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	<title>आर्थिक विकास &#8211; Live Halchal</title>
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	<title>आर्थिक विकास &#8211; Live Halchal</title>
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		<title>RBI गवर्नर दास: आर्थिक विकास मजबूत, महंगाई भी नियंत्रण में</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Live Halchal Web_Wing]]></dc:creator>
		<pubDate>Fri, 10 Nov 2023 06:25:25 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[कारोबार]]></category>
		<category><![CDATA[राष्ट्रीय]]></category>
		<category><![CDATA[आर्थिक विकास]]></category>
		<category><![CDATA[गवर्नर दास]]></category>
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					<description><![CDATA[<img width="503" height="483" src="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2023/11/bussniess-5-1.jpg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" fetchpriority="high" srcset="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2023/11/bussniess-5-1.jpg 503w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2023/11/bussniess-5-1-300x288.jpg 300w" sizes="(max-width: 503px) 100vw, 503px" />आरबीआई गवर्नर शक्तिकांत दास ने गुरुवार को कहा कि भारत में न केवल आर्थिक विकास में मजबूत आ रही है बल्कि विवेकपूर्ण नीति के चलते मुद्रास्फीति भी नियंत्रण में है। दास ने यह भी कहा कि केंद्रीय बैंक सतर्क है और मौद्रिक नीति महंगाई को रोकने के साथ विकास का भी समर्थन कर रही है। उन्होंने यह &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<img width="503" height="483" src="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2023/11/bussniess-5-1.jpg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" srcset="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2023/11/bussniess-5-1.jpg 503w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2023/11/bussniess-5-1-300x288.jpg 300w" sizes="(max-width: 503px) 100vw, 503px" />
<p>आरबीआई गवर्नर शक्तिकांत दास ने गुरुवार को कहा कि भारत में न केवल आर्थिक विकास में मजबूत आ रही है बल्कि विवेकपूर्ण नीति के चलते मुद्रास्फीति भी नियंत्रण में है। दास ने यह भी कहा कि केंद्रीय बैंक सतर्क है और मौद्रिक नीति महंगाई को रोकने के साथ विकास का भी समर्थन कर रही है। उन्होंने यह भी कहा कि युवा आबादी के साथ भारत वैश्विक विकास का नया इंजन बन गया है।</p>



<p>सरकार ने आरबीआई को यह सुनिश्चित करने का निर्देश दिया है कि उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (सीपीआई) पर आधारित मुद्रास्फीति दो प्रतिशत की घट-बढ़ के साथ चार प्रतिशत पर बनी रहे। टोक्यो स्थिति टोक्यो चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री में इंस्टीट्यूट आफ इंडियन इकोनॉमिक स्टडीज द्वारा भारतीय अर्थव्यवस्था पर आयोजित संगोष्ठी में दास ने कहा कि यह संतोष की बात है कि भारतीय अर्थव्यवस्था झटकों से पार पाने में कामयाब रही है।</p>



<p>कोरोना महामारी के बाद भारतीय अर्थव्यवस्था बहुत ही संतुलित रही है। उन्होंने कहा कि व्यापक आर्थिक बुनियादी सिद्धांतों को मजबूत करने पर नीतिगत फोकस और निरंतर सुधारों ने भारत के आर्थिक विकास को दुनियाभर में विशिष्ट बना दिया है। दास ने कहा कि 2023-24 की पहली तिमाही में जीडीपी में 7.8 प्रतिशत की वृद्धि हुई और जो संकेत मिल रहे हैं, उसके आधार पर यह कहा जा सकता है कि यह तेजी आगे भी बरकरार रहेगी। चालू वित्त वर्ष के लिए आरबीआई ने 6.5 प्रतिशत के विकास दर का अनुमान लगाया है।</p>



<h2 class="wp-block-heading">शीर्ष से 170 आधार अंक घट चुकी है</h2>



<p>खुदरा महंगाई मुद्रास्फीति का जिक्र करते हुए दास ने कहा कि मौद्रिक नीति समिति (एमपीसी) ने अपनी अक्टूबर की बैठक में 2023-24 के लिए सीपीआई मुद्रास्फीति 5.4 प्रतिशत रहने का अनुमान लगाया है, जो 2022-23 में 6.7 प्रतिशत से कम है। सितंबर में खुदरा महंगाई गिरकर तीन महीने के निचले स्तर पांच प्रतिशत पर आ गई है। अक्टूबर के आंकड़े 13 नवंबर को जारी किए जाएंगे। दास ने कहा कि जनवरी, 2023 में खुदरा महंगाई शीर्ष पर थी तब से लेकर अब तक इसमें 170 आधार अंकों की कमी आ चुकी है।</p>



<p>यूपीआई ने फिनटेक क्रांति में निभाई अभूतपूर्व भूमिका दास ने कहा कि यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (यूपीआई) ने भारत में फिनटेक क्रांति में अभूतपूर्व भूमिका निभाई है। इसकी सफलता की कहानी वास्तव में एक अंतरराष्ट्रीय मॉडल बन गई है। उन्होंने कहा कि मोबाइल एप्लिकेशन के माध्यम से बैंक खातों के बीच तुरंत धन हस्तांतरित करने की इसकी क्षमता ने लोगों के डिजिटल लेनदेन के तरीके को बदल दिया है। अब यूपीआई को अन्य देशों की भुगतान प्रणालियों के साथ जोड़ने का भी काम किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि फिनटेक द्वारा स्व-नियमन को प्रोत्साहित करने पर ध्यान केंद्रित किया गया है।</p>
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		<title>आर्थिक विकास को रफ्तार देने के लिए बजट में आम आदमी के किए जा सकते हैं</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Radha Rajpoot]]></dc:creator>
		<pubDate>Fri, 28 Jun 2019 09:35:15 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[कारोबार]]></category>
		<category><![CDATA[Budget 2019]]></category>
		<category><![CDATA[आम आदमी]]></category>
		<category><![CDATA[आर्थिक विकास]]></category>
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					<description><![CDATA[<img width="259" height="194" src="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2019/06/download-2019-06-28T150300.609.jpg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" />सरकार के आम बजट में की जाने वाली घोषणाओं को लेकर देश सभी वर्गों को जिज्ञासा रहती है कि आखिर उनके लिए क्या मिलने वाला है। इस दौरान किए जाने वाले प्रावधानों पर विदेशी निवेशकों की भी पैनी नजर रहती है। मोदी सरकार ने प्रचंड बहुमत के साथ सत्ता में वापसी की है। जाहिर है &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<img width="259" height="194" src="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2019/06/download-2019-06-28T150300.609.jpg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" loading="lazy" /><p><strong>सरकार के आम बजट में की जाने वाली घोषणाओं को लेकर देश सभी वर्गों को जिज्ञासा रहती है कि आखिर उनके लिए क्या मिलने वाला है। इस दौरान किए जाने वाले प्रावधानों पर विदेशी निवेशकों की भी पैनी नजर रहती है। मोदी सरकार ने प्रचंड बहुमत के साथ सत्ता में वापसी की है। जाहिर है तमाम लोगों को आगामी बजट से भारी उम्मीदें हैं। इन आकांक्षाओं को सरकार क्या पूरा कर पाएगी, निश्चित रूप से यह एक बड़ी चुनौती होगी। देश की प्रथम पूर्णकालिक महिला वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण वित्त वर्ष 2019-20 के लिए पूर्ण बजट पांच जुलाई को पेश करेंगी। यह उनका पहला बजट होगा। इससे एक दिन आर्थिक समीक्षा पेश की जाएगी। बजट की तैयारी के इन दिनों में वह तमाम पक्षों और उद्योग संगठनों के विचार जानने में जुटी हैं। विभिन्न क्षेत्रों के विशेषज्ञों के साथ भी विचार-विमर्श किया जा रहा है।</strong></p>
<p><img loading="lazy" decoding="async" class="aligncenter wp-image-249599 size-full" src="http://www.livehalchal.com/wp-content/uploads/2019/06/download-2019-06-28T150300.609.jpg" alt="" width="259" height="194" /></p>
<p><strong>यह बजट फरवरी माह में पेश किए गए अंतरिम बजट के अनुरूप ही रहने वाला है जिसे तत्कालीन वित्त मंत्री पीयूष गोयल ने पेश किया था। इतना तय है कि आगामी बजट में आर्थिक विकास को प्रोत्साहन देने वाले उपाय देखने को मिलेंगे। वित्तीय अनुशासन से समझौता किए बिना सीतारमण को अर्थव्यवस्था के सामने आने वाले अड़चनों, आर्थिक सुस्ती, रोजगार सृजन, निजी निवेश, ग्रामीण असंतोष और कृषि संकट के समाधान की दिशा में प्रयास करने होंगे। उन्हें ऐसा बजट पेश करना है जो न केवल समावेशी हो बल्कि तमाम क्षेत्रों में वृद्धि सुनिश्चित करने वाला हो। मौजूदा परिदृष्य को देखते हुए लगता है कि इस दौरान सरकार बजट से इतर भी कुछेक नीतियों और सुधारों की घोषणा कर सकती है।</strong></p>
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<div><strong>सरकार ने अधिसूचना जारी की थी कि उसने प्रधानमंत्री किसान योजना का लाभ सभी 14.5 करोड़ किसानों, भले ही उनके रकबे का आकार कुछ भी हो, तक पहुंचाने का फैसला किया है। बजट में फसल बीमा योजना में बदलाव जैसे कुछ अतिरिक्त उपायों की घोषणा भी की जा सकती है। साथ ही कृषि ऋण का प्रवाह बढ़ाए जाने की भी उम्मीद है। ये उपाय अल्पकालिक रूप से किसानों का असंतोष दूर करने में सहायक होंगे वहीं सिंचाई, शीत गृह निर्माण, खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्र में निवेश बढ़ाने में मददगार साबित होंगे। हालांकि, कृषि मंडी समिति कानून राज्यों का विषय है लेकिन इसमें दीर्घकालिक ढांचागत सुधार किया जाना जरूरी है। राष्ट्रीय कृषि बाजार की दिशा में कदम बढ़ाने के साथ ही समूचे भारत में कृषि बजारों को परस्पर जोड़ने की प्रक्रिया अपनाने से किसानों की आमदनी में इजाफा होगा। ऐसे में इन उपायों के लिए आवंटन बढ़ाया जाना समय की जरूरत है।</strong></div>
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</div>
<p><strong>देश की माली हालत में सुधार के लिए कृषि के साथ-साथ ढांचागत सुविधाओं के विकास पर ध्यान केंद्रित करने की जरूरत है। भारतमाला, सागरमाला, किफायती आवास, स्वच्छता, सभी को पेयजल, क्षेत्रीय हवाई अड्डे और नेशनल गैस ग्रिड प्रोजेक्ट के प्रोत्साहन के लिए नकद आवंटन में बढ़ोतरी की जा सकती है। उम्मीद है कि रेलवे के आधुनिकीकरण के लिए आवंटन बढ़ाया जाएगा। ढांचागत सुविधाओं पर व्यय बढ़ाए जाने से गुणात्मक प्रभाव पड़ता है। इसके अर्थव्यवस्था को गतिमान बनाने में मदद मिल सकती है।</strong></p>
<p><strong>हालिया आंकड़ों से पता चलता है कि निजी उपभोग पर खर्च में सुस्ती आई है। ऐसे में जरूरी है कि कारोबारियों और उपभोक्ताओं, दोनों की धारणा में सुधार हो। बजट में सरकार को इस दिशा में पहल करनी होगी। दरअसल, उपभोक्ता मांग गिरने से भारतीय वाहन उद्योग संकट का सामना कर रहा है। सभी वाहनों पर कराधान में कटौती की जरूरत है। इसके अलावा, इलेक्ट्रिक वाहनों को प्रोत्साहन के लिए बजट में प्रावधान किया जा सकता है।</strong></p>
<p><strong>आयुष्मान योजना मोदी सरकार के दूसरे कार्यकाल में भी शीर्ष प्राथमिकता में रह सकती है। इसका दायरा बढ़ाने के लिए सरकार स्वास्थ्य क्षेत्र के लिए बजट आवंटन बढ़ा सकती है।</strong></p>
<p><strong>पहले कार्यकाल में मोदी सरकार की बेरोजगारी के मुद्दे पर सबसे ज्यादा किरकिरी हुई है। ऐसे में रोजगार सृजन एक बड़ी चुनौती है। इसके लिए जरूरी है कि कारोबारी सुगमता को बढ़ाया जाए ताकि एक ही छत के नीचे तमाम जरूरी मंजूरियां मिल सकें। इससे कारोबारियों को अनावश्यक विलंब से निजात मिल सकेगी। विसंगतियों से छुटकारा मिल सकेगा।</strong></p>
<p><strong>आयकर अधिनियम में कुछेक प्रक्रियाओं और प्रावधानों पर नए सिरे से ध्यान दिया जाना जरूरी है ताकि करदाताओं को कर अनुपालन के दौरान आने वाली समस्याओं से छुटकारा मिल सके। एमएसएमई को प्रोत्साहन की सख्त दरकार है। यदि इनके लिए न्यूनतम वैकल्पिक कर (मैट) समाप्त कर दिया जाए तो इससे  उपभोग बढ़ेगा और आर्थिक वृद्धि को रफ्तार मिलेगी। इसी प्रकार, भारत को प्रतिस्पर्धी बनने के लिए जरूरी है कि कॉरपोरेट टैक्स की दर में चरणबद्ध कटौती करके उसे 20 फीसद से कम के स्तर पर लाया जाए। </strong></p>
<p><strong>चूंकि प्रत्यक्ष कर सुधार संबंधी समिति को अभी अपनी अंतिम रिपोर्ट प्रस्तुत करनी है इसलिए संभव है कि इस साल के बाद में करों के ढांचे में कुछ अहम बदलाव किए जाएं। व्यक्तिगत कर की दृष्टि से देखें तो इसमें ज्यादा बदलाव नहीं किया जाएगा। जीएसटी प्रणाली को सरल बनाने की सख्त जरूरत है। जीएसटी रिफंड के त्वरित पुनर्भुगतान से निर्यात को प्रोत्साहन और प्रक्रियाओं के सरलीकरण संबंधी पहल में सहायता मिलेगी। ढांचागत क्षेत्र की कंपनियों को टैक्स हॉलिडेज या छूट अथवा कटौती दिए जाने से निजी निवेश को प्रोत्साहन मिलेगा।</strong></p>
<p><strong>निजी खिलाड़ियों को प्रोत्साहन के लिए प्रावधानों से ढांचागत क्षेत्र में धन का प्रवाह बढ़ेगा। अभी वित्तीय तरलता का जो संकट बना हुआ है, उससे एमएसएमई और एनबीएफसी प्रभावित हो रहे हैं। आरबीआई नकदी बनाए रखने की प्राधिकार है। इसके अतिरिक्त कोष सरकार को स्थानांतरित किए जा सकते हैं। ऐसे में सार्वजनिक बैंकों के पुनर्पूंजीकरण या समावेशन संबंधी कोई घोषणा ऋण उपलब्धता में सहायक होगी।</strong></p>
<p><strong>कमजोर बैंकों को मजबूत किए जाने समेत वित्तीय और बैंकिंग सुधारों के लिए बजट कोई खाका पेश किया जाता है तो यह क्षेत्र भारतीय अर्थव्यवस्था के पांच खरब डॉलर की अर्थव्यवस्था बनने की दिशा में कारगर साबित हो सकता है। निजी कंपनियों की भागीदारी और इक्विटी पूंजी का प्रवाह बढ़ाने के लिए एलटीसीजी पर राहत और घोषित लाभांश पर कराधान में छूट का प्रावधान किया जाना चाहिए।</strong></p>
<p><strong>बजट में वित्तीय क्षेत्र की मजबूती के लिए वित्तीय साक्षरता कार्यक्रम को प्रभावी बनाने के लिए आवंटन होना चाहिए। ऋण बाजार और ईटीएफ की स्थापना, जीवन एवं स्वास्थ्य बीमा के पृथक प्रावधानों, लघु बचत योजनाओं और इक्विटी टैक्स बचत योजनाओं तथा पूंजी बाजार में लाभांशों पर करों व एसटीटी, एलटीसीजी को युक्तिसंगत बनाए जाने से पूंजी बाजार और नकदी के प्रवाह को मजबूती मिलेगी। होम लोन पर ब्याज में कटौती संबंधी बजटीय व्यवस्था एक सराहनीय पहल होगी। हाउसिंग सेक्&#x200d;टर को प्रोत्साहन तथा करदाताओं को राहत देने के लिए आवास ऋण पर ब्याज में कटौती को तीन लाख रुपए तकबढ़ाया जा सकता है। प्रक्रियागत सुधारों तथा एकल खिड़की मंजूरियों के प्रोत्साहन तथा किफायती आवासन की परियोजनाओंको उद्योग का दर्जा दिए जाने से रियल्टी सेक्टर को यकीनन फायदा पहुंचेगा।</strong></p>
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