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	<title>गुप्त नवरात्र &#8211; Live Halchal</title>
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	<title>गुप्त नवरात्र &#8211; Live Halchal</title>
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		<title>गुप्त नवरात्र की तृतीया तिथि पर बन रहे ये योग, पंचांग से जानें क्या रहेगा शुभ मुहूर्त</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Live Halchal Web_Wing]]></dc:creator>
		<pubDate>Wed, 21 Jan 2026 06:45:15 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[अध्यात्म]]></category>
		<category><![CDATA[धर्म]]></category>
		<category><![CDATA[गुप्त नवरात्र]]></category>
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					<description><![CDATA[<img width="618" height="304" src="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2026/01/Screenshot-2026-01-20-223825.png" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" fetchpriority="high" srcset="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2026/01/Screenshot-2026-01-20-223825.png 767w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2026/01/Screenshot-2026-01-20-223825-300x147.png 300w" sizes="(max-width: 618px) 100vw, 618px" />पंचांग के अनुसार, आज यानी 21 जनवरी को गुप्त नवरात्र का तीसरा दिन है। तृतीया तिथि पर मां ललिता की पूजा-अर्चना करने का विधान है। साथ ही विधिपूर्वक व्रत किया जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, मां ललिता की पूजा करने से ज्ञान और शक्ति में वृद्धि होती है। तृतीया तिथि पर कई योग भी &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<img width="618" height="304" src="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2026/01/Screenshot-2026-01-20-223825.png" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" srcset="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2026/01/Screenshot-2026-01-20-223825.png 767w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2026/01/Screenshot-2026-01-20-223825-300x147.png 300w" sizes="(max-width: 618px) 100vw, 618px" />
<p>पंचांग के अनुसार, आज यानी 21 जनवरी को गुप्त नवरात्र का तीसरा दिन है। तृतीया तिथि पर मां ललिता की पूजा-अर्चना करने का विधान है। साथ ही विधिपूर्वक व्रत किया जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, मां ललिता की पूजा करने से ज्ञान और शक्ति में वृद्धि होती है। तृतीया तिथि पर कई योग भी बन रहे हैं। ऐसे में आइए जानते हैं आज का पंचांग के बारे में।</p>



<p>तिथि: शुक्ल तृतीया<br>मास पूर्णिमांत: माघ<br>दिन: बुधवार<br>संवत्: 2082</p>



<p>तिथि: शुक्ल तृतीया – 22 जनवरी को रात्रि 02 बजकर 47 मिनट तक<br>योग: व्यतीपात – सायं 06 बजकर 58 मिनट तक<br>करण: तैतिल – दोपहर 02 बजकर 47 मिनट तक<br>करण:गरज – 22 जनवरी को रात्रि 02 बजकर 47 मिनट तक</p>



<p><strong>सूर्योदय और सूर्यास्त का समय<br></strong>सूर्योदय का समय: प्रातः 07 बजकर 14 मिनट पर<br>सूर्यास्त का समय: सायं 05 बजकर 51 मिनट पर<br>चंद्रोदय का समय: प्रातः 08 बजकर 51 मिनट पर<br>चंद्रास्त का समय: सायं 08 बजकर 20 मिनट पर</p>



<p><strong>आज के शुभ मुहूर्त<br></strong>अभिजीत मुहूर्त: नहीं है<br>अमृत काल: 22 जनवरी को प्रातः 07 बजकर 06 मिनट से प्रातः 08 बजकर 44 मिनट तक</p>



<p><strong>आज के अशुभ समय<br></strong>राहुकाल: दोपहर 12 बजकर 33 मिनट से दोपहर 01 बजकर 52 मिनट तक<br>गुलिकाल: दोपहर 11 बजकर 13 मिनट से दोपहर 12 बजकर 33 मिनट तक<br>यमगण्ड: प्रातः 08 बजकर 34 मिनट से प्रातः 09 बजकर 53 मिनट</p>



<p><strong>आज का नक्षत्र<br></strong>आज चंद्रदेव धनिष्ठा नक्षत्र में रहेंगे।<br>धनिष्ठा नक्षत्र: दोपहर 01 बजकर 58 मिनट तक<br>सामान्य विशेषताएं: आत्मविश्वासी, शक्तिशाली, धैर्यवान, परिश्रमी, प्रसिद्धि, सौंदर्य, धन, कलात्मक प्रतिभा, स्वतंत्र स्वभाव, स्वार्थी, लालची, क्रोधी, विश्वसनीय और दानशील<br>नक्षत्र स्वामी: मंगल देव<br>राशि स्वामी: शनि देव<br>देवता: आठ वसु (भौतिक समृद्धि के देवता)<br>प्रतीक: ढोल या बांसुरी</p>
]]></content:encoded>
					
		
		
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		<title>आज है गुप्त नवरात्र का दूसरा दिन, बन रहे ये मंगलकारी योग</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Live Halchal Web_Wing]]></dc:creator>
		<pubDate>Tue, 20 Jan 2026 04:27:47 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[अध्यात्म]]></category>
		<category><![CDATA[धर्म]]></category>
		<category><![CDATA[गुप्त नवरात्र]]></category>
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					<description><![CDATA[<img width="618" height="316" src="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2026/01/Screenshot-2026-01-19-202407.png" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" srcset="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2026/01/Screenshot-2026-01-19-202407.png 739w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2026/01/Screenshot-2026-01-19-202407-300x153.png 300w" sizes="(max-width: 618px) 100vw, 618px" />Aaj ka Panchang 20 जनवरी 2026 के अनुसार, आज माघ माह के शुक्ल पक्ष की द्वितीया तिथि है। इस तिथि पर मां तारा की पूजा-अर्चना करने का विधान है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, मां तारा की पूजा करने से साधक को शुभ फल की प्राप्ति होती है। ऐसे में आइए एस्ट्रोलॉजर आनंद सागर पाठक से &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<img width="618" height="316" src="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2026/01/Screenshot-2026-01-19-202407.png" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" loading="lazy" srcset="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2026/01/Screenshot-2026-01-19-202407.png 739w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2026/01/Screenshot-2026-01-19-202407-300x153.png 300w" sizes="auto, (max-width: 618px) 100vw, 618px" />
<p>Aaj ka Panchang 20 जनवरी 2026 के अनुसार, आज माघ माह के शुक्ल पक्ष की द्वितीया तिथि है। इस तिथि पर मां तारा की पूजा-अर्चना करने का विधान है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, मां तारा की पूजा करने से साधक को शुभ फल की प्राप्ति होती है। ऐसे में आइए एस्ट्रोलॉजर आनंद सागर पाठक से जानते हैं आज की तिथि, शुभ-अशुभ योग, सूर्योदय, सूर्यास्त और राहुकाल का समय समेत आदि जानकारी।</p>



<p>पंचांग के अनुसार, आज यानी 20 जनवरी को गुप्त नवरात्र का दूसरा दिन है। द्वितीया तिथि पर मां तारा की पूजा-अर्चना करने का विधान है। साथ ही विधिपूर्वक व्रत भी किया जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, मां तारा की साधना करने से ज्ञान, बुद्धि और आध्यात्मिक शक्ति मिलती है और मां तारा की कृपा बनी रहती है। द्वितीया तिथि पर कई मंगलकारी योग भी बन रहे हैं। ऐसे में आइए जानते हैं आज का पंचांग (Aaj ka Panchang 20 January 2026) के बारे में।</p>



<p><strong>तिथि:</strong> शुक्ल द्वितीया<br>मास पूर्णिमांत: माघ<br>दिन: मंगलवार<br>संवत्: 2082</p>



<p><strong>तिथि: शुक्ल द्वितीया</strong> – 21 जनवरी को रात्रि 02 बजकर 42 मिनट तक<br>योग: सिद्धि – रात्रि 08 बजकर 01 मिनट तक<br>करण: बालव – दोपहर 02 बजकर 31 मिनट तक<br>करण: कौलव – 21 जनवरी को रात्रि 02 बजकर 42 मिनट तक</p>



<p><strong>सूर्योदय और सूर्यास्त का समय</strong><br>सूर्योदय का समय: प्रातः 07 बजकर 14 मिनट पर<br>सूर्यास्त का समय: सायं 05 बजकर 50 मिनट पर<br>चंद्रोदय का समय: प्रातः 08 बजकर 17 मिनट पर<br>चंद्रास्त का समय: सायं 07 बजकर 20 मिनट पर</p>



<p><strong>आज के शुभ मुहूर्त</strong><br>अभिजीत मुहूर्त: दोपहर 12 बजकर 11 मिनट से दोपहर 12 बजकर 53 मिनट तक<br>अमृत काल: 21 जनवरी को रात्रि 03 बजकर 12 मिनट से रात्रि 04 बजकर 51 मिनट तक</p>



<p><strong>आज के अशुभ समय</strong><br>राहुकाल: दोपहर 03 बजकर 11 मिनट से सायं 04 बजकर 31 मिनट तक<br>गुलिकाल: दोपहर 12 बजकर 32 मिनट से दोपहर 01 बजकर 52 मिनट तक<br>यमगण्ड: प्रातः 09 बजकर 53 मिनट से प्रातः 11 बजकर 13 मिनट तक</p>



<p><strong>आज का नक्षत्र</strong><br>आज चंद्रदेव श्रवण नक्षत्र में रहेंगे।<br>श्रवण नक्षत्र: दोपहर 01 बजकर 06 मिनट तक<br>सामान्य विशेषताएं: सीखने की क्षमता, बुद्धिमान, सहयोगी, ज्ञानार्जन, सुनने में निपुण, आत्मविश्वास की कमी, जिज्ञासु, अत्यधिक सतर्क और जिज्ञासु<br>नक्षत्र स्वामी: चंद्र देव<br>राशि स्वामी: शनि देव<br>देवता: विष्णु (रक्षक)<br>प्रतीक: कान</p>
]]></content:encoded>
					
		
		
			</item>
		<item>
		<title>गुप्त नवरात्र के पहले दिन करें मां काली की खास पूजा</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Live Halchal Web_Wing]]></dc:creator>
		<pubDate>Mon, 19 Jan 2026 05:30:45 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[अध्यात्म]]></category>
		<category><![CDATA[धर्म]]></category>
		<category><![CDATA[गुप्त नवरात्र]]></category>
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					<description><![CDATA[<img width="618" height="357" src="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2026/01/Screenshot-2026-01-18-212829.png" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" loading="lazy" srcset="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2026/01/Screenshot-2026-01-18-212829.png 743w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2026/01/Screenshot-2026-01-18-212829-300x173.png 300w" sizes="auto, (max-width: 618px) 100vw, 618px" />आज 19 जनवरी 2026 से माघ महीने की गुप्त नवरात्र का शुभारंभ हो गया है। गुप्त नवरात्र का पहला दिन दस महाविद्याओं में प्रथम और सबसे शक्तिशाली रूप मां काली की पूजा-अर्चना को समर्पित है। जहां सामान्य नवरात्र में सात्विक पूजा का विधान है, वहीं गुप्त नवरात्र की शुरुआत मां काली की उग्र ऊर्जा के &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<img width="618" height="357" src="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2026/01/Screenshot-2026-01-18-212829.png" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" loading="lazy" srcset="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2026/01/Screenshot-2026-01-18-212829.png 743w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2026/01/Screenshot-2026-01-18-212829-300x173.png 300w" sizes="auto, (max-width: 618px) 100vw, 618px" />
<p>आज 19 जनवरी 2026 से माघ महीने की गुप्त नवरात्र का शुभारंभ हो गया है। गुप्त नवरात्र का पहला दिन दस महाविद्याओं में प्रथम और सबसे शक्तिशाली रूप मां काली की पूजा-अर्चना को समर्पित है। जहां सामान्य नवरात्र में सात्विक पूजा का विधान है, वहीं गुप्त नवरात्र की शुरुआत मां काली की उग्र ऊर्जा के आह्वान से की जाती है। ऐसी मान्यता है कि गुप्त नवरात्र के पहले दिन मां काली की भाव के साथ पूजा करने से साधक के जीवन के बड़े से बड़े दुख-दर्द, शत्रु और मानसिक तनाव दूर हो जाते हैं।</p>



<p>ऐसे में देवी को लाल गुड़हल का फूल, लौंग या नींबू की माला और गुड़ अर्पित करें। इसके बाद मां काली के 108 नामों का जप व आरती करें, जो इस प्रकार हैं –</p>



<p><strong>।।देवी मां काली के 108 नाम।।</strong></p>



<p>ॐ काल्यै नमः।<br>ॐ कपालिन्यै नमः।<br>ॐ कान्तायै नमः।<br>ॐ कामदायै नमः।<br>ॐ कामसुन्दर्यै नमः।<br>ॐ कालरात्र्यै नमः।<br>ॐ कालिकायै नमः।<br>ॐ कालभैरवपूजितायै नमः।<br>ॐ कुरुकुल्लायै नमः।<br>ॐ कामिन्यै नमः।<br>ॐ कमनीयस्वभाविन्यै नमः।<br>ॐ कुलीनायै नमः।<br>ॐ कुलकर्त्र्यै नमः।<br>ॐ कुलवर्त्मप्रकाशिन्यै नमः।<br>ॐ कस्तूरीरसनीलायै नमः।<br>ॐ काम्यायै नमः।<br>ॐ कामस्वरूपिण्यै नमः।<br>ॐ ककारवर्णनिलयायै नमः।<br>ॐ कामधेन्वै नमः।<br>ॐ करालिकायै नमः।<br>ॐ कुलकान्तायै नमः।<br>ॐ करालास्यायै नमः।<br>ॐ कामार्तायै नमः।<br>ॐ कलावत्यै नमः।<br>ॐ कृशोदर्यै नमः।<br>ॐ कामाख्यायै नमः।<br>ॐ कौमार्यै नमः।<br>ॐ कुलपालिन्यै नमः।<br>ॐ कुलजायै नमः।<br>ॐ कुलकन्यायै नमः।<br>ॐ कलहायै नमः।<br>ॐ कुलपूजितायै नमः।<br>ॐ कामेश्वर्यै नमः।<br>ॐ कामकान्तायै नमः।<br>ॐ कुञ्जेश्वरगामिन्यै नमः।<br>ॐ कामदात्र्यै नमः।<br>ॐ कामहर्त्र्यै नमः।<br>ॐ कृष्णायै नमः।<br>ॐ कपर्दिन्यै नमः।<br>ॐ कुमुदायै नमः।<br>ॐ कृष्णदेहायै नमः।<br>ॐ कालिन्द्यै नमः।<br>ॐ कुलपूजितायै नमः।<br>ॐ काश्यप्यै नमः।<br>ॐ कृष्णमात्रे नमः।<br>ॐ कुशिशाङ्ग्यै नमः।<br>ॐ कलायै नमः।<br>ॐ क्रींरूपायै नमः।<br>ॐ कुलगम्यायै नमः।<br>ॐ कमलायै नमः।<br>ॐ कृष्णपूजितायै नमः।<br>ॐ कृशाङ्ग्यै नमः।<br>ॐ किन्नर्यै नमः।<br>ॐ कर्त्र्यै नमः।<br>ॐ कलकण्ठ्यै नमः।<br>ॐ कार्तिक्यै नमः।<br>ॐ कम्बुकण्ठ्यै नमः।<br>ॐ कौलिन्यै नमः।<br>ॐ कुमुदायै नमः।<br>ॐ कामजीविन्यै नमः।<br>ॐ कुलस्त्रियै नमः।<br>ॐ कीर्तिकायै नमः।<br>ॐ कृत्यायै नमः।<br>ॐ कीर्त्यै नमः।<br>ॐ कुलपालिकायै नमः।<br>ॐ कामदेवकलायै नमः।<br>ॐ कल्पलतायै नमः।<br>ॐ कामाङ्गवर्धिन्यै नमः।<br>ॐ कुन्तायै नमः।<br>ॐ कुमुदप्रीतायै नमः।<br>ॐ कदम्बकुसुमोत्सुकायै नमः।<br>ॐ कादम्बिन्यै नमः।<br>ॐ कमलिन्यै नमः।<br>ॐ कृष्णानन्दप्रदायिन्यै नमः।<br>ॐ कुमारीपूजनरतायै नमः।<br>ॐ कुमारीगणशोभितायै नमः।<br>ॐ कुमारीरञ्जनरतायै नमः।<br>ॐ कुमारीव्रतधारिण्यै नमः।<br>ॐ कङ्काल्यै नमः।<br>ॐ कमनीयायै नमः।<br>ॐ कामशास्त्रविशारदायै नमः।<br>ॐ कपालखट्वाङ्गधरायै नमः।<br>ॐ कालभैरवरूपिण्यै नमः।<br>ॐ कोटर्यै नमः।<br>ॐ कोटराक्ष्यै नमः।<br>ॐ काशीवासिन्यै नमः।<br>ॐ कैलासवासिन्यै नमः।<br>ॐ कात्यायन्यै नमः।<br>ॐ कार्यकर्यै नमः।<br>ॐ काव्यशास्त्रप्रमोदिन्यै नमः।<br>ॐ कामाकर्षणरूपायै नमः।<br>ॐ कामपीठनिवासिन्यै नमः।<br>ॐ कङ्गिन्यै नमः।<br>ॐ काकिन्यै नमः।<br>ॐ क्रीडायै नमः।<br>ॐ कुत्सितायै नमः।<br>ॐ कलहप्रियायै नमः।<br>ॐ कुण्डगोलोद्भवप्राणायै नमः।<br>ॐ कौशिक्यै नमः।<br>ॐ कीर्तिवर्धिन्यै नमः।<br>ॐ कुम्भस्तन्यै नमः।<br>ॐ कटाक्षायै नमः।<br>ॐ काव्यायै नमः।<br>ॐ कोकनदप्रियायै नमः।<br>ॐ कान्तारवासिन्यै नमः।<br>ॐ कान्त्यै नमः।<br>ॐ कठिनायै नमः।<br>ॐ कृष्णवल्लभायै नमः।</p>
]]></content:encoded>
					
		
		
			</item>
		<item>
		<title>गुप्त नवरात्र में भारी पड़ सकती है ये एक छोटी सी भूल</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Live Halchal Web_Wing]]></dc:creator>
		<pubDate>Mon, 19 Jan 2026 05:26:04 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[अध्यात्म]]></category>
		<category><![CDATA[धर्म]]></category>
		<category><![CDATA[गुप्त नवरात्र]]></category>
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					<description><![CDATA[<img width="618" height="472" src="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2026/01/Screenshot-2026-01-18-212051.png" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" loading="lazy" srcset="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2026/01/Screenshot-2026-01-18-212051.png 719w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2026/01/Screenshot-2026-01-18-212051-300x229.png 300w" sizes="auto, (max-width: 618px) 100vw, 618px" />आज से गुप्त नवरात्र शुरू हो चुके हैं। हिंदू धर्म में गुप्त नवरात्र को तंत्र-मंत्र की साधना और कोई खास मनोकामनाओं की पूर्ति के लिए बहुत फलदायी माना गया है। जहां चैत्र और शारदीय नवरात्र में धूमधाम से उत्सव का माहौल होता है, वहीं गुप्त नवरात्र की पूजा बेहद गोपनीय तरीके से की जाती है। &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<img width="618" height="472" src="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2026/01/Screenshot-2026-01-18-212051.png" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" loading="lazy" srcset="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2026/01/Screenshot-2026-01-18-212051.png 719w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2026/01/Screenshot-2026-01-18-212051-300x229.png 300w" sizes="auto, (max-width: 618px) 100vw, 618px" />
<p>आज से गुप्त नवरात्र शुरू हो चुके हैं। हिंदू धर्म में गुप्त नवरात्र को तंत्र-मंत्र की साधना और कोई खास मनोकामनाओं की पूर्ति के लिए बहुत फलदायी माना गया है। जहां चैत्र और शारदीय नवरात्र में धूमधाम से उत्सव का माहौल होता है, वहीं गुप्त नवरात्र की पूजा बेहद गोपनीय तरीके से की जाती है। शास्त्रों के अनुसार, गुप्त नवरात्र की पूजा जितनी फलदायी है, उसके नियम उतने ही कठिन हैं। विशेष रूप से पहले दिन की गई एक छोटी सी चूक आपकी पूरी पूजा को खराब कर सकती है और आपको मुश्किलों में डाल सकती है। आइए जानते हैं गुप्त नवरात्र के पहले दिन किन नियमों का पालन करना चाहिए और किनसे बचना चाहिए?</p>



<p><strong>भूलकर भी न करें ये गलतियां<br></strong>गुप्त नवरात्र की सबसे बड़ी गलती अपनी पूजा के बारे में लोगों को बताना है। अगर आप किसी विशेष फल के लिए पूजा-अर्चना कर रहे हैं, तो इसके बारे में किसी व्यक्ति को न बताएं।<br>इन नौ दिनों में प्याज, लहसुन, मांस और मदिरा का सेवन पूरी तरह से वर्जित माना गया है। पहले दिन कलश स्थापना के बाद अगर घर में तामसिक भोजन बनता है, तो मां लक्ष्मी और मां काली रुष्ट हो सकती हैं।<br>धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, नवरात्र के दौरान बाल कटवाना, दाढ़ी बनाना या नाखून काटना शुभ नहीं माना जाता।<br>गुप्त नवरात्र के पहले दिन घर में लड़ाई-झगड़ा न करें। इस दौरान किसी महिला, बुजुर्ग या कन्या का अपमान करना भारी पड़ सकता है, क्योंकि महिलाओं को मां दुर्गा का प्रतीक माना गया है और उनके अपमान से पूजा का फल खत्म हो सकता है।</p>



<p><strong>पहले दिन क्या करें?<br></strong>नवरात्र के पहले दिन शुभ मुहूर्त जैसे अभिजीत मुहूर्त में ही कलश की स्थापना करें। कलश को सुख-समृद्धि का प्रतीक माना जाता है।<br>गुप्त नवरात्र के नौ दिनों तक मन, वचन और कर्म से पवित्र रहें। जैसे – जमीन पर सोना और सात्विक आहार करना आदि।<br>मां काली या 10 महाविद्याओं के मंत्रों का जाप मानसिक रूप से करें। जप माला ढकी हुई होनी चाहिए, ताकि साधना गुप्त रहे।<br>अगर हो पाए, तो अखंड ज्योति जलाएं। नहीं, तो सुबह-शाम घी का दीपक जलाकर आरती जरूर करें। इससे घर की नकारात्मक ऊर्जा दूर होती है।</p>



<p><strong>करें ये खास उपाय<br></strong>गुप्त नवरात्र के दौरान अगर आप किसी तांत्रिक मंत्र का जाप कर रहे हैं, तो उसे बिना गुरु के या सही उच्चारण के न करें। पहले दिन ‘ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे’ जैसे मंत्रों का जप कर सकते हैं। साथ ही मां को गुड़ का भोग लगाएं। इससे देवी की विशेष कृपा मिलेगी।</p>
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		<title> कब से शुरू होंगे गुप्त नवरात्र?</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Live Halchal Web_Wing]]></dc:creator>
		<pubDate>Wed, 14 Jan 2026 07:56:59 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[अध्यात्म]]></category>
		<category><![CDATA[धर्म]]></category>
		<category><![CDATA[गुप्त नवरात्र]]></category>
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					<description><![CDATA[<img width="618" height="311" src="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2026/01/Screenshot-2026-01-13-235134.png" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" loading="lazy" srcset="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2026/01/Screenshot-2026-01-13-235134.png 740w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2026/01/Screenshot-2026-01-13-235134-300x151.png 300w" sizes="auto, (max-width: 618px) 100vw, 618px" />वैदिक पंचांग के अनुसार, हर साल माघ माह के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि से गुप्त नवरात्र की शुरुआत होती है। इस दौरान मां दुर्गा के उग्र स्वरूपों की पूजा-अर्चना का विशेष महत्व है। ऐसे में आइए एस्ट्रोपत्री की दिव्या गौतम से जानते हैं गुप्त नवरात्र का धार्मिक महत्व (Gupt Navratri 2026 significance) और मान्यताएं। &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<img width="618" height="311" src="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2026/01/Screenshot-2026-01-13-235134.png" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" loading="lazy" srcset="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2026/01/Screenshot-2026-01-13-235134.png 740w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2026/01/Screenshot-2026-01-13-235134-300x151.png 300w" sizes="auto, (max-width: 618px) 100vw, 618px" />
<p>वैदिक पंचांग के अनुसार, हर साल माघ माह के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि से गुप्त नवरात्र की शुरुआत होती है। इस दौरान मां दुर्गा के उग्र स्वरूपों की पूजा-अर्चना का विशेष महत्व है। ऐसे में आइए एस्ट्रोपत्री की दिव्या गौतम से जानते हैं गुप्त नवरात्र का धार्मिक महत्व (Gupt Navratri 2026 significance) और मान्यताएं।</p>



<p>सनातन धर्म में गुप्त नवरात्र को शक्ति साधना और आत्मिक साधना का विशेष पर्व माना गया है। वर्ष 2026 में माघ मास के गुप्त नवरात्र का आरंभ 19 जनवरी (Gupt Navratri 2026 date) से होगा, जो नौ दिनों तक चलेगा। यह नवरात्र वर्ष में दो बार आते हैं और सामान्य नवरात्र से भिन्न स्वरूप रखते हैं। जहां चैत्र और शारदीय नवरात्र सार्वजनिक उत्सव और विधिवत पूजन के रूप में मनाए जाते हैं, वहीं गुप्त नवरात्र साधना प्रधान माने जाते हैं। इस दौरान सार्वजनिक आयोजन की बजाय मौन, जप और ध्यान को अधिक महत्व दिया जाता है। धार्मिक दृष्टि से यह समय शक्ति उपासना और आत्मसंयम के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण माना गया है।</p>



<p><strong>गुप्त नवरात्र का धार्मिक महत्व (religious significance Gupt Navratri)</strong></p>



<p>धार्मिक मान्यताओं के अनुसार गुप्त नवरात्र देवी शक्ति की उपासना का ऐसा काल है, जिसमें साधक बाहरी दिखावे से दूर रहकर आंतरिक साधना पर ध्यान केंद्रित करता है। इसे आत्मिक शुद्धि और चेतना जागरण का समय माना गया है। मान्यता है कि इन नौ दिनों में की गई साधना साधक के भीतर छिपी ऊर्जा को जगाती है। यही कारण है कि गुप्त नवरात्र को रहस्यमय और गंभीर साधना काल कहा गया है। इस समय नियम, संयम और श्रद्धा का विशेष पालन आवश्यक माना जाता है, जिससे साधना का पूर्ण फल प्राप्त हो सके।</p>



<p><strong>देवी महाविद्याओं की साधना से जुड़ी मान्यताएं</strong></p>



<p>गुप्त नवरात्र के दौरान देवी दुर्गा के प्रकट स्वरूपों के बजाय उनके गुप्त और उग्र स्वरूपों की उपासना का विशेष महत्व बताया गया है। धार्मिक ग्रंथों और परंपराओं में काली, तारा, भुवनेश्वरी, छिन्नमस्ता सहित महाविद्याओं की साधना का उल्लेख मिलता है। यह उपासना सामान्य पूजा पद्धति से अलग मानी जाती है और इसमें मंत्र जप, ध्यान और नियमों का कठोर पालन किया जाता है। मान्यता है कि इस साधना से साधक की आंतरिक शक्ति मजबूत होती है और मानसिक स्थिरता प्राप्त होती है। इसी कारण यह काल साधना मार्ग पर चलने वालों के लिए विशेष माना गया है।</p>



<p>गुप्त नवरात्र (Gupt Navratri beliefs) का मूल उद्देश्य आत्मशुद्धि और आंतरिक शक्ति को जगाना माना गया है। यह पर्व सिखाता है कि वास्तविक साधना बाहरी प्रदर्शन में नही, बल्कि अनुशासन, मौन और एकाग्रता में होती है। इन नौ दिनों में सात्विक भोजन, शांत वाणी और संयमित दिनचर्या को विशेष महत्व दिया जाता है। माना जाता है कि श्रद्धा और नियमपूर्वक की गई साधना से नकारात्मक विचार धीरे धीरे कमजोर होते हैं और आत्मबल में वृद्धि होती है। कुल मिलाकर, गुप्त नवरात्र केवल धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि आत्मिक संतुलन और चेतना विस्तार का महत्वपूर्ण अवसर माना गया है।</p>
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