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	<title>ईरान युद्ध &#8211; Live Halchal</title>
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	<title>ईरान युद्ध &#8211; Live Halchal</title>
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		<title>ईरान युद्ध से कई मोर्चों पर कमजोर पड़ा अमेरिका, रूस और चीन की चांदी</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Live Halchal Web_Wing]]></dc:creator>
		<pubDate>Mon, 13 Apr 2026 06:54:11 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[अन्तर्राष्ट्रीय]]></category>
		<category><![CDATA[ईरान युद्ध]]></category>
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					<description><![CDATA[<img width="618" height="350" src="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2026/04/7uiljk.png" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" fetchpriority="high" srcset="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2026/04/7uiljk.png 721w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2026/04/7uiljk-300x170.png 300w" sizes="(max-width: 618px) 100vw, 618px" />ईरान के साथ हालिया युद्ध और उसके बाद लागू 14 दिन के संघर्षविराम ने वैश्विक शक्ति संतुलन को नए सिरे से प्रभावित किया है। अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा विशेषज्ञों के अनुसार, इस संघर्ष ने 21वीं सदी की महाशक्ति प्रतिस्पर्धा में अमेरिका की स्थिति को कई मोर्चों पर कमजोर किया है, जबकि चीन और रूस को अप्रत्यक्ष रूप &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<img width="618" height="350" src="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2026/04/7uiljk.png" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" srcset="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2026/04/7uiljk.png 721w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2026/04/7uiljk-300x170.png 300w" sizes="(max-width: 618px) 100vw, 618px" />
<p>ईरान के साथ हालिया युद्ध और उसके बाद लागू 14 दिन के संघर्षविराम ने वैश्विक शक्ति संतुलन को नए सिरे से प्रभावित किया है। अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा विशेषज्ञों के अनुसार, इस संघर्ष ने 21वीं सदी की महाशक्ति प्रतिस्पर्धा में अमेरिका की स्थिति को कई मोर्चों पर कमजोर किया है, जबकि चीन और रूस को अप्रत्यक्ष रूप से लाभ मिला है।</p>



<p>सबसे पहले,&nbsp;मध्य पूर्व में अमेरिकी प्रभाव को झटका लगा है। लंबे समय से इस क्षेत्र में सुरक्षा गारंटर की भूमिका निभाने वाले अमेरिका की विश्वसनीयता पर सवाल उठे हैं।&nbsp;खाड़ी देशों- जैसे सऊदी अरब, यूएई और कतर- अब वैकल्पिक सुरक्षा और आर्थिक साझेदारों की तलाश कर सकते हैं, जिससे चीन और रूस की क्षेत्रीय पकड़ मजबूत होने की संभावना है।</p>



<h2 class="wp-block-heading">फोकस से भटका अमेरिका</h2>



<p>चीन पहले ही सऊदी अरब और ईरान के बीच संबंध बहाली में मध्यस्थ की भूमिका निभा चुका है, जबकि रूस ने सीरिया और ईरान के साथ अपने संबंधों के जरिए क्षेत्र में प्रभाव बनाए रखा है।</p>



<p>दूसरा, इस युद्ध ने अमेरिका के रणनीतिक फोकस को भटका दिया है। ट्रंप प्रशासन की राष्ट्रीय सुरक्षा रणनीति एशिया-प्रशांत और पश्चिमी गोलार्ध पर केंद्रित थी, लेकिन ईरान के साथ संघर्ष ने संसाधनों और ध्यान को फिर मध्य पूर्व की ओर मोड़ दिया। इससे न केवल अन्य प्राथमिकताएं प्रभावित हुईं, बल्कि नाटो सहयोगियों के साथ भी मतभेद उभरे, जिसका लाभ चीन और रूस उठा सकते हैं।</p>



<h2 class="wp-block-heading">रूस को मिला राजस्व का लाभ</h2>



<p>तीसरा, आर्थिक असर अमेरिका के लिए अपेक्षाकृत अधिक नुकसानदेह रहा। होर्मुज जलडमरूमध्य, जहां से वैश्विक तेल आपूर्ति का लगभग 20 प्रतिशत गुजरता है, के बाधित होने से ऊर्जा कीमतों में उछाल आया।</p>



<p>इससे रूस को अपने ऊर्जा निर्यात से अतिरिक्त राजस्व मिला, जबकि अमेरिका में ईंधन महंगाई और आपूर्ति संकट का दबाव बढ़ा। चीन, जिसने ऊर्जा स्त्रोतों में विविधता और घरेलू भंडारण को मजबूत किया है, इस झटके को अपेक्षाकृत बेहतर तरीके से झेलने की स्थिति में दिखा।</p>



<h2 class="wp-block-heading">नेतृत्व छवि को पहुंचा नुकसान</h2>



<p>चौथा और सबसे महत्वपूर्ण, अमेरिका की वैश्विक नेतृत्व छवि को नुकसान पहुंचा है। युद्ध के दौरान ट्रंप प्रशासन की आक्रामक नीति और विरोधाभासी बयानबाजी ने उसे विश्वसनीय मध्यस्थ की भूमिका से दूर कर दिया। इसके विपरीत, चीन ने संघर्षविराम को प्रोत्साहित कर खुद को एक उभरते वैश्विक मध्यस्थ के रूप में स्थापित करने की कोशिश की।</p>
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		<title>ईरान युद्ध के बीच भारत ने रूस से खरीदा रिकॉर्ड तेल</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Live Halchal Web_Wing]]></dc:creator>
		<pubDate>Fri, 03 Apr 2026 08:51:28 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[राष्ट्रीय]]></category>
		<category><![CDATA[ईरान युद्ध]]></category>
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					<description><![CDATA[<img width="574" height="336" src="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2026/04/khl.png" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" srcset="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2026/04/khl.png 574w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2026/04/khl-300x176.png 300w" sizes="(max-width: 574px) 100vw, 574px" />मार्च 2026 में भारत की रूस से कच्चे तेल की खरीद फरवरी की तुलना में करीब 90% बढ़ गई, जबकि पश्चिम एशिया से ऊर्जा आपूर्ति में रुकावट के कारण कुल कच्चे तेल का आयात लगभग 15% घट गया। होर्मुज स्ट्रेट में रुकावट के कारण मार्च में भारत के एलपीजी आयात में 40% की गिरावट आई। &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<img width="574" height="336" src="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2026/04/khl.png" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" loading="lazy" srcset="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2026/04/khl.png 574w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2026/04/khl-300x176.png 300w" sizes="auto, (max-width: 574px) 100vw, 574px" />
<p>मार्च 2026 में भारत की रूस से कच्चे तेल की खरीद फरवरी की तुलना में करीब 90% बढ़ गई, जबकि पश्चिम एशिया से ऊर्जा आपूर्ति में रुकावट के कारण कुल कच्चे तेल का आयात लगभग 15% घट गया।</p>



<p>होर्मुज स्ट्रेट में रुकावट के कारण मार्च में भारत के एलपीजी आयात में 40% की गिरावट आई। प्राकृतिक गैस की खेप में भी कमी दर्ज की गई, जिससे नई दिल्ली को वैकल्पिक स्रोतों की तलाश करनी पड़ी।</p>



<p>रिटोइया ने आगे कहा कि रूसी तेल की खरीद अप्रैल में भी जारी रहने की उम्मीद है। साथ ही ईरानी तेल खरीदने की भी संभावना है। अप्रैल से भारत को वेनेजुएला से भी तेल मिलना शुरू हो सकता है, जिससे कच्चे तेल की आपूर्ति से जुड़े कुछ जोखिम कम होने की उम्मीद है।</p>



<h3 class="wp-block-heading">रूस से आयात में तेजी की वजह</h3>



<p>दिसंबर 2025 और जनवरी-फरवरी 2026 में कम खरीद के बाद रूस से आयात में तेजी आई। इसकी मुख्य वजह अमेरिका द्वारा दी गई 30 दिन की छूट थी, जिसके तहत समुद्र में पहले से मौजूद, प्रतिबंधों के दायरे वाले रूसी तेल को खरीदने की अनुमति मिल गई। अंगोला, गैबॉन, घाना और कांगो जैसे अफ्रीकी देशों से भी तेल आयात बढ़ा, हालांकि कुल आपूर्ति में इनका योगदान अभी भी कम रहा।</p>



<h3 class="wp-block-heading">मध्य-पूर्व से पाइपलाइनों के जरिए सप्लाई</h3>



<p>ग्लोबल डेटा एनालिटिक्स फर्म केपर के मुख्य विश्लेषक सुमित रिटोइया ने कहा कि मध्य-पूर्व के उत्पादक अपनी आपूर्ति का कुछ हिस्सा पाइपलाइनों के जरिए भेज रहे हैं, जो होर्मुज स्ट्रेट को बाईपास करती हैं। खासतौर पर सऊदी अरब की ईस्ट-वेस्ट (यानबू) पाइपलाइन और UAE की हबशान-फुजैरा पाइपलाइन का इस्तेमाल हो रहा है।</p>



<p>इन पाइपलाइनों से कुछ हद तक राहत मिली है, जिससे भारत समुद्री बाधाओं के बावजूद इस क्षेत्र से कुछ मात्रा में तेल खरीदना जारी रख पा रहा है।</p>



<h3 class="wp-block-heading">कतर से LNG आपूर्ति में 92% गिरावट</h3>



<p>कतरएनर्जी द्वारा फोर्स मेज्योर घोषित करने और होर्मुज स्ट्रेट में रुकावट के कारण फरवरी की तुलना में भारत को कतर से मिलने वाली लिक्विफाइड नेचुरल गैस (LNG) की आपूर्ति में 92% की भारी गिरावट आई। कतरएनर्जी के नई दिल्ली के साथ लंबे समय के अनुबंध हैं। इस कमी की कुछ हद तक भरपाई अमेरिका, ओमान, अंगोला और नाइजीरिया से बढ़े आयात से हुई।</p>



<p>एलपीजी आयात में आई भारी गिरावट की कुछ हद तक भरपाई घरेलू उत्पादन बढ़ाकर और व्यावसायिक एवं औद्योगिक उपभोक्ताओं को आपूर्ति सीमित करके की गई। इसका मकसद 33.2 करोड़ से ज्यादा घरेलू ग्राहकों के लिए खाना पकाने वाली गैस की उपलब्धता सुनिश्चित करना था।</p>
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		<item>
		<title>ईरान युद्ध के बीच भारत सरकार ने केरोसिन के नियमों में दी ढील</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Live Halchal Web_Wing]]></dc:creator>
		<pubDate>Mon, 30 Mar 2026 05:16:03 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[राष्ट्रीय]]></category>
		<category><![CDATA[ईरान युद्ध]]></category>
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					<description><![CDATA[<img width="618" height="347" src="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2026/03/झ्ग्क्य.png" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" loading="lazy" srcset="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2026/03/झ्ग्क्य.png 720w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2026/03/झ्ग्क्य-300x168.png 300w" sizes="auto, (max-width: 618px) 100vw, 618px" />पश्चिम एशिया में चल रहे संकट के कारण एलपीजी आपूर्ति पर दबाव बढ़ने के बाद केंद्र सरकार ने राज्यों व केंद्रशासित प्रदेशों को खाना पकाने के लिए वैकल्पिक ईंधन के रूप में 48,000 किलोलीटर (केएल) अतिरिक्त केरोसिन आवंटित किया है। यह नियमित मासिक कोटे (लगभग 1 लाख किलोलीटर) से अतिरिक्त है। पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<img width="618" height="347" src="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2026/03/झ्ग्क्य.png" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" loading="lazy" srcset="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2026/03/झ्ग्क्य.png 720w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2026/03/झ्ग्क्य-300x168.png 300w" sizes="auto, (max-width: 618px) 100vw, 618px" />
<p>पश्चिम एशिया में चल रहे संकट के कारण एलपीजी आपूर्ति पर दबाव बढ़ने के बाद केंद्र सरकार ने राज्यों व केंद्रशासित प्रदेशों को खाना पकाने के लिए वैकल्पिक ईंधन के रूप में 48,000 किलोलीटर (केएल) अतिरिक्त केरोसिन आवंटित किया है। यह नियमित मासिक कोटे (लगभग 1 लाख किलोलीटर) से अतिरिक्त है।</p>



<p>पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने सभी राज्यों से कहा है कि वे जिलों में वितरण के लिए जगहों की पहचान करें और इसे मुख्य रूप से राशन दुकानों या निर्दिष्ट स्थानों पर बांटें। लेकिन राज्यों की तरफ से इस योजना को लेकर खास उत्साह नहीं दिख रहा है।</p>



<h3 class="wp-block-heading">सुपीरियर केरोसिन ऑयल का आवंटन</h3>



<p>आधिकारिक जानकारी के मुताबिक, अभी तक सिर्फ 17 राज्यों या केंद्रशासित प्रदेशों ने एसकेओ (सुपीरियर केरोसिन ऑयल) आवंटन के आदेश जारी कर दिए हैं। वहीं, हिमाचल प्रदेश और लद्दाख ने साफ-साफ बता दिया है कि उनके यहां केरोसिन की कोई जरूरत नहीं है। कई अन्य राज्य अभी भी आदेश जारी करने में हिचकिचा रहे हैं।</p>



<p>विशेषज्ञों और राज्य प्रशासन के सूत्रों के अनुसार, सबसे बड़ा मुद्दा यह है कि अब बहुत कम लोगों के पास केरोसिन पर चलने वाले स्टोव या चूल्हे बचे हैं। कई राज्यों (जैसे राजस्थान, हरियाणा, उत्तर प्रदेश आदि) में 2017 के आसपास ही पीडीएस के जरिए केरोसिन का वितरण बंद कर दिया गया था।</p>



<h3 class="wp-block-heading">केरोसिन इस्तेमाल का कोई साधन नहीं</h3>



<p>नतीजतन, लोगों के पास केरोसिन इस्तेमाल का कोई साधन नहीं है। दूसरा, यह अतिरिक्त आवंटन काफी कम माना जा रहा है। तीसरा, केंद्र ने निर्देश दिया है कि हर जिले में सिर्फ दो जगरों पर ही इसका वितरण हो। राज्य प्रशासन का कहना है कि एक बार लोग बाजार से स्टोव खरीदकर केरोसिन इस्तेमाल शुरू कर दें, तो बाद में अगर नियमित सप्लाई न मिली तो स्थिति और खराब हो सकती है। यह लोकप्रिय फैसला नहीं होगा।</p>



<p>हिमाचल प्रदेश और लद्दाख ने साफ कह दिया है कि उन्हें केरोसिन की जरूरत नहीं है।दरअसल, केंद्र सरकार पिछले एक दशक से केरोसिन को धीरे-धीरे चरणबद्ध तरीके से खत्म करने की नीति पर चल रही थी। स्वच्छ ईंधन (एलपीजी) को बढ़ावा देने और प्रत्यक्ष लाभ हस्तांतरण (डीबीटीके) योजना के तहत कई राज्यों को केरोसिन का कोटा सौंपने के बदले नकद प्रोत्साहन दिया गया।</p>



<h3 class="wp-block-heading">पीडीएस केरोसिन मुक्त</h3>



<p>नतीजा यह कि 21 राज्य व केंद्रशासित प्रदेश अब पीडीएस केरोसिन मुक्त हो चुके हैं। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, 2023-24 में पीडीएस के जरिए सिर्फ 10,60,524 किलोलीटर का केरोसिन आवंटन था। सबसे ज्यादा 66 फीसद अकेले पश्चिम बंगाल को (7,04,016 केएल) मिला था। जबकि दस साल पहले (2015-16) यह आंकड़ा 86 लाख किलोलीटर के करीब था।</p>



<p>अब नियमित मासिक कोटा भी करीब एक लाख किलोलीटर है, जो पहले के मुकाबले बहुत कम है।पेट्रोलियम मंत्रालय का कहना है कि यह अतिरिक्त आवंटन अस्थायी है और पश्चिम एशिया संकट के चलते एलपीजी पर दबाव कम करने के लिए किया गया है। लेकिन राज्य स्तर पर वितरण व्यवस्था, स्टोव की उपलब्धता और भविष्य की सप्लाई को लेकर अनिश्चितता के कारण योजना पर अमल में देरी हो रही है।</p>



<p>सरकार ने स्पष्ट किया है कि केरोसिन मुख्य रूप से राशन कार्डधारकों को खाना पकाने और रोशनी के लिए दिया जाएगा, लेकिन फिलहाल कई राज्यों में तैयारियां पूरी नहीं हो पाई हैं।&nbsp;इंडियन ऑयल, भारत पेट्रोलियम और हिंदुस्तान पेट्रोलियम जैसी पब्लिक सेक्टर की तेल मार्केटिंग कंपनियों द्वारा चलाए जा रहे कुछ चुनिंदा पेट्रोल पंपों को केरोसिन स्टोर करने और बेचने की इजाजत दी गई है। हर तय रिटेल आउटलेट को 5,000 लीटर तक केरोसिन स्टोर करने की इजाजत है।</p>
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		<title>ईरान युद्ध में नया मोड़, जमीनी कार्रवाई की तैयारी; ट्रंप ने परमाणु सामग्री पर दिए बड़े संकेत</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Live Halchal Web_Wing]]></dc:creator>
		<pubDate>Mon, 09 Mar 2026 06:09:32 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[अन्तर्राष्ट्रीय]]></category>
		<category><![CDATA[बड़ीखबर]]></category>
		<category><![CDATA[ईरान युद्ध]]></category>
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					<description><![CDATA[<img width="618" height="338" src="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2026/03/Screenshot-2026-03-08-230714.png" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" loading="lazy" srcset="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2026/03/Screenshot-2026-03-08-230714.png 853w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2026/03/Screenshot-2026-03-08-230714-300x164.png 300w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2026/03/Screenshot-2026-03-08-230714-768x420.png 768w" sizes="auto, (max-width: 618px) 100vw, 618px" />अमेरिका, इस्राइल और ईरान के बीच जारी युद्ध अब और खतरनाक दौर में पहुंचता दिखाई दे रहा है। संघर्ष के नौवें दिन ऐसे संकेत मिल रहे हैं कि अमेरिका और इस्राइल अब ईरान के भीतर जमीनी कार्रवाई की तैयारी कर रहे हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने भी परमाणु सामग्री की सुरक्षा का हवाला देते हुए &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<img width="618" height="338" src="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2026/03/Screenshot-2026-03-08-230714.png" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" loading="lazy" srcset="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2026/03/Screenshot-2026-03-08-230714.png 853w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2026/03/Screenshot-2026-03-08-230714-300x164.png 300w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2026/03/Screenshot-2026-03-08-230714-768x420.png 768w" sizes="auto, (max-width: 618px) 100vw, 618px" />
<p>अमेरिका, इस्राइल और ईरान के बीच जारी युद्ध अब और खतरनाक दौर में पहुंचता दिखाई दे रहा है। संघर्ष के नौवें दिन ऐसे संकेत मिल रहे हैं कि अमेरिका और इस्राइल अब ईरान के भीतर जमीनी कार्रवाई की तैयारी कर रहे हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने भी परमाणु सामग्री की सुरक्षा का हवाला देते हुए जरूरत पड़ने पर विशेष सैन्य बल भेजने के संकेत दिए हैं। इससे पश्चिम एशिया में तनाव और बढ़ने की आशंका है।</p>



<p>मीडिया रिपोर्टों के अनुसार अमेरिका और इस्राइल को ईरान के परमाणु भंडार को लेकर गंभीर चिंता है। माना जा रहा है कि ईरान के पास संवर्धित यूरेनियम का बड़ा भंडार मौजूद है। दोनों देशों की योजना है कि जरूरत पड़ने पर विशेष सैन्य बलों के जरिए इस परमाणु सामग्री को अपने नियंत्रण में लिया जाए। इसी कारण ईरान में संभावित जमीनी अभियान को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं।</p>



<p><strong>जमीनी कार्रवाई को लेकर ट्रंप ने क्या कहा?<br></strong>रविवार को एयरफोर्स वन में पत्रकारों से बातचीत के दौरान अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप से ईरान में जमीनी कार्रवाई को लेकर सवाल पूछा गया। ट्रंप ने सीधे तौर पर इसकी पुष्टि नहीं की, लेकिन यह जरूर कहा कि परमाणु सामग्री की सुरक्षा बेहद जरूरी है। उन्होंने संकेत दिया कि यदि हालात की मांग हुई तो अमेरिका अपने विशेष बलों का इस्तेमाल कर सकता है।</p>



<p><strong>ईरान ने अमेरिका और इस्राइल को क्या चेतावनी दी?<br></strong>ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अली अराघची ने कहा कि यदि अमेरिकी या इस्राइली सेना ने ईरान की जमीन पर कदम रखा तो इसके गंभीर परिणाम होंगे। उन्होंने कहा कि ईरानी सेना पूरी तरह तैयार है और देश में घुसने वाले किसी भी दुश्मन का मुकाबला किया जाएगा। अराघची ने दावा किया कि ईरान के सैनिक अपनी जमीन की रक्षा के लिए पूरी ताकत से लड़ेंगे।</p>



<p><strong>क्या युद्धविराम की कोई संभावना है?<br></strong>अराघची ने यह भी कहा कि अमेरिका और इस्राइल फिर से युद्धविराम की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन ईरान फिलहाल इसके लिए तैयार नहीं है। उनके अनुसार जब तक स्थायी समाधान नहीं निकलता, तब तक संघर्ष जारी रहेगा। ईरान का कहना है कि वह अपने लोगों और अपनी जमीन की सुरक्षा के लिए यह लड़ाई लड़ रहा है।</p>



<p><strong>पड़ोसी देशों पर हमलों को लेकर ईरान का क्या तर्क है?<br></strong>ईरान के विदेश मंत्री ने पड़ोसी देशों में अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर हमलों का बचाव भी किया। उन्होंने कहा कि ईरान की मिसाइलें सीधे अमेरिका तक नहीं पहुंच सकतीं, इसलिए पश्चिम एशिया में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया जा रहा है। हालांकि ईरान ने यह भी कहा है कि वह पड़ोसी देशों को और अधिक निशाना बनाने से बचने की कोशिश करेगा।</p>



<p><strong>पश्चिम एशिया की स्थिति किस दिशा में जा सकती है?<br></strong>विश्लेषकों का मानना है कि यदि अमेरिका और इस्राइल ने ईरान में जमीनी कार्रवाई की, तो यह युद्ध और व्यापक रूप ले सकता है। इससे पूरे पश्चिम एशिया में अस्थिरता बढ़ने का खतरा है। अंतरराष्ट्रीय समुदाय भी इस संघर्ष पर नजर बनाए हुए है, क्योंकि इसका असर वैश्विक सुरक्षा और ऊर्जा बाजार पर भी पड़ सकता है।</p>
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