपने व्यवहार, वाणी और जीवन में भी उतारिए। उस गुरु को स्मरण कीजिए जिसने आपके जीवन के आषाढ़ को सावन में बदला, अज्ञान के अंधकार से निकालकर ज्ञान का प्रकाश दिया। क्योंकि गुरु ही वह शक्ति है जो मनुष्य को मनुष्य से महामानव बनाने की क्षमता रखती है। जैसे वर्षा सूखी धरती को हरियाली देती है, वैसे ही गुरु कृपा मनुष्य के अंतःकरण को ज्ञान, करुणा और जीवन की हरियाली से भर देती है।</p>
]]></content:encoded>
					
		
		
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		<title>पंजाब से श्रद्धालुओं को लेकर जा रही बस खाई में गिरी</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Live Halchal Web_Wing]]></dc:creator>
		<pubDate>Fri, 11 Jul 2025 08:25:00 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[पंजाब]]></category>
		<category><![CDATA[राज्य]]></category>
		<category><![CDATA[गुरु पूर्णिमा]]></category>
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					<description><![CDATA[<img width="454" height="270" src="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2025/07/4-46-large.jpg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" loading="lazy" srcset="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2025/07/4-46.jpg 454w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2025/07/4-46-medium.jpg 300w" sizes="auto, (max-width: 454px) 100vw, 454px" />पंजाब में गुरु पूर्णिमा के मौके पर आयोजित एक सत्संग से श्रद्धालुओं को लेकर वापस हिमाचल जा रही एक निजी बस खाई में गिर गई। उक्त हादसा दोपहर करीब 3:00 बजे बिलासपुर के नामहोल के पास हुआ, जिसमें 26 लोग घायल हो गए हैं। घायलों में अधिकांश लोग सोलन जिले के दरलाघाट क्षेत्र के निवासी &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<img width="454" height="270" src="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2025/07/4-46-large.jpg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" loading="lazy" srcset="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2025/07/4-46.jpg 454w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2025/07/4-46-medium.jpg 300w" sizes="auto, (max-width: 454px) 100vw, 454px" />
<p>पंजाब में गुरु पूर्णिमा के मौके पर आयोजित एक सत्संग से श्रद्धालुओं को लेकर वापस हिमाचल जा रही एक निजी बस खाई में गिर गई। उक्त हादसा दोपहर करीब 3:00 बजे बिलासपुर के नामहोल के पास हुआ, जिसमें 26 लोग घायल हो गए हैं।</p>



<p>घायलों में अधिकांश लोग सोलन जिले के दरलाघाट क्षेत्र के निवासी हैं। घायलों का इलाज एम्स बिलासपुर और अन्य स्वास्थ्य संस्थानों में किया जा रहा है। हादसे के समय बस में कुल 36 यात्री सवार थे। स्थानीय लोगों की मदद से घायलों को तुरंत बस से बाहर निकाला गया और एम्बुलेंस के जरिए एम्स अस्पताल पहुंचाया गया।</p>



<p>हादसे के कारणों का अभी तक पता नहीं चल पाया है। बरमाणा पुलिस थाना इस मामले की जांच कर रहा है।</p>
]]></content:encoded>
					
		
		
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		<title>गुरु पूर्णिमा पर महाआरती के साथ संपन्न हुई पूजा, सीएम योगी ने किया महायोगी गोरखनाथ का विशिष्ट पूजन</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Live Halchal Web_Wing]]></dc:creator>
		<pubDate>Thu, 10 Jul 2025 05:59:35 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[उत्तरप्रदेश]]></category>
		<category><![CDATA[राज्य]]></category>
		<category><![CDATA[गुरु पूर्णिमा]]></category>
		<category><![CDATA[सीएम योगी]]></category>
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					<description><![CDATA[<img width="618" height="356" src="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2025/07/3-36-large.jpg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" loading="lazy" srcset="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2025/07/3-36.jpg 793w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2025/07/3-36-medium.jpg 300w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2025/07/3-36-768x443.jpg 768w" sizes="auto, (max-width: 618px) 100vw, 618px" />गोरखनाथ मंदिर में गुरु पूर्णिमा का विशेष अनुष्ठान प्रातः काल 5 बजे से ही प्रारंभ हो गया और सामूहिक आरती के साथ अनुष्ठान की पूर्णता हुई। गोरक्षपीठाधीश्वर एवं मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सभी देशवासियों को गुरु पूर्णिमा की हार्दिक शुभकामनाएं भी दीं। गुरु पूर्णिमा के पावन पर्व पर गुरुवार प्रातः काल गोरक्षपीठाधीश्वर एवं मुख्यमंत्री योगी &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<img width="618" height="356" src="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2025/07/3-36-large.jpg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" loading="lazy" srcset="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2025/07/3-36.jpg 793w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2025/07/3-36-medium.jpg 300w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2025/07/3-36-768x443.jpg 768w" sizes="auto, (max-width: 618px) 100vw, 618px" />
<p>गोरखनाथ मंदिर में गुरु पूर्णिमा का विशेष अनुष्ठान प्रातः काल 5 बजे से ही प्रारंभ हो गया और सामूहिक आरती के साथ अनुष्ठान की पूर्णता हुई। गोरक्षपीठाधीश्वर एवं मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सभी देशवासियों को गुरु पूर्णिमा की हार्दिक शुभकामनाएं भी दीं।</p>



<p>गुरु पूर्णिमा के पावन पर्व पर गुरुवार प्रातः काल गोरक्षपीठाधीश्वर एवं मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शिवावतार महायोगी गुरु गोरखनाथ का नाथपंथ की परंपरा के अनुसार विशिष्ट पूजन किया। इस अवसर पर उन्होंने अपने गुरुदेव ब्रह्मलीन महंत अवेद्यनाथ, दादागुरु ब्रह्मलीन महंत दिग्विजयनाथ, योगिराज बाबा गंभीरनाथ समेत नाथपंथ के सभी गुरुजनों का भी विधि विधान से पूजन-अर्चन कर श्रद्धा निवेदित की और लोक कल्याण के पथ पर मार्गदर्शन के लिए उनके प्रति कृतज्ञता ज्ञापित की।</p>



<p>गोरखनाथ मंदिर में गुरु पूर्णिमा का विशेष अनुष्ठान प्रातः काल 5 बजे से ही प्रारंभ हो गया और सामूहिक आरती के साथ अनुष्ठान की पूर्णता हुई। गोरक्षपीठाधीश्वर एवं मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सभी देशवासियों को गुरु पूर्णिमा की हार्दिक शुभकामनाएं भी दीं। वैसे तो गोरक्षपीठाधीश्वर योगी आदित्यनाथ जब भी गोरखनाथ मंदिर में होते हैं, गुरु गोरखनाथ जी तथा नाथपंथ के गुरुजन का दर्शन-पूजन उनकी दिनचर्या का हिस्सा होता है।</p>



<p>पर, गुरु पूर्णिमा का अवसर गोरखनाथ मंदिर में विशिष्ट पूजा का होता है। गुरुवार को गोरक्षपीठाधीश्वर ने वैदिक मंत्रोच्चार के बीच महायोगी गुरु गोरखनाथ सहित मंदिर परिसर में मौजूद सभी देव विग्रहों और नाथपंथ के गुरुओं की प्रतिमाओं के समक्ष विधि विधान के साथ पूजन किया।</p>



<p>आनुष्ठानिक कार्यक्रमों के क्रम में उन्होंने सबसे पहले नाथपंथ के आदिगुरु भगवान गोरखनाथ के दरबार में हाजिरी लगाई। वैदिक मंत्रोच्चार के बीच उनकी पूजा की। वह परिसर में मौजूद सभी देव-विग्रहों के पास पहुंचे और उनका पूजन किया। उसके बाद वह बारी-बारी से बाबा गंभीरनाथ, अपने दादागुरु ब्रह्मलीन महंत दिग्विजयनाथ और गुरुदेव ब्रह्मलीन महंत अवेद्यनाथ समेत ब्रह्मलीन गुरुओं की समाधि पर गए।</p>



<p>सभी का वैदिक मंत्रोच्चार के बीच पूजन कर आशीर्वाद लिया। गोरखनाथ मंदिर में नाथपंथ की विशिष्ट परंपरा के अनुसार गुरु गोरखनाथ को रोट का महाप्रसाद भी अर्पित किया गया। पूजा-अर्चना की आनुष्ठानिक प्रक्रिया संपन्न होने के बाद गुरु पूर्णिमा पर होने वाली परंपरागत महाआरती हुई तथा सभी गुरुओं के प्रति आस्था निवेदित की गई।</p>
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		<title>इस आरती के बिना अधूरी है गुरु पूर्णिमा की पूजा</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Live Halchal Web_Wing]]></dc:creator>
		<pubDate>Thu, 10 Jul 2025 05:04:07 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[अध्यात्म]]></category>
		<category><![CDATA[धर्म]]></category>
		<category><![CDATA[गुरु पूर्णिमा]]></category>
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					<description><![CDATA[<img width="618" height="348" src="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2025/07/3-34-large.jpg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" loading="lazy" srcset="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2025/07/3-34.jpg 774w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2025/07/3-34-medium.jpg 300w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2025/07/3-34-768x433.jpg 768w" sizes="auto, (max-width: 618px) 100vw, 618px" />गुरु पूर्णिमा का पर्व बेहद शुभ माना जाता है। इस दिन लोग अपने गुरुओं के प्रति कृतज्ञता जाहिर करते हैं और उनका आशीर्वाद लेते हैं। हिंदू धर्म में गुरु को ब्रह्मा, विष्णु और महेश के समान माना गया है, ऐसे में इस खास अवसर पर उनकी भव्य आरती जरूर करें। कहा जाता है कि इस &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<img width="618" height="348" src="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2025/07/3-34-large.jpg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" loading="lazy" srcset="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2025/07/3-34.jpg 774w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2025/07/3-34-medium.jpg 300w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2025/07/3-34-768x433.jpg 768w" sizes="auto, (max-width: 618px) 100vw, 618px" />
<p>गुरु पूर्णिमा का पर्व बेहद शुभ माना जाता है। इस दिन लोग अपने गुरुओं के प्रति कृतज्ञता जाहिर करते हैं और उनका आशीर्वाद लेते हैं। हिंदू धर्म में गुरु को ब्रह्मा, विष्णु और महेश के समान माना गया है, ऐसे में इस खास अवसर पर उनकी भव्य आरती जरूर करें। कहा जाता है कि इस मौके सच्चे भाव से पूजा-पाठ करने से जीवन का अंधकार समाप्त होता है। साथ ही करियर में सफलता मिलती है।</p>



<p>इस साल गुरु पूर्णिमा (Guru Purnima 2025 Date) का पर्व 10 जुलाई यानी आज के दिन मनाया जा रहा है। ऐसे में आइए देवों के गुरुओं की प्रसन्न करते हैं।</p>



<p><strong>॥बृहस्पति देव की आरती॥<br></strong>जय बृहस्पति देवा, ऊँ जय बृहस्पति देवा ।</p>



<p>छिन छिन भोग लगा‌ऊँ, कदली फल मेवा ॥</p>



<p>ऊँ जय बृहस्पति देवा, जय बृहस्पति देवा ॥</p>



<p>तुम पूरण परमात्मा, तुम अन्तर्यामी ।</p>



<p>जगतपिता जगदीश्वर, तुम सबके स्वामी ॥</p>



<p>ऊँ जय बृहस्पति देवा, जय बृहस्पति देवा ॥</p>



<p>चरणामृत निज निर्मल, सब पातक हर्ता ।</p>



<p>सकल मनोरथ दायक, कृपा करो भर्ता ॥</p>



<p>ऊँ जय बृहस्पति देवा, जय बृहस्पति देवा ॥</p>



<p>तन, मन, धन अर्पण कर, जो जन शरण पड़े ।</p>



<p>प्रभु प्रकट तब होकर, आकर द्घार खड़े ॥</p>



<p>ऊँ जय बृहस्पति देवा, जय बृहस्पति देवा ॥</p>



<p>दीनदयाल दयानिधि, भक्तन हितकारी ।</p>



<p>पाप दोष सब हर्ता, भव बंधन हारी ॥</p>



<p>ऊँ जय बृहस्पति देवा, जय बृहस्पति देवा ॥</p>



<p>सकल मनोरथ दायक, सब संशय हारो ।</p>



<p>विषय विकार मिटा‌ओ, संतन सुखकारी ॥</p>



<p>ऊँ जय बृहस्पति देवा, जय बृहस्पति देवा ॥</p>



<p>जो को‌ई आरती तेरी, प्रेम सहित गावे ।</p>



<p>जेठानन्द आनन्दकर, सो निश्चय पावे ॥</p>



<p>ऊँ जय बृहस्पति देवा, जय बृहस्पति देवा ॥</p>



<p>सब बोलो विष्णु भगवान की जय ।</p>



<p>बोलो बृहस्पतिदेव भगवान की जय ॥</p>



<p><strong>॥भगवान विष्णु की आरती॥ (Lord Vishnu Aarti)<br></strong>ॐ जय जगदीश हरे आरती</p>



<p>ॐ जय जगदीश हरे,</p>



<p>स्वामी जय जगदीश हरे ।</p>



<p>भक्त जनों के संकट,</p>



<p>दास जनों के संकट,</p>



<p>क्षण में दूर करे ॥</p>



<p>॥ ॐ जय जगदीश हरे..॥</p>



<p>जो ध्यावे फल पावे,</p>



<p>दुःख बिनसे मन का,</p>



<p>स्वामी दुःख बिनसे मन का ।</p>



<p>सुख सम्पति घर आवे,</p>



<p>सुख सम्पति घर आवे,</p>



<p>कष्ट मिटे तन का ॥</p>



<p>॥ ॐ जय जगदीश हरे..॥</p>



<p>मात पिता तुम मेरे,</p>



<p>शरण गहूं किसकी,</p>



<p>स्वामी शरण गहूं मैं किसकी ।</p>



<p>तुम बिन और न दूजा,</p>



<p>तुम बिन और न दूजा,</p>



<p>आस करूं मैं जिसकी ॥</p>



<p>॥ ॐ जय जगदीश हरे..॥</p>



<p>तुम पूरण परमात्मा,</p>



<p>तुम अन्तर्यामी,</p>



<p>स्वामी तुम अन्तर्यामी ।</p>



<p>पारब्रह्म परमेश्वर,</p>



<p>पारब्रह्म परमेश्वर,</p>



<p>तुम सब के स्वामी ॥</p>



<p>॥ ॐ जय जगदीश हरे..॥</p>



<p>तुम करुणा के सागर,</p>



<p>तुम पालनकर्ता,</p>



<p>स्वामी तुम पालनकर्ता ।</p>



<p>मैं मूरख फलकामी,</p>



<p>मैं सेवक तुम स्वामी,</p>



<p>कृपा करो भर्ता॥</p>



<p>॥ ॐ जय जगदीश हरे..॥</p>



<p>तुम हो एक अगोचर,</p>



<p>सबके प्राणपति,</p>



<p>स्वामी सबके प्राणपति ।</p>



<p>किस विधि मिलूं दयामय,</p>



<p>किस विधि मिलूं दयामय,</p>



<p>तुमको मैं कुमति ॥</p>



<p>॥ ॐ जय जगदीश हरे..॥</p>



<p>दीन-बन्धु दुःख-हर्ता,</p>



<p>ठाकुर तुम मेरे,</p>



<p>स्वामी रक्षक तुम मेरे ।</p>



<p>अपने हाथ उठाओ,</p>



<p>अपने शरण लगाओ,</p>



<p>द्वार पड़ा तेरे ॥</p>



<p>॥ ॐ जय जगदीश हरे..॥</p>



<p>विषय-विकार मिटाओ,</p>



<p>पाप हरो देवा,</p>



<p>स्वमी पाप(कष्ट) हरो देवा ।</p>



<p>श्रद्धा भक्ति बढ़ाओ,</p>



<p>श्रद्धा भक्ति बढ़ाओ,</p>



<p>सन्तन की सेवा ॥</p>



<p>ॐ जय जगदीश हरे,</p>



<p>स्वामी जय जगदीश हरे ।</p>



<p>भक्त जनों के संकट,</p>



<p>दास जनों के संकट,</p>



<p>क्षण में दूर करे ॥</p>
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