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	<title>केदारनाथ हेलिकॉप्टर क्रैश &#8211; Live Halchal</title>
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	<title>केदारनाथ हेलिकॉप्टर क्रैश &#8211; Live Halchal</title>
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		<title>केदारनाथ हेलिकॉप्टर क्रैश: देवराज के लिए देवदूत बना हेली कर्मी, जाने से रोका&#8230;</title>
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		<pubDate>Wed, 18 Jun 2025 04:38:41 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[उत्तराखंड]]></category>
		<category><![CDATA[राज्य]]></category>
		<category><![CDATA[केदारनाथ हेलिकॉप्टर क्रैश]]></category>
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					<description><![CDATA[जाको राखे साइयां मार सके न कोय … यह कहावत क्यूंजा घाटी कालई गांव निवासी देवराज सिंह नेगी के लिए सही साबित हो रही है। वह 15 जून को केदारनाथ से आर्यन कंपनी के उसी हेलिकॉप्टर से अपने घर के लिए रवाना होने वाले थे, जो गौरी माई खर्क में क्रैश हो गया था। पर &#8230;]]></description>
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<p>जाको राखे साइयां मार सके न कोय … यह कहावत क्यूंजा घाटी कालई गांव निवासी देवराज सिंह नेगी के लिए सही साबित हो रही है। वह 15 जून को केदारनाथ से आर्यन कंपनी के उसी हेलिकॉप्टर से अपने घर के लिए रवाना होने वाले थे, जो गौरी माई खर्क में क्रैश हो गया था।</p>



<p>पर उन्हें हेली कंपनी के ही एक कर्मचारी ने यह कहकर रोक दिया कि तुम्हें दूसरी शटल से भेज देंगे। कुछ देर में जब देवराज को पता लगा कि हेलिकॉप्टर क्रैश हो गया है, तो उसका पूरा शरीर कांपने लगा। उसे अब भी यकीन नहीं हो रहा है कि उसका जीवन बच गया है। कहा, हेली कर्मी मेरे लिए देवदूत बनकर आया, अन्यथा कुछ भी हो सकता था।</p>



<p>कालई गांव के देवराज नेगी केदारनाथ में एक दुकान में काम करते हैं। कपाट खुलने के कुछ दिन बाद ही वह धाम पहुंचे थे और पूजन व प्रसाद सामग्री की दुकान में नौकरी करने लगे। दस जून को फिसलने से उनके हाथ में चोट लग गई थी।</p>



<p>केदारनाथ में विवेकानंद अस्पताल में जांच कराई तो कलाई की हड्डी टूटी मिली, जिस पर प्लास्टर लगा दिया गया। ऐसे में देवराज दुकान में सही से काम नहीं कर पा रहे थे। जिससे उन्होंने धाम से घर लौटने का निर्णय लिया।</p>



<p>उन्होंने एक परिचित से घर जाने के लिए हेलिकॉप्टर टिकट की बात की। उसने कहा कि वह 15 जून की सुबह पांच बजे हेलिपैड पर पहुंच जाए तो जा सकता है। उसने अपने परिजनों को भी फोन पर घर आने की बात बता दी। रविवार को तड़के 4.35 बजे ही वह हेलिपैड पर पहुंच गया।</p>



<p>करीब 5.18 बजे आर्यन हेली एविएशन का हेलिकॉप्टर हेलिपैड पर लैंड हुआ, वह जब आगे बढ़ा तो हेली कंपनी के एक कर्मचारी ने उससे कहा कि भाई तुम्हें दूसरी शटल से भेज देंगे। देवराज ने बताया कि कुछ देर बाद सूचना मिली कि हेलिकॉप्टर लापता हो गया है। इसके बाद वह पैदल मार्ग से घर के लिए निकल पड़े।</p>



<p>जब रामबाड़ा पहुंचे तो पता चला कि जिस हेलिकॉप्टर में वह बैठना चाह रहे थे, वह क्रैश हो गया और सभी मारे गए। यह सुन मेरा शरीर कांपने लगा और तेज पसीना आने से एक जगह पर बैठ गया। सच में वह हेली कर्मचारी मेरे लिए देवदूत बनकर आया, अब भी विश्वास नहीं हो रहा कि मैं सकुशल अपने घर लौट आया हूं।</p>
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		<title>केदारनाथ हेलिकॉप्टर क्रैश: बुरी तरह जले शव&#8230;घड़ी, कंगन, चेन से हुई पहचान</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Live Halchal Web_Wing]]></dc:creator>
		<pubDate>Tue, 17 Jun 2025 05:35:20 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[उत्तराखंड]]></category>
		<category><![CDATA[राज्य]]></category>
		<category><![CDATA[केदारनाथ हेलिकॉप्टर क्रैश]]></category>
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					<description><![CDATA[हेलिकॉप्टर क्रैश में मृत सात लोगों में से पांच के शव की शिनाख्त करने के लिए प्रशासन, पुलिस को कड़ी मशक्कत करनी पड़ी। परिजनों की मौजूदगी में पोस्टमार्टम किया गया। हादसे में पांच शव इस तरह जल गए थे कि घड़ी, कंगन, चेन, अंगूठी के जरिए मृतकों की पहचान की गई। पोस्टमार्टम करने वाले चिकित्सक &#8230;]]></description>
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<p>हेलिकॉप्टर क्रैश में मृत सात लोगों में से पांच के शव की शिनाख्त करने के लिए प्रशासन, पुलिस को कड़ी मशक्कत करनी पड़ी। परिजनों की मौजूदगी में पोस्टमार्टम किया गया। हादसे में पांच शव इस तरह जल गए थे कि घड़ी, कंगन, चेन, अंगूठी के जरिए मृतकों की पहचान की गई। पोस्टमार्टम करने वाले चिकित्सक भी हैरान शव देकर हैरान थे।</p>



<p>बीते 15 जून को केदारनाथ से गुप्तकाशी के लिए उड़ान भरने वाला आर्यन हेली कंपनी का हेलिकॉप्टर क्रैश हो गया था। हादसे में पायलट लेफ्टिनेंट राजवीर सिंह चौहान, नन्हीं काशी, राजकुमार सुरेश जयसवाल, श्रद्धा जयसवाल, तुष्टि सिंह, विनोद देवी और विक्रम सिंह की मौत हो गई थी। रेस्क्यू दल ने सभी शव शाम तक जिला अस्पताल रुद्रप्रयाग पहुंचा दिए थे। शव इतनी बुरी तरह जले हुए थे कि पहचान करना प्रशासन, पुलिस और मेडिकल टीम के साथ परिजनों के लिए भी मुश्किल हो गया था। एक-एक शव को काफी देर तक निहारने के बाद पहचान हुई। पायलट लेफ्टिनेंट कर्नल राजवीर सिंह चौहान की पहचान उनकी घड़ी से हो पाई।</p>



<p>महाराष्ट्र के राजकुमार जयसवाल और उनकी पत्नी श्रद्धा की पहचान गले की चेन से हुई। वहीं, श्रीबदरीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति के कर्मचारी विक्रम सिंह रावत की पहचान कमर पर बंधी कपड़े की बेल्ट से हुई।</p>



<p><strong>तीन सदस्यीय चिकित्सकीय दल ने किया पोस्टमार्टम</strong><br>जिला अस्पताल रुद्रप्रयाग के वरिष्ठ चिकित्सक व पैथोलॉजिस्ट डाॅ. मनीष कुमार के नेतृत्व में तीन सदस्यीय चिकित्सकीय दल ने शवों का पोस्टमार्टम किया। डाॅ. मनीष कुमार के अनुसार दो शव ही ऐसे थे जिनकी आसानी से पहचान हो सकी। जबकि अन्य पांच शवों की शिनाख्त परिजनों ने उनके फोटो को सामने रखकर उनके हाथ, गले, कलाई में पहनी घड़ी, कंगन, चेन और अंगूठी के जरिए की।</p>



<p><strong>मौत के बाद भी दुलार पाती रही काशी</strong><br>नन्हीं काशी मौत के बाद भी सबका दुलार पाती रही। अस्पताल में काशी के शव को बहुत सुरक्षित तरीके से रखा गया था। प्रशासन, पुलिस और चिकित्सक भी बार-बार जानकारी ले रहे थे। वहीं रविवार को देर शाम ही जिलाधिकारी सौरभ गहरवार जिला चिकित्सालय पहुंच गए थे।</p>



<p><strong>नहीं बोल पा रहे थे परिजन</strong><br>हादसे में जान गंवाने वाले यात्रियों के परिजन की आंखें रो-रोकर सूख चुकी थीं। वह जब, प्रशासन और पुलिस के अधिकारियों से बात भी कर रहे थे तो उनके होंठ कंपकपा रहे थे। पायलट लेफ्टिनेंट कर्नल राजवीर सिंह चौहान के भाई और जेठू यहां पहुंचे। महाराष्ट्र निवासी राजकुमार जयसवाल और श्रद्धा के भाई भी सोमवार को पूर्वाह्न तक रुद्रप्रयाग पहुंच गएथे।</p>



<p><strong>1800 से अधिक टिकट रद्द</strong><br>केदारनाथ के लिए हेलिकॉप्टर सेवा दो दिन के लिए बंद होने से करीब 1800 से अधिक टिकट रद्द हो गई जिस कारण ज्यादातर यात्री बैरंग घरों को लौट रहे हैं। वहीं, कुछ पैदल मार्ग से केदारनाथ के लिए रवाना हो गए। जिन कंपनियों की हेली सेवा बंद रही उन यात्रियों के टिकट का किराया रिफंड किया जा रहा है। इस वर्ष कपाट खुलने के बाद से अभी तक खराब मौसम और अन्य कारणों से हजारों टिकट रद्द हो चुके हैं। केदारनाथ यात्रा के हेलिकॉप्टर सेवा नोडल अधिकारी राहुल चौबे ने बताया कि हेलिकॉप्टर क्रैश होने के बाद दो दिन लिए हेलिकॉप्टर सेवा बंद की गई थी।</p>
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		<title>केदारनाथ हेलिकॉप्टर क्रैश: काल बनकर आया कोहरा…फिर साफ हो गया</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Live Halchal Web_Wing]]></dc:creator>
		<pubDate>Mon, 16 Jun 2025 05:28:44 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[उत्तराखंड]]></category>
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		<category><![CDATA[केदारनाथ हेलिकॉप्टर क्रैश]]></category>
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					<description><![CDATA[कोहरा काल बनकर आया और हेलिकॉप्टर के गिरते ही कुछ समय में साफ हो गया, तब तक सब कुछ खत्म हो चुका था। हमसे बस बीस मीटर की दूरी पर हेलिकॉप्टर गिरा, जो आग से धू-धूकर जल रहा था। हमने घटना के बारे में ठेकेदार को बताया तो उसने अन्य को बताया होगा। यह शब्द &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[
<p>कोहरा काल बनकर आया और हेलिकॉप्टर के गिरते ही कुछ समय में साफ हो गया, तब तक सब कुछ खत्म हो चुका था। हमसे बस बीस मीटर की दूरी पर हेलिकॉप्टर गिरा, जो आग से धू-धूकर जल रहा था। हमने घटना के बारे में ठेकेदार को बताया तो उसने अन्य को बताया होगा। यह शब्द अपनी आंखों से हेलिकॉप्टर को क्रैश होता देख चुकीं नेपाली मूल की शर्मिला और उसकी बहन संजू के हैं।</p>



<p>गौरीकुंड में रहने वालीं दोनों महिलाएं अन्य स्थानीय महिलाओं के साथ रविवार को सुबह 4 बजे गौरी माई खर्क के लिए निकल गईं थी। वह केदारनाथ यात्रा में संचालित घोड़ा-खच्चरों के लिए घास काटने का काम करती हैं।</p>



<p>शर्मिला ने बताया कि वह 5 बजे तक गौरी माई खर्क पहुंच गईं थीं, तब आसमान में बादल छाये हुए थे, पर कोहरा नहीं था। दूर-दूर तक साफ नजर आ रहा था। कुछ ही देर में एक हेलिकॉप्टर जैसे ही उस क्षेत्र में उड़ान भरता हुआ पहुंचा, अचानक घना कोहरा छा गया।</p>



<p>कोहरे की वजह से हेलिकॉप्टर थोड़ा मुड़ा और पीछे की तरफ गया और फिर थोड़ा नीचे आकर आगे बढ़ने लगा, जिससे वह एक ऊंचे पेड़ पर टकराकर सीधे जमीन पर गिर गया। हेलिकॉप्टर के नीचे गिरते ही उसमें आग लग गई। आग की लपटें इतनी भयावह थीं कि वह धू-धूकर जलने लगा।</p>



<p>शर्मिला ने बताया कि जब हम मौके के आसपास पहुंचे तो वहां एक बच्ची गिरी हुई थी, जो जिंदा नहीं थी। संभवत: बच्ची हेलिकॉप्टर से गिरकर जमीन में बड़े पत्थर से टकरा गई, जिससे उसकी मौत हो गई।</p>



<p>हादसा इतना भयावह था कि आग की लपटों के बीच से कुछ सुनाई नहीं दे रहा था। दोनों महिलाओं ने घटना की जानकारी फोन पर ठेकेदार को दी। इसके बाद ठेकेदार ने अन्य लोगों के माध्यम से जिला आपदा कंट्रोल रूम को सूचना दी।</p>
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