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		<title>मूंगफली की इस नए तरीके से खेती, करेगी किसानों को मालामाल</title>
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		<pubDate>Tue, 23 Jan 2018 06:18:23 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[नई दिल्ली। भारतीय वैज्ञानिकों ने मूंगफली की ऐसी किस्म विकसित की है जो किसानों की आमदनी बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण साबित हो सकती है। वैज्ञानिकों का कहना है कि देश के किसान कन्फेक्शनरी उत्पादों में बहुतायत में उपयोग होने वाली तेल की उच्च मात्रा युक्त मूंगफली की इस नई किस्म की खेती करके फायदा उठा सकते &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p><strong>नई दिल्ली। भारतीय वैज्ञानिकों ने मूंगफली की ऐसी किस्म विकसित की है जो किसानों की आमदनी बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण साबित हो सकती है। वैज्ञानिकों का कहना है कि देश के किसान कन्फेक्शनरी उत्पादों में बहुतायत में उपयोग होने वाली तेल की उच्च मात्रा युक्त मूंगफली की इस नई किस्म की खेती करके फायदा उठा सकते हैं। जल्दी ही मूंगफली की यह किस्म भारत में जारी की जा सकती है।<img fetchpriority="high" decoding="async" class="aligncenter size-full wp-image-110138" src="http://www.livehalchal.com/wp-content/uploads/2018/01/मूंगफली-की-खेती.jpg" alt="मूंगफली की इस नए तरीके से खेती, करेगी किसानों को मालामाल" width="800" height="600" srcset="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2018/01/मूंगफली-की-खेती.jpg 800w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2018/01/मूंगफली-की-खेती-300x225.jpg 300w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2018/01/मूंगफली-की-खेती-768x576.jpg 768w" sizes="(max-width: 800px) 100vw, 800px" /></strong></p>
<p><strong>मूंगफली की इस किस्म को हैदराबाद स्थित अंतरराष्ट्रीय फसल अनुसंधान संस्थान (इक्रीसेट) के शोधकर्ताओं ने देश के अन्य शोध संस्थानों के साथ मिलकर विकसित किया है। इसे विकसित करने वाले शोधकर्ताओं का कहना है कि यह स्पेनिश एवं वर्जिनिया गुच्छे वाली मूंगफली की प्रजाति है, जिसे भारत में खेती के लिए अनुकूलित किया गया है।</strong></p>
<h3><span style="color: #ff0000;"><strong>तेजी से बढ़ रहा बाजार</strong></span></h3>
<p><strong>कई कन्फेक्शनरी उत्पादों में मूंगफली की इस किस्म का उपयोग होता है और इसका बाजार तेजी से बढ़ रहा है। लेकिन मूंगफली की खेती करने वाले भारत के किसानों को कन्फेक्शनरी के बढ़ते बाजार का फायदा नहीं मिल पा रहा था, क्योंकि इस उद्योग में उपयोग होने वाली उच्च तेल की मात्रा युक्त मूंगफली वे मुहैया नहीं करा पा रहे थे। मूंगफली की इस किस्म की बढ़ती मांग को पूरा करने के लिए यह नई प्रजाति विकसित की गई है। शोधकर्ताओं का कहना है कि मूंगफली की इस प्रजाति की मांग काफी अधिक है और इसकी खेती करने से देश के छोटे किसानों को खासतौर पर फायदा हो सकता है।</strong></p>
<p><strong>चॉकलेट और प्रासेस्ड (प्रसंस्कृत) नाश्ते जैसे मूंगफली आधारित कन्फेक्शनरी उत्पादों के लिए कंपनियां ऑस्ट्रेलिया, अमेरिका जैसे देशों से हजारों टन मूंगफली एशियाई देशों में स्थित अपनी प्रसंस्करण इकाइयों में आयात करती हैं। आयात के खर्च और मूंगफली की बढ़ती ग्लोबल कीमतों के कारण कंपनियां अब भारत जैसे देशों में ऐसे अवसर तलाशने में जुटी हैं।</strong></p>
<h3><span style="color: #ff0000;"><strong>भारतीय जलवायु के अनुकूल है यह प्रजाति</strong></span></h3>
<p><strong>शोधकर्ताओं में शामिल इक्रीसेट की मूंगफली ब्रीडर डॉ. जेनीला के अनुसार हमने तेल की उच्च मात्रा युक्त मूंगफली की किस्म के बढ़ते बाजार की संभावनाओं को पहले ही भांप लिया था। हमारी कोशिश भारतीय किसानों द्वारा उगाई जा रही स्थानीय मूंगफली किस्मों की क्रास-ब्रीडिंग उच्च ओलीइक एसिड युक्त अमेरिकी किस्म सॉनोलिक-95आर से कराकर एक नई किस्म विकसित करके उसे बाजार में शामिल करने की थी। तेल की उच्च मात्रा युक्त मूंगफली की विकसित की गई नई किस्में इसी पहल का परिणाम हैं, जो भारतीय जलवायु दशाओं के अनुकूल होने के साथ-साथ कन्फेक्शनरी उद्योग में भी उपयोगी हो सकती हैं। </strong></p>
<p><strong>वैज्ञानिकों के अनुसार मूंगफली की इन किस्मों में सामान्य मूंगफली की अपेक्षा ऑक्सीकरण 10 गुना कम होता है, जिसके कारण इसकी सेल्फ-लाइफ दो से नौ महीने तक बढ़ जाती है। मूंगफली की यह प्रजाति अन्य किस्मों की अपेक्षा स्वादिष्ट होती है और लंबे समय तक रखे रहने से भी इसके स्वाद एवं गंध में बदलाव नहीं होता। इसमें पाए जाने वाले ओलेइक एसिड या ओमेगा-9 फैटी एसिड जैसे तत्व सेहत के लिए काफी फायदेमंद माने जाते हैं। </strong></p>
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