<?xml version="1.0" encoding="UTF-8"?><rss version="2.0"
	xmlns:content="http://purl.org/rss/1.0/modules/content/"
	xmlns:wfw="http://wellformedweb.org/CommentAPI/"
	xmlns:dc="http://purl.org/dc/elements/1.1/"
	xmlns:atom="http://www.w3.org/2005/Atom"
	xmlns:sy="http://purl.org/rss/1.0/modules/syndication/"
	xmlns:slash="http://purl.org/rss/1.0/modules/slash/"
	>

<channel>
	<title>काशी &#8211; Live Halchal</title>
	<atom:link href="https://livehalchal.com/tag/%E0%A4%95%E0%A4%BE%E0%A4%B6%E0%A5%80/feed" rel="self" type="application/rss+xml" />
	<link>https://livehalchal.com</link>
	<description>Latest News, Updated News, Hindi News Portal</description>
	<lastBuildDate>Tue, 18 Aug 2026 07:10:21 +0000</lastBuildDate>
	<language>en-US</language>
	<sy:updatePeriod>
	hourly	</sy:updatePeriod>
	<sy:updateFrequency>
	1	</sy:updateFrequency>
	<generator>https://wordpress.org/?v=6.9.7</generator>

<image>
	<url>https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2023/10/cropped-Live-Halchal-512-32x32.jpg</url>
	<title>काशी &#8211; Live Halchal</title>
	<link>https://livehalchal.com</link>
	<width>32</width>
	<height>32</height>
</image> 
	<item>
		<title>काशी का 1400 साल पुराना मंदिर: यहां खोजी गईं चार अदृश्य रेखाएं</title>
		<link>https://livehalchal.com/%e0%a4%95%e0%a4%be%e0%a4%b6%e0%a5%80-%e0%a4%95%e0%a4%be-1400-%e0%a4%b8%e0%a4%be%e0%a4%b2-%e0%a4%aa%e0%a5%81%e0%a4%b0%e0%a4%be%e0%a4%a8%e0%a4%be-%e0%a4%ae%e0%a4%82%e0%a4%a6%e0%a4%bf%e0%a4%b0-%e0%a4%af/681369</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Live Halchal Web_Wing]]></dc:creator>
		<pubDate>Tue, 18 Aug 2026 07:10:21 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[उत्तरप्रदेश]]></category>
		<category><![CDATA[राज्य]]></category>
		<category><![CDATA[काशी]]></category>
		<guid isPermaLink="false">https://livehalchal.com/?p=681369</guid>

					<description><![CDATA[<img width="618" height="347" src="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2026/08/uio-1.jpg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" fetchpriority="high" srcset="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2026/08/uio-1.jpg 653w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2026/08/uio-1-300x169.jpg 300w" sizes="(max-width: 618px) 100vw, 618px" />बीएचयू और अमेरिकी इतिहासकारों ने पंचक्रोशी यात्रा के पहले पड़ाव कंदवा स्थित 1400 साल प्राचीन कर्दमेश्वर महादेव मंदिर के गर्भगृह में चार अदृश्य ऊर्जा रेखाएं चिह्नित की हैं। ये ऊर्जा रेखाएं मंदिर के गर्भगृह में एक दूसरे से मिल रही हैं। इसका एक मैप भी तैयार किया गया है जिससे स्पष्ट होता है कि तीन &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<img width="618" height="347" src="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2026/08/uio-1.jpg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" srcset="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2026/08/uio-1.jpg 653w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2026/08/uio-1-300x169.jpg 300w" sizes="(max-width: 618px) 100vw, 618px" />
<p>बीएचयू और अमेरिकी इतिहासकारों ने पंचक्रोशी यात्रा के पहले पड़ाव कंदवा स्थित 1400 साल प्राचीन कर्दमेश्वर महादेव मंदिर के गर्भगृह में चार अदृश्य ऊर्जा रेखाएं चिह्नित की हैं। ये ऊर्जा रेखाएं मंदिर के गर्भगृह में एक दूसरे से मिल रही हैं। इसका एक मैप भी तैयार किया गया है जिससे स्पष्ट होता है कि तीन दिशा उत्तर, दक्षिण और पश्चिम की ओर से चार अदृश्य ऊर्जा रेखाएं आ रही हैं। वहीं, मंदिर से सटे तालाब और आसपास के इलाके को मिलाकर कुल 10 रेखाओं की मैपिंग की गई है। इस सर्वे के दौरान पंचक्रोशी के रामेश्वर और कपिलधारा में भी ऐसी ही ऊर्जा रेखा की पहचान की गई है। बताया जा रहा है कि प्राचीन काल में मंदिर निर्माण का आधार यही ऊर्जा रेखाएं थीं।</p>



<p>अमेरिका में अर्थ एनर्जी एक्सप्लोरर्स के संस्थापक माइकल ने बीएचयू के पर्यटन और कला इतिहास के विशेषज्ञों के साथ मिलकर 2025 में ये सर्वे शुरू किया। इसमें बीएचयू के पूर्व भूगोलवेत्ता प्रो. राणा पीबी सिंह के रिसर्च को आधार बनाया है। इस सर्वे में 400 साल पुरानी तकनीक डाउजिंग कॉपर रॉड्स का इस्तेमाल किया गया है। माइकल ने इस पूरे सर्वे का एक वीडियो अपनी वेबसाइट पर जारी किया है।&nbsp;</p>



<p>इसमें उन्होंने बताया है कि मंदिर के तालाब के दोनों ओर से अलग-अलग ऊर्जा मार्ग बन रहे हैं। उत्तर की रेखाएं महिला और दक्षिण की रेखाएं पुरुष ऊर्जा के रूप में हैं। एक रेखा मंदिर के पश्चिम में सड़क के पार कुएं के पास विष्णु और सूर्य मंदिर के विग्रह तक जा रही है। यह रिसर्च अभी चल रहा है।&nbsp;</p>



<p>माइकल ने पूरे विश्व में इस तरह की ऊर्जा की मैपिंग की है। उनका मानना है कि एथेंस के डेल्फी शहर से भी एक प्राचीन लाइन गुजरती है। कई विदेशी वैज्ञानिकों ने भी इसकी मैपिंग की है। 20 साल पहले प्रो. राणा पीबी सिंह ने नासा के वैज्ञानिकों के साथ इस काम को किया था।</p>



<p><strong>प्राचीन काल में मंदिर वहीं बनते थे जहां मिलती थीं ऊर्जा रेखाएं</strong><br>माइकल के साथ सर्वे कर रहे बीएचयू के डॉ. राणा प्रवीन सिंह ने बताया कि इसे पृथ्वी की ऊर्जा रेखा भी कहते हैं। हमारे ऋषि-मुनियों ने मंदिर बनाने के लिए जिन जगहों को चुना वो पहले से ही ऊर्जा स्थल थे। प्राचीन काल में मंदिर वहीं बनते थे जहां पर ऐसी ऊर्जा रेखाएं एक-दूसरे मिलती थीं। ऋषियों को इसका ज्ञान था। सर्वे के दौरान कपिलधारा में बहुत मजबूत लाइन थी। वहीं, रामेश्वर में मंदिर के पास ऊर्ज रेखा न होकर कुछ दूर मिल रही थी। लोगों का कहना था कि 50 साल पहले वहां पर एक प्राचीन मंदिर था।</p>



<p><strong>जलाभिषेक करने पर फैल रही ऊर्जा रेखा</strong><br>डॉ. राणा प्रवीन ने बताया कि कर्दमेश्वर मंदिर में आने वाली ऊर्जा रेखा को महिला और पुरुष में बांटने के पीछे का कारण यह है कि जो लाइन उत्तर की ओर से आ रही है वो गर्भगृह तक पहुंचने से पहले देवी माता के एक छोटे मंदिर से गुजरती है। वहीं, पुरुष ऊर्जा मंदिर की दीवार पर बने कर्दम ऋषि के विग्रह से गर्भगृह में प्रवेश कर रही है। ये सभी ऊर्जा की रेखाएं अरघे के पास गोल मुड़कर मंदिर के पिछले हिस्से में जाकर मिल जा रही हैं। वहीं, गर्भगृह में जब जलाभिषेक किया गया तो पता चला कि ये ऊर्जा रेखा शिवलिंग के आसपास तक पहुंच रही हैं और जल चढ़ाने वाले भक्तों को भी छू रही है।</p>



<p><strong>मंदिर का आधार ही है ये ऊर्जा</strong><br>डॉ. प्रवीन के अनुसार, आमतौर पर मंदिर जाने में अच्छा महसूस होता है इसलिए हम दर्शन करने जाते हैं। वहां पहुंचकर ऊर्जा की ये रेखाएं भक्तों को सक्रिय बनाती हैं हालांकि इस ऊर्जा को महसूस करने के लिए मन और चित्त का शांत होना भी बेहद जरूरी है। मंदिर बनने का आधार ये ऊर्जा रेखाएं ही हैं जिनका संरक्षण बेहद जरूरी है। बीएचयू में कला-इतिहास विभाग की अध्यक्ष डॉ. ज्योति रोहिल्ला ने बताया कि इन रेखाओं को चुंबकीय शक्ति भी कहा जाता है। जहां ये होती हैं वहां पर मेडिटेशन करने वालों को बहुत मदद मिलती है।</p>



<p><strong>रॉड पकड़ते ही दबाव महसूस हुआ</strong><br>सर्वे में सदस्यों को हैरानी तब हुई जब कॉपर रॉड्स लेकर वे ऊर्जा रेखा की ओर गए। वहां पहुंचते ही रॉड की दिशा उलटी मुड़ जा रही थी। कुछ सदस्यों ने कहा कि उन्हें लगा जैसे कोई रॉड पर बल लगाकर मोड़ रहा है तो वहीं कुछ को लगा कि रॉड पकड़ते ही दबाव महसूस हो रहा है। ज्यादा दिलचस्पी तब बढ़ी जब दल गर्भगृह में पहुंचा। अनुसरण करने पर देखा गया कि ये रेखाएं गर्भगृह में प्रवेश करते हुए शिवलिंग के चारों ओर घूमती भी हैं। दक्षिणी दिशा में तालाब पर चार अदृश्य लाइन और उत्तर की ओर से दो रेखाएं तालाब में हैं। उत्तर की बाकी दो रेखाएं तालाब में जाते-जाते उत्तर-पश्चिम की ओर मुड़कर सड़क के पास मंदिर में जा रही हैं।</p>



<p><strong>गर्भगृह-भू आकृतियों के बीच संबंधों का चलेगा पता</strong><br>माकइल के अनुसार, इस सर्वे के आधार पर कर्दमेश्वर महादेव मंदिर की स्थापत्य संरचना, तालाब के जलस्रोत, मंदिर के गर्भगृह और उसके आसपास की भू-आकृतियों के बीच संभावित संबंधों को समझने का प्रयास किया जा रहा है। हालांकि, डाउजिंग से पहचानी गईं इन ऊर्जा रेखाओं को आधुनिक विज्ञान में प्रमाणित भौतिक ऊर्जा-रेखाओं के रूप में स्थापित करने के लिए दूसरे प्रयोग भी किए जाने हैं। अभी ये शोध चल रहा है।</p>
]]></content:encoded>
					
		
		
			</item>
		<item>
		<title>सात नवंबर को काशी आएंगे पीएम मोदी,वंदे भारत की देंगे सौगात</title>
		<link>https://livehalchal.com/%e0%a4%b8%e0%a4%be%e0%a4%a4-%e0%a4%a8%e0%a4%b5%e0%a4%82%e0%a4%ac%e0%a4%b0-%e0%a4%95%e0%a5%8b-%e0%a4%95%e0%a4%be%e0%a4%b6%e0%a5%80-%e0%a4%86%e0%a4%8f%e0%a4%82%e0%a4%97%e0%a5%87-%e0%a4%aa%e0%a5%80/641783</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Live Halchal Web_Wing]]></dc:creator>
		<pubDate>Wed, 05 Nov 2025 05:24:50 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[उत्तरप्रदेश]]></category>
		<category><![CDATA[राज्य]]></category>
		<category><![CDATA[काशी]]></category>
		<category><![CDATA[पीएम मोदी]]></category>
		<guid isPermaLink="false">https://livehalchal.com/?p=641783</guid>

					<description><![CDATA[<img width="618" height="354" src="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2025/11/opp-large.jpg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" srcset="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2025/11/opp.jpg 680w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2025/11/opp-medium.jpg 300w" sizes="(max-width: 618px) 100vw, 618px" />प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सात नवंबर की शाम पांच बजे दो दिवसीय दौरे पर काशी पहुंचेंगे। प्रधानमंत्री विशेष विमान से लालबहादुर शास्त्री अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट बाबतपुर आएंगे, फिर हेलिकॉप्टर से बरेका जाएंगे। बरेका हेलिपैड से गेस्ट हाउस जाएंगे जहां भाजपा कार्यकर्ताओं के साथ बैठक करेंगे। सात नवंबर की रात ही प्रधानमंत्री रोपवे का ट्रायल देख सकते हैं। &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<img width="618" height="354" src="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2025/11/opp-large.jpg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" loading="lazy" srcset="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2025/11/opp.jpg 680w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2025/11/opp-medium.jpg 300w" sizes="auto, (max-width: 618px) 100vw, 618px" />
<p>प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सात नवंबर की शाम पांच बजे दो दिवसीय दौरे पर काशी पहुंचेंगे। प्रधानमंत्री विशेष विमान से लालबहादुर शास्त्री अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट बाबतपुर आएंगे, फिर हेलिकॉप्टर से बरेका जाएंगे। बरेका हेलिपैड से गेस्ट हाउस जाएंगे जहां भाजपा कार्यकर्ताओं के साथ बैठक करेंगे। सात नवंबर की रात ही प्रधानमंत्री रोपवे का ट्रायल देख सकते हैं। इसके लिए कैंट रेलवे स्टेशन के पास बने रोपवे स्टेशन पर तैयारियां चल रही हैं।</p>



<p>प्रधानमंत्री आठ नवंबर को बनारस स्टेशन से देश को चार नई वंदेभारत ट्रेन की सौगात देंगे। काशी से खजुराहो की पहली वंदेभारत ट्रेन को हरी झंडी दिखाकर रवाना करेंगे। इसी तरह लखनऊ से सहारनपुर, फिरोजपुर कैंट से नई दिल्ली और बंगलूरू से एर्नाकुलम जाने वाली वंदेभारत ट्रेन को वर्चुअल ही हरी झंडी दिखाकर रवाना करेंगे। प्रधानमंत्री बनारस रेलवे स्टेशन के बाहर खड़े बरेका के पहले रेल इंजन को भी देखेंगे।</p>



<p>प्रशासनिक और पुलिस अधिकारियों के मुताबिक, सात नवंबर की रात प्रधानमंत्री देश के पहले पब्लिक ट्रांसपोर्ट रोपवे का ट्रायल देख सकते हैं। इसकी तैयारियां कैंट रोपवे स्टेशन पर चल रही हैं। काशी विद्यापीठ और रथयात्रा रोपवे स्टेशन भी बन चुका है। गोदौलिया रोपवे स्टेशन का निर्माण चल रहा है। गोदौलिया स्टेशन बनने के बाद प्रधानमंत्री ही रोपवे परियोजना का लोकार्पण करेंगे।</p>
]]></content:encoded>
					
		
		
			</item>
		<item>
		<title>यूपी: बाबा बागेश्वर ने काशी विश्वनाथ धाम में किए दर्शन</title>
		<link>https://livehalchal.com/%e0%a4%af%e0%a5%82%e0%a4%aa%e0%a5%80-%e0%a4%ac%e0%a4%be%e0%a4%ac%e0%a4%be-%e0%a4%ac%e0%a4%be%e0%a4%97%e0%a5%87%e0%a4%b6%e0%a5%8d%e0%a4%b5%e0%a4%b0-%e0%a4%a8%e0%a5%87-%e0%a4%95%e0%a4%be%e0%a4%b6/632352</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Live Halchal Web_Wing]]></dc:creator>
		<pubDate>Sat, 13 Sep 2025 07:38:06 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[उत्तरप्रदेश]]></category>
		<category><![CDATA[राज्य]]></category>
		<category><![CDATA[काशी]]></category>
		<guid isPermaLink="false">https://livehalchal.com/?p=632352</guid>

					<description><![CDATA[<img width="395" height="410" src="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2025/09/sdxxxc-large.jpg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" loading="lazy" srcset="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2025/09/sdxxxc.jpg 395w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2025/09/sdxxxc-medium.jpg 289w" sizes="auto, (max-width: 395px) 100vw, 395px" />बागेश्वर धाम के पीठाधीश्वर पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री काशी पहुंचे। शनिवार को उन्होंने काशी विश्वनाथ मंदिर में दर्शन-पूजन किया। उनके साथ संतोष दास सतुआ बाबा उपस्थित रहे। दर्शन के बाद वे सतुआ बाबा आश्रम पहुंचे। यहां भारी संख्या में श्रद्धालु उनकी एक झलक पाने के लिए बेताब दिखे। इस दौरान पत्रकारों के कुछ सवालों पर &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<img width="395" height="410" src="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2025/09/sdxxxc-large.jpg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" loading="lazy" srcset="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2025/09/sdxxxc.jpg 395w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2025/09/sdxxxc-medium.jpg 289w" sizes="auto, (max-width: 395px) 100vw, 395px" />
<p>बागेश्वर धाम के पीठाधीश्वर पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री काशी पहुंचे। शनिवार को उन्होंने काशी विश्वनाथ मंदिर में दर्शन-पूजन किया। उनके साथ संतोष दास सतुआ बाबा उपस्थित रहे। दर्शन के बाद वे सतुआ बाबा आश्रम पहुंचे। यहां भारी संख्या में श्रद्धालु उनकी एक झलक पाने के लिए बेताब दिखे।</p>



<p>इस दौरान पत्रकारों के कुछ सवालों पर पं. धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने खुलकर अपने विचार व्यक्त किए। नेपाल में अशांति से लेकर बांग्लादेश में नरसंहार व सनातन धर्म पर कई बड़े बयान दे डाले। कहा कि भारत को नेपाल और बांग्लादेश की घटनाओं से सबक लेना चाहिए। भारत में हिंदू एकता का कार्य बहुत जरूरी है। भारत को घोषित रूप से हिन्दू राष्ट्र बनाना बेहद जरूरी है।</p>



<p>उन्होंने कहा कि मैं सात नवंबर से 16 नवंबर तक पदयात्रा कर रहा हूं ताकि भारत हिन्दू राष्ट्र बने। विश्व में शांति के लिए हिन्दू राष्ट्र ही एकमात्र रास्ता है। हिंदुत्व मानवता की एक विचारधारा है।</p>



<p>पं. धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने भगवाधारियों के राजनेता बनने के सवाल पर कहा भगवाधारी क्यों नहीं बन सकते राजनेता? उन्होंने सीएम योगी की तारीफ करते हुए कहा आई सपोर्ट, योगी बाबा, बहुत अच्छे हैं। जिसको बुरा लगे वो हमारी हवेली पर आएं।</p>



<p>पीएम की मां पर टिप्पणी को लेकर पं धीरेन्द्र शास्त्री ने कहा कि सबकी मां पूज्यनीय हैं, सबका सम्मान होना चाहिए। किसी भी मां के लिए किसी भी व्यक्ति को निंदनीय शब्द नहीं बोलने चाहिए।</p>



<p>बाबा बागेश्वर ने कहा कि मैं बिहार के गया जा रहा हूं। बिहार मेरा घर है, मैं चुनाव के लिए नहीं जा रहा हूं। पितरों के तर्पण के लिए गया जी जाना चाहिए।</p>
]]></content:encoded>
					
		
		
			</item>
		<item>
		<title>काशी में फिर होगा सर्वे, ये 18 मंदिर किए जाएंगे संरक्षित</title>
		<link>https://livehalchal.com/%e0%a4%95%e0%a4%be%e0%a4%b6%e0%a5%80-%e0%a4%ae%e0%a5%87%e0%a4%82-%e0%a4%ab%e0%a4%bf%e0%a4%b0-%e0%a4%b9%e0%a5%8b%e0%a4%97%e0%a4%be-%e0%a4%b8%e0%a4%b0%e0%a5%8d%e0%a4%b5%e0%a5%87-%e0%a4%af%e0%a5%87-18/588829</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Live Halchal Web_Wing]]></dc:creator>
		<pubDate>Thu, 07 Nov 2024 10:00:28 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[उत्तरप्रदेश]]></category>
		<category><![CDATA[राज्य]]></category>
		<category><![CDATA[काशी]]></category>
		<guid isPermaLink="false">https://livehalchal.com/?p=588829</guid>

					<description><![CDATA[<img width="618" height="350" src="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2024/11/jkbhlkj-large.png" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" loading="lazy" srcset="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2024/11/jkbhlkj.png 662w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2024/11/jkbhlkj-medium.png 300w" sizes="auto, (max-width: 618px) 100vw, 618px" />श्री काशी विश्वनाथ धाम की तर्ज पर ही विशालाक्षी कॉरिडोर का निर्माण होगा। कॉरिडोर के मार्ग में पड़ने वाले 18 मंदिरों को संरक्षित किया जाएगा। हालांकि अभी धाम से विशालाक्षी मंदिर तक जाने वाले रास्ते पर मंथन चल रहा है। सर्वे पूरा होने के बाद रिपोर्ट के आधार पर कार्ययोजना तय की जाएगी। बाबा विश्वनाथ &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<img width="618" height="350" src="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2024/11/jkbhlkj-large.png" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" loading="lazy" srcset="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2024/11/jkbhlkj.png 662w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2024/11/jkbhlkj-medium.png 300w" sizes="auto, (max-width: 618px) 100vw, 618px" />
<p>श्री काशी विश्वनाथ धाम की तर्ज पर ही विशालाक्षी कॉरिडोर का निर्माण होगा। कॉरिडोर के मार्ग में पड़ने वाले 18 मंदिरों को संरक्षित किया जाएगा। हालांकि अभी धाम से विशालाक्षी मंदिर तक जाने वाले रास्ते पर मंथन चल रहा है। सर्वे पूरा होने के बाद रिपोर्ट के आधार पर कार्ययोजना तय की जाएगी।</p>



<p>बाबा विश्वनाथ के धाम से माता विशालाक्षी मंदिर को जोड़ने की योजना जल्द ही मूर्त रूप लेगी। इसके लिए दो दौर की बैठकें हो चुकी हैं। पिछले दिनों मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भी माता विशालाक्षी के दर्शन किए थे। सर्वे टीम भी गठित कर दी गई है जो इस मार्ग में पड़ने वाले मकानों का सर्वे करेगी।</p>



<p>धाम से माता के मंदिर तक पड़ने वाले रास्ते में 18 से अधिक पौराणिक मंदिर पड़ रहे हैं। काशी विश्वनाथ धाम से विशालाक्षी मंदिर, धर्मकूप, भगवान ज्ञानेश्वर, विष्णु मूर्ति और तीर्थ कूप, बाबा विश्वनाथ के पांच मुख में से एक वैराग्येश्वर, माता विशालाक्षी शक्तिपीठ, विशालाक्षेश्वर समेत अन्य छोटे देव विग्रह हैं।&nbsp;<br><br><strong>छोटे-छोटे कई विग्रह हैं मौजूद</strong><br>विशालतीर्थ, विश्वभुजा गौरी व विश्वतीर्थ, भगवान दिवोदासेश्वर, भगवान आशा विनायक, रघुनाथेश्वर, भगवान गणेश्वर, कांचन शाख महावट वृक्ष, धर्मकूप तीर्थ, भगवान धर्मेश्वर, भगवान मदालसेश्वर, एकादश रुद्र, भगवान मोक्षेश्वर व मुक्तितीर्थ, मोक्ष लक्ष्मी समेत कई छोटे-छोटे विग्रह मौजूद हैं।</p>
]]></content:encoded>
					
		
		
			</item>
		<item>
		<title> काशी में तुलसीघाट पर डेढ़ लाख लोगों ने देखी 476 साल पुरानी नागनथैया की लीला</title>
		<link>https://livehalchal.com/%e0%a4%95%e0%a4%be%e0%a4%b6%e0%a5%80-%e0%a4%ae%e0%a5%87%e0%a4%82-%e0%a4%a4%e0%a5%81%e0%a4%b2%e0%a4%b8%e0%a5%80%e0%a4%98%e0%a4%be%e0%a4%9f-%e0%a4%aa%e0%a4%b0-%e0%a4%a1%e0%a5%87%e0%a4%a2%e0%a4%bc/588602</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Live Halchal Web_Wing]]></dc:creator>
		<pubDate>Wed, 06 Nov 2024 06:30:46 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[उत्तरप्रदेश]]></category>
		<category><![CDATA[राज्य]]></category>
		<category><![CDATA[काशी]]></category>
		<guid isPermaLink="false">https://livehalchal.com/?p=588602</guid>

					<description><![CDATA[<img width="618" height="361" src="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2024/11/८९य०८त७-large.jpg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" loading="lazy" srcset="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2024/11/८९य०८त७.jpg 629w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2024/11/८९य०८त७-medium.jpg 300w" sizes="auto, (max-width: 618px) 100vw, 618px" />बाबा विश्वनाथ की नगरी अविनाशी काशी में मंगलवार को तुलसीघाट पर नटवर की नागनथैया की लीला जीवंत हुई। भगवान श्रीकृष्ण ने सात फन और 22 फीट लंबे कालिया नाग का मर्दन किया। इस अविरल, अलौकिक और पारंपरिक क्षण को अपलक निहारने के लिए आस्थावानों का जनसैलाब उमड़ा था। डमरुओं के निनाद के बीच वृंदावन बिहारीलाल&#8230; &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<img width="618" height="361" src="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2024/11/८९य०८त७-large.jpg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" loading="lazy" srcset="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2024/11/८९य०८त७.jpg 629w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2024/11/८९य०८त७-medium.jpg 300w" sizes="auto, (max-width: 618px) 100vw, 618px" />
<p>बाबा विश्वनाथ की नगरी अविनाशी काशी में मंगलवार को तुलसीघाट पर नटवर की नागनथैया की लीला जीवंत हुई। भगवान श्रीकृष्ण ने सात फन और 22 फीट लंबे कालिया नाग का मर्दन किया। इस अविरल, अलौकिक और पारंपरिक क्षण को अपलक निहारने के लिए आस्थावानों का जनसैलाब उमड़ा था। डमरुओं के निनाद के बीच वृंदावन बिहारीलाल&#8230; और हर हर महादेव&#8230; के जयघोष गूंजते रहे।</p>



<p>लक्खा मेला में शुमार तुलसीघाट की श्रीकृष्णलीला के प्रसंग नागनथैया की 10 मिनट की लीला को देखने के लिए घाट की सीढि़यों से लेकर गंगा में बजड़ों पर लीलाप्रेमियों की भीड़ उमड़ी थी। दोपहर से ही लीला देखने के लिए लोग पहुंचने लगे। रामायणियों ने पात्रों के साथ लीला के एक-एक प्रसंग को भक्ति भाव से वाचन कर जीवंत किया। भगवान श्रीकृष्ण अपने सखाओं के साथ गेंद खेल रहे थे तभी गेंद यमुना में चली गई। भगवान श्रीकृष्ण ने कदंब के पेड़ पर चढ़कर बांसुरी बजाई और अचानक गंगा में छलांग लगा दी। </p>



<p>कदंब के पेड़ से छलांग लगाते ही हर तरफ डमरुओं के निनाद संग वृंदावन बिहारीलाल और हर हर महादेव&#8230; का जयघोष गूंज उठा। कालिया नाग का मर्दन कर उसके फन पर बांसुरी बजाते श्रीकृष्ण के दर्शन की अनूठी झांकी देख सभी भावविह्वल हो उठे। खुशी में डमरू वादन, आरती व पुष्पवर्षा होती रही। <br></p>



<p>परंपरा के अनुसार बजड़े पर काशीराज परिवार के कुंवर अनंत नारायण सिंह अपने परिवार के साथ लीला देखने पहुंचे थे। मेयर अशोक कुमार तिवारी, कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष अजय राय ने भी दर्शन किए। अखाड़ा गोस्वामी तुलसीदास के महंत प्रो. विश्वंभरनाथ मिश्र ने भगवान श्रीकृष्ण के पात्र का माल्यार्पण किया। इसके बाद अनंत नारायण सिंह का स्वागत किया।</p>



<p><strong>ये रहे पात्र व रामायणी</strong><br>श्रीकृष्ण लीला के प्रमुख पात्रों में आशुतोष चौबे (खेलने वाले श्रीकृष्ण), श्रेयांश शर्मा (यमुना में कूदने वाले श्रीकृष्ण), दिव्यांश दुबे (बलराम), कार्तिक तिवारी (राधा), कृष्णशंकर सिंह (कंस), (मोनू सिंह यशोदा), श्रवण शर्मा (सुदामा), अष्टभुजा मिश्रा (नारद मुनि), श्रेयांश शर्मा, ऋषभ तिवारी, नट्टू विश्वास सखा आदि शामिल रहे। पं. श्यामबिहारी पांडेय, राज कुमार पांडेय, रामनोहर त्रिपाठी, जेपी मिश्रा, रामदत्त तिवारी, कांचन शान्याल, संजीव त्रिपाठी की भी अहम भूमिका रही।</p>



<p><strong>कान्हा ने 4:34 बजे यमुना में लगाई छलांग</strong><br>शाम 4:22 बजे गेंद यमुना बनी गंगा में गई। भगवान श्रीकृष्ण 4:34 बजे कदंब के पेड़ पर चढ़े। 4:38 बजे पेड़ से यमुना में छलांग लगाई। 4:39 बजे कालिया नाग को नथ कर बाहर निकले। इसके बाद 10 मिनट तक भक्तों को दर्शन किए।</p>



<p><strong>22 दिनों की लीला की है परंपरा</strong><br>तुलसीदास द्वारा शुरू की गई तुलसीघाट की श्रीकृष्ण लीला 22 दिनों की होती है। इसमें भगवान कृष्ण के जन्मोत्सव से लेकर पूतना वध, कंस वध, गोवर्धन पर्वत सहित विभिन्न लीलाएं होती हैं। प्रो. विश्वंभर नाथ मिश्रा ने बताया कि इस लीला में सभी कलाकर अस्सी, भदैनी के ही होते हैं, जो सभी पात्रों को निभाते हैं।</p>
]]></content:encoded>
					
		
		
			</item>
	</channel>
</rss>
