आरती – Live Halchal https://livehalchal.com Latest News, Updated News, Hindi News Portal Fri, 05 Dec 2025 04:31:51 +0000 en-US hourly 1 https://wordpress.org/?v=6.9.10 https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2023/10/cropped-Live-Halchal-512-32x32.jpg आरती – Live Halchal https://livehalchal.com 32 32 आज से हुई पौष माह की शुरुआत, करें ये विशेष आरती https://livehalchal.com/%e0%a4%86%e0%a4%9c-%e0%a4%b8%e0%a5%87-%e0%a4%b9%e0%a5%81%e0%a4%88-%e0%a4%aa%e0%a5%8c%e0%a4%b7-%e0%a4%ae%e0%a4%be%e0%a4%b9-%e0%a4%95%e0%a5%80-%e0%a4%b6%e0%a5%81%e0%a4%b0%e0%a5%81%e0%a4%86%e0%a4%a4/647055 Fri, 05 Dec 2025 04:31:49 +0000 https://livehalchal.com/?p=647055 आज से हिंदू पंचांग के दसवें महीने पौष मास की शुरुआत हो चुकी है। यह महीना 03 जनवरी 2026 तक रहेगा। पौष माह को सूर्य देव की पूजा-अर्चना के लिए खास माना गया है। इस पूरे माह में सूर्य देव को रोजाना अर्घ्य देने और उनकी पूजा करने से व्यक्ति को आरोग्य, मान-सम्मान और तेज …]]>

आज से हिंदू पंचांग के दसवें महीने पौष मास की शुरुआत हो चुकी है। यह महीना 03 जनवरी 2026 तक रहेगा। पौष माह को सूर्य देव की पूजा-अर्चना के लिए खास माना गया है। इस पूरे माह में सूर्य देव को रोजाना अर्घ्य देने और उनकी पूजा करने से व्यक्ति को आरोग्य, मान-सम्मान और तेज की प्राप्ति होती है। साथ ही इस दौरान पितरों का तर्पण करना भी बहुत अच्छा माना जाता है। पौष माह की शुरुआत के साथ अगर आप प्रतिदिन सूर्य देव और पितृ देव की आरती करते हैं, तो आपके घर में सुख-समृद्धि का वास होता है।

।।सूर्य देव की आरती।।
ॐ जय सूर्य भगवान, जय हो दिनकर भगवान।

जगत् के नेत्रस्वरूपा, तुम हो त्रिगुण स्वरूपा।

धरत सब ही तव ध्यान, ॐ जय सूर्य भगवान।।

।।ॐ जय सूर्य भगवान…।।

सारथी अरुण हैं प्रभु तुम, श्वेत कमलधारी। तुम चार भुजाधारी।।

अश्व हैं सात तुम्हारे, कोटि किरण पसारे। तुम हो देव महान।।

।।ॐ जय सूर्य भगवान…।।

ऊषाकाल में जब तुम, उदयाचल आते। सब तब दर्शन पाते।।

फैलाते उजियारा, जागता तब जग सारा। करे सब तब गुणगान।।

।।ॐ जय सूर्य भगवान…।।

संध्या में भुवनेश्वर अस्ताचल जाते। गोधन तब घर आते।।

गोधूलि बेला में, हर घर हर आंगन में। हो तव महिमा गान।।

।।ॐ जय सूर्य भगवान…।।

देव-दनुज नर-नारी, ऋषि-मुनिवर भजते। आदित्य हृदय जपते।।

स्तोत्र ये मंगलकारी, इसकी है रचना न्यारी। दे नव जीवनदान।।

।।ॐ जय सूर्य भगवान…।।

तुम हो त्रिकाल रचयिता, तुम जग के आधार। महिमा तब अपरम्पार।।

प्राणों का सिंचन करके भक्तों को अपने देते। बल, बुद्धि और ज्ञान।।

।।ॐ जय सूर्य भगवान…।।

भूचर जलचर खेचर, सबके हों प्राण तुम्हीं। सब जीवों के प्राण तुम्हीं।।

वेद-पुराण बखाने, धर्म सभी तुम्हें माने। तुम ही सर्वशक्तिमान।।

।।ॐ जय सूर्य भगवान…।।

पूजन करतीं दिशाएं, पूजे दश दिक्पाल। तुम भुवनों के प्रतिपाल।।

ऋतुएं तुम्हारी दासी, तुम शाश्वत अविनाशी। शुभकारी अंशुमान।।

।।ॐ जय सूर्य भगवान…।।

ॐ जय सूर्य भगवान, जय हो दिनकर भगवान।

जगत् के नेत्रस्वरूपा, तुम हो त्रिगुण स्वरूपा।स्वरूपा।।

धरत सब ही तव ध्यान, ॐ जय सूर्य भगवान।।

।।पितृ देव की आरती
जय जय पितर जी महाराज,

मैं शरण पड़ा तुम्हारी,

शरण पड़ा हूं तुम्हारी देवा,

रख लेना लाज हमारी,

जय जय पितृ जी महाराज, मैं शरण पड़ा तुम्हारी।।

आप ही रक्षक आप ही दाता,

आप ही खेवनहारे,

मैं मूरख हूं कछु नहिं जानू,

आप ही हो रखवारे,

जय जय पितृ जी महाराज, मैं शरण पड़ा तुम्हारी।।

आप खड़े हैं हरदम हर घड़ी,

करने मेरी रखवारी,

हम सब जन हैं शरण आपकी,

है ये अरज गुजारी,

जय जय पितृ जी महाराज, मैं शरण पड़ा तुम्हारी।।

देश और परदेश सब जगह,

आप ही करो सहाई,

काम पड़े पर नाम आपके,

लगे बहुत सुखदाई,

जय जय पितृ जी महाराज, मैं शरण पड़ा तुम्हारी।।

भक्त सभी हैं शरण आपकी,

अपने सहित परिवार,

रक्षा करो आप ही सबकी,

रहूं मैं बारम्बार,

जय जय पितृ जी महाराज, मैं शरण पड़ा तुम्हारी।।

जय जय पितर जी महाराज,

मैं शरण पड़ा हू तुम्हारी,

शरण पड़ा हूं तुम्हारी देवा,

रखियो लाज हमारी,

जय जय पितृ जी महाराज, मैं शरण पड़ा तुम्हारी।।

भगवान विष्णु की आरती (Lord Vishnu Aarti)
ॐ जय जगदीश हरे आरती

ॐ जय जगदीश हरे,

स्वामी जय जगदीश हरे ।

भक्त जनों के संकट,

दास जनों के संकट,

क्षण में दूर करे ॥

॥ ॐ जय जगदीश हरे..॥

जो ध्यावे फल पावे,

दुःख बिनसे मन का,

स्वामी दुःख बिनसे मन का ।

सुख सम्पति घर आवे,

सुख सम्पति घर आवे,

कष्ट मिटे तन का ॥

॥ ॐ जय जगदीश हरे..॥

मात पिता तुम मेरे,

शरण गहूं किसकी,

स्वामी शरण गहूं मैं किसकी ।

तुम बिन और न दूजा,

तुम बिन और न दूजा,

आस करूं मैं जिसकी ॥

॥ ॐ जय जगदीश हरे..॥

तुम पूरण परमात्मा,

तुम अन्तर्यामी,

स्वामी तुम अन्तर्यामी ।

पारब्रह्म परमेश्वर,

पारब्रह्म परमेश्वर,

तुम सब के स्वामी ॥

॥ ॐ जय जगदीश हरे..॥

तुम करुणा के सागर,

तुम पालनकर्ता,

स्वामी तुम पालनकर्ता ।

मैं मूरख फलकामी,

मैं सेवक तुम स्वामी,

कृपा करो भर्ता॥

॥ ॐ जय जगदीश हरे..॥

तुम हो एक अगोचर,

सबके प्राणपति,

स्वामी सबके प्राणपति ।

किस विधि मिलूं दयामय,

किस विधि मिलूं दयामय,

तुमको मैं कुमति ॥

॥ ॐ जय जगदीश हरे..॥

दीन-बन्धु दुःख-हर्ता,

ठाकुर तुम मेरे,

स्वामी रक्षक तुम मेरे ।

अपने हाथ उठाओ,

अपने शरण लगाओ,

द्वार पड़ा तेरे ॥

॥ ॐ जय जगदीश हरे..॥

विषय-विकार मिटाओ,

पाप हरो देवा,

स्वमी पाप(कष्ट) हरो देवा ।

श्रद्धा भक्ति बढ़ाओ,

श्रद्धा भक्ति बढ़ाओ,

सन्तन की सेवा ॥

ॐ जय जगदीश हरे,

स्वामी जय जगदीश हरे ।

भक्त जनों के संकट,

दास जनों के संकट,

क्षण में दूर करे ॥

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मासिक शिवरात्रि पर करें शिव-पार्वती की भव्य आरती https://livehalchal.com/%e0%a4%ae%e0%a4%be%e0%a4%b8%e0%a4%bf%e0%a4%95-%e0%a4%b6%e0%a4%bf%e0%a4%b5%e0%a4%b0%e0%a4%be%e0%a4%a4%e0%a5%8d%e0%a4%b0%e0%a4%bf-%e0%a4%aa%e0%a4%b0-%e0%a4%95%e0%a4%b0%e0%a5%87%e0%a4%82-%e0%a4%b6-4/644012 Tue, 18 Nov 2025 04:48:46 +0000 https://livehalchal.com/?p=644012 मासिक शिवरात्रि भगवान शिव को समर्पित है, जिसका पालन करने से सभी दुखों से मुक्ति मिलती है। यह शुभ तिथि इस बार मंगलवार यानी आज 18 नवंबर 2025 को पड़ रही है। इस व्रत को रखने से मनचाहा जीवन साथी मिलता है। साथ ही शिव कृपा मिलती है। ऐसे में इस दिन शिव जी और …]]>

मासिक शिवरात्रि भगवान शिव को समर्पित है, जिसका पालन करने से सभी दुखों से मुक्ति मिलती है। यह शुभ तिथि इस बार मंगलवार यानी आज 18 नवंबर 2025 को पड़ रही है। इस व्रत को रखने से मनचाहा जीवन साथी मिलता है। साथ ही शिव कृपा मिलती है। ऐसे में इस दिन शिव जी और माता पार्वती की विधिवत पूजा करें। उन्हें बिल्व पत्र, सफेद फूल, मिठाई अर्पित करें। अंत में भाव के साथ आरती करें, जो इस प्रकार हैं।

।।शिव जी की आरती।।
जय शिव ओंकारा ॐ जय शिव ओंकारा ।

ब्रह्मा विष्णु सदा शिव अर्द्धांगी धारा ॥ ॐ जय शिव…॥

एकानन चतुरानन पंचानन राजे ।

हंसानन गरुड़ासन वृषवाहन साजे ॥ ॐ जय शिव…॥

दो भुज चार चतुर्भुज दस भुज अति सोहे।

त्रिगुण रूपनिरखता त्रिभुवन जन मोहे ॥ ॐ जय शिव…॥

अक्षमाला बनमाला रुण्डमाला धारी ।

चंदन मृगमद सोहै भाले शशिधारी ॥ ॐ जय शिव…॥

श्वेताम्बर पीताम्बर बाघम्बर अंगे ।

सनकादिक गरुणादिक भूतादिक संगे ॥ ॐ जय शिव…॥

कर के मध्य कमंडलु चक्र त्रिशूल धर्ता ।

जगकर्ता जगभर्ता जगसंहारकर्ता ॥ ॐ जय शिव…॥

ब्रह्मा विष्णु सदाशिव जानत अविवेका ।

प्रणवाक्षर मध्ये ये तीनों एका ॥ ॐ जय शिव…॥

काशी में विश्वनाथ विराजत नन्दी ब्रह्मचारी ।

नित उठि भोग लगावत महिमा अति भारी ॥ ॐ जय शिव…॥

त्रिगुण शिवजीकी आरती जो कोई नर गावे ।

कहत शिवानन्द स्वामी मनवांछित फल पावे ॥ ॐ जय शिव…॥

।।माता पार्वती की आरती।।
जय पार्वती माता जय पार्वती माता

ब्रह्म सनातन देवी शुभ फल कदा दाता।

जय पार्वती माता जय पार्वती माता।

अरिकुल पद्मा विनासनी जय सेवक त्राता

जग जीवन जगदम्बा हरिहर गुणगु गाता।

जय पार्वती माता जय पार्वती माता।

सिंह को वाहन साजे कुंडल है साथा

देव वधुजहं गावत नृत्य कर ताथा।

जय पार्वती माता जय पार्वती माता।

सतयुग शील सुसुन्दर नाम सती कहलाता

हेमांचल घर जन्मी सखियन रंगराता।

जय पार्वती माता जय पार्वती माता।

शुम्भ निशुम्भ विदारेहेमांचल स्याता

सहस भुजा तनुधरिके चक्र लियो हाथा।

जय पार्वती माता जय पार्वती माता।

सृष्ट‍ि रूप तुही जननी शिव संग रंगराता

नंदी भृंगी बीन लाही सारा मदमाता।

जय पार्वती माता जय पार्वती माता।

देवन अरज करत हम चित को लाता

गावत दे दे ताली मन मेंरंगराता।

जय पार्वती माता जय पार्वती माता।

श्री प्रताप आरती मैया की जो कोई गाता

सदा सुखी रहता सुख संपति पाता।

जय पार्वती माता मैया जय पार्वती माता।

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इस आरती से करें काल भैरव देव को प्रसन्न https://livehalchal.com/%e0%a4%87%e0%a4%b8-%e0%a4%86%e0%a4%b0%e0%a4%a4%e0%a5%80-%e0%a4%b8%e0%a5%87-%e0%a4%95%e0%a4%b0%e0%a5%87%e0%a4%82-%e0%a4%95%e0%a4%be%e0%a4%b2-%e0%a4%ad%e0%a5%88%e0%a4%b0%e0%a4%b5-%e0%a4%a6%e0%a5%87/643011 Wed, 12 Nov 2025 04:53:27 +0000 https://livehalchal.com/?p=643011 मार्गशीर्ष माह के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि काल भैरव देव को समर्पित होता है। इस शुभ अवसर पर काल भैरव जयंती मनाई जाती है। सनातन शास्त्रों में निहित है कि अगहन माह के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि पर भगवान शिव के रौद्र रूप का अवतरण हुआ था। इसके लिए हर साल मार्गशीर्ष माह …]]>

मार्गशीर्ष माह के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि काल भैरव देव को समर्पित होता है। इस शुभ अवसर पर काल भैरव जयंती मनाई जाती है। सनातन शास्त्रों में निहित है कि अगहन माह के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि पर भगवान शिव के रौद्र रूप का अवतरण हुआ था। इसके लिए हर साल मार्गशीर्ष माह में काल भैरव जयंती मनाई जाती है।

पंचांग की गणना अनुसार इस साल बुधवार 12 नवंबर को काल भैरव जयंती है। इस मौके पर काल भैरव देव की विशेष पूजा की जाएगी। साथ ही विशेष कामों में सफलता और शुभता पाने के लिए साधक व्रत भी रखेंगे। काल भैरव देव की पूजा करने से जीवन में व्याप्त सभी प्रकार के काल, कष्ट, दुख और संकट दूर हो जाते हैं।

अगर आप भी काल भैरव देव की कृपा पाना चाहते हैं, तो कालाष्टमी के दिन भक्ति भाव से भगवान शिव के रौद्र रूप की पूजा करें। वहीं, पूजा का समापन भैरव जी की आरती से करें।

श्री भैरव जी की आरती
सुनो जी भैरव लाडले, कर जोड़ कर विनती करूं
कृपा तुम्हारी चाहिए , में ध्यान तुम्हारा ही धरूं

मैं चरण छूता आपके, अर्जी मेरी सुन सुन लीजिए
मैं हूँ मति का मंद, मेरी कुछ मदद तो कीजिए

महिमा तुम्हारी बहुत, कुछ थोड़ी सी मैं वर्णन करूं
सुनो जी भैरव लाडले…

करते सवारी श्वानकी, चारों दिशा में राज्य है
जितने भूत और प्रेत, सबके आप ही सरताज हैं |
हथियार है जो आपके, उनका क्या वर्णन करूं
सुनो जी भैरव लाडले…

माताजी के सामने तुम, नृत्य भी करते हो सदा
गा गा के गुण अनुवाद से, उनको रिझाते हो सदा
एक सांकली है आपकी तारीफ़ उसकी क्या करूँ
सुनो जी भैरव लाडले…

बहुत सी महिमा तुम्हारी, मेहंदीपुर सरनाम है
आते जगत के यात्री बजरंग का स्थान है
श्री प्रेतराज सरकारके, मैं शीश चरणों मैं धरूं
सुनो जी भैरव लाडले…

निशदिन तुम्हारे खेल से, माताजी खुश होती रहें
सर पर तुम्हारे हाथ रखकर आशीर्वाद देती रहे

कर जोड़ कर विनती करूं अरुशीश चरणों में धरूं
सुनो जी भैरव लाड़ले, कर जोड़ कर विनती करूं

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सीएम योगी ने मां पाटेश्वरी में उतारी आरती https://livehalchal.com/%e0%a4%b8%e0%a5%80%e0%a4%8f%e0%a4%ae-%e0%a4%af%e0%a5%8b%e0%a4%97%e0%a5%80-%e0%a4%a8%e0%a5%87-%e0%a4%ae%e0%a4%be%e0%a4%82-%e0%a4%aa%e0%a4%be%e0%a4%9f%e0%a5%87%e0%a4%b6%e0%a5%8d%e0%a4%b5%e0%a4%b0/642859 Tue, 11 Nov 2025 06:10:47 +0000 https://livehalchal.com/?p=642859 बलरामपुर जिले के तुलसीपुर में देवीपाटन मंदिर में मंगलवार की सुबह मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मां पांटेश्वरी की आरती उतारी। पूजा-अर्चना कर आशीर्वाद लिया। उन्होंने मंदिर की गोशाला में गायों को गुड़ चना व हरा चारा खिलाया। इसके साथ ही उन्होंने मंडल के जिलाधिकारियों से विकास के मुद्दे पर चर्चा की। मुख्यमंत्री ने जनप्रतिनिधियों से …]]>

बलरामपुर जिले के तुलसीपुर में देवीपाटन मंदिर में मंगलवार की सुबह मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मां पांटेश्वरी की आरती उतारी। पूजा-अर्चना कर आशीर्वाद लिया। उन्होंने मंदिर की गोशाला में गायों को गुड़ चना व हरा चारा खिलाया। इसके साथ ही उन्होंने मंडल के जिलाधिकारियों से विकास के मुद्दे पर चर्चा की। मुख्यमंत्री ने जनप्रतिनिधियों से भी भेंट की।

मुख्यमंत्री योगी ने सभी को विकास योजनाओं को तेजी से पूर्ण करने का निर्देश दिया। सोमवार की शाम को देवीपाटन मंदिर परिसर में आयोजित महंत महेंद्र नाथ योगी के 25 वीं पुण्यतिथि में आयोजित कार्यक्रम में शामिल हुए थे।

मुख्यमंत्री योगी मंदिर में रात्रि विश्राम के बाद मंगलवार की सुबह लखनऊ के लिए रवाना हो गए।

मुख्यमंत्री योगी जब भी मां पाटेश्वरी मंदिर में आते हैं तो गोसेवा भी करते हैं, उन्होंने गायों को गुड़ और चना भी खिलाया।

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संध्या अर्घ्य के समय करें ये विशेष आरती https://livehalchal.com/%e0%a4%b8%e0%a4%82%e0%a4%a7%e0%a5%8d%e0%a4%af%e0%a4%be-%e0%a4%85%e0%a4%b0%e0%a5%8d%e0%a4%98%e0%a5%8d%e0%a4%af-%e0%a4%95%e0%a5%87-%e0%a4%b8%e0%a4%ae%e0%a4%af-%e0%a4%95%e0%a4%b0%e0%a5%87%e0%a4%82/640169 Mon, 27 Oct 2025 04:50:23 +0000 https://livehalchal.com/?p=640169 छठ महापर्व का तीसरा दिन यानी संध्या अर्घ्य का समय सबसे महत्वपूर्ण होता है। इस दिन व्रती 36 घंटे के निर्जला व्रत के साथ, डूबते हुए सूर्य देव को जल में खड़े होकर अर्घ्य देती हैं। यह दिन आस्था और त्याग का प्रतीक है। इस पावन बेला में, अर्घ्य देने के बाद छठी मैया की …]]>

छठ महापर्व का तीसरा दिन यानी संध्या अर्घ्य का समय सबसे महत्वपूर्ण होता है। इस दिन व्रती 36 घंटे के निर्जला व्रत के साथ, डूबते हुए सूर्य देव को जल में खड़े होकर अर्घ्य देती हैं। यह दिन आस्था और त्याग का प्रतीक है। इस पावन बेला में, अर्घ्य देने के बाद छठी मैया की विशेष आरती करना न केवल पूजा को पूर्णता देता है, बल्कि छठी माता और सूर्य देव की असीम कृपा पाने का सबसे सरल उपाय भी है, तो आइए भाव के साथ आरती करते हैं

।।सूर्य देव की आरती।।

ॐ जय सूर्य भगवान, जय हो दिनकर भगवान।

जगत् के नेत्रस्वरूपा, तुम हो त्रिगुण स्वरूपा।

धरत सब ही तव ध्यान, ॐ जय सूर्य भगवान।।

।।ॐ जय सूर्य भगवान…।।

सारथी अरुण हैं प्रभु तुम, श्वेत कमलधारी। तुम चार भुजाधारी।।

अश्व हैं सात तुम्हारे, कोटि किरण पसारे। तुम हो देव महान।।

।।ॐ जय सूर्य भगवान…।।

ऊषाकाल में जब तुम, उदयाचल आते। सब तब दर्शन पाते।।

फैलाते उजियारा, जागता तब जग सारा। करे सब तब गुणगान।।

।।ॐ जय सूर्य भगवान…।।

संध्या में भुवनेश्वर अस्ताचल जाते। गोधन तब घर आते।।

गोधूलि बेला में, हर घर हर आंगन में। हो तव महिमा गान।।

।।ॐ जय सूर्य भगवान…।।

देव-दनुज नर-नारी, ऋषि-मुनिवर भजते। आदित्य हृदय जपते।।

स्तोत्र ये मंगलकारी, इसकी है रचना न्यारी। दे नव जीवनदान।।

।।ॐ जय सूर्य भगवान…।।

तुम हो त्रिकाल रचयिता, तुम जग के आधार। महिमा तब अपरम्पार।।

प्राणों का सिंचन करके भक्तों को अपने देते। बल, बुद्धि और ज्ञान।।

।।ॐ जय सूर्य भगवान…।।

भूचर जलचर खेचर, सबके हों प्राण तुम्हीं। सब जीवों के प्राण तुम्हीं।।

वेद-पुराण बखाने, धर्म सभी तुम्हें माने। तुम ही सर्वशक्तिमान।।

।।ॐ जय सूर्य भगवान…।।

पूजन करतीं दिशाएं, पूजे दश दिक्पाल। तुम भुवनों के प्रतिपाल।।

ऋतुएं तुम्हारी दासी, तुम शाश्वत अविनाशी। शुभकारी अंशुमान।।

।।ॐ जय सूर्य भगवान…।।

ॐ जय सूर्य भगवान, जय हो दिनकर भगवान।

जगत् के नेत्रस्वरूपा, तुम हो त्रिगुण स्वरूपा।स्वरूपा।।

धरत सब ही तव ध्यान, ॐ जय सूर्य भगवान।।

।छठी मैया की आरती।

जय छठी मैया ऊ जे केरवा जे फरेला खबद से, ओह पर सुगा मंडराए.

मारबो रे सुगवा धनुख से, सुगा गिरे मुरझाए..

जय छठी मैया…

ऊ जे सुगनी जे रोएली वियोग से, आदिति होई ना सहाय.

ऊ जे नारियर जे फरेला खबद से, ओह पर सुगा मंडराए..

जय छठी मैया…

मारबो रे सुगवा धनुख से, सुगा गिरे मुरझाए.

ऊ जे सुगनी जे रोएली वियोग से, आदित होई ना सहाय..

जय छठी मैया…

अमरुदवा जे फरेला खबद से, ओह पर सुगा मंडरराए.

मारबो रे सुगवा धनुख से, सुगा गिरे मुरझाए..

जय छठी मैया…

ऊ जे सुहनी जे रोएली वियोग से, आदित होई ना सहाय.

शरीफवा जे फरेला खबद से, ओह पर सुगा मंडराए..

जय छठी मैया…

मारबो रे सुगवा धनुख से, सुगा गिरे मुरझाए,

ऊ जे सुगनी जे रोएली वियोग से, आदित होई ना सहाय..

जय छठी मैया…

ऊ जे सेववा जे फरेला खबद से, ओह पर सुगा मंडराए.

मारबो रे सुगवा धनुख से, सुगा गिरे मुरझाए..

जय छठी मैया…

ऊ जे सुगनी जे रोएली वियोग से, आदित होई ना सहाय.

सभे फलवा जे फरेला खबद से, ओह पर सुगा मंडराए..

जय छठी मैया…

मारबो रे सुगवा धनुख से, सुगा गिरे मुरझाए.

ऊ जे सुगनी जे रोएली वियोग से, आदित होई ना सहाय..

जय छठी मैया…

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