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	<title>आ रही है मकर संक्रांति &#8211; Live Halchal</title>
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		<title>आ रही है मकर संक्रांति, जानिए कौन से 4 काम होते हैं इस दिन शुभ</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Alpana Vaish]]></dc:creator>
		<pubDate>Wed, 06 Jan 2021 06:29:10 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[अध्यात्म]]></category>
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		<category><![CDATA[जानिए कौन से 4 काम होते हैं इस दिन शुभ]]></category>
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					<description><![CDATA[<img width="618" height="494" src="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2021/01/IKOLIK.jpg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" fetchpriority="high" srcset="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2021/01/IKOLIK.jpg 740w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2021/01/IKOLIK-300x240.jpg 300w" sizes="(max-width: 618px) 100vw, 618px" />माघ माह में कृष्ण पंचमी को मकर सक्रांति देश के लगभग सभी राज्यों में अलग-अलग सांस्कृतिक रूपों में मनाई जाती है। इस त्योहार का हर प्रांत में अलग-अलग महत्व है। खासकर इस त्योहार में सूर्य वंदना, पतंग उड़ाने और तिल-गुड़ खाने तथा दान-पुण्य करने का खास महत्व होता है। मकर-संक्रांति का पर्व 14 जनवरी 2021 &#8230;]]></description>
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<p>माघ माह में कृष्ण पंचमी को मकर सक्रांति देश के लगभग सभी राज्यों में अलग-अलग सांस्कृतिक रूपों में मनाई जाती है। इस त्योहार का हर प्रांत में अलग-अलग महत्व है। खासकर इस त्योहार में सूर्य वंदना, पतंग उड़ाने और तिल-गुड़ खाने तथा दान-पुण्य करने का खास महत्व होता है।</p>



<figure class="wp-block-image size-large"><img decoding="async" width="740" height="592" src="http://www.livehalchal.com/wp-content/uploads/2021/01/IKOLIK.jpg" alt="" class="wp-image-409108" srcset="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2021/01/IKOLIK.jpg 740w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2021/01/IKOLIK-300x240.jpg 300w" sizes="(max-width: 740px) 100vw, 740px" /></figure>



<p>मकर-संक्रांति का पर्व 14 जनवरी 2021 को मनाया जाएगा। इस दिन सूर्यदेव अपनी राशि परिवर्तन कर प्रात: 8 बजकर 05 मिनट पर मकर राशि में प्रवेश करेंगे। सूर्य के मकर राशि में प्रवेश करते ही देशभर में मकर-संक्रांति के पर्व का शुभारंभ हो जाएगा।</p>



<p><strong>मकर-संक्रांति का पुण्यकाल-</strong></p>



<p>वर्ष 2021 मेंमकर-संक्रांति का पुण्यकाल प्रात: 8 बजकर 05 मिनट से रात्रि 10 बज कर 46 मिनट तक रहेगा।</p>



<p><strong>संक्रांति का वाहन-</strong><br>वर्ष 2021 में संक्रांति का वाहन सिंह (व्याघ्र) एवं उपवाहन गज (हाथी) रहेगा। इस वर्ष संक्रांति का आगमन श्वेत वस्त्र व पाटली कंचुकी धारण किए बालावस्था में हो रहा है। संक्रांति कस्तूरी लेपन कर गदा आयुध (शस्त्र) लिए स्वर्णपात्र में अन्न भक्षण करते हुए आग्नेय दिशा को दृष्टिगत किए पूर्व दिशा के ओर गमन करते आ रही है।</p>



<p><strong>इस दिन करते हैं ये 4 काम<br></strong></p>



<p><strong>1.सूर्य आराधना का दिन :</strong> इस दिन सूर्य उत्तरायण होता है। चन्द्र के आधार पर माह के 2 भाग हैं- कृष्ण और शुक्ल पक्ष। इसी तरह सूर्य के आधार पर वर्ष के 2 भाग हैं- उत्तरायन और दक्षिणायन। इस दिन से सूर्य उत्तरायन हो जाता है। उत्तरायन अर्थात उस समय से धरती का उत्तरी गोलार्द्ध सूर्य की ओर मुड़ जाता है, तो उत्तर ही से सूर्य निकलने लगता है। इसे सोम्यायन भी कहते हैं। 6 माह सूर्य उत्तरायन रहता है और 6 माह दक्षिणायन। अत: यह पर्व &#8216;उत्तरायन&#8217; के नाम से भी जाना जाता है। मकर संक्रांति से लेकर कर्क संक्रांति के बीच के 6 मास के समयांतराल को उत्तरायन कहते हैं। इस दिन से दिन धीरे-धीरे बड़ा होने लगता है और रातें छोटी।</p>



<p><strong>2. पतंग महोत्सव का पर्व :</strong> यह पर्व &#8216;पतंग महोत्सव&#8217; के नाम से भी जाना जाता है। पतंग उड़ाने के पीछे मुख्य कारण है कुछ घंटे सूर्य के प्रकाश में बिताना। यह समय सर्दी का होता है और इस मौसम में सुबह का सूर्य प्रकाश शरीर के लिए स्वास्थवर्द्धक और त्वचा व हड्डियों के लिए अत्यंत लाभदायक होता है। अत: उत्सव के साथ ही सेहत का भी लाभ मिलता है।<br><strong>3. स्नान, दान, पुण्य और पूजा :</strong> माना जाता है कि इस दिन सूर्य अपने पुत्र शनिदेव से नाराजगी त्यागकर उनके घर गए थे इसलिए इस दिन पवित्र नदी में स्नान, दान, पूजा आदि करने से पुण्य हजार गुना हो जाता है। इस दिन विशेष तौर पर गायों को हरा चारा खिलाया जाता है। इस दिन गंगासागर में मेला भी लगता है। इसी दिन मलमास भी समाप्त होने तथा शुभ माह प्रारंभ होने के कारण लोग दान-पुण्य से अच्छी शुरुआत करते हैं। इस दिन को सुख और समृद्धि का माना जाता है।</p>



<p><strong>4. तिल गुड़ खाना : </strong>सर्दी के मौसम में वातावरण का तापमान बहुत कम होने के कारण शरीर में रोग और बीमारियां जल्दी लगती हैं इसलिए इस दिन गुड़ और तिल से बने मिष्ठान्न या पकवान बनाए, खाए और बांटे जाते हैं। इनमें गर्मी पैदा करने वाले तत्वों के साथ ही शरीर के लिए लाभदायक पोषक पदार्थ भी होते हैं। उत्तर भारत में इस दिन खिचड़ी का भोग लगाया जाता है। गुड़-तिल, रेवड़ी, गजक का प्रसाद बांटा जाता है।</p>



<p></p>
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		<title>आ रही है मकर संक्रांति, जानिए कौन से 4 काम होते हैं इस दिन शुभ</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Alpana Vaish]]></dc:creator>
		<pubDate>Tue, 05 Jan 2021 05:13:16 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[अध्यात्म]]></category>
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					<description><![CDATA[<img width="618" height="494" src="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2021/01/jkkj.jpg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" loading="lazy" srcset="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2021/01/jkkj.jpg 740w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2021/01/jkkj-300x240.jpg 300w" sizes="auto, (max-width: 618px) 100vw, 618px" />माघ माह में कृष्ण पंचमी को मकर सक्रांति देश के लगभग सभी राज्यों में अलग-अलग सांस्कृतिक रूपों में मनाई जाती है। इस त्योहार का हर प्रांत में अलग-अलग महत्व है। खासकर इस त्योहार में सूर्य वंदना, पतंग उड़ाने और तिल-गुड़ खाने तथा दान-पुण्य करने का खास महत्व होता है। मकर-संक्रांति का पर्व 14 जनवरी 2021 &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<img width="618" height="494" src="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2021/01/jkkj.jpg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" loading="lazy" srcset="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2021/01/jkkj.jpg 740w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2021/01/jkkj-300x240.jpg 300w" sizes="auto, (max-width: 618px) 100vw, 618px" />
<p>माघ माह में कृष्ण पंचमी को मकर सक्रांति देश के लगभग सभी राज्यों में अलग-अलग सांस्कृतिक रूपों में मनाई जाती है। इस त्योहार का हर प्रांत में अलग-अलग महत्व है। खासकर इस त्योहार में सूर्य वंदना, पतंग उड़ाने और तिल-गुड़ खाने तथा दान-पुण्य करने का खास महत्व होता है।</p>



<figure class="wp-block-image size-large"><img loading="lazy" decoding="async" width="740" height="592" src="http://www.livehalchal.com/wp-content/uploads/2021/01/jkkj.jpg" alt="" class="wp-image-408775" srcset="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2021/01/jkkj.jpg 740w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2021/01/jkkj-300x240.jpg 300w" sizes="auto, (max-width: 740px) 100vw, 740px" /></figure>



<p>मकर-संक्रांति का पर्व 14 जनवरी 2021 को मनाया जाएगा। इस दिन सूर्यदेव अपनी राशि परिवर्तन कर प्रात: 8 बजकर 05 मिनट परमकर राशि में प्रवेश करेंगे। सूर्य के मकर राशि में प्रवेश करते ही देशभर में मकर-संक्रांति के पर्व का शुभारंभ हो जाएगा।</p>



<p><strong>मकर-संक्रांति का पुण्यकाल-</strong></p>



<p>वर्ष 2021 में मकर-संक्रांति का पुण्यकाल प्रात: 8 बजकर 05 मिनट से रात्रि 10 बज कर 46 मिनट तक रहेगा।<br><strong>संक्रांति का वाहन-</strong><br>वर्ष 2021 में संक्रांति का वाहन सिंह (व्याघ्र) एवं उपवाहन गज (हाथी) रहेगा। इस वर्ष संक्रांति का आगमन श्वेत वस्त्र व पाटली कंचुकी धारण किए बालावस्था में हो रहा है। संक्रांति कस्तूरी लेपन कर गदा आयुध (शस्त्र) लिए स्वर्णपात्र में अन्न भक्षण करते हुए आग्नेय दिशा को दृष्टिगत किए पूर्व दिशा के ओर गमन करते आ रही है।<br></p>



<p><strong>इस दिन करते हैं ये 4 काम<br></strong><br><strong>1.सूर्य आराधना का दिन :</strong> इस दिन सूर्य उत्तरायण होता है। चन्द्र के आधार पर माह के 2 भाग हैं- कृष्ण और शुक्ल पक्ष। इसी तरह सूर्य के आधार पर वर्ष के 2 भाग हैं- उत्तरायन और दक्षिणायन। इस दिन से सूर्य उत्तरायन हो जाता है। उत्तरायन अर्थात उस समय से धरती का उत्तरी गोलार्द्ध सूर्य की ओर मुड़ जाता है, तो उत्तर ही से सूर्य निकलने लगता है। इसे सोम्यायन भी कहते हैं। 6 माह सूर्य उत्तरायन रहता है और 6 माह दक्षिणायन। अत: यह पर्व &#8216;उत्तरायन&#8217; के नाम से भी जाना जाता है। मकर संक्रांति से लेकर कर्क संक्रांति के बीच के 6 मास के समयांतराल को उत्तरायन कहते हैं। इस दिन से दिन धीरे-धीरे बड़ा होने लगता है और रातें छोटी।</p>



<p><strong>2. पतंग महोत्सव का पर्व :</strong> यह पर्व &#8216;पतंग महोत्सव&#8217; के नाम से भी जाना जाता है। पतंग उड़ाने के पीछे मुख्य कारण है कुछ घंटे सूर्य के प्रकाश में बिताना। यह समय सर्दी का होता है और इस मौसम में सुबह का सूर्य प्रकाश शरीर के लिए स्वास्थवर्द्धक और त्वचा व हड्डियों के लिए अत्यंत लाभदायक होता है। अत: उत्सव के साथ ही सेहत का भी लाभ मिलता है।<br><strong>3. स्नान, दान, पुण्य और पूजा :</strong> माना जाता है कि इस दिन सूर्य अपने पुत्र शनिदेव से नाराजगी त्यागकर उनके घर गए थे इसलिए इस दिन पवित्र नदी में स्नान, दान, पूजा आदि करने से पुण्य हजार गुना हो जाता है। इस दिन विशेष तौर पर गायों को हरा चारा खिलाया जाता है। इस दिन गंगासागर में मेला भी लगता है। इसी दिन मलमास भी समाप्त होने तथा शुभ माह प्रारंभ होने के कारण लोग दान-पुण्य से अच्छी शुरुआत करते हैं। इस दिन को सुख और समृद्धि का माना जाता है।</p>



<p><strong>4. तिल गुड़ खाना : </strong>सर्दी के मौसम में वातावरण का तापमान बहुत कम होने के कारण शरीर में रोग और बीमारियां जल्दी लगती हैं इसलिए इस दिन गुड़ और तिल से बने मिष्ठान्न या पकवान बनाए, खाए और बांटे जाते हैं। इनमें गर्मी पैदा करने वाले तत्वों के साथ ही शरीर के लिए लाभदायक पोषक पदार्थ भी होते हैं। उत्तर भारत में इस दिन खिचड़ी का भोग लगाया जाता है। गुड़-तिल, रेवड़ी, गजक का प्रसाद बांटा जाता है।</p>
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