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	<title>खतरा &#8211; Live Halchal</title>
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	<title>खतरा &#8211; Live Halchal</title>
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		<title>क्या चर्नोबिल पर मंडरा रहा है न्यूक्लियर लीकेज का खतरा?</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Live Halchal Web_Wing]]></dc:creator>
		<pubDate>Sun, 07 Dec 2025 08:15:30 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[अन्तर्राष्ट्रीय]]></category>
		<category><![CDATA[बड़ीखबर]]></category>
		<category><![CDATA[खतरा]]></category>
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					<description><![CDATA[<img width="521" height="269" src="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2025/12/fcvvvbv-large.jpg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" fetchpriority="high" srcset="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2025/12/fcvvvbv.jpg 521w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2025/12/fcvvvbv-medium.jpg 300w" sizes="(max-width: 521px) 100vw, 521px" />रूस और यूक्रेन के युद्ध के बीच एक चौंकाने वाली खबर सामने आई है। यूक्रेन के चर्नोबिल में स्थित न्यूक्लियर प्लांट का सुरक्षा कवच क्षतिग्रस्त हो गया है, जिससे रेडियोएक्टिव मटेरियल लीक होने का खतरा है। संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट में इसका खुलासा हुआ है। यूएन की परमाणु निगरानी करने वाली संस्था अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<img width="521" height="269" src="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2025/12/fcvvvbv-large.jpg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" srcset="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2025/12/fcvvvbv.jpg 521w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2025/12/fcvvvbv-medium.jpg 300w" sizes="(max-width: 521px) 100vw, 521px" />
<p>रूस और यूक्रेन के युद्ध के बीच एक चौंकाने वाली खबर सामने आई है। यूक्रेन के चर्नोबिल में स्थित न्यूक्लियर प्लांट का सुरक्षा कवच क्षतिग्रस्त हो गया है, जिससे रेडियोएक्टिव मटेरियल लीक होने का खतरा है। संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट में इसका खुलासा हुआ है।</p>



<p>यूएन की परमाणु निगरानी करने वाली संस्था अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (IAEA) के अनुसार, यह चर्नोबिल में 1986 की आपदा के बाद यह सुरक्षा कवच बनाया गया था, जो रेडियोएक्टिव तरंगों को रोकने का काम करता है। हालांकि, रूस-यूक्रेन युद्ध पूरे होने के 3 साल बाद यानी इसी साल फरवरी में चर्नोबिल की शील्ड क्षतिग्रस्त हो गई है।</p>



<p><strong>UN की रिपोर्ट में खुलासा<br></strong>2019 में स्टील की यह संरचना बनकर तैयार हुई थी। मगर, IAEA ने अपने निरीक्षण में पाया कि ड्रोन अटैक के कारण शील्ड डैमेज हो गई है। वहीं, यूक्रेन ने रूस को इसका जिम्मेदार ठहराया है।</p>



<p>IAEA के महानिदेशक राफेल ग्रॉसी के अनुसार,</p>



<p><strong>फरवरी 2025 में हुआ था ड्रोन हमला<br></strong>संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट के अनुसार, 14 फरवरी को यूक्रेन ने घटना की जानकारी देते हुए कहा था कि विस्फोटक से भरा एक ड्रोन प्रोटेक्टिव शील्ड पर जा गिरा था। आग लगने के कारण शील्ड डैमेज हो गई।</p>



<p>यूक्रेन के अधिकारियों का दावा है कि वो एक रूसी ड्रोन था। हालांकि, रूस ने इन आरोपों को सिरे खारिज कर दिया है। रूस का कहना है कि उन्होंने परमाणु प्लांट पर कोई हमला नहीं किया।</p>



<p><strong>चर्नोबिल विस्फोट<br></strong>बता दें कि 26 अप्रैल 1986 को चर्नोबिल न्यूक्लियर प्लांट से एक विस्फोट हुआ था, जिसमें एक पूरा शहर तबाह हो गया था। परमाणु रेडिएशन का असर यूरोप और रूस तक देखा जा सकता था। साल 2000 में इस न्यूक्लियर प्लांट को पूरी तरह से बंद कर दिया गया था।</p>
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		<title>सीएम यादव बोले- कांग्रेस और नक्सल का कथित गठजोड़ राष्ट्रीय सुरक्षा पर बड़ा खतरा</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Live Halchal Web_Wing]]></dc:creator>
		<pubDate>Sun, 30 Nov 2025 05:48:13 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[मध्यप्रदेश]]></category>
		<category><![CDATA[राज्य]]></category>
		<category><![CDATA[खतरा]]></category>
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					<description><![CDATA[<img width="618" height="350" src="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2025/11/xz-1-large.jpg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" srcset="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2025/11/xz-1.jpg 637w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2025/11/xz-1-medium.jpg 300w" sizes="(max-width: 618px) 100vw, 618px" />भोपाल: मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कांग्रेस और नक्सलवाद के कथित गठजोड़ को राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा बताते हुए आरोप लगाया कि यूपीए सरकार के दौरान गठित राष्ट्रीय सलाहकार परिषद नक्सलवाद के खिलाफ सुरक्षा बलों की कार्रवाई को कमजोर करने का प्रयास करती रही। मुख्यमंत्री ने सोशल मीडिया पर लिखा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<img width="618" height="350" src="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2025/11/xz-1-large.jpg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" loading="lazy" srcset="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2025/11/xz-1.jpg 637w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2025/11/xz-1-medium.jpg 300w" sizes="auto, (max-width: 618px) 100vw, 618px" />
<p><strong>भोपाल:</strong> मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कांग्रेस और नक्सलवाद के कथित गठजोड़ को राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा बताते हुए आरोप लगाया कि यूपीए सरकार के दौरान गठित राष्ट्रीय सलाहकार परिषद नक्सलवाद के खिलाफ सुरक्षा बलों की कार्रवाई को कमजोर करने का प्रयास करती रही। मुख्यमंत्री ने सोशल मीडिया पर लिखा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन एवं केंद्रीय गृह और सहकारिता मंत्री अमित शाह के नेतृत्व में नक्सलवाद के खिलाफ लागू जीरो-टॉलरेंस नीति के कारण स्थिति में सुधार हुआ है। उन्होंने बताया कि 2014 में नक्सल प्रभावित जिलों की संख्या 126 थी, जो अब घटकर केवल 11 रह गई है।</p>



<p>बता दें, नक्सलवाद भारत में लंबे समय से एक गंभीर आंतरिक सुरक्षा की चुनौती रहा है। विभिन्न राज्यों में नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में हिंसा, बम विस्फोट और अन्य अपराधों के मामलों के चलते केंद्र और राज्य सरकारों ने समय-समय पर सख्त कदम उठाए। 2014 के बाद मोदी सरकार ने नक्सल प्रभावित जिलों में सुरक्षा बलों की गतिविधियों को तेज किया और जीरो टॉलरेंस नीति अपनाई, जिससे प्रभावित क्षेत्रों की संख्या में उल्लेखनीय कमी आई। डॉ. मोहन यादव ने कहा कि सुरक्षा बलों की सक्रियता और केंद्र एवं राज्यों की समन्वित कार्रवाई ने नक्सलवाद के खतरों को काफी हद तक कम किया है।</p>
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		<title>विटामिन डी की कमी से पुरुषों में बढ़ जाता है प्रोस्टेट कैंसर का खतरा</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Live Halchal Web_Wing]]></dc:creator>
		<pubDate>Thu, 27 Nov 2025 04:45:51 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[जीवनशैली]]></category>
		<category><![CDATA[खतरा]]></category>
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					<description><![CDATA[<img width="618" height="338" src="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2025/11/bhn-large.jpg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" loading="lazy" srcset="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2025/11/bhn.jpg 647w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2025/11/bhn-medium.jpg 300w" sizes="auto, (max-width: 618px) 100vw, 618px" />हमारे देश की एक बड़ी आबादी विटामिन डी की कमी से जूझ रही है। एक अध्ययन के अनुसार देशभर में लगभग 45 फीसदी से अधिक लोगों में विटामिन डी कमी पाई गई है। मगर एक और स्टडी के मुताबिक पुरुषों में अगर विटामिन की कमी है तो उनमें प्रोस्टेट कैंसर का खतरा बढ़ जाता है। &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<img width="618" height="338" src="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2025/11/bhn-large.jpg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" loading="lazy" srcset="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2025/11/bhn.jpg 647w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2025/11/bhn-medium.jpg 300w" sizes="auto, (max-width: 618px) 100vw, 618px" />
<p>हमारे देश की एक बड़ी आबादी विटामिन डी की कमी से जूझ रही है। एक अध्ययन के अनुसार देशभर में लगभग 45 फीसदी से अधिक लोगों में विटामिन डी कमी पाई गई है। मगर एक और स्टडी के मुताबिक पुरुषों में अगर विटामिन की कमी है तो उनमें प्रोस्टेट कैंसर का खतरा बढ़ जाता है। इस स्टडी के मुताबिक शरीर में विटामिन डी का स्तर कम होने से प्रोस्टेट कैंसर का जोखिम और उसकी आक्रामकता काफी बढ़ जाती है।</p>



<p>शिकागो क्षेत्र के शोधकर्ताओं ने लगभग सात सौ पुरुषों पर किए गए इस अध्ययन में पाया कि जिन पुरुषों में विटामिन डी का स्तर कम था, उनमें ‘हाई ग्रेड’ या एडवांस प्रोस्टेट ट्यूमर होने की आशंका अधिक थी। यह पैटर्न यूरोपीय-अमेरिकी और अफ्रीकी-अमेरिकी दोनों समूहों में समान रूप से देखा गया। हालांकि अफ्रीकी-अमेरिकी पुरुषों में जोखिम अधिक था। उनमें न केवल कैंसर अधिक आक्रामक था, बल्कि उन्हें प्रोस्टेट कैंसर होने की आशंका भी अधिक थी। शोधकर्ताओं का कहना है कि हेल्दी विटामिन डी का लेवल बनाए रखना अब संपूर्ण स्वास्थ और संभावित रूप से कैंसर की रोकथाम के लिए बहुत जरूरी है। आइए इस लेख में इसी के बारे में विस्तार से जानते हैं।</p>



<p><strong>विटामिन डी की कमी और कैंसर का संबंध<br></strong>शोध बताते हैं कि जिन पुरुषों की त्वचा गहरी होती है, उनमें प्रोस्टेट कैंसर का खतरा अधिक होता है। इसकी वजह यह है कि गहरे रंग की त्वचा सूर्य से कम अल्ट्रावायलेट रोशनी सोख पाती है, जिससे उनके शरीर में विटामिन डी कम बनता है। विटामिन डी और कैल्शियम मिलकर प्रोस्टेट कोशिकाओं को बढ़ने से रोकते हैं और उन्हें स्वस्थ रखते हैं।</p>



<p><strong>प्रोस्टेट कैंसर के शुरुआती लक्षण<br></strong>चूंकि विटामिन डी की कमी से कैंसर आक्रामक हो सकता है, इसलिए पुरुषों को इसके शुरुआती लक्षणों को पहचानना जरूरी है। हालांकि शुरुआत में लक्षण हल्के होते हैं, लेकिन अगर आपको बार-बार पेशाब आता है (खासकर रात में), पेशाब करने में कठिनाई होती है, या पेशाब का बहाव धीमा है, तो सावधान हो जाएं। पेशाब या वीर्य में खून आना, या कूल्हे/हड्डियों में लगातार दर्द होना भी लक्षण हो सकते हैं। 50 वर्ष से अधिक उम्र के पुरुषों को ये लक्षण दिखने पर तुरंत डॉक्टर से जांच करवानी चाहिए।</p>



<p><strong>विटामिन डी बढ़ाने के सरल तरीके<br></strong>विशेषज्ञ बताते हैं कि विटामिन डी एक सुरक्षा कवच की तरह है, और इस विटामिन का लेवल मेंटेन रखना सरल है। इसके लिए आप कुछ फूड प्रोडक्ट्स को डाइट में शामिल कर सकते हैं। जैसे मछली (सैल्मन), अंडे की जर्दी, कुछ मशरूम और विटामिन डी से भरपूर डेयरी उत्पाद।मगर इसका सबसे बड़ा और प्राकृतिक स्रोत सूर्य का प्रकाश है। जब UV किरणें हमारी त्वचा पर पड़ती हैं, तो शरीर खुद ही विटामिन डी बनाना शुरू कर देता है। इसलिए रोजाना अपनी डाइट में इन चीजों को शामिल करें और धूप लें।</p>



<p><strong>सुरक्षित धूप और सप्लीमेंट्स का महत्व<br></strong>विटामिन डी के लिए सूरज की रोशनी जरूरी है, लेकिन इसका ध्यान रखें कि धूप सुरक्षित हो और आपकी त्वचा को नुकसान न पहुंचाए। विशेषज्ञों की सलाह है कि रोजाना केवल 10 से 15 मिनट तक सीधी धूप लेना ही पर्याप्त होता है, इससे त्वचा के कैंसर का खतरा नहीं बढ़ता और विटामिन डी का स्तर बना रहता है। यदि आपका विटामिन डी स्तर बहुत कम है, या आपकी त्वचा का रंग गहरा है, तो डॉक्टर की सलाह लेकर विटामिन डी सप्लीमेंट्स लेना एक अच्छा और समझदारी भरा उपाय है।</p>
]]></content:encoded>
					
		
		
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		<item>
		<title>दिल्ली-NCR में प्रदूषण की मार&#8230; सांसों पर मंडरा रहा बड़ा खतरा</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Live Halchal Web_Wing]]></dc:creator>
		<pubDate>Sun, 23 Nov 2025 05:35:42 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[दिल्ली]]></category>
		<category><![CDATA[राज्य]]></category>
		<category><![CDATA[खतरा]]></category>
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					<description><![CDATA[<img width="618" height="395" src="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2025/11/xsdz-large.jpg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" loading="lazy" srcset="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2025/11/xsdz.jpg 673w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2025/11/xsdz-medium.jpg 300w" sizes="auto, (max-width: 618px) 100vw, 618px" />दिल्ली-एनसीआर में वायु प्रदूषण का संकट बना हुआ है, जिससे लोगों की सांसों पर खतरा मंडरा रहा है। दिल्ली में आज भी हवा की गुणवत्ता गंभीर श्रेणी में दर्ज की गई है। केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) के सुबह सात बजे के ताजा आंकड़ों के अनुसार, सोमवार सुबह राजधानी के अधिकांश इलाकों में एयर क्वॉलिटी &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<img width="618" height="395" src="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2025/11/xsdz-large.jpg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" loading="lazy" srcset="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2025/11/xsdz.jpg 673w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2025/11/xsdz-medium.jpg 300w" sizes="auto, (max-width: 618px) 100vw, 618px" />
<p>दिल्ली-एनसीआर में वायु प्रदूषण का संकट बना हुआ है, जिससे लोगों की सांसों पर खतरा मंडरा रहा है। दिल्ली में आज भी हवा की गुणवत्ता गंभीर श्रेणी में दर्ज की गई है। केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) के सुबह सात बजे के ताजा आंकड़ों के अनुसार, सोमवार सुबह राजधानी के अधिकांश इलाकों में एयर क्वॉलिटी इंडेक्स (AQI) 400 के पार दर्ज हुआ। नोएडा-गाजियाबाद में भी प्रदूषण का स्तर बढ़ा हुआ है।</p>



<p>आनंद विहार में एक्यूआई 429 दर्ज किया गया, जबकि अशोक विहार में यह स्तर 420 रहा। आया नगर में एक्यूआई 339 मापा गया। बवाना में प्रदूषण स्तर 432, बुराड़ी में 402, और डीटीयू क्षेत्र में 399 दर्ज किया गया। द्वारका का AQI 386 और आईटीओ का 388 रहा।</p>



<p>जहांगीरपुरी में प्रदूषण का स्तर बेहद चिंताजनक रहा, जहां एक्यूआई 437 दर्ज किया गया। मुंडका में यह 413, नजफगढ़ में 338, पंजाबी बाग में 412 और रोहिणी में 438 तक पहुंच गया। आरके पुरम में एक्यूआई 396 जबकि वजीरपुर में यह राजधानी के सबसे खराब स्तरों में शामिल 448 दर्ज किया गया। कुल मिलाकर, दिल्ली के अधिकांश इलाकों में हवा &#8216;गंभीर&#8217; श्रेणी में बनी हुई है, जिससे आम जनता के स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ने की आशंका बढ़ गई है।</p>



<p><strong>गाजियाबाद में भी 400 पार पहुंची एक्यूआई<br></strong>गाजियाबाद में भी एक्यूआई 400 के पार पहुंच गया है। केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) के अनुसार, लोनी में 464 एक्यूआई दर्ज किया गया है। संजय नगर में 389 और इंदिरापुरम में एक्यूआई 421 दर्ज किया।</p>



<p><strong>नोएडा का एक्यूआई भी 400 से ज्यादा<br></strong>नोएडा में भी कई इलाकों में 400 से ज्यादा एक्यूआई पहुंच गया है। केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) के अनुसार, सेक्टर 125 में 436, सेक्टर 1 इलाके में 388 और सेक्टर 62 इलाके में 370, सेक्टर 116 इलाके में 388 एक्यूआई दर्ज किया गया है।</p>



<p><strong>गुरुग्राम में इतना दर्ज किया गया एक्यूआई<br></strong>केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) के अनुसार, गुरुग्राम के एनआईएसई ग्वाल पहाड़ी में 325 एक्यूआई दर्ज किया गया है। सेक्टर 51 इलाके में 324, टेरी ग्राम में 212, विकास सदन में 287 एक्यूआई दर्ज किया गया है।</p>



<p><strong>फरीदाबाद का एक्यूआई<br></strong>केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) के अनुसार, फरीदाबाद के सेक्टर 30 में एक्यूआई 197, न्यू इंडस्ट्रियल टाउन में 270 और सेक्टर 11 में 218 दर्ज किया गया।</p>



<p><strong>शनिवार को ऐसा रहा हाल<br></strong>राजधानी में सुस्त पड़ी हवा की गति व स्थानीय कारक फिजा में लगातार पीएम2.5 का जहर घोल रहे हैं। शनिवार को हवा बेहद खराब श्रेणी में रही। सुबह की शुरुआत धुंध और हल्के कोहरे से हुई। वहीं, आसमान में स्मॉग की चादर भी दिखाई दी। ऐसे में दृश्यता भी कम रही। लोग मास्क पहने नजर आए। साथ ही, सांस के मरीजों को परेशानी का सामना करना पड़ा। शुक्रवार की तुलना में शनिवार को छह सूचकांक की वृद्धि दर्ज की गई। वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 370 दर्ज किया गया। दूसरी ओर, एनसीआर में गाजियाबाद की हवा सबसे अधिक प्रदूषित रही। यहां एक्यूआई 434 दर्ज किया गया, यह गंभीर श्रेणी है। वहीं, ग्रेनो में 364, नोएडा में 394 और गुरुग्राम में 286 एक्यूआई दर्ज किया गया। फरीदाबाद की हवा सबसे साफ रही। यहां सूचकांक 233 दर्ज किया गया। यह हवा की खराब श्रेणी है।</p>



<p>दिल्ली में वायु गुणवत्ता प्रबंधन के लिए निर्णय सहायता प्रणाली के अनुसार, वाहन से होने वाला प्रदूषण 14.95 फीसदी रहा। इसके अलावा, पराली जलाने से होने वाला प्रदूषण 2.85, निर्माण गतिविधियां से होने वाला 2.24 और कूड़ा जलाने की भागीदारी 1.40 फीसदी रही। सीपीसीबी के अनुसार, शनिवार को हवा उत्तर दिशा से पांच किलोमीटर प्रतिघंटे के गति से चली। वहीं, अनुमानित अधिकतम मिश्रण गहराई 1800 मीटर रही। इसके अलावा वेंटिलेशन इंडेक्स 8500 मीटर प्रति वर्ग सेकंड रहा। दूसरी ओर, शाम चार बजे हवा में पीएम10 की मात्रा 336.6 और पीएम2.5 की मात्रा 196.7 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर दर्ज की गई।</p>



<p>वहीं, केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) का पूर्वानुमान है कि मंगलवार तक हवा बेहद खराब श्रेणी में बरकरार रहेगी। सीपीसीबी के अनुसार, राजधानी के कई मॉनिटरिंग स्टेशनों पर हवा गंभीर और कई में बेहद खराब में रिकॉर्ड की गई।</p>
]]></content:encoded>
					
		
		
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		<title>उत्तर भारत में बच्चों में एक नए इन्फेक्शन का खतरा</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Live Halchal Web_Wing]]></dc:creator>
		<pubDate>Sat, 01 Nov 2025 04:54:48 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[जीवनशैली]]></category>
		<category><![CDATA[खतरा]]></category>
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					<description><![CDATA[<img width="618" height="346" src="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2025/11/Capture-large.jpg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" loading="lazy" srcset="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2025/11/Capture.jpg 685w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2025/11/Capture-medium.jpg 300w" sizes="auto, (max-width: 618px) 100vw, 618px" />काली खांसी (हूपिंग कफ) और लंबे समय से खांसी से पीड़ित मरीजों के लिए एक नई चिंता उभरकर सामने आई है। पोस्ट ग्रेजुएट इंस्टीट्यूट आफ मेडिकल एजुकेशन एंड रिसर्च (पीजीआइ) के किए गए शोध में यह पता चला है कि उत्तर भारत में तेजी से फैल रहा नया बैक्टीरिया, बोर्डेटेला होल्मसी, अब काली खांसी के &#8230;]]></description>
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<p>काली खांसी (हूपिंग कफ) और लंबे समय से खांसी से पीड़ित मरीजों के लिए एक नई चिंता उभरकर सामने आई है। पोस्ट ग्रेजुएट इंस्टीट्यूट आफ मेडिकल एजुकेशन एंड रिसर्च (पीजीआइ) के किए गए शोध में यह पता चला है कि उत्तर भारत में तेजी से फैल रहा नया बैक्टीरिया, बोर्डेटेला होल्मसी, अब काली खांसी के समान लक्षण उत्पन्न कर रहा है । यह संक्रमण विशेष रूप से पांच से दस वर्ष के बच्चों में फैल रहा है और इसके नियंत्रण में कठिनाई आ रही है।</p>



<p>पीजीआइ के मेडिकल माइक्रोबायोलाजी विभाग के डॉ. विकास गौतम ने बताया कि उनकी टीम ने 2019 से 2023 के बीच 935 संदिग्ध काली खांसी के मामलों का अध्ययन किया। इस शोध में पाया गया कि लगभग 37 प्रतिशत मरीजों में संक्रमण का कारण नया जीवाणु बोर्डेटेला होल्मसी था, जबकि पारंपरिक काली खांसी का कारण बोर्डेटेला परट्यूसिस होता है। 2023 में सबसे अधिक मामले पांच से 10 वर्ष के बच्चों में देखे गए, जिससे यह स्पष्ट होता है कि संक्रमण का पैटर्न बदल रहा है।</p>



<p><strong>ये हैं लक्षण</strong></p>



<p>लगातार दो सप्ताह या उससे अधिक समय तक चलने वाली खांसी</p>



<p>खांसी के बाद सांस लेने में सीटी जैसी आवाज</p>



<p>थकान, कमजोरी और हल्का बुखार</p>



<p>पारंपरिक खांसी की दवाओं से राहत न मिलना</p>



<p><strong>काली खांसी के पारंपरिक मामलों में गिरावट के संकेत</strong></p>



<p>पीजीआइ द्वारा 2015 से चलाए जा रहे निगरानी कार्यक्रम में यह पाया गया कि पहले बोर्डेटेला पयूसिस संक्रमण के 15-20 प्रतिशत मामले मिलते थे, जो अब घटकर दो से पांच प्रतिशत तक रह गए हैं। इसके विपरीत, बोर्डेटेला होल्मसी के मामलों में वृद्धि हो रही है। पीजीआइ के विशेषज्ञों का मानना है कि यह बदलाव संक्रमण की नई प्रवृत्ति की ओर इशारा करता है, जो भविष्य में स्वास्थ्य के लिए चुनौती बन सकता है।</p>



<p>बोर्डेटेला होल्मसी के वारे में यह एक जीवाणु है जो सांस संबंधी संक्रमण उत्पन्न करता है और इसके लक्षण काली खांसी से काफी मेल खाते हैं। पहले इसे दुर्लभ माना जाता था, लेकिन अब भारत सहित कई देशों में इसके मामले बढ़ रहे हैं। यह विशेष रूप से बच्चों और कमजोर रोग प्रतिरोधक क्षमता वाले व्यक्तियों को अधिक प्रभावित करता है।</p>



<p><strong>डाक्टरों को काली खांसी के साथ नए संक्रमण की जांच की भी जरूरत</strong></p>



<p>डाक्टरों को सलाह दी गई है कि वे काली खांसी के साथ-साथ नए संक्रमण की भी जांच करें। पीजीआइ की टीम ने सुझाव दिया है कि डाक्टरों को पारंपरिक काली खांसी की जांच तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि उनसे मिलते-जुलते संक्रमणों की पहचान और निगरानी भी करनी चाहिए। समय पर पहचान, सही जांच और उचित दवाओं से इस बीमारी को नियंत्रित किया जा सकता है।</p>
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