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	<title>उमड़ा जनसैलाब &#8211; Live Halchal</title>
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	<title>उमड़ा जनसैलाब &#8211; Live Halchal</title>
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		<title>बाबा तरसेम सिंह के अंतिम संस्कार में उमड़ा जनसैलाब</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Live Halchal Web_Wing]]></dc:creator>
		<pubDate>Sat, 30 Mar 2024 05:14:22 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[उत्तराखंड]]></category>
		<category><![CDATA[राज्य]]></category>
		<category><![CDATA[अंतिम संस्कार]]></category>
		<category><![CDATA[उमड़ा जनसैलाब]]></category>
		<category><![CDATA[बाबा तरसेम सिंह]]></category>
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					<description><![CDATA[नानकमत्ता में डेरा कार सेवा प्रमुख बाबा तरसेम सिंह का अंतिम संस्कार कर दिया गया है। तरसेम सिंह की कल बाइक सवार दो लोगों ने गोली मारकर हत्या कर दी थी। उनके अंतिम संस्कार में लोगों की भीड़ उमड़ पड़ी। सतनाम वाहेगुरु के जाप के साथ बाबा तरसेम सिंह का पार्थिव शरीर गुरुद्वारा दूधवाला कुआं &#8230;]]></description>
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<p>नानकमत्ता में डेरा कार सेवा प्रमुख बाबा तरसेम सिंह का अंतिम संस्कार कर दिया गया है। तरसेम सिंह की कल बाइक सवार दो लोगों ने गोली मारकर हत्या कर दी थी। उनके अंतिम संस्कार में लोगों की भीड़ उमड़ पड़ी।</p>



<p>सतनाम वाहेगुरु के जाप के साथ बाबा तरसेम सिंह का पार्थिव शरीर गुरुद्वारा दूधवाला कुआं परिसर में पंचतत्व में विलीन हो गया। बाबा तरसेम सिंह की आत्मा की शांति के लिए हुई अंतिम अरदास में राजनीतिक,धार्मिक, सामाजिक के साथ ही हजारों की संगत ने गुरु महाराज से उनकी आत्मा की शांति की अरदास की। गुरुद्वारा दूध वाला कुआं परिसर में डेरा कार सेवा के दिवंगत जत्थेदार बाबा तरसेम सिंह को अश्रुपुरित आंखों से अंतिम विदाई देने के लिए क्षेत्र व यूपी के आसपास के जिलों से हजारों की संख्या में लोग पहुंचे।</p>



<p>बृहस्पतिवार को बाइक सवार दो हत्यारों ने सुबह डेरे में घुसकर बाबा तरसेम सिंह की गोली मारकर हत्या कर दी थी। पोस्टमार्टम के बाद संगत को अंतिम दर्शन के लिए उनका पार्थिव शरीर डेरा कार सेवा परिसर में फूलों से सजाकर रखा गया था।</p>



<figure class="wp-block-image size-large"><img fetchpriority="high" decoding="async" width="836" height="466" src="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2024/03/uk-1-24-large.jpg" alt="" class="wp-image-550630" srcset="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2024/03/uk-1-24.jpg 836w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2024/03/uk-1-24-medium.jpg 300w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2024/03/uk-1-24-768x428.jpg 768w" sizes="(max-width: 836px) 100vw, 836px" /></figure>



<p>शुक्रवार सुबह नौ बजे अरदास के बाद सतनाम वाहेगुरु के जाप के साथ फूलों से सजे विमान पर उनका शव दूधवाले कुआं परिसर में लाया गया। उनके पार्थिव शरीर को धार्मिक डेरा कार सेवा के प्रमुख संत बाबा बचन सिंह ने मुखाग्नि दी। वहां पर दिल्ली के बाबा सुरेंद्र सिंह, रीठा साहिब के बाबा श्याम सिंह, चंडीगढ़ के बाबा लखवीर सिंह, बाबा सतनाम सिंह बिलासपुर, बाबा प्रताप सिंह बाजवा, बाबा पाल सिंह आगरा का ताल, गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी के अध्यक्ष हरबंश सिंह चुघ, महासचिव अमरजीत सिंह, सुरेंद्र सिंह, दविन्दर सिंह, जोगिंदर सिंह, गुरवंत सिंह सोनी, गुरदयाल सिंह, प्रभारी प्रबंधक सुखवंत सिंह भुल्लर, रंजीत सिंह ढिल्लों, बलदेव सिंह चीमा, जसविंदर सिंह गिल, सुखदेव सिंह नामधारी, गुरु सेवक सिंह नामधारी आदि थे।</p>



<p><strong>इन्होंने भी दी श्रद्धांजलि</strong><br>नेता प्रतिपक्ष यशपाल आर्य, रुद्रपुर के विधायक शिव अरोरा, विधायक गोपाल सिंह राणा, किसान आयोग के उपाध्यक्ष राजपाल सिंह, डॉ. प्रेम सिंह राणा, नारायण पाल, आरएसएस के क्षेत्र संपर्क प्रमुख हरीश, प्रांत सह बौद्धिक प्रमुख नरेंद्र, ज्ञानेंद्र, वरुण अग्रवाल, उमेश अग्रवाल आदि शामिल थे।</p>
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		<title>नम आंखों से दी शहीद राकेश को अंतिम विदाई, उमड़ा जनसैलाब</title>
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		<dc:creator><![CDATA[publisher]]></dc:creator>
		<pubDate>Wed, 14 Feb 2018 10:21:41 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[उत्तराखंड]]></category>
		<category><![CDATA[राज्य]]></category>
		<category><![CDATA[उमड़ा जनसैलाब]]></category>
		<category><![CDATA[नम आंखों से दी शहीद राकेश को अंतिम विदाई]]></category>
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					<description><![CDATA[देहरादून: जम्मू-कश्मीर में शहीद राकेश चंद्र रतूड़ी की अंतिम यात्रा में भारी जनसैलाब उमड़ पड़ा। इससे पहले शहीद के पार्थिव शरीर को श्रद्धांजलि दी गई। वहीं, परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल था। गौरतलब है कि जम्मू कश्मीर के सुंंजवां में तीन दिन पहले आतंकियों ने हमला किया था। इस दौरान आतंकियों से लोहा लेते हुए हवलदार &#8230;]]></description>
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<p><strong>देहरादून: जम्मू-कश्मीर में शहीद राकेश चंद्र रतूड़ी की अंतिम यात्रा में भारी जनसैलाब उमड़ पड़ा। इससे पहले शहीद के पार्थिव शरीर को श्रद्धांजलि दी गई। वहीं, परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल था। </strong><strong>गौरतलब है कि जम्मू कश्मीर के सुंंजवां में तीन दिन पहले आतंकियों ने हमला किया था। इस दौरान आतंकियों से लोहा लेते हुए हवलदार राकेश रतूड़ी(44 वर्ष) गंभीर रूप से घायल हो गए। जिसके बाद उन्हें उपचार के लिए सेना के अस्पताल ले जाया गया, जहां उन्होंने अंतिम सांस ली। जवान राकेश रतूड़ी मूलरूप से पौड़ी गढ़वाल के पाबौ ब्लॉक की बाली कंडारस्यूं पट्टी स्थित सांकर सैंण गांव के रहने वाले थे। सालभर पहले ही उन्होंने प्रेमनगर के बड़ोवाला में घर बनाया था। <img decoding="async" class="aligncenter size-full wp-image-117092" src="http://www.livehalchal.com/wp-content/uploads/2018/02/नम-आंखों-से-दी-शहीद-राकेश-को-अंतिम-विदाई-उमड़ा-जनसैलाब.jpg" alt="नम आंखों से दी शहीद राकेश को अंतिम विदाई, उमड़ा जनसैलाब" width="650" height="540" srcset="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2018/02/नम-आंखों-से-दी-शहीद-राकेश-को-अंतिम-विदाई-उमड़ा-जनसैलाब.jpg 650w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2018/02/नम-आंखों-से-दी-शहीद-राकेश-को-अंतिम-विदाई-उमड़ा-जनसैलाब-300x249.jpg 300w" sizes="(max-width: 650px) 100vw, 650px" /></strong></p>
<p><strong>मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत, हरिद्वार सांसद डा रमेश पोखरियाल निशंक, उच्च शिक्षा राज्य मंत्री डा धन सिंह रावत, मसूरी विधायक गणेश जोशी, कैंट विधायक विनोद चमोली, सहसपुर विधायक सहदेव पुंडीर, कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष प्रीतम सिंह, उपाध्याक्ष सूर्यकांत धस्माना, भाजपा महानगर अध्यक्ष विनय गोयल, सुनील उनियाल गामा, जिलाधिकारी एसए मुरुगेशन, एसएसपी निवेदिता कुकरेती समेत सब एरिया के अधिकारियों ने शहीद को श्रद्धांजलि दी। इसके बाद शव यात्रा हरिद्वार के लिए निकाली गई। दोपहर में हरिद्वार के खड़खड़ी घाट में शहीद का अंतिम संस्कार किया गया। </strong></p>
<h3><span style="color: #ff0000;"><strong>पीछे छोड़ गए भरापूरा परिवार </strong></span></h3>
<p><strong>शहीद राकेश चंद्र रतूड़ी अपने पीछे पत्नी नंदा देवी और दो बच्चों नितिन और किरण को छोड़ गए हैं। उनके बड़े भाई रेवती नंदन ने बताया कि वह साल 1996 में फौज में भर्ती हुए थे। उनकी शिक्षा राजकीय इंटर कॉलेज सांकरसैंण में हुई। वह अभी तीन जनवरी को छुट्टी पर आए थे और 9 जनवरी को ड्यूटी पर लौट गए। </strong></p>
<h3><span style="color: #ff0000;"><strong>परिवार में टूटा दुखों का पहाड़ </strong></span></h3>
<p><strong>चाचा शेखरानंद रतूड़ी ने बताया कि पिछले तीन दिन से राकेश का फोन नहीं उठ रहा था। इस वजह से परिवार चिंतित था। सोमवार रात उनकी शहादत की खबर मिली तो घर वालों पर एकाएक दुखों का पहाड़ टूट पड़ा। उनकी पत्नी नंदा रो-रोकर अचेत हो गईं। 17 वर्षीय बेटा नितिन व 19 वर्षीय बेटी किरण नम आंखों से मां को ढांढस बंधा रहे थे। मां के सामने किसी तरह अपने आंसू रोके रखे। लेकिन जैसे कुछ पल उनसे अलग होते फफक कर रो पड़ते। मंगलवार देरशाम शहीद का पार्थिव शरीर दून पहुंच गया था।  </strong></p>
<h3><span style="color: #ff0000;"><strong>पिता की ही तरह सेना में जाने की ख्वाहिश </strong></span></h3>
<p><strong>शहीद का बेटा नितिन एसजीआरआर, पटेलनगर में ग्यारहवीं का छात्र है। बेटी किरण पत्राचार से बीए कर रही है। पिता की शहादत की खबर ने उन्हें झकझोर दिया है, लेकिन जज्बा पिता की ही तरह मजबूत है। बेटा नितिन कहता है कि पिता की तरह वह भी सेना में जाकर देश की सेवा करना चाहते हैं। आगे चलकर वह भी दादा और पिता के पदचिह्नों पर चलेंगे। </strong></p>
<h3><span style="color: #ff0000;"><strong>एक साल बाद होना था रिटायर </strong></span></h3>
<p><strong>शहीद राकेश चंद्र रतूड़ी की रेजीमेंट लद्दाख तैनात हो गई थी। रतूड़ी उन चंद लोगों में से थे, जिन्हें रिलीव नहीं किया गया था। वर्ष 2013 तक वह एनएसजी में रहे। इसके बाद राष्ट्रीय राइफल का हिस्सा बने। सेना में एक साल की सेवा और करने के बाद उन्हें 2019 सेवानिवृत होना था। </strong></p>
<h3><span style="color: #ff0000;"><strong>पाकिस्तान से हो आर-पार की जंग </strong></span></h3>
<p><strong>राकेश की शहादत की खबर फैलते ही पूरा क्षेत्र शोक में डूबा है। साथ ही लोगों में पाकिस्तान के खिलाफ गुस्सा भी है। शहीद के भाई रेवती नंदन रतूड़ी कहते हैं कि पाकिस्तान से अब आर-पार की लड़ाई होनी चाहिए। एक के बाद एक हो रही शहादतें अब बंद होनी चाहिए। </strong></p>
<h3><span style="color: #ff0000;"><strong>सालभर पहले ही दून में बनाया घर </strong></span></h3>
<p><strong>शहीद का परिवार मूलरूप से पौड़ी गढ़वाल के पाबौ ब्लॉक की पïट्टी बाली कंडारस्यूं स्थित ग्राम सांकरसैंण का रहने वाला है। तकरीबन एक साल पहले ही शहीद राकेश ने दून के बड़ोवाला में कृष्णा विहार घर बनाया था। उनके पिता महेशानंद रतूड़ी भी नौसेना से रिटायर थे। करीब दो साल पहले लंबी बीमारी के चलते उनका निधन हो गया। </strong></p>
<h3><span style="color: #ff0000;"><strong>सीएम ने जताया शोक </strong></span></h3>
<p><strong>मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र रावत ने शहीद राकेश चंद्र रतूड़ी की शहादत पर गहरा शोक व्यक्त किया है। दिवंगत आत्मा की शांति व दुख की इस घड़ी में परिजनों को धैर्य प्रदान करने की कामना ईश्वर से की। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार शहीद के परिवार की हर संभव मदद करेगी। साथ ही वह पाकिस्तान पर भी बरसे। कहा कि वह समझौते का उलंघन कर रहा है। </strong></p>
<h3><span style="color: #ff0000;"><strong>कुछ दिन बाद आना था छुट्टी</strong></span></h3>
<p><strong>शहीद राकेश 22 फरवरी को भतीजी की शादी में शामिल होने के लिए दून आने वाले थे। परिवार में शादी की तैयारियां जोरों पर थी। राकेश हर दिन फोन करके शादी के लिए हो रही खरीदारी की जानकारी लेते थे। नाते-रिश्तेदार बताते हैं कि वह बेहद मिलनसार और खुशमिजाज थे। अलग-अलग जगहों पर पोस्टिंग होने के बाद भी उन्होंने गांव और नाते-रिश्तेदारों से नजदीकियां बनाए रखीं।</strong></p>
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