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	<title>गाइडलाइन &#8211; Live Halchal</title>
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	<title>गाइडलाइन &#8211; Live Halchal</title>
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		<title>अमेरिका में वीजा मुश्किल: ट्रंप प्रशासन ने जारी की सख्त नई गाइडलाइन</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Live Halchal Web_Wing]]></dc:creator>
		<pubDate>Wed, 12 Nov 2025 08:15:13 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[अन्तर्राष्ट्रीय]]></category>
		<category><![CDATA[बड़ीखबर]]></category>
		<category><![CDATA[गाइडलाइन]]></category>
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					<description><![CDATA[<img width="574" height="321" src="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2025/11/sddc-1-large.jpg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" fetchpriority="high" srcset="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2025/11/sddc-1.jpg 574w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2025/11/sddc-1-medium.jpg 300w" sizes="(max-width: 574px) 100vw, 574px" />अमेरिका की ट्रंप प्रशासन ने वीजा को लेकर नई गाइडलाइन जारी की है। इसके तहत अमेरिकी वीजा पाने और रहने के लिए विदेशी नागरिकों के लिए नए नियम जारी किए गए हैं। ट्रंप प्रशासन ने विदेशों में अमेरिकी दूतावासों और कांसुलर अधिकारियों को निर्देश दिया है कि वीजा आवेदकों की पूरी तरह जांच की जाए &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<img width="574" height="321" src="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2025/11/sddc-1-large.jpg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" srcset="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2025/11/sddc-1.jpg 574w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2025/11/sddc-1-medium.jpg 300w" sizes="(max-width: 574px) 100vw, 574px" />
<p>अमेरिका की ट्रंप प्रशासन ने वीजा को लेकर नई गाइडलाइन जारी की है। इसके तहत अमेरिकी वीजा पाने और रहने के लिए विदेशी नागरिकों के लिए नए नियम जारी किए गए हैं। ट्रंप प्रशासन ने विदेशों में अमेरिकी दूतावासों और कांसुलर अधिकारियों को निर्देश दिया है कि वीजा आवेदकों की पूरी तरह जांच की जाए ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि वे अमेरिका में सरकारी सहायता पर निर्भर न हों।</p>



<p>नई गाइडलाइन में आवेदकों की उम्र, स्वास्थ्य, परिवारिक स्थिति, वित्तीय स्थिति, शिक्षा, कौशल और अंग्रेजी बोलने की क्षमता जैसी कई चीजों का मूल्यांकन करने को कहा गया है। खासतौर पर मधुमेह, मोटापा, उच्च रक्तचाप, हृदय रोग, मानसिक स्वास्थ्य समस्याओं जैसी बीमारियों वाले लोग वीजा के लिए अयोग्य हो सकते हैं।</p>



<p><strong>अधिकारियों को आवेदकों के बारे में हो पूरी जानकरी</strong></p>



<p>अधिकारियों को आवेदकों के बैंक दस्तावेज, संपत्ति, निवेश और पेंशन खातों की भी जांच करने को कहा गया है। विशेषज्ञों का कहना है कि यह कदम वीजा मिलने की संभावना को कम कर सकता है और अमेरिका में रहने वाले परिवार के सदस्यों के लिए भी मुश्किलें बढ़ा सकता है।</p>



<p><strong>अमेरिकी हित पहले- स्टेट डिपार्टमेंट के प्रवक्ता</strong></p>



<p>स्टेट डिपार्टमेंट के प्रवक्ता ने कहा कि अमेरिकी हित पहले आते हैं और नई गाइडलाइन यह सुनिश्चित करेगी कि अमेरिकी टैक्सपेयर्स पर बोझ न पड़े। हालांकि, इस गाइडलाइन के प्रभाव को बहुत हद तक कांसुलर अधिकारियों की व्याख्या पर छोड़ा गया है। वहीं मामले में विशेषज्ञों ने चेताया है कि यह नीति जोखिम भरी है और इससे अमेरिका में कानूनी तौर पर रहने वाले परिवारों को सरकारी सहायता लेने में डर और भ्रम पैदा हो सकता है।</p>
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		<title>बच्चों को फूड एलर्जी से बचाने के लिए नई गाइडलाइन</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Live Halchal Web_Wing]]></dc:creator>
		<pubDate>Mon, 15 Apr 2024 09:43:22 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[जीवनशैली]]></category>
		<category><![CDATA[गाइडलाइन]]></category>
		<category><![CDATA[फूड एलर्जी]]></category>
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					<description><![CDATA[<img width="618" height="356" src="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2024/04/Capture-82.png" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" srcset="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2024/04/Capture-82.png 764w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2024/04/Capture-82-300x173.png 300w" sizes="(max-width: 618px) 100vw, 618px" />शिशुओं और छोटे बच्चों में Food Allergy होना आम है। अगर आपकी फैमिली में फूड एलर्जी अस्थमा एक्जिमा या हेफीवर का इतिहास रहा है तो ऐसे में बच्चे को फूड एलर्जी होने की संभावना बहुत ज्यादा रहती है। कनाडा की मैकमास्टर यूनिवर्सिटी ने बच्चों में होने वाली फूड एलर्जी को लेकर एक शोध किया और &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<img width="618" height="356" src="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2024/04/Capture-82.png" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" loading="lazy" srcset="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2024/04/Capture-82.png 764w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2024/04/Capture-82-300x173.png 300w" sizes="auto, (max-width: 618px) 100vw, 618px" />
<p>शिशुओं और छोटे बच्चों में Food Allergy होना आम है। अगर आपकी फैमिली में फूड एलर्जी अस्थमा एक्जिमा या हेफीवर का इतिहास रहा है तो ऐसे में बच्चे को फूड एलर्जी होने की संभावना बहुत ज्यादा रहती है। कनाडा की मैकमास्टर यूनिवर्सिटी ने बच्चों में होने वाली फूड एलर्जी को लेकर एक शोध किया और उसके आधार पर एक गाइडलाइन जारी की है।</p>



<p>दुनियाभर में लगभग चार फीसदी बच्चे फूड एलर्जी का शिकार हैं। वैसे बच्चों में फूड एलर्जी होना आम है। स्कूल में टिफिन शेयरिंग से उनमें फूड एलर्जी का खतरा होता है। एक बच्चे का खाना दूसरे बच्चे को बीमार कर सकता है। ब्रिटेन, अमेरिका और ऑस्ट्रेलिया में ज्यादातर बच्चे मूंगफली से एलर्जिक होते हैं, तो वहीं एशिया में गेहूं, अंडे और दूध से बच्चों को एलर्जी का खतरा ज्यादा होता है। शोधकर्ताओं ने पहली बार बच्चों को फूड एलर्जी से बचाने के लिए एक गाइडलाइन तैयार की है। उनका मानना है कि इससे बच्चों में एलर्जी पैदा करने वाले खाद्य पदार्थों के प्रति सहनशक्ति विकसित करने में मदद मिल सकती है।</p>



<p><strong>थेरेपी जो फूड एलर्जी दूर करने में हो सकती है मददगार</strong><br>इस थेरेपी को ओरल इम्यूनोथेरेपी कहा जाता है। इसका पहली बार 1908 में इस्तेमाल किया गया था। तब इसके जरिए एक बच्चे की अंडे से एलर्जी ठीक की गई थी। साइंस डेली की रिपोर्ट के अनुसार कनाडा की मैकमास्टर यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं का कहना है कि ओरल इम्यूनोथेरेपी के दौरान बच्चों को एलर्जी पैदा करने वाले खाद्य पदार्थ बहुत ही थोड़ी मात्रा में दिए जाते हैं और फिर धीरे-धीरे उनकी मात्रा बढ़ाई जाती है। जिससे बच्चों में उन चीज़ों के प्रति सहनशक्ति बढ़ सके। इसके पॉजिटिव रिजल्ट्स देखने को मिले। अब तक डॉक्टरों के पास साक्ष्य-आधारित गाइडलाइन सीमित थी। नई गाइडलाइन आने से उन्हें काफी मदद मिलेगी। वे फूड एलर्जी से जूझ रहे बच्चों की ओरल इम्यूनोथेरेपी बेहतर तरीके से कर पाएंगे।</p>



<p>मैकमास्टर यूनिवर्सिटी में बाल रोग विशेषज्ञ और शोध के मुख्य लेखक डगलस मैक का कहना है कि, &#8216;पहले कभी इस प्रक्रिया का मानकीकरण नहीं किया गया। हमें ओरल इम्यूनोथेरेपी के बारे में मार्गदर्शन की बहुत जरूरत है।&#8217;</p>



<p><strong>फूड एलर्जी को लेकर नई गाइडलाइन्स</strong></p>



<p>परिवारों को फूड एलर्जी, एनाफिलेक्सिस (गंभीर एलर्जी) और इम्यूनोथेरेपी के बारे में जानना चाहिए। उन्हें यह भी सीखना चाहिए कि बच्चों को सही तरीके से खाना कैसे खिलाएं। किन चीज़ों का ध्यान रखना है।</p>



<ol class="wp-block-list" start="2">
<li>बच्चों को धीरे-धीरे एलर्जी कर सकने वाले खाद्य पदार्थों के संपर्क में लाना चाहिए।</li>



<li>ऐसे परिवार, जिनमें पहले भी फूड एलर्जी की समस्या रही है, उन्हें बाल रोग विशेषज्ञ के मार्गदर्शन में ही बच्चे की ओरल इम्यूनोथेरेपी करानी चाहिए।</li>



<li>ध्यान रखें कि एलर्जी वाले खाद्य पदार्थ से बच्चे का संपर्क खतरनाक स्तर पर न पहुंचे। हां, इस दौरान बच्चों में पेट दर्द और उल्टी जैसे लक्षण दिखना आम बात है।</li>
</ol>



<p>वैसे ये गाइडलाइन्स डॉक्टर्स के लिए बनाए गए हैं। ये सीधे तौर पर पेरेंट्स और फैमिली के लिए नहीं हैं। इसलिए यह जरूरी है कि माता-पिता डॉक्टर्स का सर्पोट करें और फूड एलर्जी को सुरक्षित तरीके से खत्म करने में अपने बच्चों की मदद करें।</p>



<p><strong>कम कीटाणु से इम्यून सिस्टम पर असर</strong><br>शोधकर्ताओं का कहना है कि जब बच्चों के आसपास कम कीटाणु होते हैं, तो उनका इम्यून सिस्टम मूंगफली और दूध जैसे खाद्य पदार्थों के खिलाफ काम करने लगता है। पिछले दो दशकों से फूड एलर्जी के मरीजों की संख्या में बढ़ोतरी हुई है। स्वास्थ्य वैज्ञानिकों का मानना है कि यह बढ़ती साफ-सफाई और स्वच्छता की वजह से हो रहा है। वैसे इसमें विटामिन डी की कमी भी एक बड़ी वजह है।</p>
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		<title>दिल्ली : यूजीसी ने राज्यों और विश्वविद्यालयों को भेजी गाइडलाइन</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Live Halchal Web_Wing]]></dc:creator>
		<pubDate>Tue, 06 Feb 2024 12:25:00 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[दिल्ली]]></category>
		<category><![CDATA[राज्य]]></category>
		<category><![CDATA[गाइडलाइन]]></category>
		<category><![CDATA[यूजीसी]]></category>
		<category><![CDATA[विश्वविद्यालयों]]></category>
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					<description><![CDATA[<img width="618" height="351" src="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2024/02/delhi-4-2-large.jpg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" loading="lazy" srcset="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2024/02/delhi-4-2.jpg 832w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2024/02/delhi-4-2-medium.jpg 300w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2024/02/delhi-4-2-768x436.jpg 768w" sizes="auto, (max-width: 618px) 100vw, 618px" />स्नातक छात्रों को रोजगार से जोड़ने के पहले अब उन्हें इंटर्नशिप में पेशेवर तरीके से व्यवहार, ईमानदारी, नैतिक मूल्य भी सिखाए जाएंगे। इंडस्ट्री की मांग और इंडिया स्किल रिपोर्ट 2022 के आधार पर विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) ने एनईपी 2020 के तहत स्नातक प्रोग्राम के लिए इंटर्नशिप और रिसर्च इंटर्नशिप पॉलिसी 2024 तैयार करके राज्यों &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<img width="618" height="351" src="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2024/02/delhi-4-2-large.jpg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" loading="lazy" srcset="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2024/02/delhi-4-2.jpg 832w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2024/02/delhi-4-2-medium.jpg 300w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2024/02/delhi-4-2-768x436.jpg 768w" sizes="auto, (max-width: 618px) 100vw, 618px" />
<p>स्नातक छात्रों को रोजगार से जोड़ने के पहले अब उन्हें इंटर्नशिप में पेशेवर तरीके से व्यवहार, ईमानदारी, नैतिक मूल्य भी सिखाए जाएंगे। इंडस्ट्री की मांग और इंडिया स्किल रिपोर्ट 2022 के आधार पर विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) ने एनईपी 2020 के तहत स्नातक प्रोग्राम के लिए इंटर्नशिप और रिसर्च इंटर्नशिप पॉलिसी 2024 तैयार करके राज्यों और विश्वविद्यालयों को भेज दी है। </p>



<p>अब कॉलेज पहले मार्केट सर्वे करेंगे और उसके बाद इंटर्नशिप करवाई जाएगी। इसके अलावा इंटर्नशिप के लिए सुपरवाइजर भी मिलेंगे, जोकि इंडस्ट्री और सरकारी विभागों में जाकर इंटर्नशिप के मौके तलाएंगे। जबकि नोडल अधिकारी पूरी निगरानी करेंगे। छात्रों को इंटर्नशिप में कमाई के साथ बीमा और क्रेडिट भी मिलेंगे।</p>



<p>विश्वविद्यालय अनुदान आयोग के सचिव प्रोफेसर मनीष जोशी ने बताया कि नई इंटर्नशिप पॉलिसी-2024 इंडिया स्किल रिपोर्ट 2022, एनईपी 2020, करिकुलम एंड क्रेडिट फ्रेमवर्क के आधार पर तैयार की गई है। इसका मकसद स्नातक छात्रों में इंटर्नशिप के माध्यम रोजगार क्षमता में सुधार के साथ उन्हें पेशेवर तरीके से तैयार करना है। &nbsp;</p>



<p>शैक्षणिक सत्र 2024 से चार वर्षीय डिग्री और तीन वर्षीय डिग्री प्रोग्राम के छात्रों को इन्हीं नियमों के तहत इंटर्नशिप होगी। इंटर्नशिप से छात्रों को कक्षाओं में प्राप्त सैद्धांतिक ज्ञान को वास्तविक दुनिया के बारे में जानने और सीखने का मौका मिलता है। यह व्यावहारिक अनुभव शैक्षणिक शिक्षा और व्यावहारिक कार्यान्वयन के बीच की दूरी को कम करेगी। छात्रों के लिए संचार, टीम वर्क, समस्या-समाधान और समय प्रबंधन सहित कौशल की एक विस्तृत शृंखला को विकसित और बदलावों के बारे में बताना जरूरी था।</p>



<p><strong>88.6 फीसदी को इंटर्नशिप की तलाश</strong><br>यूजीसी की विशेषज्ञ समिति ने नई इंटर्नशिप पॉलिसी को इंडिया स्किल रिपोर्ट-2022 की सिफारिशों के आधार पर तैयार किया है। इसके मुताबिक, पिछले तीन साल में युवाओं की रोजगार क्षमता में सुधार हुआ है। वर्ष 2020 में यह 45.97 फीसदी तो 2021 में 46.2 फीसदी और 2022 में यह 56 फीसदी तक पहुंच गई है। इसमें महिलाओं की रोजगार क्षमता 51.44 फीसदी है। जबकि वाणिज्य के क्षेत्र में स्नातक छात्रों की उच्चतम रोजगार योग्यता की रेटिंग लगभग 60.62 फीसदी थी। हालांकि, 88.6 फीसदी ग्रेजुएट इंटर्नशिप की भी तलाश में हैं। वहीं, इंडस्ट्री और कंपनियां कम से कम एक वर्ष का अनुभव रखने वाले कर्मियों को काम पर रखना पसंद करती हैं।</p>



<p><strong>रिसर्च, तकनीक, वैश्विक मांग के आधार पर प्रशिक्षण</strong><br>इंटर्नशिप में अब रिसर्च इंटर्नशिप जुड़ा है। छात्र को किताबी पढ़ाई और प्रशिक्षण के ज्ञान के साथ उन्हें समाज और आम लोगों के लिए काम आने वाले रिसर्च,स्थानीय बाजार व उद्योगों में काम करना होगा। वैश्विक मांग वाले क्षेत्र (ट्रेड,एग्रिकल्चर, बैकिंग, फाइनेंशियल, इंश्योरेंस, फॉस्ट मूविंग कंज्यूमर गुड्स, टूरिज्म एंड हॉस्पिटेलिटी,पब्लिक व लीगल पॉलिसी,इंवायरमेंट, एजुकेशन, कम्यूनिकेशन,कॉमर्स, छोटे उद्योग,इंटरनेट ऑफ थिकिंग, एआई, मशीन लर्निंग, डीप लर्निंग,रियलिटी &#8211; वर्चुअल रियलिटी,हेल्थकेयर, लाइफ साइंस, ऑटोमोटिव, रिटेल, स्पोर्ट्स वेलनेस-फिजिकल एजुकेशन आदि में हाईब्रिड मोड से होगी।</p>



<p><strong>महत्वपूर्ण बिंदु</strong><br>&#8211; केंद्रीयकृत डिजिटल पोर्टल पर सभी छात्रों का पंजीकरण होगा। छात्रों का रोजगार से जोड़ने के लिए रिकार्ड रखा जाएगा। कोई भी नियाेक्ता सीधे इस पोर्टल से छात्र की जानकारी और प्रदर्शन जांच कर सकते हैं।<br>&#8211; हर छात्र को उच्च शिक्षण संस्थान के अलावा संबंधित इंटर्नशिप एरिया (जहां भी इंटर्नशिप के लिए जाएगा) में सुपरवाइजर और मेंटर मिलेगा।<br>&#8211; इंटर्नशिप में मूल्य आधारित कौशल भी जोड़ा जाएगा। स्थानीय उद्योगों और बाजारों के साथ मिलकर भी इंटर्नशिप कराई जाएगी।<br>&#8211; कैंपस में इंडस्ट्री रिलेशंस सेल बनेंगे, यूनिवर्सिटी-इंडस्ट्री डे भी मनाया जाएगा। संयुक्त रिसर्च प्रोजेक्ट को बढ़ावा मिलेगा। स्टूडेंट करियर काउंसलिंग सेल में विश्वविद्यालय और इंडस्ट्री दोनों के एक्सपर्ट होंगे।</p>



<p><strong>कमाई, बीमा के साथ क्रेडिट डिग्री में जुड़ेंगे</strong><br>तीन वर्षीय डिग्री प्रोग्राम, चार वर्षीय ऑनर्स, चार वर्षीय ऑनर्स विद रिसर्च प्रोग्राम के छात्रों के लिए चौथे वर्ष से इंटर्नशिप शुरू होगी। यह 60 से 120 घंटों की रहेगी, जिसके बदले उन्हें दो से चार क्रेडिट मिलेंगे। इंटर्नशिप में उन्हें रिसर्च प्रोजेक्ट, सोशल प्रोजेक्ट समेत अन्य क्षेत्रों में काम करना होगा। जबकि चार वर्षीय यूजी ऑनर्स विद रिसर्च के छात्रों को आठवें सेमेस्टर से एक अन्य इंटर्नशिप करनी होगी। यह पूरा एक सेमेस्टर चलेगी। इसमें उन्हें आठ से 12 क्रेडिट मिलेंगे। इंडस्ट्री को छात्रों को इंटर्नशिप के बदले पैसे और बीमा सुरक्षा भी देनी होगी।</p>
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