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	<title>केंद्र सरकार ने Twitter को दी चेतावनी : किसान आंदोलन से जुड़े ट्वीट्स को ब्लॉक नहीं किया तो उसके खिलाफ क्रिमिनल कार्रवाई की जाएगी &#8211; Live Halchal</title>
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		<title>केंद्र सरकार ने Twitter को दी चेतावनी : किसान आंदोलन से जुड़े ट्वीट्स को ब्लॉक नहीं किया तो उसके खिलाफ क्रिमिनल कार्रवाई की जाएगी</title>
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		<pubDate>Fri, 05 Feb 2021 12:22:19 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[टेक्नोलॉजी]]></category>
		<category><![CDATA[केंद्र सरकार ने Twitter को दी चेतावनी : किसान आंदोलन से जुड़े ट्वीट्स को ब्लॉक नहीं किया तो उसके खिलाफ क्रिमिनल कार्रवाई की जाएगी]]></category>
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					<description><![CDATA[किसान आंदोलन को लेकर सोशल मीडिया पर जंग छिड़ी हुई है. पिछले दिनों सरकार ने माइक्रो ब्लॉगिंग साइट ट्विटर से कहा था कि वह कुछ अकाउंट और ट्वीट्स को अपने प्लैटफॉर्म से हटाए. आदेश के मुताबिक, कंपनी ने इन अकाउंट्स और ट्वीट्स को ब्लॉक कर दिया. ट्विटर ने सरकार से परमिशन मिले बगैर उस कंटेट &#8230;]]></description>
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<p>किसान आंदोलन को लेकर सोशल मीडिया पर जंग छिड़ी हुई है. पिछले दिनों सरकार ने माइक्रो ब्लॉगिंग साइट ट्विटर से कहा था कि वह कुछ अकाउंट और ट्वीट्स को अपने प्लैटफॉर्म से हटाए. आदेश के मुताबिक, कंपनी ने इन अकाउंट्स और ट्वीट्स को ब्लॉक कर दिया. ट्विटर ने सरकार से परमिशन मिले बगैर उस कंटेट को दोबारा एक्टिव कर दिया है. कंपनी के इस फैसले के कारण अब कंपनी और सरकार के बीच कानूनी रार शुरू हो गई है.</p>



<figure class="wp-block-image size-large is-resized"><img fetchpriority="high" decoding="async" src="http://www.livehalchal.com/wp-content/uploads/2021/02/image-53.png" alt="" class="wp-image-417779" width="700" height="381"/></figure>



<p>सरकार ने Twitter को साफ-साफ कहा है कि अगर उसने अपने प्लैटफॉर्म से ऐसे ट्वीट्स को ब्लॉक नहीं किया तो उसके खिलाफ क्रिमिनल कार्रवाई की जाएगी. सरकार का कहना है कि ऐसे ट्वीट से देश के भीतर अस्थिरता पैदा हो सकती है. यह माहौल को बिगाड़ने और उकसाने वाला है. सरकार की दलील है कि ट्विटर समेत सभी सोशल मीडिया प्लैटफॉर्म इंफॉर्मेशन टेक्नोलॉजी एक्ट के अंतर्गत आते हैं. इस कानून के तहत अगर कोई कंटेट सामाजिक सौहार्द्र को बिगाड़ने वाला है तो कंपनी को उसे अपने प्लैटफॉर्म से हटाना होगा.</p>



<p>भारत में इसको लेकर जो कानून है उसके मुताबिक, अगर कोई कोर्ट या एनफोर्समेंट एजेंसी ऐसे किसी पोस्ट को हटाने का निर्देश देता है तो सोशल मीडिया प्लैटफॉर्म को इस आदेश को मानना होगा. नियम मान लेने की स्थिति में कंपनी किसी भी तरह के परिणाम के लिए जिम्मेदार नहीं होगी. इंफॉर्मेशन टेक्नोलॉजी एक्ट के सेक्शन 69A के तहत सरकार को यह अधिकार है कि वह सोशल मीडिया प्लैटफॉर्म को ऐसे कंटेट को ब्लॉक करने का आदेश दे, जिससे आम जनता इस कंटेट को एक्सेस नहीं कर सके. अगर कोई इस आदेश का पालन नहीं करता है तो उसे सात साल तक की जेल हो सकती है. इसके अलावा जुर्माना भी लगाया जा सकता है.</p>



<p>ट्विटर का कहना है कि उसने 257 अकाउंट को इसलिए री-स्टोर किया, क्योंकि इनकी तरफ से जो ट्वीट्स किए गए थे वो फ्री स्पीच के अंतर्गत आते हैं और यह न्यूज के लिहाज से काफी अहम हैं. ट्विटर ने अपने सर्विस टर्म को कोट करते हुए कहा है कि वह एक सोशल ब्रॉडकास्ट नेटवर्क है जो अपने यूजर्स और ऑर्गनाइजेशन को अपनी बात दुनिया के सामने रखने का मौका देता है. यह अलग-अलग वर्ग के आवाजों को खुली छूट मिली हुई है. वे अपने विचार, अपनी राय और अपना नजरिया व्यक्त करने के लिए पूरी तरह स्वतंत्र हैं. अगर कोई कंटेट ट्विटर के रूल्स की अवहेलना नहीं करता है तो यूजर्स अपने हैंडल से कोई भी बात सामने रख सकता है.</p>



<p>इसके जरिए ट्विटर यह कहने की कोशिश कर रहा है कि वह केवल उसी कंटेट को अपने प्लैटफॉर्म पर ब्लॉक करेगा जो उसके टर्म एंड कंडिशन के तहत नहीं आते हैं. इस तरह कंपनी किसी कंटेट को ब्लॉक करने और अन-ब्लॉक करने को लेकर अपने ही नियमों में उलझा हुआ लगता है. दूसरी तरफ जब तक ट्विटर भारत में अपना कारोबार कर रही है, उसके लिए यहां के घरेलू कानून को मानना जरूरी है. अगर कंपनी को एनफोर्समेंट अथॉरिटी के किसी आदेश से परहेज है तो वह इसके खिलाफ कोर्ट का दरवाजा खटखटा सकती है. कंपनी के पास यह अधिकार नहीं है कि वह सरकार के आदेश की अनदेखी करे और कंटेट को लेकर स्वयं फैसला ले.</p>



<p>भारत में बोलने की आजादी (right to free speech) के अधिकार की बात करें तो यह पूर्ण नहीं है. इसके साथ कुछ कंडिशन अप्लाइड (reasonable restrictions) हैं. देश के हर नागरिक को फ्रीडम ऑफ स्पीच यानी अपनी बात रखने की आजादी है, लेकिन वह किसी को बदनाम करने वाला, किसी को अपमान करने वाला, कोर्ट की मर्यादा को ठेस पहुंचाना वाला या फिर देशहित की सुरक्षा के साथ समझौता करने वाला नहीं हो सकता है.</p>



<p>अगर यह मामला जल्द नहीं सुलझता है तो संभव है कि अदालत को ही इसको लेकर फैसला करना पड़े. अगर यह मामला कोर्ट पहुंचता है तो मुख्य सवाल यह होगा कि क्या वर्तमान कानून के तहत सोशल मीडिया प्लैटफॉर्म सरकार के आदेशों का पालन करने के लिए पूरी तरह बाध्य हैं या नहीं. ये भी संभव है कि कोर्ट फ्रीडम ऑफ स्पीच की लिमिटेशन क्या होगी, खासकर सोशल मीडिया पर, उसकी नई परिभाषा बताए. इस दौरान यह भी एक अहम सवाल होगा कि आखिर फ्री स्पीच को कौन परिभाषित करेगा. क्या यह मामला सरकार का है या फिर कोई प्राइवेट कंपनी इसको लेकर फैसला लेगी. फिलहाल ये ऐसे विषय हैं, जिसको लेकर ब्लैक एंड व्हाइट में नियम नहीं है.</p>



<p>पिछले कुछ सालों में ट्विटर का इंटरनेशनल और डमेस्टिक पॉलिटिक्स पर गहरा असर दिख रहा है. ग्लोबल लीडर्स, कॉर्पोरेट और सरकार इसके जरिए बढ़-चढ़ कर प्रचार करती है. इसके जरिए जनता और सरकार के बीच संवाद आसान हो गया है. यहां हर वर्ग और हर विचारधारा के लोग खुलकर अपनी बातें रखतें हैं. प्लैटफॉर्म सबको बराबर मौका देता है.</p>



<p>पूरे विश्व में इसकी लोकप्रियता है. सभी देशों की सरकार और कॉर्पोरेट लीडर्स इस प्लैटफॉर्म से जुड़े हुए हैं. भारत में भी तमाम राजनीतिक दल और उन दलों के नेता, राज्य सरकारें इस प्लैटफॉर्म पर हैं. वे इसके जरिए जनता से संवाद स्थापित करते हैं और अपने कामों का प्रचार भी करते हैं. खुद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उनके कैबिनेट के तमाम मंत्री इस प्लैटफॉर्म पर उपलब्ध हैं और काफी एक्टिव भी रहते हैं. भारत में ट्विटर के करीब 18.9 मिलियन सब्सक्राइबर्स हैं और इस मामले में वह विश्व में तीसरे स्थान पर है.</p>
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