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	<title>गुरु नगरी &#8211; Live Halchal</title>
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		<title>गुरु नगरी में मंडराया ‘जल संकट’ , भूमिगत स्तर के पानी में घुल रहा जहर</title>
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		<pubDate>Sat, 24 Jan 2026 05:53:59 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[पंजाब]]></category>
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<p>विश्व प्रसिद्ध धार्मिक व ऐतिहासिक नगर अमृतसर आज एक गंभीर पर्यावरणीय संकट के कगार पर हैं। शहर का पानी न केवल भूमिगत स्तर से गंदा हो रहा है, बल्कि प्रदूषित व जहरीला भी होता जा रहा है। इसके कारण जलस्तर दिन-प्रतिदिन घटता जा रहा है, जिससे आने वाली पीढ़ियों के जीवन के आधार को खतरे में पड़ने से बचाना शायद असंभव हो जाएगा। यदि समय रहते इस समस्या का समाधान नहीं निकाला गया तो स्थिति बेकाबू हो सकती है। आज भी, इस महानगर में लापरवाही से भूमिगत रूप से रिस रहा ज़हर शहर में स्थापित कई फैक्ट्रियों द्वारा फैलाया जा रहा है। इसका मुख्य कारण प्रदूषण है। कुछ फैक्टरी मालिकों की लापरवाही इस हद तक बढ़ गई है कि वे नियमों का उल्लंघन कर इस फैक्ट्रियों के जहरीले अपशिष्ट पानी को सीधे नहरों या पास के नालों में बहा रहे हैं। इससे भी अधिक खतरनाक बात यह है कि कई स्थानों पर भूमिगत जल निकासी प्रणाली लगाकर गंदा और रासायनिक युक्त पानी सीधे भूमिगत जल स्रोतों में भेजा जा रहा है। सरकार द्वारा बनाए गए कानूनों का उल्लंघन करते हुए किया जा रहा यह कृत्य कैंसर जैसी लाइलाज बीमारियों का कारण बन रहा है, लेकिन इसका सबसे बड़ा खामियाजा हमारी आने वाली पीढ़ियों को भुगतना पड़ेगा।</p>



<p><strong>प्रशासन व संबंधित विभागों को इस मामले में सख्त रुख अपनाने की जरूरत<br></strong>इस संबंध में सामाजिक कार्यकर्त्ता और सेवानिवृत्त अधिकारी सुखदेव सिंह पन्नू ने अपनी राय देते हुए कहा कि पर्यावरण को प्रदूषित करने वाले ऐसे तस्करों के खिलाफ कार्रवाई की जानी चाहिए। उन्होंने कहा कि इसके लिए जिला प्रशासन को ऐसी फैक्ट्रियों का निरीक्षण करने के लिए विशेष टिमे भी तैनात करनी चाहिए। उन्होंने कहा कि इसके लिए जहां फैक्ट्रियां चलने वाले जिम्मेदार हैं। उनसे भी ज्यादा समय-समय पर रही सरकारों में भी इनको रोकने की बजाय इनका साथ दिया है। उन्होंने कहा कि आज समय की सरकार ने तो सबसे ज्यादा हद ही पार कर दी है, क्योंकि उनके द्वारा इन फैक्टरी मालिकों को सीधे तौर पर कहा कि वह अपनी मर्जी से अंडरग्राऊंड बोर करवा कर यह जहरीला पानी जमीन में डाल सकते हैं, जिस पर कोई संख्त कार्रवाई नहीं हो।</p>



<p><strong>पर्यावरण व स्वास्थ्य पर घातक प्रभाव<br></strong>इस संबंध में विशेषज्ञों का कहना है कि अगर हवा और पानी दोनों ही प्रदूषित हो जाएं तो आने वाले समय में मनुष्य का जीवन यापन बहुत मुश्किल हो जाएगा। उन्होंने बताया कि अमृतसर के पास की नहरें, जो कभी पवित्रता की प्रतीक मानी जाती थीं, अब कारखानों के गंदे पानी के कारण काली हो गई हैं। हालांकि इस संबंध में महान विद्वान और पर्यावरणविद लगातार आवाज उठा रहे हैं। पंजाब के पर्यावरण को बचाने के लिए जल संरक्षण हेतु नई परियोजनाएं शुरू करना अत्यंत आवश्यक है।</p>



<p><strong>लोगों की लापरवाही पर विरोध<br></strong>किसान प्रकोष्ठ के नेता और लोक भलाई इंसाफ वैल्फेयर समिति के अध्यक्ष बलदेव सिंह सिरसा ने कहा कि इस गंभीर मुद्दे पर जनता में भारी आक्रोश है और कई संगठनों ने प्रशासन को पत्र लिखकर प्रदूषण फैलाने वाली इकाइयों को बंद करने की मांग की है। शहर के विभिन्न चौराहों और ए.डी.ए. कॉलोनियों में रहने वाले लोगों का कहना है कि पानी की गुणवत्ता में गिरावट का असर छोटे बच्चों और गर्भवती महिलाओं के स्वास्थ्य पर पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि देश के हर व्यक्ति को इस मामले में अपनी जिम्मेदारी समझनी होगी। जब तक जनता एकजुट होकर इस प्रदूषण के खिलाफ विरोध प्रदर्शन नहीं करती और जागरूक नहीं होती, तब तक इसका कोई स्थायी समाधान संभव नहीं है।</p>



<p><strong>फैक्टरियों व कारखानों के अवैध जल निकासी पर रिपोर्ट तैयार करने की जरूरत<br></strong>इस संदर्भ में, विगत समय में सर्वोच्च अदालत और उच्च अदालत द्वारा जल प्रदूषण पर कई बार कड़ी टिप्पणी की है। हाल ही में एक मामले की सुनवाई के दौरान अदालत द्वारा कहा कि स्वच्छ जल प्राप्त करना प्रत्येक नागरिक का मौलिक अधिकार है। संबंधित क्षेत्रों के विधि एवं अन्य राजस्व अधिकारियों को भी नहर की भूमि और फैक्ट्रियो को चलाने वाले लोगों द्वारा किए जा रहे अवैध जल निकासी पर रिपोर्ट तैयार करनी चाहिए। यदि हम आज भी इसका ध्यान नहीं रखेंगे तो आने वाले समय में पीने के पानी की कमी इतनी बढ़ जाएगी कि रोजगार और अन्य सुविधाएं अर्थहीन हो जाएंगी। , अंत में उल्लेखित बेरोजगार युवाओं को भी पर्यावरण संरक्षण से संबंधित परियोजनाओं में शामिल किया जाना चाहिए, ताकि रोजगार के साथ-साथ वे धरती माता की सेवा भी कर सकें।</p>
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