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	<title>एक जुलाई &#8211; Live Halchal</title>
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		<title>उत्तराखंड राज्य की पूरी तैयारी: एक जुलाई से लागू होंगे ये तीन नए कानून</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Live Halchal Web_Wing]]></dc:creator>
		<pubDate>Wed, 22 May 2024 05:08:06 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[उत्तराखंड]]></category>
		<category><![CDATA[राज्य]]></category>
		<category><![CDATA[एक जुलाई]]></category>
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					<description><![CDATA[एक जुलाई से लागू होने वाले तीन नए कानून को लेकर उत्तराखंड की पूरी तैयारी है।  इस संबंध में केंद्रीय गृह सचिव को मुख्य सचिव राधा रतूड़ी ने वर्चुअल बैठक में दी जानकारी।  पहली जुलाई से देशभर में लागू होने वाले तीन नए आपराधिक कानूनों के लिए उत्तराखंड की तैयारी पूरी हो चुकी है। मुख्य &#8230;]]></description>
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<p>एक जुलाई से लागू होने वाले तीन नए कानून को लेकर उत्तराखंड की पूरी तैयारी है।  इस संबंध में केंद्रीय गृह सचिव को मुख्य सचिव राधा रतूड़ी ने वर्चुअल बैठक में दी जानकारी। </p>



<p>पहली जुलाई से देशभर में लागू होने वाले तीन नए आपराधिक कानूनों के लिए उत्तराखंड की तैयारी पूरी हो चुकी है। मुख्य सचिव राधा रतूड़ी ने मंगलवार को केंद्रीय गृह सचिव की अध्यक्षता में हुई वर्चुअल बैठक में यह जानकारी दी। केंद्रीय गृह सचिव ने सभी राज्यों के साथ नए कानूनों को लागू करने से पहले सभी राज्यों के स्तर पर अब तक की तैयारी के बारे में प्रगति जानी।</p>



<p>एक जुलाई से भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता 2023, भारतीय न्याय संहिता 2023, भारतीय सुरक्षा अधिनियम 2023 लागू होने हैं। सीएस कहा, कानूनों की जानकारी के संबंध में सभी प्रशिक्षण 20 जून तक पूरे हो जाएंगे। सीसीटीएनएस सॉफ्टवेयर अपडेट का प्रशिक्षण भी 31 मई तक पूरा हो जाएगा।</p>



<p><strong>कानूनों को सरल तरीके से पढ़ने की विधि तैयार की गई</strong><br>नए आपराधिक कानूनों के पास होने के बाद प्रशिक्षण संस्थानों से समन्वय बनाते हुए राज्य के 50 अधिकारियों को गाजियाबाद, जयपुर से मास्टर ट्रेनर का कोर्स कराया गया। बताया, 18 अन्य अधिकारियों को भी मास्टर ट्रेनर के रूप में ट्रेनिंग दी गई। साथ ही उत्तराखंड पुलिस ने हस्त पुस्तिका तैयार की है। इसके आधार पर सारे कोर्स का संचालन किया जा रहा है। इसमें वृहद कानूनों को सरल तरीके से पढ़ने की विधि तैयार की गई है। हस्त पुस्तिका की 25 हजार प्रतियां पुलिस अधिकारियों और कर्मचारियों को बांटी गई है। ऑनलाइन प्रशिक्षण के लिए तीन मॉड्यूल तैयार किए जा रहे हैं।</p>



<p>बताया, कम समय को देखते हुए प्रशिक्षण को जिला स्तर तक विकेंद्रित किया गया है। सभी मास्टर ट्रेनर और अभियोजन अफसरों की संयुक्त टीम ऑफलाइन मोड में सिविल पुलिस के विवेचना अधिकारियों को ट्रेनिंग दे रही हैं। ऐसे कर्मचारी जिनका पुलिस विवेचना में प्रत्यक्ष हस्तक्षेप नहीं होता है, उन्हें ऑनलाइन मोड में प्रशिक्षण दिया जाना है। इसके लिए ऑनलाइन माड्यूल तैयार किया जा रहा है।</p>



<p><strong>आईपीएस अधिकारियों व पुलिस कप्तानों को&nbsp;दिया गया&nbsp;दो दिवसीय प्रशिक्षण</strong><br>बताया, यह मॉड्यूल आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस आधारित है। इस माह के अंत तक केंद्र सरकार के बनाए गए आई गॉट कर्मयोगी पोर्टल पर चलाया जाएगा। इसके बाद सभी कर्मियों को ऑनलाइन प्रशिक्षण पूर्ण करने के लिए एक माह का समय दिया जाएगा। कांस्टेबल व हेड कांस्टेबल को चारधाम यात्रा के दृष्टिगत करीब 20 दिन का समय दिया जाएगा।</p>



<p>कहा, वे पोर्टल पर उपलब्ध 18 लेक्चर माड्यूल का अध्ययन कर टेस्ट देने के बाद प्रशिक्षित हो जाएंगे। नागरिक पुलिस व पीएसी के 1000 रिक्रूट आरक्षियों को तीन दिन का प्रशिक्षण दिया जा चुका है। इसके लिए लगभग 500 मुख्य आरक्षियों को प्रमोशन के लिए भी नए आपराधिक कानूनों का प्रशिक्षण दिया गया है। सभी आईपीएस अधिकारियों व पुलिस कप्तानों को भी दो दिवसीय प्रशिक्षण दिया गया।</p>



<p>बताया, ऑफलाइन ट्रेनिंग चार चरण में पूरी होनी थी, जिसमें अभी तक तीन चरण पूरे हो चुके हैं। बागेश्वर, उत्तरकाशी और रुद्रप्रयाग में यह ट्रेनिंग समाप्त भी हो चुकी है। पिचहत्तर प्रतिशत ऑफलाइन मोड का प्रशिक्षण पूर्ण हो चुका है। अगले एक हफ्ते में ऑफलाइन प्रशिक्षण पूरा हो जाएगा। आई गॉट कर्मयोगी पोर्टल पर सभी पुलिस कर्मियों का रजिस्ट्रेशन किया जा रहा है।</p>



<p><strong>25 हजार पुलिस बल का प्रशिक्षण होगा</strong></p>



<p>भारतीय न्याय संहिता में छोटे और बड़े 190, भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता में 360 और भारतीय साक्ष्य अधिनियम में 45 बदलाव किए गए हैं। नए कानूनों को सभी पुलिस अधिकारी व कर्मचारियों तक पहुंचने के लिए प्रशिक्षण का रोडमैप तैयार कर लिया गया है। लगभग 25,000 पुलिस बल का ऑनलाइन और ऑफलाइन मोड में प्रशिक्षण प्रस्तावित है।</p>
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		<title>RBI ने की घोषणा, एक जुलाई से आपको मुफ्त में मिलेगी ये सुविधा&#8230;</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Hema Bisht]]></dc:creator>
		<pubDate>Wed, 12 Jun 2019 08:55:23 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[कारोबार]]></category>
		<category><![CDATA[RBI ने की घोषणा]]></category>
		<category><![CDATA[एक जुलाई]]></category>
		<category><![CDATA[मुफ्त]]></category>
		<category><![CDATA[सुविधा]]></category>
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					<description><![CDATA[छह जून को हुई आरबीआई की मौद्रिक नीति समिति (MPC) की समीक्षा बैठक में आरबीआई ने आम जनता को बड़ा तोहफा देते हुए रियल टाइम ग्रॉस सेटलमेंट (आरटीजीएस) और नेशनल इलेक्ट्रिक फंड ट्रांसफर (एनईएफटी) के जरिये होने वाला लेन-देन निशुल्क कर दिया था। अब केंद्रीय बैंक ने घोषणा की यह नियम एक जुलाई से लागू &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<div><strong>छह जून को हुई आरबीआई की मौद्रिक नीति समिति (MPC) की समीक्षा बैठक में आरबीआई ने आम जनता को बड़ा तोहफा देते हुए रियल टाइम ग्रॉस सेटलमेंट (आरटीजीएस) और नेशनल इलेक्ट्रिक फंड ट्रांसफर (एनईएफटी) के जरिये होने वाला लेन-देन निशुल्क कर दिया था। अब केंद्रीय बैंक ने घोषणा की यह नियम एक जुलाई से लागू होगा। आरटीजीएस और एनईएफटी करने पर ग्राहकों से चार्ज वसूलते हैं। ऐसे में ग्राहकों के खाते से अतिरिक्त राशि कटती है। हालांकि अब एक जुलाई से बैंकों को आरबीआई के नियम का पालन करना पड़ेगा, जिसका फायदा ग्राहकों को मिलेगा। RTGS का मतलब है रियल टाइम ग्रॉस सेटलमेंट सिस्टम। &#8216;रियल टाइम&#8217; का मतलब है तुरंत। मतलब जैसे ही आप पैसा ट्रांसफर करें, कुछ ही देर में वह खाते में पहुंच जाए। आरटीजीएस दो लाख रुपये से अधिक के ट्रांसफर के लिए इस्तेमाल किया जाता है।</strong></p>
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<div><strong>भारत का सबसे बड़ा सरकारी बैंक स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (एसबीआई) आरटीजीएस के तहत पैसा भेजने पर पांच से 50 रुपये का शुल्क लेता है। NEFT का मतलब है नेशनल इलेक्ट्रॉनिक फंड्स ट्रांसफर। इंटरनेट के जरिये दो लाख रुपये तक के लेन-देन के लिए एनईएफटी का इस्तेमाल किया जाता है। इसके जरिये किसी भी शाखा के किसी भी बैंक खाते से किसी भी शाखा के बैंक खाते को पैसा भेजा जा सकता है।</strong><br />
<strong>बस इकलौती शर्त ये है कि भेजने वाले और पैसा पाने वाले, दोनों के पास इंटरनेट बैंकिंग सेवा का होना जरूरी है। अगर दोनों खाते एक ही बैंक के हैं तो सामान्य स्थिति में कुछ सेकेंड्स के अंदर पैसा ट्रांसफर हो सकता है। आरबीआई अब तक आरटीजीएस और एनईएफटी लेन-देन पर एक लेवी बैंकों से लिया करता था और बदले में बैंक अपने ग्राहकों से यह पैसा वसूलते थे। अब यह लेवी की व्यवस्था हटा ली गई है।</strong></div>
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