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	<title>एकादशी &#8211; Live Halchal</title>
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	<title>एकादशी &#8211; Live Halchal</title>
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		<title>एकादशी पर किन चीजों का दान माना गया है सबसे शुभ? हर किसी को पता होने चाहिए ये नियम </title>
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		<pubDate>Sat, 18 Apr 2026 05:21:01 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[अध्यात्म]]></category>
		<category><![CDATA[धर्म]]></category>
		<category><![CDATA[एकादशी]]></category>
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					<description><![CDATA[<img width="618" height="353" src="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2026/04/6-34.jpg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" fetchpriority="high" srcset="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2026/04/6-34.jpg 689w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2026/04/6-34-300x171.jpg 300w" sizes="(max-width: 618px) 100vw, 618px" />वैशाख माह की शुक्ल एकादशी पर मोहिनी एकादशी आती है, जो इस बार 27 अप्रैल को मनाई जाएगी। एकादशी तिथि पर दान-पुण्य करने से साधक को भगवान विष्णु की कृपा की प्राप्ति होती है। लेकिन आपको एकादशी पर किए गए दान-पुण्य का लाभ तभी मिलता है, जब आप इससे जुड़े नियमों का भी ध्यान रखें। &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<img width="618" height="353" src="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2026/04/6-34.jpg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" srcset="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2026/04/6-34.jpg 689w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2026/04/6-34-300x171.jpg 300w" sizes="(max-width: 618px) 100vw, 618px" />
<p>वैशाख माह की शुक्ल एकादशी पर मोहिनी एकादशी आती है, जो इस बार 27 अप्रैल को मनाई जाएगी। एकादशी तिथि पर दान-पुण्य करने से साधक को भगवान विष्णु की कृपा की प्राप्ति होती है। लेकिन आपको एकादशी पर किए गए दान-पुण्य का लाभ तभी मिलता है, जब आप इससे जुड़े नियमों का भी ध्यान रखें।</p>



<p><strong>एकादशी पर दान करने के लाभ<br></strong>एकादशी पर दान करने से भगवान विष्णु की कृपा तो मिलती ही है, साथ ही साधक को अक्षय पुण्य प्राप्त होते हैं। इस दिन दान करने से कई तरह के दोषों से मुक्ति मिलती है। एकादशी पर किया गया दान, साधक को भगवान विष्णु की कृपा दिलाता है, जिससे जीवन में सुख-समृद्धि बनी रहती है।</p>



<p>यह दान पिछले जन्मों के पापों से मुक्ति दिलाने में भी सहायक है। साधक को मानसिक शांति के साथ-साथ आध्यात्मिक उन्नति भी मिलती है। एकादशी के दिन सच्चे मन से दान करने पर सुख, समृद्धि और मनोवांछित फल की प्राप्ति होते है।</p>



<p><strong>करें इन चीजों का दान<br></strong>एकादशी पर अन्न जैसे गेंहू, दाल आदि का दान करना सर्वोत्म माना गया है। एकादशी के दिन चावल नहीं खाते, लेकिन अनाज के रूप में चावल का दान किया जा सकता है।<br>प्रभु श्रीहरि की कृपा के लिए आप एकादशी के दिन जल (कलश), फल और धार्मिक पुस्तकों आदि का दान कर सकते हैं।<br>इस दिन पर अपनी क्षमता के अनुसार, गरीबों को धन का दान करना या भोजन करवाना भी सर्वोत्तम है।<br>एकादशी के दिन पीले रंग की वस्तुओं जैसे पीले रंग के कपड़ों, चने की दाल और गुड़ का दान किया जाता है, क्योंकि यह रंग प्रभु श्रीहरि को प्रिय है।<br>एकादशी पर गायों की सेवा करने और गायों के लिए चारा या दान करने से विशेष पुण्य मिलता है।<br>द्वादशी तिथि पर ब्रह्मणों को भोजन करवाने के साथ-साथ दान-दक्षिणा देकर विदा करना चाहिए और इसके बाद एकादशी व्रत का पारण करना चाहिए।</p>



<p><strong>एकादशी दान-पुण्य के मुख्य नियम<br></strong>एकादशी के दिन स्नान-ध्यान के बाद भगवान विष्णु की पूजा करके दान आदि करना चाहिए।<br>एकादशी का दान हमेशा सात्विक और शुद्ध होना चाहिए।<br>तामसिक भोजन या वस्तुओं का दान भूलकर भी न करें।<br>कभी भी दिखावे के लिए दान न करें, हमेशा श्रद्धापूर्वक ही दान करना चाहिए।<br>दान हमेशा बिना किसी अपेक्षा के निस्वार्थ भाव से किया जाना चाहिए।</p>
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		<title>उज्जैन: एकादशी पर वैष्णव तिलक से सजे बाबा महाकाल, भस्म आरती के बाद भक्तों को दिए दिव्य दर्शन</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Live Halchal Web_Wing]]></dc:creator>
		<pubDate>Sat, 14 Mar 2026 06:04:23 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[मध्यप्रदेश]]></category>
		<category><![CDATA[राज्य]]></category>
		<category><![CDATA[एकादशी]]></category>
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					<description><![CDATA[<img width="482" height="309" src="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2026/03/Screenshot-2026-03-13-230311.png" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" srcset="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2026/03/Screenshot-2026-03-13-230311.png 482w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2026/03/Screenshot-2026-03-13-230311-300x192.png 300w" sizes="(max-width: 482px) 100vw, 482px" />आज एकादशी के अवसर पर बाबा महाकाल का विशेष वैष्णव तिलक से शृंगार किया गया और भस्म आरती के बाद भक्तों को दर्शन दिए गए। तड़के चार बजे से ही महाकाल मंदिर में श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ पड़ी। चैत्र कृष्ण पक्ष की एकादशी पर शनिवार तड़के विश्व प्रसिद्ध श्री महाकालेश्वर मंदिर में भस्म आरती के &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<img width="482" height="309" src="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2026/03/Screenshot-2026-03-13-230311.png" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" loading="lazy" srcset="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2026/03/Screenshot-2026-03-13-230311.png 482w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2026/03/Screenshot-2026-03-13-230311-300x192.png 300w" sizes="auto, (max-width: 482px) 100vw, 482px" />
<p>आज एकादशी के अवसर पर बाबा महाकाल का विशेष वैष्णव तिलक से शृंगार किया गया और भस्म आरती के बाद भक्तों को दर्शन दिए गए। तड़के चार बजे से ही महाकाल मंदिर में श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ पड़ी।</p>



<p>चैत्र कृष्ण पक्ष की एकादशी पर शनिवार तड़के विश्व प्रसिद्ध श्री महाकालेश्वर मंदिर में भस्म आरती के दौरान हजारों श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ पड़ी। देर रात से ही श्रद्धालु कतारों में लगकर अपने इष्टदेव बाबा महाकाल के दर्शन के लिए मंदिर पहुंचने लगे थे। सुबह चार बजे मंदिर के पट खुलते ही बाबा महाकाल का भव्य पूजन-अर्चन और शृंगार किया गया तथा भस्म आरती संपन्न हुई। इसके बाद भक्तों को बाबा महाकाल के दिव्य दर्शन हुए। इस दौरान पूरा मंदिर परिसर जय श्री महाकाल के जयघोष से गूंज उठा।</p>



<p>श्री महाकालेश्वर मंदिर के पुजारी पंडित महेश शर्मा ने बताया कि चैत्र कृष्ण पक्ष की एकादशी के अवसर पर सुबह चार बजे भस्म आरती संपन्न हुई। मंदिर के पट खुलने के बाद वीरभद्र जी से आज्ञा लेकर गर्भगृह में स्थापित सभी देव प्रतिमाओं का पूजन-अर्चन किया गया। इसके बाद भगवान महाकाल का जलाभिषेक दूध, दही, घी, शक्कर, पंचामृत और फलों के रस से किया गया।</p>



<p>पूजन के दौरान प्रथम घंटाल बजाकर हरि ओम का जल अर्पित किया गया। पुजारियों और पुरोहितों ने बाबा महाकाल का भव्य शृंगार कर कपूर आरती की और उन्हें नवीन मुकुट धारण कराया। इसके बाद महानिर्वाणी अखाड़े की ओर से शिवलिंग पर भस्म अर्पित की गई। झांझ-मंजीरे, ढोल-नगाड़े और शंखनाद के साथ भस्म आरती संपन्न हुई।</p>



<p><strong>वैष्णव तिलक से किया विशेष शृंगार<br></strong>एकादशी के अवसर पर बाबा महाकाल का विशेष शृंगार किया गया। इस दिन भगवान को वैष्णव तिलक लगाया गया और भस्म अर्पित की गई। मान्यता है कि भस्म अर्पित करने के बाद भगवान महाकाल निराकार से साकार रूप में भक्तों को दर्शन देते हैं। हजारों श्रद्धालुओं ने बाबा के इस अलौकिक स्वरूप के दर्शन कर पुण्य लाभ प्राप्त किया।</p>



<p><strong>आरतियों का समय<br></strong>भस्म आरती – सुबह 4:00 से 6:00 बजे<br>दद्योदक आरती – प्रातः 7:00 से 7:45 बजे<br>भोग आरती – प्रातः 10:00 से 10:45 बजे<br>संध्या पूजन – शाम 5:00 से 5:45 बजे<br>संध्या आरती – शाम 7:00 से 7:45 बजे<br>शयन आरती – रात्रि 10:30 से 11:00 बजे</p>



<p>महाकालेश्वर मंदिर में आरतियों के समय में यह बदलाव आश्विन मास की पूर्णिमा (शरद पूर्णिमा) तक लागू रहेगा।</p>



<p><strong>सगाई के बाद बाबा महाकाल के दरबार पहुंचे क्रिकेटर पृथ्वी शॉ<br></strong>भारतीय क्रिकेटर पृथ्वी शॉ भी शनिवार तड़के महाकाल मंदिर पहुंचे। हाल ही में उनकी आकृति अग्रवाल के साथ सगाई हुई है। सगाई के बाद उन्होंने नई शुरुआत के लिए बाबा महाकाल का आशीर्वाद लिया।</p>



<p>पृथ्वी शॉ सुबह चार बजे होने वाली भस्म आरती में शामिल हुए। उन्होंने अपनी पहचान गोपनीय रखने के लिए चेहरे पर मास्क लगाया हुआ था और करीब दो घंटे तक नंदी हॉल में आम श्रद्धालुओं के बीच बैठकर पूजा-अर्चना करते रहे। आरती के बाद उन्होंने मंदिर की देहरी से जल अर्पित किया और परिसर के अन्य मंदिरों में भी दर्शन किए।</p>



<p>उन्होंने कहा कि महाकाल मंदिर आकर उन्हें बहुत अच्छा लगा। यह उनका पहला अवसर है जब वे यहां आए हैं। उनके अनुसार यहां आकर एक अलग तरह की सकारात्मक ऊर्जा और आनंद का अनुभव होता है। उन्होंने श्रद्धालुओं से अपील की कि जो भी उज्जैन आए, वह भस्म आरती में जरूर शामिल होकर बाबा महाकाल का आशीर्वाद प्राप्त करे।</p>



<p></p>
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		<title>इंदिरा एकादशी पर करें पितरों से जुड़ा ये काम</title>
		<link>https://livehalchal.com/ekadashi/632994</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Live Halchal Web_Wing]]></dc:creator>
		<pubDate>Wed, 17 Sep 2025 04:36:16 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[अध्यात्म]]></category>
		<category><![CDATA[धर्म]]></category>
		<category><![CDATA[एकादशी]]></category>
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					<description><![CDATA[<img width="344" height="458" src="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2025/09/uul-large.jpg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" loading="lazy" srcset="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2025/09/uul.jpg 344w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2025/09/uul-medium.jpg 225w" sizes="auto, (max-width: 344px) 100vw, 344px" />इंदिरा एकादशी (Indira Ekadashi 2025) पितृ पक्ष में पड़ने वाली एक महत्वपूर्ण एकादशी है, जिसका विशेष महत्व पितरों को मुक्ति दिलाने के लिए माना जाता है। इस दिन लोग अपने पितरों का तर्पण और उनके नाम से दान-पुण्य करते हैं। कहते हैं कि जो साधक इस दिन व्रत रखते हैं, उन्हें श्री हरि के आशीर्वाद &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<img width="344" height="458" src="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2025/09/uul-large.jpg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" loading="lazy" srcset="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2025/09/uul.jpg 344w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2025/09/uul-medium.jpg 225w" sizes="auto, (max-width: 344px) 100vw, 344px" />
<p>इंदिरा एकादशी (Indira Ekadashi 2025) पितृ पक्ष में पड़ने वाली एक महत्वपूर्ण एकादशी है, जिसका विशेष महत्व पितरों को मुक्ति दिलाने के लिए माना जाता है। इस दिन लोग अपने पितरों का तर्पण और उनके नाम से दान-पुण्य करते हैं। कहते हैं कि जो साधक इस दिन व्रत रखते हैं, उन्हें श्री हरि के आशीर्वाद के साथ पितरों की भी कृपा मिलती है। वहीं, इस दिन पितृ चालीसा का पाठ भी बहुत फलदायी माना गया है, तो आइए यहां पढ़ते हैं।</p>



<p><strong>।।पितृ चालीसा।।<br></strong>।।दोहा।।</p>



<p>हे पितरेश्वर आपको दे दियो आशीर्वाद,</p>



<p>चरण शीश नवा दियो रख दो सिर पर हाथ ।</p>



<p>सबसे पहले गणपत पाछे घर का देव मनावा जी ।</p>



<p>हे पितरेश्वर दया राखियो, करियो मन की चाया जी । ।</p>



<p>।।चौपाई।।</p>



<p>पितरेश्वर करो मार्ग उजागर,</p>



<p>चरण रज की मुक्ति सागर ।</p>



<p>परम उपकार पित्तरेश्वर कीन्हा,</p>



<p>मनुष्य योणि में जन्म दीन्हा ।</p>



<p>मातृ-पितृ देव मन जो भावे,</p>



<p>सोई अमित जीवन फल पावे ।</p>



<p>जै-जै-जै पित्तर जी साईं,</p>



<p>पितृ ऋण बिन मुक्ति नाहिं ।</p>



<p>चारों ओर प्रताप तुम्हारा,</p>



<p>संकट में तेरा ही सहारा ।</p>



<p>नारायण आधार सृष्टि का,</p>



<p>पित्तरजी अंश उसी दृष्टि का ।</p>



<p>प्रथम पूजन प्रभु आज्ञा सुनाते,</p>



<p>भाग्य द्वार आप ही खुलवाते ।</p>



<p>झुंझनू में दरबार है साजे,</p>



<p>सब देवों संग आप विराजे ।</p>



<p>प्रसन्न होय मनवांछित फल दीन्हा,</p>



<p>कुपित होय बुद्धि हर लीन्हा ।</p>



<p>पित्तर महिमा सबसे न्यारी,</p>



<p>जिसका गुणगावे नर नारी ।</p>



<p>तीन मण्ड में आप बिराजे,</p>



<p>बसु रुद्र आदित्य में साजे ।</p>



<p>नाथ सकल संपदा तुम्हारी,</p>



<p>मैं सेवक समेत सुत नारी ।</p>



<p>छप्पन भोग नहीं हैं भाते,</p>



<p>शुद्ध जल से ही तृप्त हो जाते ।</p>



<p>तुम्हारे भजन परम हितकारी,</p>



<p>छोटे बड़े सभी अधिकारी ।</p>



<p>भानु उदय संग आप पुजावे,</p>



<p>पांच अँजुलि जल रिझावे ।</p>



<p>ध्वज पताका मण्ड पे है साजे,</p>



<p>अखण्ड ज्योति में आप विराजे ।</p>



<p>सदियों पुरानी ज्योति तुम्हारी,</p>



<p>धन्य हुई जन्म भूमि हमारी ।</p>



<p>शहीद हमारे यहाँ पुजाते,</p>



<p>मातृ भक्ति संदेश सुनाते ।</p>



<p>जगत पित्तरो सिद्धान्त हमारा,</p>



<p>धर्म जाति का नहीं है नारा ।</p>



<p>हिन्दू, मुस्लिम, सिख,</p>



<p>ईसाई सब पूजे पित्तर भाई ।</p>



<p>हिन्दू वंश वृक्ष है हमारा,</p>



<p>जान से ज्यादा हमको प्यारा ।</p>



<p>गंगा ये मरुप्रदेश की,</p>



<p>पितृ तर्पण अनिवार्य परिवेश की ।</p>



<p>बन्धु छोड़ ना इनके चरणाँ,</p>



<p>इन्हीं की कृपा से मिले प्रभु शरणा ।</p>



<p>चौदस को जागरण करवाते,</p>



<p>अमावस को हम धोक लगाते ।</p>



<p>जात जडूला सभी मनाते,</p>



<p>नान्दीमुख श्राद्ध सभी करवाते ।</p>



<p>धन्य जन्म भूमि का वो फूल है,</p>



<p>जिसे पितृ मण्डल की मिली धूल है ।</p>



<p>श्री पित्तर जी भक्त हितकारी,</p>



<p>सुन लीजे प्रभु अरज हमारी ।</p>



<p>निशिदिन ध्यान धरे जो कोई,</p>



<p>ता सम भक्त और नहीं कोई ।</p>



<p>तुम अनाथ के नाथ सहाई,</p>



<p>दीनन के हो तुम सदा सहाई ।</p>



<p>चारिक वेद प्रभु के साखी,</p>



<p>तुम भक्तन की लज्जा राखी ।</p>



<p>नाम तुम्हारो लेत जो कोई,</p>



<p>ता सम धन्य और नहीं कोई ।</p>



<p>जो तुम्हारे नित पाँव पलोटत,</p>



<p>नवों सिद्धि चरणा में लोटत ।</p>



<p>सिद्धि तुम्हारी सब मंगलकारी,</p>



<p>जो तुम पे जावे बलिहारी ।</p>



<p>जो तुम्हारे चरणा चित्त लावे,</p>



<p>ताकी मुक्ति अवसी हो जावे ।</p>



<p>सत्य भजन तुम्हारो जो गावे,</p>



<p>सो निश्चय चारों फल पावे ।</p>



<p>तुमहिं देव कुलदेव हमारे,</p>



<p>तुम्हीं गुरुदेव प्राण से प्यारे ।</p>



<p>सत्य आस मन में जो होई,</p>



<p>मनवांछित फल पावें सोई ।</p>



<p>तुम्हरी महिमा बुद्धि बड़ाई,</p>



<p>शेष सहस्र मुख सके न गाई ।</p>



<p>मैं अति दीन मलीन दुखारी,</p>



<p>करहुं कौन विधि विनय तुम्हारी ।</p>



<p>अब पितर जी दया दीन पर कीजै,</p>



<p>अपनी भक्ति शक्ति कछु दीजै ।</p>



<p>।।दोहा।।</p>



<p>पित्तरों को स्थान दो, तीरथ और स्वयं ग्राम ।</p>



<p>श्रद्धा सुमन चढ़ें वहां, पूरण हो सब काम ।</p>



<p>झुंझनू धाम विराजे हैं, पित्तर हमारे महान ।</p>



<p>दर्शन से जीवन सफल हो, पूजे सकल जहान । ।</p>



<p>जीवन सफल जो चाहिए, चले झुंझनू धाम ।</p>



<p>पित्तर चरण की धूल ले, हो जीवन सफल महान । ।</p>
]]></content:encoded>
					
		
		
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		<title>परिवर्तिनी एकादशी पर इन चीजों के दान से दूर होगी घर की दरिद्रता</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Live Halchal Web_Wing]]></dc:creator>
		<pubDate>Mon, 01 Sep 2025 04:30:16 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[अध्यात्म]]></category>
		<category><![CDATA[धर्म]]></category>
		<category><![CDATA[एकादशी]]></category>
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					<description><![CDATA[<img width="618" height="457" src="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2025/09/85222-large.jpg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" loading="lazy" srcset="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2025/09/85222.jpg 712w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2025/09/85222-medium.jpg 300w" sizes="auto, (max-width: 618px) 100vw, 618px" />हिंदू धर्म में परिवर्तिनी एकादशी का व्रत बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। यह हर साल भाद्रपद माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि को रखा जाता है। इस दिन भगवान विष्णु और उनके वामन रूप की पूजा की जाती है। ऐसा माना जाता है कि इस दिन व्रत और पूजा करने से व्यक्ति के सभी &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<img width="618" height="457" src="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2025/09/85222-large.jpg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" loading="lazy" srcset="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2025/09/85222.jpg 712w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2025/09/85222-medium.jpg 300w" sizes="auto, (max-width: 618px) 100vw, 618px" />
<p>हिंदू धर्म में परिवर्तिनी एकादशी का व्रत बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। यह हर साल भाद्रपद माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि को रखा जाता है। इस दिन भगवान विष्णु और उनके वामन रूप की पूजा की जाती है। ऐसा माना जाता है कि इस दिन व्रत और पूजा करने से व्यक्ति के सभी पापों का नाश होता है और उसे मोक्ष की प्राप्ति होती है।</p>



<p>इस साल परिवर्तिनी एकादशी 3 सितंबर को पड़ रही है, ऐसे में आइए इस दिन क्या दान करना शुभ माना जाता है आइए इस आर्टिकल में जानते हैं?</p>



<p><strong>अनाज और भोजन</strong> &#8211; परिवर्तिनी एकादशी के दिन अनाज और भोजन का दान करना बहुत शुभ माना जाता है। इस दिन जरूरतमंद लोगों को भोजन कराने या चावल, दाल, और गेहूं आदि चीजों का दान करने से भगवान विष्णु खुश होते हैं और घर में धन-धान्य की कमी नहीं होती।<br><strong>पीले वस्त्र</strong> &#8211; भगवान विष्णु को पीला रंग बहुत प्रिय है। इसलिए परिवर्तिनी एकादशी के दिन पीले वस्त्रों का दान करना बहुत अच्छा होता है। ऐसा करने से व्यक्ति के जीवन में सकारात्मकता आती है और आर्थिक संकट दूर होते हैं।<br><strong>फल </strong>&#8211; इस दिन मौसमी फल का दान करना भी बहुत लाभकारी होता है। इस दान से अच्छे स्वास्थ्य और समृद्धि का वरदान मिलता है।<br><strong>तिल </strong>&#8211; तिल का दान करने से शनि दोष से मुक्ति मिलती है और जीवन में स्थिरता आती है। यह दान आध्यात्मिक और भौतिक सुखों को बढ़ाता है।<br><strong>गाय </strong>&#8211; गाय का दान, जिसे गो-दान भी कहते हैं, सभी दानों में सबसे श्रेष्ठ माना जाता है। अगर आप गाय का दान नहीं कर सकते, तो गाय को चारा खिलाने जैसे अच्छे काम कर सकते हैं।<br>घी और शहद &#8211; परिवर्तिनी एकादशी पर घी और शहद का दान करने से घर में खुशहाली आती है और जीवन में मिठास बनी रहती है।</p>



<p><strong>परिवर्तिनी एकादशी कब है?<br></strong>वैदिक पंचांग के अनुसार, एकादशी तिथि की शुरुआत 03 सितंबर को देर रात 03 बजकर 53 मिनट पर होगी। वहीं, एकादशी तिथि का समापन 04 सितंबर को सुबह 04 बजकर 21 मिनट पर होगा। सनातन धर्म में उदया तिथि का महत्व है। इसलिए 03 सितंबर को परिवर्तिनी एकादशी मनाई जाएगी।</p>
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		<title>एकादशी माता की पूजा के बिना अधूरा है यह व्रत, जानें पूजा विधि, भोग, मंत्र और महत्व</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Live Halchal Web_Wing]]></dc:creator>
		<pubDate>Thu, 24 Apr 2025 05:04:23 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[अध्यात्म]]></category>
		<category><![CDATA[धर्म]]></category>
		<category><![CDATA[एकादशी]]></category>
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					<description><![CDATA[<img width="334" height="343" src="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2025/04/jkgoi-large.jpg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" loading="lazy" srcset="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2025/04/jkgoi.jpg 334w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2025/04/jkgoi-medium.jpg 292w" sizes="auto, (max-width: 334px) 100vw, 334px" />वैशाख मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी को वरुथिनी एकादशी के रूप में मनाया जाता है। इस साल यह पावन तिथि 24 अप्रैल, 2025 यानी आज पड़ रही है। यह भगवान विष्णु और देवी एकादशी की पूजा के लिए समर्पित है और इसका व्रत रखने से साधको को सभी दुखों से मुक्ति मिलती है, जो &#8230;]]></description>
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<p>वैशाख मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी को वरुथिनी एकादशी के रूप में मनाया जाता है। इस साल यह पावन तिथि 24 अप्रैल, 2025 यानी आज पड़ रही है। यह भगवान विष्णु और देवी एकादशी की पूजा के लिए समर्पित है और इसका व्रत रखने से साधको को सभी दुखों से मुक्ति मिलती है, जो लोग इस व्रत का पालन कर रहे हैं, उन्हें एकादशी माता की पूजा भी विधि-विधान से करनी चाहिए, क्योंकि इसके बिना व्रत पूरा नहीं होता है।</p>



<p><strong>एकादशी माता की पूजा विधि<br></strong>इस दिन सुबह उठकर स्नान आदि से निवृत्त होकर साफ वस्त्र धारण करें।<br>पूजा स्थल को गंगाजल से पवित्र करें और एक वेदी पर लाल या पीला वस्त्र बिछाएं।<br>भगवान विष्णु और एकादशी माता की प्रतिमा स्थापित करें।<br>उन्हें रोली, चंदन, अक्षत, धूप, दीप, और पुष्प आदि चीजें अर्पित करें।<br>भोग में तुलसी दल जरूर शामिल करें।<br>एकादशी व्रत कथा का पाठ करें या सुनें।<br>भगवान विष्णु और एकादशी माता के मंत्रों का जाप करें।<br>अंत में आरती करें और परिवार के लोगों में प्रसाद बांटें।</p>



<p><strong>भोग<br></strong>एकादशी के दिन भगवान विष्णु और एकादशी माता को सात्विक चीजों का भोग लगाया जाता है। इसमें ऋतु फल, पंचामृत, पीली मिठाई, खीर (मखाने की), मेवे, दूध से बनी मिठाइयां और धनिया की पंजीरी के साथ तुलसी दल जरूर शामिल करना चाहिए। इस दिन अनाज और चावल से बने भोजन का भोग नहीं लगाया जाता है।</p>



<p><strong>पूजन मंत्र<br></strong>&#8220;ॐ एकादशी देव्यै नमो नमः&#8221;<br>&#8220;ॐ नमो भगवते वासुदेवाय&#8221;</p>



<p><strong>वरूथिनी एकादशी का महत्व<br></strong>वरुथिनी एकादशी का व्रत रखने से मनुष्य के सभी पाप नष्ट हो जाते हैं और उसे मोक्ष की प्राप्ति होती है। इस व्रत के प्रभाव से व्यक्ति को धन, यश और कीर्ति की प्राप्ति होती है। ऐसी मान्यता है कि इस व्रत को करने से कन्यादान के समान पुण्य फल मिलता है। यह व्रत विशेष रूप से संतान प्राप्ति और पारिवारिक सुख-समृद्धि के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है।</p>



<p>एकादशी माता की पूजा इस व्रत के महत्व को और भी बढ़ा देती है, जिससे भक्तों को भगवान विष्णु का विशेष आशीर्वाद प्राप्त होता है।</p>
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