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	<title>गुजरात विधानसभा चुनाव में ये सात चेहरे ला सकते है नया मोड़&#8230; &#8211; Live Halchal</title>
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		<title>गुजरात विधानसभा चुनाव में तृणमूल कांग्रेस पूरी ताकत के साथ उतरेगी मैदान में&#8230;..</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Jaya Kashyap]]></dc:creator>
		<pubDate>Mon, 26 Jul 2021 11:26:09 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[<img width="618" height="429" src="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2021/07/FDGHGTR.jpg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" fetchpriority="high" srcset="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2021/07/FDGHGTR.jpg 650w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2021/07/FDGHGTR-300x208.jpg 300w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2021/07/FDGHGTR-110x75.jpg 110w" sizes="(max-width: 618px) 100vw, 618px" />अहमदाबाद, गुजरात में अगले साल होने वाले विधानसभा चुनाव के लिए ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) भी ताल ठोक रही है। पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री व पार्टी सुप्रीमो ममता बनर्जी का एक भाषण हाल ही गुजरात में भी वर्चुअल प्लेटफार्म के जरिए दिखाया गया था। फरवरी व मार्च 2021 में हुए निकाय व पंचायत चुनाव &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<img width="618" height="429" src="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2021/07/FDGHGTR.jpg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" srcset="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2021/07/FDGHGTR.jpg 650w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2021/07/FDGHGTR-300x208.jpg 300w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2021/07/FDGHGTR-110x75.jpg 110w" sizes="(max-width: 618px) 100vw, 618px" /><div class="articleBody">
<p><strong>अहमदाबाद,</strong> गुजरात में अगले साल होने वाले विधानसभा चुनाव के लिए ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) भी ताल ठोक रही है। पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री व पार्टी सुप्रीमो ममता बनर्जी का एक भाषण हाल ही गुजरात में भी वर्चुअल प्लेटफार्म के जरिए दिखाया गया था। फरवरी व मार्च 2021 में हुए निकाय व पंचायत चुनाव में आम आदमी पार्टी (आप) व ऑल इंडिया मजलिस ए इत्तेहादुल मुस्लिमीन (एआइएमआइएम) को मिली आंशिक सफलता के बाद ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस ने भी गुजरात में भाग्य आजमाने का फैसला किया है। तृणमूल कांग्रेस गुजरात के प्रदेश संयोजक जितेंद्र खड़ायता बताते हैं कि तृणमूल कांग्रेस ने 2012 के विधानसभा चुनाव में एक प्रत्याशी मैदान में उतारा था, लेकिन वह चुनाव पार्टी ने आधे-अधूरे मन से लड़ा था।<img decoding="async" class="size-full wp-image-450996 aligncenter" src="http://www.livehalchal.com/wp-content/uploads/2021/07/FDGHGTR.jpg" alt="" width="650" height="451" srcset="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2021/07/FDGHGTR.jpg 650w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2021/07/FDGHGTR-300x208.jpg 300w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2021/07/FDGHGTR-110x75.jpg 110w" sizes="(max-width: 650px) 100vw, 650px" /></p>
<p>गुजरात में अगले साल होने वाले विधानसभा चुनाव में ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस अपनी पूरी ताकत के साथ मैदान में उतरेगी। तृणमूल कांग्रेस आगामी दिनों में गुजरात में एक जोरदार चुनाव अभियान की तैयारी कर रही है। सबसे पहले पार्टी राज्य के बड़े शहरों में प्रमुख चौराहों पर होर्डिंग व बैनर लगाएगी। पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने हाल ही संपन्न हुए प्रदेश के चुनाव में भाजपा को हराकर तीसरी बार पश्चिम बंगाल की कमान संभाली है। इस चुनाव के बाद से ही लगातार राजनीतिक गलियारों में ममता के गुजरात में धमक दिखाने की चर्चाएं थीं, अब धीरे-धीरे पार्टी अपने पत्ते खोल रही है। हालांकि तृणमूल कांग्रेस का गुजरात में संगठन तथा कैडर कहीं नजर नहीं आता है, लेकिन ममता बनर्जी के चेहरे पर ही पार्टी यह चुनाव लड़ने का प्रयास कर रही है। गुजरात में हुए निकाह पंचायत व पालिका चुनाव में आम आदमी पार्टी तथा एआइएमआइएम अपनी जगह बनाने में कामयाब रहे। आप ने सूरत महानगर पालिका में प्रमुख विपक्षी दल की हैसियत हासिल की।</p>
<p>वहीं, एआइएमआइएम गोधरा, मोडासा, अहमदाबाद में अपने उपस्थिति दर्ज कराई। तृणमूल कांग्रेस राष्ट्रीय स्तर पर अपने पांव मजबूत करने की तैयारी कर रही है. इसीलिए अगले साल होने वाले विधानसभा चुनाव में पार्टी गुजरात से इसकी शुरुआत करना चाहती है। 2022 में गुजरात में होने वाले विधानसभा चुनाव काफी दिलचस्प होंगे। आमतौर पर गुजरात के विधानसभा चुनाव भारतीय जनता पार्टी व इंडियन नेशनल कांग्रेस के बीच ही होते रहे हैं, राजनीतिक विश्लेषकों का भी यही मानना है कि गुजरात में तीसरे दल के लिए कोई स्थान नहीं है। पूर्व मुख्यमंत्री चिमन भाई पटेल व पूर्व मुख्यमंत्री शंकर सिंह वाघेला तथा पूर्व मुख्यमंत्री केशुभाई पटेल गुजरात में भाजपा व कांग्रेस के अलावा तीसरे दल को खड़ा करने का प्रयास कर चुके, लेकिन अंततः इन तीनो ही नेताओं को अपने दल का राष्ट्रीय पार्टी में विलय करना पड़ा। क्योंकि आम आदमी पार्टी तथा तृणमूल कांग्रेस अपने-अपने राज्यों में सत्ता में है, इसलिए उन्हें इसका कुछ लाभ जरूर मिल सकता है लेकिन अगले साल होने वाले विधानसभा चुनाव की तस्वीर साफ होने में अभी भी एक साल से अधिक समय शेष है।</p>
<p>&nbsp;</p>
</div>
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		<title>गुजरात विधानसभा चुनाव में ये सात चेहरे ला सकते है नया मोड़&#8230;</title>
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		<dc:creator><![CDATA[publisher]]></dc:creator>
		<pubDate>Thu, 02 Nov 2017 10:46:46 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[गुजरात]]></category>
		<category><![CDATA[राजनीति]]></category>
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					<description><![CDATA[<img width="618" height="376" src="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2017/11/km.png" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="गुजरात विधानसभा चुनाव में ये सात चेहरे ला सकते है नया मोड़..." style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" loading="lazy" srcset="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2017/11/km.png 757w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2017/11/km-300x183.png 300w" sizes="auto, (max-width: 618px) 100vw, 618px" />नरेंद्र मोदी के प्रधानमंत्री बनने के बाद गुजरात में पहली बार विधानसभा चुनाव होने जा रहा है। चूंकि यह प्रधानमंत्री का गृहराज्य है और पिछले 20 वर्षों से अधिक समय से यहां भाजपा का वर्चस्व है। इसलिए ये चुनाव पार्टी की नाक का सवाल बना हुआ है।    राज्य की 182 विधानसभा सीटों के लिए 9 और &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<img width="618" height="376" src="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2017/11/km.png" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="गुजरात विधानसभा चुनाव में ये सात चेहरे ला सकते है नया मोड़..." style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" loading="lazy" srcset="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2017/11/km.png 757w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2017/11/km-300x183.png 300w" sizes="auto, (max-width: 618px) 100vw, 618px" /><div class="desc"><strong>नरेंद्र मोदी के प्रधानमंत्री बनने के बाद गुजरात में पहली बार विधानसभा चुनाव होने जा रहा है। चूंकि यह प्रधानमंत्री का गृहराज्य है और पिछले 20 वर्षों से अधिक समय से यहां भाजपा का वर्चस्व है। इसलिए ये चुनाव पार्टी की नाक का सवाल बना हुआ है। <img loading="lazy" decoding="async" class="aligncenter size-full wp-image-89180" src="http://www.livehalchal.com/wp-content/uploads/2017/11/km.png" alt="गुजरात विधानसभा चुनाव में ये सात चेहरे ला सकते है नया मोड़..." width="757" height="461" srcset="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2017/11/km.png 757w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2017/11/km-300x183.png 300w" sizes="auto, (max-width: 757px) 100vw, 757px" /></strong></div>
<div class="desc"><strong> </strong><br />
<strong>राज्य की 182 विधानसभा सीटों के लिए 9 और 14 दिसंबर को चुनाव होने हैं। चुनाव के मद्देनजर बीजेपी और कांग्रेस के दिग्गज नेता सत्ता हासिल करने के लिए एड़ी-चोटी का जोर लगा रहे हैं, वहीं अभी-अभी उभरे नेता जाति और वोट बैंक के नाम पर अपनी राजनीति चमका रहे हैं। ये चुनाव कई मायनों में खास होने वाला है।</strong></p>
<p><strong>पहली बार राज्य के 182 विधानसभा सीटों पर बूथ मैनेजमेंट का काम महिलाओं के हाथों में होगा। यानी हर सीट पर देखरेख के लिए महिला प्रतिनिधि मौजूद रहेंगी। इस चुनाव में करीब 50,128 पोलिंग बूथ पर मतदान होंगे और राज्य के करीब 4.3 करोड़ मतदाता नेताओं की तकदीर पर अपनी सहमति की मुहर लगाएंगे। </strong></p>
<p><strong>चुनावी गहमागहमी के बीच सबसे रोचक बात ये है कि इस बार के विधानसभा में चुनाव वोट देने वाली 65 फीसदी जनसंख्या की उम्र 35 वर्ष से कम है। ये भी कहा जा सकता है कि इस चुनाव में युवा अहम किरदार निभा सकते हैं। इस चुनाव के सबसे चर्चित चेहरों देश के प्रधानमंत्री सहित पटेल आंदोलन से चमके हार्दिक पटेल, जिग्नेश मेवाणी सहित कई युवा और बूढ़े होते युवाओं के नाम शामिल है।</strong></div>
<div id="slide-1" class="clr">
<div class="oh article-widgetDv">
<h3 id="title-1" class="ft30"><strong>गुजरात के सबसे अधिक समय तक मुख्यमंत्री रहे हैं प्रधानमंत्री</strong></h3>
</div>
<div class="desc"><strong>नरेंद्र मोदी</strong><br />
<strong>नरेंद्र मोदी देश के प्रधानमंत्री बनने से पहले गुजरात के सबसे अधिक समय तक मुख्यमंत्री रहे हैं। साल 1995 में पहली बार केशुभाई पटेल के नेतृत्व में गुजरात में बीजेपी ने सत्ता का स्वाद चखा था। 1998 में एक बार पार्टी ने फिर वापसी की और आज तक सत्ता में कायम हैं। राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के प्रचारक बन 30 साल पहले गुजरात आने वाले मोदी ने 2001 में मुख्यमंत्री का पद संभाला और फिर सबसे ईमानदार नेता की छवि के साथ साथ हिंदुत्व और विकास का नारा देकर राज्य में अपना दबदबा बनाया। उसी गुजरात विकास मॉडल के साथ 2014 के चुनाव में पीएम उम्मीदवार के रूप में उभरे थे। विधानसभा चुनावों में जिस तरह से मोदी रैलियां कर रहे हैं वो बताता है कि गुजरात मोदी का है और मोदी गुजरात के हैं।</strong></p>
<p><strong>अमित शाह</strong><br />
<strong>अमित शाह को राजनीति की गहरी समझ है शायद यही वजह है कि उन्होंने पार्टी के लिए चुनाव लड़ने की बजाय बीजेपी को चुनाव जिताने का बीड़ा उठाया है। 1980 में अमित शाह ने लाल कृष्ण आडवाणी का चुनाव प्रचार संभाला था। फिर उन्होंने पार्टी को मजबूत बनाने का बीड़ा उठाया और 2014 में यूपी में क्षेत्रीय पार्टी सहित कांग्रेस का सफाया कर यह बता दिया कि वो कितने बड़े नीति निर्माता हैं। 2014 में यूपी चुनाव जीतने के बाद वो भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष बनाए गए।</strong></div>
<div class="desc"><strong> </strong><br />
<strong>भारत सिंह सोलंकी-</strong><br />
<strong>भारत सिंह सोलंकी 2005 और 2008 के बीच गुजरात कांग्रेस के अध्यक्ष थे। लेकिन उनका ये सफर बहुत अच्छा नहीं रहा। 2015 में उन्हें दूसरी बार पार्टी अध्यक्ष बनाया गया और फिर उन्होंने कमाल ही कर दिया। उनकी देखरेख में पार्टी ने निकाय चुनावों में 20 से अधिक साल के चले आ रहे सूखे को खत्म कर बढ़त हांसिल की। फिर सोलंकी ने अपना दबदबा राज्य सभा चुनाव के दौरान दिखाया जब कांग्रेस के कई नेता टूट की कगार पर खड़े थे तब सोलंकी ने 43 विधायकों को जोड़कर रखा। नाक की लड़ाई बन चुके इस चुनाव में सोलंकी तब और मजबूत हो गए जब उन्होंने विधानसभा चुनाव की तारीख घोषित होने से पहले ओबीसी नेता अल्पेश ठाकोर को अपनी पार्टी से जोड़ने में सफल रहे और जल्द ही हार्दिक को भी पार्टी में इंट्रोड्यूस कर सकते हैं।</strong><strong> </strong></div>
</div>
<div id="slide-2" class="clr">
<div class="oh article-widgetDv">
<h3 id="title-2" class="ft30"><strong>अब बात उन युवा नेताओं की जो जोड़तोड़ कर चढ़ेंगे राजनीति की सीढ़ी</strong></h3>
</div>
<div class="desc"><strong>जिग्नेश मेवाणी-</strong><br />
<strong>राष्ट्रीय दलित अधिकार मंच के संस्थापक हैं। युवा मेवाणी पत्रकारिता में भी हाथ आजमा चुके हैं और वकालत भी उन्होंने कर रखी है। 36 वर्षीय मेवाणी जुलाई 2016 में तब चर्चा में आए जब ऊना में 6 दलितों को गौ रक्षकों ने अपना शिकार बनाया था। मेवाणी ने उनदिनों दस दिनों का अहमदाबाद से ऊना पैदल मार्च किया और राष्ट्रीय मीडिया में छाने के बाद वो दलितों की आवाज बने और उनके बड़े नेता के रूप में उभरे।</strong><br />
<strong> </strong><br />
<strong>हार्दिक पटेल</strong><br />
<strong>हार्दिक पाटीदार अनामत आंदोलन समिति के अध्यक्ष हैं और ये भी आरक्षण की मांग के साथ 2015 में सड़कों पर उतरे और पाटीदार समुदाय और खासकर पाटीदार युवाओं की आवाज बने।</strong></div>
<div class="desc">
<strong>पाटीदार के लिए सरकारी नौकरियों और कॉलेजों में आरक्षण इनकी बड़ी मांगे हैं। 24 साल के इस पाटीदार छोड़े ने महज दो महीनों में वो कर दिखाया जो कांग्रेस गुजरात में दशकों से नहीं कर पाई। फिर क्या था रातों-रात हार्दिक नेता बनें और वो कभी आप पार्टी से तो कभी कांग्रेस से जोड़ तोड़ कर रहे हैं। ऐसा माना जा रहा है कि पाटीदार समुदाय में उनका दबदबा है। यही वजह है कि नरेंद्र मोदी के दिल्ली पहुंचने के बाद महज दो साल के अंदर पार्टी को अपना मुख्यमंत्री तक बदलना पड़ा। अपने छोटे से राजनीतिक करियर में हार्दिक की छवि एक बड़े नेता की बन चुकी है इसीलिए वो 9 महीने जेल की हवा खा चुके हैं वहीं उनपर राजद्रोह का मामला भी चल रहा है। कांग्रेस भी इस छोटा पैकेट लेकिन बड़ा धमाल के साथ पाटीदार समुदाय को अपने साथ करने की जुगत में जुटी है।</strong><br />
<strong> </strong><br />
<strong>अल्पेश ठाकोर</strong><br />
<strong>पिछले दस वर्षों में अल्पेश धीरे-धीरे राजनीति की सीढियां चढ़ रहे हैं। ठाकोर ओबीसी समुदाय से आते हैं और पिछले दिनों उन्होंने कांग्रेस का दामन थामा है और राजनीतिक जानकार इसे अल्पेश की घर वापसी भी कह रहे हैं। अल्पेश ने 2010 में राजनीतिक करियर की शुरुआत गी और 2012 के जिला पंचायत चुनाव न जीत पाने के बाद राजनीति से कुछ दिनों तक किनारा कर लिया था लेकिन पिछले पांच सालों में उन्होंने तेजी से बढ़त बनाई है। उन्होंने राज्य के ओबीसी समुदाय के 146 जातियों को एकजुट करने का बीड़ा उठाया और अवैध शराब के खिलाफ मुहिम छेड़ी और फिर उन्हें समर्थन मिलना शुरु हो गया। राज्य में नशा मुक्ति अभियान चलाने के लिए उन्होंने गुजरात क्षत्रिय ठाकोर सेना बनाई, आज इस सेना में करीब 6.5 लाख लोग रजिस्टर्ड हैं। वहीं ठाकोर ने ओबीसी, एससी,एसटी समुदाय को जोड़ कर एक एकता मंच भी बनाया है।</strong></div>
<div class="desc">
<strong>राजनीति में जातिगत वोट और राजनीति के मद्देनजर इस बात को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता है कि राज्य में 22 से 24 फीसदी ठाकोर समुदाय के लोग हैं।</strong></div>
</div>
<div class="sambandhit-news oh"><strong> </strong></div>
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