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	<title>गणेश जी &#8211; Live Halchal</title>
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	<title>गणेश जी &#8211; Live Halchal</title>
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		<title> करियर और धन में मिलेगी शानदार सफलता, बस बुधवार को गणेश जी को चढ़ाएं ये फूल</title>
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		<pubDate>Wed, 18 Mar 2026 06:51:16 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[अध्यात्म]]></category>
		<category><![CDATA[धर्म]]></category>
		<category><![CDATA[गणेश जी]]></category>
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					<description><![CDATA[<img width="352" height="386" src="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2026/03/887.jpg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" fetchpriority="high" srcset="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2026/03/887.jpg 352w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2026/03/887-274x300.jpg 274w" sizes="(max-width: 352px) 100vw, 352px" />ज्योतिष शास्त्र और हमारी प्राचीन मान्यताओं के अनुसार, कभी-कभी छोटे और सरल उपाय जीवन में बड़े सकारात्मक बदलाव ला सकते हैं। ऐसा ही एक चमत्कारी उपाय है ‘गुड़हल का फूल’ (Hibiscus)। बुधवार के दिन इसका उपाय करने से भगवान गणेश और बुध ग्रह (Mercury) दोनों को प्रसन्न किया जा सकता है। बुधवार का दिन ‘विघ्नहर्ता’ &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<img width="352" height="386" src="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2026/03/887.jpg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" srcset="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2026/03/887.jpg 352w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2026/03/887-274x300.jpg 274w" sizes="(max-width: 352px) 100vw, 352px" />
<p>ज्योतिष शास्त्र और हमारी प्राचीन मान्यताओं के अनुसार, कभी-कभी छोटे और सरल उपाय जीवन में बड़े सकारात्मक बदलाव ला सकते हैं। ऐसा ही एक चमत्कारी उपाय है ‘गुड़हल का फूल’ (Hibiscus)। बुधवार के दिन इसका उपाय करने से भगवान गणेश और बुध ग्रह (Mercury) दोनों को प्रसन्न किया जा सकता है।</p>



<p>बुधवार का दिन ‘विघ्नहर्ता’ भगवान श्री गणेश (Lord ganesha) को समर्पित है। गणेश जी को लाल रंग के फूल बहुत प्रिय हैं। ‘स्कंद पुराण’ और ‘गणेश पुराण’ के अनुसार, “रक्तपुष्प” यानी लाल फूलों से की गई पूजा से बप्पा तुरंत प्रसन्न होते हैं।</p>



<p>वहीं, ज्योतिष में बुध ग्रह को बुद्धि, तर्क और व्यापार का स्वामी माना जाता है। गुड़हल का लाल फूल (Gudhal ka phool) ऊर्जा और सौभाग्य का प्रतीक है। जो आपके जीवन से हर तरह की नकारात्मकता (negativity) को दूर करने की शक्ति रखता है।</p>



<p><strong>करियर में सफलता के लिए उपाय<br></strong>नियम से भगवान गणेश के मंदिर जाएं।<br>गणेश जी को 11 या 21 लाल गुड़हल के फूल चढ़ाएं।<br>फूल अर्पित करते समय “ॐ गं गणपतये नमः” मंत्र का 108 बार जप करें।<br>यह सरल उपाय कार्यक्षेत्र और नौकरी में आ रही हर अड़चन को दूर करता है।<br>इससे आपकी काबिलियत के अनुसार फल मिलने लगता है और तरक्की के नए रास्ते खुलते हैं।</p>



<p><strong>धन-संपत्ति के लिए चमत्कारी टोटका<br></strong>आर्थिक तंगी या कर्ज से परेशान लोगों के लिए गुड़हल का फूल किसी वरदान से कम नहीं है। बुधवार के दिन मां लक्ष्मी और गणेश जी की एक साथ पूजा करें और दोनों को एक-एक लाल गुड़हल का फूल चढ़ाएं।</p>



<p>पूजा संपन्न होने के बाद, उस फूल को अपने लॉकर या धन रखने वाली जगह पर रख दें। शास्त्रों के अनुसार, यह उपाय आपकी वित्तीय स्थिति (Financial Condition) को सुधारने में बहुत मददगार साबित हो सकता है।</p>



<p><strong>सूर्य देव को भी भाता है गुड़हल<br></strong>अगर आपका आत्मविश्वास (Confidence) कम है या आप सरकारी कामों में सफलता चाहते हैं, तो रोज सुबह (विशेषकर बुधवार और रविवार को) एक तांबे के लोटे में जल लेकर उसमें लाल गुड़हल डालकर सूर्य देव को अर्घ्य दें। इससे समाज में मान-सम्मान बढ़ता है और व्यक्तित्व में निखार आता है।</p>



<p><strong>क्या न करें<br></strong>उपाय करते समय मन में पूरी श्रद्धा और विश्वास रखें। फूल हमेशा ताजा होना चाहिए, मुरझाया हुआ फूल इस्तेमाल न करें।<br>पूजा के बाद किसी जरूरतमंद को हरी मूंग या हरी चीजों का दान करना भी बहुत शुभ माना जाता है, क्योंकि बुधवार को दान का विशेष महत्व है।</p>
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		<title> नव वर्ष की शुरुआत में करें गणेश जी के ये विशेष उपाय</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Live Halchal Web_Wing]]></dc:creator>
		<pubDate>Thu, 12 Mar 2026 06:26:11 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[अध्यात्म]]></category>
		<category><![CDATA[धर्म]]></category>
		<category><![CDATA[गणेश जी]]></category>
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					<description><![CDATA[<img width="618" height="351" src="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2026/03/Screenshot-2026-03-11-232354.png" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" srcset="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2026/03/Screenshot-2026-03-11-232354.png 867w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2026/03/Screenshot-2026-03-11-232354-300x170.png 300w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2026/03/Screenshot-2026-03-11-232354-768x436.png 768w" sizes="(max-width: 618px) 100vw, 618px" />हिंदू धर्म में किसी भी शुभ काम की शुरुआत भगवान गणेश के पूजन के बिना अधूरी मानी जाती है। चैत्र महीने की शुक्ल प्रतिपदा से शुरू होने वाला हिंदू नव वर्ष 2026 हमारे जीवन में नई ऊर्जा, संकल्प और खुशियां लेकर आ रहा है। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, अगर साल के पहले दिन विघ्नहर्ता भगवान &#8230;]]></description>
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<p>हिंदू धर्म में किसी भी शुभ काम की शुरुआत भगवान गणेश के पूजन के बिना अधूरी मानी जाती है। चैत्र महीने की शुक्ल प्रतिपदा से शुरू होने वाला हिंदू नव वर्ष 2026 हमारे जीवन में नई ऊर्जा, संकल्प और खुशियां लेकर आ रहा है। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, अगर साल के पहले दिन विघ्नहर्ता भगवान गणेश को खुश कर लिया जाए, तो पूरे साल जीवन में सुख-समृद्धि बनी रहेगी। आइए नव वर्ष की शुरुआत में किए जाने वाले अचूक उपाय जानते हैं।</p>



<p><strong>21 गांठ दूर्वा अर्पित करें<br></strong>गणेश जी को दूर्वा बेहद प्रिय है। नव वर्ष के पहले दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और मंदिर जाकर गणेश जी को 21 गांठ दूर्वा अर्पित करें। ऐसा करते समय ‘ॐ गं गणपतये नमः’ मंत्र का जप करें। माना जाता है कि इससे जीवन की बड़ी से बड़ी बाधाएं टल जाती हैं और साल भर सभी कामों में सफलता मिलती है।</p>



<p><strong>मुख्य द्वार पर बनाएं सिंदूर का स्वास्तिक<br></strong>घर में सकारात्मक ऊर्जा के प्रवेश के लिए नव वर्ष के दिन घर के मुख्य द्वार पर सिंदूर और घी से स्वास्तिक का चिह्न बनाएं। स्वास्तिक भगवान गणेश का ही स्वरूप माना जाता है। इससे घर में नकारात्मता नहीं आती है और पूरे साल सुख-शांति बनी रहती है।</p>



<p><strong>मोदक या बूंदी के लड्डू का भोग<br></strong>गणपति बप्पा को मीठा बहुत प्रिय है। ऐसे में नए साल की शुरुआत उन्हें मीठा खिलाकर करें। बप्पा को मोदक या मोतीचूर के लड्डू का भोग लगाएं और इसे प्रसाद के रूप में परिवार के सभी सदस्यों में बांटें। इससे रिश्तों में मिठास बनी रहेगी।</p>



<p><strong>ऋणहर्ता गणेश स्तोत्र का पाठ<br></strong>अगर आप लंबे समय से आर्थिक तंगी या कर्ज से परेशान हैं, तो हिंदू नव वर्ष के पहले दिन ‘ऋणहर्ता गणेश स्तोत्र’ का पाठ करें। ऐसा करने से आपकी आर्थिक स्थिति मजबूत होगी और आय के नए स्रोत बनेंगे।</p>
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		<title>भारत का इकलौता मंदिर, जहां विराजे हैं बिना सूंड वाले गणेश जी!</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Live Halchal Web_Wing]]></dc:creator>
		<pubDate>Sat, 23 Aug 2025 11:24:03 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[पर्यटन]]></category>
		<category><![CDATA[गणेश जी]]></category>
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					<description><![CDATA[<img width="618" height="344" src="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2025/08/6-12-large.jpg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" loading="lazy" srcset="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2025/08/6-12.jpg 698w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2025/08/6-12-medium.jpg 300w" sizes="auto, (max-width: 618px) 100vw, 618px" />भारत में गणेश चतुर्थी का पर्व (Ganesh Chaturthi 2025) बेहद उल्लास और आस्था के साथ मनाया जाता है। दस दिनों तक घर-घर और पंडालों में बप्पा की प्रतिमा स्थापित होती है, भक्ति गीत गाए जाते हैं और अंत में विसर्जन के साथ विदाई दी जाती है। भगवान गणेश को विघ्नहर्ता और मंगलकर्ता माना जाता है, &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<img width="618" height="344" src="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2025/08/6-12-large.jpg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" loading="lazy" srcset="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2025/08/6-12.jpg 698w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2025/08/6-12-medium.jpg 300w" sizes="auto, (max-width: 618px) 100vw, 618px" />
<p>भारत में गणेश चतुर्थी का पर्व (Ganesh Chaturthi 2025) बेहद उल्लास और आस्था के साथ मनाया जाता है। दस दिनों तक घर-घर और पंडालों में बप्पा की प्रतिमा स्थापित होती है, भक्ति गीत गाए जाते हैं और अंत में विसर्जन के साथ विदाई दी जाती है।</p>



<p>भगवान गणेश को विघ्नहर्ता और मंगलकर्ता माना जाता है, इसलिए हर शुभ कार्य से पहले उनकी पूजा करना हमारी परंपरा का हिस्सा है। देशभर में उनके सैंकड़ों मंदिर हैं, लेकिन कुछ मंदिर अपनी विशेषता और अनोखी परंपराओं के कारण खास पहचान रखते हैं। इनमें से एक है गढ़ गणेश मंदिर (Garh Ganesh Temple), जो राजस्थान की राजधानी जयपुर में स्थित है।</p>



<p><strong>भगवान गणेश के बाल स्वरूप की पूजा<br></strong>गढ़ गणेश मंदिर की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि यहां भगवान गणेश की मूर्ति को बाल रूप (बिना सूंड वाले गणेश) में स्थापित किया गया है। भक्त मानते हैं कि यहां गणपति बप्पा ‘पुरुषकृति’ स्वरूप में विराजमान हैं। यह अद्वितीय स्वरूप भक्तों के लिए आकर्षण और श्रद्धा का विशेष कारण है।</p>



<p><strong>300 साल पुराना है मंदिर का इतिहास<br></strong>गढ़ गणेश मंदिर का निर्माण महाराजा सवाई जयसिंह द्वितीय ने 18वीं शताब्दी में करवाया था। कहा जाता है कि जब उन्होंने जयपुर बसाने से पहले अश्वमेध यज्ञ किया, तभी इस मंदिर की नींव रखी। उन्होंने भगवान गणेश की मूर्ति इस प्रकार स्थापित की कि सिटी पैलेस के चंद्र महल से दूरबीन की मदद से भी इसे देखा जा सके। इस अनोखी योजना से महाराजा की भक्ति और स्थापत्य दृष्टि का अंदाजा लगाया जा सकता है। बता दें, गढ़ गणेश मंदिर से ही जुड़ा हुआ है बाड़ी चौपड़ स्थित ध्वजाधीश गणेश मंदिर, जिसे इसका ही हिस्सा माना जाता है।</p>



<p><strong>मूषकों के कान में परेशानी बोलते हैं भक्त<br></strong>गढ़ गणेश मंदिर केवल अपनी प्राचीनता के लिए ही नहीं, बल्कि अपनी विशिष्ट पूजा-पद्धति के लिए भी प्रसिद्ध है। यहां भगवान गणेश की प्रतिमा अनोखी मानी जाती है। मंदिर परिसर में दो विशाल मूषक (चूहे) स्थापित हैं। श्रद्धालु इन मूषकों के कानों में अपनी समस्याएं और इच्छाएं बताते हैं। मान्यता है कि ये मूषक भक्तों की बात सीधे बप्पा तक पहुंचाते हैं और भगवान गणेश उनके कष्ट हर लेते हैं।</p>



<p><strong>चिट्ठी लिखकर पूरी होती है मन्नत<br></strong>गढ़ गणेश मंदिर की सबसे दिलचस्प बात यह है कि भक्त अपनी मन्नतें चिट्ठी या निमंत्रण पत्र लिखकर भेजते हैं। जी हां, आप बिल्कुल सही पढ़ रहे हैं! लोग अपनी शादी, घर में बच्चे के जन्म, नई नौकरी या किसी भी शुभ कार्य का निमंत्रण सबसे पहले गणेश जी को भेजते हैं। इस मंदिर के पते पर रोजाना सैकड़ों चिट्ठियां आती हैं, जिन्हें पढ़कर भगवान के चरणों में रखा जाता है। यह परंपरा सदियों से चली आ रही है और भक्तों का मानना है कि गणेश जी उनकी हर पुकार सुनते हैं।</p>



<p><strong>365 सीढ़ियां चढ़कर होते हैं बप्पा के दर्शन<br></strong>मंदिर तक पहुंचने के लिए भक्तों को 365 सीढ़ियां चढ़नी पड़ती हैं, जो साल के 365 दिनों का प्रतीक हैं। यह चढ़ाई थोड़ी थकाऊ हो सकती है, लेकिन मंदिर तक पहुंचते ही जो शांति और सुकून मिलता है, वह हर थकान को दूर कर देता है। यहां से पूरे जयपुर शहर का मनोरम दृश्य दिखाई देता है, खासकर सूरज ढलने के समय।</p>



<p>अगर आप कभी जयपुर जाएं, तो गढ़ गणेश मंदिर के दर्शन जरूर करें। यहां का शांत वातावरण और भक्तों का अटूट विश्वास आपको एक अलग ही अनुभव देगा।</p>
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		<title>गणेश जी की कृपा के लिए उत्तम है बुधवार का दिन, नाम जप से प्रसन्न होंगे बप्पा</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Live Halchal Web_Wing]]></dc:creator>
		<pubDate>Wed, 26 Mar 2025 04:49:08 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[अध्यात्म]]></category>
		<category><![CDATA[धर्म]]></category>
		<category><![CDATA[गणेश जी]]></category>
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					<description><![CDATA[<img width="618" height="478" src="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2025/03/Capture-493-large.jpg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" loading="lazy" srcset="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2025/03/Capture-493.jpg 676w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2025/03/Capture-493-medium.jpg 300w" sizes="auto, (max-width: 618px) 100vw, 618px" />जिस प्रकार हिंदू धर्म में हर एक दिन किसी न किसी देवी-देवता की पूजा के लिए समर्पित माना गया है ठीक उसी तरह बुधवार का दिन प्रथम पूज्य देव गणेश जी को समर्पित है। हिंदू मान्यताओं के अनुसार गणेश जी की पूजा किसी भी शुभ व मांगलिक कार्य से पहले की जाती है ताकि वह &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<img width="618" height="478" src="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2025/03/Capture-493-large.jpg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" loading="lazy" srcset="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2025/03/Capture-493.jpg 676w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2025/03/Capture-493-medium.jpg 300w" sizes="auto, (max-width: 618px) 100vw, 618px" />
<p>जिस प्रकार हिंदू धर्म में हर एक दिन किसी न किसी देवी-देवता की पूजा के लिए समर्पित माना गया है ठीक उसी तरह बुधवार का दिन प्रथम पूज्य देव गणेश जी को समर्पित है। हिंदू मान्यताओं के अनुसार गणेश जी की पूजा किसी भी शुभ व मांगलिक कार्य से पहले की जाती है ताकि वह कार्य निर्विघ्न रूप से पूरा हो सके।</p>



<p>हिंदू धर्म में भगवान गणेश बुद्धि और ज्ञान के देवता माने जाते हैं। वैसे तो हर दिन गणेश जी की पूजा-अर्चना की जा सकती है, लेकिन बुधवार के दिन गणपति की आराधना के विशेष महत्व माना गया है। ऐसे में आपको गणेश जी की विशेष कृपा के लिए पूजा के दौरान उनके 108 नामों का जप जरूर करना चाहिए।</p>



<p><strong>गणेश जी के 108 नाम (Ganesh ji Ke 108 Naam)</strong></p>



<p>गजानन: ॐ गजाननाय नमः।<br>गणाध्यक्ष: ॐ गणाध्यक्षाय नमः।<br>विघ्नराज: ॐ विघ्नराजाय नमः।<br>विनायक: ॐ विनायकाय नमः।<br>द्वैमातुर: ॐ द्वैमातुराय नमः।<br>द्विमुख: ॐ द्विमुखाय नमः।<br>प्रमुख: ॐ प्रमुखाय नमः।<br>सुमुख: ॐ सुमुखाय नमः।<br>कृति: ॐ कृतिने नमः।<br>सुप्रदीप: ॐ सुप्रदीपाय नमः।<br>सुखनिधी: ॐ सुखनिधये नमः।<br>सुराध्यक्ष: ॐ सुराध्यक्षाय नमः।<br>सुरारिघ्न: ॐ सुरारिघ्नाय नमः।<br>महागणपति: ॐ महागणपतये नमः।<br>मान्या: ॐ मान्याय नमः।<br>महाकाल: ॐ महाकालाय नमः।<br>महाबला: ॐ महाबलाय नमः।<br>हेरम्ब: ॐ हेरम्बाय नमः।<br>लम्बजठर: ॐ लम्बजठरायै नमः।<br>ह्रस्वग्रीव: ॐ ह्रस्व ग्रीवाय नमः।<br>महोदरा: ॐ महोदराय नमः।<br>मदोत्कट: ॐ मदोत्कटाय नमः।<br>महावीर: ॐ महावीराय नमः।<br>मन्त्रिणे: ॐ मन्त्रिणे नमः।<br>मङ्गल स्वरा: ॐ मङ्गल स्वराय नमः।<br>प्रमधा: ॐ प्रमधाय नमः।<br>प्रथम: ॐ प्रथमाय नमः।<br>प्रज्ञा: ॐ प्राज्ञाय नमः।<br>विघ्नकर्ता: ॐ विघ्नकर्त्रे नमः।<br>विघ्नहर्ता: ॐ विघ्नहर्त्रे नमः।<br>विश्वनेत्र: ॐ विश्वनेत्रे नमः।<br>विराट्पति: ॐ विराट्पतये नमः।<br>श्रीपति: ॐ श्रीपतये नमः।<br>वाक्पति: ॐ वाक्पतये नमः।<br>शृङ्गारिण: ॐ शृङ्गारिणे नमः।<br>अश्रितवत्सल: ॐ अश्रितवत्सलाय नमः।<br>शिवप्रिय: ॐ शिवप्रियाय नमः।<br>शीघ्रकारिण: ॐ शीघ्रकारिणे नमः।<br>शाश्वत: ॐ शाश्वताय नमः।<br>बल: ॐ बल नमः।<br>बलोत्थिताय: ॐ बलोत्थिताय नमः।<br>भवात्मजाय: ॐ भवात्मजाय नमः।<br>पुराण पुरुष: ॐ पुराण पुरुषाय नमः।<br>पूष्णे: ॐ पूष्णे नमः।<br>पुष्करोत्षिप्त वारिणे: ॐ पुष्करोत्षिप्त वारिणे नमः।<br>अग्रगण्याय: ॐ अग्रगण्याय नमः।<br>अग्रपूज्याय: ॐ अग्रपूज्याय नमः।<br>अग्रगामिने: ॐ अग्रगामिने नमः।<br>मन्त्रकृते: ॐ मन्त्रकृते नमः।<br>चामीकरप्रभाय: ॐ चामीकरप्रभाय नमः।<br>सर्वाय: ॐ सर्वाय नमः।<br>सर्वोपास्याय: ॐ सर्वोपास्याय नमः।<br>सर्व कर्त्रे: ॐ सर्व कर्त्रे नमः।<br>सर्वनेत्रे: ॐ सर्वनेत्रे नमः।<br>सर्वसिद्धिप्रदाय: ॐ सर्वसिद्धिप्रदाय नमः।<br>सिद्धये: ॐ सिद्धये नमः।<br>पञ्चहस्ताय: ॐ पञ्चहस्ताय नमः।<br>पार्वतीनन्दनाय: ॐ पार्वतीनन्दनाय नमः।<br>प्रभवे: ॐ प्रभवे नमः।<br>कुमारगुरवे: ॐ कुमारगुरवे नमः।<br>अक्षोभ्याय: ॐ अक्षोभ्याय नमः।<br>कुञ्जरासुर भञ्जनाय: ॐ कुञ्जरासुर भञ्जनाय नमः।<br>प्रमोदाय: ॐ प्रमोदाय नमः।<br>मोदकप्रियाय: ॐ मोदकप्रियाय नमः।<br>कान्तिमते: ॐ कान्तिमते नमः।<br>धृतिमते: ॐ धृतिमते नमः।<br>कामिने: ॐ कामिने नमः।<br>कपित्थपनसप्रियाय: ॐ कपित्थपनसप्रियाय नमः।<br>ब्रह्मचारिणे: ॐ ब्रह्मचारिणे नमः।<br>ब्रह्मरूपिणे: ॐ ब्रह्मरूपिणे नमः।<br>ब्रह्मविद्यादि दानभुवे: ॐ ब्रह्मविद्यादि दानभुवे नमः।<br>जिष्णवे: ॐ जिष्णवे नमः।<br>विष्णुप्रियाय: ॐ विष्णुप्रियाय नमः।<br>भक्त जीविताय: ॐ भक्त जीविताय नमः।<br>जितमन्मधाय: ॐ जितमन्मधाय नमः।<br>ऐश्वर्यकारणाय: ॐ ऐश्वर्यकारणाय नमः।<br>ज्यायसे: ॐ ज्यायसे नमः।<br>यक्षकिन्नेर सेविताय: ॐ यक्षकिन्नेर सेविताय नमः।<br>गङ्गा सुताय: ॐ गङ्गा सुताय नमः।<br>गणाधीशाय: ॐ गणाधीशाय नमः।<br>गम्भीर निनदाय: ॐ गम्भीर निनदाय नमः।<br>वटवे: ॐ वटवे नमः।<br>अभीष्टवरदाय: ॐ अभीष्टवरदाय नमः।<br>ज्योतिषे: ॐ ज्योतिषे नमः।<br>भक्तनिधये: ॐ भक्तनिधये नमः।<br>भावगम्याय: ॐ भावगम्याय नमः।<br>मङ्गलप्रदाय: ॐ मङ्गलप्रदाय नमः।<br>अव्यक्ताय: ॐ अव्यक्ताय नमः।<br>अप्राकृत पराक्रमाय: ॐ अप्राकृत पराक्रमाय नमः।<br>सत्यधर्मिणे: ॐ सत्यधर्मिणे नमः।<br>सखये: ॐ सखये नमः।<br>सरसाम्बुनिधये: ॐ सरसाम्बुनिधये नमः।<br>महेशाय: ॐ महेशाय नमः।<br>दिव्याङ्गाय: ॐ दिव्याङ्गाय नमः।<br>मणिकिङ्किणी मेखालाय: ॐ मणिकिङ्किणी मेखालाय नमः।<br>समस्त देवता मूर्तये: ॐ समस्त देवता मूर्तये नमः।<br>सहिष्णवे: ॐ सहिष्णवे नमः।<br>सततोत्थिताय: ॐ सततोत्थिताय नमः।<br>विघातकारिणे: ॐ विघातकारिणे नमः।<br>विश्वग्दृशे: ॐ विश्वग्दृशे नमः।<br>विश्वरक्षाकृते: ॐ विश्वरक्षाकृते नमः।<br>कल्याणगुरवे: ॐ कल्याणगुरवे नमः।<br>उन्मत्तवेषाय: ॐ उन्मत्तवेषाय नमः।<br>अपराजिते: ॐ अपराजिते नमः।<br>समस्त जगदाधाराय: ॐ समस्त जगदाधाराय नमः।<br>सर्वैश्वर्यप्रदाय: ॐ सर्वैश्वर्यप्रदाय नमः।<br>आक्रान्त चिद चित्प्रभवे: ॐ आक्रान्त चिद चित्प्रभवे नमः।<br>श्री विघ्नेश्वराय: ॐ श्री विघ्नेश्वराय नमः।</p>



<p>गणेश जी की आराधना के लिए बुधवार के दिन बहुत ही विशेष माना जाता है। इस दिन गणेश जी की पूजा-अर्चना से जातक के सभी रुके हुए काम पूरे हो सकते हैं। अगर आप गणेश जी की पूजा में उनके नाम मंत्र का जप करते हैं, तो इससे गणेश जी की कृपा आपके समस्त परिवार पर बनी रहती है।</p>
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		<title>बुधवार के दिन करें गणेश जी की आरती व मंत्रों का जप</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Live Halchal Web_Wing]]></dc:creator>
		<pubDate>Wed, 12 Mar 2025 03:53:23 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[अध्यात्म]]></category>
		<category><![CDATA[धर्म]]></category>
		<category><![CDATA[गणेश जी]]></category>
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<p>गणेश जी प्रथम पूज्य देव भी कहलाते हैं क्योंकि हिंदू धर्म में किसी भी शुभ कार्य की शुरुआत से पहले गणेश जी को जरूर याद किया जाता है ताकि वह कार्य गणेश जी की कृपा से बिना किसी बाधा के पूरा हो सके। ऐसे में प्रतिदिन खासकर बुधवार को आप उनकी पूजा-अर्चना द्वारा उनकी कृपा के पात्र बन सकते हैं।</p>



<p>बुधवार का दिन भगवान गणेश की कृपा प्राप्ति के लिए बहुत ही खास माना जाता है। ऐसे में रोजाना खासकर बुधवार के दिन विधि-विधान पूर्वक गणेश जी की पूजा-अर्चना जरूर करें। साथ ही पूजा में गणेश जी की आरती व मंत्रों का जप भी जरूर करें, ताकि आपको पूजा का पूर्ण फल मिल सके।</p>



<p><strong>गणेश जी की आरती</strong><br>जय गणेश जय गणेश, जय गणेश देवा।<br>माता जाकी पार्वती, पिता महादेवा॥<br>एक दंत दयावंत, चार भुजा धारी।<br>माथे सिंदूर सोहे, मूसे की सवारी॥<br>जय गणेश जय गणेश, जय गणेश देवा।<br>माता जाकी पार्वती, पिता महादेवा॥<br>पान चढ़े फल चढ़े, और चढ़े मेवा।<br>लड्डुअन का भोग लगे, संत करें सेवा॥<br>जय गणेश जय गणेश, जय गणेश देवा।<br>माता जाकी पार्वती, पिता महादेवा॥<br>अंधन को आंख देत, कोढ़िन को काया।<br>बांझन को पुत्र देत, निर्धन को माया॥<br>जय गणेश जय गणेश, जय गणेश देवा।<br>माता जाकी पार्वती, पिता महादेवा॥<br>‘सूर’ श्याम शरण आए, सफल कीजे सेवा।<br>माता जाकी पार्वती, पिता महादेवा॥<br>जय गणेश जय गणेश, जय गणेश देवा।<br>माता जाकी पार्वती, पिता महादेवा॥<br>दीनन की लाज रखो, शंभु सुतकारी।<br>कामना को पूर्ण करो, जाऊं बलिहारी॥<br>जय गणेश जय गणेश, जय गणेश देवा।<br>माता जाकी पार्वती, पिता महादेवा॥<br>भगवान गणेश की जय, पार्वती के लल्ला की जय<br>आरती के बाद इस मंत्र का जप करें<br>वर्णानामर्थसंघानां रसानां छन्दसामपि।<br>मंगलानां च कर्त्तारौ वन्दे वाणीविनायकौ॥1॥<br>गजाननं भूत गणादि सेवितं,<br>कपित्थ जम्बू फल चारू भक्षणम् ।<br>उमासुतं शोक विनाशकारकम्,<br>नमामि विघ्नेश्वर पाद पंकजम् ॥</p>



<p><strong>गणेश जी के मंत्र</strong><br>बुधवार के दिन आप विशेष कृपा प्राप्ति के लिए पूजा के दौरान गणेश जी के मंत्रों का भी जप कर सकते हैं –<br>श्री वक्रतुण्ड महाकाय सूर्य कोटी समप्रभा।<br>निर्विघ्नं कुरु मे देव सर्व-कार्येशु सर्वदा॥<br>ॐ श्रीं गं सौभाग्य गणपतये।<br>वर्वर्द सर्वजन्म में वषमान्य नमः॥<br>ॐ गं गणपतये नमः॥<br>ॐ वक्रतुण्डाय हुम्॥</p>



<p><strong>गणेश गायत्री मंत्र –</strong><br>ॐ एकदन्ताय विद्महे, वक्रतुण्डाय धीमहि,<br>तन्नो दन्ति प्रचोदयात्॥</p>



<p><strong>ऋणहर्ता गणपति मंत्र –</strong><br>ॐ गणेश ऋणं छिन्धि वरेण्यं हुं नमः फट्॥</p>
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