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	<title>गणेश चालीसा &#8211; Live Halchal</title>
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	<title>गणेश चालीसा &#8211; Live Halchal</title>
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		<title>गणेश चालीसा का चमत्कार, जब हर रास्ता बंद हो जाए, तब विघ्नहर्ता दिखाते हैं मार्ग</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Live Halchal Web_Wing]]></dc:creator>
		<pubDate>Wed, 18 Feb 2026 04:56:22 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[अध्यात्म]]></category>
		<category><![CDATA[धर्म]]></category>
		<category><![CDATA[गणेश चालीसा]]></category>
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					<description><![CDATA[<img width="609" height="387" src="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2026/02/Screenshot-2026-02-17-205430.png" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" fetchpriority="high" srcset="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2026/02/Screenshot-2026-02-17-205430.png 609w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2026/02/Screenshot-2026-02-17-205430-300x191.png 300w" sizes="(max-width: 609px) 100vw, 609px" />गणेश चालीसा भगवान गणेश को समर्पित एक भक्ति भजन है, जिसमें उनके गुणों, नामों और कर्मों का वर्णन है। यह 40 छंदों का एक शक्तिशाली स्तोत्र है, जिसके नियमित पाठ से भक्तों को सुख, शांति और समृद्धि मिलती है। चालीसा में गणेश जी के जन्म, शनि देव के प्रभाव और उन्हें प्रथम पूज्य देवता बनने &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<img width="609" height="387" src="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2026/02/Screenshot-2026-02-17-205430.png" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" srcset="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2026/02/Screenshot-2026-02-17-205430.png 609w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2026/02/Screenshot-2026-02-17-205430-300x191.png 300w" sizes="(max-width: 609px) 100vw, 609px" />
<p>गणेश चालीसा भगवान गणेश को समर्पित एक भक्ति भजन है, जिसमें उनके गुणों, नामों और कर्मों का वर्णन है। यह 40 छंदों का एक शक्तिशाली स्तोत्र है, जिसके नियमित पाठ से भक्तों को सुख, शांति और समृद्धि मिलती है। चालीसा में गणेश जी के जन्म, शनि देव के प्रभाव और उन्हें प्रथम पूज्य देवता बनने की कथा भी समाहित है।</p>



<p>गणेश चालीसा भगवान गणेश को समर्पित एक भक्ति भजन है, जिसमें भगवान गणेश के गुणों, नामों और कर्मों का वर्णन किया गया है। यह 40 छंदों का एक छोटा, शक्तिशाली और हृदयस्पर्शी स्तोत्र है, जिसे नियमित रूप से पढ़ने से भक्तों को सुख, शांति और समृद्धि की प्राप्ति होती है।</p>



<p><strong>यहां पढ़ें चालीसा<br></strong>जय गणपति सदगुण सदन, कविवर बदन कृपाल।<br>विघ्न हरण मंगल करण, जय जय गिरिजालाल॥ चौपाई जय जय जय गणपति गणराजू।<br>मंगल भरण करण शुभः काजू॥ जै गजबदन सदन सुखदाता।<br>विश्व विनायका बुद्धि विधाता॥ वक्र तुण्ड शुची शुण्ड सुहावना।</p>



<p>तिलक त्रिपुण्ड भाल मन भावन॥ राजत मणि मुक्तन उर माला।<br>स्वर्ण मुकुट शिर नयन विशाला॥ पुस्तक पाणि कुठार त्रिशूलं।<br>मोदक भोग सुगन्धित फूलं॥ सुन्दर पीताम्बर तन साजित।<br>चरण पादुका मुनि मन राजित॥ धनि शिव सुवन षडानन भ्राता।</p>



<p>गौरी लालन विश्व-विख्याता॥ ऋद्धि-सिद्धि तव चंवर सुधारे।<br>मुषक वाहन सोहत द्वारे॥ कहौ जन्म शुभ कथा तुम्हारी।<br>अति शुची पावन मंगलकारी॥ एक समय गिरिराज कुमारी।<br>पुत्र हेतु तप कीन्हा भारी॥ भयो यज्ञ जब पूर्ण अनूपा।</p>



<p>तब पहुंच्यो तुम धरी द्विज रूपा॥ अतिथि जानी के गौरी सुखारी।<br>बहुविधि सेवा करी तुम्हारी॥ अति प्रसन्न हवै तुम वर दीन्हा।<br>मातु पुत्र हित जो तप कीन्हा॥ मिलहि पुत्र तुहि, बुद्धि विशाला।<br>बिना गर्भ धारण यहि काला॥ गणनायक गुण ज्ञान निधाना।</p>



<p>पूजित प्रथम रूप भगवाना॥ अस कही अन्तर्धान रूप हवै।<br>पालना पर बालक स्वरूप हवै॥ बनि शिशु रुदन जबहिं तुम ठाना।<br>लखि मुख सुख नहिं गौरी समाना॥ सकल मगन, सुखमंगल गावहिं।<br>नाभ ते सुरन, सुमन वर्षावहिं॥ शम्भु, उमा, बहुदान लुटावहिं।</p>



<p>सुर मुनिजन, सुत देखन आवहिं॥ लखि अति आनन्द मंगल साजा।<br>देखन भी आये शनि राजा॥20॥ निज अवगुण गुनि शनि मन माहीं।<br>बालक, देखन चाहत नाहीं॥ गिरिजा कछु मन भेद बढायो।<br>उत्सव मोर, न शनि तुही भायो॥ कहत लगे शनि, मन सकुचाई।</p>



<p>का करिहौ, शिशु मोहि दिखाई॥ नहिं विश्वास, उमा उर भयऊ।<br>शनि सों बालक देखन कहयऊ॥ पदतहिं शनि दृग कोण प्रकाशा।<br>बालक सिर उड़ि गयो अकाशा॥ गिरिजा गिरी विकल हवै धरणी।<br>सो दुःख दशा गयो नहीं वरणी॥ हाहाकार मच्यौ कैलाशा।</p>



<p>शनि कीन्हों लखि सुत को नाशा॥ तुरत गरुड़ चढ़ि विष्णु सिधायो।<br>काटी चक्र सो गज सिर लाये॥ बालक के धड़ ऊपर धारयो।<br>प्राण मन्त्र पढ़ि शंकर डारयो॥ नाम गणेश शम्भु तब कीन्हे।<br>प्रथम पूज्य बुद्धि निधि, वर दीन्हे॥ बुद्धि परीक्षा जब शिव कीन्हा।</p>



<p>पृथ्वी कर प्रदक्षिणा लीन्हा॥ चले षडानन, भरमि भुलाई।<br>रचे बैठ तुम बुद्धि उपाई॥ चरण मातु-पितु के धर लीन्हें।<br>तिनके सात प्रदक्षिण कीन्हें॥ धनि गणेश कही शिव हिये हरषे।<br>नभ ते सुरन सुमन बहु बरसे॥ तुम्हरी महिमा बुद्धि बड़ाई।</p>



<p>शेष सहसमुख सके न गाई॥ मैं मतिहीन मलीन दुखारी।<br>करहूं कौन विधि विनय तुम्हारी॥ भजत रामसुन्दर प्रभुदासा।<br>जग प्रयाग, ककरा, दुर्वासा॥ अब प्रभु दया दीना पर कीजै।<br>अपनी शक्ति भक्ति कुछ दीजै॥ दोहा श्री गणेश यह चालीसा, पाठ करै कर ध्यान।</p>



<p>नित नव मंगल गृह बसै, लहे जगत सन्मान॥ सम्बन्ध अपने सहस्त्र दश, ऋषि पंचमी दिनेश।<br>पूरण चालीसा भयो, मंगल मूर्ती गणेश॥</p>
]]></content:encoded>
					
		
		
			</item>
		<item>
		<title>बुधवार पूजा में जरूर करें गणेश चालीसा का पाठ</title>
		<link>https://livehalchal.com/%e0%a4%ac%e0%a5%81%e0%a4%a7%e0%a4%b5%e0%a4%be%e0%a4%b0-%e0%a4%aa%e0%a5%82%e0%a4%9c%e0%a4%be-%e0%a4%ae%e0%a5%87%e0%a4%82-%e0%a4%9c%e0%a4%b0%e0%a5%82%e0%a4%b0-%e0%a4%95%e0%a4%b0%e0%a5%87%e0%a4%82/621812</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Live Halchal Web_Wing]]></dc:creator>
		<pubDate>Wed, 09 Jul 2025 04:30:47 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[अध्यात्म]]></category>
		<category><![CDATA[धर्म]]></category>
		<category><![CDATA[गणेश चालीसा]]></category>
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					<description><![CDATA[<img width="486" height="450" src="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2025/07/2-16-large.jpg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" srcset="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2025/07/2-16.jpg 486w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2025/07/2-16-medium.jpg 300w" sizes="(max-width: 486px) 100vw, 486px" />माना जाता है कि रोजाना विशेषकर बुधवार के दिन गणेश जी की पूजा-अर्चना करने से साधक के जीवन में सुख-समृद्ध बनी रहती है। ऐसे में आपको बुधवार के दिन (Budhwar Puja) गणेश चालीसा का पाठ पूरे विधि-विधान से करना चाहिए ताकि गणेश जी की दया दृष्टि आपके ऊपर बनी रहे। हिंदू धर्म में भगवान गणेश &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<img width="486" height="450" src="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2025/07/2-16-large.jpg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" loading="lazy" srcset="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2025/07/2-16.jpg 486w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2025/07/2-16-medium.jpg 300w" sizes="auto, (max-width: 486px) 100vw, 486px" />
<p>माना जाता है कि रोजाना विशेषकर बुधवार के दिन गणेश जी की पूजा-अर्चना करने से साधक के जीवन में सुख-समृद्ध बनी रहती है। ऐसे में आपको बुधवार के दिन (Budhwar Puja) गणेश चालीसा का पाठ पूरे विधि-विधान से करना चाहिए ताकि गणेश जी की दया दृष्टि आपके ऊपर बनी रहे।</p>



<p>हिंदू धर्म में भगवान गणेश बुद्धि, समृद्धि, और शुभता के देवता माने गए हैं।बुधवार का दिन भगवान गणेश की पूजा-अर्चना के लिए सबसे उत्तम माना गया है। ऐसे में आप बुधवार के दिन या फिर रोजाना गणेश जी की पूजा में गणेश चालीसा का पाठ कर सकते हैं।</p>



<p><strong>गणेश चालीसा (Shri Ganesh Chalisa)</strong></p>



<p><strong>दोहा</strong><br>जय गणपति सदगुण सदन, कविवर बदन कृपाल।</p>



<p>विघ्न हरण मंगल करण, जय जय गिरिजालाल॥</p>



<p><strong>चौपाई</strong><br>जय जय जय गणपति गणराजू।</p>



<p>मंगल भरण करण शुभः काजू॥</p>



<p>जै गजबदन सदन सुखदाता।</p>



<p>विश्व विनायका बुद्धि विधाता॥</p>



<p>वक्र तुण्ड शुची शुण्ड सुहावना।</p>



<p>तिलक त्रिपुण्ड भाल मन भावन॥</p>



<p>राजत मणि मुक्तन उर माला।</p>



<p>स्वर्ण मुकुट शिर नयन विशाला॥</p>



<p>पुस्तक पाणि कुठार त्रिशूलं।</p>



<p>मोदक भोग सुगन्धित फूलं॥</p>



<p>सुन्दर पीताम्बर तन साजित।</p>



<p>चरण पादुका मुनि मन राजित॥</p>



<p>धनि शिव सुवन षडानन भ्राता।</p>



<p>गौरी लालन विश्व-विख्याता॥</p>



<p>ऋद्धि-सिद्धि तव चंवर सुधारे।</p>



<p>मुषक वाहन सोहत द्वारे॥</p>



<p>कहौ जन्म शुभ कथा तुम्हारी।</p>



<p>अति शुची पावन मंगलकारी॥</p>



<p>एक समय गिरिराज कुमारी।</p>



<p>पुत्र हेतु तप कीन्हा भारी॥</p>



<p>भयो यज्ञ जब पूर्ण अनूपा।</p>



<p>तब पहुंच्यो तुम धरी द्विज रूपा॥</p>



<p>अतिथि जानी के गौरी सुखारी।</p>



<p>बहुविधि सेवा करी तुम्हारी॥</p>



<p>अति प्रसन्न हवै तुम वर दीन्हा।</p>



<p>मातु पुत्र हित जो तप कीन्हा॥</p>



<p>मिलहि पुत्र तुहि, बुद्धि विशाला।</p>



<p>बिना गर्भ धारण यहि काला॥</p>



<p>गणनायक गुण ज्ञान निधाना।</p>



<p>पूजित प्रथम रूप भगवाना॥</p>



<p>अस कही अन्तर्धान रूप हवै।</p>



<p>पालना पर बालक स्वरूप हवै॥</p>



<p>बनि शिशु रुदन जबहिं तुम ठाना।</p>



<p>लखि मुख सुख नहिं गौरी समाना॥</p>



<p>सकल मगन, सुखमंगल गावहिं।</p>



<p>नाभ ते सुरन, सुमन वर्षावहिं॥</p>



<p>शम्भु, उमा, बहुदान लुटावहिं।</p>



<p>सुर मुनिजन, सुत देखन आवहिं॥</p>



<p>लखि अति आनन्द मंगल साजा।</p>



<p>देखन भी आये शनि राजा॥</p>



<p>निज अवगुण गुनि शनि मन माहीं।</p>



<p>बालक, देखन चाहत नाहीं॥</p>



<p>गिरिजा कछु मन भेद बढायो।</p>



<p>उत्सव मोर, न शनि तुही भायो॥</p>



<p>कहत लगे शनि, मन सकुचाई।</p>



<p>का करिहौ, शिशु मोहि दिखाई॥</p>



<p>नहिं विश्वास, उमा उर भयऊ।</p>



<p>शनि सों बालक देखन कहयऊ॥</p>



<p>पदतहिं शनि दृग कोण प्रकाशा।</p>



<p>बालक सिर उड़ि गयो अकाशा॥</p>



<p>गिरिजा गिरी विकल हवै धरणी।</p>



<p>सो दुःख दशा गयो नहीं वरणी॥</p>



<p>हाहाकार मच्यौ कैलाशा।</p>



<p>शनि कीन्हों लखि सुत को नाशा॥</p>



<p>तुरत गरुड़ चढ़ि विष्णु सिधायो।</p>



<p>काटी चक्र सो गज सिर लाये॥</p>



<p>बालक के धड़ ऊपर धारयो।</p>



<p>प्राण मन्त्र पढ़ि शंकर डारयो॥</p>



<p>नाम गणेश शम्भु तब कीन्हे।</p>



<p>प्रथम पूज्य बुद्धि निधि, वर दीन्हे॥</p>



<p>बुद्धि परीक्षा जब शिव कीन्हा।</p>



<p>पृथ्वी कर प्रदक्षिणा लीन्हा॥</p>



<p>चले षडानन, भरमि भुलाई।</p>



<p>रचे बैठ तुम बुद्धि उपाई॥</p>



<p>चरण मातु-पितु के धर लीन्हें।</p>



<p>तिनके सात प्रदक्षिण कीन्हें॥</p>



<p>धनि गणेश कही शिव हिये हरषे।</p>



<p>नभ ते सुरन सुमन बहु बरसे॥</p>



<p>तुम्हरी महिमा बुद्धि बड़ाई।</p>



<p>शेष सहसमुख सके न गाई॥</p>



<p>मैं मतिहीन मलीन दुखारी।</p>



<p>करहूं कौन विधि विनय तुम्हारी॥</p>



<p>भजत रामसुन्दर प्रभुदासा।</p>



<p>जग प्रयाग, ककरा, दुर्वासा॥</p>



<p>अब प्रभु दया दीना पर कीजै।</p>



<p>अपनी शक्ति भक्ति कुछ दीजै॥</p>



<p><strong>दोहा</strong><br>श्री गणेश यह चालीसा, पाठ करै कर ध्यान।</p>



<p>नित नव मंगल गृह बसै, लहे जगत सन्मान॥</p>



<p>सम्बन्ध अपने सहस्त्र दश, ऋषि पंचमी दिनेश।</p>



<p>पूरण चालीसा भयो, मंगल मूर्ती गणेश॥</p>
]]></content:encoded>
					
		
		
			</item>
		<item>
		<title> गणेश चालीसा के पाठ से सभी बाधाएं होंगी दूर, बरसेगी गणपति बप्पा की कृपा</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Live Halchal Web_Wing]]></dc:creator>
		<pubDate>Wed, 23 Apr 2025 05:06:42 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[अध्यात्म]]></category>
		<category><![CDATA[धर्म]]></category>
		<category><![CDATA[गणेश चालीसा]]></category>
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					<description><![CDATA[<img width="598" height="317" src="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2025/04/uityi8-large.jpg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" loading="lazy" srcset="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2025/04/uityi8.jpg 598w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2025/04/uityi8-medium.jpg 300w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2025/04/uityi8-310x165.jpg 310w" sizes="auto, (max-width: 598px) 100vw, 598px" />सप्ताह का तीसरा दिन यानी बुधवार भगवान गणेश को समर्पित है। इस दिन भक्त सुबह स्नान करने के बाद गणपति बप्पा की पूजा-अर्चना करते हैं। साथ ही विशेष चीजों का दान करते हैं। धार्मिक मान्यता के अनुसार, भगवान गणेश की पूजा करने से जीवन में आ रही बाधाएं दूर होती हैं और सुख-समृद्धि में वृद्धि &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<img width="598" height="317" src="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2025/04/uityi8-large.jpg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" loading="lazy" srcset="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2025/04/uityi8.jpg 598w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2025/04/uityi8-medium.jpg 300w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2025/04/uityi8-310x165.jpg 310w" sizes="auto, (max-width: 598px) 100vw, 598px" />
<p>सप्ताह का तीसरा दिन यानी बुधवार भगवान गणेश को समर्पित है। इस दिन भक्त सुबह स्नान करने के बाद गणपति बप्पा की पूजा-अर्चना करते हैं। साथ ही विशेष चीजों का दान करते हैं। धार्मिक मान्यता के अनुसार, भगवान गणेश की पूजा करने से जीवन में आ रही बाधाएं दूर होती हैं और सुख-समृद्धि में वृद्धि होती है।</p>



<p>अगर आप भगवान गणेश की कृपा प्राप्त करना चाहते हैं, तो बुधवार की पूजा के दौरान विधिपूर्वक गणेश चालीसा का पाठ करें। धार्मिक मान्यता के अनुसार, गणेश चालीसा का पाठ करने से भगवान गणेश की कृपा से बुध दोष दूर होता है और रुके हुए काम पूरे होते हैं।</p>



<p><strong>गणेश चालीसा<br>दोहा<br></strong>जय गणपति सदगुण सदन, कविवर बदन कृपाल।<br>विघ्न हरण मंगल करण, जय जय गिरिजालाल॥</p>



<p><strong>चौपाई<br></strong>जय जय जय गणपति गणराजू।<br>मंगल भरण करण शुभः काजू॥<br>जै गजबदन सदन सुखदाता।<br>विश्व विनायका बुद्धि विधाता॥<br>वक्र तुण्ड शुची शुण्ड सुहावना।<br>तिलक त्रिपुण्ड भाल मन भावन॥<br>राजत मणि मुक्तन उर माला।<br>स्वर्ण मुकुट शिर नयन विशाला॥<br>पुस्तक पाणि कुठार त्रिशूलं।<br>मोदक भोग सुगन्धित फूलं॥<br>सुन्दर पीताम्बर तन साजित।<br>चरण पादुका मुनि मन राजित॥<br>धनि शिव सुवन षडानन भ्राता।<br>गौरी लालन विश्व-विख्याता॥<br>ऋद्धि-सिद्धि तव चंवर सुधारे।<br>मुषक वाहन सोहत द्वारे॥<br>कहौ जन्म शुभ कथा तुम्हारी।<br>अति शुची पावन मंगलकारी॥<br>एक समय गिरिराज कुमारी।<br>पुत्र हेतु तप कीन्हा भारी॥<br>भयो यज्ञ जब पूर्ण अनूपा।<br>तब पहुंच्यो तुम धरी द्विज रूपा॥<br>अतिथि जानी के गौरी सुखारी।<br>बहुविधि सेवा करी तुम्हारी॥<br>अति प्रसन्न हवै तुम वर दीन्हा।<br>मातु पुत्र हित जो तप कीन्हा॥<br>मिलहि पुत्र तुहि, बुद्धि विशाला।<br>बिना गर्भ धारण यहि काला॥<br>गणनायक गुण ज्ञान निधाना।<br>पूजित प्रथम रूप भगवाना॥<br>अस कही अन्तर्धान रूप हवै।<br>पालना पर बालक स्वरूप हवै॥<br>बनि शिशु रुदन जबहिं तुम ठाना।<br>लखि मुख सुख नहिं गौरी समाना॥<br>सकल मगन, सुखमंगल गावहिं।<br>नाभ ते सुरन, सुमन वर्षावहिं॥<br>शम्भु, उमा, बहुदान लुटावहिं।<br>सुर मुनिजन, सुत देखन आवहिं॥<br>लखि अति आनन्द मंगल साजा।<br>देखन भी आये शनि राजा॥<br>निज अवगुण गुनि शनि मन माहीं।<br>बालक, देखन चाहत नाहीं॥<br>गिरिजा कछु मन भेद बढायो।<br>उत्सव मोर, न शनि तुही भायो॥<br>कहत लगे शनि, मन सकुचाई।<br>का करिहौ, शिशु मोहि दिखाई॥<br>नहिं विश्वास, उमा उर भयऊ।<br>शनि सों बालक देखन कहयऊ॥<br>पदतहिं शनि दृग कोण प्रकाशा।<br>बालक सिर उड़ि गयो अकाशा॥<br>गिरिजा गिरी विकल हवै धरणी।<br>सो दुःख दशा गयो नहीं वरणी॥<br>हाहाकार मच्यौ कैलाशा।<br>शनि कीन्हों लखि सुत को नाशा॥<br>तुरत गरुड़ चढ़ि विष्णु सिधायो।<br>काटी चक्र सो गज सिर लाये॥<br>बालक के धड़ ऊपर धारयो।<br>प्राण मन्त्र पढ़ि शंकर डारयो॥<br>नाम गणेश शम्भु तब कीन्हे।<br>प्रथम पूज्य बुद्धि निधि, वर दीन्हे॥<br>बुद्धि परीक्षा जब शिव कीन्हा।<br>पृथ्वी कर प्रदक्षिणा लीन्हा॥<br>चले षडानन, भरमि भुलाई।<br>रचे बैठ तुम बुद्धि उपाई॥<br>चरण मातु-पितु के धर लीन्हें।<br>तिनके सात प्रदक्षिण कीन्हें॥<br>धनि गणेश कही शिव हिये हरषे।<br>नभ ते सुरन सुमन बहु बरसे॥<br>तुम्हरी महिमा बुद्धि बड़ाई।<br>शेष सहसमुख सके न गाई॥<br>मैं मतिहीन मलीन दुखारी।<br>करहूं कौन विधि विनय तुम्हारी॥<br>भजत रामसुन्दर प्रभुदासा।<br>जग प्रयाग, ककरा, दुर्वासा॥<br>अब प्रभु दया दीना पर कीजै।<br>अपनी शक्ति भक्ति कुछ दीजै॥</p>



<p><strong>दोहा<br></strong>श्री गणेश यह चालीसा, पाठ करै कर ध्यान।<br>नित नव मंगल गृह बसै, लहे जगत सन्मान॥<br>सम्बन्ध अपने सहस्त्र दश, ऋषि पंचमी दिनेश।<br>पूरण चालीसा भयो, मंगल मूर्ती गणेश॥</p>
]]></content:encoded>
					
		
		
			</item>
		<item>
		<title>आज पूजा में जरूर करें गणेश चालीसा का पाठ</title>
		<link>https://livehalchal.com/%e0%a4%86%e0%a4%9c-%e0%a4%aa%e0%a5%82%e0%a4%9c%e0%a4%be-%e0%a4%ae%e0%a5%87%e0%a4%82-%e0%a4%9c%e0%a4%b0%e0%a5%82%e0%a4%b0-%e0%a4%95%e0%a4%b0%e0%a5%87%e0%a4%82-%e0%a4%97%e0%a4%a3%e0%a5%87%e0%a4%b6/596331</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Live Halchal Web_Wing]]></dc:creator>
		<pubDate>Wed, 25 Dec 2024 04:51:51 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[अध्यात्म]]></category>
		<category><![CDATA[धर्म]]></category>
		<category><![CDATA[गणेश चालीसा]]></category>
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					<description><![CDATA[<img width="618" height="461" src="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2024/12/Capture-658-large.jpg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" loading="lazy" srcset="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2024/12/Capture-658.jpg 656w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2024/12/Capture-658-medium.jpg 300w" sizes="auto, (max-width: 618px) 100vw, 618px" />हिंदू धर्म में भगवान गणेश को प्रथम पूज्य देव माना जाता है क्योंकि किसी भी शुभ कार्य जैसे विवाह आदि से पहले उनका पूजन किया जाता है। इससे वह कार्य बिना किसी रुकावट के पूरा होता है। वहीं बुधवार का दिन गणेश जी की आराधना के लिए सबसे उत्तम माना गया है। इस दिन गणेश &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<img width="618" height="461" src="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2024/12/Capture-658-large.jpg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" loading="lazy" srcset="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2024/12/Capture-658.jpg 656w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2024/12/Capture-658-medium.jpg 300w" sizes="auto, (max-width: 618px) 100vw, 618px" />
<p>हिंदू धर्म में भगवान गणेश को प्रथम पूज्य देव माना जाता है क्योंकि किसी भी शुभ कार्य जैसे विवाह आदि से पहले उनका पूजन किया जाता है। इससे वह कार्य बिना किसी रुकावट के पूरा होता है। वहीं बुधवार का दिन गणेश जी की आराधना के लिए सबसे उत्तम माना गया है। इस दिन गणेश चालीसा का पाठ जरूर करना चाहिए।</p>



<p>सुख-समृद्धि के दाता गणेश जी को प्रसन्न करने के लिए बुधवार का दिन सबसे उत्तम माना गया है। इस दिन आप विशेष विधि-विधान से गणपति जी (Ganesh Puja) की पूजा-अर्चना द्वारा उनकी कृपा प्राप्त कर सकते हैं। इसी के साथ आप रोजाना भी गणेश जी की आराधना कर गणेश चालीसा का पाठ कर सकते हैं। इससे जीवन में आ रही सभी बाधाएं दूर होती हैं।</p>



<p><strong>श्री गणेश चालीसा</strong></p>



<p><strong>दोहा</strong></p>



<p>जय गणपति सदगुण सदन, कविवर बदन कृपाल।</p>



<p>विघ्न हरण मंगल करण, जय जय गिरिजालाल॥</p>



<p><strong>चौपाई</strong></p>



<p>जय जय जय गणपति गणराजू।</p>



<p>मंगल भरण करण शुभः काजू॥</p>



<p>जै गजबदन सदन सुखदाता।</p>



<p>विश्व विनायका बुद्धि विधाता॥</p>



<p>वक्र तुण्ड शुची शुण्ड सुहावना।</p>



<p>तिलक त्रिपुण्ड भाल मन भावन॥</p>



<p>राजत मणि मुक्तन उर माला।</p>



<p>स्वर्ण मुकुट शिर नयन विशाला॥</p>



<p>पुस्तक पाणि कुठार त्रिशूलं।</p>



<p>मोदक भोग सुगन्धित फूलं॥</p>



<p>सुन्दर पीताम्बर तन साजित।</p>



<p>चरण पादुका मुनि मन राजित॥</p>



<p>धनि शिव सुवन षडानन भ्राता।</p>



<p>गौरी लालन विश्व-विख्याता॥</p>



<p>ऋद्धि-सिद्धि तव चंवर सुधारे।</p>



<p>मुषक वाहन सोहत द्वारे॥</p>



<p>कहौ जन्म शुभ कथा तुम्हारी।</p>



<p>अति शुची पावन मंगलकारी॥</p>



<p>एक समय गिरिराज कुमारी।</p>



<p>पुत्र हेतु तप कीन्हा भारी॥</p>



<p>भयो यज्ञ जब पूर्ण अनूपा।</p>



<p>तब पहुंच्यो तुम धरी द्विज रूपा॥</p>



<p>अतिथि जानी के गौरी सुखारी।</p>



<p>बहुविधि सेवा करी तुम्हारी॥</p>



<p>अति प्रसन्न हवै तुम वर दीन्हा।</p>



<p>मातु पुत्र हित जो तप कीन्हा॥</p>



<p>मिलहि पुत्र तुहि, बुद्धि विशाला।</p>



<p>बिना गर्भ धारण यहि काला॥</p>



<p>गणनायक गुण ज्ञान निधाना।</p>



<p>पूजित प्रथम रूप भगवाना॥</p>



<p>अस कही अन्तर्धान रूप हवै।</p>



<p>पालना पर बालक स्वरूप हवै॥</p>



<p>बनि शिशु रुदन जबहिं तुम ठाना।</p>



<p>लखि मुख सुख नहिं गौरी समाना॥</p>



<p>सकल मगन, सुखमंगल गावहिं।</p>



<p>नाभ ते सुरन, सुमन वर्षावहिं॥</p>



<p>शम्भु, उमा, बहुदान लुटावहिं।</p>



<p>सुर मुनिजन, सुत देखन आवहिं॥</p>



<p>गणेश जी को पूजा के दौरान दूर्वा और सिंदूर अर्पित करना बहुत ही शुभ माना जाता है। इससे गणेश जी प्रसन्न होते हैं और साधक से सभी विघ्न हर लेते हैं, इसलिए उन्हें विघ्नहर्ता भी कहा जाता है। बुधवार के दिन गणेश चालीसा का पाठ करना उनकी कृपा प्राप्ति के एक बेहतर उपाय है।</p>



<p>लखि अति आनन्द मंगल साजा।</p>



<p>देखन भी आये शनि राजा॥20॥</p>



<p>निज अवगुण गुनि शनि मन माहीं।</p>



<p>बालक, देखन चाहत नाहीं॥</p>



<p>गिरिजा कछु मन भेद बढायो।</p>



<p>उत्सव मोर, न शनि तुही भायो॥</p>



<p>कहत लगे शनि, मन सकुचाई।</p>



<p>का करिहौ, शिशु मोहि दिखाई॥</p>



<p>नहिं विश्वास, उमा उर भयऊ।</p>



<p>शनि सों बालक देखन कहयऊ॥</p>



<p>पदतहिं शनि दृग कोण प्रकाशा।</p>



<p>बालक सिर उड़ि गयो अकाशा॥</p>



<p>गिरिजा गिरी विकल हवै धरणी।</p>



<p>सो दुःख दशा गयो नहीं वरणी॥</p>



<p>हाहाकार मच्यौ कैलाशा।</p>



<p>शनि कीन्हों लखि सुत को नाशा॥</p>



<p>तुरत गरुड़ चढ़ि विष्णु सिधायो।</p>



<p>काटी चक्र सो गज सिर लाये॥</p>



<p>बालक के धड़ ऊपर धारयो।</p>



<p>प्राण मन्त्र पढ़ि शंकर डारयो॥</p>



<p>नाम गणेश शम्भु तब कीन्हे।</p>



<p>प्रथम पूज्य बुद्धि निधि, वर दीन्हे॥</p>



<p>बुद्धि परीक्षा जब शिव कीन्हा।</p>



<p>पृथ्वी कर प्रदक्षिणा लीन्हा॥</p>



<p>चले षडानन, भरमि भुलाई।</p>



<p>रचे बैठ तुम बुद्धि उपाई॥</p>



<p>चरण मातु-पितु के धर लीन्हें।</p>



<p>तिनके सात प्रदक्षिण कीन्हें॥</p>



<p>धनि गणेश कही शिव हिये हरषे।</p>



<p>नभ ते सुरन सुमन बहु बरसे॥</p>



<p>तुम्हरी महिमा बुद्धि बड़ाई।</p>



<p>शेष सहसमुख सके न गाई॥</p>



<p>मैं मतिहीन मलीन दुखारी।</p>



<p>करहूं कौन विधि विनय तुम्हारी॥</p>



<p>हिंदू धर्म में भगवान गणेश को बुद्धि के दाता और सुख-समृद्धि का देवता माना जाता है। प्रतिदिन विशेषकर बुधवार के दिन उनकी आराधना करने से साधक के जीवन में सुख-शांति का वास बना रहता है।</p>



<p>भजत रामसुन्दर प्रभुदासा।</p>



<p>जग प्रयाग, ककरा, दुर्वासा॥</p>



<p>अब प्रभु दया दीना पर कीजै।</p>



<p>अपनी शक्ति भक्ति कुछ दीजै॥</p>



<p><strong>दोहा</strong><br>श्री गणेश यह चालीसा, पाठ करै कर ध्यान।</p>



<p>नित नव मंगल गृह बसै, लहे जगत सन्मान॥</p>



<p>सम्बन्ध अपने सहस्त्र दश, ऋषि पंचमी दिनेश।</p>



<p>पूरण चालीसा भयो, मंगल मूर्ती गणेश॥</p>
]]></content:encoded>
					
		
		
			</item>
		<item>
		<title>बुधवार की पूजा में जरूर करें गणेश चालीसा का पाठ</title>
		<link>https://livehalchal.com/darm/593020</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Live Halchal Web_Wing]]></dc:creator>
		<pubDate>Wed, 04 Dec 2024 04:37:05 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[अध्यात्म]]></category>
		<category><![CDATA[धर्म]]></category>
		<category><![CDATA[गणेश चालीसा]]></category>
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					<description><![CDATA[<img width="618" height="343" src="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2024/12/Capture-163-large.jpg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" loading="lazy" srcset="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2024/12/Capture-163.jpg 675w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2024/12/Capture-163-medium.jpg 300w" sizes="auto, (max-width: 618px) 100vw, 618px" />किसी भी शुभ कार्य के आरंभ से पहले गणेश जी को जरूर याद किया जाता है ताकि उस कार्य में किसी तरह की बाधा न आए। ऐसे में आप गणेश जी के दिन यानी बुधवार के दिन उनकी विशेष रूप से पूजा-अर्चना कर उनकी कृपा प्राप्त कर सकते हैं। गणेश जी की कृपा के लिए &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<img width="618" height="343" src="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2024/12/Capture-163-large.jpg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" loading="lazy" srcset="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2024/12/Capture-163.jpg 675w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2024/12/Capture-163-medium.jpg 300w" sizes="auto, (max-width: 618px) 100vw, 618px" />
<p>किसी भी शुभ कार्य के आरंभ से पहले गणेश जी को जरूर याद किया जाता है ताकि उस कार्य में किसी तरह की बाधा न आए। ऐसे में आप गणेश जी के दिन यानी बुधवार के दिन उनकी विशेष रूप से पूजा-अर्चना कर उनकी कृपा प्राप्त कर सकते हैं। गणेश जी की कृपा के लिए गणेश चालीसा का पाठ करना भी उत्तम माना जाता है।</p>



<p>हिंदू धर्म में बुधवार का दिन भगवान गणेश के लिए समर्पित माना जाता है। इस दिन भगवान गणेश की पूजा से साधक को शुभ फलों की प्राप्ति हो सकती है। ऐसे में गणपति जी की पूजा के दौरान गणेश चालीसा का पाठ भी अवश्य करना चाहिए। तो चलिए पढ़ते हैं गणेश चालीसा।</p>



<p><strong>गणेश चालीसा</strong></p>



<p><strong>दोहा</strong></p>



<p>जय गणपति सदगुणसदन, कविवर बदन कृपाल।</p>



<p>विघ्न हरण मंगल करण, जय जय गिरिजालाल॥</p>



<p><strong>चौपाई</strong></p>



<p>जय जय जय गणपति गणराजू।<br>मंगल भरण करण शुभ काजू॥1॥<br>जय गजबदन सदन सुखदाता।<br>विश्व विनायक बुद्घि विधाता॥2॥<br>वक्र तुण्ड शुचि शुण्ड सुहावन।<br>तिलक त्रिपुण्ड भाल मन भावन॥3॥<br>राजत मणि मुक्तन उर माला।<br>स्वर्ण मुकुट शिर नयन विशाला॥4॥<br>पुस्तक पाणि कुठार त्रिशूलं।<br>मोदक भोग सुगन्धित फूलं॥5॥<br>सुन्दर पीताम्बर तन साजित।<br>चरण पादुका मुनि मन राजित॥6॥<br>धनि शिवसुवन षडानन भ्राता।<br>गौरी ललन विश्व-विख्याता॥7॥<br>ऋद्घि-सिद्घि तव चंवर सुधारे।<br>मूषक वाहन सोहत द्घारे॥8॥<br>कहौ जन्म शुभ-कथा तुम्हारी।<br>अति शुचि पावन मंगलकारी॥9॥<br>एक समय गिरिराज कुमारी।<br>पुत्र हेतु तप कीन्हो भारी॥10॥</p>



<p>भगवान गणेश को सुख-समृद्धि, बुद्धि और रिद्धि-सिद्धि का दाता माना जाता है। माना जाता है कि रोजाना भगवान गणेश की पूजा से साधक के जीवन में सुख-समृद्धि बनी रहती है। ऐसे में आप रोजाना, खासकर बुधवार के दिन भगवान गणेश की पूजा जरूर करें।</p>



<p>भयो यज्ञ जब पूर्ण अनूपा।<br>तब पहुंच्यो तुम धरि द्घिज रुपा॥11॥<br>अतिथि जानि कै गौरि सुखारी।<br>बहुविधि सेवा करी तुम्हारी॥12॥<br>अति प्रसन्न है तुम वर दीन्हा।<br>मातु पुत्र हित जो तप कीन्हा॥13॥<br>मिलहि पुत्र तुहि, बुद्धि विशाला।<br>बिना गर्भ धारण, यहि काला॥14॥<br>गणनायक, गुण ज्ञान निधाना।<br>पूजित प्रथम, रुप भगवाना॥15॥<br>अस कहि अन्तर्धान रुप है।<br>पलना पर बालक स्वरुप है॥16॥<br>बनि शिशु, रुदन जबहिं तुम ठाना।<br>लखि मुख सुख नहिं गौरि समाना॥17॥<br>सकल मगन, सुखमंगल गावहिं।<br>नभ ते सुरन, सुमन वर्षावहिं॥18॥<br>शम्भु, उमा, बहु दान लुटावहिं।<br>सुर मुनिजन, सुत देखन आवहिं॥19॥<br>लखि अति आनन्द मंगल साजा।<br>देखन भी आये शनि राजा॥20॥</p>



<p>सनातन धर्म में भगवान गणेश, प्रथम पूज्य देव कहा जाता है, क्योंकि किसी भी शुभ कार्य की शुरुआत से पहले गणेश जी को ही याद किया जाता है। इससे साधक का वह कार्य निर्विघ्न रूप से पूर्ण होता है।</p>



<p>निज अवगुण गुनि शनि मन माहीं।<br>बालक, देखन चाहत नाहीं॥21॥<br>गिरिजा कछु मन भेद बढ़ायो।<br>उत्सव मोर, न शनि तुहि भायो॥22॥<br>कहन लगे शनि, मन सकुचाई।<br>का करिहौ, शिशु मोहि दिखाई॥23॥<br>नहिं विश्वास, उमा उर भयऊ।<br>शनि सों बालक देखन कहाऊ॥24॥<br>पडतहिं, शनि दृग कोण प्रकाशा।<br>बोलक सिर उड़ि गयो अकाशा॥25॥<br>गिरिजा गिरीं विकल हुए धरणी।<br>सो दुख दशा गयो नहीं वरणी॥26॥<br>हाहाकार मच्यो कैलाशा।<br>शनि कीन्हो लखि सुत को नाशा॥27॥<br>तुरत गरुड़ चढ़ि विष्णु सिधायो।<br>काटि चक्र सो गज शिर लाये॥28॥<br>बालक के धड़ ऊपर धारयो।<br>प्राण, मंत्र पढ़ि शंकर डारयो॥29॥<br>नाम गणेश शम्भु तब कीन्हे।<br>प्रथम पूज्य बुद्घि निधि, वन दीन्हे॥30॥</p>



<p>बुधवार के दिन भगवान गणेश की पूजा में गणेश चालीसा का पाठ जरूर करना चाहिए। इससे गणपति बप्पा प्रसन्न होते हैं और साधक पर अपनी दया-दृष्टि बनाए रखते हैं। जिससे जीवन में आने वाली हर बाधाएं दूर होती है।</p>



<p>बुद्धि परीक्षा जब शिव कीन्हा।<br>पृथ्वी कर प्रदक्षिणा लीन्हा॥31॥<br>चले षडानन, भरमि भुलाई।<br>रचे बैठ तुम बुद्घि उपाई॥32॥<br>धनि गणेश कहि शिव हिय हरषे।<br>नभ ते सुरन सुमन बहु बरसे॥33॥<br>चरण मातु-पितु के धर लीन्हें।<br>तिनके सात प्रदक्षिण कीन्हें॥34॥<br>तुम्हरी महिमा बुद्ध&#x200d;ि बड़ाई।<br>शेष सहसमुख सके न गाई॥35॥<br>मैं मतिहीन मलीन दुखारी।<br>करहुं कौन विधि विनय तुम्हारी॥36॥<br>भजत रामसुन्दर प्रभुदासा।<br>जग प्रयाग, ककरा, दुर्वासा॥37॥<br>अब प्रभु दया दीन पर कीजै।<br>अपनी भक्ति शक्ति कछु दीजै॥38॥<br>श्री गणेश यह चालीसा।<br>पाठ करै कर ध्यान॥39॥<br>नित नव मंगल गृह बसै।<br>लहे जगत सन्मान॥40॥</p>



<p><strong>दोहा</strong><br>सम्वत अपन सहस्त्र दश, ऋषि पंचमी दिनेश।<br>पूरण चालीसा भयो, मंगल मूर्ति गणेश॥</p>
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