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	<title>कोटेश्वर महादेव मंदिर &#8211; Live Halchal</title>
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		<title>हिसार : गुजरात के कोटेश्वर महादेव मंदिर के स्वरूप में नजर आएगा सीसवाल धाम</title>
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		<pubDate>Fri, 08 Mar 2024 07:49:42 +0000</pubDate>
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<p>हिसार के आदमपुर के गांव सीसवाल में स्थापित शिव मंदिर का इतिहास महाभारत काल से जुड़ा हुआ है। आदमपुर का करीब 750 वर्ष प्राचीन ऐतिहासिक सीसवाल धाम अब जल्द ही गुजरात के कोटेश्वर महादेव मंदिर के स्वरूप में नजर आएगा। पिछले करीब चार साल से करोड़ों रुपये की लागत से शिव मंदिर का जीर्णोद्धार किया जा रहा है। जीर्णोद्धार के बाद यह मंदिर देशभर के लिए आस्था का महत्वपूर्ण केंद्र स्थापित होगा।</p>



<p>श्रद्धालुओं की अटूट आस्था का केंद्र सीसवाल धाम महाभारत काल में पांडवों द्वारा स्थापित प्राचीन ऐतिहासिक शिव मंदिर है जो समाज के लिए एक धरोहर है। मंदिर के जीर्णोद्धार के साथ ही आसपास की जगह का भी सौंदर्यीकरण करवाया जाएगा। मंदिर की भूमि पर गर्भगृह, सभाकक्ष, यज्ञशाला, पार्क आदि बनाए जाएंगे। कमेटी का प्रयास है कि करीब एक साल के भीतर ही मंदिर नए स्वरूप में नजर आए।</p>



<p>मंदिर कमेटी के प्रधान घीसाराम जैन ने बताया कि जीर्णोद्धार के लिए अयोध्या राम मंदिर के आर्किटेक्ट व कारीगरों द्वारा नक्शा तैयार किया गया है। जीर्णोद्धार के बाद मंदिर परिसर का स्वरूप बदल जाएगा। शिव मंदिर के अलावा अन्य देवी-देवताओं की मूर्तियों को भी स्थापित किया जाएगा। भीड़ को व्यवस्थित करने के लिए घुमावदार बेरिकेड्स लगाए जाएंगे। मंदिर परिसर में कितनी भी भीड़ होने पर श्रद्धालु आसानी से दर्शन कर सकेंगे। इन सबके अलावा धर्मशाला, बिजली-पानी की सुचारू व्यवस्था, जूता घर का निर्माण किया जाएगा।</p>



<p><strong>पांडवों ने स्थापित किया था शिवलिंग</strong><br>प्राचीन ऐतिहासिक शिव मंदिर में शिवलिंग की स्थापना पांडवों ने महाभारत काल के दौरान की थी। मंदिर का ऐतिहासिक एवं आध्यात्मिक महत्व इस तथ्य से साफ हो जाता है कि पुरातत्व विभाग के पास इस मंदिर का पिछले करीब 750 सालों का रिकॉर्ड उपलब्ध है। बताया जाता है कि इससे पूर्व का रिकॉर्ड स्वतंत्रता आंदोलन में जल गया था।</p>



<p>हिसार से उत्तर-पश्चिम दिशा में सिंधु घाटी की सभ्यता व मोहनजोदड़ो-हड़प्पा कालीन सभ्यता की समकालीन प्राचीन सीसवालिय सभ्यता वर्तमान गांव सीसवाल की जगह पनपी। सीसवालिय सभ्यता के कारण इस गांव का नाम सीसवाल पड़ा जो सरस्वती नदी की सहायक नदी दृश्दवंती के किनारे बसा हुआ था। भारतीय पुरातत्व विभाग की खुदाई से इस सभ्यता का पता चला। प्रसिद्ध इतिहासकार डॉ.केसी यादव के शोध पत्रों मेें इसका विस्तृत विवरण मिलता है। भिवानी के पास नौरंगाबाद में सैन्धव सभ्यता पनपी।</p>



<p>सीसवालिय लोगों की संपन्नता को देखते हुए सैन्धवों ने सीसवालिय लोगों पर आक्रमण कर दिया। हालांकि इस युद्ध में हार-जीत का वर्णन नहीं मिलता लेकिन इस युद्ध के बाद दोनों सभ्यताएं आत्मसात होकर एक हो गई तथा इसके सीसवालिय-सैन्धव सभ्यता कहा जाने लगा। सीसवाल कुरुक्षेत्र-हस्तिनापुर जितना पुराना है। करीब पांच हजार 150 साल पहले महाभारत काल में अज्ञातवास के दौरान पांडव सीसवालिय वनों में भी रहे तथा मां कुंती शिव भक्त थी। अपने कुछ समय के प्रवास के दौरान माता कुंती के आदेश पर पांडवों ने यहां शिवलिंग की स्थापना की जो वर्तमान में शिव मंदिर में मौजूद है।</p>



<p>बताया जाता है कि मंदिर के स्थान पर पहले एक फ्रांस का पेड़ हुआ करता था जहां एक संत तपस्या करते थे। तपस्यारत संत को एक बार स्वप्न में पेड़ के नीचे शिवलिंग दबा हुआ दिखाई दिया। संत ने ग्रामीणों को इसकी जानकारी दी। बाद में खुदाई करने पर 9-10 फीट लंबा शिवलिंग मिला जो पांडवों द्वारा स्थापित किया गया था। यही शिवलिंग इस मंदिर की नियति का आधार बना। इसे एक चमत्कार व दैवयोग ही कहा जाएगा कि जब मंदिर निर्माण के लिए सामग्री को लेकर चिंता की गई तो आकाशवाणी हुई कि निर्माण कार्य शुरू कर दिया जाए, सामग्री उसी वृक्ष के नीचे से मिल जाएगी। मंदिर का निर्माण वृक्ष के नीचे से मिली तमाम आवश्यक सामग्री के साथ निर्बाध गति से हुआ। शिवालय में अब तक सुरक्षित पड़ी ईंट भी उसी वृक्ष के नीचे से निकली हुई बताई जाती है।</p>



<p><strong>भारत के सबसे प्राचीन मंदिरों में से एक है सीसवाल धाम: जैन</strong><br>मंदिर कमेटी के प्रधान घीसाराम जैन का दावा है कि यह भारत के सबसे प्राचीन चार मंदिरों में से एक है। अपने दावे का आधार वे केंद्रीय पुरातत्व विभाग से मिली सूचना को बताते हैं। यह सूचना मंदिर की प्राचीनता व ऐतिहासिकता से जुड़ी बताई गई है। शिवलिंग की लंबाई करीब चार फीट है और अंदर भी इतनी ही होने का अनुमान है। ऐसे प्राकृतिक एवं असाधारण शिवलिंग कम ही देखने को मिलते हैं।</p>



<p>शिवलिंग के चारों ओर की शब्दावली एक विशेष भाषा में लिखी गई है, जो बहुत ही बारीक है और इसे सूक्ष्म आंखों से पढऩा नामुमकिन है। मंदिर के निर्माण के लिए खुदाई से ईंटें अपने आप में असाधारण हैं। जिनकी लंबाई 1.25 फीट व चौड़ाई 0.75 फीट है। इन तमाम विशिष्टताओं के चलते धार्मिक जगत में अपनी खास पहचान बना चुके इस मंदिर से जुड़े इतिहास को लिपिबद्ध करवाने की मांग शिव भक्त कई बार कर चुके हैं।</p>



<p>जैन ने बताया कि अगर इस तरफ पुरातत्व विभाग सकारात्मक कदम उठाए तो इस प्राचीन शिव नगरी का आध्यात्मिक स्वरूप शिव भक्तों के सामने आ सकेगा तथा साथ ही यह शिवालय धार्मिक पर्यटन की दृष्टि से भी सामने आ सकता है। मेला संयोजक राकेश शर्मा ने बताया कि सीसवाल का यह शिवालय अपनी कई विशेषताओं और अद्भुत वातावरण के चलते देशभर में अपनी विशिष्ट पहचान रखता है। भगवान शिव की पूजा-अर्चना करने से असीम सुख की प्राप्ति होती है। माना जाता है कि यहां मन और लगन से पूजा करने पर मनोकामना पूरी होती है। शिवरात्रि के दिन विशेष तरीके पूजा करने से अलग-अलग कामनाएं पूरी होती है। जिसके लिए सारी जानकारी मंदिर में उपलब्ध है।</p>



<p><strong>कुरुक्षेत्र के मंदिरों में शिवरात्रि की धूम</strong><br>धर्मनगरी में अल सुबह से मंदिरों में शिवरात्रि की धूम देखने को मिल रही है, जिसके चलते जिले भर में शिवभक्त मंदिरों में पहुंच कर भगवान भोलेनाथ के शिवलिंग को जल अर्पित कर पूजा अर्चना कर रहे हैं। धर्मनगरी के स्थानेश्वर मंदिर और दुख भंजन महादेव मंदिर में शिवरात्रि को लेकर मुख्य आयोजन किया गया। शिवरात्रि के उपलक्ष्य में शहर भर के मंदिरों में भी पूजा अर्चना के साथ-साथ भंडारों का आयोजन भी किया गया है। पूरा शहर शिवमय नजर आ रहा है।</p>



<p><strong>रेवाड़ी में महाशिवरात्रि के अवसर पर मंदिर में उमड़ी श्रद्धालुओं की भीड़</strong><br>रेवाड़ी के सेक्टर-1 स्थित भूतेश्वर मंदिर में शिवरात्रि के अवसर पर बड़ी संख्या में लोगों की भीड़ हर साल देखने को मिलती है। इस साल भी लोग शिवलिंग पर जलाभिषेक करने के लिए पहुंचे। इस दौरान भक्तों में भी काफी उत्साह देखने को मिला। भीड़ इतनी ज्यादा था कि मंदिर कमेटी को व्यवस्था बनाने में भी काफी मशक्कत करनी पड़ी। दरअसल, भूतेश्वर मंदिर शहर का सबसे प्रसिद्ध मंदिर है।&nbsp;</p>



<p><strong>महेंद्रगढ़ में श्रद्धालुओं ने किया मोदाश्रम के प्राचीन मंदिर में जलाभिषेक</strong><br>महेंद्रगढ़ के प्राचीन मोदाश्रम स्थित शिव मंदिर में शहर व आसपास के क्षेत्र से सुबह चार बजे से दस बजे तक करीब दो हजार श्रद्धालुओं ने भगवान भोलेनाथ का जलाभिषेक किया। सुबह से ही मंदिर में विशेष पूजा करने के लिए श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ी। मोदाश्रम सेवा समिति सदस्यों की ओर से सभी प्रकार की व्यवस्थाएं की गई। सुबह चार बजे भगवान भोलेनाथ की महा आरती के साथ कार्यक्रम का शुभारंभ किया गया। मोदाश्रम स्थित शिव मंदिर शहर का सबसे प्राचीन मंदिर है।</p>



<p>झज्जर में महाशिवरात्रि पर मंदिरो में श्रद्धालुओं की सुबह से भीड़ उमड़ी है। लोगों ने सुबह भगवान भोले शंकर पर जलाभिषेक किया। शहर में कई जगह भंडारे भी लगाए गए हैं।</p>



<p><strong>भगवान शिव की आराधना के लिए उमड़े शिवभक्त</strong><br>महाशिवरात्रि का पर्व शुक्रवार को फतेहाबाद के शहरी व ग्रामीण क्षेत्रों में श्रद्धा से मनाया गया। मंदिरों व शिवालयों में दिन भर बम-बम भोले, ओम नम: शिवाय, हर-हर महादेव के जयघोष के नारे लगते रहे। मंदिरों में सुबह 5 से ही भगवान शिव की पूजा-अर्चना शुरू हो गई। शहर के मंदिर व शिवालयों में श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ पड़ी। जिले में हजारों श्रद्धालुओं ने शिवलिंग पर जलाभिषेक किया। हरिद्वार से कांवड़ लेकर कावड़ियों ने भी जलाभिषेक कर मनोकामनाएं मांगी।&nbsp;</p>
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