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	<title>इस्तेमाल &#8211; Live Halchal</title>
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		<title>हरियाणा: पराली नहीं बनेगी मुसीबत, अब भट्ठों में ईंधन के रूप में होगी इस्तेमाल</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Live Halchal Web_Wing]]></dc:creator>
		<pubDate>Sat, 22 Nov 2025 06:51:04 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[राज्य]]></category>
		<category><![CDATA[हरियाणा]]></category>
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					<description><![CDATA[<img width="606" height="335" src="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2025/11/dfcvv-2-large.jpg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" fetchpriority="high" srcset="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2025/11/dfcvv-2.jpg 606w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2025/11/dfcvv-2-medium.jpg 300w" sizes="(max-width: 606px) 100vw, 606px" />खेतों में पराली जलाने से होने वाले प्रदूषण पर अंकुश लगाने के लिए अब इसका उपयोग ईंट-भट्ठों में ईंधन के तौर पर किया जाएगा। केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) के निर्देश पर कृषि विभाग और प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने पराली के निपटान की नई योजना तैयार की है। इसके तहत हर जिले की पराली वहीं &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<img width="606" height="335" src="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2025/11/dfcvv-2-large.jpg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" srcset="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2025/11/dfcvv-2.jpg 606w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2025/11/dfcvv-2-medium.jpg 300w" sizes="(max-width: 606px) 100vw, 606px" />
<p>खेतों में पराली जलाने से होने वाले प्रदूषण पर अंकुश लगाने के लिए अब इसका उपयोग ईंट-भट्ठों में ईंधन के तौर पर किया जाएगा। केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) के निर्देश पर कृषि विभाग और प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने पराली के निपटान की नई योजना तैयार की है। इसके तहत हर जिले की पराली वहीं उपयोग की जाएगी और प्रबंधन पर अतिरिक्त खर्च भी नहीं आएगा। साथ ही ईंट भट्ठों में कोयले की खपत भी कम होगी।</p>



<p>प्रदेश के करीब 2480 ईंट-भट्ठों पर यह आदेश लागू होंगे। पराली के निपटान को लेकर सीपीसीबी ने ईंट भट्ठों में इसके उपयोग का प्रस्ताव दिया था, जिसे प्रदेश सरकार ने मंजूरी देकर लागू कर दिया है। इसी वर्ष से ईंट भट्ठों में 20 प्रतिशत पराली जलाना अनिवार्य कर दिया गया है। पराली को सीधे जलाने की बजाय इसे कंप्रेस कर पैलेट और ब्लॉक बनाया जाएगा। जिला स्तर पर नामित एजेंसियां पराली को इकट्ठा कर पैलेट तैयार करेंगी। यह पैलेट कोयले की तरह ही ऊर्जा देंगे और भट्ठा संचालकों के लिए सस्ता विकल्प साबित होंगे। इस संबंध में ईंट भट्ठा मालिकों को निर्देश जारी किए जा चुके हैं।</p>



<p><strong>निगरानी सख्त, नियम तोड़ने पर होगी कार्रवाई</strong></p>



<p>सीपीसीबी की ओर से इन आदेशों की पालना सुनिश्चित करने के लिए औचक निरीक्षण किए जाएंगे। निरीक्षण में यह जांचा जाएगा कि भट्ठा मालिक किस प्रकार का ईंधन और कितनी मात्रा में उपयोग कर रहे हैं। खाद्य एवं आपूर्ति विभाग तथा प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड संयुक्त रूप से जांच करेंगे। मानकों का पालन न करने पर संबंधित ईंट भट्ठे का लाइसेंस निलंबित किया जा सकता है और जुर्माना भी लगाया जाएगा।</p>



<p><strong>थर्मल में लागू हो चुके आदेश</strong></p>



<p>इससे पहले प्रदेश के थर्मल पावर प्लांट में पराली पैलेट्स जलाने के आदेशाें को लागू किया जा चुका है। इसमें पहले चरण में 10 प्रतिशत तक पराली का उपयोग किया जा रहा है। दूसरे चरण में इसे 20 प्रतिशत तक किया जाएगा। हिसार खेदड़ थर्मल पावर प्लांट में 2024 से इस नियम को लागू किया जा चुका है। पिछले चार साल से हिसार में धान का एरिया लगातार बढ़ रहा है। इस बार जिले में धान का रकबा 3 लाख 30 हजार एकड़ था।</p>



<p><strong>पराली जलाने का लक्ष्य</strong></p>



<p>नवंबर 2025 से 20 प्रतिशत</p>



<p>नवंबर 2026 से 30 प्रतिशत</p>



<p>नवंबर 2027 से 40 प्रतिशत</p>



<p>नवंबर 2028 से 50 प्रतिशत</p>



<p><strong>अधिकारी के अनुसार</strong></p>



<p>हिसार जिले में 8 एजेंसी पैलेट बनाने काम कर रही हैं। अन्य जिलों में भी पैलेट्स तैयार किए जा रहे हैं। कृषि अवशेषों से बने पैलेट प्रयोग ईंट-भट्ठों में करने के बारे में निर्देश जारी किए गए हैं। मुख्यालय से मिले निर्देशों की पालना कराई जाएगी। इस बारे में जिला स्तर से रिपोर्ट बनाकर भेजी जाएगी।</p>
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		<title>अगर करते हैं iPhone, iPad या Mac का इस्तेमाल, तो तुरंत कर लें अपडेट</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Live Halchal Web_Wing]]></dc:creator>
		<pubDate>Sat, 15 Nov 2025 11:20:49 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[गैजेट]]></category>
		<category><![CDATA[टेक्नोलॉजी]]></category>
		<category><![CDATA[इस्तेमाल]]></category>
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					<description><![CDATA[<img width="618" height="333" src="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2025/11/ccc-1-large.jpg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" srcset="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2025/11/ccc-1.jpg 653w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2025/11/ccc-1-medium.jpg 300w" sizes="(max-width: 618px) 100vw, 618px" />इंडियन कंप्यूटर इमरजेंसी रिस्पॉन्स टीम (CERT-In) ने iPhone, iPad, Mac, Apple Watch, Safari, tvOS और Xcode सहित कई Apple प्रोडक्ट्स के लिए एक हाई-सेवेरिटी सिक्योरिटी वार्निंग जारी की है। एडवाइजरी में कहा गया है कि कई वल्नरेबिलिटीज़ अटैकर्स को आर्बिट्रेरी कोड एक्सीक्यूट करने, एलिवेटेड प्रिविलेज़ हासिल करने, सेंसिटिव जानकारी एक्सेस करने, सिक्योरिटी रेस्ट्रिक्शन्स बायपास करने &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<img width="618" height="333" src="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2025/11/ccc-1-large.jpg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" loading="lazy" srcset="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2025/11/ccc-1.jpg 653w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2025/11/ccc-1-medium.jpg 300w" sizes="auto, (max-width: 618px) 100vw, 618px" />
<p>इंडियन कंप्यूटर इमरजेंसी रिस्पॉन्स टीम (CERT-In) ने iPhone, iPad, Mac, Apple Watch, Safari, tvOS और Xcode सहित कई Apple प्रोडक्ट्स के लिए एक हाई-सेवेरिटी सिक्योरिटी वार्निंग जारी की है। एडवाइजरी में कहा गया है कि कई वल्नरेबिलिटीज़ अटैकर्स को आर्बिट्रेरी कोड एक्सीक्यूट करने, एलिवेटेड प्रिविलेज़ हासिल करने, सेंसिटिव जानकारी एक्सेस करने, सिक्योरिटी रेस्ट्रिक्शन्स बायपास करने या प्रभावित डिवाइसों पर डिनायल-ऑफ-सर्विस की अनुमति दे सकती हैं।</p>



<p><strong>प्रभावित प्रोडक्ट्स</strong></p>



<p>CERT-In के मुताबिक, पुराने सॉफ्टवेयर वर्जन पर चलने वाले नीचे दिए गए Apple प्रोडक्ट्स प्रभावित हैं:</p>



<p><strong>26.1 से पहले के iOS और iPadOS वर्जन</strong></p>



<p>(इससे iPhone 11 और बाद के मॉडल, iPad Pro 12.9-इंच 3rd जनरेशन और बाद के, iPad Pro 11-इच 1st जनरेशन और बाद के, iPad Air 3rd जनरेशन और बाद के, iPad 8th जनरेशन और बाद के, और iPad mini 5th जनरेशन और बाद के प्रभावित हैं)</p>



<p>15.1 से पहले के macOS Sequoia वर्जन, 13.7.1 से पहले के macOS Ventura, और 12.7.2 से पहले के macOS Monterey<br>11.1 से पहले के watchOS वर्जन<br>18.1 से पहले के tvOS वर्जन<br>17.6.1 से पहले के Safari वर्जन<br>2.1 से पहले के visionOS वर्जन<br>15.4 से पहले के Xcode वर्ज़न</p>



<p>एडवाइजरी में कहा गया है कि ये वल्नरेबिलिटीज Kernel, WebKit, CoreAnimation, Siri और Apple डिवाइसों में इस्तेमाल होने वाले दूसरे सिस्टम कंपोनेंट्स को प्रभावित करती हैं।</p>



<p>CERT-In ने संभावित जोखिमों के कारण इसे हाई सीवेरिटी रेटिंग दी है। अगर वल्नरेबिलिटीज को एक्सप्लॉइट किया गया तो अटैकर्स ये कर सकते हैं:</p>



<p>डिवाइस पर आर्बिट्रेरी कोड एक्सीक्यूट करना<br>एलिवेटेड प्रिविलेज हासिल करना<br>सेंसिटिव जानकारी एक्सेस करना या लीक करना<br>डेटा में बदलाव करना या उसे करप्ट करना<br>सिक्योरिटी रेस्ट्रिक्शन्स को बायपास करना<br>डिनायल-ऑफ-सर्विस कराना या सिस्टम क्रैश कराना<br>सिस्टम कंपोनेंट्स को स्पूफ करना</p>



<p>एडवाइजरी में कई CVEs का भी जिक्र है, जिनमें CVE-2025-43442, CVE-2025-43455, CVE-2025-43462, CVE-2025-43449, CVE-2025-43379 और सिस्टम की अलग-अलग लेयर्स को प्रभावित करने वाले दूसरे CVEs शामिल हैं।</p>



<p><strong>यूजर्स को क्या करना चाहिए?</strong></p>



<p>CERT-In का सुझाव है कि यूजर्स अपने डिवाइस को Apple द्वारा जारी किए गए लेटेस्ट उपलब्ध सॉफ़्टवेयर वर्ज़\न पर तुरंत अपडेट करें। इन पैचेज़ में रिपोर्ट की गई सभी वल्नरेबिलिटीज़ के लिए सिक्योरिटी फिक्स शामिल हैं और ये iOS, iPadOS, macOS, watchOS, tvOS, visionOS, Safari और Xcode पर लागू होते हैं।</p>



<p>यूजर्स को यह भी सलाह दी गई है कि वे ऑटोमेटिक अपडेट्स इनेबल रखें, ऐप्स सिर्फ ट्रस्टेड सोर्स से डाउनलोड करें, और अनजान लिंक पर क्लिक करने से बचें ताकि संभावित अटैक्स का जोखिम कम हो सके।</p>
]]></content:encoded>
					
		
		
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		<item>
		<title>यूपी में नारकोटिक्स दवाओं का इस्तेमाल नशे के रूप में होने के मिले सबूत </title>
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		<dc:creator><![CDATA[Live Halchal Web_Wing]]></dc:creator>
		<pubDate>Mon, 13 Oct 2025 05:38:58 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[उत्तरप्रदेश]]></category>
		<category><![CDATA[राज्य]]></category>
		<category><![CDATA[इस्तेमाल]]></category>
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					<description><![CDATA[<img width="618" height="403" src="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2025/10/Capture-10-large.jpg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" loading="lazy" srcset="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2025/10/Capture-10.jpg 684w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2025/10/Capture-10-medium.jpg 300w" sizes="auto, (max-width: 618px) 100vw, 618px" />उत्तर प्रदेश में नारकोटिक्स दवाओं का इस्तेमाल नशे के रूप में होने के सबूत मिल रहे हैं। यह मानव जीवन के लिए बड़ा खतरा साबित हो सकता है। चिकित्सा विशेषज्ञ बताते हैं कि नारकोटिक्स दवाओं का इस्तेमाल नशे के रूप में करने वालों के मस्तिष्क में ऑक्सीजन की मांग और आपूर्ति का संतुलन गड़बड़ा जाता &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<img width="618" height="403" src="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2025/10/Capture-10-large.jpg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" loading="lazy" srcset="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2025/10/Capture-10.jpg 684w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2025/10/Capture-10-medium.jpg 300w" sizes="auto, (max-width: 618px) 100vw, 618px" />
<p>उत्तर प्रदेश में नारकोटिक्स दवाओं का इस्तेमाल नशे के रूप में होने के सबूत मिल रहे हैं। यह मानव जीवन के लिए बड़ा खतरा साबित हो सकता है। चिकित्सा विशेषज्ञ बताते हैं कि नारकोटिक्स दवाओं का इस्तेमाल नशे के रूप में करने वालों के मस्तिष्क में ऑक्सीजन की मांग और आपूर्ति का संतुलन गड़बड़ा जाता है। हृदय, किडनी और लिवर सहित अन्य अंग क्षतिग्रस्त हो जाते हैं। फिर धीरे-धीरे जवाब देने लगते हैं।</p>



<p>खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन विभाग (एफएसडीए) की जांच में विभिन्न स्थानों पर नारकोटिक्स दवाओं की खरीद और बिक्री में मनमानी मिली है। कोडिन सिरप उत्तर प्रदेश के रास्ते नेपाल और बांग्लादेश तक पहुंच रहा है। प्रदेश के विभिन्न जिलों में भी नारकोटिक्स दवाए डॉक्टर के पर्चे के बजाय अवैध तरीके से बेची जा रही है। ये दवाएं नशे के रूप में प्रयोग होने की आशंका से इनकार नहीं किया जा रहा है।</p>



<p>लखनऊ में पकड़े गए आरोपी ने भी एफएसडीए की टीम को दो व्यक्तियों के नाम बताते हुए स्वीकार किया कि यह सिरप नशे के रूप में प्रयोग होता है। चिकित्सा विशेषज्ञों का कहना है कि कोडिन और दर्द निवारक (ओपिओइड) या शामक दवाओं का निर्धारित मात्रा में अधिक और नियमित तौर पर इस्तेमाल करने से हृदय गति और श्वास गति धीमी हो जाती है। ज्यादा इस्तेमाल करने पर हृदय, गुर्दे, फेफड़े और मस्तिष्क को क्षति पहुंचती है।</p>



<p>कोडीनयुक्त कफ सिरप, मॉर्फीन, रेमॉडाल, अलराजोन और क्लोजापॉम आदि दवाएं डॉक्टर के पर्चे पर ही मरीज को दी जाती हैं। रिपोर्ट के मुताबिक उत्तर प्रदेश में वर्ष 2024-25 में 624 एनडीपीएस के केस दर्ज किए हैं। करीब 8054 लोग गिरफ्तार किये गए।</p>



<p><strong>कानपुर के साथ लखनऊ में भी होती थी दवाइयों की सप्लाई</strong></p>



<p>नकली दवाइयां सप्लाई करने के मामले में एसटीएफ की टीम द्वारा गिरफ्तार कानपुर की वर्तिका के फोन से कई खुलासे हुए हैं। इस मामले में पता चला है कि वह कानपुर के साथ लखनऊ और आस-पास के कई बड़े होलसेल मेडिकल स्टोर पर दवाएं सप्लाई करते थे। आरोपी महिला के फोन से कई ऐसे दस्तावेज मिले है जिनसे कई बड़े कारोबारियों का नाम सामने आ रहे हैं। वर्तिका के फोन से पुलिस को कई ऐसे दस्तावेज मिले हैं जिससे स्पष्ट है कि वर्तिका नकली दवाइयां सप्लाई करने के मामले में बड़ा कारोबार करती है। उसके साथ कई ऐसे लोग हैं जो यह कारोबार करते हैं। अब कानपुर के कई इलाकों में दोबारा छापामारी की जा सकती है।</p>



<p><strong>क्या कहते हैं जानकार</strong></p>



<p>लोहिया संस्थान के मुख्य चिकित्सा अधीक्षक डॉ. विक्रम सिंह का कहना है कि हर व्यक्ति के शरीर की क्षमता अलग-अलग होती है। दवा लिखते वक्त मरीज की स्थिति, वजन आदि का ध्यान रखा जाता है। अधिक मात्रा होने से शरीर में आक्सीजन की मांग और आपूर्ति का संतुलन गड़बड़ा जाता है। धड़कन बढ़ जाती है। हार्ट अटैक का खतरा रहता है। दिमाग की नशें भी प्रभावित होती हैं।</p>



<p>लोहिया संस्थान के गैस्ट्रोइंट्रोलॉजिस्ट डॉ. प्रीतम दास का कहना है कि कोडिन सिरप एवं नशे के लिए दवा देने वाले मात्रा का ध्यान नहीं रखते हैं। 50 मिलीलीटर से नशा नहीं हुआ तो 100 मिलीलीटर ले लेते हैं। इसी तरह नशे के लिए एक टैबलेट के बजाय दो टैबलेट ले लेते हैं। इससे लिवर खराब होता है और फिर किडनी व शरीर के दूसरे अंग भी जवाब देने लगता है।</p>



<p>क्रिटिकल केयर विशेषज्ञ डॉ. सुशीला यादव का कहना है कि नारकोटिक्स दवाएं कैंसर के गंभीर मरीजों को दर्द कम करने के लिए दी जाती हैं। इसके अलावा नींद की समस्या और मिर्गी जैसी दिक्कतों में भी डॉक्टर ये दवाएं लिखते हैं। अधिक डोज लेने से नशा होता है। नशा करने वाले धीरे धीरे जोड़ बढ़ाते जाते हैं, जिससे उनके विभिन्न अंगों को नुकसान पहुंचता है। ऐसे मरीजों का उपचार शुरू होता है तो लंबे समय तक आईसीयू में रखना पड़ता है।</p>



<p>फार्मासिस्ट फेडरेशन उत्तर प्रदेश के अध्यक्ष सुनील यादव का कहना है कि फार्मास्यूटिकल्स में कोडिन, ट्रामाडोल, फेंसिडिल को नशे के कारोबार में अहम माना गया है। खास बात यह है कि लखनऊ में पकड़ी दवाओं में फेंसिडिल कफ सिरप है। ये दवाएं बिना पर्चे के नहीं दी जाती हैं। इनकी खरीद और बिक्री का पर्चा रखना भी जरूरी है।</p>
]]></content:encoded>
					
		
		
			</item>
		<item>
		<title>रात की बची सब्जी का ब्रेकफास्ट में ऐसे करें इस्तेमाल</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Live Halchal Web_Wing]]></dc:creator>
		<pubDate>Mon, 29 Sep 2025 08:26:25 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[खाना -खजाना]]></category>
		<category><![CDATA[रेसिपी]]></category>
		<category><![CDATA[इस्तेमाल]]></category>
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					<description><![CDATA[<img width="618" height="353" src="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2025/09/hnnn-4-large.jpg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" loading="lazy" srcset="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2025/09/hnnn-4.jpg 667w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2025/09/hnnn-4-medium.jpg 300w" sizes="auto, (max-width: 618px) 100vw, 618px" />क्या आपने कभी सोचा है कि रात के खाने में बची हुई सब्जी, जिसे हम अक्सर बेकार समझकर फ्रिज में रख देते हैं, अगले दिन का सबसे स्वादिष्ट नाश्ता बन सकती है? जी हां, बिल्कुल! अगली बार जब आपकी गोभी, आलू या कोई भी सब्जी बच जाए, तो उसे फेंकने की गलती कभी न करें। &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<img width="618" height="353" src="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2025/09/hnnn-4-large.jpg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" loading="lazy" srcset="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2025/09/hnnn-4.jpg 667w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2025/09/hnnn-4-medium.jpg 300w" sizes="auto, (max-width: 618px) 100vw, 618px" />
<p>क्या आपने कभी सोचा है कि रात के खाने में बची हुई सब्जी, जिसे हम अक्सर बेकार समझकर फ्रिज में रख देते हैं, अगले दिन का सबसे स्वादिष्ट नाश्ता बन सकती है? जी हां, बिल्कुल! अगली बार जब आपकी गोभी, आलू या कोई भी सब्जी बच जाए, तो उसे फेंकने की गलती कभी न करें।</p>



<p>हम आपको ऐसे 3 आसान तरीके (Breakfast from Leftovers) बता रहे हैं, जिनसे आप बची हुई सब्जी को एकदम नया लुक दे सकते हैं। सबसे खास बात है कि इस नाश्ते को खाकर घरवाले उंगलियां चाटते रह जाएंगे और कोई पहचान भी नहीं पाएगा कि यह रात की बची हुई सब्जी से बना है।</p>



<p><strong>बची हुई सब्जी का पराठा<br></strong>बचे हुए खाने को इस्तेमाल करने का यह सबसे आसान और पॉपुलर तरीका है। सब्जी (जैसे आलू, गोभी, या मिक्स वेज) को अच्छी तरह मैश कर लें। अब इसे आटा गूंधते समय मिला लें। आप चाहें तो थोड़ा प्याज, धनिया और मसाले भी डाल सकते हैं। इस आटे से बने पराठे न सिर्फ स्वादिष्ट होते हैं, बल्कि पोषण से भी भरपूर होते हैं। इसे दही, चटनी, या अचार के साथ परोसें।</p>



<p><strong>वेजिटेबल टोस्ट<br></strong>अगर आपके पास समय कम है, तो यह तरीका आपके लिए है। बची हुई सब्जी को थोड़ा सा मैश करें और उसमें थोड़ा मोजेरेला चीज या पनीर मिला लें। अब इस मिश्रण को ब्रेड स्लाइस पर फैलाएं। ऊपर से थोड़ा चाट मसाला और चिली फ्लेक्स डालें। इसे टोस्टर या तवे पर तब तक सेकें जब तक कि ब्रेड कुरकुरी न हो जाए और चीज पिघल न जाए। खास बात है कि बच्चों को यह बहुत पसंद आता है।</p>



<p><strong>स्पाइसी कटलेट या टिक्की<br></strong>यह तरीका थोड़ा क्रिएटिव है, लेकिन नतीजा कमाल का है। बची हुई सब्जी को अच्छे से मैश करें। इसमें थोड़ा उबला हुआ आलू (बाइंडिंग के लिए), ब्रेड क्रम्ब्स, और थोड़े मसाले मिलाएं। अब इस मिश्रण से कटलेट या टिक्की का आकार दें। इन्हें शैलौ फ्राई करें या एयर फ्रायर में बनाएं। इन करारे और मसालेदार कटलेट्स को टमाटर केचप या हरी चटनी के साथ परोसें। यकीन मानिए, यह नाश्ता सबको चौंका देगा।</p>
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		<title>मेंटल हेल्थ से जुड़ी समस्याओं के लिए एआई का इस्तेमाल कितना सही</title>
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		<pubDate>Thu, 18 Sep 2025 04:39:12 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[<img width="618" height="364" src="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2025/09/ddd-2-large.jpg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" loading="lazy" srcset="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2025/09/ddd-2.jpg 756w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2025/09/ddd-2-medium.jpg 300w" sizes="auto, (max-width: 618px) 100vw, 618px" />कुछ दिनों पहले की बात है, एक क्रम में ऐसी जानकारियां लेने लगा, जो अमेरिकी किशोर एडम रेनी ने फंदा लगाकर आत्महत्या कर ली, उसने कोई नोट नहीं छोड़ा था । इसलिए, हर कोई इसके पीछे के कारणों को जानना चाह रहा था। दरअसल, बीते कुछ महीनों से एडम स्कूल जाने के बजाय आनलाइन पढ़ाई &#8230;]]></description>
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<p>कुछ दिनों पहले की बात है, एक क्रम में ऐसी जानकारियां लेने लगा, जो अमेरिकी किशोर एडम रेनी ने फंदा लगाकर आत्महत्या कर ली, उसने कोई नोट नहीं छोड़ा था । इसलिए, हर कोई इसके पीछे के कारणों को जानना चाह रहा था। दरअसल, बीते कुछ महीनों से एडम स्कूल जाने के बजाय आनलाइन पढ़ाई कर रहा था और स्कूल वर्क के लिए वह चैटजीपीटी 4ओ का प्रयोग करने लगा था।</p>



<p>अचानक हुए इस हादसे के बाद उसके पिता मैट रेनी को लगा कि शायद फोन से एडम की मौत से जुड़े राज मिल जाएं। इसी दौरान एआई के साथ हुए एडम के संवाद पर नजर गई, जहां वह फांसी लगाने से जुड़े सवाल पूछ रहा था। हालांकि, चैटजीपीटी उसे परिजनों के साथ अपनी समस्या साझा करने के लिए कहता रहा। लेकिन, एडम ने इस तरह के सेफगार्ड को भी पार करने का तरीका सीख लिया था और वह एक कहानी के लिए आइडिया मांगने के क्रम में ऐसी जानकारियां लेने लगा, जो उसकी मौत का ही कारण बनीं।</p>



<p>दरअसल, शुरुआत में ही हर चैटबॉट को ज्ञान के भंडार के रूप में देखा जाने लगा, जो नई-नई जानकारियां दे सकता था, लिखने में मदद कर सकता था। पर, आज चैटबॉट बहुत आगे जा चुके हैं, वे पर्सनल असिस्टेंट या थेरेपिस्ट के तौर पर बेहद निजी संवाद करने लगे हैं।</p>



<p>ये कितने उपयोगी हैं, यह बड़ा ही अनसुलझा सवाल है। ओपनएआई और एमआइटी का एक सीमित अध्ययन बताता है कि प्रतिदिन घंटों एआई चैटबॉट का प्रयोग करने से लोग अकेलापन या सामाजिक अलगाव महसूस करने लगते हैं। टेक्नोलाजी अब मेनिया या साइकोसिस का कारण बनने लगी है। हालांकि, आत्महत्या या हिंसक बर्ताव जैसे मामले बहुत ही असामान्य होते हैं।</p>



<p><strong>एआई थेरेपिस्ट नहीं है<br></strong>चैटबॉट से आप मदद मांगेंगे तो आपको सहानुभूति तो मिल जाएगी, लेकिन मदद नहीं मिलेगी, यह तय मानिए। एआई की एक सीमा हैं, उसके बाहर यह खतरनाक रूप ले सकता है। एआई चैटबॉट को लेकर विशेषज्ञों का एक पक्ष इसकी निगरानी की मांग करने लगा है, तो वहीं दूसरा तर्क है कि अगर एआई और यूजर्स के संवाद पर नजर होगी, तो यह निजता के अधिकारों का उल्लंघन होगा।</p>



<p>ओपनएआई की मानें तो यूजर के अनुरोध पर कंपनी एआई माडल की परफार्मेंस शिकायतों का निवारण कर सकती है। लार्ज लैंग्वेज माडल अक्सर मैथ्स और कोडिंग में बेहतर प्रदर्शन करते हैं, वे टेक्स्ट और वास्तविक प्रतीत होने वाले वीडियो भी तैयार कर सकते हैं, पर वे इंसान की जगह नहीं ले सकते हैं, इसे हर यूजर को स्वीकार करना पड़ेगा।</p>
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