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	<title>कालाष्टमी &#8211; Live Halchal</title>
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	<title>कालाष्टमी &#8211; Live Halchal</title>
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		<title>कालाष्टमी आज, इस विधि से करें पूजा, जानें भोग और पूजन सामग्री</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Live Halchal Web_Wing]]></dc:creator>
		<pubDate>Sat, 10 Jan 2026 04:54:18 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[अध्यात्म]]></category>
		<category><![CDATA[धर्म]]></category>
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					<description><![CDATA[<img width="618" height="511" src="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2026/01/43-7.jpg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" fetchpriority="high" srcset="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2026/01/43-7.jpg 696w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2026/01/43-7-300x248.jpg 300w" sizes="(max-width: 618px) 100vw, 618px" />हिंदू पंचांग के अनुसार, प्रत्येक महीने के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को कालाष्टमी (Kalashtami 2026) मनाई जाती है। यह दिन भगवान शिव के रौद्र स्वरूप काल भैरव को समर्पित है। इस दिन व्रत रखने से सभी तरह के भयों से मुक्ति, शत्रुओं पर विजय और बाधाओं का नाश होता है। भगवान काल भैरव को &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<img width="618" height="511" src="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2026/01/43-7.jpg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" srcset="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2026/01/43-7.jpg 696w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2026/01/43-7-300x248.jpg 300w" sizes="(max-width: 618px) 100vw, 618px" />
<p>हिंदू पंचांग के अनुसार, प्रत्येक महीने के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को कालाष्टमी (Kalashtami 2026) मनाई जाती है। यह दिन भगवान शिव के रौद्र स्वरूप काल भैरव को समर्पित है। इस दिन व्रत रखने से सभी तरह के भयों से मुक्ति, शत्रुओं पर विजय और बाधाओं का नाश होता है। भगवान काल भैरव को काशी का कोतवाल भी माना जाता है। ऐसी मान्यता है कि जो साधक कालाष्टमी के दिन पूरी श्रद्धा के साथ पूजा-पाठ करते हैं, उन्हें भैरव बाबा की कृपा मिलती है। आइए इस पर्व से जुड़ी प्रमुख बातों को जानते हैं।</p>



<p><strong>कालाष्टमी पूजन सामग्री (Puja Samagri)<br></strong>भगवान काल भैरव की तस्वीर।<br>तिल का तेल या सरसों के तेल का दीपक।<br>लाल चंदन, अक्षत, और लाल फूल।<br>काले तिल और उड़द की दाल।<br>धूप, रूई और कपूर।<br>मौली, गंगाजल और शुद्ध जल।</p>



<p><strong>पूजन विधि (Kalashtami 2026 Puja Vidhi)<br></strong>सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और साफ कपड़े धारण करें।<br>व्रत का संकल्प लेते हुए भगवान शिव और काल भैरव का ध्यान करें।<br>मंदिर में भगवान भैरव के सामने सरसों या तिल के तेल का दीपक जलाएं।<br>भैरव जी की पूजा रात के समय करना ज्यादा फलदायी माना जाता है।<br>अगर हो पाए तो भैरव प्रतिमा पर पंचामृत व जल अर्पित करें।<br>उन्हें लाल चंदन का तिलक लगाएं।<br>पूजा के दौरान “ॐ कालभैरवाय नमः” या “ॐ ह्रीं बटुकाय आपदुद्धारणाय कुरु कुरु बटुकाय ह्रीं” मंत्र का 108 बार जाप करें।<br>मंत्र जाप के बाद काल भैरव चालीसा का पाठ करें और अंत में आरती करें।</p>



<p><strong>भगवान भैरव के प्रिय भोग (Kalashtami 2026 Bhog List)<br></strong>बाबा भैरव को मीठी चीजें जैसे इमरती और जलेबी बहुत प्रिय हैं।<br>इस दिन उड़द की दाल के बड़े या पकोड़े का भोग लगाना शुभ माना जाता है।<br>कई स्थानों पर इस मौके पर दूध से बनी मिठाइयों का भी भोग लगाया जाता है।</p>



<p><strong>करें ये काम (Kalashtami 2026 Upay)<br></strong>काल भैरव का वाहन कुत्ता है। ऐसे में कालाष्टमी के दिन किसी काले कुत्ते को रोटी, दूध या बिस्किट जरूर खिलाएं। ऐसा करने से कुंडली से राहु और केतु जैसे अशुभ ग्रहों का प्रभाव भी कम होता है।</p>
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		<title>कालाष्टमी पर करें भगवान शिव की खास पूजा, नहीं परेशान करेंगे शत्रु</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Live Halchal Web_Wing]]></dc:creator>
		<pubDate>Thu, 08 Jan 2026 05:30:34 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[अध्यात्म]]></category>
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		<category><![CDATA[कालाष्टमी]]></category>
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					<description><![CDATA[<img width="618" height="447" src="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2026/01/435-2.jpg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" srcset="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2026/01/435-2.jpg 809w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2026/01/435-2-300x217.jpg 300w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2026/01/435-2-768x555.jpg 768w" sizes="(max-width: 618px) 100vw, 618px" />हिंदू पंचांग के अनुसार, हर महीने के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को कालाष्टमी का पर्व मनाया जाता है। यह दिन भगवान शिव के सबसे रौद्र और शक्तिशाली अवतार भगवान काल भैरव को समर्पित है। साल 2026 की पहली कालाष्टमी (Kalashtami 2026) 10 जनवरी को मनाई जाएगी। काल भैरव को ‘काशी का कोतवाल’ और ‘संकटमोचन’ &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<img width="618" height="447" src="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2026/01/435-2.jpg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" loading="lazy" srcset="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2026/01/435-2.jpg 809w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2026/01/435-2-300x217.jpg 300w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2026/01/435-2-768x555.jpg 768w" sizes="auto, (max-width: 618px) 100vw, 618px" />
<p>हिंदू पंचांग के अनुसार, हर महीने के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को कालाष्टमी का पर्व मनाया जाता है। यह दिन भगवान शिव के सबसे रौद्र और शक्तिशाली अवतार भगवान काल भैरव को समर्पित है। साल 2026 की पहली कालाष्टमी (Kalashtami 2026) 10 जनवरी को मनाई जाएगी। काल भैरव को ‘काशी का कोतवाल’ और ‘संकटमोचन’ के रूप में पूजा जाता है।</p>



<p>ऐसी मान्यता है कि जो व्यक्ति कालाष्टमी के दिन पूरी श्रद्धा से काल भैरव की पूजा करता है और शिव जी के 108 नामों का जप करता है, उसे जीवन में कभी भी अकाल मृत्यु भय व शत्रुओं का सामना नहीं करना पड़ता है। आइए भोलेबाबा के शक्तिशाली नामों का जप करते हैं, जो इस प्रकार हैं –</p>



<p><strong>।।भगवान शिव के 108 नाम।।<br></strong>ॐ महाकाल नमः</p>



<p>ॐ रुद्रनाथ नमः</p>



<p>ॐ भीमशंकर नमः</p>



<p>ॐ नटराज नमः</p>



<p>ॐ प्रलेयन्कार नमः</p>



<p>ॐ चंद्रमोली नमः</p>



<p>ॐ डमरूधारी नमः</p>



<p>ॐ चंद्रधारी नमः</p>



<p>ॐ भोलेनाथ नमः</p>



<p>ॐ कैलाश पति नमः</p>



<p>ॐ भूतनाथ नमः</p>



<p>ॐ नंदराज नमः</p>



<p>ॐ नन्दी की सवारी नमः</p>



<p>ॐ ज्योतिलिंग नमः</p>



<p>ॐ मलिकार्जुन नमः</p>



<p>ॐ भीमेश्वर नमः</p>



<p>ॐ विषधारी नमः</p>



<p>ॐ बम भोले नमः</p>



<p>ॐ विश्वनाथ नमः</p>



<p>ॐ अनादिदेव नमः</p>



<p>ॐ उमापति नमः</p>



<p>ॐ गोरापति नमः</p>



<p>ॐ गणपिता नमः</p>



<p>ॐ ओंकार स्वामी नमः</p>



<p>ॐ ओंकारेश्वर नमः</p>



<p>ॐ शंकर त्रिशूलधारी नमः</p>



<p>ॐ भोले बाबा नमः</p>



<p>ॐ शिवजी नमः</p>



<p>ॐ शम्भु नमः</p>



<p>ॐ नीलकंठ नमः</p>



<p>ॐ महाकालेश्वर नमः</p>



<p>ॐ त्रिपुरारी नमः</p>



<p>ॐ त्रिलोकनाथ नमः</p>



<p>ॐ त्रिनेत्रधारी नमः</p>



<p>ॐ बर्फानी बाबा नमः</p>



<p>ॐ लंकेश्वर नमः</p>



<p>ॐ अमरनाथ नमः</p>



<p>ॐ केदारनाथ नमः</p>



<p>ॐ मंगलेश्वर नमः</p>



<p>ॐ अर्धनारीश्वर नमः</p>



<p>ॐ नागार्जुन नमः</p>



<p>ॐ जटाधारी नमः</p>



<p>ॐ नीलेश्वर नमः</p>



<p>ॐ जगतपिता नमः</p>



<p>ॐ मृत्युन्जन नमः</p>



<p>ॐ नागधारी नमः</p>



<p>ॐ रामेश्वर नमः</p>



<p>ॐ गलसर्पमाला नमः</p>



<p>ॐ दीनानाथ नमः</p>



<p>ॐ सोमनाथ नमः</p>



<p>ॐ जोगी नमः</p>



<p>ॐ भंडारी बाबा नमः</p>



<p>ॐ बमलेहरी नमः</p>



<p>ॐ गोरीशंकर नमः</p>



<p>ॐ शिवाकांत नमः</p>



<p>ॐ महेश्वराए नमः</p>



<p>ॐ महेश नमः</p>



<p>ॐ संकटहारी नमः</p>



<p>ॐ महेश्वर नमः</p>



<p>ॐ रुंडमालाधारी नमः</p>



<p>ॐ जगपालनकर्ता नमः</p>



<p>ॐ पशुपति नमः</p>



<p>ॐ संगमेश्वर नमः</p>



<p>ॐ दक्षेश्वर नमः</p>



<p>ॐ घ्रेनश्वर नमः</p>



<p>ॐ मणिमहेश नमः</p>



<p>ॐ अनादी नमः</p>



<p>ॐ अमर नमः</p>



<p>ॐ आशुतोष महाराज नमः</p>



<p>ॐ विलवकेश्वर नमः</p>



<p>ॐ अचलेश्वर नमः</p>



<p>ॐ ओलोकानाथ नमः</p>



<p>ॐ आदिनाथ नमः</p>



<p>ॐ देवदेवेश्वर नमः</p>



<p>ॐ प्राणनाथ नमः</p>



<p>ॐ शिवम् नमः</p>



<p>ॐ महादानी नमः</p>



<p>ॐ शिवदानी नमः</p>



<p>ॐ अभयंकर नमः</p>



<p>ॐ पातालेश्वर नमः</p>



<p>ॐ धूधेश्वर नमः</p>



<p>ॐ सर्पधारी नमः</p>



<p>ॐ त्रिलोकिनरेश नमः</p>



<p>ॐ हठ योगी नमः</p>



<p>ॐ विश्लेश्वर नमः</p>



<p>ॐ नागाधिराज नमः</p>



<p>ॐ सर्वेश्वर नमः</p>



<p>ॐ उमाकांत नमः</p>



<p>ॐ बाबा चंद्रेश्वर नमः</p>



<p>ॐ त्रिकालदर्शी नमः</p>



<p>ॐ त्रिलोकी स्वामी नमः</p>



<p>ॐ महादेव नमः</p>



<p>ॐ गढ़शंकर नमः</p>



<p>ॐ मुक्तेश्वर नमः</p>



<p>ॐ नटेषर नमः</p>



<p>ॐ गिरजापति नमः</p>



<p>ॐ भद्रेश्वर नमः</p>



<p>ॐ त्रिपुनाशक नमः</p>



<p>ॐ निर्जेश्वर नमः</p>



<p>ॐ किरातेश्वर नमः</p>



<p>ॐ जागेश्वर नमः</p>



<p>ॐ अबधूतपति नमः</p>



<p>ॐ भीलपति नमः</p>



<p>ॐ जितनाथ नमः</p>



<p>ॐ वृषेश्वर नमः</p>



<p>ॐ भूतेश्वर नमः</p>



<p>ॐ बैजूनाथ नमः</p>



<p>ॐ नागेश्वर नमः।।</p>
]]></content:encoded>
					
		
		
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		<title>कालाष्टमी पर ऐसे करें भोलेनाथ को प्रसन्न, मिलेगा मनचाहा फल</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Live Halchal Web_Wing]]></dc:creator>
		<pubDate>Sun, 18 May 2025 04:24:19 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[अध्यात्म]]></category>
		<category><![CDATA[धर्म]]></category>
		<category><![CDATA[कालाष्टमी]]></category>
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					<description><![CDATA[<img width="542" height="342" src="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2025/05/Capture-256-large.jpg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" loading="lazy" srcset="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2025/05/Capture-256.jpg 542w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2025/05/Capture-256-medium.jpg 300w" sizes="auto, (max-width: 542px) 100vw, 542px" />ज्येष्ठ महीने की कालाष्टमी बेहद शुभ मानी जाती है। इस दिन (Kalashtami 2025) भगवान शिव के उग्र स्वरूप काल भैरव की पूजा का विधान है। वैदिक पंचांग के अनुसार इस बार कालाष्टमी 20 मई दिन मंगलवार को पड़ रही है। ऐसा माना जाता है कि इस दिन व्रत करने से सभी इच्छाओं की पू्र्ति होती &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<img width="542" height="342" src="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2025/05/Capture-256-large.jpg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" loading="lazy" srcset="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2025/05/Capture-256.jpg 542w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2025/05/Capture-256-medium.jpg 300w" sizes="auto, (max-width: 542px) 100vw, 542px" />
<p>ज्येष्ठ महीने की कालाष्टमी बेहद शुभ मानी जाती है। इस दिन (Kalashtami 2025) भगवान शिव के उग्र स्वरूप काल भैरव की पूजा का विधान है। वैदिक पंचांग के अनुसार इस बार कालाष्टमी 20 मई दिन मंगलवार को पड़ रही है। ऐसा माना जाता है कि इस दिन व्रत करने से सभी इच्छाओं की पू्र्ति होती है।</p>



<p>कालाष्टमी हर महीने कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को मनाई जाती है। इस दिन भक्त भगवान काल भैरव की पूजा करते हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन लोग व्रत और पूजा-अर्चना करते हैं। हिंदू पंचांग के अनुसार, ज्येष्ठ माह में पड़ने वाली कालाष्टमी (Kalashtami 2025) इस साल 20 मई, 2025 दिन मंगलवार को पड़ रही है। वहीं, इस दिन शिव चालीसा का पाठ बहुत शुभ माना गया है, जो इस प्रकार है।</p>



<p><strong>।।शिव चालीसा।।</strong></p>



<p><strong>॥ दोहा ॥</strong></p>



<p>जय गणेश गिरिजा सुवन,<br>मंगल मूल सुजान ।<br>कहत अयोध्यादास तुम,<br>देहु अभय वरदान ॥</p>



<p><strong>॥ चौपाई ॥</strong><br>जय गिरिजा पति दीन दयाला ।<br>सदा करत सन्तन प्रतिपाला ॥<br>भाल चन्द्रमा सोहत नीके ।<br>कानन कुण्डल नागफनी के ॥<br>अंग गौर शिर गंग बहाये ।<br>मुण्डमाल तन क्षार लगाए ॥<br>वस्त्र खाल बाघम्बर सोहे ।<br>छवि को देखि नाग मन मोहे ॥<br>मैना मातु की हवे दुलारी ।<br>बाम अंग सोहत छवि न्यारी ॥<br>कर त्रिशूल सोहत छवि भारी ।<br>करत सदा शत्रुन क्षयकारी ॥<br>नन्दि गणेश सोहै तहँ कैसे ।<br>सागर मध्य कमल हैं जैसे ॥<br>कार्तिक श्याम और गणराऊ ।<br>या छवि को कहि जात न काऊ ॥<br>देवन जबहीं जाय पुकारा ।<br>तब ही दुख प्रभु आप निवारा ॥<br>किया उपद्रव तारक भारी ।<br>देवन सब मिलि तुमहिं जुहारी ॥<br>तुरत षडानन आप पठायउ ।<br>लवनिमेष महँ मारि गिरायउ ॥<br>आप जलंधर असुर संहारा ।<br>सुयश तुम्हार विदित संसारा ॥<br>त्रिपुरासुर सन युद्ध मचाई ।<br>सबहिं कृपा कर लीन बचाई ॥<br>किया तपहिं भागीरथ भारी ।<br>पुरब प्रतिज्ञा तासु पुरारी ॥<br>दानिन महँ तुम सम कोउ नाहीं ।<br>सेवक स्तुति करत सदाहीं ॥<br>वेद नाम महिमा तव गाई।<br>अकथ अनादि भेद नहिं पाई ॥<br>प्रकटी उदधि मंथन में ज्वाला ।<br>जरत सुरासुर भए विहाला ॥<br>कीन्ही दया तहं करी सहाई ।<br>नीलकण्ठ तब नाम कहाई ॥<br>पूजन रामचन्द्र जब कीन्हा ।<br>जीत के लंक विभीषण दीन्हा ॥<br>सहस कमल में हो रहे धारी ।<br>कीन्ह परीक्षा तबहिं पुरारी ॥<br>एक कमल प्रभु राखेउ जोई ।<br>कमल नयन पूजन चहं सोई ॥<br>कठिन भक्ति देखी प्रभु शंकर ।<br>भए प्रसन्न दिए इच्छित वर ॥<br>जय जय जय अनन्त अविनाशी ।<br>करत कृपा सब के घटवासी ॥<br>दुष्ट सकल नित मोहि सतावै ।<br>भ्रमत रहौं मोहि चैन न आवै ॥<br>त्राहि त्राहि मैं नाथ पुकारो ।<br>येहि अवसर मोहि आन उबारो ॥<br>लै त्रिशूल शत्रुन को मारो ।<br>संकट से मोहि आन उबारो ॥<br>मात-पिता भ्राता सब होई ।<br>संकट में पूछत नहिं कोई ॥<br>स्वामी एक है आस तुम्हारी ।<br>आय हरहु मम संकट भारी ॥<br>धन निर्धन को देत सदा हीं ।<br>जो कोई जांचे सो फल पाहीं ॥<br>अस्तुति केहि विधि करैं तुम्हारी ।<br>क्षमहु नाथ अब चूक हमारी ॥<br>शंकर हो संकट के नाशन ।<br>मंगल कारण विघ्न विनाशन ॥<br>योगी यति मुनि ध्यान लगावैं ।<br>शारद नारद शीश नवावैं ॥<br>नमो नमो जय नमः शिवाय ।<br>सुर ब्रह्मादिक पार न पाय ॥<br>जो यह पाठ करे मन लाई ।<br>ता पर होत है शम्भु सहाई ॥<br>ॠनियां जो कोई हो अधिकारी ।<br>पाठ करे सो पावन हारी ॥<br>पुत्र हीन कर इच्छा जोई ।<br>निश्चय शिव प्रसाद तेहि होई ॥<br>पण्डित त्रयोदशी को लावे ।<br>ध्यान पूर्वक होम करावे ॥<br>त्रयोदशी व्रत करै हमेशा ।<br>ताके तन नहीं रहै कलेशा ॥<br>धूप दीप नैवेद्य चढ़ावे ।<br>शंकर सम्मुख पाठ सुनावे ॥<br>जन्म जन्म के पाप नसावे ।<br>अन्त धाम शिवपुर में पावे ॥<br>कहैं अयोध्यादास आस तुम्हारी ।<br>जानि सकल दुःख हरहु हमारी ॥</p>



<p><strong>॥ दोहा ॥</strong><br>नित्त नेम कर प्रातः ही,<br>पाठ करौं चालीसा ।<br>तुम मेरी मनोकामना,<br>पूर्ण करो जगदीश ॥<br>मगसर छठि हेमन्त ॠतु,<br>संवत चौसठ जान ।<br>अस्तुति चालीसा शिवहि,<br>पूर्ण कीन कल्याण</p>
]]></content:encoded>
					
		
		
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		<title>कालाष्टमी पर राशि अनुसार करें इन चीजों का दान</title>
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		<pubDate>Wed, 18 Dec 2024 04:31:57 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[अध्यात्म]]></category>
		<category><![CDATA[धर्म]]></category>
		<category><![CDATA[कालाष्टमी]]></category>
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										<content:encoded><![CDATA[<img width="618" height="310" src="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2024/12/Capture-532-large.jpg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" loading="lazy" srcset="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2024/12/Capture-532.jpg 670w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2024/12/Capture-532-medium.jpg 300w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2024/12/Capture-532-660x330.jpg 660w" sizes="auto, (max-width: 618px) 100vw, 618px" />
<p>पंचांग के अनुसार हर महीने के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि पर कालाष्टमी (Kalashtami 2024) का पर्व मनाया जाता है। इस दिन जातक व्रत भी करते हैं। धार्मिक मान्यता है कि इस शुभ तिथि पर भगवान काल भैरव की उपासना करने से सुख-समृद्धि में वृद्धि होती है और काल भैरव का आशीर्वाद प्राप्त होता है। इस दिन श्रद्धा अनुसार दान करने का भी विशेष महत्व है।</p>



<p>कालाष्टमी का पर्व भगवान काल भैरव को समर्पित है। पंचांग के अनुसार, पौष माह में कालाष्टमी 22 दिसंबर (Kalashtami 2024 Date) को मनाई जाएगी। इस शुभ तिथि पर भगवान काल भैरव की उपासना रात्रि में करने का विधान है। धार्मिक मान्यता है कि कालाष्टमी का व्रत सच्चे मन से करने से इंसान को सभी तरह के के संकटों से मुक्ति मिलती है और जीवन में खुशियों का आगमन होता है। अगर आप धन लाभ के योग चाहते हैं, तो कालाष्टमी के दिन राशि अनुसार दान करें। माना जाता है कि दान करने से इंसान को जीवन में अन्न और धन की कमी नहीं होती है। ऐसे में आइए जानते हैं कि कालाष्टमी पर किस राशि के जातक को किस चीज का दान करना कल्याणकारी माना जाता है।</p>



<p><strong>कालाष्टमी 2024 शुभ मुहूर्त (Kalashtami 2024 Shubh Muhurat)</strong></p>



<p>पंचांग के अनुसार, पौष माह के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि की शुरुआत 22 दिसंबर को दोपहर 02 बजकर 31 मिनट पर होगी। वहीं, इस तिथि का समापन 23 दिसंबर को शाम 05 बजकर 07 मिनट होगा। ऐसे में 22 दिसंबर को वर्ष 2024 की अंतिम कालाष्टमी मनाई जाएगी।</p>



<p><strong>राशि अनुसार दान करें<br></strong>मेष राशि के जातक कालाष्टमी के दिन लाल मिर्च, मसूर दाल और गुड़ का दान करें। इससे काल भैरव देव की कृपा प्राप्त होगी।<br>वृषभ राशि के जातक कालाष्टमी के दिन चीनी, नमक, मैदा चीजों का दान करें। इससे पितृ दोष से छुटकारा मिलता है।<br>मिथुन राशि के जातक कालाष्टमी के दिन हरी सब्जियां, हरे रंग का मौसमी फल का दान करें। इससे सभी विघ्न दूर होंगे।<br>कर्क राशि के जातक कालाष्टमी के दिन चावल, चीनी, दूध आदि चीजों का दान करें। इससे भगवान काल भैरव प्रसन्न होंगे।<br>कन्या राशि के जातक कालाष्टमी के दिन विवाहित महिलाओं को हरे रंग की चूड़ियां दान में दें। इससे वैवाहिक जीवन खुशहाल होगा।<br>तुला राशि के जातक कालाष्टमी के दिन अन्न का दान करें। इससे सभी संकट दूर होंगे।<br>धनु राशि के जातक कालाष्टमी के दिन पीले रंग के फल का दान करें। इससे देव बृहस्पति की कृपा प्राप्त होती है।<br>मकर राशि के जातक को कालाष्टमी के दिन के वस्त्र का करें। इससे धन लाभ के योग बनते हैं।<br>कुंभ राशि के जातक काल भैरव देव की कृपा पाने के लिए चमड़े के जूते और चप्पल का दान करें।<br>मीन राशि के जातक काल भैरव देव को प्रसन्न करने हेतु पीले रंग की मिठाई प्रसाद में अर्पित करें। इसके बाद लोगों में प्रसाद का वितरण करें।</p>
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		<title>आश्विन माह में कब है कालाष्टमी?</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Live Halchal Web_Wing]]></dc:creator>
		<pubDate>Tue, 03 Sep 2024 10:47:21 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[अध्यात्म]]></category>
		<category><![CDATA[धर्म]]></category>
		<category><![CDATA[कालाष्टमी]]></category>
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					<description><![CDATA[<img width="618" height="303" src="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2024/09/Capture-99-large.jpg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" loading="lazy" srcset="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2024/09/Capture-99.jpg 764w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2024/09/Capture-99-medium.jpg 300w" sizes="auto, (max-width: 618px) 100vw, 618px" />कालाष्टमी (Masik Kalashtami 2024) पर्व का विशेष महत्व है। इस दिन तंत्र विद्या सिखने वाले साधक काल भैरव देव की विशेष पूजा-अर्चना करते हैं। धार्मिक मान्यता है कि ऐसा करने से सुख-शांति और समृद्धि में वृद्धि होती है और मृत्यु लोक में सभी तरह के सुखों की प्राप्ति होती है। इसके अलावा घर में उत्पन्न &#8230;]]></description>
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<p>कालाष्टमी (Masik Kalashtami 2024) पर्व का विशेष महत्व है। इस दिन तंत्र विद्या सिखने वाले साधक काल भैरव देव की विशेष पूजा-अर्चना करते हैं। धार्मिक मान्यता है कि ऐसा करने से सुख-शांति और समृद्धि में वृद्धि होती है और मृत्यु लोक में सभी तरह के सुखों की प्राप्ति होती है। इसके अलावा घर में उत्पन्न नकारात्मक ऊर्जा दूर होती है।</p>



<p>सनातन धर्म में मासिक कालाष्टमी के त्योहार को बहुत ही शुभ माना जाता है। पंचांग के अनुसार, प्रत्येक माह के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि पर कालाष्टमी मनाई जाती है। इस खास अवसर पर भगवान शिव के रौद्र रूप काल भैरव देव की पूजा-अर्चना करने का विधान है। साथ ही साधक काल भैरव देव के निमित्त व्रत रखते हैं। आइए, आश्विन माह में पड़ने वाली कालाष्टमी (Kalashtami 2024) की डेट, शुभ मुहूर्त और पूजा विधि के बारे में जानते हैं।</p>



<p><strong>मासिक कालाष्टमी शुभ मुहूर्त</strong><br>पंचांग के अनुसार, आश्विन माह के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि की शुरुआत 24 सितंबर को दोपहर में 12 बजकर 38 मिनट पर होगी। वहीं, इस तिथि का समापन 25 सितंबर को दोपहर में 12 बजकर 10 मिनट पर होगा। ऐसे में 25 सितंबर को कालाष्टमी का पर्व मनाया जाएगा।</p>



<p><strong>मासिक कालाष्टमी पूजा विधि</strong></p>



<p>इस दिन ब्रह्म मुहूर्त में उठें और स्नान करें।<br>सूर्य देव को जल अर्पित करें।<br>चौकी पर भगवान काल भैरव की मूर्ति को विराजमान करें।<br>अब उन्हें सफेद चंदन का तिलक लगाएं।<br>दीपक जलाकर आरती करें।<br>मंत्रों का जप करें।<br>फल और मिठाई आदि चीजों का भोग लगाएं।<br>जीवन में सुख-शांति की प्राप्ति के लिए कामना करें।<br>रात्रि में भजन-कीर्तन करें।<br>अगले दिन व्रत का पारण करें।<br>श्रद्धा अनुसार दान करें।</p>



<p><strong>मासिक कालाष्टमी पूजा सामग्री</strong><br>बेलपत्र, दूध, ऋतु फल, फूल, धूप, गंगाजल, शुद्ध जल, चंदन, काला कपड़ा, अक्षत, सरसों का तेल, मिट्टी का दीपक आदि।</p>



<p><strong>न करें ये गलतियां</strong><br>कालाष्टमी के दिन किसी से लड़ाई-झगड़ा नहीं करना चाहिए।<br>मांसाहारी भोजन और शराब के सेवन से दूर रहना चाहिए।<br>किसी का अपमान नहीं करना चाहिए।<br>किसी के प्रति मन में गलत नहीं सोचना चाहिए।</p>



<p><strong>काल भैरव देव के मंत्र</strong><br>ॐ ह्रीं बटुकाय आपदुद्धारणाय कुरू कुरू बटुकाय ह्रीं।<br>ॐ ह्रीं बटुकाय आपदुद्धारणाय कुरू कुरू बटुकाय ह्रीं।<br>ॐ ह्रीं बटुक! शापम विमोचय विमोचय ह्रीं कलीं।<br>र्मध्वजं शङ्कररूपमेकं शरण्यमित्थं भुवनेषु सिद्धम् । द्विजेन्द्र पूज्यं विमलं त्रिनेत्रं श्री भैरवं तं शरणं प्रपद्ये ।।</p>
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