कनहर बराज निर्माण में देरी पर हाई कोर्ट की टिप्पणी – Live Halchal https://livehalchal.com Latest News, Updated News, Hindi News Portal Sat, 15 Feb 2020 11:43:43 +0000 en-US hourly 1 https://wordpress.org/?v=6.9.10 https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2023/10/cropped-Live-Halchal-512-32x32.jpg कनहर बराज निर्माण में देरी पर हाई कोर्ट की टिप्पणी – Live Halchal https://livehalchal.com 32 32 कनहर बराज निर्माण में देरी पर हाई कोर्ट की टिप्पणी, अपंग हो चुकी है झारखंड की नौकरशाही https://livehalchal.com/%e0%a4%95%e0%a4%a8%e0%a4%b9%e0%a4%b0-%e0%a4%ac%e0%a4%b0%e0%a4%be%e0%a4%9c-%e0%a4%a8%e0%a4%bf%e0%a4%b0%e0%a5%8d%e0%a4%ae%e0%a4%be%e0%a4%a3-%e0%a4%ae%e0%a5%87%e0%a4%82-%e0%a4%a6%e0%a5%87%e0%a4%b0/320406 Sat, 15 Feb 2020 11:43:43 +0000 http://www.livehalchal.com/?p=320406 झारखंड हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस डॉ. रवि रंजन व जस्टिस एसएन प्रसाद की अदालत में कनहर बराज के निर्माण को लेकर दाखिल जनहित याचिका पर सुनवाई हुई। दस साल बीत जाने के बाद प्रारंभिक औपचारिकता पूरी नहीं होने पर अदालत ने कड़ी नाराजगी जताई और मौखिक रूप से कहा कि इससे पता चलता है …]]>

झारखंड हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस डॉ. रवि रंजन व जस्टिस एसएन प्रसाद की अदालत में कनहर बराज के निर्माण को लेकर दाखिल जनहित याचिका पर सुनवाई हुई। दस साल बीत जाने के बाद प्रारंभिक औपचारिकता पूरी नहीं होने पर अदालत ने कड़ी नाराजगी जताई और मौखिक रूप से कहा कि इससे पता चलता है कि नौकरशाही पूरी तरह से अपंग हो गई है।

अदालत ने उक्त बात तब कही जब केंद्र सरकार की ओर से यह कहा गया कि जहां पर बराज बनाया जाना है, उस जमीन को अभी तक चिन्हित ही नहीं किया जा सका है। अदालत ने कहा कि वन विभाग करता क्या है, जब उसे यह भी नहीं पता है कि राज्य में कहां-कहां पर जंगल है? विभाग के अधिकारी सो रहे हैं, उन्हें जगाना होगा। इसके बाद अदालत ने कनहर बराज परियोजना के निर्माण के लिए सभी प्रकार की औपचारिकताएं जल्द पूरी कर निर्माण कार्य शुरू करने का निर्देश दिया।

इस संबंध में पूर्व मंत्री हेमेंद्र प्रताप देहाती की ओर से जनहित याचिका दाखिल की गई है। याचिका में गढ़वा व आसपास के क्षेत्रों में सिंचाई की सुविधा के लिए जल्द से जल्द बराज बनाने की मांग की गई है। सुनवाई के दौरान सरकार की ओर से अदालत को बताया गया कि इस परियोजना को लेकर सभी तैयारी की जा रही है। सभी वैधानिक क्लीयरेंस लिया जा रहा है। वन और पर्यावरण क्लीयरेंस की प्रक्रिया जल्द पूरी की जाएगी। इसके लिए छत्तीसगढ़ से भी बातचीत चल रही है।

वन और पर्यावरण क्लीयरेंस के लिए केंद्र सरकार को भी प्रस्ताव भेजा जाएगा। सभी क्लीयरेंस मिलने के बाद काम शुरू किया जाएगा। काम शुरू होने के बाद पांच साल में यह परियोजना पूरी हो जाएगी। इसको लेकर मुख्य सचिव ने अधिकारियों के साथ बैठक की है। इसके लिए केंद्र सरकार से राशि मांगी गई है।

इस पर केंद्र सरकार की ओर से बताया गया कि वन एवं पर्यावरण क्लीयरेंस मिलने के बाद ही उक्त राशि दी जा सकती है। इसकी जानकारी राज्य सरकार को भी दे दी गई है। सरकार के क्लीयरेंस के प्रस्ताव पर केंद्र सरकार अविलंब निर्णय लेगी। इसके बाद अदालत ने सुनवाई एक मई को निर्धारित करते हुए सरकार को प्रगति रिपोर्ट पेश करने का निर्देश दिया।

क्यों लटका है मामला

झारखंड सरकार कनहर बराज परियोजना से जुड़ी 58.01 हेक्टेयर जमीन को छत्तीसगढ़ की सीमा में मान रहा है, जबकि छत्तीसगढ़ 79.55 हेक्टेयर जमीन पर दावा कर रहा है। सीमा रेखा पर जमीन की वास्तविक स्थिति स्पष्ट नहीं होने से भी परियोजना के कार्यों में अपेक्षा के अनुरूप प्रगति नहीं हो पा रही है। कनहर बराज प्रोजेक्ट के लिए पलामू और गढ़वा जिले में कुल 1019 हेक्टेयर जमीन की जरूरत पड़ेगी। उसमें से 866.62 हेक्टेयर जमीन की वास्तविक स्थित ज्ञात हो चुकी है। छत्तीसगढ़ से झारखंड में प्रवेश करने वाली कनहर नदी पर बराज बनने से इसका सर्वाधिक लाभ गढ़वा जिले के किसानों को होगा।

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